Delhi Protest: दिल्ली में पुलिसकर्मियों पर 3 महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न का आरोप, क्राइम जांच ने शुरू की जांच

Delhi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है जिसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ नयी दिल्ली जिला पुलिस को ये शिकायतें मिली थीं। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली जिला पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

अधिकारी के अनुसार, ये आरोप तीनों महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अपराध शाखा आरोपों की गहन जांच करेगी और शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करेगी। दिल्ली पुलिस ने रविवार (4 अक्टूबर) को X पर एक पोस्ट में कहा, “03-10-26 को नई दिल्ली इलाके में विरोध-प्रदर्शन के दौरान, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की स्थिति में, तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। नई दिल्ली ज़िले को उनकी शिकायतें मिली हैं और निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।”

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने के आरोपों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शनिवार को जवाब मांगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए अमित शाह को इस मामले में जवाब देना चाहिए। गांधी ने कहा, “जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वह भी नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि शनिवार को ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। गांधी ने कहा, “महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।” उन्होंने कहा, “और यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अधिकारी महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं-मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।” उन्होंने कहा, “और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है- वह आखिर किसकी हिफाजत कर रही है?” राहुल गांधी ने आगे कहा, “दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।”

आइसा ने भी लगाए आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। आइसा ने एक बयान में कहा, “पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की। कई महिलाओं ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर उन्हें अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया है।” संगठन ने कहा, “महिलाओं को न्याय दिलाने का दावा करने वाला पुलिस बल भीड़ को कंट्रोल करने के बुनियादी नियमों का पालन नहीं कर सका। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ खुलेआम दुर्व्यवहार किया और (वे) बेहद गैर-पेशेवर तरीके से पेश आए।”

200 लोगों को हिरासत में लिया गया

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शनिवार को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर आदेश न मानने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने तथा उनपर हमला करने से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। नई दिल्ली जिले में पाबंदी आदेश लागू होने के बावजूद, छात्र संगठनों और नागरिक संगठन के सदस्यों समेत प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कोशिश की।

हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल थे। आइसा ने बताया कि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसोदिया भी प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई हैं।

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Punjab Politics: पंजाब के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर AAP विधायक ने उठाई आवाज, कुछ ही देर बाद केजरीवाल की पार्टी ने किया सस्पेंड

Punjab Politics: पंजाब से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने शनिवार (3 अक्टूबर) को अपनी पार्टी के नेतृत्व और पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वे उनके निर्वाचन क्षेत्र के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। हालांकि, इसके कुछ देर बाद ही मैसरखाना को पार्टी से बाहर कर दिया गया। आम आदमी पार्टी ने मैसरखाना के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया।

इससे पहले, पंजाब के बठिंडा जिले की मौर विधानसभा सीट से विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना (Maur AAP MLA Sukhveer Singh Maiserkhanal) ने फेसबुक पर कहा कि शिक्षकों की कमी से जुड़ी उनकी शिकायत का समाधान नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। पंजाब में आप सरकार के तहत स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों के पार्टी के दावों पर सवाल उठाते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

टीचर्स की कमी का उठाया था मुद्दा

सुखवीर सिंह मैसरखाना ने एक इमोशनल वीडियो जारी कर पंजाब सरकार पर राज्य के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था। रूंधे गले से AAP विधायक ने कहा कि उनका बेटा भी सरकार के ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ में पढ़ता है, जहां शिक्षकों की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों में वह अकेले ऐसे विधायक हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। विधायक ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाया है। उन्होंने दावा किया, “लेकिन उन्होंने मुझसे मुलाकात नहीं की। मैं आखिर कब तक इसे बर्दाश्त करूंगा? मैंने पार्टी का क्या बिगाड़ा है?”

‘मैं थक गया हूं, शिक्षकों की मांग करते-करते’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, AAP विधायक ने कहा कि वह लगातार सरकार और पार्टी नेतृत्व से स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराने की अपील करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बताया था कि उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और वहां भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं सुधरी तो चुनाव के समय सरकार जनता से वोट कैसे मांगेगी।

अब पार्टी पंजाब चुनाव में टिकट नहीं देगी?

