सेना के मेजर की पत्नी पर जासूसी का शक! स्विटजरलैंड स्टडी ट्रिप में विदेशी एजेंट्स के संपर्क में आई, कौन है ये, क्या-क्या लीक किया?

Spy News: जम्मू में एक भारतीय सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने चीनी खुफिया एजेंट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विश्लेषणात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘चैटजीपीटी’ और ‘क्लाउड’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। मेजर की पत्नी पर विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में आने और संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर करने के आरोपों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला के पति की तैनाती पठानकोट में 9 कोर की इंटेलिजेंस यूनिट के साथ है। मामले में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी शेयर की गई और इसका सोर्स क्या था।

अधिकारियों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली आरोपी महिला हाइली क्वालिफाइड है। उसने 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में इंटर्नशिप की थी। फिलहाल वह स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार तो नहीं किया गया है। लेकिन FIR दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की गई है। वह जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

महिला के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू

अधिकारियों ने बताया कि महिला को संवेदनशील सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेख तैयार करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। इन विषयों में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी गतिविधियां, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगाई गई हैं।

कैसे हुआ शक?

मामले की जांच का जिम्मेदारी एक पुलिस उपाधीक्षक (SP) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह कथित तौर पर पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाया गया। महिला का मोबाइल फोन जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोका

सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद महिला को उसके परिवार के साथ यात्रा करते समय 9 कोर के क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने रोका था। इसके बाद खुफिया अधिकारियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की। जांच एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क से उसके संपर्कों और सैन्य सूचनाओं के संभावित आदान-प्रदान की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

विदेश में पढ़ाई के दौरान संपर्क में आने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान एक विदेशी खुफिया एजेंट के संपर्क में आई थी। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों की यात्रा के दौरान उसे लेख लिखने के काम के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि शुरुआत में उसे प्रत्येक लेख के लिए 200 से 300 डॉलर देने की पेशकश की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शुरुआत में लेख लिखने के नाम पर शुरू हुआ यह संपर्क बाद में कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने तक पहुंच गया। हालांकि, विदेशी एजेंट से संपर्क और जानकारी साझा करने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सेना की तैनाती और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी लीक करने का आरोप

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में सेना की कोर, सैन्य संरचनाओं, जवानों की तैनाती और प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि महिला को ये जानकारियां कहां से मिलीं। एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसे अपने पति की आधिकारिक तैनाती से जुड़ी किसी जानकारी तक पहुंच थी या उसने किसी अन्य माध्यम से संवेदनशील डिटेल्स हासिल किए थे।

भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जांच

सूत्रों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर लेख लिखने के बदले नियमित भुगतान मिलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब उसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किसने किया, रकम कहां से आई और क्या किसी लेन-देन का संबंध कथित खुफिया गतिविधियों से है। हालांकि, भुगतान मिलने की बात अपने आप में जासूसी के आरोप को साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को कथित सैन्य जानकारी साझा किए जाने और विदेशी संपर्कों के बीच संबंध स्थापित करना होगा।

दो महीने की बच्ची होने की भी चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि महिला को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके पीछे उसकी दो महीने की बच्ची होने की बात बताई जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं होने के इस कथित कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। महिला पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के कथित लीक में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले के तार किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े हैं।

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जब टाइगर श्रॉफ पर चल रही थी गोली तो वहीं खड़े ऑटो ड्राइवर राकेश ने क्या क्या देह लिया?

मुंबई{mumbai}। बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर रविवार शाम हुए फायरिंग हमले में अब चश्मदीद का बड़ा बयान सामने आया है। जुहू इलाके में हुई इस वारदात ने पूरे बॉलीवुड में हड़कंप मचा दिया है। ऑटो ड्राइवर राकेश कुमार ने ANI को बताया कि हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था।चश्मदीद ने क्या देखा?

