New Tax Regime: अब 10 में 9 टैक्सपेयर्स चुन रहे हैं न्यू टैक्स रिजीम, जानिए 5 बड़े कारण

New Tax Regime: इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले ज्यादातर लोग न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल उनके पास रिटर्न फाइल करने वाले 80% से 95% तक टैक्सपेयर्स ने नया टैक्स सिस्टम चुना है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या लगातार बढ़ी है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं।

  1. टैक्स में ज्यादा राहत मिलने लगी

न्यू टैक्स रिजीम में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाई है। टैक्स स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा बढ़ाया गया है। इसी वजह से पहले के मुकाबले कई सैलरीड लोगों का टैक्स कम हो गया है।

ClearTax का कहना है कि कम टैक्स दरें, ज्यादा टैक्स रिबेट और बढ़ा हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बना रहे हैं।

2. कागजी झंझट लगभग खत्म

ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA, 80C, 80D और दूसरे डिडक्शन के लिए कई तरह के दस्तावेज संभालकर रखने पड़ते हैं। न्यू टैक्स रिजीम में इसकी जरूरत काफी कम हो जाती है। इसलिए ITR भरना भी आसान हो गया है।

SBHS & Associates के पार्टनर हिमांक सिंगला कहते हैं कि लोग अब सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश नहीं करना चाहते। आसान प्रक्रिया की वजह से वे तेजी से न्यू टैक्स रिजीम की तरफ बढ़ रहे हैं।

3. कम टैक्स रेट का फायदा

जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए न्यू टैक्स रिजीम सीधे टैक्स बचाने का मौका दे रही है। यही वजह है कि हर साल इसे चुनने वालों की संख्या बढ़ रही है।

HJ Aggarwal & Co. के पार्टनर सीए हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, इस साल उनकी फर्म के करीब 95% क्लाइंट्स ने न्यू टैक्स रिजीम चुनी है। पिछले साल यह आंकड़ा 70% से थोड़ा ज्यादा था, जबकि दो साल पहले सिर्फ 20% लोग इसे चुन रहे थे।

4. ITR फाइल करना पहले से आसान

न्यू टैक्स रिजीम में कम कैलकुलेशन और कम दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इससे रिटर्न जल्दी फाइल हो जाता है।

TaxSpanner के को-फाउंडर और CEO सुधीर कौशिक कहते हैं कि 12 लाख रुपये तक की आय वाले कई टैक्सपेयर्स सिर्फ इसलिए न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं क्योंकि इसमें दस्तावेज कम लगते हैं और पूरी प्रक्रिया आसान है।

5. फिर भी हर किसी के लिए सही नहीं

न्यू टैक्स रिजीम भले ही ज्यादातर लोगों की पहली पसंद बन गई हो, लेकिन हर टैक्सपेयर के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है। NA Shah Associates के पार्टनर गोपाल बोहरा का कहना है कि जिन लोगों को HRA, होम लोन के ब्याज, Chapter VI-A के तहत मिलने वाले डिडक्शन या दूसरे बड़े टैक्स बेनेफिट मिलते हैं, उनके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अब भी ज्यादा फायदे की हो सकती है।

वहीं, S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना भी सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपना टैक्स निकालकर जरूर देखें। अगर आपके पास HRA, होम लोन, NPS, PPF, EPF या दूसरे बड़े डिडक्शन हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आज भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

EPS Pension Calculation: 10 से 25 साल की नौकरी पर कितनी बनेगी मंथली पेंशन? 

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

महंगे पेट्रोल-डीजल से मिलेगी राहत! हर महीने ₹1000 की सीधी बचत, जानें RBL, HDFC और Axis के फ्यूल कार्ड्स में कौन है सबसे बेस्ट?

