PM Awas Yojana: अभी 1.08 करोड़ घर मिलेंगे, जानिए इस सरकारी योजना का लाभ कैसे उठाएं

PM Awas Yojana: केंद्र सरकार ने संसद में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की ताजा प्रगति रिपोर्ट दी है। इसमें गांव और शहर, दोनों योजनाओं की स्थिति बताई गई है। सरकार के मुताबिक, जुलाई 2026 तक PMAY-Gramin (PMAY-G) के तहत 3.10 करोड़ से ज्यादा और PMAY-Urban (PMAY-U) के तहत 99.07 लाख से ज्यादा घर बनकर लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं।

गांवों में कितने घर बने?

21 जुलाई को लोकसभा में सरकार ने बताया कि 4.18 करोड़ घरों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 3.92 करोड़ घरों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 3.10 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए लक्ष्य के मुकाबले करीब 1.08 करोड़ घर अभी बनने बाकी हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, FY22 से FY26 के बीच केंद्र सरकार ने PMAY-G के लिए ₹1,34,242.45 करोड़ जारी किए। वहीं, FY27 के लिए शुरुआती तौर पर ₹41,924.60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राज्यों को दिए जाने वाले लक्ष्य के हिसाब से इस रकम में बदलाव भी हो सकता है।

घर के साथ और क्या मिलता है?

PMAY-G में सिर्फ पक्का घर नहीं दिया जाता। दूसरी सरकारी योजनाओं का फायदा भी साथ में जोड़ा जाता है।

16 जुलाई तक 3.08 करोड़ घरों में शौचालय बनाए जा चुके हैं। 2.43 करोड़ घरों को पानी का कनेक्शन मिला है। 3.07 करोड़ घरों में बिजली पहुंच चुकी है। वहीं, 2.90 करोड़ परिवारों को LPG कनेक्शन भी दिया गया है। इसके अलावा 1.35 करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़ा गया है।

शहरों में भी सिर्फ घर बनाकर नहीं दिया जाता। घर के साथ पानी, बिजली, सड़क और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाता है।

लाभार्थियों का चयन कैसे होता है?

दोनों योजनाओं में पहले इच्छुक को घर के लिए आवेदन करना पड़ता है। फिर सरकार यह जांचती है कि आवेदक योजना की सभी शर्तें पूरी करता है या नहीं।

PMAY-G में गांव के जरूरतमंद परिवारों की पहचान सरकारी सर्वे के आधार पर की जाती है। देखा जाता है कि परिवार के पास पक्का घर है या नहीं और वह योजना की पात्रता में आता है या नहीं। पात्र पाए जाने पर उसका नाम लाभार्थी सूची में शामिल किया जाता है।

वहीं, PMAY-U में राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश पहले अपने इलाके में घरों की जरूरत का आकलन करते हैं। इसके बाद परियोजनाएं बनाकर केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं। आवेदन करने वाले लोगों के दस्तावेज और पात्रता की जांच होती है। जो लोग सभी शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें योजना का लाभ दिया जाता है।

PM Awas Yojana के लिए आवेदन कैसे करें?

अगर गांव में रहते हैं (PMAY-G)

  • सबसे पहले ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में संपर्क करें।
  • अगर आपके इलाके में Awaas+ सर्वे चल रहा है, तो उसमें अपना नाम दर्ज कराएं।
  • आधार कार्ड, बैंक खाते और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करें।
  • पात्रता की जांच के बाद आपका नाम लाभार्थी सूची में जोड़ा जाएगा।
  • मंजूरी मिलने पर घर बनाने के लिए किस्तों में पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा।

अगर शहर में रहते हैं (PMAY-U 2.0)

  • PMAY-U 2.0 की वेबसाइट या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर आवेदन करें।
  • पहले अपनी पात्रता जांचें।
  • इसके बाद आवेदन फॉर्म भरें।
  • आधार, आय प्रमाण पत्र, बैंक खाते और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करें।
  • आवेदन जमा होने के बाद उसकी जांच होगी।
  • पात्र पाए जाने पर योजना का लाभ मिलेगा और आवेदन की स्थिति ऑनलाइन भी देख सकेंगे।

घर बनने में कितना समय लगता है?

