‘खराब प्रदर्शन’ कहकर निकाला, अब कंपनी को देना पड़ा ₹19 लाख का हर्जाना

सिंगापुर में नौकरी से जुड़े एक मामले ने कंपनियों की प्रोबेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला कर्मचारी को खराब प्रदर्शन का आरोप लगाकर नौकरी से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में Employment Claims Tribunal ने कंपनी के फैसले को अनुचित माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर कर्मचारी को प्रदर्शन के मानकों की सही जानकारी नहीं दी गई थी, तो उसे उन्हीं आधारों पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस फैसले के बाद महिला को S$30,000 (करीब ₹19 लाख) का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह मामला अब कंपनियों के लिए भी एक सीख बन गया है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन स्पष्ट नियमों और सही प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

6 महीने के प्रोबेशन के बाद लिया गया था फैसला

महिला ने अप्रैल 2025 में कंपनी जॉइन की थी और उसे छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया था। प्रोबेशन खत्म होने से पहले कंपनी ने उसे बताया कि उसका रोजगार आगे जारी नहीं रखा जाएगा, क्योंकि उसका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। हालांकि, महिला ने इस फैसले को चुनौती दी और दावा किया कि उसे कभी भी उसके काम को लेकर कोई मौखिक या लिखित चेतावनी नहीं दी गई थी।

महिला ने उठाए कई सवाल

कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में कहा कि कंपनी ने जिन प्रदर्शन मानकों के आधार पर उसे अयोग्य बताया, उनके बारे में उसे कभी स्पष्ट जानकारी ही नहीं दी गई थी।

उसने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रोजेक्ट में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाने के कारण उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। इसके अलावा, उसने भाषा को लेकर भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि कोरियन भाषा न जानने की वजह से उसे निशाना बनाया गया।

कोर्ट ने कहा- बताए बिना नहीं थोप सकते प्रदर्शन के नियम

ट्रिब्यूनल के मजिस्ट्रेट जोएल टैन ने कहा कि किसी कर्मचारी को ऐसे मानकों पर नहीं परखा जा सकता, जिनके बारे में उसे पहले बताया ही न गया हो। उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने अपने प्रदर्शन मानकों को स्पष्ट नहीं किया है, तो बाद में उन्हीं नियमों को आधार बनाकर कर्मचारी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

कंपनी की प्रोबेशन प्रक्रिया में मिली कमी

मजिस्ट्रेट ने माना कि कर्मचारी के काम में सुधार की गुंजाइश हो सकती थी, लेकिन कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि उसे किन स्पष्ट मानकों पर आंका गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर लापरवाही या बड़ी गलती का नहीं था, बल्कि अस्पष्ट अपेक्षाओं के आधार पर कर्मचारी का मूल्यांकन किया गया।

भेदभाव और व्हिसलब्लोअर के आरोप हुए खारिज

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने महिला के उन आरोपों को सही नहीं माना, जिनमें उसने कहा था कि भाषा की वजह से उसके साथ भेदभाव हुआ और व्हिसलब्लोअर बनने के कारण कंपनी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की।

कंपनियों के लिए बड़ा सबक

इस फैसले से कंपनियों को संदेश मिला है कि कर्मचारियों को नौकरी से हटाने से पहले प्रदर्शन के नियम, अपेक्षाएं और सुधार के मौके स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने महिला को तीन महीने की सैलरी के बराबर S$34,500 का दावा योग्य माना, लेकिन कानूनी सीमा के कारण अधिकतम S$30,000 का मुआवजा दिया गया।

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पति के ऑफिस में शिकायत करना पड़ सकता है भारी! सुप्रीम कोर्ट ने पत्नियों को दी बड़ी नसीहत

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पत्नियों द्वारा अपने पतियों के एम्प्लॉयर (कंपनियों/संस्थानों) को पत्र लिखने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी शिकायतों से नौकरी खतरे में पड़ सकती है और आखिरकार गुजारा-भत्ता (मेंटेनेंस) के दावों पर भी असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने पिछले हफ्ते ये टिप्पणियां कीं। वे एक महिला द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मानहानि के मुकदमे को असम से गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।