IndianOil Co-branded Credit Cards Comparison: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच हर कोई अपने फ्यूल खर्च पर कुछ न कुछ बचत करना चाहता है। ऐसे में बैंकों द्वारा जारी ‘फ्यूल को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स’ काफी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया और विज्ञापनों में दावा किया जा रहा है कि ‘इंडियन ऑयल के फ्यूल स्टेशनों पर ईंधन भराने पर 8.5% तक की एक्स्ट्रा बचत’ मिल सकती है।

क्या यह दावा वाकई सच है? इसका जवाब है- हां, यह पूरी तरह सच है, लेकिन यह लाभ केवल एक खास क्रेडिट कार्ड पर ही उपलब्ध है। मार्केट में इंडियन ऑयल के साथ तीन बड़े बैंकों HDFC Bank, Axis Bank और RBL Bank के क्रेडिट कार्ड उपलब्ध हैं।

8.5% बचत का पूरा गणित: RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card

फ्यूल पर 8.5% की सबसे ज्यादा बचत आपको RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card पर मिलती है। यह पूरे देश में किसी भी फ्यूल क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाली सबसे ऊंची सेविंग्स दरों में से एक है। बैंक के नियमों के अनुसार यह बचत दो हिस्सों में बंटी होती है:

7.5% फ्यूल वैल्यू-बैक: इस कार्ड से इंडियन ऑयल के आउटलेट्स पर प्रति ₹100 खर्च करने पर 15 फ्यूल पॉइंट्स मिलते हैं। चूंकि 1 फ्यूल पॉइंट की वैल्यू ₹0.50 (50 पैसे) होती है, इसलिए यह सीधे तौर पर 7.5% का वैल्यू-बैक बन जाता है।

1% फ्यूल सरचार्ज वेवर: ईंधन भराने पर लगने वाले 1% के सरचार्ज पर पूरी छूट मिलती है। जिससे कुल बचत: 7.5%+1%=8.5% हो जाती है।

कैपिंग और लिमिट: इस कार्ड में हर महीने अधिकतम 2,000 फ्यूल पॉइंट्स (यानी ₹1,000 मूल्य का ईंधन) ही कमाए जा सकते हैं। इस बचत का पूरा फायदा उठाने के लिए हर महीने अधिकतम ₹13,400 तक का फ्यूल इस कार्ड से भराना सबसे बेस्ट रहता है।

HDFC, Axis और RBL के इंडियन ऑयल कार्ड्स में अंतर

क्रेडिट कार्ड डेटा के आधार पर तीनों प्रमुख बैंकों के इंडियन ऑयल को-ब्रांडेड कार्ड्स की तुलना नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझी जा सकती है:

HDFC, Axis और RBL के इंडियन ऑयल कार्ड्स में अंतर

तीनों कार्ड्स की खास बातें और लिमिट

1. HDFC Bank IndianOil Credit Card

यह कार्ड उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनका मासिक फ्यूल खर्च ₹3,000 के आसपास रहता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह RuPay नेटवर्क पर उपलब्ध है, जिससे आप इसे अपने Google Pay, PhonePe या Paytm से लिंक करके किसी भी मर्चेंट को सीधे UPI पेमेंट कर सकते हैं। साथ ही ग्रोसरी और यूटिलिटी बिलों पर मिलने वाला 5% का लाभ इसे एक अच्छा ऑल-राउंडर बजट कार्ड बनाता है।

2. Axis Bank IndianOil Credit Card

इसमें आपको कुल 5% की बचत होती है और महीने में अधिकतम ₹200 तक का फ्यूल रिवॉर्ड मिल सकता है। यह कार्ड भी RuPay नेटवर्क पर आता है, जिससे यूपीआई ट्रांजैक्शन आसान हो जाते हैं। इसके अलावा अगर आप बाहर खाना खाने या मूवी टिकट (BookMyShow) बुक करने के शौकीन हैं, तो वहां मिलने वाला 15% का डिस्काउंट इसकी वैल्यू को काफी बढ़ा देता है।

3. RBL Bank IndianOil XTRA Credit Card

सबसे बड़ी खूबी है 8.5% की रिकॉर्डतोड़ बचत जो भारी फ्यूल खर्च करने वालों के लिए वरदान है। इसकी सालाना फीस ₹1,500 (प्लस जीएसटी) है, जो बाकी दोनों कार्ड्स से ज्यादा है। हालांकि, अगर आप सालभर में ₹2.75 लाख रुपये इस कार्ड से खर्च कर देते हैं, तो यह फीस पूरी तरह माफ हो जाती है।

आपके लिए कौन सा कार्ड रहेगा सबसे बेस्ट?

