DDA Housing Scheme: दिल्ली में सिर्फ ₹35 लाख में घर खरीदने का मौका! DDA ने निकाली 209 EWS फ्लैटों की स्कीम, जानिए कौन कर सकता है आवेदन

DDA Housing Scheme in Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने राष्ट्रीय राजधानी में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक नई स्कीम शुरू की है। ‘जनता आवास योजना फेज-2’ के तहत 209 EWS फ़्लैट्स के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। इन फ़्लैट्स की कीमत लगभग ₹34.86 लाख से 35.50 लाख रुपये के बीच है। हालांकि, बेस प्राइस के अलावा GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज भी लग सकते हैं। इसलिए, आवेदन करने से पहले कुल लागत और स्कीम की शर्तों को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है और इसकी शर्तें क्या हैं।

कहां मिलेंगे ये फ्लैट

DDA की यह योजना दिल्ली के रोहतक रोड इलाके में झाखिरा फ्लाईओवर के पास स्थित प्रगति-1 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी है। इस योजना के तहत EWS कैटेगरी के कुल 209 फ्लैट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। फ्लैट लेने के इच्छुक लोगों को आवेदन करने से पहले लोकेशन और प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी भी देख लेनी चाहिए।

फ्लैट की कीमत क्या है?

इन फ्लैट्स की कीमत लगभग ₹34.86 लाख से 35.50 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। यह कीमत फ्लैट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज भी देने पड़ सकते हैं। इसलिए, खरीदारों को सिर्फ बेस प्राइस के आधार पर अपना बजट तय नहीं करना चाहिए कुल लागत का हिसाब लगाना जरूरी है।

कौन कर सकता है आवेदन

इस योजना में आवेदन के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। आवेदक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। योजना EWS कैटेगरी के लिए है, इसलिए परिवार की सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।आवेदन के लिए PAN कार्ड और अपने नाम का बैंक अकाउंट होना भी जरूरी है। इसके अलावा पात्रता से जुड़े जरूरी दस्तावेज और आय प्रमाण से संबंधित शर्तों को पूरा करना होगा।

आवेदन शुल्क कितना है?

इस DDA स्कीम के लिए आवेदन करने हेतु ₹2,500 का रजिस्ट्रेशन शुल्क आवश्यक है। यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा। इसलिए, आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता और दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक है।

कैसे होगा फ्लैट का आवंटन?

इन फ्लैट्स का आवंटन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर नहीं होगा। योग्य आवेदकों के बीच कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए फ्लैट का आवंटन किया जाएगा। इसका मतलब है कि आवेदन करने मात्र से फ्लैट मिलना तय नहीं है। पात्र आवेदकों में से ड्रॉ के जरिए चयन किया जाएगा।

आय प्रमाणपत्र की तारीख भी जरूरी

आवेदकों को आय और EWS स्टेटस से जुड़े दस्तावेजों की तारीखों पर भी ध्यान देना चाहिए। इस स्कीम के तहत, आय या EWS सर्टिफिकेट 7 दिसंबर, 2026 को या उससे पहले जारी किया गया होना चाहिए। इसलिए, पुराने या गलत तारीख वाले दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करने से पहले स्कीम की शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप इस स्कीम के तहत अप्लाई करने के बारे में सोच रहे हैं, तो सिर्फ फ्लैट की कीमत के आधार पर ही फैसला न करें। सबसे पहले GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज समेत कुल लागत को समझें। इसके अलावा, सालाना पारिवारिक आय, उम्र, PAN, बैंक अकाउंट की जानकारी और EWS कैटेगरी से जुड़े डॉक्युमेंट्स के मामले में अपनी पात्रता (eligibility) की जांच कर लें।

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DDA ने अप्लाई करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इच्छुक आवेदक DDA की ऑफिशियल वेबसाइट और संबंधित ई-सर्विसेज के जरिए स्कीम के बारे में पूरी जानकारी पा सकते हैं और अपना एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। अप्लाई करने से पहले नियम और शर्तें पढ़ना जरूरी है, क्योंकि पात्रता की शर्तों को पूरा न करने या जरूरी डॉक्युमेंट्स न होने पर आपके एप्लीकेशन पर बुरा असर पड़ सकता है।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF जवान ने साथियों पर की फायरिंग, असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 जवानों की मौत

4 CISF Jawans Dead: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मंगलवार (29 सितंबर) शाम केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक कर्मी ने अपने साथियों पर कथित तौर पर गोली चला दी। इस फायरिंग में असिस्टेंट कमांडेंट समेत सीआईएसएफ के चार कर्मियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना शाम करीब साढ़े सात बजे हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट बसोहली के मशका गांव स्थित सेवा-III हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में हुई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी हेड कांस्टेबल अभिदेश कुमार ने कुछ सहकर्मियों के साथ बहस के बाद अपनी सर्विस राइफल से कथित तौर पर गोलीबारी कर दी। अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी में सीआईएसएफ के चार कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में नजदीकी एनएचपीसी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और कांस्टेबल रफीक अहमद तथा संदीप कुमार के रूप में हुई है।

उन्होंने बताया कि गोलीबारी के बाद आरोपी को उसके सहकर्मियों ने काबू कर लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के तहत घटना में इस्तेमाल की गई सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई है। अधिकारियों ने कहा कि सीआईएसएफ और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि बहस और उसके बाद गोलीबारी की वजह बनी परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