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मुताबिक, शहरों में एक आवास परियोजना पूरी होने में आमतौर पर 12 से 36 महीने लगते हैं। यह जमीन की उपलब्धता, जरूरी मंजूरियों, फंडिंग और परियोजना के आकार पर निर्भर करता है।

सरकार का कहना है कि मंजूर घर तय समय पर पूरे हों, इसके लिए लगातार निगरानी की जाती है। नियमित समीक्षा बैठकें होती हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रगति देखी जाती है। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की फील्ड विजिट भी कराई जाती है।

DDA फ्लैट में अब बिना अनुमति क्या-क्या बदल सकते हैं? जानिए रिनोवेशन के नए नियम

DDA फ्लैट में अब बिना अनुमति क्या-क्या बदल सकते हैं? जानिए रिनोवेशन के नए नियम

DDA renovation norms: राजधानी दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। DDA ने अपने फ्लैट्स में मरम्मत और रिनोवेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कई तरह के संशोधनों को मंजूरी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया है। इसी महीने से लागू हुई इस नई नीति के तहत अब फ्लैट मालिक बालकनी की रेलिंग/पैरापेट बढ़ाने, घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग दीवार हटाने, दरवाजे शिफ्ट करने, लॉफ्ट बनाने, वाटरप्रूफिंग के साथ फ्लोरिंग बदलने और पीवीसी पानी की टंकी लगाने जैसे काम बिना DDA या नगर निगम की पूर्व अनुमति के करा सकेंगे।

अब बिना अनुमति के कर सकेंगे ये बदलाव

DDA अधिकारियों के मुताबिक संशोधित नीति के तहत ऐसे बदलावों को Condonable यानी स्वीकार्य कैटेगरी में रखा गया है। इनके लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

बालकनी और सुरक्षा: बेहतर सुरक्षा के लिए बालकनी के पैरापेट (रेलिंग) की ऊंचाई को ग्रिल या ग्लेजिंग लगाकर 5 फीट तक बढ़ाया जा सकता है।

बाउंड्री वॉल: वेंटिलेशन को बनाए रखते हुए फ्रंट और रियर आंगन की दीवारों को वायर फेंसिंग यानी जाली के जरिए 7 फीट तक ऊंचा किया जा सकता है।

दरवाजे बदलना या शिफ्ट करना: फ्रंट या रियर आंगन में नए दरवाजे लगाए जा सकते हैं या मौजूदा दरवाजों की जगह बदली जा सकती है, बशर्ते इससे आम रास्ता बाधित न हो।

दीवारें हटाना: रहने के लिए बड़ी जगह बनाने के उद्देश्य से घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग इंटरनल पार्टिशन वॉल (लगभग 4.5 इंच मोटी दीवार) को बिना अनुमति के हटाया जा सकता है।

इंटीरियर और यूटिलिटी अपग्रेड: इसके तहत सामान रखने के लिए लॉफ्ट बनाना, वाटरप्रूफिंग ट्रीटमेंट के साथ फ्लोरिंग (फर्श) बदलना और ग्राउंड फ्लोर या गैरेज लेवल पर अतिरिक्त पीवीसी (PVC) पानी की टंकियां लगाना शामिल है। इनके लिए अब पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।

DDA ने क्यों बदले 2007 से चले आ रहे नियम?

DDA अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की कई हाउसिंग सोसायटी दशकों पहले बनी थीं। तब परिवारों की जरूरतें आज से अलग थीं। समय के साथ इनमें रहने वाले लोगों को स्टोरेज, वेंटिलेशन या स्पेस का सही इस्तेमाल करने के लिए मामूली बदलाव करने पड़ते थे लेकिन छोटे-छोटे काम के लिए भी मंजूरी लेने में लंबा समय लगता था और शिकायतें बढ़ती थीं।

एक वरिष्ठ DDA अधिकारी ने बताया कि DDA फ्लैटों में बदलाव और रिनोवेशन को नियंत्रित करने वाली नीति में लगभग दो दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ था। 2007 के बाद यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने नीति में संशोधन किया है ताकि स्ट्रक्चरल सेफ्टी को नुकसान पहुंचाए बिना घर मालिकों को सहूलियत दी जा सके।

उन्होंने कहा कि इस नई नीति का मकसद अस्पष्टता को खत्म करना है ताकि DDA का प्रवर्तन दल रूटीन होम इम्प्रूवमेंट की बजाय अवैध कब्जों और असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित कर सके।

किन बदलावों के लिए अभी भी अनिवार्य होगी मंजूरी?