बाल-बाल बचे टाइगर, ड्राइवर को लगी गोली

राकेश कुमार ने बताया, “मैं शाम करीब 7 बजे अपनी गाड़ी निकालने आया था। वहां तीन लोग थे – एक बाइक पर बैठा था और दो लोग गेट के बाहर खड़े थे। जैसे ही टाइगर श्रॉफ की कार फुटबॉल क्लब से बाहर निकली, सामने वाले ने सीधे उसी सीट पर फायरिंग शुरू कर दी, जहां टाइगर बैठे थे। गेट के पास खड़े दूसरे शख्स ने ड्राइवर पर गोली चलाई जो उसके हाथ में लगी।”5 राउंड फायरिंग, ड्राइवर घायल

मुंबई पुलिस के मुताबिक, DCP मोहित गर्ग ने बताया कि टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बच गए। हमले में 5 राउंड गोलियां चलीं। टाइगर को सीधे गोली नहीं लगी लेकिन बारूद और कांच के टुकड़ों से उनके हाथ, कंधे और छाती पर चोटें आईं हैं। उनके ड्राइवर को हाथ में गोली लगी है। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।पुलिस ने तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS की धारा 109(1), 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 3, 25 के तहत FIR दर्ज कर ली है। हमलावरों के खिलाफ BNS और आर्म्स एक्ट में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

घर पहुंचे एकनाथ शिंदे

घटना के बाद रविवार रात महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे टाइगर श्रॉफ के घर पहुंचे। तस्वीरों में टाइगर के कंधे, छाती और हाथ पर पट्टी बंधी दिख रही है। उनकी मां आयशा श्रॉफ भी काफी घबराई हुई थीं।शिंदे ने कहा, “यह बेहद निंदनीय घटना है। 90 के दशक में मुंबई में गैंगवार आम था, जिसे पुलिस ने खत्म किया था। पब्लिक फिगर को इस तरह धमकाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार टाइगर के परिवार के साथ खड़ी है और आरोपियों को जल्द पकड़ा जाएगा।”

How to get a duplicate registration certificate (RC) if lost or damaged

How to get a duplicate registration certificate (RC) if lost or damaged
Duplicate RC

A vehicle’s Registration Certificate (RC) is an official document that records its registration with the Regional Transport Office (RTO). If the original RC is lost, stolen or damaged, owners can apply for a duplicate instead of registering the vehicle again.

The application can be started online through the government’s Parivahan Sewa portal. Depending on the state and RTO, applicants may also need to submit physical documents or visit the RTO for verification. Here’s how to apply for a duplicate RC and what to keep ready.

When do you need a duplicate RC?

You can apply for a duplicate RC if the original certificate has been lost, stolen or damaged to the point that its details are no longer legible. The duplicate replaces the existing certificate; it does not change the vehicle’s registration number.

If the original is damaged, keep it ready to surrender if the RTO requires it. If it is lost or stolen, report the incident to the police and retain the relevant report for the application.

A duplicate RC is different from an RC renewal, which is required when the registration expires.

What documents are required for a duplicate RC?

The main application form is Form 26, which is used to request a duplicate Registration Certificate. Depending on the circumstances and the requirements of the relevant RTO, applicants may need the following documents:

  • Form 26: The application for a duplicate RC.
  • Police report or FIR: For a lost or stolen RC, as applicable.
  • Valid motor insurance: Proof of current vehicle insurance.
  • Valid PUC certificate: The vehicle’s Pollution Under Control certificate.
  • Identity and address proof: Such as an Aadhaar card, PAN card or another accepted document.
  • Affidavit or declaration: If required by the registering authority.
  • Chassis number imprint: A pencil impression may be required.
  • Financier’s NOC: If the vehicle is under an active loan or has a hypothecation entry on its RC.

Disclamer: Requirements can vary by state, RTO and vehicle category. Check the applicable document list before submitting the application.

How to apply for a duplicate RC online

Owners can start the application through the Parivahan Sewa portal. The steps may differ slightly depending on the state and the services available for the vehicle.

Step 1: Visit the Parivahan Sewa portal

Go to parivahan.gov.in and open the vehicle-related services section. Select the state in which the vehicle is registered.

Step 2: Enter the vehicle details

Open the relevant vehicle services page and enter the vehicle’s registration number. The portal may ask for the last five digits of the chassis number and OTP verification.

Step 3: Select the duplicate RC service

Choose ‘Duplicate RC’ or the corresponding duplicate Registration Certificate service from the available options.

