Starlink Row In India: कमल हासन से लेकर कुणाल कपूर तक, भारत में स्टारलिंक विवाद पर बोले एक्टर्स

Starlink Row In India: कमल हासन के बाद बॉलीवुड एक्टर कुणाल कपूर ने SpaceX के फाउंडर और CEO एलन मस्क के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कुछ ताकतवर लोगों (ओलिगार्क्स) ने मार्केट पर अपना कब्जा बनाए रखने के लिए उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस, स्टारलिंक (Starlink) को “ब्लॉक” कर दिया है। कुणाल ने एलन की सोच को “औपनिवेशिक मानसिकता” (colonial mindset) बताया और टेक अरबपतियों की “मसीहा बनने की भावना” (saviour complex) की ओर इशारा किया।

कुणाल ने एलन मस्क की ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ पर सवाल उठाए

कुणाल ने लिखा- “इस वीक एलन मस्क की बातों को सुनकर लगा कि वह पश्चिमी टेक अरबपतियों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे हैं। वे आपके देश में आकर आपको भविष्य बेचते हैं। अगर आप उनका स्वागत करते हैं तो आप एक ऐसे देश माने जाते हैं जो तरक्की चाहता है। अगर आप उन्हें इंतजार करवाते हैं तो अचानक आपके लोग पीड़ित बन जाते हैं, जिन्हें किसी ‘चुने हुए व्यक्ति’ द्वारा उनके अपने ही संस्थानों से बचाने की जरूरत होती है।”

कुणाल ने अतीत की उन घटनाओं का जिक्र किया जब देशों ने एलन की मदद लेने से इनकार किया था। उन्होंने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। एक्टर ने 2018 में थाईलैंड में हुए बचाव अभियान का जिक्र किया, जब वाइल्ड बोअर्स सॉकर टीम के 11 से 16 साल की उम्र के 12 सदस्यों और उनके 25 साल के असिस्टेंट कोच को थाम लुआंग गुफा परिसर से बचाया गया था। बचाव दल ने उस मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया जो एलन ने ऑपरेशन के लिए दी थी, जिससे वे नाराज हो गए थे।

उन्होंने अगस्त 2024 में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट द्वारा X (पहले ट्विटर) को देश भर में सस्पेंड करने का भी जिक्र किया, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म कोर्ट के आदेशों का पालन करने में विफल रहा था। कुणाल ने लिखा, “यह एक पैटर्न है। जब थाई बचाव दल ने फंसे हुए लड़कों के लिए मस्क द्वारा भेजी गई मिनी-सबमरीन का इस्तेमाल नहीं किया और गोताखोर वर्नोन अनस्वर्थ ने इस विचार को अव्यावहारिक बताया, तो मस्क ने उन पर ‘पेडो गाइ’ (बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति) होने का आरोप लगाया।

जब ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने X को अपने फैसलों का पालन करने का आदेश दिया, तो मस्क ने जज को ‘तानाशाह’ कहा। स्क्रिप्ट शायद ही कभी बदलती है। बस देश बदलता है। औपनिवेशिक मानसिकता का मतलब हमेशा किसी देश पर राज करना नहीं होता। कभी-कभी यह सोच होती है कि आप वहां एक मसीहा बनकर आए हैं और अगर देश तुरंत आपको ऐसा नहीं मानता, तो जरूर देश में ही कुछ गड़बड़ है।”

एलन मस्क ने क्या कहा था?

एलन ने भारत में स्टारलिंक की संभावनाओं के बारे में कई ट्वीट किए हैं, जिनमें अंबानी परिवार का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने लिखा, “स्टारलिंक के पास 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?”

क्या बोले कमल हासन

टेक अरबपति की चौंकाने वाली बातों के तुरंत बाद एक्टर और नेता कमल हासन ने उन पर सवाल उठाते हुए कहा, “किसी भी अरबपति को देश की पॉलिसी तय नहीं करनी चाहिए – चाहे वह भारत हो या अमेरिका।” शुक्रवार को हासन ने मस्क की पहली पोस्ट को री-शेयर किया और स्टारलिंक-भारत विवाद पर अपनी राय रखी। एक्टर ने कहा कि, “भारत जानता है कि हमारे नेटवर्क और स्पेक्ट्रम रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर हैं न कि सिर्फ कमर्शियल एसेट्स। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

एक कड़े बयान में हासन ने कहा कि भारत को भारतीय और ग्लोबल, दोनों तरह के प्रोवाइडर्स का स्वागत करना चाहिए, जो भी दूर-दराज के इलाकों के लिए सबसे प्रैक्टिकल और किफायती ‘लास्ट-माइल सॉल्यूशन’ दे सके।

भारत के संचार मंत्रालय ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि देश का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण है। गुरुवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा, “सोशल मीडिया पर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता के बारे में एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है। सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं सहित सभी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के लिए एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क लागू किया है।”

Elon Musk Starlink Update: क्या भारत के गांवों में पहुंचेगा एलन मस्क का सुपरफास्ट इंटरनेट? अरबपति कारोबारी ने नए लाइसेंस आवेदन के साथ किया बड़ा ऐलान