AAP विधायक ने कहा कि उन्हें पता है कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट नहीं देगी। मैसरखाना ने कहा, “लेकिन मैं लोगों के लिए लड़ता रहूंगा।” विधायक ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई, लेकिन उसका कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बताइए कि मैं कहां गलत हूं।’’ मैसरखाना ने आशंका जताई कि उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है।

विधायक के इस तरह खुलकर नाराजगी जताने के बाद आप की पंजाब इकाई के महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि मैसरखाना को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। AAP विधायक के बयान का हवाला देते हुए प्रदेश BJP ने कहा कि उनकी स्थिति ने राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के शिक्षा क्रांति के दावे की पोल खोल दी है।

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शिक्षा मंत्री ने आरोपों को बताया ‘राजनीति से प्रेरित’

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस मामले में विधायक के आरोपों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है। उन्होंने कहा कि मैसरखाना के विधानसभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक शिक्षक पद भरे हुए हैं। मंत्री के मुताबिक, रामनगर स्थित School of Eminence में 30 स्वीकृत पदों के मुकाबले 25 शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि स्कूल में करीब 580 स्टूडेंट हैं। यानी सरकार और विधायक की ओर से स्कूल में शिक्षकों की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने पंजाब में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, AAP सरकार के शिक्षा सुधारों और पार्टी के भीतर असहमति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

फर्जी CSR डोनेशन रैकेट पर ED की बड़ी कार्रवाई, 4 राज्यों में 8 ठिकानों पर की छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोन-I ने फर्जी CSR डोनेशन रैकेट से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह और अन्य से जुड़े मामले में की जा रही है।

ED की तलाशी के दायरे में मार्केट ऑपरेटर्स, ट्रस्टी, बिचौलिए और CSR फंड से जुड़े अन्य लोगों के ठिकाने शामिल हैं। शुरुआती जांच में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के फर्जी CSR नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

PMLA के तहत शुरू हुई जांच

ED ने यह जांच 12 जुलाई 2026 को जुहू पुलिस स्टेशन, ग्रेटर मुंबई में दर्ज FIR नंबर 1044/2026 के आधार पर शुरू की है। FIR में धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह के खिलाफ Maharashtra Medical Practitioners Act, 1961, National Medical Commission Act, 2019 और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के तहत आरोप दर्ज हैं।मामले में IPC की धारा 420, 467, 471 और 475 के अनुरूप अपराधों का भी उल्लेख है, जो PMLA की अनुसूची में शामिल हैं।

12वीं पास व्यक्ति ने करीब 30 साल तक खुद को बताया डॉक्टर

ED की जांच के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार सिंह के पास मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता या मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं था और उन्होंने कथित तौर पर केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद वह करीब तीन दशकों तक खुद को डॉक्टर बताते रहे और ‘Doctor’ की उपाधि का इस्तेमाल करते रहे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसी पहचान और डॉक्टर की सामाजिक विश्वसनीयता का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं का नेटवर्क खड़ा किया। इन संस्थाओं के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी CSR गतिविधियों के नाम पर PSUs और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR फंड जुटाए गए।

CSR फंड के डायवर्जन का कथित नेटवर्क

ED की जांच में सामने आए प्रमुख बिंदुओं के मुताबिक—

ट्रस्ट, ट्रस्टी, बिचौलिए, कमीशन एजेंट और उपकरण सप्लायर का एक नेटवर्क कथित तौर पर बनाया गया था।इन ट्रस्टों का इस्तेमाल मुख्य रूप से PSUs से CSR डोनेशन हासिल करने के लिए किया गया।कंपनियों के सामने वैध CSR प्रोजेक्ट के तौर पर प्रस्ताव रखे गए, लेकिन आरोप है कि प्रोजेक्ट या तो आंशिक रूप से किए गए या प्राप्त फंड के अनुपात में काम नहीं हुआ।कथित तौर पर वेंडर बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और अतिरिक्त रकम को फर्जी या शेल संस्थाओं के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की गई। इसके साथ ही ये भी जानकारी मिली कि CSR फंड हासिल कराने या लेन-देन में मध्यस्थता करने वाले बिचौलियों और ब्रोकरों को कमीशन/किकबैक दिए जाने का भी आरोप है।