Step 4: Fill in the application

Enter the requested details and check that the vehicle and owner information is correct. Provide the reason for requesting a duplicate, where prompted.

Step 5: Submit the documents

Upload the required documents if the portal provides that option. Keep the police report or FIR ready for a lost or stolen RC, along with the insurance and PUC certificates and any other documents requested by the RTO.

Step 6: Pay the applicable fee

Review the fee displayed on the portal and complete the payment. Save the receipt and application number for future reference.

Step 7: Complete verification, if required

Depending on the state’s process, the RTO may require physical document submission or an appointment for verification. Follow the instructions shown after submitting the application.

Step 8: Track the application

Use the application number or the relevant status service on Parivahan to check the progress of the request. Once approved, the duplicate RC is processed according to the applicable procedure.

Can you apply for a duplicate RC offline?

Yes. You can apply for a duplicate RC through the RTO where the vehicle is registered. Submit Form 26 along with the required documents, pay the applicable fee and retain the acknowledgement receipt. The RTO may ask for additional documents or verification, depending on the vehicle and the reason for the application.

How much does a duplicate RC cost?

The fee depends on the vehicle category and the applicable charges. Additional amounts may apply for smart card issuance and other services.

The Parivahan portal displays the payable amount during the application process. Check the amount shown for your vehicle and confirm any additional charges with the relevant RTO before making the payment.

How long does it take to get a duplicate RC?

The processing time depends on the RTO, document verification and whether a physical visit is required. Applicants can track the request online using the application number and follow up with the registering authority if there is a delay.

Can you drive if your physical RC is lost?

If your physical RC is lost, a virtual RC available through DigiLocker or the mParivahan app is recognised as a valid document under government rules. You should still apply for a duplicate if the original has been lost, stolen or damaged beyond use.

A police report or application acknowledgement alone does not replace the RC.

What happens if you find the original RC after getting a duplicate?

Once a duplicate RC has been issued, the original should no longer be used. If you find it later, surrender it to the registering authority. The duplicate replaces the original certificate, but the vehicle’s registration number remains unchanged.

Manoj Bajpayee: मनोज बाजपेई स्टारर ‘घूसखोर पंडित’ का बदला टाइटल, अब इस नाम से रिलीज होगी फिल्म

Manoj Bajpayee: मनोज बाजपेयी और फिल्म निर्माता नीरज पांडे की फिल्म “घूसखोर पंडित” का नाम बदलकर अब “गजब रात” कर दिया गया है। यह फिल्म 23 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। नेटफ्लिक्स ने गुरुवार को एक प्रेस रिलीज में बताया कि रितेश शाह द्वारा निर्देशित और पांडे के बैनर ‘फ्राइडे स्टोरीटेलर्स’ द्वारा निर्मित यह क्राइम थ्रिलर एक ऐसे पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो अपने निजी फायदे और सही काम करने के बीच फंसा हुआ है।

फिल्म में साकिब सलीम, श्रद्धा दास, अक्षय ओबेरॉय, दिव्या दत्ता, कीकू शारदा और नुसरत भरूचा भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। “गजब रात” के जरिए मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे लगभग एक दशक बाद फिर से साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले भी वे एक फिल्म पर साथ काम कर चुके हैं।

मनोज बाजपेयी ने एक बयान में कहा, “नेटफ्लिक्स के साथ मेरा जुड़ाव एक रोमांचक सफर रहा है। ‘गजब रात’ एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसका हिस्सा बनकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।” बता दें कि बाजपेयी ने नेटफ्लिक्स की 2025 में आने वाली फिल्म “इंस्पेक्टर जेंडे” में भी काम किया है।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे हमेशा ऐसे किरदार पसंद आते हैं, जिन्हें आसानी से परिभाषित नहीं किया जा सकता। इस फिल्म ने मुझे एक ऐसी दुनिया में जाने का मौका दिया, जो सस्पेंस, तनाव और जवाबदेही के सवालों से भरी है। इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि जैसे-जैसे रात आगे बढ़ती है, किरदारों के इरादे धीरे-धीरे सामने आते जाते हैं।”

