जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

swatantra-bhardwaj

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। 

ALSO READ: BLA : बलूचिस्‍तान बना पाकिस्‍तानी सेना का कब्रिस्‍तान, बीएलए ने मचाई तबाही, मुनीर के 25 सैनिकों को किया ढेर

क्या था पूरा मामला

खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।  पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

 

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

 

हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।

ALSO READ: Kia Sorento : भारत में लॉन्च हुई नई प्रीमियम SUV, कीमत ₹27.99 लाख से शुरू; हाइब्रिड और डीजल इंजन के साथ मिलेगी AWD की सुविधा

निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?

निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं।  जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले को मिला राजनीतिक रंग

निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा...

Abhijeet Dipke Degree Controversy

Abhijeet Dipke News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। 

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में अभिजीत दीपके ने लिखा कि लोग मेरी डिग्री देखने का इंतजार करते-करते अपना सब्र खो रहे हैं। मुझे हैरानी होती है कि वे 12 साल से प्रधानमंत्री की डिग्री देखे बिना कैसे रह रहे हैं। इसके आगे उन्होंने पीएम मोदी को टैग करते हुए इनवाइट किया और कहा कि चलो हम दोनों अपनी डिग्री दिखाते हैं और इस मामले को यहीं खत्म करते हैं। ALSO READ: ‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

क्या है दीपके के सवाल?

दीपके ने एक्स पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री साझा करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- 1976 में, मोदी के मार्क्स कंप्यूटर से जेनरेट किए गए थे, जबकि दूसरे छात्रों के मार्क्स हाथ से लिखे गए थे। उन्होंने आगे लिखा- मोदी की मार्कशीट में 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली' गोथिक फ़ॉन्ट में लिखा हुआ है, जबकि DU ने 1983 के बाद गोथिक फ़ॉन्ट का इस्तेमाल करना शुरू किया था। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

पॉडकास्ट से शुरू हुआ विवाद

गौरतलब है कि अभिजीत दीपके की अमेरिकी डिग्री पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब हाल ही में प्रखर गुप्ता के एक पॉडकास्ट में (जिसमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक मेहमान थे) दीपके की बोस्टन यूनिवर्सिटी की शिक्षा पर खुले तौर पर सवाल खड़े किए गए। इसके जवाब में दीपके ने साफ किया कि वे अपनी डिग्री दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, बशर्ते प्रधानमंत्री भी अपनी डिग्री सार्वजनिक करें।

 

हालांकि पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठना कोई नया मामला नहीं है, विपक्षी दल भी समय-समय पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। हालांकि, भाजपा पहले ही पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक कर चुकी है और उसका कहना है कि यह मामला बहुत पहले ही सुलझ चुका है।

क्या है सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का केस जिसकी अब CBI करेगी जांच? 2020 से अबतक ये सब हुआ

Disha Salian Case: दिवंगत बॉलीवुड सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में बुधवार (2 सितंबर) को बड़ा कानूनी मोड़ आ गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (2 सितंबर) को दिवंगत बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच का आदेश दिया। इस दौरान अदालत ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि जांच अधिकारी को उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिल जाएं। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि जांच के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति की जाए। साथ ही मामले में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर आगे की जांच की जाएगी।

यह मामला दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका के बाद एक बार फिर बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने आया था। सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाए थे कि परिवार की ओर से संदेह जताए जाने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई?

‘बिना सबूत किसी को भी आरोपी न माना जाए’

हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक जांच में किसी के खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं, तब तक किसी को भी आरोपी न माना जाए। अदालत ने कहा, “अगर कोई गंभीर अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस) बनता है, तो इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। अगर कोई गंभीर अपराध नहीं बनता है, तो जजों ने जांच अधिकारी (I.O.) को आदेश दिया है कि वे सक्षम अदालत में मामले को बंद करने की उचित प्रक्रिया शुरू करें।” दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की इजाजत दी गई है।

CBI दर्ज करेगी FIR, वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे जांच

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इसके बाद CBI जांच को आगे बढ़ाएगी। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि जांच के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो सके।

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक बिल्डिंग से गिरने के बाद हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर कई सवाल और आरोप सामने आए तथा दिशा के पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की।

सतीश सालियान का बयान भी दर्ज होगा

CBI जांच के दौरान दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा। उनके आरोपों और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि किसी मामले में कानूनी रूप से उचित जांच और प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष और न्यायिक रूप से स्वीकार्य क्लोजर मिल सके।

