Zomato ने ‘एनालॉग डिश’ पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट

Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।

Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।

‘एनालॉग’ डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।

महाराष्ट्र की कार्रवाई का असर

बता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनर 

Zomato ने कहा कि जिन डिश में ‘एनालॉग डेयरी’ होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।

सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।”

एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंस

Zomato ने कहा, “इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू कर रहे हैं।”

फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

Zomato ने कहा, “जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।”

इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।

Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्त चेतावनी

Zomato ने कहा, “अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।”

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।

CEO ने क्या कहा?

Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: “Zomato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।”

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Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 55% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ब्रोकरेज फर्मों ने 5 कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनमें पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, रिटेल और क्विक कॉमर्स जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर शामिल हैं। ब्रोकरेज के हिसाब से इन शेयरों में 55% तक रिटर्न मिल सकता है। आइए जानते हैं इन 5 स्टॉक्स में ब्रोकरेज को क्या संभावनाएं दिख रही हैं।

  1. Cummins India

ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने Cummins India पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹6,150 का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा स्तर से इसमें करीब 18.43% का रिटर्न मिल सकता है।

पावर जनरेशन कंपनी के लिए बड़ा बिजनेस बना हुआ है। डेटा सेंटर की बढ़ती मांग भी कंपनी की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही है। साथ ही CPCB IV+ इंजन वारंटी अवधि से बाहर आने पर आफ्टरमार्केट बिजनेस से अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है।

2. Adani Enterprises

मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹3,880 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, इसमें करीब 25% तक का उछाल देखने को मिल सकता है।

कंपनी एयरपोर्ट, सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, कॉपर और स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कारोबार में मौजूद है। ब्रोकरेज को इन लॉन्ग टर्म बिजनेस से ग्रोथ की उम्मीद है।

3. NTPC

Bernstein ने सरकारी पावर कंपनी NTPC पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹450 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक शेयर में करीब 32% तक बढ़ोतरी की गुंजाइश है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की भूमिका उम्मीद से बड़ी हो सकती है। रिन्यूएबल एनर्जी के साथ स्टोरेज बिजनेस NTPC के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।

4. Avenue Supermarts

CLSA ने Avenue Supermarts पर ‘हाई-कन्विक्शन आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹5,723 का टारगेट प्राइस रखा है। इससे शेयर में करीब 49% का रिटर्न मिलने की संभावना है।

ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का कम ऑपरेटिंग कॉस्ट मॉडल और कम कीमत पर सामान बेचने की रणनीति इसकी बड़ी ताकत है। प्राइवेट लेबल कारोबार और नए स्टोर्स का विस्तार भी ग्रोथ को सहारा दे सकता है।

5. Eternal 327

CLSA ने जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी Eternal को खरीदने की सलाह के साथ ₹506 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक इसमें करीब 55% तक की तेजी देखने को मिल सकती है।

Blinkit का विस्तार इस निवेश की बड़ी वजहों में शामिल है। कंपनी नए शहरों में पहुंच बढ़ा रही है और डार्क स्टोर्स की संख्या भी बढ़ा रही है। Zomato Gold के जरिए ऑर्डर की बढ़ती संख्या और फूड डिलीवरी बिजनेस में सुधार से भी ग्रोथ की उम्मीद है।

Stocks to Watch: 31 अगस्त को ये 14 स्टॉक्स फोकस में रहेंगे, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

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नेपाल बाढ़ में जिंदगी बचाने का खतरनाक मिशन, घने कीचड़ और अंधेरी सुरंग के बीच फंसे लोगों तक ऐसे पहुंचे नेपाली सैनिक, वायरल हुआ Video

नेपाल इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के पानी के साथ आया मलबा और कीचड़ गांवों और इमारतों में फैल गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग जगहों पर फंस गए। हालात इतने मुश्किल हैं कि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन गया है। ऐसे समय में नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। हेलिकॉप्टर की मदद से ऊंची इमारतों और छतों पर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि जवान मुश्किल रास्तों से अंदर जाकर भी लोगों की तलाश कर रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने खराब मौसम, मलबा और दुर्गम इलाका बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस बीच सामने आए कुछ वीडियो बचाव अभियान की गंभीरता और जवानों की कोशिशों की तस्वीर दिखा रहे हैं।

छतों पर फंसे लोगों के लिए देवदूत बना हेलिकॉप्टर

रेस्क्यू ऑपरेशन के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सेना के हेलिकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते नजर आ रहे हैं। एक वीडियो में हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त इमारतों के ठीक ऊपर मंडराता दिखाई देता है, जबकि नीचे बाढ़ का मलबा फैला हुआ है। एक अन्य वीडियो में छत पर फंसा एक व्यक्ति लगातार हेलिकॉप्टर की ओर हाथ हिलाकर मदद मांगता दिखाई देता है। इसके बाद जवानों ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुश्किल हालात में सेना का यह ऑपरेशन लोगों की जान बचाने की जद्दोजहद को दिखाता है।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों तक पहुंचे जवान