यह याचिका पति के एक दोस्त द्वारा दायर मानहानि के मामले से जुड़ी थी। महिला ने ट्रांसफर की मांग इसलिए की थी क्योंकि वह गाजियाबाद में अपने पति के साथ पहले से ही कई कानूनी मामलों में उलझी हुई थी।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने मामले को सुप्रीम कोर्ट मेडिएशन सेंटर (मध्यस्थता केंद्र) भेज दिया ताकि समझौते की संभावना तलाशी जा सके। जस्टिस नागरत्ना ने महिला के वकील से यह भी कहा कि वे उसे सभी विवाद सुलझाने और आरोप वापस लेने की सलाह दें।

बता दें कि यह मानहानि का मामला उस शिकायत से शुरू हुआ, जो महिला ने दिल्ली में एयर फोर्स अधिकारियों से की थी। उसने आरोप लगाया था कि उसके पति, जो एयर फोर्स में अफसर हैं, सर्विस के नियमों का उल्लंघन करके अपना अलग बिजनेस चला रहे हैं।

महिला के वकील ने दलील दी कि यह शिकायत तब की गई थी जब पति ने महिला और उसके भाई पर एयर फोर्स का हेलमेट चुराने का झूठा आरोप लगाया था।

वकील के अनुसार, इस शिकायत का मकसद उस सामान (हेलमेट) का पता लगाना था, जो उसके पति को मिला था। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि मानहानि की शिकायत पति ने खुद नहीं, बल्कि उनके दोस्त ने की थी।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कई पत्नियां वैवाहिक विवाद चलने के दौरान अपने पतियों के एम्प्लॉयर को पत्र लिखने का रास्ता अपनाती हैं।

उन्होंने कहा कि तलाक मांगना एक अलग बात है, लेकिन जीवनसाथी की आजीविका (रोजगार) छिनवाना उससे भी बुरा है।

जज ने आगे कहा कि वैवाहिक विवादों के दौरान जीवनसाथी के नियोक्ता (employer) को पत्र लिखना उन “सबसे बुरी चीजों” में से एक है जो एक पत्नी कर सकती है, क्योंकि इससे पति की नौकरी जा सकती है और भविष्य में गुजारा-भत्ता (maintenance) के दावे का आधार भी कमजोर हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कोई नई बात नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

हालांकि, ऐसी शिकायतों की कोई सटीक संख्या नहीं है, लेकिन पहले भी महिलाएं व्यभिचार या दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए नियोक्ताओं के पास गई हैं और कुछ मामलों में अपने पतियों की नौकरी खत्म करने की मांग भी की हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि नौकरी जाने से बाद में गुजारा-भत्ता (मेंटेनेंस) देने में मुश्किल हो सकती है।

पहले भी कोर्ट ने ऐसे कानूनी मुद्दों पर की है सुनवाई

कोर्ट ने कहा, अदालतों ने पहले भी ऐसी शिकायतों के कानूनी प्रभावों पर विचार किया है। ऐसे मामलों में सबसे पुराने मामलों में से एक दिल्ली हाई कोर्ट के सामने आया था। यह मामला 1972 का है, जब एक वैवाहिक विवाद के दौरान अलग रह रही पत्नी ने लोकसभा को पत्र लिखा था। उसने अपने पति, जो वहां काम करते थे, पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था और दावा किया था कि पति ने उसके माता-पिता से पैसों और अन्य चीजों की मांग की थी।

बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अगर पत्नी भरण-पोषण की मांग करना चाहती थी, तो उसे केवल यह बताने की जरूरत थी कि उसे मेंटेनेंस नहीं मिल रहा है। इसके लिए उसे ऐसे आरोप लगाने की जरूरत नहीं थी।