आदित्य ठाकरे को लेकर कोर्ट का अहम रुख

मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम राजनीतिक और कानूनी बहस के दौरान सामने आता रहा है। हालांकि, CBI जांच का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी घोषित कर दिया गया है।

Disha Salian Case_

जांच एजेंसी को उपलब्ध सबूतों, बयानों, रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ानी होगी। किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों या राजनीतिक दावों के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता। ठाकरे की ओर से पहले भी उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया गया है। उनके वकील ने अदालत में याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोपों का विरोध किया था।

कोर्ट के फैसले के बाद भावुक हुए दिशा के पिता

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान भावुक हो गए। उन्होंने अदालत के आदेश के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उम्मीद जताई कि अब उनकी बेटी की मौत से जुड़े सवालों की निष्पक्ष तरीके से जांच होगी। दिशा सालियान की मौत के मामले में पिछले कई वर्षों से अलग-अलग दावे और जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मुंबई पुलिस ने पहले मामले में किसी तरह की आपराधिक साजिश से इनकार किया था। जबकि दिशा के परिवार की ओर से बाद में गंभीर संदेह जताते हुए नए सिरे से जांच की मांग की गई।

ये भी पढ़ें- Ghaziabad Traffic: गाजियाबाद वालों के लिए बड़ी राहत! शाहबेरी रोड होगी चौड़ी, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जाने वाले 50,000 लोगों को जाम से मिलेगी मुक्ति

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

crime news

राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने छह साल पुरानी ‘निर्भया’ कांड की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान एक चलती हुई बस में ग्यारहवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत की गई। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों (ड्राइवर और कंडक्टर) को तिमारपुर बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली यह छात्रा 4 अगस्त को घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और रात के अंधेरे के कारण वह अपनी सही जगह पर उतरने के बजाय परी चौक पर उतर गई।

 

 वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को देखकर उसने रुकने का इशारा किया। बस के कंडक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि वह उसे नोएडा सेक्टर-63 उतार देगा। लेकिन बस में चढ़ने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर और ड्राइवर ने अपनी घिनौनी करतूत शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर छोड़कर फरार हो गए।

 

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चेकिंग पर उठे गंभीर सवाल

 

47 किलोमीटर का लंबा रास्ता: परी चौक से कश्मीरी गेट तक के इस सफर में बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं भी पुलिस बैरिकेडिंग या चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

 

काले पर्दे और सुनियोजित साजिश: बस में गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से गुजर रहे किसी भी राहगीर को अंदर चल रही इस दरिंदगी का अहसास नहीं हो सका।

 

वर्कशॉप जा रही थी बस: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बस खराब होने के बाद उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए ले गए थे और फिर खाली बस को तिमारपुर ला रहे थे, तभी रास्ते में छात्रा उन्हें मिल गई। ALSO READ: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

 

सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी गिरफ्तार

घायल अवस्था में पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को तिमारपुर से दबोच लिया। बस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही, परिजनों को तुरंत दिल्ली बुलाकर काउंसलिंग के बाद पीड़िता को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बसों के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

Complaint filed against Rahul Gandhi in Haldwani Uttarakhand

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

खबरों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

ALSO READ: राहुल गांधी का BJP-RSS पर सीधा हमला, 'शुद्धीकरण' को बताया आधुनिक छुआछूत, PM से FIR दर्ज कराने की मांग

अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित कुमार ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा प्रभावित हुई है। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस बयान से उनके और शुद्धिकरण में शामिल दूसरे लोगों के सम्मान और सामाजिक छवि पर असर पड़ा है।

अमित कुमार के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली हुई थी। रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को उन्होंने अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों के साथ मैदान की सफाई और हवन-शुद्धिकरण किया था।

ALSO READ: Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द एफआईआर होनी चाहिए। हालांकि इस मामले को लेकर हल्द्वानी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवन किया था।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी! 30 बैंक लॉकरों की जांच में जुटी SIT, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी जांच अब केवल दस्तावेजों की पड़ताल तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में संपत्तियों और बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी 30 बैंक लॉकरों में रखी सामग्री का सत्यापन किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लॉकरों में वास्तव में कितनी और कौन-कौन सी वस्तुएं मौजूद हैं। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि क्या उनका डिटेल्स राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज इन्वेंट्री से मेल खाता है या नहीं।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच टीम ने मंगलवार (26 अगस्त) को भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। लॉकर खोलने से लेकर उसमें रखी प्रत्येक वस्तु की जांच तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। टीम वस्तुओं की पहचान, उनकी संख्या, उपलब्धता और स्थिति की पुष्टि करने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड से उनका मिलान कर रही है।