बाढ़ के बाद रसुवा जिले में अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर की सुरंग के अंदर भी कई लोग फंस गए थे। इनमें मजदूरों के अलावा कुछ पर्यटक भी शामिल थे। सामने आए वीडियो में नेपाली सेना के दो जवान कीचड़ से भरे रास्ते से आगे बढ़ते हुए सुरंग के अंदर जाते दिखाई देते हैं। बाहर मलबे और कीचड़ की मोटी परत के बावजूद जवानों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की।

नेपाल में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में 579 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में सात लोगों की जान गई है। दोनों तरफ 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में करीब 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में यह संख्या 558 बताई गई है। इनमें 540 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

हजारों जवान राहत और बचाव में जुटे

नेपाल की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के अनुसार, राहत और बचाव अभियान में करीब 14,829 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में सेना की टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हेलिकॉप्टर और जमीनी टीमें उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो अब भी कहीं मलबे, सुरंगों या ऊंची इमारतों में फंसे हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश

इस आपदा का असर भारत के नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 149 लोग चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। करीब 400 भारतीय चीन में सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं लगभग 320 भारतीयों के अभी भी लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी है। नेपाल में जारी यह राहत अभियान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा से लड़ाई नहीं, बल्कि मलबे के बीच जिंदगी की तलाश की लगातार कोशिश है। हर रेस्क्यू के साथ सेना और बचाव दल उन परिवारों के लिए उम्मीद जगा रहे हैं, जो अब भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

Zomato की रक्षाबंधन पोस्ट देखकर Blinkit भी नहीं रहा चुप, दिया ऐसा जवाब कि कमेंट्स में शुरू हो गई मजेदार बहस

Zomato की रक्षाबंधन पोस्ट देखकर Blinkit भी नहीं रहा चुप, दिया ऐसा जवाब कि कमेंट्स में शुरू हो गई मजेदार बहस

रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते और राखी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी झलक देखने को मिली। इस बार Zomato और Blinkit ने अपने मजेदार अंदाज में एक-दूसरे को राखी की बधाई दी। दोनों कंपनियों के बीच हुई हल्की-फुल्की नोकझोंक ने यूजर्स का ध्यान खींच लिया। एक तरफ Zomato ने Blinkit को छोटे भाई-बहन की तरह चिढ़ाया, तो दूसरी ओर Blinkit ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों के पोस्ट पर लोगों ने जमकर कमेंट किए और अपने-अपने अंदाज में मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। रक्षाबंधन के मौके पर शुरू हुई यह छोटी सी सोशल मीडिया बातचीत देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गई।

खास बात यह रही कि दोनों ब्रांड्स ने त्योहार की शुभकामनाओं को बेहद सामान्य तरीके से देने के बजाय उसमें भाई-बहन वाली मस्ती जोड़ दी, जिसे इंटरनेट यूजर्स ने काफी पसंद किया। यही वजह है कि दोनों का यह अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया।

Zomato ने Blinkit को दी मजेदार बधाई

Zomato ने X पर Blinkit को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए एक पोस्ट शेयर किया। पोस्ट में लिखा था, “happy raksha bandhan @letsblinkit ।” लेकिन असली मजा तस्वीर में था। इसमें Blinkit को छोटे भाई-बहन की तरह दिखाते हुए लिखा गया कि उसके “errands” यानी छोटे-मोटे काम करने की एक वजह है क्योंकि वह छोटा sibling है। यह मजाक Blinkit की क्विक-कॉमर्स सर्विस से भी जुड़ा था, जहां कंपनी कुछ ही समय में ग्राहकों तक सामान पहुंचाने के लिए जानी जाती है।

Blinkit ने भी दिया करारा जवाब

Zomato की बात का जवाब Blinkit ने भी उसी अंदाज में दिया। कंपनी ने लिखा, “One of us has to be useful na bhai.” Blinkit के इस जवाब ने बातचीत को और मजेदार बना दिया। इसके बाद यूजर्स ने भी दोनों कंपनियों की इस भाई-बहन वाली नोकझोंक पर खूब कमेंट किए।

