नेपाल की तबाही में भारत बना सबसे बड़ा सहारा:5 खेप में 74 टन राहत भेजी; डॉक्टर, रेस्क्यू एक्सपर्ट और फोरेंसिक टीम भी पहुंचाई

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं। यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है। भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है। अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है। जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है। बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है। दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है। यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी। आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है। नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है। —————— नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’: मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। पूरी खबर पढ़ें…

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

Hathini Kund Barrage Accident

हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज में स्पेशल फोर्स के जवानों की ट्रेनिंग के दौरान मंगलवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यमुना में अभ्यास के दौरान जवानों को ले जा रही मोटर बोट अचानक बंद हो गई। इसी बीच तेज बहाव के चलते बोट बहने लगी और उसमें सवार 5 जवान नदी के पानी में गिर गए। हादसे के बाद 3 जवान किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो जवानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

 

मीडिया खबरों के अनुसार, स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग 30 अगस्त से चल रही थी और मंगलवार को इसका आखिरी दिन था। शाम करीब 5 बजे यमुना की अपस्ट्रीम में जवानों का अभ्यास कराया जा रहा था। ट्रेनिंग के दौरान जवान हेलिकॉप्टर से एक-एक कर यमुना में मौजूद मोटर बोट पर उतर रहे थे। जवानों के बोट पर पहुंचने के बाद अचानक मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई। इसी दौरान तेज पानी के बहाव ने बोट को अपनी चपेट में ले लिया और वह बहने लगी। बोट पर सवार जवान पानी में गिर गए।

तेज बहाव में तैरकर निकले 3 जवान 

हादसे के बाद तीन जवानों ने पश्चिमी यमुना नहर की ओर तैरकर सुरक्षित निकलने की कोशिश की। उस वक्त नहर में करीब 14,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। तेज बहाव के बीच तीनों जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर नहर के खुले गेट से बाहर निकलने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उनके पानी में बह जाने की आशंका को देखते हुए सेना और रेस्क्यू टीम ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

 

जवानों की तलाश जारी

2 जवानों के लापता होने की सूचना मिलते ही सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। कर्नल योगेंद्र के नेतृत्व में सेना की टीम यमुना और पश्चिमी यमुना नहर के संभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। रेस्क्यू टीम रस्सियों और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से नदी और नहर में लापता जवानों की तलाश कर रही है। फिलहाल अभियान जारी है और सेना की टीम दोनों जवानों को खोजने में जुटी हुई है।

Video: भगवान को अकेला नहीं छोड़ सकता… चित्रकूट बाढ़ के बीच भावुक करने वाला नजारा! DM-SP जोड़ते रहे हाथ फिर भी मंदिर से नहीं निकले पुजारी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ के बीच सामने आई एक तस्वीर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया और कई इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान एक मंदिर में मौजूद पुजारी ने वहां से निकलने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए समझाया, लेकिन वह अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हुए। पुजारी का कहना था कि वह अपने आराध्य को अकेला छोड़कर नहीं जा सकते। बाढ़ के बीच उनका यह फैसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वीडियो देखने के बाद लोग उनकी आस्था और समर्पण की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जता रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रहा है। जलस्तर बढ़ने से रामघाट समेत कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

चारों तरफ पानी, मंदिर में क्या हुआ?

लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान प्रशासन की टीम बाढ़ प्रभावित मंदिरों का जायजा लेने पहुंची। एक मंदिर में पुजारी मौजूद मिले। अधिकारियों ने उन्हें बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने मंदिर छोड़ने से इनकार कर दिया।

अधिकारियों ने पुजारी को क्यों समझाया?

बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसी वजह से अधिकारियों ने मंदिर में मौजूद पुजारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वहां से निकलने के लिए कहा। प्रशासन की कोशिश प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की है।

चित्रकूट में बिगड़े बाढ़ के हालात

मंदाकिनी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण रामघाट समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निर्मोही अखाड़ा और टेम्पो स्टैंड के आसपास भी पानी पहुंच गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

रामघाट में 400 से ज्यादा दुकानें प्रभावित

बाढ़ का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ा है। रामघाट और आसपास की 400 से अधिक दुकानें पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। करीब 20 से 25 होटल भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के सामने कारोबार के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर भी परेशानी खड़ी हो गई है।

लोगों की आवाजाही भी हुई मुश्किल

जलभराव के कारण सामान्य रास्तों से आवाजाही प्रभावित हुई है। कई लोगों को कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के आसपास हाथ ठेलों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ ने स्थानीय जनजीवन को किस तरह प्रभावित किया है।

वीडियो वायरल होने के बाद छिड़ी चर्चा

पुजारी और प्रशासन के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति में सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।

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Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच जब चारों तरफ तबाही का मंजर था, तब एक महिला पायलट आसमान से जिंदगी बचाने की जंग लड़ रही थी। नाम है प्रिया अधिकारी, नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन। प्रिया ने महज छह दिनों में करीब 100 रेस्क्यू मिशन पूरे कर बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।

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41 वर्षीय प्रिया अधिकारी इन दिनों नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रसुवा जिले के तिमुरे इलाके में भी उन्होंने कई रेस्क्यू उड़ानें भरीं।  प्रिया की कहानी सिर्फ एक महिला पायलट की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस हिम्मत की कहानी है, जिसमें आसमान से नीचे दिख रही तबाही के बावजूद किसी अनजान इंसान की जिंदगी बचाने का जज्बा कायम रहता है। जहां जमीन पर रास्ते खत्म हो गए, वहां प्रिया ने आसमान को रास्ता बनाया और जिंदगी की तलाश जारी रखी।

6 दिन में करीब 100 रेस्क्यू मिशन

तिमुरे में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। करीब 20 हेलिकॉप्टर लगातार राहत और बचाव अभियान में लगे हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रिया के मुताबिक, कई बार एक ही स्थान पर पांच या छह हेलिकॉप्टरों को एक साथ उतरकर लोगों को निकालना पड़ता है। ऐसे में पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से समन्वय करना पड़ता है।

 

लेकिन चुनौती केवल हेलिकॉप्टर उतारने तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में इतनी मोटी कीचड़ जमा है कि हेलिकॉप्टर को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारकर इंजन बंद करना संभव नहीं है। ऐसे में पायलटों को रेस्क्यू के दौरान लगातार पावर बनाए रखनी पड़ती है।

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नीचे तबाही का मंजर, फिर भी बचाने की उम्मीद

प्रिया ने तिमुरे के ऊपर से उड़ान के दौरान जो दृश्य देखे, उन्हें शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। बाढ़ के बाद कई जगह शव बिखरे हुए दिखाई दे रहे थे। इसके बावजूद राहत अभियान लगातार जारी रहा। पहले दो दिनों में ही इलाके से 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इस अभियान में सेना के Augusta हेलिकॉप्टरों समेत पांच-छह हेलिकॉप्टर लगातार जुटे रहे। प्रिया कहती हैं कि उन्होंने ऊपर से पूरी बर्बादी देखी—हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए, घर और बुनियादी ढांचा बह गया और कई लोगों की जान चली गई।

 

‘आप बच गए हैं…’ यही प्रिया की सबसे बड़ी खुशी

 

तबाही के बीच भी प्रिया को मुस्कुराने की एक वजह मिलती है—जिंदा बचे लोग। रेस्क्यू के दौरान जब वह किसी जगह हेलिकॉप्टर उतारती हैं और लोगों को हाथ हिलाते हुए देखती हैं, तो उनके लिए वह पल बेहद भावुक होता है। वह उनसे कहती हैं—“आप बच गए हैं।” प्रिया के लिए ये लोग उनके रिश्तेदार नहीं हैं। वे उनके लिए अजनबी हैं, लेकिन किसी की जिंदगी बचाने के बाद मिलने वाली भावनात्मक खुशी उनके लिए किसी रिश्ते से कम नहीं।

 

उन्होंने बताया कि इस बाढ़ की भयावहता इतनी ज्यादा है कि उन्हें यह नेपाल में आई 2015 की विनाशकारी भूकंप त्रासदी से भी बड़ी लगती है।

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कैसे बनीं नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन?