रिकॉर्ड और वास्तविक सामान का होगा मिलान

फोरेंसिक सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज सामान और लॉकरों में वास्तव में मौजूद सामान में कोई अंतर तो नहीं है। टीम प्रत्येक वस्तु को रिकॉर्ड में दर्ज विवरण से क्रॉस-चेक कर रही है।

जांच के दौरान केवल सामान की गिनती ही नहीं की जा रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। इस पूरी प्रक्रिया के आधार पर एक विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हर सामान का बनाया जा रहा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड

जांच की खास बात यह है कि प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के दौरान ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी तैयार किया जा रहा है। सामान का डिटेल्स, उसकी पहचान, रिकॉर्ड में उसकी एंट्री और मौके पर उसकी मौजूदगी को डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उनकी प्रामाणिकता पर सवाल न उठे। इस तरह जांच टीम केवल कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बल्कि भौतिक साक्ष्यों का भी डिजिटल दस्तावेज तैयार कर रही है।

पेन ड्राइव में सुरक्षित होंगे जांच के दस्तावेज और वीडियो

फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो साक्ष्यों को एक पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने की भी तैयारी की जा रही है। इससे जांच में सामने आए भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेगा।

सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट?

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। संभावना जताई जा रही है कि जांच टीम सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है। वहीं, 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी बैठक के आसपास SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सौंप सकती है।

फिलहाल, 30 बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच को इस मामले की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इस सत्यापन से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों और वास्तविक रूप से मौजूद सामान के बीच कोई अंतर है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय हो सकती है।

आरोपियों पर BNS की गलत धाराएं लगाने का वकील का दावा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद FIR दर्ज की गई। साथ ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।

ये भी पढ़ें- योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

सिंह ने यह भी दलील दी है कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है। जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

Abhijeet Dipke Cockroach Janta Party

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को अपने संगठन में नए पदाधिकारियों और जोनल कोऑर्डिनेशन कमेटियों के सदस्यों की घोषणा की। यह फैसला संगठन की 14 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के कुछ सप्ताह बाद लिया गया है। पार्टी ने अपने संस्थापक अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। वहीं मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

 

CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर नए संगठनात्मक पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए कहा कि वह देशभर में संगठन को और मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। संगठन ने इसके साथ ही पांच संगठन संयुक्त सचिवों और दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के नामों का भी ऐलान किया है।

ALSO READ: Bajaj Pulsar 125 और Pulsar 150 का नया अवतार लॉन्च, ₹92,990 से शुरू कीमत, मिलेंगे Ride Modes, TFT डिस्प्ले और Google Maps

व्यंग्यात्मक संगठन से युवा आंदोलन तक पहुंचा CJP

 

कॉकroach जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक संगठन के तौर पर हुई थी, लेकिन पिछले महीने हुए सफल प्रदर्शन के बाद यह धीरे-धीरे युवा आंदोलन और दबाव समूह के रूप में उभरा। संगठन का दावा है कि उसके आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

नए पदाधिकारियों की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब CJP ने केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को किए गए कथित वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है।

ALSO READ: अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान

 

CJP ने सोमवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने और 5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की थी। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। CJP के मुताबिक, 25 जुलाई को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद संगठन ने अच्छे विश्वास में अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन वापस लिया था। हालांकि, अब संगठन का आरोप है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी नहीं उतरी।

 

संगठन ने बताया कि 5 सितंबर को होने वाला मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। मार्च का नेतृत्व कथित तौर पर मृत NEET अभ्यर्थियों के परिवार और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार करेंगे। CJP ने दावा किया कि देशभर से छात्र, युवा संगठन और युवा नागरिक इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हो सकते हैं।

ALSO READ: इंदौर क्‍यों सूखा, बचे मानसून में भी बारिश की नहीं उम्‍मीद, कमजोर सिस्‍टम ने बिगाड़ा खेल, क्‍या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक?

