Video: बिस्किट में गड़बड़ी पर दुकानदार से भिड़ा शख्स, ऑनलाइन शिकायत की बात सुनकर मिला ऐसा जवाब

कई बार रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान लोग छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला बिस्किट के पैकेट को लेकर सामने आया है, जहां एक कंटेंट क्रिएटर ने दुकानदार से ऑनलाइन शिकायत करने की बात कही। दुकानदार के जवाब और दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे देखने के बाद लोग उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा करने लगे। कई यूजर्स ने शिकायत करने के कदम की तारीफ की, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर ध्यान दिलाया।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता को क्या करना चाहिए और अपनी शिकायत कहां दर्ज करानी चाहिए।

दुकानदार से पूछा- ऑनलाइन शिकायत कर दूं?

राघव दुबे नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें वह बिस्किट के पैकेट की गुणवत्ता को लेकर सवाल करते हैं और दुकानदार से पूछते हैं, “Complaint online daalu chalega” यानी क्या वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

इस पर दुकानदार जवाब देता है, “हां, डाल दो।” वीडियो में हुई इस छोटी-सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर ग्राहक को आवाज उठानी चाहिए, न कि मामले को अनदेखा करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो पर कई लोगों ने कंटेंट क्रिएटर के कदम की तारीफ की। कुछ यूजर्स ने इसे उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग के काम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “Good Job”, जबकि दूसरे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तारीफ की। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि शिकायत कहां दर्ज की गई और कार्रवाई होने में कितना समय लगा। यूजर्स का कहना था कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र FDA में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की ऑनलाइन सुविधा है। इसके माध्यम से मिलावट, असुरक्षित खाद्य उत्पादों और पैकेट पर गलत जानकारी जैसी समस्याओं की शिकायत की जा सकती है। जुलाई 2026 में विभाग ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में AI की मदद से शिकायतों को संभालने वाला प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने और उनकी स्थिति जानने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी दिखे तो क्या करें?

अगर किसी बिस्किट या पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसका पैकेट संभालकर रखें। उत्पाद, बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख की तस्वीरें लें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें और संदिग्ध उत्पाद का सेवन न करें। इसके बाद निर्माता या संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

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FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब बेबी फूड को लेकर तुकाराम मुंढे का बड़ा ऐक्शन, महाराष्ट्र FDA ने इन चीजों पर लगाया बैन

मुंबई। महाराष्ट्र में छोटे बच्चों के फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड को लेकर अब नियम सख्त हो गए हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मंगलवार को आदेश जारी किया। जिसका मकसद बच्चों के खाने की क्वालिटी बेहतर रखना और माता-पिता को सही जानकारी देना है। इसके लिए FDA ने बेबी फूड की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रमोशन को लेकर कई नियम बनाए हैं।

लेबल से लेकर खराब प्रोडक्ट तक जारी हुए नए नियम

  • पैकेट पर “जरूरी सूचना: मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा है” लिखना होगा और छह महीने के बाद ही ऊपरी खाना देने की जानकारी देनी होगी।
  • पैकेट पर बच्चों या महिलाओं की तस्वीर नहीं लगा सकेंगे। साथ ही ‘ह्यूमनाइज्ड’, ‘मैटरनाइज्ड’, ‘कम्प्लीट फूड’ और ‘हेल्थ फूड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं होगा।
  • पैकेट पर बच्चे को दूध पिलाने से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी।
  • बच्चे में साइड इफेक्ट दिखने पर हॉस्पिटल और डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी और गंभीर मामले में कंपनी को 48 घंटे में रिपोर्ट करनी होगी।
  • कंपनियों को हर बैच का रिकॉर्ड रखना होगा और खराब प्रोडक्ट की पहचान कर उसे बाजार से वापस लेना होगा।

नए नियमों के तहत फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के प्रमोशन पर रोक रहेगी। कंपनियां इनके विज्ञापन, फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन या कैशबैक नहीं दे सकेंगी। सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के जरिए भी प्रमोशन की परमिशन नहीं होगी। साथ ही मेडिकल कार्यक्रम या रिसर्च के नाम पर डॉक्टरों और हॉस्पिटल्स को स्पॉन्सरशिप, गिफ्ट या दूसरी सुविधाएं देने पर भी रोक रहेगी।

नियम तोड़ने पर भरना होगा इतना जुर्माना

  • गलत विज्ञापन या बिना लाइसेंस काम करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
  • घटिया क्वालिटी का खाना बेचने पर 5 लाख रुपये तक और गलत जानकारी के साथ प्रोडक्ट बेचने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • ‘नो एडेड शुगर’ जैसे दावों और प्रिजर्वेटिव, कलर व फ्लेवर के इस्तेमाल में भी तय नियमों का पालन करना होगा।

