जब मन कहे कुछ गलत है तो रुककर जरूर सोचिए… Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने बताया सफलता का ये मंत्र

दीपिंदर गोयल ज़ोमैटो के फाउंडर हैं। वे रिस्क लेने की क्षमता, एंटरप्रेन्योर वाली सोच और अपनी महत्वाकांक्षा के लिए जाने जाते हैं। उनकी सफलता का सफ़र बहुत दिलचस्प है। गोयल का जन्म पंजाब में हुआ था। मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करने से पहले उन्होंने IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वे अपनी कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे, तभी उन्हें ज़ोमैटो बनाने का आइडिया आया। आखिरकार, ज़ोमैटो बनाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनकी लीडरशिप क्वालिटी और ‘फ़र्स्ट मूवर एडवांटेज’ (सबसे पहले शुरुआत करने का फ़ायदा) का सही इस्तेमाल करने की क्षमता ने ही उन्हें आज एक ऐसा एंटरप्रेन्योर बनाया है जिसे हम आदर्श मानते हैं।

गोयल ने अक्सर लीडरशिप, फैसला लेने और इंस्टिंक्ट (अंतर्ज्ञान) के बारे में प्रैक्टिकल बातें शेयर की हैं। एक बार उन्होंने कहा था, “अपने इंस्टिंक्ट (अंदर की आवाज़) की अहमियत समझें—जब आपको लगे कि कुछ गड़बड़ है, तो उस पर गहराई से सोचें और फ़ैसला लेने में सिर्फ़ डेटा को ही हावी न होने दें।” यह वाकई एक दमदार बात है, आइए समझते हैं कि इसका असल मतलब क्या है।

इस कोट का क्या मतलब है?

आज की कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल दुनिया में, हमें सिर्फ़ नंबर, चार्ट और ठोस सबूतों पर भरोसा करना सिखाया जाता है। हम यह भूल जाते हैं कि इंट्यूशन—यानी ‘गट फ़ीलिंग’ (अंदर की आवाज़)—असल में बरसों के सबकॉन्शियस ऑब्ज़र्वेशन (अवचेतन रूप से देखी-परखी बातें), पैटर्न पहचानने और असल ज़िंदगी के अनुभवों का नतीजा होती है। यह कोट हमें याद दिलाता है कि डेटा भले ही काम का हो, लेकिन उसे आपकी अंदर की आवाज़ को पूरी तरह दबाने नहीं देना चाहिए।

इसलिए, अगली बार जब आपको करियर के किसी फ़ैसले, बिज़नेस पार्टनरशिप या ज़िंदगी के किसी बड़े फ़ैसले को लेकर ज़बरदस्त हिचकिचाहट महसूस हो, तो उसे सिर्फ़ इसलिए नज़रअंदाज़ न करें क्योंकि वह कागज़ पर अच्छा लग रहा है। रुकें और सोचें कि आपका इंस्टिंक्ट क्यों चेतावनी दे रहा है। ठोस तथ्यों और इंट्यूशन के बीच तालमेल बिठाने से आप ज़्यादा समझदारी भरे और सही फ़ैसले ले पाते हैं।

आज के समय में यह कितना प्रासंगिक है?

हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जो मेट्रिक्स और एनालिटिक्स से चलती है, जहां लोग अक्सर इंसानी समझ और असल ज़िंदगी की बारीकियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

प्रोफ़ेशनल्स अक्सर “एनालिसिस पैरालिसिस” (बहुत ज़्यादा विश्लेषण के कारण काम न कर पाना) का सामना करते हैं और ज़रूरी फ़ैसले लेने में देरी करते हैं क्योंकि वे और डेटा का इंतज़ार कर रहे होते हैं।

एल्गोरिदम और नंबर इंसानी व्यवहार, टीम कल्चर या अंदरूनी भरोसे को नहीं समझ पाते।

तेज़ी से बदलते करियर और बिज़नेस में, 100% डेटा की पक्की जानकारी का इंतज़ार करने का मतलब हो सकता है कि आप ज़रूरी मौके गँवा दें या छिपे हुए जोखिमों को नज़रअंदाज़ कर दें।

लोग अक्सर खराब नौकरियों, बुरे रिश्तों या नाकाम हो रहे प्रोजेक्ट्स में बने रहते हैं क्योंकि स्प्रेडशीट कहती है कि सब ठीक है, जबकि उनका मन कुछ और ही कहता है।

इस कोट (कथन) से मिलने वाली सीख

अंतर्ज्ञान कोई जादू नहीं है। यह आपके अवचेतन मन द्वारा पुराने अनुभवों को असल समय में प्रोसेस करने की प्रक्रिया है।

डेटा आपको तथ्य देता है, लेकिन अंतर्ज्ञान आपको संदर्भ और भविष्य की समझ देता है।

मेट्रिक्स पर बहुत ज़्यादा निर्भरता आपको उन बारीक जोखिमों के प्रति अंधा बना सकती है जिन्हें आंकड़े नहीं पकड़ पाते।

