Varanasi Durga Puja: एक मूर्ति पर 5000-8000 तक का मुनाफा, कोलकाता के कारीगर यूं सवार रहे बनारस में मूर्तियों का कारोबार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी को मिनी बंगाल कहा जाता है। इस शहर में दुर्गा पूजा उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिलता है। नवरात्रि के पहले यहां कोलकाता से आए कारीगर बंगाली थीम पर देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। इन प्रतिमाओं की डिमांड वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में है। नवरात्रि में मूर्तियों को बनाने का ये कारोबार करोड़ों का है। इसके लिए वाराणसी में कई कारखाने हैं जहां दर्जनों लोग काम करते हैं। नवरात्रि से करीब 4 महीने पहले से इस काम को शुरू किया जाता है।

शहर के पांडेय हवेली इलाके में देवी की प्रतिमा को तैयार करने वाले कई कारखाने हैं। तंग गलियों में बसे इन कारखानों में सैकड़ो प्रतिमाएं तैयार होती हैं। कारीगर ऑर्डर के हिसाब से इन प्रतिमाओं को अलग-अलग आकार में तैयार करते हैं। विश्वनाथ मूर्ति कला केंद्र के सुनील पाल ने बताया की वो लोग दुर्गा पूजा उत्सव के लिए हर साल देवी की पारंपरिक यानी बंगाली थीम पर आधारित प्रतिमा को तैयार करते हैं। उनके कारखाने में कोलकाता के आधा दर्जन कारीगर काम करते हैं।

सामान्य तौर पर वो 5 फीट से लेकर 12 फीट तक की देवी प्रतिमा बनाते हैं। बाजार में इस आकार की प्रतिमा की खूब मांग होती है। उन्होंने बताया की साइ और डिजाइन के हिसाब से ही इनकी कीमत तय होती है। देवी की जो प्रतिमाएं 8 से 12 फीट की होती हैं उसकी कीमत 22,000 से 30,000 के बीच होती है। अलग-अलग कई स्टेप्स में इसे तैयार किया जाता है,इसलिए एक प्रतिमा को बनाने में करीब 20 से 25 दिन का वक्त लगता है। उनके कारखाने में दशकों से यह काम होता चला आ रहा है। बताते चलें की सुनील के कारखाने में हर साल 50 से ज्यादा मां दुर्गा की बड़ी प्रतिमाएं तैयार होती हैं।

इसके अलावा भी इस इस इलाके में बंशीचरण पाल का कारखाना भी हैं जहां वो भी लगभग 50 के करीब प्रतिमाओं को तैयार करते हैं। उन्होंने बताया की वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया सहित कई जिलों में उनकी बनाई प्रतिमा सालों से जा रही हैं। हालांकि बदलते दौर में अब वहां भी कुछ कारीगर इस काम को कर रहें है। इसके अलावा वाराणसी के कई पूजा पंडालों के लिए कारीगर सीधे कोलकाता से आते हैं। जो विशेष ऑर्डर पर 15 से 20 फीट ऊंची प्रतिमाओं को तैयार करते हैं। हालांकि इन प्रतिमाओं की कीमत 50 हजार से 80 हजार के बीच होती है।

सुनील पाल ने बताया की एक प्रतिमा को तैयार करने में जो लागत आती है मौजूदा समय पर उसपर 40 से 45% तक फायदा होता है, हालांकि इसमें ज्यादातर पैसे कारीगरी पर खर्च होते हैं। लेकिन फिर भी एक प्रतिमा पर आसानी से 5000 से 8000 रुपये तक की बचत होती है। अकेले वाराणसी जिले में शहर से लेकर गांव तक छोटे बड़े 500 से ज्यादा सार्वजनिक पूजा पंडाल सजते हैं।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

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अब दिल्ली-नोएडा भागने की जरूरत नहीं! काशी में खुलेगा अपोलो का 400 बेड वाला हाईटेक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल

