अजय देवगन, शाहरुख, टाइगर पर लटकी FDA की तलवार, अक्षय कुमार का नाम नहीं शामिल, जानिए कानून क्या कहता है

फ़ूड सेफ़्टी चीफ़ और महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के प्रमुख तुकाराम मुंडे ने एक्टर्स शाहरुख़ खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ को उनके ‘विमल इलायची’ विज्ञापनों के सिलसिले में नौ पेज का विस्तृत ‘शो-कॉज़ नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) जारी किया है। उन्हें इस मामले में अपनी भूमिका के बारे में सफ़ाई देनी होगी और 15 दिनों के अंदर अपने सोशल मीडिया हैंडल से सभी प्रमोशनल कंटेंट को पूरी तरह हटाना होगा।

कानून क्या कहता है? सरोगेट एडवरटाइज़िंग मुख्य मुद्दा क्यों है? शाहरुख़ खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ पर क्या कार्रवाई हो सकती है? अक्षय कुमार ने इस मामले को कानूनी तौर पर कैसे संभाला?

विमल मामले में सरोगेट एडवरटाइज़िंग मुख्य मुद्दा क्यों है?

सरोगेट विज्ञापन एक विपणन रणनीति है जिसमें कोई कंपनी प्रतिबंधित या सीमित उत्पाद को किसी अन्य अनुमत उत्पाद के नाम पर, उसी ब्रांड पहचान का उपयोग करके प्रचारित करती है। यह विज्ञापन प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए एक कानूनी खामी के रूप में काम करता है। जब शराब या तंबाकू जैसे उत्पाद टेलीविजन और प्रिंट विज्ञापनों के लिए कानूनी रूप से प्रतिबंधित होते हैं, तो कंपनियां “ब्रांड स्ट्रेचिंग” का उपयोग करके समान लोगो, संगीत, रंग और नारों के साथ एक कानूनी उत्पाद का विपणन करती हैं।

विज्ञापित उत्पाद पूरी तरह से कानूनी है। उदाहरणों में इलायची, माउथ फ्रेशनर, क्लब सोडा, पैकेटबंद पानी या संगीत सीडी शामिल हैं। कंपनी वास्तव में जिस उत्पाद को बेचना चाहती है, वह कानूनी रूप से सार्वजनिक प्रचार के लिए प्रतिबंधित है (जैसे गुटखा, पान मसाला, व्हिस्की या बीयर)। कानूनी “सरोगेट” के लिए मशहूर हस्तियों के विज्ञापनों से दर्शकों को लुभाकर, ब्रांड अपनी मजबूत और लोगों के दिमाग में बनी रहने वाली पहचान बनाए रखता है। जब कोई उपभोक्ता किसी स्टोर पर जाता है, तो वह तुरंत ब्रांड नाम पहचान लेता है और प्रतिबंधित उत्पाद खरीद लेता है।

विमल केस

मुंधे की मुख्य कानूनी दलील यह है कि “विमल इलायची” का विज्ञापन एक प्रतिबंधित चीज़ के अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रमोशन (यानी किसी दूसरी चीज़ के बहाने असल चीज़ का प्रचार) के बराबर है। रेगुलेटर का कहना है कि माउथ फ्रेशनर (इलायची) के विज्ञापन में इस्तेमाल की गई ब्रांडिंग, रंगों का तालमेल और दिखाने का तरीका खास तौर पर इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि विमल पान मसाला की ब्रांड पहचान को और मज़बूत और बेहतर बनाया जा सके। चूँकि ग्राहक इस ब्रांड के नाम को प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद से बहुत ज़्यादा जोड़कर देखते हैं, इसलिए इलायची वाले विकल्प का प्रचार करना राज्य में विज्ञापन पर लगी रोक से बचने का एक गैर-कानूनी तरीका है।