लागू होंगे नियम, नहीं माने तो कार्रवाई

FDA के नए नियम फॉर्मूला मिल्क, फॉलो-अप फॉर्मूला, बेबी फूड और फीडिंग बॉटल समेत बच्चों के कई प्रोडक्ट्स पर लागू होंगे। इन नियमों में कंपनियों के साथ इंपोर्टर, डिस्ट्रीब्यूटर, दुकानदार, फार्मेसी, अस्पताल सप्लायर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी आएंगे। तुकाराम मुंढे ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। इसलिए माता-पिता को प्रोडक्ट की सही जानकारी और साफ लेबल मिलना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने फूड सेफ्टी को लेकर दूसरी कार्रवाई भी की है। बुलढाणा के खामगांव में करीब 3.51 करोड़ रुपये का रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त किया गया। वहीं मुंबई-नासिक रूट पर पालघर से कसारा घाट के बीच करीब 1.26 करोड़ रुपये का प्रतिबंधित गुटखा भी पकड़ा गया।

वसूली के आरोपों पर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे का पलटवार, अब कर दिया ये बड़ा चैलेंज

महाराष्ट्र में होटल, रेस्टोरेंट और क्विक कॉमर्स कंपनियों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोपों ने खाद्य सुरक्षा विभाग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन आरोपों पर अब महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने प्रतिक्रिया दी है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ये आरोप काफी सामान्य है और अपील की कि जिनके पास भी सबूत हों, वे सामने आएं।

संजय राउत ने लगाया था आरोप

बता दें कि ये आरोप शिवसेना नेता संजय राउत ने लगाए थे। उन्होंने कथित तौर पर एक चिट्ठी लिखकर दावा किया था कि FDA अधिकारी पैसे वसूलने के लिए कारोबारियों को लाइसेंस रद्द करने की धमकी दे रहे थे। हालांकि, मुंधे ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मुंडे ने कहा कि उन्हें इन आरोपों के बारे में सिर्फ मीडिया रिपोर्ट से पता चला। उन्होंने आगे कहा कि अगर राउत के पास कोई सबूत है, तो उन्हें वह सबूत उनके साथ या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के साथ शेयर करना चाहिए।

इससे पहले, राउत ने आरोप लगाया था कि FDA के डेजिग्नेटेड ऑफिसर (DOs), असिस्टेंट कमिश्नर (ACs) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSOs) खुलेआम कारोबारियों से पैसे मांग रहे थे। आरोप के मुताबिक, मुंडे के FDA कमिश्नर बनने से पहले अधिकारी नोटिस बंद करने के लिए 10,000 से 12,000 रुपये लेते थे, लेकिन उनके चार्ज संभालने के बाद यह रकम बढ़कर 75,000 से 2 लाख रुपये के बीच हो गई।

मुंडे ने आरोपों को किया खारीज

इन आरोपों को खारिज करते हुए, मुंडे ने सीधे उन कारोबारियों से अपील की जिनसे रिश्वत मांगी गई हो। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी पैसे दिए हैं या जिनसे पैसे मांगे गए हैं, वे उनसे संपर्क करें और शामिल अधिकारी की जानकारी और लेन-देन का कोई सबूत दें।

शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रहेगी

मुंडे ने यह भी कहा कि शिकायत करने वाले लोगों को अगर अधिकारियों की ओर से परेशान किए जाने का डर है, तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि FDA का शिकायत पोर्टल भी शिकायत करने वाले की पहचान छिपाकर रखता है और वे खुद यह पक्का करेंगे कि नाम जाहिर न हों। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सबूत जरूरी हैं।

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Tukaram Mundhe: ‘सिर्फ टी-शर्ट पहनना काफी नहीं’, प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ वाली टी-शर्ट पर FDA चीफ ने किया रिएक्ट

Tukaram Mundhe: हाल ही में प्रीति जिंटा ने महाराष्ट्र के फूड-सेफ्टी अभियान की तारीफ करते हुए “टीम तुकाराम मुंढे” लिखी टी-शर्ट पहनी थी। अब FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद प्रीति जिंटा के समर्थन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने प्रीति से बात की है और न ही वे उनसे मिले हैं, लेकिन वे आभारी हैं कि उन्होंने उनका जिक्र किया।

PTI से बात करते हुए अपने काम के लिए प्रीति जिंटा के समर्थन को स्वीकार करते हुए मुंढे ने कहा- “मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है और न ही हमारी फोन पर कोई बातचीत हुई है। लेकिन मैं आभारी हूं कि उन्होंने ‘टीम तुकाराम मुंढे’ का जिक्र किया।”उन्होंने आगे कहा- “मुझे लगता है कि समाज के हर स्तर और हर क्षेत्र में अच्छे इरादों वाले लोग मौजूद हैं। इन अच्छे कामों के लिए एक टीम बनाई जानी चाहिए। अच्छे विचारों, सोच और कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