यूजर्स को खूब पसंद आया दोनों का अंदाज

सोशल मीडिया यूजर्स ने Zomato और Blinkit के इस मजेदार अंदाज की जमकर तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि दोनों कंपनियां आपस में उतनी बात करती हैं, जितनी वह अपने भाई-बहनों से भी नहीं करता। एक अन्य यूजर ने इस मजेदार बातचीत को पसंद करते हुए लिखा कि उसे दोनों का यह banter काफी अच्छा लग रहा है। कुछ लोगों ने तो खुद भी मजाकिया जवाब देकर इस बातचीत को आगे बढ़ाया।

रक्षाबंधन पर पहले भी हो चुकी है ऐसी नोकझोंक

Zomato और Blinkit के बीच सोशल मीडिया पर मजेदार बातचीत कोई नई बात नहीं है। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों पहले भी एक-दूसरे की टांग खींच चुके हैं। 2024 में Zomato ने Blinkit को अपनी “adopted sis” बताते हुए राखी की शुभकामनाएं दी थीं। Blinkit ने तुरंत जवाब देते हुए कहा था कि वह “adopted” नहीं बल्कि “acquired” है। इस जवाब ने भी सोशल मीडिया यूजर्स को खूब हंसाया था।

भाई-बहन की तरह दिखती है दोनों की सोशल मीडिया केमिस्ट्री

Zomato और Blinkit एक ही ग्रुप का हिस्सा हैं और दोनों के बीच यह मजेदार सोशल मीडिया केमिस्ट्री अक्सर देखने को मिलती है। रक्षाबंधन के मौके पर हुई ताजा नोकझोंक ने एक बार फिर दिखाया कि ब्रांड्स किस तरह त्योहारों को मजेदार अंदाज में लोगों से जुड़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या Swiggy, Zomato और Zepto पर लागू होंगे बाइक-टैक्सी के नियम? जानिए ऐसा हुआ तो क्या बदलेगा

महाराष्ट्र सरकार स्विगी, जोमैटो, जेप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों को परिवहन विभाग से मिले यूनिक लाइसेंस नंबर को दिखाना जरूरी हो सकता है। इसके साथ ही कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल, ड्राइवरों के वेरिफिकेशन और वेलफेयर फंड में योगदान से जुड़े नियमों का भी पालन करना पड़ सकता है। प्रस्तावित नियमों की अभी कानूनी जांच होनी बाकी है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार स्विगी, जोमैटो, जेप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों को महाराष्ट्र बाइक-टैक्सी नियम, 2025 के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो इन कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स को भी कुछ नए नियमों और जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ सकता है।

इन नियमों का करना होगा पालन

रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में बाइक-टैक्सी सेवा को लेकर चर्चा के दौरान कुछ नए प्रस्ताव सामने आए। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हर राइड से 2 प्रतिशत राशि ड्राइवरों के कल्याण के लिए बनाए गए फंड में देने का सुझाव दिया। इसके अलावा, बाइक-टैक्सी परमिट लेने वाले ड्राइवरों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट को जरूरी करने का प्रस्ताव भी रखा गया। वहीं अभी इन प्रस्तावित नियमों की कानूनी जांच होनी बाकी है, क्योंकि ये फिलहाल महाराष्ट्र के कानून और न्याय विभाग के पास हैं।

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने क्या कहा

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाईक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम चाहते हैं कि ये नियम सभी डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स पर लागू हों, क्योंकि ऐसी बाइक बिना किसी रेगुलेटरी नियमों का पालन किए सड़कों पर चलती हैं। लेकिन, यह बदलाव तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक केंद्र सरकार पूरे देश के लिए कानून में बदलाव नहीं करती।”

आ सकता है दिक्कतें

प्रस्तावित नियमों को लागू करने में कानूनी दिक्कत आ सकती है। इसकी एक वजह यह है कि फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स में इस्तेमाल होने वाले कई कम पावर वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन मौजूदा केंद्रीय कानून के तहत मोटर वाहन की श्रेणी में नहीं आते। ऐसे में इन वाहनों पर नए नियम लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अभी डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियां केंद्र सरकार के नियमों के तहत काम करती हैं। इनमें उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019, ई-कॉमर्स नियम 2020 और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 शामिल हैं।

अभी क्या है नियम

मोटर व्हीकल एक्ट के मौजूदा नियमों के अनुसार, 250 वॉट से कम पावर और 25 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रफ्तार वाली कुछ बैटरी से चलने वाली गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कानूनी जानकारों का मानना है कि इसी वजह से महाराष्ट्र के लिए इन वाहनों पर नए एग्रीगेटर जैसे नियम लागू करना आसान नहीं होगा।

Shiprocket IPO Allotment Date: करीब 100 गुना सब्सक्राइब हुआ, जानिए लेटेस्ट GMP और अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Shiprocket IPO: ई-कॉमर्स एनएबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket के IPO को करीब 100 गुना का जोरदार सब्सक्रिप्शन मिला। यह आईपीओ 12 से 14 अगस्त तक खुला था। शिपरॉकेट ने अपने 92-97 रुपये का प्राइस बैंड फिक्स किया था। Shiprocket IPO का अलॉटमेंट 17 अगस्त को फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद कंपनी के शेयर 19 अगस्त को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

IPO का आकार कितना है?