“खाकी” फ्रेंचाइजी, “सिकंदर का मुकद्दर” और हाल ही में रिलीज हुए शो “तस्करी” की सफलता के बाद, “गजब रात” के जरिए नीरज पांडे का नेटफ्लिक्स के साथ क्रिएटिव जुड़ाव आगे बढ़ रहा है।

फिल्म निर्माता और प्रोड्यूसर ने कहा, “मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि एक दिलचस्प कहानी सिर्फ आपको उलझाए ही नहीं, बल्कि आपको सोचने पर भी मजबूर करे। ‘गजब रात’ एक ऐसी थ्रिलर है, जिसमें लोग ऐसे फैसले लेते हैं जो उन्हें एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करते हैं, जहां कोई आसान जवाब नहीं मिलता। फिल्म में तनाव न केवल उन नैतिक दुविधाओं से पैदा होता है जिनका सामना किरदार करते हैं, बल्कि उन घटनाओं से भी आता है जो एक ही रात के दौरान घटित होती हैं।”

उन्होंने आगे कहा- “मनोज के साथ फिर से काम करना और रितेश को एक निर्देशक के रूप में पेश करना, इस प्रोजेक्ट का एक और रोमांचक पहलू था। मुझे उम्मीद है कि दर्शक नेटफ्लिक्स पर इस फिल्म का आनंद लेंगे।” शाह, जिन्होंने ‘कहानी’, ‘पिंक’, ‘एयरलिफ्ट’ और ‘रेड’ जैसी फिल्मों में लेखक के तौर पर काम किया है, ने बताया कि वे थ्रिलर फिल्मों के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं।

उन्होंने कहा, “ऐसी फिल्में आपको एक ऐसी स्थिति में ले जाती हैं जहाँ आप हमेशा सोचते रहते हैं कि आगे क्या होगा; ‘गजब रात’ की शुरुआत भी यहीं से हुई। कहानी एक ही रात में घटती है, इसलिए हमारे पास एक तरह की जल्दबाजी (urgency) पैदा करने और जैसे-जैसे घटनाएं आगे बढ़ें, तनाव को और बढ़ाने का मौका था… मुझे इंतजार है कि दर्शक इस फिल्म को देखें और खुद इस कहानी का अनुभव करें।”

नेटफ्लिक्स ने इस साल फरवरी में ‘घूसखोर पंडित’ नाम से इस फिल्म की घोषणा की थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ। कई यूजर्स, राजनेताओं और संगठनों ने इसे “जातिवादी और आपत्तिजनक” करार दिया। इस विवाद के चलते FIR दर्ज की गईं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को एक नोटिस भेजा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां निर्माताओं ने अदालत को बताया कि फिल्म का शीर्षक बदल दिया जाएगा।

श्रीनगर में NIA का बड़ा एक्शन, LeT आतंकियों को पनाह देने वाले की संपत्ति की जब्त

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तानी आतंकियों को कथित तौर पर पनाह देने के मामले में ये कार्रवाई की है। NIA ने श्रीनगर स्थित हजरतबल के दानिहामा गांव में गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा गैस की आवासीय संपत्ति को जब्त कर लिया है। ये कार्रवाई 2026 में दर्ज जम्मू जोन से जुड़े एक मामले में की गई है। एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 25 के तहत यह कदम उठाया है। संपत्ति पर कार्रवाई से पहले NIA के महानिदेशक से जरूरी मंजूरी भी ली गई थी।

आतंकियों को पनाह देने और सबूत छिपाने का आरोप

NIA की जांच के मुताबिक, आरोपी की इस संपत्ति का इस्तेमाल कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने और आतंकी नेटवर्क से जुड़े आपत्तिजनक साक्ष्य छिपाने के लिए किया गया था। जांच एजेंसी ने संपत्ति और सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश के बीच सीधा संबंध सामने आने का दावा किया है।

6 अप्रैल को तलाशी के दौरान मिले थे दो संदिग्ध

ये मामला 31 मार्च 2026 को श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 24/2026 के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इसे अपने हाथ में लेकर जांच आगे बढ़ाई। जांच के सिलसिले में 6 अप्रैल 2026 को हजरतबल के दानिहामा इलाके में गुलाम मोहम्मद मीर के घर पर छापेमारी की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान अबू हुरैरा और खुबैब नाम के दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का पता चला, जिनके लश्कर-ए-तैयबा से संबंध होने का आरोप है। तलाशी में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री, डिजिटल डिवाइस और जांच से जुड़े अन्य सामान भी बरामद किए गए।