हालांकि वे प्रीति के इस कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “सिर्फ ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखी टी-शर्ट पहनना ही काफी नहीं है। केवल नाम दिखाने से काम नहीं चलेगा। असल काम करना होगा और सही सोच अपनानी होगी।”

‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट

इस महीने की शुरुआत में प्रीति ने नीली जींस और सफेद स्पोर्ट्स शूज के साथ ‘टीम मुंढे’ टी-शर्ट पहनी थी। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और अपने बाल खुले रखे थे। उनका मेकअप मिनिमल था। लेकिन सादगी भरी स्टाइलिंग के बावजूद उनकी टी-शर्ट पर लिखा संदेश सबसे अलग और आकर्षक था।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंढे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि सभी संस्थान सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्तरां और खाने-पीने के अन्य व्यवसायों के निरीक्षण के बाद मुंढे मुंबई में फ़ूड-सेफ्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

कोई कानून से ऊपर नहीं… सेलिब्रिटी और स्टार्स के लिए FDA चीफ तुकाराम मुंढे ने फिर कह दी सीरियस बात

22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर फिल्म आर्टिस्ट की जिम्मेदारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पॉपुलर आर्टिस्ट का युवाओं की सोच पर गहरा असर होता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे स्टार को समाज में अच्छी सोच और पॉजिटिविटी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।

तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

राष्ट्रपति की अपील के बाद तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आर्टिस्ट का लोगों पर असर होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून का उल्लंघन करें। उन्होंने आर्टिस्ट से कहा कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे उत्पादों या आदतों का प्रचार नहीं करना चाहिए, जो लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जारी हो चुके हैं नोटिस

मुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र में FDA पहले ही कुछ ऐसे आर्टिस्ट को नोटिस जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि जब किसी पॉपुलर चेहरे का इस्तेमाल खाने-पीने या दूसरे उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य से जुड़े असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए थे। आर्टिस्ट ने विमल इलायची का विज्ञापन किया था। FDA का कहना था कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन का है। जिसके कारण आर्टिस्ट के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई की गई थी।

मुंडे ने कहा कि किसी आर्टिस्ट की पॉपुलैरिटी उसे कानून से ऊपर नहीं बनाती। उनके मुताबिक, कलाकारों को भी दूसरे लोगों की तरह कानून का पालन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनके प्रचार का लोगों की पसंद और आदतों पर असर पड़ सकता है। खासकर खाने-पीने की चीजों के प्रचार में लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

Bipasha Basu: बिपाशा बसु को अपने बॉक्स में कीड़े मिलने के बाद प्रोटीन पाउडर ब्रांड ने सफाई दी, बोले- ‘ये इंडियन सेलिब्रिटी…’

Bipasha Basu: न्यूट्रिशन ब्रांड ISOPURE ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है। यह स्पष्टीकरण तब आया जब एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने अपने प्रोटीन पाउडर के एक नए खुले डिब्बे में छोटे कीड़े जैसी चीज मिलने की बात कही और चिंता जताई। Glanbia Performance Nutrition (GPN) इंडिया के जनरल मैनेजर सुमित माथुर ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने तुरंत एक्ट्रेस से संपर्क किया और प्रोडक्ट पैक की असलियत और क्वालिटी की जांच कर रही है।

बयान में कहा गया, “ISOPURE प्रोडक्ट की क्वालिटी और ग्राहकों की सुरक्षा के ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने संबंधित भारतीय सेलिब्रिटी ग्राहक से तुरंत संपर्क किय। उनकी फौरन चिंता का समाधान किया और हमारे जवाब को स्वीकार करने के लिए उनकी सराहना करते हैं। हमारी क्वालिटी टीम अभी पैक की असलियत और क्वालिटी की जांच कर रही है।”

बसु ने 10 सितंबर को इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए यह चिंता जताई थी। उन्होंने प्रोडक्ट का एक वीडियो शेयर किया और महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे को टैग करके उनसे दखल देने की अपील की। ​​वीडियो में एक्टर ने कहा, “इसमें कीड़े हैं… बहुत छोटे-छोटे कीड़े। हमने जो नया डिब्बा खोला है, वह कीड़ों से भरा है।”

वीडियो के साथ बसु ने लिखा, “@tukaram_ias आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं… ताकि हम जो भी खरीदें, उसमें हमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।” हालांकि, इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिख रही चीज कीड़े ही थे या प्रोडक्ट खराब था। ISOPURE ने कहा कि उनकी स्थापित प्रक्रियाओं में तय अधिकारियों के साथ मिलकर बाजार की नियमित निगरानी शामिल है, ताकि नकली सामान या बिना मंजूरी के वितरण का पता लगाया जा सके।