1980 के अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था, “इस तरह की झूठी शिकायत अगर किसी कर्मचारी के नियोक्ता से की जाती है, तो यह निश्चित रूप से मानसिक क्रूरता (मेंटल क्रुएल्टी) के बराबर होगी। इससे कर्मचारी की छवि उसके नियोक्ता की नजरों में खराब होगी और उसके करियर व प्रमोशन के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। यह स्थिति उसके मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है।” पत्नी के पूरे व्यवहार पर विचार करने के बाद कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर शादी खत्म करने के फैसले को सही ठहराया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अदालतों ने भी इसी तरह का नजरिया अपनाया है। इसमें मद्रास हाई कोर्ट का जून का एक फैसला भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि “”बिना किसी ठोस सबूत के लगाए गए ऐसे आरोप, जो पति या पत्नी की प्रतिष्ठा और सम्मान को नुकसान पहुंचाते हैं, खासकर नियोक्ता या वरिष्ठ अधिकारियों के सामने लगाए गए आरोप, वैवाहिक रिश्ते को पूरी तरह नुकसान पहुंचा सकते हैं और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता माने जा सकते हैं।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एम्प्लॉयर, खासकर प्राइवेट कंपनियां, सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार जांच करनी पड़ सकती है, जबकि सरकारी कर्मचारियों के मामले में अलग सर्विस नियम लागू होते हैं।

इसमें यह भी कहा गया है कि प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में ‘भारतीय न्याय संहिता’ की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।

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EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस

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अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो अब आपका Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) में जमा Provident Fund (PF) बैलेंस ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। EPFO के नए सदस्य पोर्टल पर कर्मचारियों को अपने पुराने नियोक्ता (Employer) के PF खाते से नए खाते में राशि ट्रांसफर करने के लिए दो आसान विकल्प दिए गए हैं।

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EPFO का कहना है कि इस नए फीचर का उद्देश्य PF ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाना, कागजी कार्रवाई कम करना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को बिना किसी अनावश्यक देरी के एक ही खाते में समेकित करना है।

 

EPFO पोर्टल में हुआ बड़ा अपग्रेड

 

हाल ही में EPFO के सदस्य पोर्टल में डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किया गया था। इस दौरान पोर्टल लगभग दो सप्ताह तक प्रभावित रहा और ऑनलाइन सेवाओं की बहाली में कई बार देरी हुई। अब पोर्टल की सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। हालांकि EPFO ने कहा है कि फिलहाल PF क्लेम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के निपटान में कुछ समय लग सकता है।

 

नौकरी बदलने पर PF बैलेंस ट्रांसफर करने के दो तरीके

 

PF ट्रांसफर शुरू करने से पहले कर्मचारियों को अपने Universal Account Number (UAN) की मदद से EPFO सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वे निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं।

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1. 'Request for Transfer of Account' विकल्प
 

2. 'Member Service History' के जरिए

 

EPFO 3.0 में कर्मचारियों को Member Service History सेक्शन में अपने पुराने और वर्तमान रोजगार की पूरी जानकारी देखने की सुविधा मिलती है।

 

  • यदि कोई PF ट्रांसफर लंबित नहीं होगा तो स्टेटस “No” दिखाई देगा।
  • इसके बाद Claim लिंक पर क्लिक करें।
  • Form 13 के जरिए Service Transfer Claim दर्ज करें।
  • इसके बाद आपकी PF ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  • UAN नहीं पता तो क्या करें?

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अगर आपको अपना Universal Account Number (UAN) याद नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इसे—

 

  • अपनी नवीनतम Salary Slip में देख सकते हैं।
  • या फिर अपने Employer (नियोक्ता) से प्राप्त कर सकते हैं।
  • कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
  • PF ट्रांसफर की प्रक्रिया होगी आसान।
  • कागजी कार्रवाई में होगी कमी।
  • पुराने और नए PF खाते को एक जगह समेकित करना होगा सरल।
  • रिटायरमेंट सेविंग्स का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
  • नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर में देरी की संभावना होगी कम।

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ ने ग्रीन कार्ड वाले जोक की आड़ में US सिटिजनशिप के सवाल को किया इग्नोर, बोले- ‘मैं कुछ नहीं कह रहा’

Diljit Dosanjh: हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, जब एक फैन ने दिलजीत दोसांझ को US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का सुझाव दिया, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। यह कमेंट उस रिपोर्ट के कुछ महीनों बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि एक्टर-सिंगर 2022 से US के नागरिक हैं – एक ऐसा दावा जिसकी न तो दिलजीत ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है और न ही इसका खंडन किया है।

लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद पर बात कर रहे थे, जिसे रिलीज़ होने के 48 घंटों के भीतर ही Zee5 इंडिया से हटा दिया गया था। हालांकि, जब एक फैन ने उन्हें US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने को कहा, तो दिलजीत ने नागरिकता से जुड़ी अटकलों का सीधे जवाब देने के बजाय उस पल को मजाक में बदल दिया।

प्रशंसक के सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “मैं एक कार्ड लूंगा और उसे हरे रंग से रंग दूंगा।”उन्होंने आगे कहा, “मैं कुछ नहीं कह रहा। सब छोड़कर ये खबर बन जाएगी। ऐसा नहीं होता। दुनिया का नाटक कभी खत्म नहीं होगा। लेकिन मेरा मानना ​​है कि हर किसी को बिना वीजा के किसी भी देश की यात्रा करने की अनुमति होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक हो जाना चाहिए। मैं ठीक हूं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है, है ना?”

यह बात इसलिए खास थी क्योंकि यह दिलजीत की नागरिकता के स्टेटस को लेकर चल रही अटकलों के बीच कही गई थी। इस साल की शुरुआत में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया था कि दिलजीत ने 2022 में अमेरिकी नागरिकता ले ली थी और 1 सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे हैं। एक्टर-सिंगर ने इस रिपोर्ट पर सार्वजनिक रूप से कोई बात नहीं की है।

फैन ने दिलजीत से डोनाल्ड ट्रंप से बात करने को कहा। एक और लाइव सेशन में, एक फैन ने मजाक में दिलजीत से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने और सभी को अमेरिकी नागरिकता दिलाने में मदद करने को कहा। इस सुझाव पर हंसते हुए दिलजीत ने जवाब दिया, “आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं? मैं तो बस एक आर्टिस्ट हूं। मैं उनसे नागरिकता के मुद्दों को हल करने के लिए कैसे कह सकता हूं? उनकी बेटी मुझे फोलो करती है, लेकिन मैंने कभी उनसे भी बात नहीं की है। मैं कभी किसी से कोई फेवर नहीं मांगता। अगर कुछ होना होता है, तो वह होता है। अगर नहीं होना होता, तो नहीं होता।”

दिलजीत के हल्के-फुल्के जवाब ने एक बार फिर नागरिकता की अफवाहों पर सीधे बात करने से बचा लिया, साथ ही यह भी साफ कर दिया कि वह नहीं चाहते थे कि यह बातचीत कोई और हेडलाइन बने। मई में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया कि दिलजीत दोसांझ 2022 में अमेरिकी नागरिक बन गए थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई में जारी किया गया था और वे 1 सितंबर, 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि दिलजीत की पत्नी, संदीप कौर, अमेरिकी नागरिक हैं। अमेरिकी नागरिकता लेने के समय, दिलजीत ने कैलिफ़ोर्निया के एक पॉश इलाके में स्थित पांच बेडरूम वाले बंगले को लिया था। अमेरिकी ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को ‘कानूनी तौर पर स्थायी निवासी’ का दर्जा देता है, जिससे वे बिना किसी अस्थायी वीजा या नियोक्ता (employer) की स्पॉन्सरशिप के, अमेरिका में कहीं भी अनिश्चित काल तक रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और पढ़ाई कर सकते हैं। पात्रता की शर्तें पूरी करने के बाद, यह अमेरिकी नागरिकता पाने का एक जरिया भी बन सकता है।

हालांकि, जो व्यक्ति पहले से ही अमेरिकी नागरिक है, उसे ग्रीन कार्ड की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से, चल रही अटकलों के बीच फैन का सुझाव और दिलजीत का मजाकिया जवाब चर्चा का विषय बन गया। दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ के बारे में बात करने के लिए लाइव आए थे।