जांच में हुए कई खुलासे

NIA की जांच में स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के एक नेटवर्क का खुलासा होने की बात कही गई है। एजेंसी के अनुसार, ये लोग पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स के साथ कथित तौर पर समन्वय कर पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही, ठहरने और अन्य लॉजिस्टिक सहायता की व्यवस्था कर रहे थे। जांच एजेंसी को आशंका है कि, इस नेटवर्क का इस्तेमाल सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

NIA की तफ्तीश जारी

NIA अब इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य ओवर ग्राउंड वर्कर्स, मददगारों और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क रखने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है। एजेंसी का कहना है कि पूरे आतंकी सपोर्ट नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है।

CJP Protest News: दिल्ली में इस प्रोटेस्टर को जिन 4 ने पीटा उनकी पहचान हुई और पुलिस ने ट्रेस भी कर लिया! अब होगा ये एक्शन

CJP Protest News: राजधानी में एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने मामले में चार लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर हुई, जो कमला मार्केट थाना क्षेत्र में आता है। मामले में किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए बिना पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को X पर लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का दिल्ली पुलिस (कमला मार्केट थाना) ने खुद संज्ञान लिया। इस वीडियो में चार लोग एक पुरुष प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।”

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, “घटना में शामिल चारों लोगों की पहचान कर ली गई है और उनका पता लगा लिया गया है। कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली पुलिस हिंसा की घटनाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और ऐसी शिकायतों पर तुरंत ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

कौन हैं मारपीट के आरोप में गिरफ्तार चारों आरोपी?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रमन सैनी (50), विवेकानंद उर्फ विवेक (32), कपिल कुमार (27) और रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू (35) के रूप में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, चारों ने खुद को हिंदू रक्षा दल से जुड़ा हुआ बताया है। इस संबंध में सामने आई जानकारी आरोपियों के कथित जुड़ाव पर आधारित है। पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद उसकी जांच की और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों से जानकारी जुटाई। इसके बाद घटनास्थल की पहचान डीडीयू मार्ग के रूप में की गई। शुरुआती दौर में वीडियो कहां का है, यह स्पष्ट नहीं था।

बिना शिकायत के पुलिस ने क्यों लिया संज्ञान?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस के पास उस समय तक पीड़ित या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची थी। हालांकि, वीडियो के तेजी से वायरल होने और आरोपियों के दिल्ली-एनसीआर से बाहर जाने की आशंका संबंधी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका थी कि आरोपी क्षेत्र छोड़कर कहीं और जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान की और उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में युवाओं को धक्का देते और पीटते हुए दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट होती दिखाई देती है।

वीडियो सामने आने के बाद इसे कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने साझा किया। इनमें युवा कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और CJP से जुड़े अकाउंट भी शामिल बताए गए हैं। घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में घटना के सभी पहलुओं या आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

CJP के प्रदर्शन के दौरान सामने आई घटना

यह मामला दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी विरोध कर रही है। प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। पुलिस ने कई स्थानों पर लोगों को जुटने से रोकने के लिए कार्रवाई की थी। इसी घटनाक्रम के बीच डीडीयू मार्ग पर कथित मारपीट का वीडियो सामने आया, जिसने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी।

अब आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच के दौरान पुलिस घटना के वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और किसकी क्या भूमिका थी।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR की धाराओं, उन्हें अदालत में पेश किए जाने या अदालत के किसी आदेश का विस्तृत डिटेल्स नहीं दिया गया है।

दीपके, रांका और दास रिहा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। लेकिन रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इससे पहले, रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में CJP नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सूत्रों के अनुसार, CJP नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए प्रतिभूति) और धारा 170 (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई की गई। शनिवार को CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई दिल्ली में सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के बीच हुई, जहां प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