कानून क्या कहता है

महाराष्ट्र FDA प्रमुख की कार्रवाई पूरी तरह से उन खाद्य सुरक्षा कानूनों पर आधारित है जो गुमराह करने वाले विज्ञापनों और प्रतिबंधित पदार्थों के अप्रत्यक्ष प्रचार को रोकते हैं। महाराष्ट्र में, सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले खतरों के कारण पान मसाला और तंबाकू से जुड़े उत्पादों की बिक्री, निर्माण, वितरण और विज्ञापन पर पूरी तरह से रोक है।

अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस में खास तौर पर उन कानूनी प्रावधानों का ज़िक्र किया गया है जो खाद्य मानकों और विज्ञापनों को नियंत्रित करते हैं:

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24: यह कानून किसी भी व्यक्ति को भोजन की बिक्री, आपूर्ति या सेवन को बढ़ावा देने के लिए अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल होने, या किसी उत्पाद की गुणवत्ता या सामग्री के बारे में गलत या गुमराह करने वाली बातें कहने से सख्ती से रोकता है।

खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) नियम, 2018: ये नियम खाद्य विज्ञापनों में जवाबदेही तय करते हैं। इनके अनुसार, प्रचार के दौरान किया गया कोई भी दावा स्पष्ट, सच्चा और गुमराह न करने वाला होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन होने पर, अधिकारियों के पास सुधारात्मक विज्ञापन जारी करने या पूरे अभियान को पूरी तरह से बंद करने का आदेश देने का अधिकार है।

Vimal Elaichi विज्ञापन पर फंसे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ! महाराष्ट्र FDA ने भेजा नोटिस

Maharashtra FDA Action: बॉलीवुड के तीन बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ विमल इलायची विज्ञापन को लेकर मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने तीनों अभिनेताओं को Vimal Elaichi के विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर ‘शो-कॉज नोटिस’ यानी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA को आशंका है कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद Vimal Pan Masala के अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार से जुड़ा हो सकता है।

FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भागीदारी और Vimal ब्रांड को जिस तरीके से पेश किया गया है, उसके बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। बताए गए कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों के तहत गुमराह करने वाले विज्ञापनों के लिए 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। सात ही एंडोर्स करने वालों पर तीन साल तक किसी भी प्रोडक्ट को एंडोर्स करने पर रोक लगाई जा सकती है।

साथ 2022 में एक्टर अक्षय कुमार ने शाहरुख खान और अजय देवगन के साथ विमल इलायची के विज्ञापन में दिखने के बाद आलोचना का सामना करने पर फैंस से माफी मांगी थी। उनकी यह सार्वजनिक माफी तब आई जब सोशल मीडिया यूज़र्स ने कहा कि इस ad को एक्टर द्वारा तंबाकू प्रोडक्ट को प्रमोट करने के तौर पर देखा जा सकता है।

शाहरुख, अजय और टाइगर को कहां भेजा गया नोटिस?

FDA ने एक्टर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विज्ञापन के जरिए राज्य में बैन प्रोडक्ट ‘पान मसाला’ को इनडायरेक्ट रूप से प्रमोट करने के लिए नोटिस जारी किया है। ये तीनों एक्टर्स 2024 में पान मसाला कंपनी ‘विमल’ की इलायची को प्रमोट करने वाले एक विज्ञापन के लिए साथ आए थे। महाराष्ट्र के फूड सेफ्टी चीफ तुकाराम मुंडे की ओर से 11 अगस्त को जारी शो-कॉज नोटिस में एक्टर्स को तुरंत कैंपेन से हटने और ऐड से जुड़े सभी प्रमोशनल कंटेंट को अपने आखिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटाने का निर्देश दिया गया।