Apollo Hospital Varanasi: यूपी का वाराणसी मेडिकल का बड़ा हब बनता जा रहा है। टाटा कैंसर संस्थान, शंकर नेत्रालय के बाद अब अपोलो अस्पताल का बड़ा केंद्र भी यहां खुलेगा। अपोलो अस्पताल के इस सेंटर में मरीजों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिलेंगी। शहर के बड़ा लालपुर इलाके में 400 बेड वाले इस मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण होगा। इसका काम भी शुरू हो चुका है। सिर्फ अपोलो ही नहीं, बल्कि मेदांता ग्रुप भी वाराणसी में हाईटेक अस्पताल खोलने की तैयारी में है।

लग गई फाइनल मुहर

वाराणसी के बड़ा लालपुर ट्रेड फैसिलिटी सेंटर के करीब 13 हजार वर्ग मीटर में इस हाईटेक अस्पताल का निर्माण हो रहा है। वाराणसी विकास प्राधिकरण ने अपोलो मेडिक्स इंटरनेशनल लाइफ साइंस लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 400 बेड के इस अस्पताल के नक्शे पर मुहर भी लगा दी है। इस अस्पताल में डबल बेसमेंट के साथ ग्राउंड फ्लोर सहित 7 फ्लोर हैं। डबल फ्लोर वाले इस बेसमेंट में करीब 400 फोर व्हीलर वाहन खड़े हो सकेंगे।

एक ही छत के नीचे मिलेगा सबकुछ

इस हाईटेक सुपर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, गायनेकोलॉजी सहित कई सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा जनरल सर्जरी, आईवीएफ सेंटर, मॉडर्न ओटी, आईसीयू सहित लेबोरेटरी, सीटी स्कैन (CT Scan), एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसी एडवांस्ड जांच सुविधाएं मरीजों को एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इस सेंटर में बड़े शहरों के एक्सपर्ट डॉक्टर्स मरीजों का इलाज करेंगे। 400 बेड वाले इस हाईटेक अस्पताल के निर्माण में 189 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

बन रहा मेडिकल हब

वाराणसी के डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वाराणसी मेडिकल का बड़ा हब बन रहा है। यहां पहले से आईएमएस बीएचयू, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के अलावा अगले साल तक राजकीय मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो जाएगा। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर के कई बड़े अस्पताल भी यहां इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यहां और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल अपोलो अस्पताल के सेंटर का निर्माण यहां हो रहा है। मेदांता ग्रुप के लोग भी यहां इसके लिए जमीन तलाश रहे हैं।

पूर्वांचल और बिहार के मरीजों को सीधा फायदा

इसका फायदा वाराणसी सहित न सिर्फ पूर्वांचल के जिलों को मिलेगा, बल्कि बिहार-झारखंड से नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों का रुख करने वाले मरीज भी वाराणसी में आकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। बता दें कि फिलहाल बीएचयू अस्पताल में हर दिन बिहार और दूसरे राज्यों से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं।

 रिपोर्ट- अभिषेक जायसवाल

वाराणसी में देश के पहले अर्बन रोपवे का काम कहां तक पहुंचा? इसके स्टेशन, किराया और 15 मिनट वाले नए रूट की पूरी डिटेल जानिए

Varanasi Ropeway Project: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार हो रहा है। कैंट से गोदौलिया तक बन रहे इस रोप वे ट्रांसपोर्ट से 4 किलोमीटर का सफर आसान होगा। अब तक रोप वे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम करीब पूरा हो चुका है। इस रोपवे ट्रांसपोर्ट से गोदौलिया-कैंट रूट पर गाड़ियों का प्रेशर कम होगा और इससे रोजाना करीब 90 हजार लोग सफर कर पायेंगे। इस रोप वे ट्रांसपोर्ट की शुरुआत के बाद काशी में टूरिज्म को नया आयाम भी मिले गा। रोपवे इस प्राचीन शहर में पर्यटकों को बिलकुल अलग अनुभूति कराएगा। अब तक पहाड़ी इलाकों में तो लोग रोपवे का सफर करते है लेकिन शहरी इलाके में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर पर पहली बार लोग ऐसे सफर का एक्सपीरियंस उठाया जा सकेगा।

वाराणसी में बन रहें रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए शहर में कुल 5 स्टेशन बनाए गए है। इसमें कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। हर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच सफर के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को 10 रूपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा। जो लोग कैंट से सीधे गोदौलिया तक का सफर करेंगे उन्हें इसके लिए 50 रूपये खर्च करने होंगे। फिलहाल सड़क मार्ग से भी कैंट से गोदौलिया तक के सफर के लिए करीब इतना ही किराया लोगों को देना होता है। रोपवे से इस सफर को सिर्फ 15 से 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। फिलहाल सड़क मार्ग से इस सफर के लिए लोगों को अभी 35 से 45 मिनट का समय लगता है।

इस रोपवे को कौन बना रहा?