DDA ने साफ किया है कि इस नीति का मतलब अनियंत्रित या अवैध निर्माण की छूट नहीं है। नीचे दिए गए बड़े और स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए औपचारिक अनुमति और प्रमाणन अनिवार्य रहेगा-

स्ट्रक्चरल बदलाव: फ्लैट के मुख्य ढांचे, एक्सटेंशन (विस्तार), बालकनी/छत को पूरी तरह ढकने या स्ट्रक्चरल सेफ्टी को प्रभावित करने वाले किसी भी काम के लिए DDA की मंजूरी लेनी होगी।

किचन और बाथरूम: रसोई या शौचालय में किया जाने वाला ऐसा बदलाव जो इमारत के ढांचे को प्रभावित करता हो।

ऐसे प्रस्तावों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से प्रमाण पत्र, निर्धारित शुल्क और कई मामलों में प्रभावित पड़ोसियों की सहमति जमा करनी होगी। कॉमन एरिया (साझा रास्तों) पर अवैध कब्जा करना, अतिरिक्त मंजिलें बनाना या लोड-बेयरिंग दीवारों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और ऐसा करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि DDA के इस फैसले से दिल्ली के पुराने आवासीय क्षेत्रों के फ्लैट मालिकों और संभावित खरीदारों को सबसे बड़ा फायदा होगा। द्वारका, वसंत कुंज, रोहिणी, पीतमपुरा, मयूर विहार और जनकपुरी जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित पुराने DDA फ्लैटों की रीसेल वैल्यू और मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। पहले खरीदार कानूनी मंजूरी के झंझट के कारण पुराने फ्लैट खरीदने से कतराते थे लेकिन अब वे कानूनी रूप से अपने हिसाब से फ्लैट को आधुनिक बना सकेंगे।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म राइज इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मोहित गावरी ने बताया कि, ‘पहले DDA फ्लैटों में हर छोटे बदलाव के लिए मंजूरी की जरूरत होती थी जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे और खरीदार हिचकिचाते थे। ये नए नियम उस अड़चन को दूर करते हैं और DDA घरों को बाजार में अधिक बिक्री योग्य बनाते हैं। स्थापित DDA कॉलोनियों में जहां नई हाउसिंग सप्लाई सीमित है, यह फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर रीसेल डिमांड और अच्छी कीमतें दिलाने में मदद करेगी।’

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नियमों में ढील मिलने के बाद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि फ्लैट मालिकों द्वारा रेनोवेशन कराने से आर्किटेक्ट्स, ठेकेदारों, इंटीरियर डिजाइनरों और रिनोवेशन कंपनियों के काम और गतिविधियों में तेजी आएगी।

DDA ने खोली द्वारका गोल्फ कोर्स की लाइफटाइम मेंबरशिप, सिर्फ 850 लोगों को मिलेगा मौका! फीस 3.5 लाख से स्टार्ट, ये है एलिजिबिलिटी

DDA Dwarka Golf Course Lifetime Membership: दिल्ली में रहने वाले गोल्फ के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन और बड़ा मौका सामने आया है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने द्वारका सेक्टर-24 में स्थित अपने 18-होल चैंपियनशिप गोल्फ कोर्स की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने का ऐलान किया है। बता दें कि यह देश का सबसे लंबा गोल्फ कोर्स है।

इसके लिए मेंबरशिप कल यानी 21 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है। अब तक DDA इस गोल्फ कोर्स के लिए केवल सीमित समय वाली मेंबरशिप ही ऑफर कर रहा था, लेकिन अब पहली बार लाइफटाइम मेंबरशिप दी जा रही है। आइए आपको बताते हैं कि इसकी फीस कितनी है, सीटें कितनी हैं और आप इसके लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं।

सिर्फ 850 लोगों को मिलेगा मौका, 2 कैटेगरी में बंटी हैं सीटें

DDA कुल मिलाकर 850 लाइफटाइम मेंबरशिप जारी करेगा। इसे पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है:

सरकारी कैटेगरी: इसके तहत 250 मेंबरशिप आरक्षित की गई हैं।

गैर-सरकारी कैटेगरी: इसके तहत आम जनता या कॉर्पोरेट जगत के लिए 600 मेंबरशिप उपलब्ध होंगी।

अगर किसी भी कैटेगरी में तय सीटों से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो मेंबरशिप का अलॉटमेंट कंप्यूटराइज्ड लकी ड्रा के जरिए पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।

फीस का पूरा स्ट्रक्चर

DDA ने लाइफटाइम मेंबरशिप के साथ-साथ 3 साल और 5 साल की शॉर्ट-टर्म मेंबरशिप के विकल्प भी खुले रखे हैं। फीस का पूरा ढांचा इस प्रकार है:

फीस का पूरा स्ट्रक्चर

फीस का पूरा स्ट्रक्चर

आवेदन करने का तरीका और जरूरी नियम

अगर आप इस शानदार गोल्फ कोर्स का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इन नियमों का ध्यान रखें:

  • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 से शुरू होगा और यह अगले दो महीनों तक खुला रहेगा।
  • आवेदन करने के लिए ₹2,500 की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन चुकानी होगी।
  • आवेदनों की जांच के बाद, जिन सफल आवेदकों को मेंबरशिप ऑफर की जाएगी, उन्हें 30 दिनों के भीतर पूरी मेंबरशिप फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।
  • एक आवेदक केवल एक ही फॉर्म भर सकता है। अगर किसी ने एक से ज्यादा आवेदन किए, तो उसका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया जाएगा।

क्यों खास है द्वारका का यह गोल्फ कोर्स?