Elon Musk Starlink Update: स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी स्पेसएक्स के संस्थापक अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। एलन मस्क ने कहा है कि स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत के उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बूस्ट कर सकती है जहां इंटरनेट की पहुंच लिमिटेड है। मस्क यहां पर खासकर भारत के गांवों तक सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाने की बात करते नजर आ रहे हैं।

मस्क का ये कमेंट ऐसे समय में आया है जब तमाम रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सर्विस देने के लिए एक रीअप्लाई किया है।

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि स्टारलिंक भारत में सबसे कम सेवा पाने वाले लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मदद करेगा। असल में मस्क एक्स हैंडल DogeDesigner की एक पोस्ट पर अपना रिएक्शन दे रहे थे। इस पोस्ट में भारत के दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए स्टारलिंक की सर्विस की मदद लेने की वकालत की गई थी।

इस सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच भारी अंतर को दिखाया गया है। पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 तक भारत के 11256 गांवों में अब भी 4G नेटवर्क की कवरेज नहीं थी। इसी तरह मार्च 2026 तक भारत में कुल 1.093 अरब इंटरनेट सब्सक्रिप्शन थे लेकिन इनमें से सिर्फ 44.087 करोड़ सब्सक्रिप्शन ही ग्रामीण इलाकों के थे। ग्रामीण भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन डेंसिटी प्रति 100 लोगों पर सिर्फ 48.31 थी, जबकि शहरी भारत में यह आंकड़ा प्रति 100 लोगों पर 126.80 था।

नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन

मस्क का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब रिपोर्टों के अनुसार स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नया आवेदन जमा किया है। इससे पहले कंपनी को इस मामले में झटका भी लग चुका है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र ने इससे पहले स्टारलिंक के जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क के आवेदन को खारिज कर दिया था। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने पाया था कि इसके कुछ फीचर्स और जिन रेडियो फ्रीक्वेंसी का यह इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे भारत की जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं। आपको बता दें कि स्टारलिंक के इस जेन 2 सिस्टम में डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी की क्षमता भी होती है।

भारत में मंजूरी की कोशिशें जारी

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के ग्रुप्स की मदद से इंटरनेट सर्विस देती है। कंपनी भारत में अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए लंबे समय से जरूरी रेग्युलेटरी क्लियरेंस लेने के लिए कोशिश कर रही है।

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दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर यानी $1 लाख करोड़ से अधिक दौलत वाले शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की गिरावट से तगड़ा शॉक लगा। इनकी गिरावट से मस्क की दौलत से हजारों करोड़ डॉलर साफ हो गए। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर एआई और स्पेस से जुड़ी हाई-ग्रोथ कंपनियों को लेकर मार्केट की सोच में बड़े बदलाव का संकेत। टेस्ला का शेयर दिसंबर 2025 में एक साल के हाई $498.83 से करीब 21% टूटकर करीब $393 पर है। वहीं अब तक के सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद 12 जून को नास्डाक पर लिस्ट हुई स्पेसएक्स $225.64 के रिकॉर्ड हाई से करीब 30% टूटकर अब $157-158 के करीब आ चुका है। इस गिरावट के कारण एलन मस्क की नेटवर्थ स्पेसएक्स की लिस्टिंग के तुरंत बाद अपने $1.45 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से घटकर $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई है।

प्रॉफिट बुकिंग है या गहरी गिरावट?

वेस्टेड फाइनेंस के सीईओ और फाउंडर विक्रम शाह का मानना है कि टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट की दोनों वजहें हैं- प्रॉफिट बुकिंग और गहरी गिरावट। शेयरों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने पैसा निकाला शुरू किया तो इस पर दबाव पड़ा। इसके अलावा मार्केट ने अब एआई और स्पेस इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से करना शुरू किया है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वैल्यूएशन आखिर कहां स्थिर होंगे।

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स के सिर्फ शेयर ही टूटे हैं, बिजनेस के स्तर पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं टूटा है। उन्होंने जिक्र किया कि टेस्ला ने अभी हाल में अपना सबसे मजबूत तिमाही डिलीवरी आंकड़ा पेश किया है, फिर भी शेयर टूटे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी कंपनी के इलेक्ट्रिक वेईकल बिजनेस की बजाय उसके लंबे समय के ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटैक्सी विजन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। स्पेसएक्स की स्थिति भी ऐसी ही है। स्टारलिंक लगातार प्रॉफिटेबल तरीके से बढ़ रहा है और कंपनी का लॉन्च बिजनेस भी विस्तार कर रहा है, लेकिन पोस्ट-लिस्टिंग शुरुआती तेजी के बाद शेयरों पर दबाव आया है।

क्या करना चाहिए भारतीय निवेशकों को?

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट खरीदें या बेचें, फैसले जितना साधारण नहीं है बल्कि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि पोर्टफोलियो एलोकेशन और निवेश के लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि एआई और स्पेस में 5–10 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो कुछ हफ्तों की गिरावट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी देखने की सलाह दी है कि कहीं इन शेयरों में उनका एक्सपोजर पहले की तेजी के कारण जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय निवेशकों को बिना सोचे-समझे नई लिस्ट हुई हाई-वैल्यू अमेरिकी कंपनियों में निवेश करने से सावधान किया। उनका मानना है कि अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश इतना छोटा होना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित न हो।

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