जवानों के बीच हुआ था विवाद

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, घटना से पहले सेवा-III हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट यूनिट में जवानों के बीच किसी मुद्दे को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद कथित तौर पर हेड कांस्टेबल ने फायरिंग शुरू कर दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए CISF की ओर से आंतरिक जांच शुरू की जा रही है। जांच में गोलीबारी की वजह, जवानों के बीच हुए विवाद और घटना से पहले की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जाएगी। फिलहाल पुलिस और CISF की ओर से घटना से जुड़े अन्य डिटेल्स की जांच की जा रही है।

मुठभेड़ में LeT का मोस्ट-वॉन्टेड आतंकवादी मारा गया

इस बीच, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक सबसे वांछित आतंकवादी मंगलवार को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में मारा गया। कश्मीर स्थित चिनार कोर ने मारे गए आतंकवादी की पहचान का खुलासा नहीं किया। लेकिन अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ मूसा के रूप में की। सेना ने x पर पोस्ट किया कि उसने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था।

सेना ने कहा, “सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें एक आतंकवादी को मार गिराया गया।” अधिकारियों ने बताया कि अभियान अभी जारी है और इस दौरान वन क्षेत्र दूधपथरी में हुई मुठभेड़ में मूसा मारा गया।

उन्होंने कहा कि कई वर्षों से पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित मूसा इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था। अधिकारियों के अनुसार, उसका करीबी सहयोगी यासिर पांच सितंबर को हुई उस मुठभेड़ में मारा गया था। अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

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अब घर बैठे चेक करें अपनी जमीन और मकान का लैंड यूज! DDA ने लॉन्च किया GIS-आधारित डिजिटल मैप

Land use of House in Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी हासिल करना अब पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 (MPD-2047)’ के तहत तैयार लैंड यूज प्लान (Land Use Plan) को GIS आधारित इंटरएक्टिव डिजिटल मैप के रूप में उपलब्ध कराया है। इसके जरिए लोग घर बैठे किसी इलाके, जमीन या प्रॉपर्टी का निर्धारित लैंड यूज ऑनलाइन देख सकेंगे।

यह पहल दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से की गई है। अब सामान्य लैंड यूज संबंधी जानकारी के लिए लोगों को संबंधित सरकारी या स्थानीय निकाय कार्यालयों के चक्कर लगाने अथवा किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

प्लॉट लेवल तक देख सकेंगे जमीन का Land Use

DDA की ओर से उपलब्ध कराए गए इस डिजिटल मैप में यूजर किसी खास इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है। मैप पर धीरे-धीरे Zoom करते हुए प्लॉट लेवल तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद संबंधित जमीन का निर्धारित Land Use देखा जा सकता है। पारंपरिक 2D नक्शों के मुकाबले यह डिजिटल मैप अधिक डिटेल्स और लोकेशन-स्पेसिफिक जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे किसी प्रॉपर्टी के आसपास की जमीन का Land Use भी समझने में मदद मिलेगी।

9 प्रमुख Land Use कैटेगरी

DDA के इस लैंड यूज प्लान में दिल्ली की जमीन को नौ प्रमुख कैटेगरी में दिखाया गया है। इनमें शामिल हैं:-

  • Residential (आवासीय)
  • Commercial (व्यावसायिक)
  • Industrial (औद्योगिक)
  • Recreation (मनोरंजन)
  • Transport (परिवहन)
  • Utility (उपयोगिता सेवाएं)
  • Government (सरकारी)
  • Public and Semi-Public Facilities (सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक सुविधाएं)

    Agriculture & Water Body (कृषि एवं जल निकाय)

इन सभी कैटेगरी के लिए अलग-अलग कलर कोडिंग की गई है। इससे नक्शे पर किसी जमीन का निर्धारित उपयोग आसानी से पहचाना जा सकता है।

लैंड पूलिंग और TOD Zone की भी मिलेगी जानकारी

इस इंटरएक्टिव मैप में सिर्फ लैंड यूज की जानकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्लानिंग लेयर्स भी जोड़ी गई हैं। इनमें लैंड पूलिंग एरिया (Land Pooling Areas) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन प्रमुख हैं। इसके अलावा डिजिटल मैप पर द्वारका सब-सिटी, रोहिणी प्रोजेक्ट लेआउट, PM-UDAY कॉलोनियां, DDA के पार्क और अन्य महत्वपूर्ण थीमैटिक लेयर्स भी उपलब्ध हैं।

MPD-2047 लेयर के जरिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तावित लैंड यूज को देखा जा सकता है। जबकि लैंड पूलिंग और TOD लेयर से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन से इलाके इन प्लानिंग फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं या प्रस्तावित हैं।

मैप पर जमीन की लंबाई-चौड़ाई भी माप सकेंगे

डिजिटल मैप में यूजर्स के लिए मेजरमेंट (Measurement) और ड्राइंग/स्केचिंग टूल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। इनके जरिए किसी सड़क या प्लॉट की लंबाई, चौड़ाई अथवा दो स्थानों के बीच की दूरी को मैप पर मापा जा सकता है। यूजर अपनी जरूरत के अनुसार मैप पर मार्किंग या स्केच भी कर सकता है। यह सुविधा व्यक्तिगत संदर्भ, प्रारंभिक विश्लेषण और प्लानिंग के लिए उपयोगी हो सकती है।