निजी कंपनियों के CSR फंड को कैश में लौटाने का आरोप

जांच में CSR फंड के कथित कैश रीसाइक्लिंग मॉडल का भी पता चला है। ED के अनुसार, निजी कंपनियों से मिले CSR योगदान की बड़ी रकम कथित तौर पर नकद वापस कर दी जाती थी, जबकि ट्रस्ट अपने पास केवल एक छोटा हिस्सा कमीशन के तौर पर रखते थे।यानी आरोप है कि CSR व्यवस्था का इस्तेमाल अकाउंटेड रकम को अनअकाउंटेड कैश में बदलने के माध्यम के रूप में किया गया।

करीब 200 करोड़ रुपये CSR फंड की रूटिंग का अनुमान

ED की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क के जरिए लगभग ₹200 करोड़ के CSR फंड को रूट किए जाने की जानकारी सामने आई है।तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि CSR फंड किन संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए ट्रांसफर किए गए, कितनी रकम कथित तौर पर डायवर्ट या रीसाइकिल की गई और इसमें कौन-कौन से बिचौलिए तथा लाभार्थी शामिल थे।

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Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

Video: राजधानी के तिलक नगर इलाके में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल सादे कपड़ों में मोबाइल फोन से केजरीवाल के दौरे की रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। इस दौरान उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को भीड़ के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में लोग उसे धक्का देते और उसके साथ बहस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मी ने जींस और शर्ट पहन रखी थी। इससे एक दिन पहले ही दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा और AAP से जुड़े एक युवक के बीच हुई झड़प ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस विवाद खड़ा कर दिया था।

फ्लाईओवर के नीचे घेरकर जाने नहीं दिया

बताया गया है कि AAP कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मी को घेरते हुए फ्लाईओवर के नीचे तक ले गई। आरोप है कि भीड़ ने कथित तौर पर उसे वहां से निकलने नहीं दिया। स्थिति बिगड़ने पर वर्दी में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अपने साथी को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल की मेडिकल जांच कराई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट लगी है या नहीं। पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित मारपीट को लेकर FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है।

तिलक नगर में सड़क की क्वालिटी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

यह घटना पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सोमवार (28 सितंबर) को अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान हुई। केजरीवाल के साथ AAP सांसद संजय सिंह, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। केजरीवाल ने इलाके में हाल ही में बनी सड़क की क्वालिटी को लेकर दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो गई है।

केजरीवाल ने कहा कि सड़क को हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में इस तरह का निर्माण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पिछली AAP सरकार के दौरान इस तरह के सड़क निर्माण पर पांच साल की गारंटी होती थी।

एक दिन पहले मंत्री प्रवेश वर्मा का वीडियो हुआ था वायरल

अरविंद केजरीवाल का तिलक नगर दौरा ऐसे समय हुआ, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में उन्हें इलाके में नई बनी सड़क का निरीक्षण करते समय एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए देखा गया था।

हालांकि, बाद में पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आया कि थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति भी एक मामले में आरोपी है। 22 वर्षीय साहिब सिंह पर इस साल की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट के संबंध में पुलिस शिकायत और एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आई घटना

तिलक नगर की घटना ने दिल्ली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी AAP के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ केजरीवाल ने सड़क निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाए। वहीं, उनके दौरे के दौरान पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब वीडियो की जांच कर रही है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है। NDTV के मुताबिक, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार है।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी: बिहार के स्टूडेंट्स की सेफ्टी को लेकर एक्टिव हुए सम्राट चौधरी, चांसलर और सांसद अशोक मित्तल से की बात

LPU University Unrest: पंजाब के प्रमुख प्राइवेट विश्वविद्यालय लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हिंसा और विरोध-प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार (28 सितंबर) को LPU के संस्थापक अशोक मित्तल से फोन पर बातचीत की। सीएम ने वहां पढ़ रहे बिहार के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पंजाब के फगवाड़ा स्थित एलपीयू के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से कथित दुष्कर्म किए जाने के दावे को लेकर रविवार को परिसर में तोड़फोड़ की और नेशनल हाईवे-44 को बाधित कर दिया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “मैंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से फोन पर बात की। उन्होंने बिहार के छात्रों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव सहयोग तथा आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।” इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में बिहार के स्टूडेंट पढ़ते हैं।