महान नेता अनिश्चित या अनजान स्थितियों का सामना करते समय अपनी सहज समझ (instincts) पर भरोसा करते हैं।

अपनी मज़बूत अंदरूनी भावना (gut feeling) के खिलाफ़ लिया गया फ़ैसला अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनता है।

इस बात को मानने के लिए कुछ टिप्स

जब कोई बड़ा फ़ैसला लेना हो, तो डेटा क्या कहता है उसे लिखें, और फिर आपका मन (अंतर्मन) क्या कह रहा है, उसे भी लिखें।

अगर किसी प्रोजेक्ट या डील के आंकड़े अच्छे होने के बावजूद आपको कुछ गड़बड़ लगे, तो कोई भी पक्का फ़ैसला लेने से पहले रुकें और गहराई से जाँच-पड़ताल करें।

खुद पर भरोसा बढ़ाने के लिए रोज़मर्रा के छोटे-मोटे फ़ैसलों में भी अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की आदत डालें।

सोचने के लिए कुछ शांत पल निकालकर घबराहट या डर को अपनी असली अंतर्दृष्टि (intuition) से अलग करें।

साफ़ चेतावनी के संकेतों या नैतिक शंकाओं को नज़रअंदाज़ करने के लिए डेटा का बहाना न बनाएँ।

औपचारिक रिपोर्ट और मेट्रिक्स के साथ-साथ अपने निजी अनुभव और व्यावहारिक समझ (street smarts) को भी महत्व दें।

Zomato पर महिला कर्मचारी के गंभीर आरोप, वायरल पोस्ट ने कंपनी के वर्क कल्चर पर उठाए सवाल

एक पूर्व कर्मचारी की LinkedIn पोस्ट ने Zomato से जुड़े एक मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी है। महिला ने अपनी पोस्ट में कंपनी में काम करने के दौरान कथित मानसिक दबाव और अनुचित व्यवहार का सामना करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि नौकरी शुरू करने के बाद उनकी परेशानियां बढ़ती गईं और शिकायत करने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। महिला के अनुसार, उन्होंने अपनी बात कंपनी के आंतरिक शिकायत तंत्र और अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा, शिकायतों के समाधान और पारदर्शी जांच की जरूरत पर सवाल उठाए।

महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खबर लिखे जाने तक Zomato की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

स्वास्थ्य बिगड़ा, फिर भी नहीं मिली राहत!

महिला के अनुसार, उन्होंने अप्रैल 2026 में कंपनी जॉइन की थी। कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर हाई ब्लड प्रेशर (210/119) होने की जानकारी दी। उन्होंने कुछ समय के लिए घर से काम (Work From Home) की अनुमति मांगी, लेकिन दावा है कि उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने बताया कि नौकरी जारी रखने के लिए उन्हें अपने खर्च पर ऑफिस के पास घर बदलना पड़ा।

टीम लीड पर लगाए मानसिक उत्पीड़न के आरोप

पूर्व कर्मचारी का कहना है कि उन्हें अपने टीम लीड की ओर से लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस बारे में कंपनी के अंदर शिकायत भी की, जिसके बाद स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें सुबह की शिफ्ट दी गई। हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बाद भी उनके साथ अलग व्यवहार किया गया और बार-बार छुट्टी लेने के लिए कहा जाता रहा।

शिकायत के बाद नौकरी चली गई?

महिला ने आरोप लगाया कि 29 जून 2026 को उन्होंने अपनी मां की तबीयत खराब होने के कारण वर्क फ्रॉम होम की मांग की थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उसी दिन उन्होंने अपने टीम लीड पर अनुचित शारीरिक व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

उनका दावा है कि शिकायत के तुरंत बाद उन्हें मीटिंग में बुलाकर नौकरी से निकालने की जानकारी दे दी गई। कुछ ही मिनटों में उनका लैपटॉप, ईमेल और स्लैक एक्सेस बंद कर दिया गया और बिना किसी औपचारिक दस्तावेज के ऑफिस छोड़ने को कहा गया।

न्याय चाहिए, सहानुभूति नहीं

महिला ने कहा कि उन्होंने कंपनी के Speak Up सिस्टम, HR और वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें अब तक रिलीविंग लेटर और एक्सपीरियंस लेटर नहीं दिया गया, जिससे नई नौकरी पाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने लिखा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से उन पर निर्भर है और उन्हें सिर्फ निष्पक्ष जांच, सम्मान और न्याय चाहिए। उनका दावा है कि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज और बातचीत के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

LinkedIn पर पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने महिला के समर्थन में टिप्पणियां कीं। कुछ लोगों ने वर्क फ्रॉम ऑफिस नीति पर सवाल उठाए, तो कई ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था अधिक पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने रोजगार से जुड़े दस्तावेज समय पर जारी न किए जाने को भी गंभीर मुद्दा बताया।

कंपनी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

खबर लिखे जाने तक Zomato की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। फिलहाल महिला के सभी आरोप दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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