लैंड यूज प्लान में समय के साथ किया जाएगा अपडेट

DDA के मुताबिक GIS आधारित लैंड यूज प्लान को इस तरह तैयार किया गया है कि नए डेटा उपलब्ध होने के साथ इसमें लगातार अपडेट किया जा सके। इससे दिल्ली में जमीन के इस्तेमाल और शहरी नियोजन से जुड़ी जानकारी को अधिक अपडेटेड और प्रासंगिक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे दिल्ली के बदलते शहरी स्वरूप के अनुसार प्लानिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी तरीके से अपडेट करने में भी सहायता मिलेगी।

सरकारी एजेंसियों को भी फायदा

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लैंड प्लान यूज से सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि शहरी योजनाकारों, आर्किटेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों, सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों को भी फायदा होगा। इस जानकारी का इस्तेमाल शुरुआती प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और विकास से जुड़े आकलन में किया जा सकेगा। DDA का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, योजना संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान होगी।

कैसे देख सकेंगे Land Use Plan?

DDA का GIS आधारित इंटरएक्टिव लैंड यूज प्लान उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Master Plan for Delhi-2047’ सेक्शन में उपलब्ध है। यहां जाकर यूजर किसी इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है और डिजिटल मैप पर उसका निर्धारित Land Use देख सकता है।

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DDA के मुताबिक इस पहल से दिल्ली के लोगों को जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी बुनियादी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, नियमित जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों के भौतिक दौरे की जरूरत कम होगी और दिल्ली में अधिक पारदर्शी, सूचित और तकनीक आधारित शहरी नियोजन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के लिए 6 MMI प्लान, मां आनंदमयी मार्ग एलिवेटेड रोड और मुकरबा चौक प्रोजेक्ट मंजूर, इनकी डिटेल जानिए

दिल्ली के उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में आज यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग) सेंटर (UTTIPEC) की 70वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई। इस दौरान, DMRC के छह MMI प्रोजेक्ट्स और PWD, GNCTD के दो सड़क प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की गई और उन्हें मंजूरी दी गई।

बता दें कि बैठक में DDA, GNCTD, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, DMRC, PWD, MCD, NDMC, भारतीय रेलवे, NCRTC और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इन 6 मेट्रो स्टेशनों के MMI प्लान को मिली मंजूरी

बैठक में मंजूर किए गए छह मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन (MMI) प्लान में येलो लाइन पर GTB नगर मेट्रो स्टेशन, वायलेट लाइन पर सरिता विहार मेट्रो स्टेशन, ब्लू लाइन पर अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन, रेड लाइन पर रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन/डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन, येलो लाइन पर मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन और रेड लाइन पर शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

300 मीटर के दायरे में सुधरेगी कनेक्टिविटी

MMI प्लान के तहत मेट्रो जैसे मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम स्टेशन के आसपास करीब 300 मीटर के क्षेत्र को कवर किया जाता है। इन प्लान का मकसद मेट्रो और RRTS जैसे ट्रांजिट स्टेशनों तक लोगों की पहुंच आसान बनाना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। इसके अलावा पैदल चलने की सुविधा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यात्रियों के लिए जरूरी दूसरी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है। बता दें कि DMRC ने दिल्ली में फेज-1 और फेज-2 के मेट्रो कॉरिडोर के 31 स्टेशनों के लिए MMI प्लान तैयार किए थे। इन छह प्लान को मंजूरी मिलने के साथ ही अब UTTIPEC ने सभी 31 MMI प्लान को मंजूरी दे दी है।

दक्षिणी दिल्ली में बनेगा 5.5 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

बैठक में मां आनंदमयी मार्ग पर आउटर रिंग रोड से महरौली-बदरपुर रोड तक प्रस्तावित छह लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही ओखला एस्टेट मार्ग पर क्राउन प्लाजा चौराहे के पास एक अंडरपास और गोलचक्कर (राउंडअबाउट) बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। दक्षिणी दिल्ली में बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 5.5 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर आउटर रिंग रोड को महरौली-बदरपुर रोड से जोड़ेगा।

मां आनंदमयी मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत

प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर, मां आनंदमयी मार्ग पर लगभग 12 चौराहों को बायपास करेगा। इसका मकसद ओखला फेज-1 और फेज-2 इंडस्ट्रियल एरिया से आने वाले मिले-जुले ट्रैफिक की वजह से होने वाली भीड़ को कम करना है। क्राउन प्लाजा चौराहे पर प्रस्तावित अंडरपास और गोलचक्कर से ओखला एस्टेट मार्ग पर गाड़ियों की भीड़ कम करने में और मदद मिलेगी। जमीन के स्तर पर ट्रैफिक कम होने से, इस प्रोजेक्ट के तहत मां आनंदमयी मार्ग पर पैदल चलने वालों और बिना मोटर वाले वाहनों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा भी मिलेगी।

मुकरबा चौक पर जाम कम करने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट

बैठक में मंजूर किया गया दूसरा रोड प्रोजेक्ट उत्तर-पश्चिम दिल्ली में मुकरबा चौक पर भीड़ कम करने से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट में आउटर रिंग रोड पर मौजूद रोड ओवर ब्रिज (ROB) को छह लेन से बढ़ाकर 10 लेन का करना हैं। इसके अलावा, दिल्ली-सोनीपत रेल लाइन के ऊपर जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने के लिए चार लेन का नया ROB बनाया जाएगा।