वाराणसी में नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैंनेजमेंट लिमिटेड इस काम को पूरा कर रही है। कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा के स्टेशन के साथ यहां रोप वे ट्राली के ट्रायल का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। वहीं गिरजाघर और गोदौलिया स्टेशन का काम फिलहाल तेजी से जारी है। यहां तारों पर गंडोला की टेस्टिंग भी हो रही है। वाराणसी के कमिश्नर एस राजलिंगम ने बताया की रोपवे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगले महीने तक बाकी बचे काम को भी पूरा किया जा सकता है।

इस प्रोजेक्ट पर कितना हो रहा खर्च, ये भी जानिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर कुल 807 करोड़ रूपये खर्च हो रहे हैं। वाराणसी में बन रहा देश का पहला अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट को भी वाराणसी के थीम पर ही बनाया जा रहा है। यहां के स्टेशन पर आप भगवान शिव के साथ घाटों का खूबसूरत थीम भी दिखेगी। इसके अलावा जिस ट्राली (गंडोला) से यात्री सफर करेंगे उनमें भी घाट और मंदिर की झलक पर्यटकों को दिखेगी। रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए वाराणसी में 29 टॉवर बनाए गए है। इन टॉवर की ऊंचाई 55 मीटर तक है। यानी पर्यटक काशी की खूबसूरत छठा को 150 फीट की ऊंचाई से निहार सकेंगे।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हर स्टेशन पर 2 से 3 मिनट के अंतराल पर रोपवे ट्राली मिलेगी। इसमें एक बार 10 यात्री सफर कर पाएंगे। हर घंटे करीब 6 हजार लोग इससे सफर करेंगे। पुरे दिन में करीब 16 घंटे इसका संचालन होगा। यानी एक दिन में करीब 90 हजार से ज्यादा लोग इससे सफर कर पाएंगे। रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार होने के बाद पर्यटक आसानी से काशी विश्वनाथ धाम पहुंच सकेंगे।

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टूरिज्म वेलफेयर एसोशिसन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया की रोप वे ट्रांसपोर्ट से सफर करना यहां आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए बिलकुल नया अनुभव होगा। इसलिए इसकी शुरुआत के बाद यहां टूरिज्म इंड्रस्टी को एक बार फिर बूस्टअप मिलेगा।

(वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट)

दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के लिए 6 MMI प्लान, मां आनंदमयी मार्ग एलिवेटेड रोड और मुकरबा चौक प्रोजेक्ट मंजूर, इनकी डिटेल जानिए

दिल्ली के उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में आज यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग) सेंटर (UTTIPEC) की 70वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई। इस दौरान, DMRC के छह MMI प्रोजेक्ट्स और PWD, GNCTD के दो सड़क प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की गई और उन्हें मंजूरी दी गई।

बता दें कि बैठक में DDA, GNCTD, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, DMRC, PWD, MCD, NDMC, भारतीय रेलवे, NCRTC और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इन 6 मेट्रो स्टेशनों के MMI प्लान को मिली मंजूरी

बैठक में मंजूर किए गए छह मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन (MMI) प्लान में येलो लाइन पर GTB नगर मेट्रो स्टेशन, वायलेट लाइन पर सरिता विहार मेट्रो स्टेशन, ब्लू लाइन पर अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन, रेड लाइन पर रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन/डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन, येलो लाइन पर मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन और रेड लाइन पर शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