FIR वापस लेने के वादे को लेकर सरकार पर आरोप

 

CJP लंबे समय से केंद्र सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाती रही है। संगठन का मुख्य आरोप प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने के कथित आश्वासन से जुड़ा है। इस महीने की शुरुआत में CJP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था। संगठन ने केंद्र की मोदी सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अड़चन डालने का आरोप लगाया था।

 

संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि 25 जुलाई को किए गए कथित वादों पर ठोस प्रगति नहीं हुई तो देशभर में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। CJP ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि सरकार किसी पूरी पीढ़ी का भरोसा लेकर युवाओं को घर भेजने के बाद अपने ही वादे से पीछे नहीं हट सकती। संगठन ने इसे “विश्वासघात” करार देते हुए कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।

ALSO READ: यूपी के 558 मदरसा प्रबंधक एंटी करप्शन के रडार पर, फर्जी नियुक्ति से चंदे तक, 333 पन्नों में खुला पूरा कच्चा चिट्ठा

आगे क्या?

नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च के ऐलान से CJP ने अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च में कितनी भागीदारी होती है।

मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था संभालने वाली खाकी इन दिनों सवालों के घेरे में है। पहले कटनी में सीएसपी के भष्टाचार के मामले में फंसने के बाद अब इंदौर में रिश्वत के मामले में क्राइम ब्रांच के पूर्व इंस्पेक्टर सहित चार पुलिस कर्मियों पर FIRदर्ज की गई है। दरअसल प्रदेश में  हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कटनी में सीएसपी समेत पुलिसकर्मियों पर रिश्वत और जांच में लापरवाही के आरोप हों या इंदौर या भोपाल में पुलिस विभाग के ही कर्मचारियों का रिश्वत लेते पकड़ा जाना, इन घटनाओं ने खाकी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। 

 

इंदौर में खाकी पर रिश्वतखोरी का आरोप- इंदौर में केस दर्ज न करने के एवज में एक लाख 20 हजार की रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त ने क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुमित श्रीवास्तव,आरक्षक विकास सेठ समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस कर्मियों पर आरोप है कि शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बदले उससे 1.20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 50,800 रुपए यूपीआई के माध्यम से और बाकी 70 हजार रुपए नकद लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रोकने और मामले में राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। जांच में आरोप सहीं पाए जाने में पर लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया है।

 

कटनी में भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित सीएसपी फरार- कटनी में करोड़ों की जमीनी खरीदे मामले में सीएसपी नेहा पच्चीसिया निलंबन और केस दर्ज होने के बाद से अब तक फरार चल रही है। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीन को दबाव बनाकर करीब 18 लाख रुपये में खरीदने का आरोप है। पूरे मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के दखल के बाद नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निलंबन और FIR दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया फरार  है। 

 

इससे पहले भोपाल में खाकी के भ्रष्टाचार का एक अलग चेहरा सामने आया। पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल और एफआरवी ड्राइवर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। खास बात यह रही कि कार्रवाई करने वाली टीम भी पुलिस विभाग की ही थी। यानी विभाग के भीतर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की तस्वीर दिखाई दी।

 

सवाल सिर्फ रिश्वत का नहीं, सिस्टम पर भरोसे का है- प्रदेश में लगातार पुलिस अधिकारियों औऱ कर्मियों के रिश्वत के मामले में फंसने के बाद सवाल लोगों के खाकी पर भरोसे का  है। लोगों  की रक्षा करने वाली खाकी ही इस तरह दागदार होती गई तो जनता का सिस्टम पर से भरोसा ही उठ जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस के सामने इस चुनौती दोहरी है, एक तरफ अपराधियों पर कार्रवाई और दूसरी तरफ अपने ही तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती। हाल के मामलों ने साफ कर दिया है कि खाकी की साख सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई से नहीं, बल्कि अपने भीतर के दागों पर कार्रवाई से भी तय होगी।

Kriti Sanon: क्या वे इसे ईद के एड पर पहनेंगी? रक्षाबंधन के विज्ञापन में ब्रालेट टॉप पहने दिखीं कृति सेनन पर भड़के लोग

Kriti Sanon Rakshabandhan ad: कृति सेनन को रक्षाबंधन के ज्वेलरी विज्ञापन में एक फ्यूजन आउटफिट (जिसमें ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी) पहनने के बाद ऑनलाइन काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। जहां कुछ यूज़र्स ने इस लुक को त्योहार के कैंपेन के लिए गलत बताया, वहीं दूसरों ने एक्ट्रेस का बचाव करते हुए कहा कि महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन में कृति को एक कुत्ते को राखी बांधते हुए भी दिखाया गया है, जो उन पर भौंकता है। त्योहार में पालतू जानवर को शामिल करने का यह आइडिया कुछ लोगों को पसंद नहीं आया, जबकि अन्य लोगों ने उनके आउटफिट पर ध्यान दिया और सवाल उठाया कि क्या यह रक्षाबंधन के लिए सही था।

कृति सेनन को क्यों ट्रोल किया जा रहा है?