मौजूदा ROB को चौड़ा करने का मकसद मुकरबा चौक और मधुबन चौक के बीच आउटर रिंग रोड से सफर करने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है। वहीं, जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने वाली प्रस्तावित नई सड़क से मुकरबा चौक से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। इन प्रोजेक्ट्स से मुकरबा चौक के पास NH-44 पर भी ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से दिल्ली में सफर होगा आसान और सुरक्षित

बैठक में मंजूर किए गए इन सभी प्रोजेक्ट्स से मेट्रो स्टेशनों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पैदल चलने वालों के लिए आखिरी मील तक पहुंचना आसान और सुरक्षित होगा, और दिल्ली के कुछ अहम ट्रैफिक पॉइंट्स पर जाम कम होगा। सड़क से जुड़े इन उपायों से आने-जाने वालों के लिए सफर आसान होने की उम्मीद है, जबकि MMI प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आसपास के इलाकों के बीच कनेक्शन को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, ये उपाय दिल्ली के लोगों के लिए रोजाना के सफर को ज्यादा कुशल, सुरक्षित और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाने में मदद करेंगे।

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DDA World Tourism Day celebration: बांसेरा पार्क में 26-27 सितंबर को डीडीए मनाएगा विश्व पर्यटन दिवस, जानें क्या कुछ होगा खास

DDA World Tourism Day celebration: दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) 26 और 27 सितंबर को दिल्ली के सराय काले खां स्थित बांसेरा पार्क में वर्ल्ड टूरिज्म डे उत्सव का आयोजन करेगी। इस पर्यटन मेले का आयोजन दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों के तहत शहर को एक टिकाऊ पर्यटन और सोशियो-कल्चरल हब के तौर पर प्रोत्साहित करने के लिए किया जा रहा है। इसमें भारत के पर्यटन, कला, क्राफ्ट, खाने, संगीत और सांस्कृति की विविधता की झलक पेश की जाएगी।

बांसेरा पार्क को छह थीम वाले जोन में बांटा जाएगा। इसमें पहला हुनर गली होगा, जहां आर्टिस्ट परंपरागत कला और शिल्प पेश करेंगे। यहां पॉटरी, ब्लॉक प्रिंटिंग, चूड़ी बनाना, मेहंदी और मंडला आर्ट दिखेगी। इस जोन का मकसद आने वालों को इंटरैक्टिव गतिविधियों के जरिए पारंपरिक शिलप देखने का मौका देना है। इस मेले में दूसरा जोन यादों की गली का होगा, जो विजिटर्स को विंटेज-थीम वाले अनुभव के जरिए पुरानी यादों में ले जाएगा, जिसमें एक फोटो बूथ, पपेट शो और बायोस्कोप होगा। तीसरा जोन होगा बचपन की दुकान, जो बचपन की यादों पर फोकस करेगा।

विश्व पर्यटन मेले का एक और आकर्षण चिट्ठी घर होगा। इसमें विजिटर्स को पोस्टकार्ड लिखने और पोस्ट करने का अनुभव कराया जाएगा। इससे पोस्टकार्ड लिखने और भेजने का पारंपरिक तरीका वापस आएगा। एक अधिकारी ने कहा, “जहां बड़े लोग पुरानी यादें ताजा करेंगे, वहीं छोटे विजिटर्स को पारंपरिक कला और क्राफ्ट के बारे में पता चलेगा जो अब नहीं होते।”

विश्व पर्यटन मेला भारत के खानपान के लिए पूरा नहीं हो सकता है। खाना इस सेलिब्रेशन का एक बड़ा हिस्सा होगा। भारत के जायके नाम का एक सेक्शन कम से कम 10-12 राज्यों या इलाकों के खाने दिखाएगा। एक अधिकारी ने कहा, “यह जोन देश की अलग-अलग तरह की खाने की चीजों को दिखाएगा और विजिटर्स को अलग-अलग पारंपरिक खाने का स्वाद चखने का मौका देगा।”

बच्चों के लिए, मस्ती का अड्डा में राइड्स और दूसरी मजेदार एक्टिविटीज होंगी। एक अधिकारी ने कहा, “ये छह जोन विजिटर के अनुभव का एक जरूरी हिस्सा हैं।” एजेंसियों को शामिल करने के लिए टेंडरिंग प्रोसेस शुरू हो गया है।

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DDA का रक्षाबंधन पर बड़ा तोहफा! नरेला में 1,287 HIG और MIG फ्लैट्स पर 25% डिस्काउंट, 28 अगस्त से बुकिंग शुरू

दिल्ली में घर खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ी खुशखबरी दी है। रक्षाबंधन के मौके पर DDA ने नागरिक आवास योजना 2026 में बदलाव करते हुए नरेला में 1,287 और नए फ्लैट जोड़े हैं। इन घरों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। रक्षा बंधन से पहले की गई इस घोषणा से कम कीमत में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को फायदा मिल सकता है। फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोग 28 अगस्त 2026 से बुकिंग कर सकेंगे। आइए जानते है डीडीए की इस योजना के बारे में

डीडीए ने जोड़े 1,287 फ्लैट

DDA ने 18 अगस्त 2026 को एक सर्कुलर जारी कर ये जानकारी दी है। इस सर्कुलर में नरेला के सेक्टर A1-A4 के पॉकेट 3 और 4 में 1,287 फ्लैट जोड़ने की बात कही गई है। अथॉरिटी ने इन फ्लैटों की पूरी जानकारी के साथ उनकी छूट वाली कीमतों की लिस्ट भी जारी कर दी है। DDA की इस नई सूची में नरेला के सेक्टर A1-A4 के पॉकेट 3 और 4 के फ्लैट शामिल किए गए हैं। इनमें कुल 1,287 घर हैं, जिनमें 790 फ्लैट मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) के लिए और 497 फ्लैट हाई इनकम ग्रुप (HIG) के लिए रखे गए हैं। इससे अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को घर खरीदने का ऑप्शन मिलेगा।