क्लासेस पर रोक, एग्जाम स्थगित

एलपीयू प्रशासन द्वारा सोमवार से 10 दिन के लिए क्लासेस स्थगित किए जाने के बाद कई छात्र अपने घरों के लिए रवाना होते दिखाई दिए। विश्वविद्यालय ने हाफ इयरली एग्जाम (Half-Yearly Exams)भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी हैं। विश्वविद्यालय ने कहा है कि छात्र चाहें तो अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह के बाद इस अवधि में घर जा सकते हैं।

वहीं, परिसर में रुकने वाले छात्रों को सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास या निवास स्थान के भीतर रहने और किसी भी प्रकार की अशांति से दूर रहने की सलाह दी गई है। अशोक मित्तल ने इस साल अप्रैल में छह अन्य राज्यसभा सदस्यों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर एक्शन

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के हिंसा पर उतरने के आरोप के एक दिन बाद सोमवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

परिसर में रविवार को कथित हंगामे और तोड़फोड़ की घटना पर यादव ने कहा कि पुलिस ने अब तक संयम बरता है। लेकिन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्र विश्वविद्यालय परिसर में दुष्कर्म की कथित घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

राष्ट्रीय राजधानी में हाल में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए यादव ने छात्रों में व्याप्त नाराजगी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटना से निपटने में पुलिस ने रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ पुलिस और स्टूडेंट की चर्चा

पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर छात्रों की शिकायतों को दूर कराने के लिए इस प्राइवेट विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत कराई। यादव ने कहा, “हमारे अधिकारियों ने तय किया कि न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया।”

SIT करेगी मामले की पूरी जांच

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास किए गए। छात्रों द्वारा दुष्कर्म की कथित घटना का दावा किए जाने के बारे में यादव ने कहा कि FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

रविवार शाम प्रदर्शन के कथित तौर पर हिंसक हो जाने पर यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पुलिस के वाहनों पर पथराव किया गया।तोड़फोड़ में शामिल लोगों को संदेश देते हुए डीजीपी ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से बेबुनियाद अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की।

SIT की जांच और FIR के बारे में उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एलपीयू में यह घटना पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई। वहां भी दो छात्राओं द्वारा परिसर में कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने की अपुष्ट खबरों को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। कथित तौर पर पुलिस के एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

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अधिकारियों के अनुसार, रविवार (27 सितंबर) शाम प्रदर्शन ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। उन्होंने उनके वाहनों पर हमला किया और कुछ वस्तुओं में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

अहमदाबाद में ED का बड़ा एक्शन, स्टील कनेक्ट इंडिया की 4.53 करोड़ की संपत्ति को किया जब्त

अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक लोन से जुड़े मामले में स्टील कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने स्टील कनेक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी करीब 4.53 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां को जब्त कर लिया है। एजेंसी ने ये कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत की है। जांच में करीब 79.56 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय से जुड़े लेनदेन की बात सामने आई है। ED ने फंड के इस्तेमाल और लेनदेन की जांच के बाद चल और अचल संपत्तियों के खिलाफ यह कार्रवाई की है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

CBI ने दर्ज करवाया था FIR

ED ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। इस FIR में IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। ED ने पैसों के लेनदेन और उनके इस्तेमाल की जांच के बाद करीब 4.53 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई ED की अहमदाबाद यूनिट ने की है।

ED ने क्यों जब्त की 4.53 करोड़ रुपये संपत्तियां 

जांच के दौरान ED ने पाया कि, कंपनी के तत्कालीन निदेशकों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बैंक से मिले लोन की तय शर्तों का पालन नहीं किया। एजेंसी के मुताबिक, लोन की रकम को नकद निकालने, दूसरी जुड़ी हुई कंपनियों में भेजने और बिना किसी वास्तविक कारोबार के इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। ED के मुताबिक, कंपनी ने लोन का पैसा उन बैंक खातों में ट्रांसफर किया जो लोन देने वाले बैंकों के समूह में शामिल नहीं थे। इसके अलावा रकम को निदेशकों के निजी खातों और कंपनी की सब्सिडियरी कंपनियों के खातों के जरिए भी इधर-उधर किया गया।