रेलवे को भारी पड़ी रिजर्व कोच से यात्री के सामान की चोरी, दिल्ली के कंज्यूमर कमिशन ने सुनाया 1.45 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने उत्तर रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये देने का आदेश दिया है, जिसका बैग ट्रेन के एक आरक्षित कोच से चोरी हो गया था। आयोग ने कहा कि रेलवे यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि यात्री का सामान टिकट के तहत कवर नहीं होता। कमीशन ने यह भी कहा कि रेलवे स्टाफ घुसपैठ को रोकने में नाकाम रहा और यात्री को FIR दर्ज कराने में ठीक से मदद नहीं की। उपभोक्ता आयोग ने 6 अक्टूबर, 2026 को उत्तर रेलवे की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

7 जून 2014 का है मामला

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश के मुताबिक, अजय कुमार 7 जून, 2014 को महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे। इस दौरान दो बिना इजाजत वाले लोग उनके आरक्षित कोच में घुसे और उनका ट्रॉली बैग चुरा लिया। बैग में कथित तौर पर 1.2 लाख रुपये की ज्वेलरी, कपड़े और दूसरा सामान था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कुमार ने आरोप लगाया कि वह तुरंत कोच में TTE के पास गए और FIR दर्ज कराने के लिए कहा। लेकिन, FIR 23 अप्रैल, 2015 को ही दर्ज हुई। शिकायत करने वाले ने रेलवे अधिकारियों से संपर्क करना जारी रखा और बाद में पता चला कि मई 2017 में केस को अनट्रेस्ड मार्क कर दिया गया था। फिर उसने नुकसान के लिए हर्जाने की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उत्तर रेलवे ने कहा कि सामान उसके पास बुक नहीं किया गया था और वह पैसेंजर की पर्सनल कस्टडी में था। उसने रेलवे एक्ट के सेक्शन 100 का भी हवाला दिया, जो रेलवे स्टाफ की लापरवाही साबित होने तक सामान के लिए रेलवे की जिम्मेदारी को सीमित करता है। उसने आगे कहा कि मामला चोरी से जुड़ा है और इसे क्रिमिनल लॉ के तहत निपटाया जाना चाहिए।

जिला उपभोक्ता आयोग ने 16 अप्रैल, 2024 को कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें उत्तर रेलवे को 7 सितंबर, 2017 से 9% सालाना ब्याज के साथ 1.2 लाख रुपये और हर्जाने के तौर पर 25,000 रुपये देने का निर्देश दिया। रेलवे ने उस आदेश को राज्य आयोग के सामने चुनौती दी।

आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार क्यों ठहराया?

अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और मेंबर बिमला कुमारी की बेंच ने कहा कि जिला आयोग का रेलवे को लापरवाही और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराना सही था। बेंच ने कहा कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं था कि यात्री ने अपना सामान अपनी कस्टडी में रखा था या नहीं। बल्कि यह था कि रेलवे ने बिना इजाजत वाले लोगों को रिजर्व्ड कोच में घुसने से रोकने के लिए सही कदम उठाए थे या नहीं। कमीशन ने कहा, “जो यात्री रिजर्व्ड टिकट खरीदता है, वह अपनी निजी सुरक्षा और सामान की सुरक्षा और सिक्योरिटी का सही भरोसा पाने का हकदार है।”

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Delhi Protest: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले वकीलों की हिरासत पर बवाल, SCAORA और SCBA ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की ये अपील

सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जुटे वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर ने न्यायिक व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शन की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लॉयर एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर शनिवार (10 अक्टूबर) को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है।

CJI सूर्यकांत से दखल देने की अपील

10 अक्टूबर को जारी एक प्रेस रिलीज में LAFC ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और जिन वकीलों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एसोसिएशन ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ताकत, गोपनीयता या अंधाधुंध हिरासत से नहीं दिया जा सकता।” साथ ही, एसोसिएशन ने कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

इसके साथ ही LAFC ने हिरासत में लिए गए हर वकील के नाम, उनके ठिकाने, सुरक्षा और उन्हें हिरासत में लेने के कानूनी आधार की जानकारी मांगी। एसोसिएशन ने उन वकीलों को रिहा करने की मांग की जिन्हें हिरासत में लेने का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। इसके अलावा, उन्हें वकील, परिवार के सदस्यों और जरूरी मेडिकल मदद तक पहुंच देने की भी मांग की।

पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग

एसोसिएशन ने विरोध-प्रदर्शन, कथित बल प्रयोग और उसके बाद की हिरासत से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। एसोसिएशन ने बल प्रयोग की खबरों—खासकर महिला वकीलों के खिलाफ—की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र जांच की भी मांग की, और जहां भी गैर-कानूनी कार्रवाई साबित हो, वहां जवाबदेही तय करने और उचित राहत देने की बात कही।

प्रदर्शन करने पर वकीलों को परेशान न किया जाए

LAFC ने यह भी मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी वकील के खिलाफ बदले की भावना से FIR दर्ज न की जाए। वकीलों को डराने-धमकाने या उनके पेशेवर काम पर असर डालने वाली कार्रवाई से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भविष्य में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।

इस बीच, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की। एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “अघोषित इमरजेंसी” करार देते हुए कहा कि ये हालात इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई मौजूदा पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए। लोगों की आवाजाही पर लगाई गई सभी पाबंदियां भी फौरन हटाई जाएं, क्योंकि ये मौजूदा सरकार की असंवैधानिक और गैर-कानूनी गतिविधियां हैं।”

एसोसिएशन ने बताया कि यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर को हुई एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। साथ ही, एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव की एक कॉपी बॉम्बे बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्षों को भेजने का भी फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पुलिस ने वरिष्ठ और युवा वकीलों के साथ-साथ महिला वकीलों को भी हिरासत में लिया। आरोप है कि हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर बैज भी नहीं लगा रखे थे।

एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने का पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें वकीलों व परिवार के सदस्यों से मिलने की सुविधा देने की मांग की। साथ ही, यह भी कहा कि अगर हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इसी तरह, SCBA ने भी CJI से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर बात करें, हिरासत में लिए गए वकीलों का पता लगाएं और हिरासत में लेने की परिस्थितियों व कथित बल प्रयोग की जांच करें। इस प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए।

ये मांगें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आई हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया’ (Special Intensive Revision process) से जुड़े आरोप हैं।

मेट्रो पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना ​​याचिका

इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

10 अक्टूबर को सुबह 8.17 बजे डायरी नंबर 63801/2026 के तहत दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 129 और ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ की धारा 12 का हवाला दिया गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कि सेवाओं को रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद रखे गए। बता दें कि 9 अक्टूबर को CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा था कि “मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी” और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे ट्रांसपोर्ट से जुड़े नियमों का प्रचार करें और चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।

लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया

ANI के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने एहतियाती उपायों के तहत समूहों में आ रहे लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया और आपराधिक बैकग्राउंड वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा। बता दें कि नई दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था और स्टेडियमों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनॉट प्लेस में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 200 थी।

मुंबई से आने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की।

सुरक्षा के लिए RAF और CRPF की तैनाती

सुरक्षा व्यवस्था में रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस पिंक फोर्स और CRPF शामिल थे। साथ ही मोहन एस्टेट में ड्रोन, मजबूत बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स भी तैनात किए गए थे। इस दौरान CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए 12-सूत्रीय एडवाइजरी जारी कर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहों से बचने, आपातकालीन रास्तों को खाली रखने, कानूनी निर्देशों का पालन करने और हिरासत में लिए जाने पर कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया है।

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CBI ने बैंकिंग भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का किया भंडाफोड़, CGST इंस्पेक्टर समेत 4 गिरफ्तार

CBI Banking Exam Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देशभर में बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा और अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों के परीक्षा देने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सीबीआई ने दिल्ली (Delhi), बिहार (Bihar), हरियाणा (Haryana) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सक्रिय इस नेटवर्क के चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में एक CGST इंस्पेक्टर भी शामिल है

CBI के मुताबिक, यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर की गई। मामले की जांच CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई कर रही है।

कई राज्यों में एक साथ छापेमारी

CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच ने दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में समन्वित तरीके से कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गिरोह के चार प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।जांच में सामने आया है कि आरोपी बैंकिंग भर्ती की चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में असल उम्मीदवारों की जगह खुद परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल होते थे। आरोपी शारीरिक रूप से अभ्यर्थियों की जगह उपस्थित होकर चयन प्रक्रिया में धोखाधड़ी करते थे।