कब से कर सकेंगे बुकिंग

DDA के नए फ्लैटों की बुकिंग 28 अगस्त को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इन फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। यानी जो पात्र लोग बुकिंग प्रक्रिया सबसे पहले पूरी करेंगे, उन्हें फ्लैट मिलने में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में घर खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए बुकिंग शुरू होते ही आवेदन करना फायदेमंद रहेगा।

25% की मिलेगी छूट

DDA ने नए फ्लैटों की पूरी जानकारी जारी कर दी है। इसमें फ्लैट की मंजिल, उसका आकार और 25 फीसदी छूट के बाद की कीमत बताई गई है। कई MIG फ्लैट 126 से 140 वर्ग मीटर के हैं, जिनकी छूट के बाद कीमत करीब 73.7 लाख से 81.8 लाख रुपये तक है। अथॉरिटी की जारी सूची में हर फ्लैट की छूट के बाद वाली कीमत अलग-अलग बताई गई है। इन फ्लैटों पर नागरिक आवास योजना 2026 के सभी नियम और शर्तें लागू होंगी।

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ऐतिहासिक रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा DDA, जानिए कितनी है इसकी फीस और कौन-कैसे कर सकता है अप्लाई

DDA Roshanara Club Lifetime Membership: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ऐतिहासिक डीडीए रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा है। कुल 750 सीटों के लिए यह मेंबरशिप स्कीम शुरू की जा रही है, जिसके जरिए दिल्लीवासियों को इस ऐतिहासिक क्लब की वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स, फिटनेस और रिक्रिएशनल सुविधाओं का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

अगर आप भी 100 साल से ज्यादा पुराने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े इस क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जानिए फीस, योग्यता और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

मेंबरशिप कैटेगरी और फीस स्ट्रक्चर

डीडीए की ओर से कुल 750 लाइफटाइम मेंबरशिप दो अलग-अलग श्रेणियों में दी जा रही हैं:

नॉन-गवर्नमेंट कैटेगरी: आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के लोगों के लिए कुल 400 सीटें रखी गई हैं। इसके लिए मेंबरशिप चार्ज ₹12.50 लाख + GST तय किया गया है।

गवर्नमेंट / पीएसयू कैटेगरी: सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 350 सीटें रिजर्व हैं। इसकी फीस ₹4 लाख + GST है।

कब से शुरू होंगे आवेदन और कैसे करें अप्लाई?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 28 अगस्त 2026 की रात 12:00 बजे से शुरू होगी।आवेदक 27 अक्टूबर 2026 (रात 11:59 बजे) तक अपना फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। इच्छुक लोग केवल डीडीए के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ही अप्लाई कर सकते हैं।

आधिकारिक लिंक: [https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx](https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx)

क्लब में मिलेंगी कौन-कौन सी स्पोर्ट्स सुविधाएं?

22 एकड़ में फैले हरे-भरे रोशनआरा क्लब में सदस्यों को इन खेलों और फिटनेस गतिविधियों की सुविधा मिलेगी:

आउटडोर व इनडोर गेम्स: मेन क्रिकेट पिच और प्रैक्टिस पिच, टेनिस, स्क्वॉश, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पिकलबॉल, बिलियर्ड्स और कार्ड रूम।

फिटनेस व स्विमिंग: स्विमिंग पूल, बच्चों के लिए टॉडलर पूल, मल्टी-जिम, फिटनेस सेंटर और योग क्लासेस।

कोचिंग फैसिलिटी: उभरते खिलाड़ियों के लिए योग्य कोचों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी दी जाएगी। साथ ही क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट्स और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी बुक किया जा सकेगा।

सोशल और क्लब हाउस सुविधाएं

स्पोर्ट्स के अलावा क्लब हाउस में सदस्यों के मनोरंजन और सोशल गैदरिंग के लिए ये सुविधाएं होंगी:

  • लाउंज, रेस्टोरेंट, कैफे और डाइनिंग एरिया
  • बार और बैंक्वेट सुविधाएं
  • किड्स जोन

क्या है रोशनआरा क्लब का इतिहास?

22 एकड़ का ऐतिहासिक परिसर और 100 साल से भी पुराना यह क्लब भारतीय क्रिकेट के शुरुआती इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस क्लब को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। डीडीए ने 29 सितंबर 2023 को इस ऐतिहासिक क्लब का आधिकारिक रूप से अधिग्रहण कर लिया था।

DDA रोशनआरा क्लब मेंबरशिप डिटेल्स

कुल उपलब्ध मेंबरशिप: 750

आम नागरिक फीस: ₹12.50 लाख + GST (400 सीटें)

सरकारी कर्मचारी फीस: ₹4.00 लाख + GST (350 सीटें)

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 28 अगस्त 2026

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर 2026

क्लब का कुल क्षेत्रफल: 22 एकड़

दिल्ली के उपराज्यपाल के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। दिल्ली के 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 गोल्फ कोर्स चलाने वाला DDA अब खेल प्रेमियों को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक क्लबों में से एक का हिस्सा बनने का यह सुनहरा मौका दे रहा है।