Delhi Weather Update: मानसून ने कहा अलविदा, अब बिगड़ेगी दिल्ली की हवा! जानें आने वाले दिनों का हाल

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Deepke on CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आए मतभेदों के दावों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘भारत का दुश्मन’ तक करार दे दिया है। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों— डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें दरकिनार कर फैसले लागू कर दिए गए। इस बीच, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश पर सीधा हमला बोला। ALSO READ: क्यों भड़के CJP नेता आशुतोष रांका? कहा- बंद कर देनी चाहिए चुनाव प्रक्रिया

 

सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दीपके ने लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। कथित तौर पर 12 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो 2024 लोकसभा चुनाव के कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 12.4% है। एनडीए और विपक्ष के बीच महज 2% का अंतर है। ज्ञानेश कुमार चुनाव करा नहीं रहे, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) का नया अर्थ निकालते हुए इसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिगिंग’ करार दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

लोकतंत्र बर्बाद करने वालों में दर्ज होगा नाम

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों की सूची में ज्ञानेश कुमार का सबसे ऊपर होगा। उन्होंने दीपके की पोस्ट को शेयर करते हुए दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को ‘भारत का दुश्मन’ कहने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए।

 

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- बाकी सभी मुद्दे बाद में हैं, सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को चुनाव आयोग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।

Surat Employee News: ₹10 हजार बकाए के लिए बॉस की दुकान में लगाई आग! 14 दुकानें जलकर खाक; 24 करोड़ रुपये का माल स्वाहा

Surat Employee News: गुजरात के सूरत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 हजार रुपये के कथित बकाए पेमेंट को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि इसका अंजाम करोड़ों रुपये के नुकसान के रूप में सामने आया। सूरत पुलिस के मुताबिक, एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने मालिक से नाराज होकर उसकी दुकान में कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसकी वजह से देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 दुकानें जलकर खाक हो गईं। इस दौरान करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा एवं अन्य सामान नष्ट हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 9 सितंबर को सरोली इलाके के ‘श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट (Surat Shyam Sangini Textile Market)’ में हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे आग लगने की घटना माना जा रहा था। लेकिन कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने इसे कथित रूप से सुनियोजित आगजनी बताया है। मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले (Vinod Pandit Sawale) को आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा कि 9 सितंबर को सरोली इलाके में लगी आग कोई हादसा नहीं थी। बल्कि कर्मचारी द्वारा अपने मालिक के खिलाफ जान-बूझकर लगाई गई आग थी।

अप्रैल में नौकरी शुरू की थी, कुछ समय बाद हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, सावले ने अप्रैल 2026 में मार्केट की छठी मंजिल स्थित एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया था। उसे करीब 30 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। बाद में उसके काम को लेकर दुकान मालिक के साथ विवाद हुआ। फिर उसने नौकरी छोड़ दी। पुलिस का कहना है कि सावले का करीब ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान को लेकर भी मालिक से विवाद था। इसी बकाए पेमेंट को लेकर वह नाराज था। कथित तौर पर उसने मालिक को सबक सिखाने के लिए आग लगाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार पेट्रोल लेकर पहुंचा

जांच में पुलिस ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं था जब सावले ने दुकान में आग लगाने की कोशिश की। उसने कथित तौर पर पहले भी आग लगाने का प्रयास किया था। लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दूसरी योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा और उसे प्लास्टिक की थैली तथा एक बोतल में लेकर मार्केट पहुंचा।

12:30 बजे दुकान के बाहर पेट्रोल छिड़कने का आरोप

CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक सख्त चेहरे को सफेद रुमाल से ढककर और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, बाद में उसकी पहचान सावले के रूप में हुई। जांच के अनुसार, सावले ने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल लिया। फिर 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे वह मार्केट पहुंचा। वह 5वीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठकर इंतजार करता रहा।