Shiprocket का IPO ₹1,617.48 करोड़ का है। इसमें ₹885.50 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए। वहीं ₹731.98 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे गए।

OFS में Tribe Capital, Moore Strategic Ventures, Lightrock, गौतम कपूर, साहिल गोयल, विशेष खुराना और Agility International Investment जैसे मौजूदा निवेशकों ने हिस्सेदारी बेची।

शिपरॉकेट पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी?

कंपनी IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मार्केटिंग बढ़ाने, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, कुछ कर्ज चुकाने और संभावित अधिग्रहण जैसे कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Temasek और Zomato के निवेश वाली Shiprocket अब सिर्फ शिपिंग कंपनी नहीं रह गई है। यह D2C ब्रांड्स और MSMEs को घरेलू शिपिंग, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, फुलफिलमेंट, विज्ञापन, कैपिटल सॉल्यूशंस और हाइपरलोकल डिलीवरी जैसी सेवाएं देती है।

ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल?

Investorgain के मुताबिक, रविवार को Shiprocket का GMP ₹32 रहा। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 33% प्रीमियम दिखाता है। हालांकि, 13 अगस्त को यह ₹36.50 था, यानी इसमें हल्की नरमी आई है। लिस्टिंग तक GMP में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

NSE अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • NSE की IPO Bid Details वेबसाइट खोलें।
  • Equity & SME IPO बिड डिटेल्स चुनें।
  • Symbol में SHIPROCKET चुनें।
  • PAN या एप्लिकेश नंबर दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

KFin Technologies पर अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • KFin Technologies का IPO स्टेटस पोर्टल खोलें।
  • Shiprocket Ltd चुनें।
  • डीमैट नंबर, एप्लिकेशन नंबर या PAN में से कोई एक दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

Amber Enterprises: ओप्पो, वनप्लस और रियलमी के फोन बनाएगी कंपनी, अगले साल से प्रोडक्शन शुरू होगा

Pension Scheme: अब सिर्फ ₹99 की बचत से सिक्योर होगा फ्यूचर! गिग और डिलीवरी वर्कर्स के लिए PFRDA लाया खास NPS प्लान

NPS for Gig Workers: जोमैटो, स्वैगी, ओला, उबर, ब्लिंकिट और अर्बन कंपनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पेंशन फंड नियामक PFRDA ने देश के लाखों डिलीवरी बॉयज, ड्राइवर्स और सर्विस पार्टनर्स को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के लिए ‘NPS e-shramik Model’ को नए सिरे से हाइलाइट किया है।

इस खास स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई भी वर्कर मात्र ₹99 जैसी छोटी राशि से भी अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स की शुरुआत कर सकता है। आइए जानते हैं आम लोगों और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए यह स्कीम कितनी फायदेमंद है और इसमें कैसे जुड़ सकते हैं।

बिना किसी दबाव के बचत: अपनी मर्जी और क्षमता से जमा करें पैसा

इस योजना को गिग वर्कर्स की अस्थिर और दैनिक कमाई को ध्यान में रखकर बेहद लचीला बनाया गया है। PFRDA ने योगदान के लिए कोई निश्चित सीमा तय नहीं की है। वर्कर जब चाहें और जितना चाहें, अपनी कमाई के हिसाब से पैसा जमा कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई भी वर्कर प्रतिदिन या हर हफ्ते ₹99 जैसी मामूली रकम से भी अपने एनपीएस खाते में पैसे डाल सकता है। साथ ही यह मॉडल NPS कॉर्पोरेट मॉडल पर आधारित है। इसमें पैसा केवल वर्कर, केवल एग्रीगेटर कंपनी, या फिर दोनों मिलकर जमा कर सकते हैं।

कौन-कौन से वर्कर्स उठा सकते हैं इस योजना का लाभ?