यमुना इवेंट केस में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ को बड़ी राहत, SC ने NGT का फैसला पलटा; ₹5 करोड़ लौटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को दिल्ली में 2016 में हुए ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ के दौरान यमुना के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को निर्देश दिया कि वह संगठन द्वारा जमा किए गए 5 करोड़ रुपये के पर्यावरण मुआवजे की रकम वापस करे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की अपील को मंजूरी दे दी। यह ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़ा एक रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल और यमुना के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के बीच सीधा संबंध था। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था को पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए पूरी तरह जिम्मेदार तभी ठहराया जा सकता है, जब उसके कथित काम और पर्यावरण को हुए नुकसान के बीच सीधा और स्पष्ट संबंध साबित हो।

कोर्ट ने यह भी पाया कि NGT ने अपील करने वाले को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया था और जरूरी जानकारी को नजरअंदाज किया था। कोर्ट ने ध्यान दिया कि कार्यक्रम स्थल पहले से ही जर्जर हालत में था।

सुप्रीम कोर्ट ने DDA की आलोचना की

‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यमुना के सक्रिय बाढ़-मैदान (फ्लडप्लेन) पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए DDA की आलोचना की।

कोर्ट ने कहा, “जिस तरह से DDA ने यमुना के सक्रिय बाढ़-मैदान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी, वह गलत था।”

कोर्ट ने पाया कि DDA बाढ़-मैदान की सुरक्षा की अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा और उस इलाके के लिए जिम्मेदार अथॉरिटी के तौर पर उस पर किए गए भरोसे का उल्लंघन किया।

हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि अपील में DDA द्वारा दी गई अनुमति की वैधता कोई मुद्दा नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने DDA को NGT के निर्देशों के अनुसार यमुना बाढ़-मैदान के पुनर्वास का काम जारी रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने देखा कि पुनर्वास का काम पहले ही शुरू हो चुका था और इसे जारी रखने का आदेश दिया।

5 करोड़ रुपये का मुआवजा कैसे तय हुआ

NGT ने दिसंबर 2017 में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ पर 5 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया था। यह मुआवजा 11 से 13 मार्च, 2016 तक हुए ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ की तैयारियों के दौरान फ्लडप्लेन (नदी के किनारे की जमीन) को हुए नुकसान के लिए लगाया गया था।

फेस्टिवल के पहले दिन, यानी 11 मार्च को, आयोजकों ने NGT से पूरी रकम जमा करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा। ट्रिब्यूनल ने उस दिन शुरुआती तौर पर 25 लाख रुपये जमा करने की इजाजत दी और बाकी बचे 4.75 करोड़ रुपये जमा करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया।

संगठन ने 25 लाख रुपये जमा कर दिए। इसके बाद उसने NGT से अनुरोध किया कि बाकी 4.75 करोड़ रुपये को भुगतान के बजाय बैंक गारंटी के रूप में स्वीकार किया जाए। संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया कि इस रकम का इस्तेमाल इलाके में बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के लिए किया जाए।

बाद में पूरी 5 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा कर दी गई। इसके बाद व्यक्ति विकास केंद्र ने NGT के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कर्नाटक जमीन अतिक्रमण मामला

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’, उससे जुड़ी संस्थाओं और अन्य लोगों पर बड़े पैमाने पर जमीन पर कब्जा करने के आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का सरकारी आदेश दिया गया था।

3 अगस्त को जस्टिस ई.एस. इंदिरेश ने ‘वेद विज्ञान महा विद्या पीठ ट्रस्ट’ (जो ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ से जुड़ी संस्था है) की याचिका पर एक अंतरिम आदेश पारित किया। इस ट्रस्ट ने SIT बनाने के 17 जुलाई, 2026 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी।

SIT को कग्गलिपुरा गांव के सर्वे नंबर 46 और आस-पास के इलाकों में कथित कब्जे की जांच का काम सौंपा गया था। इसमें कई अधिकारी शामिल थे, जिनमें बेंगलुरु डिवीजन के रीजनल कमिश्नर और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के कानूनी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे एक रिटायर्ड जिला जज शामिल थे।

SIT के खिलाफ तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट श्रीरंगा एस. ने तर्क दिया कि ट्रस्ट और ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ ने अपनी जमीन की ‘पोडी’ और ‘हुदबस्त’ (यानी सीमा तय करने और सर्वे) के लिए कई बार रेवेन्यू अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना जमीन की सीमाएं तय किए और कानून के मुताबिक संयुक्त सर्वे कराए सरकार यह नहीं कह सकती कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है।

एडवोकेट सुमना नागानंद के जरिए दायर याचिका में SIT बनाने के कानूनी आधार को चुनौती दी गई। इसमें तर्क दिया गया कि कर्नाटक लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1964 की धारा 195 सरकारी अधिकारियों को अपनी शक्तियां दूसरों को सौंपने की इजाजत तो देती है, लेकिन SIT बनाने का अधिकार नहीं देती।

याचिका में ‘कर्नाटक लैंड ग्रैबिंग प्रोहिबिशन एक्ट, 2011’ की धारा 8 का भी हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि यह कानून को लागू करने और उसका कामकाज देखने के लिए तहसीलदार के पद से नीचे के अधिकारी की नियुक्ति की इजाजत तो देता है, लेकिन सरकार को कोई जांच एजेंसी बनाने का अधिकार नहीं देता।