साल 2024 में शुरू हुआ द्वारका सेक्टर-24 का यह गोल्फ कोर्स इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का है और इसमें वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं मौजूद हैं। 158 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस 18-होल गोल्फ कोर्स की लंबाई 7377 यार्ड है जो देश का सबसे लंबा गोल्फ कोर्स है।

इसमें 375 यार्ड लंबी ड्राइविंग रेंज है, जिसमें 52 बे हैं। यह देश की सबसे लंबी ड्राइविंग रेंज है। भारत में पहली बार इसके फेयरवे के लिए नॉर्थ शोर एसएलटी घास का इस्तेमाल किया गया है।

यहां शानदार रेस्टोरेंट, कैफे, स्विमिंग पूल, सौना, स्टीम बाथ, कॉन्फ्रेंस हॉल, मल्टी-पर्पज हॉल, टेक स्टूडियो और इक्विपमेंट फिटमेंट स्टूडियो जैसी सुविधाएं हैं।

पानी के सही इस्तेमाल के लिए यहां कंप्यूटराइज्ड ऑटोमैटिक इरिगेशन सिस्टम, अंडरग्राउंड ड्रेनेज और वाटर कंजर्वेशन के लिए स्टॉर्म वाटर रीचार्ज वेल बनाया गया है। यहां एक गोल्फ एकेडमी भी बनाई जा रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में खेल के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने में DDA की बड़ी भूमिका रही है। वर्तमान में DDA के पास दिल्ली में 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 4 मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 पब्लिक गोल्फ कोर्स हैं।

ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

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DDA Karmayogi Awaas Yojana: अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं और देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आपके लिए बड़ी राहत दी है। डीडीए ने लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स की वजह से ‘कर्मयोगी आवास योजना’ 2025 के तहत रेडी-टू-मूव फ्लैट्स की बुकिंग की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है।

इस योजना के तहत पात्र आवेदकों को फ्लैट की कीमत पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जा रही है। योजना के अंतर्गत फ्लैट नरेला के पॉकेट-6, पॉकेट-9 और पॉकेट-13, सेक्टर A1-A4 में उपलब्ध हैं। इनका आवंटन फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS) यानी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

अब इच्छुक सेवारत एवं रिटायर सरकारी कर्मचारी 31 जुलाई 2026 तक इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। डीडीए के अनुसार, योजना को मिल रही बेहतर प्रतिक्रिया को देखते हुए आवेदन अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

25 फीसदी मिल रहा डिस्काउंट

इस योजना के तहत पात्र सरकारी कर्मचारियों को रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। ये फ्लैट दिल्ली के नरेला स्थित पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1 से A4 में उपलब्ध हैं। डीडीए ने स्पष्ट किया है कि फ्लैटों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ यानी ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में इच्छुक आवेदकों को समय रहते आवेदन और बुकिंग कराने की सलाह दी गई है।

योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को रियायती दरों पर तैयार आवास उपलब्ध कराना है। इच्छुक आवेदक डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट और E-सर्विस के पोर्टल पर जाकर योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। फिर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

किन्हें मिलेगा स्कीम का लाभ?

यह योजना केवल केंद्र और राज्य सरकार के सेवारत एवं रिटायर कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB), स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थानों और सरकारी विश्वविद्यालयों के नियमित कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लिए है। संविदा, अस्थायी या एडहॉक कर्मचारी इसके लिए पात्र नहीं हैं।

फ्लैट की कीमत कितनी है?