कंपनी ने कहा, “इन लगातार किए जा रहे उपायों का मकसद यह पक्का करना है कि ग्राहकों को असली ISOPURE प्रोडक्ट मिलें। हम ग्राहकों को यह भी सलाह देते हैं कि वे अधिकृत चैनलों से ही खरीदारी करें और इस्तेमाल से पहले असली होने की पुष्टि के लिए हर पैक पर दिए गए यूनिक QR कोड का इस्तेमाल करें।” यह स्पष्टीकरण महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा उपायों पर बढ़ते ध्यान के बीच आया है।

राज्य का FDA रेस्तरां, होटल, सड़क किनारे खाने की दुकानों और खाना परोसने वाले अन्य प्रतिष्ठानों (ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए खाना सप्लाई करने वालों सहित) का निरीक्षण कर रहा है। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में लाइसेंस सस्पेंड करने और सुधार के नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की गई है। खाद्य सुरक्षा को लेकर अपने काम के तरीके के लिए मुंडे की लोगों ने तारीफ भी की है।

एक्टर मनोज बाजपेयी ने ANI से बात करते हुए कमिश्नर की “ईमानदारी” और अपने काम के प्रति “समर्पण” का ज़िक्र किया था। बाजपेयी ने कहा, “एक पुलिस अधिकारी, या मान लीजिए तुकाराम, को एक खास काम के लिए नियुक्त किया जाता है। जब वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपना काम करते हैं, तो लोगों को हैरानी होती है कि वे वायरल होने लगते हैं। क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया है?”

निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत, हरिद्वार में फांसी लगाकर दी जान

देशभर में बहुचर्चित रहे 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोली उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में काफी समय से रह रहा था। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

बताया जा रहा है कि, कोली की मौत सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होने और जेल से रिहा होने के एक साल से भी कम समय बाद हुई है।

क्या है पूरा मामला?

कोली को नोएडा के निठारी में 2005 और 2006 के बीच महिलाओं और बच्चों की मौत और उनके लापता होने से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में उसे 12 मामलों में बरी कर दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आखिरी लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि को पलट दिया।

नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किशोरी रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में कोली की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी। जिसके तहत कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखने वाले अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया और आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा कर दिया जाए।

बता दें कि यह फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में 12 अन्य मामलों में कोली और उसके पूर्व नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।

वहीं, आखिरी मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा कोली के कबूलनामे, कथित बरामदगी और फोरेंसिक सबूतों पर किए गए दावों की बारीकी से जांच की। कोर्ट ने जांच और उन सबूतों में कई कमियां पाईं, जिनके आधार पर कोली को दोषी ठहराया गया था।

जानकारी के मुताबिक, निठारी हत्याकांड का पता दिसंबर 2006 में चला, जब निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले के पास इंसानी अवशेष मिले।

जांच के दौरान कोली (जो पंढेर के यहां घरेलू काम करता था) और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। यह मामला इलाके से महिलाओं और बच्चों के गायब होने और उनकी कथित हत्याओं से जुड़ा था।

इसके बाद कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें से कुछ मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में ऊपरी अदालतों में चली कार्यवाही में उसे बरी कर दिया गया।

जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ CBI और पीड़ितों के परिवारों द्वारा दायर 14 अपीलें खारिज कर दीं।

उस समय सुनवाई के दौरान, तत्कालीन CJI गवाई ने इस मामले पर मीडिया के बहुत ज़्यादा ध्यान दिए जाने का जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफ़ी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

उस समय सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने इस मामले को मिली जबरदस्त मीडिया कवरेज का भी जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

वहीं, उस फैसले के बाद भी कोली जेल में ही रहा क्योंकि रिम्पा हलदर मामले में उसे मिली उम्रकैद की सजा अभी भी लागू थी। हालांकि, नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई में बची आखिरी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद कोली को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के कुछ महीनों बाद अब हरिद्वार से उसकी कथित मौत की खबर सामने आई है।

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Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

Zomato ने ‘एनालॉग डिश’ पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट

Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।

Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।

‘एनालॉग’ डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।

महाराष्ट्र की कार्रवाई का असर

बता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनर 

Zomato ने कहा कि जिन डिश में ‘एनालॉग डेयरी’ होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।

सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।”

एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंस

Zomato ने कहा, “इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू कर रहे हैं।”

फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

Zomato ने कहा, “जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।”

इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।

Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्त चेतावनी

Zomato ने कहा, “अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।”

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।

CEO ने क्या कहा?

Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: “Zomato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।”

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