करीब रात 12:30 बजे जब मार्केट लगभग सुनसान हो गया, उसने कथित तौर पर दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल पर पेट्रोल छिड़का। फिर उसमें आग लगा दी। इसके बाद वह मौके से भाग गया। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग आसपास की दुकानों तक फैल गई। पुलिस के मुताबिक, करीब 14 दुकानें पूरी तरह जल गईं। जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा और अन्य सामान नष्ट हो गया। आग पर काबू पाने में दमकलकर्मियों को करीब 38 घंटे लगे।

1,500 CCTV कैमरों से खुला राज

घटना के बाद सरोली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने मार्केट और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 1,500 से ज्यादा CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया। ये कैमरे सूरत पुलिस के ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ फेज-2 के तहत लगाए गए हैं। जांचकर्ताओं ने संदिग्ध के आने-जाने के रास्ते को आगे और पीछे की दिशा में ट्रैक किया। इसी CCTV ट्रेल के आधार पर पुलिस कथित तौर पर सावले तक पहुंची।

FIR की जानकारी मिलते ही बंद किया मोबाइल, परिवार के साथ भागा

पुलिस के अनुसार, आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद सावले ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इतना ही नहीं पत्नी तथा बच्चे के साथ वह सूरत से फरार हो गया। जांच में पुलिस को पता चला कि वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और बाद में अयोध्या पहुंचा। बाद में जब वह सूरत लौटा तो क्राइम ब्रांच को उसके ठिकाने की जानकारी मिली। गणपति सुरक्षा व्यवस्था में तैनात क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे डिंडोली के फ्लावर गार्डन के पास गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे सरोली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस कर रही पेट्रोल खरीद और कथित साजिश की जांच

सूरत के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर करणराज वाघेला के अनुसार, आग से करीब 25 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, पुलिस की जांच में जले हुए कपड़े और अन्य सामान की कीमत करीब ₹24 करोड़ बताई गई है। सूरत पुलिस अब आरोपी से कथित साजिश, आग लगाने की पूरी योजना और पेट्रोल की खरीद से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।

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जांचकर्ता उस पेट्रोल पंप संचालक की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, जिसने कथित तौर पर आरोपी को पेट्रोल बेचा था। पुलिस ने घटना का क्रम समझने के लिए आरोपी को श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट भी ले जाकर सीन का री-कंस्ट्रक्शन कराया। इस दौरान आरोपी हाथ जोड़े हुए नजर आया। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली HC में ED की याचिका को दी चुनौती, बताया ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’

National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस चुनौती का विरोध किया है, जिसमें एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है।

18 सितंबर को दाखिल अलग-अलग लेकिन काफी हद तक एक जैसे जवाबों में, कांग्रेस नेताओं ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का केस नहीं बना सकती।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

गांधी परिवार ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर उठाए सवाल

दाखिल किए गए जवाबों के मुताबिक, गांधी परिवार का कहना है कि ED की कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह मामला पुलिस में दर्ज FIR के बजाय सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी।

गांधी परिवार का तर्क है कि PMLA में ED की कार्रवाई का आधार “निजी शिकायत” बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि स्वामी की शिकायत उन कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती जो एजेंसी के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू करने के लिए जरूरी हैं।

उनकी दलीलें PMLA की धारा 5(1) पर केंद्रित हैं। जवाबों में कहा गया है कि यह प्रावधान उन स्थितियों में कार्रवाई की इजाजत देता है जिनमें CrPC की धारा 173 के तहत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट शामिल हो, या फिर किसी अधिकृत अधिकारी की शिकायत हो जो ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (सूचीबद्ध अपराध) की जांच कर रहा हो।

बचाव पक्ष का कहना है कि कोई निजी व्यक्ति ऐसी जांच नहीं कर सकता और जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट को मिली शक्तियां इस कानूनी जरूरत को दरकिनार नहीं कर सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

गांधी परिवार ने ‘विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का भी हवाला दिया है।

उनका तर्क है कि इस फैसले के अनुसार, PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (अनुसूचित अपराध) का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ‘निजी शिकायत’ के जिक्र का इस्तेमाल तो किया है, लेकिन उसके व्यापक संदर्भ पर ध्यान नहीं दिया है।