25% छूट के बाद अनुमानित शुरुआती कीमतें इस प्रकार हैं:-

1 BHK: लगभग ₹33.5 लाख से शुरू

2 BHK: लगभग ₹75.5 लाख से

3 BHK: लगभग ₹1.06 करोड़ से शुरू

(फ्लैट रेडी-टू-मूव हैं। इनके साथ पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।)

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक आवेदक DDA के आवास पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध फ्लैट का चयन कर बुकिंग राशि जमा करनी होगी। चूंकि आवंटन FCFS आधार पर होगा, इसलिए पसंदीदा फ्लैट पहले बुक करने वाले को मिलेगा।

स्कीम की बड़ी बातें

  • आवेदन की आखिरी तारीख अब 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई है।
  • 25% विशेष छूट केवल सेवारत और रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
  • रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट उपलब्ध है।
  • स्थान: नरेला, पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1-A4।
  • फ्लैट का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ के आधार पर होगा।

DDA Dwarka Commercial Hub Plan: दिल्ली का अगला ‘गुड़गांव’ बनेगा द्वारका! डीडीए बनाएगा मेगा इकोनॉमिक हब, जानिए क्या है पूरा प्लान

DDA Dwarka Plan: दिल्ली का द्वारका उप-शहर आने वाले समय में राजधानी का सबसे बड़ा बिजनेस और कमर्शियल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका को एक प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए उद्योग जगत के टॉप रिप्रेजेंटेटिव के साथ एक इंटरैक्टिव बैठक की अध्यक्षता की है। इस बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ किया कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए शहरी पुनर्विकास, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और योजना सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने द्वारका में एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और लेबर सेंट्रिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की वकालत की है। ऐसा सिस्टम जो लोकल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके।

एयरपोर्ट से नजदीकी और बेहतरीन कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

एलजी ने कहा रि एशिया की सबसे बड़ी प्लांड सब सिटी में से एक होने की वजह से द्वारका इन्वेस्टमेंट के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के लिए सही स्थिति में है। इसकी कनेक्टिविटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से काफी आसान है। यहां मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। एलजी ने स्पष्ट किया कि द्वारका पूरी तरह विकसित हो चुकी है। इस लिहाज से ये कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी जैसे अलग अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रदूषण मुक्त उद्योगों और रोजगार पर रहेगा मुख्य फोकस

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेष रूप से जोर दिया कि द्वारका का औद्योगिक विकास पूरी तरह से स्वच्छ, टिकाऊ और गैर-प्रदूषणकारी होना चाहिए। यहां ऐसे उद्योगों से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी जो उप-शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता करते हों।

एफएआर (FAR) मानदंडों की होगी समीक्षा, सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक में रीयल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ-साथ डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने हिस्सा लिया। उपराज्यपाल ने उद्योग जगत के रचनात्मक सुझावों की सराहना की और कहा कि उभरती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सहित योजना और विकास मानदंडों की समीक्षा और उन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने द्वारका और दिल्ली में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाएं, एक सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म और सिंप्लिफाई अप्रूवल्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज, आईटी, आईटीईएस और जीसीसी को प्रोत्साहित करने के साथ यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे प्रमुख कन्वेंशन और एग्जीबिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

TOD पॉलिसी और 5-स्टार होटल

निवेश और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य के निवेश के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। हाल ही में उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तह टीओडी समिति पात्र परियोजनाओं के लिए सिंगल-पॉइंट और समयबद्ध मंजूरी की सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने आश्वासन दिया कि द्वारका और दिल्ली में निवेश के लिए बड़ा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार चल रहा है।

इसके तहत एक नई औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है और विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रियाओं को इंटिग्रेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन सचिव ने बताया कि दिल्ली की इवनिंग इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यटन को आकर्षित करने के लिए अर्बन डेस्टिनेशन डेवलप किए जा रहे हैं। आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने कहा कि दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइव-स्टार होटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विचार किया जा रहा है।

विकसित दिल्ली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उपराज्यपाल ने अंत में दोहराया कि प्रशासन एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह केंद्रित है। यह पहल सतत विकास को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी और दिल्ली के विकसित दिल्ली बनने के सफर को और मजबूत करेगी।

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दिल्ली में DDA ने TOD प्रोजेक्ट्स के लिए खोला ऑनलाइन सिंगल-विंडो, अब इस 207 Sq Km क्षेत्र में मेट्रो-रैपिड रेल रूट के पास बनेंगे टावर्स और सस्ते घर

Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत जमीन विकसित करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डीडीए ने इसके लिए डेवलपर संस्थाओं को आमंत्रित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में तैयार की गई संशोधित टीओडी नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए डीडीए ने ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) के जरिए आवेदन प्रक्रिया को खोल दिया है। इस नीति के जरिए दिल्ली के एक बड़े हिस्से का कायाकल्प होगा और किफायती आवास के साथ-साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा।

दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा विकसित

DDA के मुताबिक इस नीति के लागू होने से दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर का एक विशाल क्षेत्र विकास के लिए खुल जाएगा। इस दायरे में मिक्स्ड लैंड यूज एरिया, ऑफिस स्पेस, गेस्ट हाउस और स्टूडियो अपार्टमेंट्स जैसे इंफ्रा डेवलप किए जा सकेंगे।

मेट्रो और रैपिड रेल रूट के पास क्या है योजना?