 

प्रिया अधिकारी का एविएशन तक पहुंचने का सफर भी बेहद प्रेरणादायक है। हेलिकॉप्टर उड़ाना लंबे समय तक पुरुषों का दबदबा वाला क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन प्रिया ने इस सोच को चुनौती दी। उन्होंने Environmental Science की पढ़ाई की और इसके बाद Cabin Crew के तौर पर काम किया। एक हेलिकॉप्टर जॉय राइड ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

 

इसके बाद उन्होंने हेलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग लेने के लिए फिलीपींस का रुख किया। आवश्यक फ्लाइंग आवर्स पूरे करने के बाद उन्होंने पायलट के रूप में अपना करियर आगे बढ़ाया और आखिरकार 2017 में फुल-टाइम हेलिकॉप्टर पायलट बन गईं। आज वही प्रिया अधिकारी नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन हैं और प्राकृतिक आपदा के बीच अपनी हिम्मत, हुनर और अनुभव के दम पर लोगों की जिंदगी बचाने में जुटी हैं।

Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।

Nepal: नेपाल में कुदरत का कहर, मलबे में दबे एक ही घर से मिले 23 शव! 4 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। इस फ्लड से हुए तबाही का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या 962 तक पहुंच गया है। वहीं 4 हजार से ज्यादा लोग अभी लापता है। फ्लड प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य के दौरान ऐसी तस्वीरें सामने आ रही है, जिसे देख हर किसी का दिल पसीज जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार सुबह नुवाकोट के बेत्रावती इलाके में राहत और बचाव अभियान के दौरान एक घर से कम से कम 23 शव बरामद किए गए। एक ही जगह से इतनी बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद इलाके में मातम का माहौल है। ये घर भोटेकोशी नदी की बाढ़ के मलबे में दब गया था। बाढ़ के बाद अब भी कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है और प्रशासन प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटा है।

एक घर में मिले 23 शव

इंडिया टुडे के मुताबिक, नेपाल के नुवाकोट जिले में बाढ़ के बाद मलबे में दबे एक घर से 23 लोगों का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। नेपाल में बाढ़ के छह दिन बाद नुवाकोट में एक घर से मिले शवों को लेकर अधिकारियों ने आशंका जताई कि, बाढ़ से बचने के लिए कुछ लोग घर के अंदर जमा हुए होंगे। लंबे समय तक मलबे में दबे रहने के कारण शवों की हालत काफी खराब हो गई थी, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। यह घटना उस भीषण बाढ़ के बाद सामने आई है, जिसने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव काम जारी

रिपोर्ट के अनुसार, बिदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती में सोमवार को बचाव दल ने छह शव बाहर निकाले थे, जबकि मंगलवार को बाकी शवों को निकालने का काम जारी रहा। नुवाकोट जिला पुलिस के एसपी बिपिन रेगमी ने भी बताया कि, घटनास्थल से कई शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ के बाद राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही का आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक आपदा से मरने वालों की संख्या 950 से ज्यादा हो चुकी है, वहीं 4,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

राहत और बचाव दल मलबे और कीचड़ में फंसे लोगों को लगातार तलाश रहे हैं। वहीं लापता लोगों के परिवार अपने अपनों के वापस मिलने की उम्मीद में हैं और उनकी कोई खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