अगर आपका फ्यूल खर्च बहुत ज्यादा है (महीने का ₹8,000 से ₹13,000) तो बिना सोचे समझे RBL Bank IndianOil XTRA कार्ड चुनें, क्योंकि इसकी 8.5% की बचत आपकी सालाना फीस से कहीं ज्यादा पैसा आपको वापस दिला देगी।

Old vs New Tax Regime: ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम, किसमें बचेगा ज्यादा पैसा? ITR फाइल करने से पहले देखें ये गणित

अगर आपका बजट कम है और UPI पेमेंट की सुविधा चाहिए तो HDFC या Axis के इंडियन ऑयल कार्ड्स आपके लिए ज्यादा मुफीद रहेंगे, क्योंकि इनमें सालाना फीस कम है और यूपीआई पेमेंट का एक्स्ट्रा सपोर्ट मिलता है।

ITR Filing 2026: ₹12.75 लाख तक सैलरी है, फिर भी देना पड़ सकता है टैक्स! जानिए क्यों

ITR Filing 2026: न्यू टैक्स रिजीम में कई नौकरीपेशा लोगों को लगता है कि अगर उनकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो उन्हें कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं होता।

अगर आपकी कमाई का कुछ हिस्सा ऐसे स्रोतों से आया है, जिन पर अलग टैक्स दर लागू होती है, तो आपको टैक्स देना पड़ सकता है। भले ही आपकी सैलरी पर Section 87A के तहत टैक्स छूट मिल रही हो।

किन कमाई पर देना पड़ सकता है टैक्स?

Section 87A की छूट सिर्फ उस आय पर मिलती है, जिस पर सामान्य टैक्स स्लैब लागू होता है। लेकिन कुछ तरह की कमाई पर अलग नियम हैं। उन पर यह छूट नहीं मिलती। इनमें शामिल हैं…

  • शेयर बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
  • लॉटरी से जीती रकम
  • घुड़दौड़ से कमाई
  • ऑनलाइन गेमिंग या फैंटेसी गेम्स से कमाई

यानी आपकी कुल आय ₹12.75 लाख से कम हो सकती है। फिर भी इन स्रोतों से कमाई हुई है, तो उस हिस्से पर टैक्स देना पड़ सकता है।

ऐसा क्यों होता है?

सरकार ने Section 87A की छूट सिर्फ सामान्य टैक्स स्लैब वाली आय के लिए दी है। जिन कमाई पर पहले से अलग टैक्स दर तय है, उन पर यह छूट लागू नहीं होती।

उदाहरण के लिए, अगर आपने ऑनलाइन गेमिंग या फैंटेसी स्पोर्ट्स से पैसे जीते हैं, तो उस कमाई पर 30% की फ्लैट टैक्स दर लगती है। गेमिंग प्लेटफॉर्म TDS भी काटते हैं। ऐसे में Section 87A का फायदा नहीं मिलेगा।

ITR भरते समय ये गलती न करें

  • अगर आपकी ऐसी कोई कमाई है, तो उसे ITR में जरूर दिखाएं।
  • कैपिटल गेन को सही तरह शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म में दर्ज करें।
  • खरीद और बिक्री की पूरी जानकारी भरें।
  • AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें।
  • लॉटरी, घुड़दौड़ और ऑनलाइन गेमिंग से हुई कमाई भी जरूर बताएं।
  • सिर्फ इसलिए पूरी आय को टैक्स-फ्री न मान लें कि आपकी सैलरी ₹12.75 लाख से कम है।

अगर आपने ऐसी आय छिपाई या गलत जानकारी दी, तो बाद में इनकम टैक्स विभाग की तरफ से टैक्स डिमांड या नोटिस आ सकता है।

Salary Hike SIP: सैलरी बढ़ने पर कितनी बढ़ाएं SIP? इन 5 चीजों को देखकर करें फैसला

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPFO Alert: PF फंड का क्लेम और e-नॉमिनेशन के लिए तुरंत अपडेट करें प्रोफाइल फोटो, नहीं तो हो सकती है परेशानी