याचिकाकर्ता ने SIT में ‘शिरास्तेदारों’ (Shirastedars) को शामिल करने पर भी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून तहसीलदार के पद से नीचे के अधिकारियों की नियुक्ति की इजाजत नहीं देता। साथ ही, एक रिटायर्ड जिला जज को “लिटिगेशन मैनेजमेंट कंसल्टेंट” के तौर पर नियुक्त करने पर भी सवाल उठाए गए।

उचित प्रक्रिया पर सवाल

याचिका में दलील दी गई कि कर्नाटक लैंड ग्रैबिंग प्रोहिबिशन एक्ट के तहत बनाई गई विशेष अदालत के पास जमीन अतिक्रमण के मामलों पर सुनवाई शुरू करने का अधिकार है। इसके बावजूद सरकार ने उस अदालत में कार्रवाई शुरू किए बिना ही SIT का गठन कर दिया।

याचिका में रीजनल कमिश्नर अमलान आदित्य बिस्वास को SIT का प्रमुख बनाए जाने पर भी सवाल उठाया गया। सरकार के आदेश में बिस्वास की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। उन्होंने 7 जुलाई को सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि ट्रस्ट और अन्य लोगों ने प्रथम दृष्टया सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जिस अधिकारी ने पहले ही अतिक्रमण की बात कही है, उसी को SIT का प्रमुख बनाना पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।

सरकार के आदेश में सितंबर 2025 में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के एक आदेश का भी हवाला दिया गया था। इस आदेश में अधिकारियों को कथित अतिक्रमण के मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इसके बाद की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया गया।

कर्नाटक हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि कथित जमीन अतिक्रमण के मामले में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला पहले से अदालत में लंबित है।

कर्नाटक का यह मामला SIT के गठन की वैधता और जमीन से जुड़े आरोपों की जांच में राज्य सरकार की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया से जुड़ा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील का मामला 2016 के वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के दौरान यमुना के बाढ़ क्षेत्र को कथित नुकसान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग की जिम्मेदारी से जुड़ा था।

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Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के इन इलाकों में बदल जाएगी तस्वीर, 200 वर्ग किमी में नया शहर बसाने की तैयारी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

जानें इस विकास मॉडल के बारे में

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।

MPD-2047 के जरिए होगा विकास

दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।

बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा

MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।

20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित

MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन

लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।

40 लाख नए घर, 200 वर्ग किमी अर्बन एक्सपेंशन! दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की वो 18 बातें जो बदल देंगी राजधानी की पूरी तस्वीर

Delhi Master Plan 2047: देश की राजधानी दिल्ली के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य और बिजली मंत्री मनोहर लाल ने इस महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान का अनावरण किया। इस मास्टर प्लान में मौजूदा निर्मित क्षेत्रों (ब्राउनफील्ड) के पुनर्विकास और नए क्षेत्रों (ग्रीनफील्ड) के विकास के लिए दो अलग-अलग योजना दृष्टिकोण अपनाए गए हैं। आइए जानते हैं दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की वो 18 बड़ी बातें जो राजधानी की पूरी तस्वीर बदल कर रख देंगी।

1- 40 लाख से अधिक नए किफायती घर

भविष्य में सबके लिए घर हो, ये सपना दिल्ली मास्टर प्लान 2027 में देखा गया है। इसके लिए 40 लाख से अधिक नए किफायती मकान बनाए जाएंगे। इसके तहत ग्रुप हाउसिंग और डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम क्षेत्र की आवश्यकता को 40000 वर्ग मीटर से घटाकर 3000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। इससे करीब 7 लाख एक्स्ट्रा मकान बनेंगे। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन यानी मेट्रो कॉरिडोर के किनारे लगभग 18 लाख किफायती मकान बनेंगे।

झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टर के निवासियों के लिए इन-सिटू यानी वहीं पर पुनर्विकास के जरिए 17 लाख से अधिक लोगों को सम्मानजनक घर दिए जाएंगे। 5000 वर्ग मीटर या उससे बड़े औद्योगिक भूखंडों पर श्रमिकों के आवास के लिए 15% अतिरिक्त FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) मिलेगा। हाई डेंसिटी कॉरिडोर के पास भी किफायती घर बनेंगे। छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले समूहों के लिए किराये के मकानों को बढ़ावा देने के लिए 50% FAR प्रोत्साहन दिया जाएगा।

2- लैंड पूलिंग नीति से 200 वर्ग किमी में नया शहरी विस्तार

दिल्ली में लैंड पूलिंग नीति के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नया सुनियोजित शहरी विस्तार होगा। इससे करीब 12 लाख नए घर बनेंगे। इसमें 600 किमी लंबा सड़कों का नेटवर्क बनेगा। डीडीए खुद पहले ही 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कें बनाएगा। जमीन जुटाकर कम से कम 20 हेक्टेयर की योजनाओं के जरिए तेजी से विकास किया जाएगा। यूईआर-II के किनारे 250 मीटर चौड़े कॉरिडोर में 400 तक FAR के साथ हाई-डेंसिटी विकास होगा। गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव का सेक्टर 8B पहला अधिसूचित सेक्टर बन गया है जो लागू होने के लिए तैयार है।

3 – व्यापारिक और वाणिज्यिक स्थलों का कायाकल्प

व्यापारिक केंद्रों का पुनर्विकास अब न्यूनतम 1000 वर्ग मीटर के भूखंड पर प्रोत्साहन FAR के साथ करने की अनुमति होगी। इससे जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट के तहत ग्राउंड फ्लोर और स्टिल्ट वाले भवनों के पहले निचले फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी।