300 मीटर के दायरे में सुधरेगी कनेक्टिविटी

MMI प्लान के तहत मेट्रो जैसे मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम स्टेशन के आसपास करीब 300 मीटर के क्षेत्र को कवर किया जाता है। इन प्लान का मकसद मेट्रो और RRTS जैसे ट्रांजिट स्टेशनों तक लोगों की पहुंच आसान बनाना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। इसके अलावा पैदल चलने की सुविधा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यात्रियों के लिए जरूरी दूसरी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है। बता दें कि DMRC ने दिल्ली में फेज-1 और फेज-2 के मेट्रो कॉरिडोर के 31 स्टेशनों के लिए MMI प्लान तैयार किए थे। इन छह प्लान को मंजूरी मिलने के साथ ही अब UTTIPEC ने सभी 31 MMI प्लान को मंजूरी दे दी है।

दक्षिणी दिल्ली में बनेगा 5.5 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

बैठक में मां आनंदमयी मार्ग पर आउटर रिंग रोड से महरौली-बदरपुर रोड तक प्रस्तावित छह लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही ओखला एस्टेट मार्ग पर क्राउन प्लाजा चौराहे के पास एक अंडरपास और गोलचक्कर (राउंडअबाउट) बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। दक्षिणी दिल्ली में बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 5.5 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर आउटर रिंग रोड को महरौली-बदरपुर रोड से जोड़ेगा।

मां आनंदमयी मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत

प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर, मां आनंदमयी मार्ग पर लगभग 12 चौराहों को बायपास करेगा। इसका मकसद ओखला फेज-1 और फेज-2 इंडस्ट्रियल एरिया से आने वाले मिले-जुले ट्रैफिक की वजह से होने वाली भीड़ को कम करना है। क्राउन प्लाजा चौराहे पर प्रस्तावित अंडरपास और गोलचक्कर से ओखला एस्टेट मार्ग पर गाड़ियों की भीड़ कम करने में और मदद मिलेगी। जमीन के स्तर पर ट्रैफिक कम होने से, इस प्रोजेक्ट के तहत मां आनंदमयी मार्ग पर पैदल चलने वालों और बिना मोटर वाले वाहनों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा भी मिलेगी।

मुकरबा चौक पर जाम कम करने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट

बैठक में मंजूर किया गया दूसरा रोड प्रोजेक्ट उत्तर-पश्चिम दिल्ली में मुकरबा चौक पर भीड़ कम करने से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट में आउटर रिंग रोड पर मौजूद रोड ओवर ब्रिज (ROB) को छह लेन से बढ़ाकर 10 लेन का करना हैं। इसके अलावा, दिल्ली-सोनीपत रेल लाइन के ऊपर जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने के लिए चार लेन का नया ROB बनाया जाएगा।

मौजूदा ROB को चौड़ा करने का मकसद मुकरबा चौक और मधुबन चौक के बीच आउटर रिंग रोड से सफर करने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है। वहीं, जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने वाली प्रस्तावित नई सड़क से मुकरबा चौक से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। इन प्रोजेक्ट्स से मुकरबा चौक के पास NH-44 पर भी ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से दिल्ली में सफर होगा आसान और सुरक्षित

बैठक में मंजूर किए गए इन सभी प्रोजेक्ट्स से मेट्रो स्टेशनों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पैदल चलने वालों के लिए आखिरी मील तक पहुंचना आसान और सुरक्षित होगा, और दिल्ली के कुछ अहम ट्रैफिक पॉइंट्स पर जाम कम होगा। सड़क से जुड़े इन उपायों से आने-जाने वालों के लिए सफर आसान होने की उम्मीद है, जबकि MMI प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आसपास के इलाकों के बीच कनेक्शन को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, ये उपाय दिल्ली के लोगों के लिए रोजाना के सफर को ज्यादा कुशल, सुरक्षित और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाने में मदद करेंगे।

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टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Zomato ने ‘एनालॉग डिश’ पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट

Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।

Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।

‘एनालॉग’ डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।

महाराष्ट्र की कार्रवाई का असर

बता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनर 

Zomato ने कहा कि जिन डिश में ‘एनालॉग डेयरी’ होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।

सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।”

एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंस

Zomato ने कहा, “इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू कर रहे हैं।”

फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

Zomato ने कहा, “जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।”

इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।

Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्त चेतावनी

Zomato ने कहा, “अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।”

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।

CEO ने क्या कहा?

Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: “Zomato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।”

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वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! 84 घाट डूबे, नमस्ते’ प्रतिमा भी पानी में समाई, NDRF अलर्ट पर

Varanasi Flood: सोमवार को वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ता रहा, जिससे सभी 84 घाट डूब गए और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। वहीं, नदी का जलस्तर करीब 69.40 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है।

गंगा का पानी लगातार बढ़ने से घाटों के किनारे मौजूद कई प्रसिद्ध जगहें भी डूब गई है। नमो घाट पर लगी मशहूर ‘नमस्ते’ प्रतिमा भी लगभग पूरी तरह पानी में समा गई है। कई घाटों पर पानी भरने से वहां आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं, लगातार हो रही भारी बारिश के बीच रिवर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में भी पानी घुस गया है।

गंगा का जलस्तर करीब 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नावों के संचालन पर रोक लगा दी है।

रविवार को भी गंगा का पानी लगातार बढ़ा था। इसके चलते वरुणा नदी में पानी का बहाव उल्टा हो गया, जिससे नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में पानी घुसने लगा। हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोग अब सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

बाढ़ के खतरे के बीच प्रशासन ने तैयारियां तेज कीं

बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। वाराणसी में कुल 61 बाढ़ राहत कैंपों की पहचान की गई है, जहां रहने, खाने, पीने के पानी, साफ-सफाई, रोशनी और मेडिकल मदद का इंतजाम किया गया है।

बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में पानी के स्तर और हालात पर नज़र रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 198 नावें तैनात की गई हैं।

आपातकालीन कार्यों के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), वॉटर पुलिस और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

अगर बाढ़ की स्थिति और बिगड़ती है, तो प्रशासन ने पशुओं के लिए भी जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें चारा, पीने का पानी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था शामिल है।

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Varanasi Airport Firing: वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियारों की जांच के दौरान अचानक पिस्तौल से चली गोली! Air India Express के 2 कर्मचारी घायल

Varanasi Airport Firing: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन में रविवार (16 अगस्त) सुबह जांच के दौरान एक यात्री के लाइसेंसी पिस्तौल से अचानक गोली चल जाने से हड़कंप मच गया। गोली की चपेट में आने से एयरपोर्ट पर तैनात एक महिला कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि मुंबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए आजमगढ़ निवासी कमलेश राय पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल थी।

उन्होने बताया कि जांच के दौरान पिस्टल की जांच और उसमें मौजूद गोलियों की गिनती की जा रही थी, तभी अचानक फायरिंग हो गई। उन्होंने बताया कि इस घटना में जांच कर रही महिला कर्मचारी के पैर में और पास खड़े एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पत्नी के साथ जा रहा था मुंबई

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट नंबर IX-1810 से मुंबई जा रहा था। उसके पास एक पिस्तौल और मैगजीन थी। उसने फ्लाइट में चढ़ने से पहले अधिकारियों को हथियारों की जानकारी दी। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक, जब हथियार और उसके कागजात की जांच हो रही थी, तभी बंदूक अचानक से चल गई। उन्होंने बताया कि हथियार और उसके कागजात की जांच के समय हथियार का मालिक और एयरपोर्ट का स्टाफ दोनों मौजूद थे।

फायरिंग में दो कर्मचारी घायल

गोली पहले जमीन पर लगी और फिर पास खड़े दो स्टाफ सदस्यों को जा लगी। एक महिला स्टाफ सदस्य की जांघ में गोली लगी। जबकि एक पुरुष स्टाफ सदस्य के हाथ में चोट आई। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर के मुताबिक, यह घटना 16 अगस्त, 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे हुई। गुप्ता ने बताया कि घायल दोनों स्टाफ सदस्यों की हालत स्थिर है। फिलहाल, उनका इलाज चल रहा है। ANI के मुताबिक, एयरपोर्ट डायरेक्टर ने कहा कि स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।

वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “आज सुबह करीब 9:30 बजे, मुंबई जाने वाली फ्लाइट IX-1810 में अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे एक यात्री ने फ्लाइट में हथियार ले जाने की जानकारी दी। हथियारों की जांच के दौरान यात्री ने एक राउंड गोली चलाई, जिससे दो AAICLAS स्क्रीनर घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।” पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारी अब इस घटना की विस्तार से जांच कर रहे हैं।