ऐड के ऑनलाइन शेयर होने के बाद कृति की ड्रेस चर्चा का मुख्य विषय बन गई। कुछ यूजर्स को लगा कि रक्षाबंधन से जुड़े कैंपेन के लिए उनका ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज कुछ ज्यादा ही रिवीलिंग था, जबकि दूसरों का कहना था कि यह आलोचना असल में महिला के कपड़ों पर रोक-टोक करने जैसा है।

एक और व्यक्ति ने ‘आदिपुरुष’ की एक्ट्रेस के खिलाफ शिकायत की मांग की। उन्होंने कहा, “भाई-बहन के त्योहार राखी को गलत तरीके से दिखाने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए @kritisanon के खिलाफ BNS की धारा 299 के तहत FIR दर्ज की जानी चाहिए—इसमें विजुअल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाले जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्यों के लिए 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।”

एक और यूजर ने कहा, “लड़के ने पूरे पारंपरिक कपड़े क्यों पहने हैं?? उसे भी जिम वेस्ट पहननी चाहिए थी। लोग मौके के हिसाब से कपड़े पहनते हैं, यह तो आम समझ की बात है। यह रक्षाबंधन है किसी की प्राइवेट पार्टी नहीं।” कुछ आलोचनाओं में धर्म का मुद्दा भी उठाया गया। यूजर्स ने सवाल किया कि क्या ईद या क्रिसमस जैसे त्योहारों पर भी ऐसे कपड़ों को स्वीकार किया जाता।

कृति सेनन के फैन्स उनके समर्थन में आए

हर कोई इस आलोचना से सहमत नहीं था। कई यूजर्स कृति के बचाव में भी उतरे और कहा कि उनकी ड्रेस पारंपरिक त्योहारों के कपड़ों का एक आधुनिक रूप थी, न कि कुछ अनुचित। एक यूजर ने लिखा, “हर कोई कृति सेनन को इस GIVA ऐड के लिए ट्रोल कर रहा है और कह रहा है कि उन्होंने ‘बिकिनी’ पहनी है। क्या सच में? नहीं। उन्होंने कुछ भी गलत या अश्लील नहीं पहना है। हो सकता है कि उनका पहनावा ‘शालीनता’ की आपकी परिभाषा में फिट न बैठता हो। मैं भी अपने भाई के सामने ऐसे कपड़े पहन सकती हूं। जो लोग फिल्मों में उनके बिकिनी सीन पर तालियां बजाते थे, वही अब उनके कपड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। औरतों को हर हाल में जज किया जाता है। ट्रोलर्स, अपनी जिंदगी पर ध्यान दो।”

एक और यूजर ने कहा, “मजेदार बात है कि जब औरतों के कपड़ों की बात आती है, तो लोग अचानक शालीनता के ठेकेदार बन जाते हैं। अगर आपको उनका पहनावा पसंद नहीं है, तो आगे बढ़ जाइए। किसी और की पसंद पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है।”

तीसरे यूजर ने लिखा, “कृति सेनन के राखी ऐड पर क्लीवेज दिखाने और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर हंगामा मच गया। आलोचकों ने त्योहार के दौरान उनके ‘अश्लील’ कपड़ों पर सवाल उठाए और पालतू कुत्ते को राखी बांधने पर आपत्ति जताई, इसे गलत बताया!! ये तो ‘मोरल पुलिस’ वाली बात हो गई!”