4- उद्योगों को बढ़ावा और आधुनिक सुविधाएं

औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक औद्योगिक पार्क तैयार किए जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े रिटेल स्टोर, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग, को-वर्किंग स्पेस और डेटा सेंटर खोलने की अनुमति दी जाएगी ताकि नए स्टार्टअप और इनोवेशन को सपोर्ट मिल सके।

5- दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

दिल्ली की करीब 1500 धरोहरों और ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान बनाया जाएगा। ऐतिहासिक चरित्र को बनाए रखते हुए इन इमारतों का उपयोग होटल, म्यूजियम, ऑफिस, लाइब्रेरी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करने की सुविधा मिलेगी। पहली बार हेरिटेज इंसेंटिव के तहत 50 TDR की व्यवस्था शुरू की गई है।

6- यमुना नदी का पुनरुद्धार और ग्रीन-ब्लू दिल्ली

यमुना नदी के करीब 1700 हेक्टेयर में फैले बाढ़ के मैदानों (फ्लडप्लेन्स) के संरक्षण और पारिस्थितिक सुधार के लिए 13 बड़ी परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इसके साथ ही यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित किया जाएगा।

7- नरेला बनेगा एजुकेशन हब

नरेला को वर्ल्ड क्लास एजुकेशन हब के रूप में बदला जाएगा। इसके लिए 138 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है, जहां सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज विकसित की जाएंगी।

8- द्वारका बनेगा नया इंटरनेशनल इन्वेस्ट-हब

द्वारका को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आईटी, स्टार्टअप्स, डेटा सेंटर और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

9- बेहतर और आसान परिवहन व्यवस्था

यूनिफाइड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ‘यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ बनाई जाएगी। मेट्रो, आरआरटीएस, बसों और पैदल चलने वालों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब बनेंगे। अंतर-राज्यीय और शहर के भीतर आवाजाही आसान करने के लिए UER-I, UER-II और UER-III का विस्तार होगा। इसके साथ ही पार्किंग की एकीकृत योजना और प्रबंधन के लिए नया फ्रेमवर्क लागू होगा।

10- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सरल नियम

व्यापार और जीवन को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन मंजूरी और सरल प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी। नियमों को बेहद आसान बनाते हुए उपयोग की श्रेणियों को 133 से घटाकर सिर्फ 45 कर दिया गया है। इसके अलावा आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नेगेटिव लिस्ट दृष्टिकोण लागू किया गया है, जिससे अधिक लचीलापन मिलेगा।

11- आसान पुनर्विकास रणनीति

प्लॉट-आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए 4 हेक्टेयर जमीन की न्यूनतम आवश्यकता की शर्त हटा दी गई है। कम से कम 1000 वर्ग मीटर के भूखंडों पर उच्च FAR इंसेंटिव देकर कमर्शियल रिडेवलपमेंट को प्रोत्साहित किया जाएगा।

12- 1511 अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

1511 अनधिकृत कॉलोनियों में बने आवासीय भवनों को ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर नियमित किया जाएगा। इसके लिए किसी लेआउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। इस प्रक्रिया के सरल होने से लगभग 45 लाख निवासियों को उनके मकानों का मालिकाना हक और सुरक्षा मिलेगी।

13- 24×7 जीवंत और सुरक्षित शहर

दिल्ली को सभी के लिए समावेशी, सुरक्षित और 24 घंटे (24×7) जीवंत शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए विशेष कल्चरल सर्किट बनाए जाएंगे।

14- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नेट जीरो डेवलपमेंट

यमुना को साफ रखने और जल गुणवत्ता सुधारने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा। ऊर्जा-कुशल इमारतों और कम कार्बन वाली शहरी योजना के जरिए नेट जीरो विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। छतों पर सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर रीसाइक्लिंग और कचरे से संसाधन बनाने की पहलों को लागू किया जाएगा।

15- टेक्नोलॉजी से संचालित प्रशासन

पारदर्शी, कुशल और डेटा-आधारित शहरी नियोजन के लिए जीआईएस आधारित प्लानिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

16- पार्क कनेक्टर्स और ग्रीन कवर का विस्तार

रीक्रिएशनल स्पेस तक लोगों के आसानी से जाने और यहां हरियाली बढ़ाने के लिए ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार होगा। अर्बन फॉरेस्ट (शहरी जंगल), बायोडायवर्सिटी पार्क और इकोलॉजिकल कॉरिडोर के माध्यम से दिल्ली के हरित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा।

17- मुख्य प्रशासनिक क्षेत्र का विकास

राजधानी के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को मजबूत किया जाएगा। कर्तव्य पथ का पुनरुद्धार कर उसे विश्वस्तरीय सार्वजनिक व सांस्कृतिक स्थल बनाया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 1.25 लाख वर्ग मीटर में युगे युगीन राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाएगा।

18- लो डेंसिटी वाले क्षेत्रों का नियोजित विकास

दिल्ली के सीमावर्ती गांवों और 23 अधिसूचित गांवों के करीब 150 वर्ग किलोमीटर के लो-डेंसिटी एरिया में सड़कों की कनेक्टिविटी के साथ आवासीय, मनोरंजक, जन-सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने वाला एक समान ढांचा लागू किया जाएगा।

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