EPF Interest Credit: बड़ी खुशखबरी! EPFO ने 8 करोड़ PF खाते में ब्याज जमा करने का दिया आदेश; इन 4 तरीकों से करें चेक

EPF Interest Rate: करीब 8 करोड़ EPF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सदस्यों के खातों में ब्याज की रकम जमा करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

EPFO ने अपने हालिया सर्कुलर में कहा है कि केंद्र सरकार ने Employees’ Provident Fund Scheme, 1952 के पैरा 60(1) के तहत 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। अब सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द यह ब्याज सदस्यों के EPF खातों में जमा करें।

इस बार जल्दी आएगा ब्याज

इस बार EPFO ने अपने डेटाबेस का कंसालिडेशन (Database Consolidation) किया है। साथ ही सॉफ्टवेयर सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है।

इसी वजह से ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और आसान रहने की उम्मीद है। पहले सभी खातों में ब्याज जमा होने में एक से दो महीने तक लग जाते थे। लेकिन इस बार प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।

लंबे समय से इंतजार कर रहे थे सदस्य

EPF सदस्य काफी समय से अपने खातों में ब्याज आने का इंतजार कर रहे थे। दरअसल, मार्च 2026 में EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया।

नियमों के मुताबिक, CBT की मंजूरी के बाद प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास जाता है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही ब्याज खातों में जमा किया जाता है।

लगातार तीसरे साल नहीं बदली ब्याज दर

वित्त मंत्रालय ने जून 2026 में 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही लगातार तीसरे साल EPF पर ब्याज दर 8.25% ही रखी गई है। अब औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद EPFO ने ब्याज की रकम खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

यानी अगर आपका भी EPF खाता है, तो आने वाले दिनों में आपके खाते में वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज दिखाई देने लगेगा।

EPF खाते में ब्याज आया या नहीं? ऐसे करें चेक

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके EPF खाते में 8.25% ब्याज जमा हुआ है या नहीं, तो इन आसान तरीकों से चेक कर सकते हैं।

1. EPFO Member Passbook से चेक करें

  • EPFO Member Passbook पोर्टल पर जाएं।
  • अपना UAN और पासवर्ड डालकर लॉग इन करें।
  • अपना EPF खाता चुनें।
  • पासबुक खोलें।
  • यहां Interest Update या नई एंट्री में जमा हुआ ब्याज दिखाई देगा।

2. UMANG ऐप से चेक करें

  • मोबाइल में UMANG ऐप खोलें।
  • EPFO सेक्शन में जाएं।
  • View Passbook पर टैप करें।
  • UAN और OTP की मदद से लॉग इन करें।
  • पासबुक में ब्याज की एंट्री चेक करें।

3. SMS से बैलेंस जानें

  • अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर यह SMS भेजें:
  • EPFOHO UAN ENG
  • अगर हिंदी में जानकारी चाहिए, तो ENG की जगह HIN लिखें।
  • कुछ ही देर में EPF बैलेंस और ब्याज की जानकारी SMS के जरिए मिल जाएगी।

4. मिस्ड कॉल देकर चेक करें

  • अपने UAN से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें।
  • कुछ सेकंड में SMS आएगा।
  • इसमें EPF बैलेंस और खाते की जानकारी मिल जाएगी।

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

EPF Scheme 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सदस्य कम से कम छह अलग-अलग कारणों से अपने EPF खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) कर सकते हैं।

EPF Scheme 2026 29 जून 2026 से लागू हो गई है। इसके साथ ही इसने EPF Scheme 1952 की जगह ले ली है। इसके पैरा 46 के मुताबिक, भविष्य निधि आयुक्त (Provident Fund Commissioner) सदस्य को EPF खाते से कम से कम 1,000 रुपये की आंशिक निकासी की अनुमति दे सकते हैं।

हालांकि, एक शर्त भी है। नए नियमों के तहत EPF खाते में हमेशा कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। इस न्यूनतम बैलेंस में कर्मचारी और कंपनी (Employer) दोनों के योगदान शामिल होंगे। आप बाकी 75% रकम निकाल सकते हैं, जो Eligible Member Balance रहेगा। आइए जानते हैं किन-किन वजहों से EPF से पैसा निकाला जा सकता है।

बीमारी के इलाज के लिए

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को इलाज के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद आप एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकते हैं।

मान लीजिए आपके EPF खाते में कुल 1 लाख रुपये हैं। ऐसे में 25 हजार रुपये खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर बने रहेंगे और आप अधिकतम 75 हजार रुपये तक निकाल सकेंगे।

घर खरीदने के लिए

EPF Scheme 2026 के तहत घर से जुड़े कई कामों के लिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसमें फ्लैट या मकान खरीदना शामिल है। घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदने पर भी पैसा निकाला जा सकता है। मकान बनाने के लिए भी यह सुविधा मिलेगी। अगर आपने घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लिया है, तो उसकी रकम चुकाने के लिए भी EPF से पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा, पुराने घर की मरम्मत, विस्तार या रेनोवेशन के लिए भी आंशिक निकासी की अनुमति है।