मलबे में फंसे सैकड़ों कर्मचारी

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के लापता होने की खबर है। नेपाल की बिजली कंपनियों के एक निजी क्षेत्र के संगठन के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में करीब 900 कर्मचारी अभी तक नहीं मिल पाए हैं। इनमें से लगभग 500 कर्मचारियों के मलबे और कीचड़ से भरी सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल इन कर्मचारियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में तबाही के बीच बचावकर्मियों ने बचाई मासूम की जान, डेढ़ महीने के बच्चे का रेस्क्यू, वीडियो वायरल

VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।

बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।

यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके से डेढ़ महीने के बच्चे को बचाकर रसुवा धांगे कैंप लाया गया

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।

सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

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955 मौतों के बाद भी खत्म नहीं हुआ खौफ! नेपाल में सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को बचाने की जंग जारी

नेपाल और तिब्बत में आई भयंकर बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में पानी और मलबे के कारण हालात बेहद खराब हैं। सोमवार शाम तक 955 लोगों की मौत और 4,471 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी है। कई लोग सुरंगों और मलबे के बीच फंसे होने की आशंका है। उन्हें बाहर निकालने के लिए सेना और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई जगह रास्ते और पुल टूटने से राहत कार्य मुश्किल हो गया है।

ऐसे में ड्रोन, थर्मल कैमरों और दूसरे आधुनिक उपकरणों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। बचाव दल सुरंगों के अंदर भी पहुंचकर हर संभव जगह को खंगाल रहे हैं। इस बीच विदेशों में रहने वाले नेपाली और मैपिंग वॉलंटियर्स भी प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाने में मदद कर रहे हैं।

250 मीटर गहरी सुरंग में उतरी टीम

नेपाल आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में दाखिल हुई। यहां 14 लोगों के फंसे होने की आशंका थी। टीम के पास सर्चलाइट और ड्रोन थे और उसने करीब 250 मीटर गहरी सुरंग के आखिरी हिस्से तक पहुंचकर काफी देर तक तलाश की। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद किसी व्यक्ति का कोई सुराग नहीं मिला और टीम को वापस लौटना पड़ा।

चिलिमे प्रोजेक्ट में 100 मीटर बाद रास्ता हुआ बंद

चिलिमे हाइड्रोपावर प्लांट में भी बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। विदेशी विशेषज्ञों के साथ संयुक्त रेस्क्यू टीम सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक पहुंची, लेकिन आगे का रास्ता कीचड़ और गाद से पूरी तरह दबा मिला। मलबे ने बचाव दल की राह रोक दी, जिससे अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

त्रिशूली-3A में रास्ता बनाने के लिए किया गया नियंत्रित विस्फोट

सबसे कठिन अभियानों में त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का रेस्क्यू ऑपरेशन भी शामिल रहा। यहां सुरंग तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीम को नियंत्रित विस्फोट करना पड़ा, ताकि एक नया प्रवेश मार्ग बनाया जा सके। भारी मलबे और बदहाल रास्तों के बीच हर कदम पर बचाव दल को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

सड़कें टूटीं तो आसमान बना रेस्क्यू का रास्ता

बाढ़ ने सड़कें और पुल तक बहा दिए हैं। ऐसे में रेस्क्यू टीमों के लिए कई इलाकों तक जमीन के रास्ते पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। अब ड्रोन आसमान से मलबे के बीच जिंदगी के संकेत तलाश रहे हैं। थर्मल कैमरों की मदद से संभावित रूप से फंसे लोगों और शवों की पहचान की जा रही है। यही ड्रोन दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी मदद कर रहे हैं।

विदेशों में बैठे नेपाली और मैपिंग वॉलंटियर्स भी जुटे

इस मुश्किल घड़ी में मदद सिर्फ जमीन पर मौजूद रेस्क्यू टीमों तक सीमित नहीं है। विदेशों में रहने वाले नेपाली और दुनियाभर के मैपिंग वॉलंटियर्स भी अभियान में योगदान दे रहे हैं। वे सैटेलाइट तस्वीरों को स्कैन कर बाढ़ से प्रभावित इलाकों का नक्शा तैयार करने में मदद कर रहे हैं, ताकि बचाव दल उन जगहों तक जल्दी पहुंच सके जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है।