NDTV के मुताबिक, मुंडे ने 9 पेज के नोटिस में कहा है, “विज्ञापन की जांच करने पर पहली नजर में ऐसा लगता है कि यह ad ‘विमल’ ब्रांड को प्रमोट करता है, जो मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ा है। पान मसाला महाराष्ट्र राज्य में बनाने, स्टोर करने, ट्रांसपोर्ट करने, डिस्ट्रीब्यूट करने और बेचने पर बैन है।” उन्होंने कहा कि विज्ञापन में ‘विमल इलायची’ शब्द का इस्तेमाल इस तरह किया गया है। इससे विमल पान मसाला ब्रांड के साथ जुड़ाव बनता हुआ दिखता है।

‘कंज्यूमर्स गुमराह हो सकते हैं’

इस नोटिस में कहा गया है कि इससे कंज्यूमर्स गुमराह हो सकते हैं। बैन प्रोडक्ट की ब्रांड पहचान को इनडायरेक्ट रूप से बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, इसमें राज्य-व्यापी बैन ऑर्डर का भी जिक्र किया गया है, जो पब्लिक हेल्थ और सेफ्टी नियमों का हवाला देते हुए महाराष्ट्र में पान मसाला बनाने, स्टोर करने, डिस्ट्रीब्यूट करने और बेचने पर सख्ती से रोक लगाता है।

उन्होंने आगे कहा, “अगर इलायची या इसी तरह के प्रोडक्ट के नाम से ‘विमल’ ब्रांड का इस्तेमाल पान मसाला/तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स की ब्रांड पहचान और कंज्यूमर्स के आकर्षण को बनाए रखने, मजबूत करने या बढ़ाने के मकसद से किया जाता है, तो ऐसा कम्युनिकेशन सिर्फ एक इंडिपेंडेंट प्रोडक्ट का विज्ञापन नहीं माना जाएगा। बल्कि यह बैन/रिस्ट्रिक्टेड प्रोडक्ट का इनडायरेक्ट या सरोगेट प्रमोशन हो सकता है।”

FDA को किस बात पर है आपत्ति?

ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सवाल उठाया है कि Vimal Elaichi के नाम से किया गया विज्ञापन कहीं प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटीन वाले उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार तो नहीं कर रहा। महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाला पर बैन लागू है। ताजा प्रतिबंध 13 जुलाई से प्रभावी हुआ है। यह एक साल तक लागू रहेगा।

10 लाख रुपये तक लग सकता है जुर्माना

महाराष्ट्र FDA ने इस मामले में ‘Food Safety and Standards Act (FSS Act), 2006’ की धारा 24 और धारा 53 का हवाला दिया है। धारा 24 भ्रामक या धोखा देने वाले खाद्य विज्ञापनों से संबंधित है। वहीं, धारा 53 के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन में शामिल पाए जाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

FDA ने नोटिस में ‘Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018’ का भी उल्लेख किया है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। तीनों एक्टर्स से जवाब मांगा गया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब तथा जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

महाराष्ट्र में FDA का बड़ा एक्शन

अभिनेताओं को नोटिस ऐसे समय पर जारी किए गए हैं जब महाराष्ट्र FDA ने गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के खिलाफ अभियान तेज कर रखा है। FDA के आंकड़ों के मुताबिक, “25 मई से 31 जुलाई के बीच अधिकारियों ने 658 ठिकानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में करीब ₹15.11 करोड़ का प्रतिबंधित स्टॉक जब्त किया गया।” इस दौरान, 519 FIR दर्ज की गईं और 701 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा प्रतिबंधित उत्पादों के कथित परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे 78 वाहन भी जब्त किए गए, जिनमें रखे सामान की कीमत करीब ₹6.6 करोड़ बताई गई।

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पुलिस के साथ मिलकर भी कार्रवाई

FDA का अभियान सिर्फ खाद्य विभाग तक सीमित नहीं है। 12 जून को FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। यहां प्रतिबंधित गुटखा, तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला उत्पादों का कारोबार संगठित नेटवर्क के जरिए किया जा रहा हो। इन मामलों में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA), 1999 के प्रावधानों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने को भी कहा गया था।

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