रक्षा बंधन 2026, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यह हिंदू त्योहार भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाता है। इस मौके पर बहनें पारंपरिक रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती हैं, जबकि भाई अक्सर बदले में तोहफे देते हैं।

कृति सेनन की फिल्में

कृति सेनन को हाल ही में होमी अदजानिया की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था, जो 19 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना भी हैं और यह 14 अगस्त से नेटफ़्लिक्स पर स्ट्रीम होने लगी है।

राम मंदिर चंदे में ‘चोरी’ की खबर करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पहुंचे SC, गाजियाबाद में रोड-रेज की FIR का मामला

पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंन गाजियाबाद में ‘रोड-रेज’ (सड़क पर झगड़े) की एक कथित घटना को लेकर अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी है। उपाध्याय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के प्रबंधन में चोरी और गड़बड़ी के आरोपों की रिपोर्ट सबसे पहले करने वालों में से एक थे।

उपाध्याय का आरोप है कि यह मामला झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है और इसका मकसद उनकी स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें परेशान करना है। उन्होंने FIR को रद्द करने और गिरफ्तारी व अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी अन्य एजेंसी, जैसे CBI या दिल्ली पुलिस को सौंपी जाए।

यह FIR 18 अगस्त को इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास एक बलेनो कार ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ड्राइवर ने उसे गाली दी और धमकी दी और कार के संबंध में उपाध्याय का नाम लिया।

उपाध्याय ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को अपनी बेटी के स्कूल से लौटते समय, शिप्रा मॉल के पास एक मोटरसाइकिल सवार उनकी कार के पास आया और हंगामा किया। उनके अनुसार, कोई टक्कर या हाथापाई नहीं हुई थी और वह उस जगह से चले गए क्योंकि उनकी बेटी उनके साथ थी।

उन्होंने मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। जबकि FIR में ‘स्प्लेंडर’ का जिक्र है। उनका दावा है कि शिकायत में दिया गया नंबर किसी दूसरी मोटरसाइकिल का है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी उस जगह के पास की दुकानों पर गए और दुकानदारों पर CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट करने या न देने का दबाव डाला।

पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें पूरी FIR नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार FIR को पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था।

उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया है कि 20 अगस्त की देर रात पुलिसकर्मी उनके गाजियाबाद स्थित घर पर आए थे। उनके अनुसार, रात करीब 10:20 बजे, जब वे दिल्ली में थे, उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि आठ या नौ पुलिसकर्मी घर पर आए हैं। याचिका में यह संख्या लगभग एक दर्जन बताई गई है और कहा गया है कि उस समय उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस टीम में कोई महिला अधिकारी शामिल नहीं थी।

‘द हिंदू’ ने यह भी रिपोर्ट किया कि 19 अगस्त को उपाध्याय ने एक IAS अधिकारी के खिलाफ आरोपों से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। यह मामला 2023 में खरीदे गए करोड़ों रुपये मूल्य के दो कृषि भूखंडों और उन पर स्कूल के निर्माण से संबंधित था। उन्होंने आरोप लगाया कि धमकाने और परेशान करने से संबंधित प्रावधानों के तहत उनके YouTube वीडियो को लगभग आधे घंटे के भीतर हटा दिया गया था, लेकिन कानूनी चुनौती के बाद 20 अगस्त को उसे बहाल कर दिया गया।

उपाध्याय ने पुलिस की इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार पर अपनी रिपोर्टिंग से जोड़ा है। उनके YouTube चैनल पर लोक निर्माण विभाग, अवैध खनन, परीक्षा में अनियमितताओं, राज्य राजस्व विभाग और राम मंदिर दान विवाद से जुड़ी रिपोर्टें दिखाई गई हैं।

‘द वायर’ से बात करते हुए उपाध्याय ने कहा, “मैंने 7 जून को राम मंदिर में चोरी की खबर ब्रेक की थी, तब से मेरे खिलाफ ऐसी शिकायतें और FIR दर्ज होना एक आम बात हो गई है। मैं उनके भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहा हूं, यही उनकी समस्या है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया, “हिंदू-मुस्लिम राजनीति की आड़ में उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।”

अपनी याचिका में उपाध्याय ने कहा कि उन्हें “जल्द गिरफ्तारी और शारीरिक नुकसान” की आशंका है और दावा किया कि “राज्य तंत्र द्वारा भेजे गए गुंडों” से उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से वे सुरक्षित रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट नहीं जा पा रहे हैं।

उन्होंने FIR रद्द करने, गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा और इसके विकल्प के तौर पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे किसी भी कानूनी जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। उपाध्याय को इससे पहले 2024 में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के सिलसिले में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, जो उनकी रिपोर्टिंग के बाद दर्ज की गई थी। ‘द वायर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को आदेश दिया था कि उस मामले में उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।