मेहनती अभ्यर्थियों के हक पर डाका

CBI के अनुसार, इस गिरोह की गतिविधियों से सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई। फर्जी तरीके से चयन प्रक्रिया में शामिल होकर आरोपियों ने उन वास्तविक और मेहनती अभ्यर्थियों के अवसरों को प्रभावित किया, जो अपनी योग्यता के आधार पर भर्ती हासिल करने की तैयारी कर रहे थे। इस मामले में सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। रैकेट में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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Meerut Viral Video: पति को गर्लफ्रेंड संग मोमो डेट पर देख भड़की पत्नी! कार के बोनट पर लटकी; 100 मीटर तक घसीटता रहा शख्स

Meerut Viral Video: उत्तर प्रदेश के मेरठ से पति-पत्नी के रिश्ते और सड़क पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। आरोप है कि पत्नी ने अपने पति को एक दूसरी महिला के साथ मोमो डेट पर रंगे हाथों पकड़ लिया। पति जब कार लेकर वहां से जाने लगा तो पत्नी उसकी कार के बोनट पर चढ़ गई। इस दौरान कार चलती रही और महिला करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने बताया कि पत्नी को कथित तौर पर कार से कुचलने की कोशिश करने के आरोप में उसके पति समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार को लोहिया नगर थाना क्षेत्र में हापुड़ रोड स्थित एल-ब्लॉक चौकी के पास हुई।

दूसरी महिला के साथ पति को देख पत्नी ने किया सामना

पुलिस के मुताबिक, शनिवार शाम लोहियानगर इलाके के एल-ब्लॉक पुलिस चौकी के पास मयंक सिंह कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौजूद था। इसी दौरान उसकी पत्नी सुनीता सिंह की नजर दोनों पर पड़ गई। सुनीता ने पति को दूसरी महिला के साथ देखा तो वहां दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद मयंक वहां से कार लेकर निकलने की कोशिश करने लगा।

कार के सामने खड़ी हो गई पत्नी

पुलिस के अनुसार, पति को रोकने के लिए सुनीता कार के सामने खड़ी हो गई। कार आगे बढ़ी तो वह टोयोटा अर्बन क्रूजर टैसर के बोनट पर जा गिरी और कार को रोकने के बजाय वह बोनट पकड़कर लटक गई। वायरल वीडियो में कथित तौर पर महिला को चलती कार के बोनट पर पकड़े हुए देखा जा सकता है। वह आसपास मौजूद लोगों से मदद के लिए लगातार गुहार लगाती सुनाई दे रही है।

करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही महिला

बताया गया है कि कार करीब 100 मीटर तक चलती रही। इस दौरान आसपास के लोग घटना देखकर वहां जुटने लगे। लोगों की भीड़ बढ़ती देख चालक ने आखिरकार कार रोक दी। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

पुलिस ने बताया कि काजीपुर निवासी महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उसने हसनपुर कला गांव निवासी अपने पति मयंक (36) को एक महिला के साथ कार में देखा और दोनों को रोक लिया तभी पति-पत्नी के बीच कहासुनी हो गई।

महिला की शिकायत के मुताबिक, कहासुनी के बाद पति ने उस पर कार चढ़ाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मयंक और उसके साथ मौजूद महिला ने उसे झाड़ियों में गिराकर उसका गला दबाने की भी कोशिश की। उसके साथ गाली-गलौज भी की।

पति पर कई गंभीर आरोप, दोनों गिरफ्तार

सुनीता ने अपने पति के खिलाफ मारपीट, दहेज उत्पीड़न और बेवफाई के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मयंक के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में मयंक सिंह और माही वर्मा दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में इस्तेमाल कार, जिसका नंबर UP15ER3086 बताया गया है, उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

मामला लोहियानगर थाने में FIR नंबर 697/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) और 352 लगाई गई हैं। मामले की आगे जांच जारी है।

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला एक व्यक्ति को कार से उतारकर उसकी पिटाई करती दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला को कार के बोनट पर कुछ दूरी तक घसीटते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) संग्राम सिंह ने पीटीआई को बताया कि पुलिस ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में प्रयुक्त कार को जब्त कर लिया गया है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।