यह स्कीम उन सभी युवाओं और कर्मचारियों के लिए बेहतरीन अवसर है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए काम करते हैं:

  • फूड डिलीवरी पार्टनर्स: Zomato, Swiggy आदि।
  • क्विक-कॉमर्स एंड ग्रॉसरी डिलीवरी: Blinkit, Zepto, Instamart आदि।
  • राइड-हेलिंग ड्राइवर्स: Ola, Uber, Rapido आदि।
  • होम सर्विसेज पार्टनर्स: Urban Company और अन्य सर्विस प्लेटफॉर्म्स।

खाता खोलना है बेहद आसान

इस योजना में जुड़ने की प्रक्रिया को एकदम डिजिटल और झंझट-मुक्त बनाया गया है:

आसान KYC: बेसिक केवाईसी के लिए केवल नाम, पता, पैन, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया आधार आधारित ई-केवाईसी या अन्य मान्य तरीकों से मिनटों में पूरी हो जाती है।

PRAN जनरेशन: वर्कर की सहमति से तुरंत एक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) जारी कर दिया जाता है।

नॉमिनी की सुविधा: ऑनबोर्डिंग के 60 दिनों के भीतर माता-पिता की जानकारी और नॉमिनी डिटेल्स दर्ज की जा सकती हैं।

कंपनी बदलने पर भी बंद नहीं होगा अकाउंट

अगर कोई डिलीवरी बॉय या ड्राइवर एक कंपनी जैसे- Zomato छोड़कर दूसरी कंपनी Swiggy या Uber में काम करने जाता है, तो उसका एनपीएस खाता बंद नहीं होगा। वह आसानी से अपने खाते को नए एग्रीगेटर के साथ जोड़ कर सकता है। PFRDA के तय फ्रेमवर्क के तहत ऑनबोर्डिंग के समय पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoPs) वर्कर से कोई खाता खोलने का शुल्क नहीं लेते हैं।

बुढ़ापे में मिलेगा पेंशन और एकमुश्त फंड का दोहरा फायदा

यह योजना एनपीएस के ‘ऑल सिटीजन मॉडल’ के नियमों के तहत काम करती है। इसमें जमा किया गया पैसा शेयर बाजार और सुरक्षित सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट होता है, जिससे लंबी अवधि में एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होता है।

60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर वर्कर्स को एकमुश्त मोटी रकम निकालने का विकल्प मिलता है और बाकी पैसे से जीवनभर हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। गिग वर्कर्स के लिए बिना किसी बड़े बोझ के सुरक्षित भविष्य बनाने का यह सबसे भरोसेमंद जरिया है।

‘3 साल हो गए, जमीन नहीं मिली…’, आधी रात को ऋषभ पंत ने CM धामी से लगाई खास गुहार

Rishabh Pant: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि, इस बार वजह उनकी बल्लेबाजी या फिर शानदार प्रदर्शन नहीं बल्कि शुक्रवार आधी रात को किया गया उनका सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिधे जमीन खरीदने की गुहार लगा दी। जिसके बाद उनका पोस्ट तुरंत वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी।

पंत, जो अभी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में धामी को टैग करते हुए यह अनुरोध किया। 28 वर्षीय पंत ने कहा कि वे पिछले तीन सालों से उत्तराखंड में उपयुक्त जमीन खोजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं मिल पाई जो उनकी जरूरतों को पूरा कर सके।

इससे भी अहम बात यह है कि पंत ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वे अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं और राज्य में रहकर उसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए लिखा, “नमस्ते सर, आप कैसे हैं? उत्तराखंड का स्थानीय होने के नाते, मुझे यहां आए हुए काफी समय हो गया है। मैं दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे यहां रहने के लिए कोई अच्छी और बड़ी जगह नहीं मिल पा रही है। मुझे अपना उत्तराखंड बहुत पसंद है। मेरी आपसे विनम्र विनती है कि जमीन लेने में मेरी मदद करें, क्योंकि आजकल साफ-सुथरी जमीन मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। एक जमीन तो मुझे तब मिलनी चाहिए थी जब मैं राज्य का प्रचार-प्रसार कर रहा था, लेकिन अब मैं सब कुछ छोड़कर अपने मूल स्थान पर वापस आकर उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहता हूं। कृपया इस मामले पर ध्यान दें। 3 साल हो गए हैं और मुझे अभी तक कोई जमीन नहीं मिली है। आपके जवाब का इंतजार है, सर।”

X पर पोस्ट करने के बाद पंत ने साफ किया कि वह जमीन मुफ्त में नहीं मांग रहे थे, बल्कि सरकार से तय दरों पर उसे खरीदना चाहते थे।

पंत ने आगे लिखा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए यह एक शानदार तोहफा होगा, लेकिन अगर आप मुझे इजाजत दें तो मैं इसे सरकार से उनकी तय दरों पर खरीदना चाहूंगा, ताकि कम से कम मैं अपने राज्य में अपना पहला घर बना सकूं। कृपया इसमें मदद करें। सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि इसके लिए क्या करना होगा।”

पंत की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और उनकी इस अनोखी अपील ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।