हर सुरंग, हर मलबे के ढेर में उम्मीद की तलाश

बाढ़ की तबाही ने नेपाल के हाइड्रोपावर क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं सुरंगें मलबे से बंद हैं तो कहीं सड़क और पुल पूरी तरह गायब हो चुके हैं। इसके बावजूद रेस्क्यू टीमें एक-एक सुराग तलाश रही हैं। अंधेरी सुरंगों से लेकर आसमान में उड़ते ड्रोन तक, हर कोशिश का मकसद एक ही है कहीं कोई जिंदगी अब भी मदद का इंतजार तो नहीं कर रही।

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टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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यूपी में बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान युद्ध स्तर पर जारी

यूपी में बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार का राहत अभियान युद्ध स्तर पर जारी

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही उनके लिए भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था लगातार की जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक रविवार तक प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। अब तक प्रदेश में कोई जनहानि नहीं व पशुहानि नहीं होने पाई है। योगी सरकार की निगरानी में राहत कार्य प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जारी हैं। 

 

वर्तमान में बाढ़ से करीब 1.70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सरकार का पूरा जोर प्रभावित आबादी को तत्काल राहत सहायता उपलब्ध कराने और लोगों को सुरक्षित रखने पर है। इसके लिए प्रभावित इलाकों में अब तक कुल 1,633 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। इन चौकियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

बाढ़ पीड़ितों तक भोजन पहुंचाने के लिए व्यापक इंतजाम

बाढ़ जैसी आपदा में सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने की है। योगी सरकार ने इस मोर्चे पर भी व्यापक इंतजाम किए हैं। रविवार की स्थिति के मुताबिक 2,024 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 10,784 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। अब तक कुल 55,572 खाद्यान्न पैकेट और 3.02 लाख लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए जा चुके हैं।

 

इससे राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। प्रशासन द्वारा जरूरत के अनुसार राहत सामग्री का वितरण लगातार किया जा रहा है, ताकि बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के बावजूद लोगों को भोजन के लिए परेशान न होना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी रखा गया सक्रिय

राहत कार्यों के साथ सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में 200 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। इसके अलावा स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5,432 क्लोरीन टैबलेट तथा 5,441 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ के दौरान दूषित पानी और संक्रमण से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मेडिकल टीमों की तैनाती और क्लोरीन टैबलेट तथा ओआरएस के वितरण से प्रभावित आबादी को तत्काल स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

525 नाव-मोटरबोट से राहत-बचाव अभियान

बाढ़ के कारण जिन क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है, वहां राहत एवं बचाव कार्य के लिए 525 नाव एवं मोटरबोट लगाए गए हैं। इनके माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच बनाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

254 बाढ़ शरणालय स्थापित

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 254 बाढ़ शरणालय स्थापित किए हैं। इनमें से 46 शरणालय वर्तमान में संचालित हैं। संचालित शरणालयों में 1,151 लोग रह रहे हैं, जबकि अब तक लगभग इतनी ही संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

बाढ़ से प्रभावित जिले

30 अगस्त की स्थिति के अनुसार प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर और वाराणसी शामिल हैं। इन सभी जिलों में प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में लगातार जुटी हैं।

पशुओं के लिए भी राहत इंतजाम

योगी सरकार के राहत अभियान में प्रभावित पशुओं को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में प्रभावित 20,556 पशुओं के लिए 425.89 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी सहायता

बाढ़ प्रभावित विभिन्न जिलों में अब तक 12 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 11 मामलों में क्षतिग्रस्त मकानों के सापेक्ष सहायता वितरित की जा चुकी है। वहीं राहत आंकड़ों में बाढ़ से अब तक जनहानि और पशुहानि शून्य दर्ज की गई है।