दशकों बाद गंगा में हुआ बड़ा चमत्कार! लौटी सबसे कीमती हिल्सा मछली, जानिए क्यों है ये शुभ संकेत

उत्तर प्रदेश के चंदौली से एक अच्छी खबर सामने आई है। करीब तीन दशक बाद उत्तर प्रदेश के चंदौली में हिल्सा मछली दोबारा दिखाई दी है। पिछले कई सालों से इन इलाकों में नजर न आने वाली हिल्सा मछली अब गंगा नदी के मध्य और ऊपरी हिस्सों में फिर से दिखाई देने लगी है। हिल्सा की ये प्रजाति करीब 30 साल पहले गंगा के ऊपरी इलाकों से गायब हो गई थी और अब यहां दोबारा दिखाई दी है।अधिकारियों के मुताबिक, हिल्सा की वापसी नदी के बेहतर होते पर्यावरण और जलीय जीवों की बढ़ती बायोडायवर्सिटी का संकेत है। इसे गंगा नदी को फिर से स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-CIFRI) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मार्कंडेय महादेव मंदिर के पास गंगा नदी से दो हिल्सा मछलियां मिली हैं। दोनों मछलियों का कुल वजन करीब 740 ग्राम था।

1975 में बैराज के बाद रुक गया रास्ता

पहले हिल्सा मछली बंगाल की खाड़ी से गंगा नदी के रास्ते वाराणसी, प्रयागराज और ऊपरी इलाकों तक पहुंचती थी। लेकिन 1975 में फरक्का बैराज बनने के बाद हिल्सा के नदी में आगे बढ़ने का रास्ता काफी हद तक रुक गया। इसके कारण मध्य और ऊपरी गंगा में हिल्सा की संख्या तेजी से घट गई और इस मछली पर निर्भर नदी किनारे रहने वाले मछुआरों को भी काफी नुकसान हुआ।

ICAR-CIFRI ने शुरु किया प्रोगाम

हिल्सा मछली का पर्यावरण और मछुआरों की कमाई में खास महत्व है। इसे देखते हुए ICAR-CIFRI, बैरकपुर और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने हिल्सा को गंगा में फिर से बढ़ाने के लिए लंबे समय का वैज्ञानिक कार्यक्रम शुरू किया। इसका मकसद हिल्सा के लिए बेहतर माहौल बनाना और नदी में इसकी संख्या बढ़ाना था। संस्थान के अनुसार, 2019 से जून 2026 के बीच हिल्सा की संख्या बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया। ICAR-CIFRI ने नदी में हिल्सा के पालन-पोषण और संख्या बढ़ाने, कृत्रिम प्रजनन, तैयार अंडों और स्पॉन को नदी में छोड़ने के साथ मछलियों की टैगिंग और उनकी निगरानी की। इस पूरी प्रक्रिया में नदी से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया गया।

मछलियों की हुई टैगिंग

इस अभियान के दौरान 3.85 लाख से ज्यादा छोटी और बड़ी हिल्सा मछलियों को नदी में छोड़ा गया। इसके अलावा, 40 लाख से अधिक निषेचित अंडे और करीब 9.4 लाख छोटे स्पॉन भी फरक्का बैराज के ऊपर नदी में छोड़े गए। मछलियों की टैगिंग और लगातार निगरानी से उनकी आवाजाही, जीवित रहने और एक जगह से दूसरी जगह जाने की जानकारी जुटाई गई। 2023 से 2025 के बीच निगरानी में हिल्सा की आवाजाही मिर्जापुर तक देखी गई, जिससे पता चला कि यह मछली धीरे-धीरे अपने पुराने इलाकों में वापस लौट रही है।

हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली

विशेषज्ञों के मुताबिक, हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली है और इसका नदी में दोबारा दिखना गंगा के पानी और उसके आसपास के वातावरण के बेहतर होने का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ICAR-CIFRI और NMCG की साझेदारी में वैज्ञानिक शोध, नदी संरक्षण, मैदानी स्तर पर किए गए काम और स्थानीय लोगों की भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया। इस पहल से पता चलता है कि लगातार वैज्ञानिक प्रयास, संस्थाओं की जिम्मेदारी और मिलकर बनाई गई योजनाओं के जरिए नदी और उसके जलीय जीवन को बेहतर बनाने में सकारात्मक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