पंत अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं

बता दें कि पंत का जन्म उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उन्होंने वहीं से अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की थी, जिसके बाद वे प्रोफेशनल तौर पर क्रिकेट खेलने के लिए दिल्ली चले गए। आगे चलकर उन्होंने सभी फॉर्मेट में भारत के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, पंत घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते रहते हैं, लेकिन उत्तराखंड के साथ उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है। उनकी हालिया पोस्ट से पता चलता है कि वे भविष्य में इस राज्य को अपना घर बनाना चाहते हैं और इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब पंत 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए उत्तराखंड में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति बन गए हैं। खबरों के अनुसार, उन्होंने 23.84 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भरा है।

इन आंकड़ों की घोषणा उत्तराखंड के इनकम टैक्स चीफ कमिश्नर ने 24 जुलाई को इनकम टैक्स डे के मौके पर एक कार्यक्रम में की थी। बता दें कि पंत लगातार दूसरे साल राज्य में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्तियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहे।

ABP Live की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पंत का टैक्स योगदान पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। पिछले साल उन्होंने लगभग 10.5 करोड़ रुपये का एडवांस टैक्स भरा था।

27 करोड़ रुपये की IPL डील से लेकर बड़े-बड़े एंडोर्समेंट तक

पंत का भारी-भरकम टैक्स पेमेंट कई सोर्स से हुई उनकी कमाई को दिखाता है, जिसमें BCCI कॉन्ट्रैक्ट, IPL सैलरी, मैच फीस और एंडोर्समेंट डील शामिल हैं।

बता दें कि पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिससे वह लीग के सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक बन गए। हालांकि, जिस अवधि की बात की जा रही है, उस दौरान पंत BCCI के Grade A कॉन्ट्रैक्ट में भी थे और उन्हें सालाना 5 करोड़ रुपये रिटेनरशिप के तौर पर मिलते थे। लेकिन, बाद में उन्हें Grade B में कर दिया गया, जिसके बाद उनकी सालाना रिटेनरशिप घटकर 3 करोड़ रुपये हो गई।

उनकी कमर्शियल कमाई भी उनकी इनकम में काफी योगदान देती है। पंत के एंडोर्समेंट एसोसिएशन Adidas, Dream11, SG, Thums Up, Cadbury, boAt, Noise, Zomato, JSW Cement और MakeMyTrip के साथ हैं।

धामी ने दिया आश्वासन

इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने पंत को आश्वासन दिया है कि मामले में संबंधित लोगों को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने पंत को एक्स पर जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।”

रेस्टोरेंट में ₹30 की इडली, ऑनलाइन ₹90 क्यों? फूड डिलीवरी ऐप्स के बिलिंग गेम की ये कहानी सामने आई

Billing Game News: अगर आप अक्सर स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स से खाना मंगवाते हैं तो आपने भी ये गौर किया किया होगा कि रेस्टोरेंट में मिलने वाले फूड और ऐप पर दिखने वाले की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर होता है। अब इस पूरे मसले पर बेंगलुरु के रेस्टोरेंट मालिकों ने मोर्चा खोल दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के होटेलियर्स ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के अनफेयर और अपारदर्शी कमीशन स्ट्रक्चर पर कड़ा एतराज जताया है।

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उनके बिजनेस को बढ़ाने में मदद की है। लेकिन इनका मौजूदा मॉडल उनके मुनाफे को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को चीजें महंगी मिल रही हैं।

30 रुपये की इडली ऑनलाइन 90 रुपये की क्यों?

By2 Coffee चेन के संस्थापक राघवेंद्र पादुकोण ने रेस्टोरेंट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बीच की कीमतों के भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो इडली रेस्टोरेंट में 30 से 35 रुपये में मिलती है, वही ऑनलाइन ऑर्डर करने पर 80 से 90 रुपये की क्यों हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेस्टोरेंट की वास्तविक कीमत और ऑनलाइन कीमत बिल्कुल एक समान होनी चाहिए जिसमें सिर्फ डिलीवरी चार्ज का अंतर होना चाहिए। राघवेंद्र पादुकोण ने कहा कि रेस्टोरेंट मालिक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वे इस बात का विरोध कर रहे हैं कि यह मौजूदा मॉडल किस तरीके से काम कर रहा है।