EPFO Alert: अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। EPFO ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर लें। यह फोटो ई-नॉमिनेशन (e-nomination) की प्रक्रिया पूरी करने और ऑनलाइन PF फंड के क्लेम के दौरान पहचान वेरीफाई करने में अहम भूमिका निभाती है। प्रोफाइल फोटो अपडेट नहीं होने पर आपको कुछ सर्विस का लाभ लेने में देरी या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यह प्रोफाइल फोटो पीएफ सदस्यों की एक विजुअल पहचान के रूप में काम करती है। इससे विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के दौरान ईपीएफओ को खाताधारक की पहचान वेरिफाई करने में मदद मिलती है। हालांकि सभी ईपीएफओ लेन-देन के लिए फोटो अपलोड करना अनिवार्य नहीं है। लेकिन ई-नॉमिनेशन जैसी कुछ खास सेवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। प्रोफाइल फोटो अपडेट रहने से पीएफ दावों की प्रोसेसिंग के दौरान होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

e-Nomination के लिए क्यों जरूरी है प्रोफाइल फोटो?

EPFO के मुताबिक, सदस्यों को अपनी प्रोफाइल में हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी चाहिए। यह e-Nomination पूरा करने के लिए जरूरी है। e-Nomination के जरिए सदस्य अपने परिवार के किसी सदस्य या पात्र व्यक्ति को नामांकित कर सकते हैं। ताकि सदस्य की मृत्यु होने पर EPF, Employees Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance (EDLI) का लाभ आसानी से नामित व्यक्ति को मिल सके।

PF क्लेम के निपटारे में मिलती है मदद

यदि सदस्य की प्रोफाइल पूरी तरह अपडेट रहती है, तो EPFO को ऑनलाइन पहचान सत्यापित करने में आसानी होती है। इससे PF से जुड़े दावों के निपटारे में कम समय लगता है और कागजी प्रक्रिया भी घट जाती है। वैध e-Nomination होने पर नामित व्यक्ति को क्लेम सेटलमेंट में भी कम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इन जानकारियों को भी रखें अपडेट

EPFO ने सदस्यों को सलाह दी गई है कि प्रोफाइल फोटो के अलावा आधार, PAN, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी पोर्टल पर सही तरीके से लिंक और वैरीफाई रखें। इससे e-Nomination, ऑनलाइन PF निकासी, पेंशन संबंधी सेवाओं और अन्य डिजिटल सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लिया जा सकता है। साथ ही अपने पहचान प्रमाण दस्तावेजों को भी अपडेट रखें। इन सभी जानकारियों को अपडेट रखने से ई-नॉमिनेशन, ऑनलाइन पीएफ निकासी (PF Withdrawal) और पेंशन से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के तेजी से मिलता है।

EPFO पोर्टल पर प्रोफाइल फोटो अपडेट करने के आसान स्टेप्स

EPFO सदस्य इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर सकते हैं:-

पोर्टल पर लॉग इन करें: सबसे पहले ईपीएफओ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (EPFO Unified Member Portal) पर जाएं। फिर अपने यूएएन (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

प्रोफाइल सेक्शन में जाएं: डैशबोर्ड पर जाने के बाद ‘Profile’ या ‘View’ सेक्शन पर नेविगेट करें और प्रोफाइल फोटो अपलोड/अपडेट करने के विकल्प को चुनें।

फोटो का चयन करें: एक हालिया पासपोर्ट साइज फोटो चुनें जो पोर्टल की तय फाइल साइज और फॉर्मेट की शर्तों को पूरा करती हो।

अपलोड और सेव करें: चुनी गई फोटो को अपलोड करें और बदलावों को सेव (Save) कर दें।

वेरीफाई करें: आगे की ई-नॉमिनेशन प्रक्रिया या ऑनलाइन क्लेम फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि अपडेट की गई फोटो आपके प्रोफाइल पर सही तरीके से दिख रही है या नहीं।

ये भी पढ़ें- Income Tax Return: न्यू टैक्स रिजीम में क्या क्लेम कर सकते हैं और क्या नहीं? ITR भरने से पहले देख लें ये पूरी लिस्ट

8th Pay Commission के तहत सीनियर कंसल्टेंट से यंग प्रोफेशनल बनने का मौका, 1.8 लाख तक सैलरी! फुल डिटेल जानिए