इन सभी उद्देश्यों के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का फायदा पूरे मेंबरशिप पीरियड में अधिकतम 5 बार ही उठाया जा सकेगा।

पढ़ाई के लिए

अगर आपको या परिवार के किसी सदस्य की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है, तो 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकासी की जा सकती है। इस वजह से अधिकतम 10 बार पैसे निकाले जा सकते हैं।

शादी के लिए

अपने या परिवार के किसी सदस्य की शादी के खर्च के लिए भी EPF से पैसा निकाला जा सकता है। इसके लिए भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होना जरूरी है। इस श्रेणी में एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है। हालांकि, इस सुविधा का इस्तेमाल पूरे सदस्यता काल में 5 बार से ज्यादा नहीं किया जा सकेगा।

खास हालात में

नई योजना में कुछ विशेष हालात के लिए भी EPF से आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है। ऐसे मामलों में 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाला जा सकता है।

नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी में आंशिक निकासी की अनुमत संख्या की गणना प्रत्येक सदस्य के लिए 29 जून 2025 से नए सिरे से की जाएगी। इसे EPF Scheme 2026 की शुरुआत की तारीख के रूप में बताया गया है।

नौकरी छोड़ने पर

अगर कोई कर्मचारी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने से पहले ही नौकरी छोड़ देता है, तब भी वह EPF से पैसा निकाल सकता है।

ऐसे मामलों में सदस्य एलिजबल मेंबर बैलेंस का 100% तक निकाल सकता है। हालांकि, इस आधार पर एक वित्त वर्ष में दो बार से ज्यादा निकासी की अनुमति नहीं होगी।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलेनियर, Tesla-SpaceX की बिकवाली से लगा करंट, एक्सपर्ट ने किया सतर्क

दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर यानी $1 लाख करोड़ से अधिक दौलत वाले शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की गिरावट से तगड़ा शॉक लगा। इनकी गिरावट से मस्क की दौलत से हजारों करोड़ डॉलर साफ हो गए। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर एआई और स्पेस से जुड़ी हाई-ग्रोथ कंपनियों को लेकर मार्केट की सोच में बड़े बदलाव का संकेत। टेस्ला का शेयर दिसंबर 2025 में एक साल के हाई $498.83 से करीब 21% टूटकर करीब $393 पर है। वहीं अब तक के सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद 12 जून को नास्डाक पर लिस्ट हुई स्पेसएक्स $225.64 के रिकॉर्ड हाई से करीब 30% टूटकर अब $157-158 के करीब आ चुका है। इस गिरावट के कारण एलन मस्क की नेटवर्थ स्पेसएक्स की लिस्टिंग के तुरंत बाद अपने $1.45 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से घटकर $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई है।

प्रॉफिट बुकिंग है या गहरी गिरावट?

वेस्टेड फाइनेंस के सीईओ और फाउंडर विक्रम शाह का मानना है कि टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट की दोनों वजहें हैं- प्रॉफिट बुकिंग और गहरी गिरावट। शेयरों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने पैसा निकाला शुरू किया तो इस पर दबाव पड़ा। इसके अलावा मार्केट ने अब एआई और स्पेस इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से करना शुरू किया है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वैल्यूएशन आखिर कहां स्थिर होंगे।

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स के सिर्फ शेयर ही टूटे हैं, बिजनेस के स्तर पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं टूटा है। उन्होंने जिक्र किया कि टेस्ला ने अभी हाल में अपना सबसे मजबूत तिमाही डिलीवरी आंकड़ा पेश किया है, फिर भी शेयर टूटे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी कंपनी के इलेक्ट्रिक वेईकल बिजनेस की बजाय उसके लंबे समय के ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटैक्सी विजन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। स्पेसएक्स की स्थिति भी ऐसी ही है। स्टारलिंक लगातार प्रॉफिटेबल तरीके से बढ़ रहा है और कंपनी का लॉन्च बिजनेस भी विस्तार कर रहा है, लेकिन पोस्ट-लिस्टिंग शुरुआती तेजी के बाद शेयरों पर दबाव आया है।

क्या करना चाहिए भारतीय निवेशकों को?

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट खरीदें या बेचें, फैसले जितना साधारण नहीं है बल्कि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि पोर्टफोलियो एलोकेशन और निवेश के लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि एआई और स्पेस में 5–10 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो कुछ हफ्तों की गिरावट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी देखने की सलाह दी है कि कहीं इन शेयरों में उनका एक्सपोजर पहले की तेजी के कारण जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय निवेशकों को बिना सोचे-समझे नई लिस्ट हुई हाई-वैल्यू अमेरिकी कंपनियों में निवेश करने से सावधान किया। उनका मानना है कि अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश इतना छोटा होना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित न हो।

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

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EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।