कमाई का आधा हिस्सा भी नहीं बचता, जानें कहां-कहां कटता है पैसा

रिपोर्ट के मुताबिक रेस्टोरेंट मालिकों ने उन तमाम कटौतियों की डिटेल में जानकारी दी है जो उनके पेआउट को काफी कम कर देती हैं। इनमें हर ऑर्डर पर लिया जाने वाला कमीशन, ग्राहकों द्वारा दिया जाने वाला प्लेटफॉर्म शुल्क, कलेक्शन चार्ज, पेमेंट गेटवे शुल्क, सर्विस चार्ज पर लगने वाला जीएसटी, कैंसिलेशन चार्ज, लंबी दूरी का शुल्क और प्रमोशनल खर्च शामिल हैं। रेस्टोरेंट मालिकों के मुताबि, इन सभी कटौतियों को एक साथ मिलाने पर उन्हें अपनी वास्तविक बिक्री का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाता है। इससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बुरी तरह प्रभावित होता है।

बिना अनुमति के डिस्काउंट और विज्ञापन का बोझ

कर्नाटक स्टेट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जीके शेट्टी का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स रेस्टोरेंट पार्टनर्स की अनुमति के बिना भारी कटौती कर रहे हैं। होटेलियर्स ने इस बात पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई कि प्लेटफॉर्म्स अपनी मर्जी से विज्ञापन, डिस्काउंट और प्रमोशनल कैंपेन शुरू करते हैं और उनका पूरा खर्च रेस्टोरेंट मालिकों से वसूल लेते हैं। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सिर्फ एक ईमेल नोटिफिकेशन भेज देने को उनकी सहमति नहीं माना जा सकता।

बैंगलोर होटल्स एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष पीसी राव ने कहा कि अगर 20 प्रतिशत कमीशन तय हुआ है तो सिर्फ उतना ही पैसा कटना चाहिए। मालिकों को उम्मीद होती है कि कटौती के बाद उन्हें कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा लेकिन अंत में उनके हाथ में सिर्फ 30 से 40 फीसदी रकम ही बचती है। उनका मानना है कि समझौते के बाद कोई भी हिडन चार्ज नहीं थोपा जाना चाहिए।

रेस्टोरेंट मालिकों की प्रमुख मांगें

इस स्थिति से निपटने के लिए होटेलियर्स ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने कुल सर्विस चार्ज और सभी कटौतियों को मिलाकर अधिकतम 20 प्रतिशत से नीचे सीमित करने की मांग की है। इसके अलावा तय कमीशन के अलावा कोई भी छिपा हुआ खर्च न वसूलने और डिस्काउंट या विज्ञापन कैंपेन चलाने से पहले रेस्टोरेंट से ओटीपी या सीधे तौर पर स्पष्ट अनुमति लेने की बात कही है।

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रेस्टोरेंट मालिकों ने पारदर्शी सेटलमेंट स्टेटमेंट देने की मांग की है ताकि सभी कटौतियों का स्पष्ट हिसाब मिल सके। साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए एक उचित एस्केलेशन सिस्टम बनाने, सर्विस चार्ज पर जीएसटी की समीक्षा करने और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सीमित रखने वाले निष्पक्ष मॉडल को बनाए रखने की मांग की गई है।

जब मन कहे कुछ गलत है तो रुककर जरूर सोचिए… Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने बताया सफलता का ये मंत्र

दीपिंदर गोयल ज़ोमैटो के फाउंडर हैं। वे रिस्क लेने की क्षमता, एंटरप्रेन्योर वाली सोच और अपनी महत्वाकांक्षा के लिए जाने जाते हैं। उनकी सफलता का सफ़र बहुत दिलचस्प है। गोयल का जन्म पंजाब में हुआ था। मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करने से पहले उन्होंने IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वे अपनी कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे, तभी उन्हें ज़ोमैटो बनाने का आइडिया आया। आखिरकार, ज़ोमैटो बनाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनकी लीडरशिप क्वालिटी और ‘फ़र्स्ट मूवर एडवांटेज’ (सबसे पहले शुरुआत करने का फ़ायदा) का सही इस्तेमाल करने की क्षमता ने ही उन्हें आज एक ऐसा एंटरप्रेन्योर बनाया है जिसे हम आदर्श मानते हैं।

गोयल ने अक्सर लीडरशिप, फैसला लेने और इंस्टिंक्ट (अंतर्ज्ञान) के बारे में प्रैक्टिकल बातें शेयर की हैं। एक बार उन्होंने कहा था, “अपने इंस्टिंक्ट (अंदर की आवाज़) की अहमियत समझें—जब आपको लगे कि कुछ गड़बड़ है, तो उस पर गहराई से सोचें और फ़ैसला लेने में सिर्फ़ डेटा को ही हावी न होने दें।” यह वाकई एक दमदार बात है, आइए समझते हैं कि इसका असल मतलब क्या है।

इस कोट का क्या मतलब है?