8th Pay Commission Job and Salary details: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा और उसमें बदलाव की सिफारिशें करने के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ काम करने का एक शानदार मौका है। 8वें वेतन आयोग ने कंसल्टेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। इसकी लास्ट डेट नजदीक आ रही है। आपको बता दें कि इस भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य प्रोफेशनल्स के पास आवेदन करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है।

हमारे सहयोगी ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सबसे पहले 10 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर तीन अलग-अलग कैटेगिरी में कांट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे थे। आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, मुआवजा, लीगल रीसर्च, डेटा विश्लेषण और पॉलिसी से जुड़ी स्टडी जैसे काम के लिए सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स की हायरिंग कर रहा है। आइए इस भर्ती से जुड़ी वैकेंसी, योग्यता, सैलरी और काम के स्वरूप की पूरी डिटेल विस्तार से जानते हैं:-

वैकेंसी की पूरी डिटेल (उम्र सीमा और अनुभव)

रिपोर्ट के मुताबिक इन वैकेंसी के लिए एज और एक्सपीरिंस को कैलकुलेट करने के लिए कट-ऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के लिए अधिकतम 5 पद निकाले गए हैं। इसके लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष और न्यूनतम रेलेवेंट एक्सपीरियंस 10 वर्ष होना चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट पद के लिए भी अधिकतम 5 वैकेंसियां हैं। इसमें आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा 40 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 6 वर्ष निर्धारित किया गया है। यंग प्रोफेशनल के लिए सबसे ज्यादा यानी मैक्सिमम 10 पद हैं। इसके लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा 32 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 4 वर्ष होना जरूरी है।

क्या योग्यता है जरूरी?

आवेदकों के पास नीचे दी गई योग्यताओं में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:-

फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्सेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस या इससे जुड़े विषयों में मास्टर्स डिग्री या MBA, या

LL।B डिग्री के साथ बार काउंसिल/बार एसोसिएशन में क्रेडेंशियल होना चाहिए और ट्रिब्यूनल या अदालतों के समक्ष लीगल रीसर्च या सर्विस मैटर में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।

अनिवार्य योग्यता: सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन टूल्स का ज्ञान होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों के पास वेतन, मुआवजा या स्टैबिलिशमेंट से जुड़े मामलों का अनुभव है उन्हें चयन में वरीयता दी जाएगी।

सैलरी और कार्यकाल

ये नियुक्तियां पूरी तरह से कांट्रैक्ट बेसिस पर होंगी। ये शुरुआत में एक साल या वेतन आयोग के कार्यकाल तक (जो भी पहले हो) के लिए की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

पदों के हिसाब से तय मासिक मानदेय इस प्रकार है:-

सीनियर कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.8 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹90000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000

कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.2 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹60000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹30000

यंग प्रोफेशनल: फुल-टाइम के लिए ₹90000, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹22500

इस सैलरी में से इनकम टैक्स और अन्य लागू कटौतियां (TDS) की जाएंगी।

चयनित कंसल्टेंट्स को क्या काम करना होगा?

ऑफिशियल गाइडलाइंस के मुताबिक चुने गए प्रोफेशनल्स को आयोग के साथ नीचे दिए गए काम करने होंगे:-

मौजूदा वेतन, भत्तों, पेंशन और उपलब्ध परिलब्धियों के ढांचे का विश्लेषण करना।

वेतन और मुआवजे के ट्रेंड्स की पहचान करने के लिए डेटा, रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन करना।

आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर लीगल रीसर्च करना।

डेटा इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय करना।

मानव संसाधन, मुआवजा, ग्रेच्युटी और बोनस तंत्र पर विशेष अध्ययनों में सहायता प्रदान करना।

आयोग को प्राप्त होने वाले ज्ञापनों और प्रतिवेदनों का विश्लेषण करना।

आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले राजकोषीय प्रभाव का अनुमान लगाना।

रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशन और अन्य विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करना।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवारों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना होगा। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार के फिजिकल या हार्ड-कॉपी आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

Clipboard04कपुरक

ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

ये भी पढ़ें- दिल्ली में 25% की बंपर छूट के साथ सरकारी फ्लैट खरीदने का मौका! DDA ने लास्ट डेट आगे बढ़ाई, घर की कीमत समेत स्कीम की फुल डिटेल जानिए