बचाव पक्ष ने उस लंबी अवधि की ओर भी इशारा किया है, जिसके दौरान स्वामी ने कथित तौर पर अदालत के सामने सबूत पेश नहीं किए। जवाबों के अनुसार, इसे इस बात के संकेत के तौर पर बताया गया कि निजी शिकायत को कार्यवाही का आधार मानने में क्या मुश्किलें आती हैं।

ED के अपने पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला

गांधी परिवार ने ED के पुराने रिकॉर्ड और बातचीत का हवाला देकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की है।

उनके जवाबों में जनवरी और अगस्त 2015 में जारी एजेंसी के टेक्निकल सर्कुलर, 2013 में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के सामने दी गई जानकारी और 2024 में राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) के तहत मिले जवाब का जिक्र है।

बचाव पक्ष का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि ED ने पहले यह रुख अपनाया था कि PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले FIR जरूरी है।

जवाबों में ED द्वारा जून 2021 में दर्ज ECIR का भी जिक्र है, जो स्वामी की शिकायत के सात साल बाद दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने कहा कि ECIR को ट्रायल कोर्ट के सामने सितंबर 2025 में ही पेश किया गया, जब कोर्ट ने एजेंसी को इसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।

नई FIR और ट्रायल कोर्ट का आदेश

जवाबों में 3 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज की गई FIR का भी जिक्र है। हालांकि, गांधी परिवार की दलीलों के अनुसार, ED ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि वह इस FIR पर निर्भर नहीं है।

हाई कोर्ट के सामने यह विवाद ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से पैदा हुआ है जिसमें उसने ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। दलीलों के मुताबिक, दिसंबर के आदेश में कहा गया था कि इस शिकायत पर कानूनी तौर पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

गांधी परिवार ने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े उन मुद्दों पर आधारित था, जो ‘प्रेडिकेट-ऑफेंस’ (मूल अपराध) के लिए FIR न होने से संबंधित थे। उनका कहना है कि निचली अदालत ने मुख्य आरोपों पर उनके गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला नहीं सुनाया।

ED 24 घंटे के अंदर हाई कोर्ट पहुंची

बचाव पक्ष ने उस तेजी पर भी सवाल उठाए हैं जिसके साथ ED हाई कोर्ट पहुंची।

जवाबों के मुताबिक, एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के अंदर अपनी रिविजन याचिका दायर की। गांधी परिवार ने इस रफ्तार को “बिजली की गति” बताया और तर्क दिया कि ऐसा लगता है कि इस कार्रवाई में एजेंसी पर आम तौर पर लागू होने वाली आंतरिक मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया है।

उन्होंने हाई कोर्ट से ED की रिविजन याचिका को खारिज करने का भी आग्रह किया है और इसे “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताया है।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 2013 में की गई एक शिकायत से हुई थी। इस शिकायत में Associated Journals Ltd (AJL) के अधिग्रहण को लेकर कथित साजिश के आरोप लगाए गए थे। बता दें कि AJL ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती है।

यह शिकायत ‘यंग इंडियन’ से भी जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास सबसे ज्यादा शेयर हैं। आरोप AJL की उन संपत्तियों से जुड़े हैं जिनकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है, और साथ ही ‘यंग इंडियन’ के जरिए किए गए 50 लाख रुपये के लेन-देन से भी जुड़े हैं।

वहीं, इस मामले में ED ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज की। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद एजेंसी दिल्ली हाई कोर्ट गई।

इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संस्थाओं में सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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Delhi Gang-rape: दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास नाबालिग के साथ गैंगरेप, आरोपियों ने खुद को बताया पुलिसकर्मी, आसिफ अरेस्ट

Delhi Gang-rape: देश की राजधानी दिल्ली में पिछले महीने चलती बस में एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद अब एक और नाबालिग बच्ची के साथ कथित गैंगरेप की शर्मनाक घटना सामने आई है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित दुष्कर्म करने के एक आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी उन तीन लोगों में शामिल था जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताकर सोमवार 21 सितंबर शाम आस्था कुंज पार्क में लड़की से कथित रूप से गैंगरेप किया था।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की पहचान आसिफ के रूप में हुई है। उसने अमर कॉलोनी में डीएम ऑफिस रोड के पास पुलिस टीम द्वारा उसे रोके जाने पर कथित तौर पर तीन गोलियां चलाईं। पुलिस ने बताया कि गोलीबारी के दौरान एक गोली हेड कांस्टेबल राजेश की ‘बुलेट-प्रूफ जैकेट’ पर लगी जिसके बाद हेड कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में दो गोलियां चलाई। इनमें से एक आरोपी आसिफ की दाहिनी टांग में लगी।