OTT पर रिलीज होने से पहले, सेंसर की आपत्तियों के कारण यह फिल्म अटकी हुई थी। दिलजीत ने लोगों से यह फिल्म देखने की अपील की और इसे पंजाब और भारत के इतिहास की एक अहम कहानी बताया। ‘सतलुज’ जसवंत सिंह खालरा की कहानी है। उन्होंने उस दौर में अमृतसर और उसके आस-पास हजारों शवों के कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से अंतिम संस्कार किए जाने का दस्तावेजीकरण किया था, जब पंजाब में उग्रवाद चरम पर था। बाद में खालरा का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई।

Zee5 से फ़िल्म को अचानक हटाए जाने के बाद सेंसरशिप, इतिहास और इस बात पर बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या मानवाधिकारों से जुड़े दस्तावेज़ी मुद्दों पर आधारित कहानियों को भारतीय दर्शकों तक पहुंचने दिया जा रहा है।

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

EPF Scheme 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सदस्य कम से कम छह अलग-अलग कारणों से अपने EPF खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) कर सकते हैं।

EPF Scheme 2026 29 जून 2026 से लागू हो गई है। इसके साथ ही इसने EPF Scheme 1952 की जगह ले ली है। इसके पैरा 46 के मुताबिक, भविष्य निधि आयुक्त (Provident Fund Commissioner) सदस्य को EPF खाते से कम से कम 1,000 रुपये की आंशिक निकासी की अनुमति दे सकते हैं।

हालांकि, एक शर्त भी है। नए नियमों के तहत EPF खाते में हमेशा कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। इस न्यूनतम बैलेंस में कर्मचारी और कंपनी (Employer) दोनों के योगदान शामिल होंगे। आप बाकी 75% रकम निकाल सकते हैं, जो Eligible Member Balance रहेगा। आइए जानते हैं किन-किन वजहों से EPF से पैसा निकाला जा सकता है।

बीमारी के इलाज के लिए

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को इलाज के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद आप एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकते हैं।

मान लीजिए आपके EPF खाते में कुल 1 लाख रुपये हैं। ऐसे में 25 हजार रुपये खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर बने रहेंगे और आप अधिकतम 75 हजार रुपये तक निकाल सकेंगे।

घर खरीदने के लिए

EPF Scheme 2026 के तहत घर से जुड़े कई कामों के लिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसमें फ्लैट या मकान खरीदना शामिल है। घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदने पर भी पैसा निकाला जा सकता है। मकान बनाने के लिए भी यह सुविधा मिलेगी। अगर आपने घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लिया है, तो उसकी रकम चुकाने के लिए भी EPF से पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा, पुराने घर की मरम्मत, विस्तार या रेनोवेशन के लिए भी आंशिक निकासी की अनुमति है।

इन सभी उद्देश्यों के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का फायदा पूरे मेंबरशिप पीरियड में अधिकतम 5 बार ही उठाया जा सकेगा।

पढ़ाई के लिए

अगर आपको या परिवार के किसी सदस्य की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकासी की जा सकती है। इस वजह से अधिकतम 10 बार पैसे निकाले जा सकते हैं।

शादी के लिए

अपने या परिवार के किसी सदस्य की शादी के खर्च के लिए भी EPF से पैसा निकाला जा सकता है। इसके लिए भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होना जरूरी है। इस श्रेणी में एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का इस्तेमाल पूरे सदस्यता काल में 5 बार से ज्यादा नहीं किया जा सकेगा।

खास हालात में

नई योजना में कुछ विशेष हालात के लिए भी EPF से आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है। ऐसे मामलों में 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है।

नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी में आंशिक निकासी की अनुमत संख्या की गणना प्रत्येक सदस्य के लिए 29 जून 2025 से नए सिरे से की जाएगी। इसे EPF Scheme 2026 की शुरुआत की तारीख के रूप में बताया गया है।

नौकरी छोड़ने पर

अगर कोई कर्मचारी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने से पहले ही नौकरी छोड़ देता है, तब भी वह EPF से पैसा निकाल सकता है।

ऐसे मामलों में सदस्य एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकता है। हालांकि, इस आधार पर एक वित्त वर्ष में दो बार से ज्यादा निकासी की अनुमति नहीं होगी।

PF के टैक्स फ्री विड्रॉल के रूल क्या हैं, आपको किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत पड़ेगी और क्लेम प्रोसेस क्या है? सब जानिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।