आज की कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल दुनिया में, हमें सिर्फ़ नंबर, चार्ट और ठोस सबूतों पर भरोसा करना सिखाया जाता है। हम यह भूल जाते हैं कि इंट्यूशन—यानी ‘गट फ़ीलिंग’ (अंदर की आवाज़)—असल में बरसों के सबकॉन्शियस ऑब्ज़र्वेशन (अवचेतन रूप से देखी-परखी बातें), पैटर्न पहचानने और असल ज़िंदगी के अनुभवों का नतीजा होती है। यह कोट हमें याद दिलाता है कि डेटा भले ही काम का हो, लेकिन उसे आपकी अंदर की आवाज़ को पूरी तरह दबाने नहीं देना चाहिए।

इसलिए, अगली बार जब आपको करियर के किसी फ़ैसले, बिज़नेस पार्टनरशिप या ज़िंदगी के किसी बड़े फ़ैसले को लेकर ज़बरदस्त हिचकिचाहट महसूस हो, तो उसे सिर्फ़ इसलिए नज़रअंदाज़ न करें क्योंकि वह कागज़ पर अच्छा लग रहा है। रुकें और सोचें कि आपका इंस्टिंक्ट क्यों चेतावनी दे रहा है। ठोस तथ्यों और इंट्यूशन के बीच तालमेल बिठाने से आप ज़्यादा समझदारी भरे और सही फ़ैसले ले पाते हैं।

आज के समय में यह कितना प्रासंगिक है?

हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जो मेट्रिक्स और एनालिटिक्स से चलती है, जहां लोग अक्सर इंसानी समझ और असल ज़िंदगी की बारीकियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

प्रोफ़ेशनल्स अक्सर “एनालिसिस पैरालिसिस” (बहुत ज़्यादा विश्लेषण के कारण काम न कर पाना) का सामना करते हैं और ज़रूरी फ़ैसले लेने में देरी करते हैं क्योंकि वे और डेटा का इंतज़ार कर रहे होते हैं।

एल्गोरिदम और नंबर इंसानी व्यवहार, टीम कल्चर या अंदरूनी भरोसे को नहीं समझ पाते।

तेज़ी से बदलते करियर और बिज़नेस में, 100% डेटा की पक्की जानकारी का इंतज़ार करने का मतलब हो सकता है कि आप ज़रूरी मौके गँवा दें या छिपे हुए जोखिमों को नज़रअंदाज़ कर दें।

लोग अक्सर खराब नौकरियों, बुरे रिश्तों या नाकाम हो रहे प्रोजेक्ट्स में बने रहते हैं क्योंकि स्प्रेडशीट कहती है कि सब ठीक है, जबकि उनका मन कुछ और ही कहता है।

इस कोट (कथन) से मिलने वाली सीख

अंतर्ज्ञान कोई जादू नहीं है। यह आपके अवचेतन मन द्वारा पुराने अनुभवों को असल समय में प्रोसेस करने की प्रक्रिया है।

डेटा आपको तथ्य देता है, लेकिन अंतर्ज्ञान आपको संदर्भ और भविष्य की समझ देता है।

मेट्रिक्स पर बहुत ज़्यादा निर्भरता आपको उन बारीक जोखिमों के प्रति अंधा बना सकती है जिन्हें आंकड़े नहीं पकड़ पाते।

महान नेता अनिश्चित या अनजान स्थितियों का सामना करते समय अपनी सहज समझ (instincts) पर भरोसा करते हैं।

अपनी मज़बूत अंदरूनी भावना (gut feeling) के खिलाफ़ लिया गया फ़ैसला अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनता है।

इस बात को मानने के लिए कुछ टिप्स

जब कोई बड़ा फ़ैसला लेना हो, तो डेटा क्या कहता है उसे लिखें, और फिर आपका मन (अंतर्मन) क्या कह रहा है, उसे भी लिखें।

अगर किसी प्रोजेक्ट या डील के आंकड़े अच्छे होने के बावजूद आपको कुछ गड़बड़ लगे, तो कोई भी पक्का फ़ैसला लेने से पहले रुकें और गहराई से जाँच-पड़ताल करें।

खुद पर भरोसा बढ़ाने के लिए रोज़मर्रा के छोटे-मोटे फ़ैसलों में भी अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की आदत डालें।

सोचने के लिए कुछ शांत पल निकालकर घबराहट या डर को अपनी असली अंतर्दृष्टि (intuition) से अलग करें।

साफ़ चेतावनी के संकेतों या नैतिक शंकाओं को नज़रअंदाज़ करने के लिए डेटा का बहाना न बनाएँ।

औपचारिक रिपोर्ट और मेट्रिक्स के साथ-साथ अपने निजी अनुभव और व्यावहारिक समझ (street smarts) को भी महत्व दें।