पुलिसकर्मी बता वारदात को दिया अंजाम

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घायल आरोपी को बाद में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। लड़की के बयान के अनुसार, वह और उसका 17 वर्षीय पुरुष मित्र कालकाजी मंदिर गए थे। बाद में गेट नंबर 7 से आस्था कुंज पार्क में दाखिल हुए थे। पुलिस ने बताया कि तीन व्यक्ति उनके पास आए। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया। फिर लड़की को उसके दोस्त से अलग करने के बाद एक सुनसान इलाके में ले गए।

शिकायत के अनुसार, आसिफ ने लड़की को पिस्तौल और चाकू दिखाकर कथित तौर पर धमकाया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। उसके साथ मौजूद दो अन्य व्यक्तियों ने भी उससे कथित तौर पर गैंगरेप किया, जिसके बाद तीनों व्यक्तियों ने लड़की और उसके दोस्त को धमकी दी।

8:45 बजे पुलिस को मिली जानकारी

पुलिस ने बताया कि कथित दुष्कर्म के संबंध में रात करीब 8:45 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) को सूचित किया गया। इसके बाद अमर कॉलोनी थाने के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी आस्था कुंज पार्क पहुंचे, जहां किशोरी अपने दोस्त के साथ मिली। लड़की की एम्स में जांच कराई गई। जबकि अपराध और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रासंगिक साक्ष्य जुटाए। अमर कॉलोनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।

पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस ने कहा, “रात करीब 8:45 बजे DD नंबर 93A के जरिए कालकाजी मंदिर के पास तीन लोगों द्वारा एक 17 साल की नाबालिग लड़की के कथित रेप के बारे में PCR कॉल मिली। जानकारी मिलने पर अमर कॉलोनी थाने के SHO और उनकी टीम आस्था कुंज पार्क पहुंची, जहां पीड़िता अपने पुरुष दोस्त के साथ मिली।”

पीड़िता के बयान के अनुसार, “वह और उसका दोस्त दर्शन के लिए कालकाजी मंदिर गए थे। उसके बाद गेट नंबर 7 से आस्था कुंज पार्क में दाखिल हुए। तीन लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर उसे उसके दोस्त से अलग किया और एक सुनसान इलाके में ले गए। आरोपियों में से एक (जिसकी पहचान आसिफ के तौर पर हुई है) ने कथित तौर पर बंदूक और चाकू दिखाकर उसे धमकाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद, दो अन्य आरोपियों ने भी कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया। आरोपियों ने बाद में पीड़िता और उसके दोस्त को धमकाया।”

ऐसे हुई गिरफ्तारी

आरोपियों का पता लगाने के लिए कई टीम का गठन किया गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को अमर कॉलोनी में डीएम ऑफिस रोड के पास आसिफ की आवाजाही के बारे में विशिष्ट सूचना मिली जिसके बाद जाल बिछाया गया। जब आरोपी को पुलिस द्वारा रोका गया, तो उसने कथित तौर पर पुलिस पार्टी पर गोली चलाई।

आरोपी ने की फायरिंग

पुलिस ने बताया कि जब पुलिस टीम ने उसे रोका, तो सरेंडर करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद आसिफ ने कथित तौर पर गोलीबारी शुरू कर दी। उसने तीन गोलियां चलाई। उसने बताया कि एक गोली हेड कांस्टेबल राजेश की ‘बुलेट-प्रूफ जैकेट’ पर लगी, जिसके बाद पुलिसकर्मी ने आत्मरक्षा में दो गोलियां चलाई। मुठभेड़ स्थल पर अपराध जांच और FSL (फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) के दलों को बुलाया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस अन्य दो आरोपियों का पता लगाने के लिए प्रयास जारी रखे हुए है।

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