हिल्सा की गंगा में दोबारा वापसी से दूसरी स्थानीय और प्रवासी मछलियों को भी नदी में फिर से बसाने की उम्मीद बढ़ी है। संस्थान के मुताबिक, इससे यह बात भी सामने आती है कि नदियों को केवल पानी के इस्तेमाल और प्रबंधन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि एक पूरे जीवित पर्यावरण के तौर पर बचाना और संभालना जरूरी है।

वाराणसी में विदेशी नागरिक का हाईवोल्टेज ड्रामा, घरों में घुसकर फेंका सामान और निवासी को काटा, वीडियो वायरल

Varanasi Foreign National Incident: वाराणसी के एक इलाके में लोग तब दहशत में आ गए जब एक विदेशी नागरिक ने कथित तौर पर इलाके में जमकर हंगामा किया। वह घरों में घुस गया, घर का सामान फेंका और एक निवासी को काट भी लिया, जिसके बाद शहर की पुलिस ने उसे काबू में किया और हिरासत में ले लिया। इस घटना का वीडियो ऑनलाइन सामने आया है, जिसमें वह व्यक्ति चिल्लाता, कूदता और लोगों की तरफ झपटता हुआ दिखाई दे रहा है।

बता दें कि यह घटना गुरुवार, 16 जुलाई को कोतवाली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले सप्तसागर मेडिसिन मार्केट इलाके में हुई। बताया जा रहा है कि विदेशी नागरिक घबराहट की हालत में इलाके में भागा और फिर एक रिहायशी इमारत में घुस गया। वह कथित तौर पर ऊपरी मंजिलों पर चढ़ गया और घर का सामान फेंकने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे शांत करने की कई बार कोशिश की, लेकिन उसने कोई सहयोग नहीं किया।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, वह सिर्फ़ हाफ पैंट पहने हुए दिखाई दे रहा है। वह लोगों पर चिल्ला रहा था, सड़क पर कूद रहा था और आक्रामक व्यवहार कर रहा था। इस हंगामे के दौरान, खबर है कि जब उसे काबू करने की कोशिश की जा रही थी, तो उसने एक निवासी के हाथ पर काट लिया। काफी जद्दोजहद के बाद, स्थानीय लोग उसे काबू करने में सफल रहे, और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।। इसके बाद पुलिस ने उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया।

हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी नागरिक कथित तौर पर भांग के नशे में था। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

इंटरनेट पर विदेशी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग

विदेशी नागरिक के हंगामा करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग उसके व्यवहार पर मजाक कर रहे हैं, जबकि कई लोगों ने स्थानीय लोगों को परेशान करने के लिए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

एक यूजर ने दावा किया, “शायद उसने कुछ नशीली चीज का सेवन किया होगा। उसके कल्चर में यह बहुत आम बात है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “वाराणसी में भांग के इस्तेमाल को लेकर नियम सख्त होने चाहिए। हाल ही में ट्रेन यात्रा के दौरान वाराणसी से एक व्यक्ति ट्रेन में चढ़ा था, जो पूरी तरह नशे में था। उसे यह भी पता नहीं था कि उसे कहां जाना है और वह टीटी से बहस भी कर रहा था।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या स्थानीय पुलिस कुछ नहीं कर सकती? इसे तुरंत हिरासत में लेना चाहिए, क्योंकि यह लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।”

एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यहीं पर जनता के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।”

एक यूजर ने कहा, “साफ है कि उसने कुछ नशा कर रखा है। अब समय आ गया है कि भारत में भी पुलिस अपराधियों को शांत करने के लिए टेजर का इस्तेमाल करे, जैसा कि अमेरिका में होता है।”

एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या हमारे यहां यूरोप और अमेरिका जैसा डिपोर्टेशन सिस्टम (देश से बाहर भेजने की व्यवस्था) नहीं है?”