टीओडी नीति के तहत दिल्ली में परिवहन गलियारों के आसपास के क्षेत्रों को योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। मेट्रो कॉरिडोर की बात करें तो मेट्रो लाइनों के दोनों तरफ 500 मीटर का दायरा इसके लिए तय किया गया है। इसी तरह रैपिड रेल स्टेशनों के चारों तरफ 500 मीटर के रेडियस को नियोजित विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इसका उद्देश्य है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से किफायती आवास और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ लोगों के रहने की स्थिति बेहतर होगी बल्कि मेट्रो की राइडरशिप भी बढ़ेगी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अब सिंगल-विंडो क्लीयरेंस

डीडीए ने बताया कि यह नीति ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देती है। इसके तहत परियोजनाओं की मंजूरी के लिए एक बेहद सरल और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था बनाई गई है। जमीन विकसित करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति या डेवलपर इकाई को शुल्क के साथ सिर्फ एक पॉइंट पर मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा। डेवलपर्स को अब दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली फायर सर्विस जैसी अलग अलग एजेंसियों के पास अलग से चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

TOD कमेटी करेगी फैसला

डेवलपर्स को सबसे पहले डीडीए के ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम के माध्यम से आवेदन करना होगा ताकि टीओडी समिति द्वारा टीओडी प्लॉटों को मंजूरी दी जा सके। यह समिति डीडीए के उपाध्यक्ष के तहत काम करती है। टीओडी समिति द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के बिल्डिंग प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए ओबीपीएस के माध्यम से डीडीए के पास जमा करना होगा।

मौजूदा और प्रस्तावित दोनों रूटों पर मिलेगी छूट

डीडीए के बयान के मुताबिक इस नीति में काफी फ्लेक्सिबिलिटी दी गई है। यह नीति अभी चालू मेट्रो कॉरिडोर और रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ भविष्य में प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के आसपास भी टीओडी विकास की अनुमति देती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के साथ-साथ ही इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे का विकास भी साथ के साथ हो सकेगा।

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DDA Housing Scheme: दिल्ली में अपना घर खरीदने का सुनहरा मौका! DDA दे रहा है बंपर डिस्काउंट पर फ्लैट्स, 30 जून से पहले ऐसे करें अप्लाई

DDA Housing Scheme 2026: अगर आप भी देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, लेकिन महंगी कीमतों की वजह से कदम पीछे खींच रहे थे, तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की दो जबरदस्त हाउसिंग स्कीम्स इस समय चालू हैं, जिनमें फ्लैट्स पर भारी छूट मिल रही है।

दोनों ही स्कीम्स में फ्लैट्स का अलॉटमेंट ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जा रहा है। यानी जो जितनी जल्दी आवेदन करेगा, उसकी घर पाने की उम्मीद उतनी ही ज्यादा होगी। इन दोनों स्कीम्स में अप्लाई करने की आखरी तारीख 30 जून 2026 है। आइए जानते हैं इन स्कीम्स की पूरी डिटेल और बुकिंग का तरीका।

स्कीम 1: डीडीए नागरिक आवास योजना 2026 (25% का फ्लैट डिस्काउंट)

यह स्कीम उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो किफायती दामों में फ्लैट चाहते हैं। इस योजना के तहत नरेला और सिरसपुर में फ्लैट्स पर सीधे 25% की भारी छूट दी जा रही है।

कहां और कितने फ्लैट्स हैं?: नरेला में कुल 3,245 फ्लैट्स उपलब्ध हैं, जो सभी चार इनकम कैटेगरी- हायर इनकम ग्रुप(HIG), मिडल इनकम ग्रुप(MIG), लोअर इनकम ग्रुप(LIG) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग(EWS) के लिए हैं। इसके अलावा सिरसपुर में 411 LIG फ्लैट्स भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

रजिस्ट्रेशन फीस: अप्लाई करने के लिए आपको DDA के आवास पोर्टल पर जाना होगा और 2,500 रुपये की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।

कैटेगरी के हिसाब से बुकिंग अमाउंट

स्कीम 2: डीडीए टावरिंग हाइट्स कड़कड़डूमा 2026 (प्रीमियम लोकेशन)

यह स्कीम उन खरीदारों के लिए है जो पूर्वी दिल्ली में एक शानदार और कनेक्टेड लोकेशन पर घर चाहते हैं। कड़कड़डूमा में व्यक्तिगत खरीदारों के लिए 741 टू-बीएचके (2 BHK) फ्लैट्स उपलब्ध हैं। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के पहले ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका सीधा मतलब है कि आपको मजबूत मेट्रो और बेहतरीन रोड कनेक्टिविटी सीधे आपके दरवाजे पर मिलेगी।

पैसा देने का फॉर्मूला: इस स्कीम के लिए बुकिंग अमाउंट 4 लाख रुपये है। अलॉटमेंट के समय खरीदारों को फ्लैट की कुल कीमत का 75% हिस्सा एडवांस देना होगा और बाकी बचा 25% हिस्सा पजेशन के समय देना होगा।

स्कीम 1: डीडीए नागरिक आवास योजना 2026 (25% का फ्लैट डिस्काउंट)

DDA फ्लैट्स के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें?

आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान और पूरी तरह डिजिटल है:

  1. सबसे पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण के आधिकारिक DDA Awaas Portal पर जाएं।
  2. पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें और अपनी पसंद की स्कीम को चुनें।
  3. अपनी कैटेगरी के हिसाब से तय बुकिंग अमाउंट का ऑनलाइन भुगतान (Net Banking/UPI/Card) करें।
  4. मांगे गए जरूरी दस्तावेज जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड, इनकम प्रूफ आदि अपलोड करें और फॉर्म सबमिट कर दें।

काम की सलाह: चूंकि दोनों ही योजनाएं ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर चल रही हैं, इसलिए 30 जून की आखिरी तारीख का इंतजार बिल्कुल न करें। अपनी पसंद का फ्लैट लॉक करने के लिए तुरंत आवेदन करें।

Indian Citizenship Proof: ‘मेरे भारतीय होने का आखिर सबूत क्या है?’; पासपोर्ट को लेकर MEA के बयान से छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Indian Citizenship Proof: पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। MEA ने कहा है पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। यह एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण…। फिलहाल MEA के बयान ने एक बार फिर यह सवाल राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत और निर्विवाद सबूत क्या माना जाना चाहिए।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर भारतीय नागरिक होने का सबूत क्या माना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पहचान (Identity), निवास (Residence) और नागरिकता (Citizenship) तीन अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

लेकिन आम लोगों के लिए ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यही कारण है कि जब आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट की कानूनी स्थिति पर चर्चा होती है, तो नागरिकता को लेकर भ्रम और बहस पैदा हो जाती है।

सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन

MEA के बयान के बाद कई यूजर्स ने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी किया जाता है। ऐसे में यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा?

एक यूजर ने X पर लिखा, “अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, आधार नहीं है और वोटर आईडी भी नहीं है, तो फिर भारतीय होने का सबूत आखिर क्या है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “लगता है अब नागरिकता साबित करने के लिए माथे पर अपनी मातृभाषा में टैटू बनवाना पड़ेगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “MEA के मुताबिक पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है और सिर्फ यात्रा करने के लिए जारी किया गया डॉक्यूमेंट है। तो भाई, इतनी जांच के बाद पासपोर्ट जारी करते वक्त उसमें नेशनैलिटी के आगे जो इंडियन लिखा होता है वो फिर क्या देख के या चेक करके लिखा होता है? गजबे है।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने भी मजाकिया अंदाज में लिखा, “आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है…। लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते है। हर दस्तावेज…। अजब सिस्टम की गजब कहानी!”

आधार और वोटर आईडी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

पासपोर्ट को लेकर बहस ऐसे समय में सामने आई है जब अदालतें भी कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि कुछ दस्तावेज पहचान और निवास का प्रमाण तो हो सकते हैं। लेकिन नागरिकता का नहीं…। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आधार कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज माना था, लेकिन नागरिकता का नहीं। इसी तरह 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक कथित बांग्लादेशी नागरिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आधार कार्ड और वोटर आईडी अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

पासपोर्ट पर क्या लिखा होता है?

बहस के दौरान कई लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति (Property of the Government of India) है। सरकार के निर्देश पर इसे वापस लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने के लिए नागरिकता की जांच की जाती है। लेकिन इसका कानूनी उद्देश्य मुख्य रूप से यात्रा और अंतरराष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित करना है।

फिर नागरिकता कैसे साबित होती है?

भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक आधिकारिक ‘सिटिजनशिप कार्ड’ नहीं है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित नियमों के आधार पर किया जाता है। परिस्थिति के अनुसार नीचे दिए गए निम्न दस्तावेज नागरिकता संबंधी दावे को मजबूत कर सकते हैं:-

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता की नागरिकता संबंधी दस्तावेज
  • नागरिकता प्रमाण पत्र (यदि रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त हुई हो)
  • सरकारी रिकॉर्ड और अन्य वैधानिक दस्तावेज
  • अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण या अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।

E-पासपोर्ट पर सरकार का जोर

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सर्विस के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, चिप से लैस ई-पासपोर्ट (e-Passport) का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

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इन ई-पासपोर्ट में सुरक्षा तकनीक, बेहतर प्रमाणीकरण सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DigiLocker के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेगी।

DDA Housing Scheme 2026: दिल्‍ली की सस्ता फ्लैट लेने का सुनहरा मौका! पाएं 25% का विशेष डिस्काउंट, आज ही अपना ड्रीम होम बुक करें!

DDA Housing Scheme 2026: देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने नागरिक आवास योजना 2026 के तहत रेडी-टू-मूव फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत तक का स्पेशल डिस्काउंट देने की घोषणा की है। इच्छुक खरीदार ऑनलाइन बुकिंग के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। योजना के तहत आवासों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) आधार पर किया जाएगा। आवेदन की आखिरी तारीख 30 जून 2026 निर्धारित की गई है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी में किफायती और तैयार आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नागरिक आवास योजना 2026 को आकर्षक ऑफर के साथ पेश किया है। योजना के तहत पात्र खरीदारों को चयनित रेडी-टू-मूव फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जा रही है, जिससे घर खरीदने की लागत में बड़ी कमी आएगी।

DDA के अनुसार, योजना में शामिल सभी आवास तत्काल रहने योग्य हैं और खरीदारों को निर्माण पूरा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऑनलाइन अप्लाई और बुकिंग की सुविधा के कारण लोग घर बैठे ही अपनी पसंद के फ्लैट का चयन कर सकते हैं। यह योजना दिल्ली में घर खरीदने की इच्छा रखने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा अवसर मानी जा रही है।

तुरंत करें अप्लाई

योजना के तहत आवासों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। इसका मतलब है कि जो आवेदक पहले आवेदन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटित किए जाएंगे। ऐसे में इच्छुक लोगों को जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। DDA का कहना है कि सीमित संख्या में आवास उपलब्ध हैं। विशेष छूट का लाभ भी निर्धारित अवधि तक ही मिलेगा। नरेला और सिरसपुर में स्थित इन फ्लैट्स के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो चुकी है। आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) आधार पर किया जाएगा।

मीडियम क्लास के लोगों को लिए शानदार मौका

DDA की यह योजना खास तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे योजना की अंतिम तिथि 30 जून 2026 से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि वे रियायती दरों पर अपना घर खरीदने के अवसर का लाभ उठा सकें। सीमित संख्या में आवास उपलब्ध हैं। अपने सपनों का घर पाने का यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाने दें।

हाउसिंग स्कीम की बड़ी बातें

फ्लैट पर 25% तक का विशेष डिस्काउंट

रेडी-टू-मूव फ्लैट्स उपलब्ध

ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा

FCFS आधार पर आवंटन

सीमित संख्या में आवास

आवेदन की आखिरी तारीख: 30 जून 2026

कितने फ्लैट्स हैं?

DDA की हाउसिंग स्कीम 2026 के तहत राजधानी में विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 1,712 फ्लैट्स उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें नरेला में 1,301 और सिरसपुर में 411 फ्लैट्स शामिल हैं। फ्लैट्स की कैटेगरी संख्या देखें तो हाई इनकम ग्रुप (HIG) के 298, मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) के 459, लो इनकम ग्रुप (LIG) के 892 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 63 फ्लैट्स उपलब्ध हैं।

कीमत

कीमतों की बात करें तो EWS कैटेगरी के फ्लैट 9.60 लाख रुपये से शुरू होते हैं। LIG फ्लैट्स की कीमत 11.5 लाख से 15.3 लाख रुपये के बीच है। वहीं, MIG फ्लैट्स 66 लाख से 82 लाख रुपये और HIG फ्लैट्स 95 लाख रुपये से 1.13 करोड़ रुपये तक उपलब्ध हैं। बुकिंग के लिए आवेदकों को कैटेगरी के अनुसार एडवांस राशि जमा करनी होगी।

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HIG फ्लैट के लिए 10 लाख रुपये, MIG के लिए 4 लाख रुपये, LIG के लिए 1 लाख रुपये और EWS कैटेगरी के लिए 50 हजार रुपये बुकिंग अमाउंट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा सभी आवेदकों को DDA आवास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 2,500 रुपये की एकमुश्त और गैर-वापसी योग्य (नॉन-रिफंडेबल) फीस भी जमा करनी होगी। इच्छुक खरीदारों को लास्ट डेट से पहले आवेदन करने की सलाह दी गई है।