EPFO: खुशखबरी! ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा ट्रांसफर किया, अपना पीएफ बैलेंस ऐसे चेक करें

EPFO: एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने इंटरेस्ट का पैसा सब्सक्राइबर्स के ईपीएफ अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 का इंटरेस्ट है। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में पीएफ बैलेंस पर 8.25 फीसदी इंटरेस्ट को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोग अपने ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट अमाउंट क्रेडिट होने का इंतजार कर रहे थे।

सब्सक्राइबर्स को आ रहे इंटरेस्ट क्रेडिट होने के एसएमएस

ईपीएफ के कई सब्सक्राइबर्स को इंटरेस्ट अमाउंट क्रेडिट होने के एसएमएस आए हैं। उनमें बताया गया है कि FY26 के इंटरेस्ट का पैसा उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया है। हालांकि, इस बात की संभावना है कि इंटरेस्ट ट्रांसफर अलर्ट मिलने के बावजूद आपके ईपीएफ में तुरंत रिवाइज्ड बैलेंस नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि EPFO अभी करोड़ों सब्सक्राइबर्स के अकाउंट्स को अपडेट कर रहा है। इसलिए आपके अकाउंट में आया पैसे दिखने में समय लग सकता है।

34 करोड़ ईपीएफ अकाउंट्स में 1.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर होंगे

ईपीएफओ को करीब 34 करोड़ ईपीएफ अकाउंट्स में सालाना इंटरेस्ट के करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफ करने हैं। इस साल पिछले साल के मुकाबले इंटरेस्ट ट्रांसफर का प्रोसेस जल्द पूरा हुआ है। इसकी वजह ईपीएफओ की नई सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सिस्टम (CITES) प्लेटफॉर्म है। इसके चलते इंटरेस्ट ट्रांसफर का प्रोसेस ऑटोमेटेड हो गया है।

सब्सक्राइबर्स अपने रिवाइज्ड ईपीएफ बैलेंस को ऐसे चेक कर सकते हैं

ईपीएफए के सब्सक्राइबर्स अपने ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट के रिवाइज्ड बैलेंस को चेक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ईपीएफओ के मेंबर पासबुक पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा। इसके लिए UAN और पासवर्ड होना जरूरी है। आपको पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद ‘व्यू पासबुक’ को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद आपको ईपीएफ बैलेंस और इंटरेस्ट अमाउंट की एंट्री दिखेगी।

ईपीएफ अकाउंट में इंटरेस्ट ट्रांसफर की एंट्री दिखने में समय लग सकता है

अगर आपके ईपीएफ अकाउंट में तुरंत इंटरेस्ट अमाउंट की एंट्री नहीं दिखती है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ईपीएफओ कई चरणों में अकाउंट को अपडेट करता है। इसलिए सभी सब्सक्राईबर्स के ईपीएफ अकाउंट अपडेट होने में थोड़ा समय लग सकता है।

सब्सक्राइबर्स ईपीएफ अकाउंट बैलेंस का 75 फीसदी निकाल सकते हैं

सब्सक्राइबर्स उमंग ऐप के जरिए भी अपना ईपीएफ बैलेंस चेक कर सकते हैं। लेकिन, अभी मेंटेनेंस की वजह से इस ऐप का ईपीएफ बैलेंस फीचर काम नहीं कर रहा है। ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स से जुड़ी सभी सेवाओं को ऑनलाइन बना दिया है। साथ ही विड्रॉल के नियमों में भी बदलाव किया गया है। ईपीएफ स्कीम, 2026 के तहत अपने ईपीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक निकाल सकते हैं।

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।