फर्जी CSR डोनेशन रैकेट पर ED की बड़ी कार्रवाई, 4 राज्यों में 8 ठिकानों पर की छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोन-I ने फर्जी CSR डोनेशन रैकेट से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह और अन्य से जुड़े मामले में की जा रही है।

ED की तलाशी के दायरे में मार्केट ऑपरेटर्स, ट्रस्टी, बिचौलिए और CSR फंड से जुड़े अन्य लोगों के ठिकाने शामिल हैं। शुरुआती जांच में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के फर्जी CSR नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

PMLA के तहत शुरू हुई जांच

ED ने यह जांच 12 जुलाई 2026 को जुहू पुलिस स्टेशन, ग्रेटर मुंबई में दर्ज FIR नंबर 1044/2026 के आधार पर शुरू की है। FIR में धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह के खिलाफ Maharashtra Medical Practitioners Act, 1961, National Medical Commission Act, 2019 और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के तहत आरोप दर्ज हैं।मामले में IPC की धारा 420, 467, 471 और 475 के अनुरूप अपराधों का भी उल्लेख है, जो PMLA की अनुसूची में शामिल हैं।

12वीं पास व्यक्ति ने करीब 30 साल तक खुद को बताया डॉक्टर

ED की जांच के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार सिंह के पास मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता या मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं था और उन्होंने कथित तौर पर केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद वह करीब तीन दशकों तक खुद को डॉक्टर बताते रहे और ‘Doctor’ की उपाधि का इस्तेमाल करते रहे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसी पहचान और डॉक्टर की सामाजिक विश्वसनीयता का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं का नेटवर्क खड़ा किया। इन संस्थाओं के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी CSR गतिविधियों के नाम पर PSUs और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR फंड जुटाए गए।

CSR फंड के डायवर्जन का कथित नेटवर्क

ED की जांच में सामने आए प्रमुख बिंदुओं के मुताबिक—

ट्रस्ट, ट्रस्टी, बिचौलिए, कमीशन एजेंट और उपकरण सप्लायर का एक नेटवर्क कथित तौर पर बनाया गया था।इन ट्रस्टों का इस्तेमाल मुख्य रूप से PSUs से CSR डोनेशन हासिल करने के लिए किया गया।कंपनियों के सामने वैध CSR प्रोजेक्ट के तौर पर प्रस्ताव रखे गए, लेकिन आरोप है कि प्रोजेक्ट या तो आंशिक रूप से किए गए या प्राप्त फंड के अनुपात में काम नहीं हुआ।कथित तौर पर वेंडर बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और अतिरिक्त रकम को फर्जी या शेल संस्थाओं के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की गई। इसके साथ ही ये भी जानकारी मिली कि CSR फंड हासिल कराने या लेन-देन में मध्यस्थता करने वाले बिचौलियों और ब्रोकरों को कमीशन/किकबैक दिए जाने का भी आरोप है।

निजी कंपनियों के CSR फंड को कैश में लौटाने का आरोप

जांच में CSR फंड के कथित कैश रीसाइक्लिंग मॉडल का भी पता चला है। ED के अनुसार, निजी कंपनियों से मिले CSR योगदान की बड़ी रकम कथित तौर पर नकद वापस कर दी जाती थी, जबकि ट्रस्ट अपने पास केवल एक छोटा हिस्सा कमीशन के तौर पर रखते थे।यानी आरोप है कि CSR व्यवस्था का इस्तेमाल अकाउंटेड रकम को अनअकाउंटेड कैश में बदलने के माध्यम के रूप में किया गया।

करीब 200 करोड़ रुपये CSR फंड की रूटिंग का अनुमान

ED की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क के जरिए लगभग ₹200 करोड़ के CSR फंड को रूट किए जाने की जानकारी सामने आई है।तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि CSR फंड किन संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए ट्रांसफर किए गए, कितनी रकम कथित तौर पर डायवर्ट या रीसाइकिल की गई और इसमें कौन-कौन से बिचौलिए तथा लाभार्थी शामिल थे।

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चलती बाइक पर कंधे के ऊपर बैठा युवक, नीचे 3 सवार… कैमरे में कैद हुआ पूरा नजारा

अहमदाबाद की सड़क पर बाइक से खतरनाक स्टंट करने वाले चार युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। वीडियो में चारों युवक एक ही बाइक पर सवार नजर आए थे। इनमें से एक युवक दूसरे के कंधों पर बैठा था, जबकि बाइक को सड़क पर तेजी से इधर-उधर मोड़ा जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद एलिसब्रिज पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और युवकों की पहचान शुरू की। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई में देरी नहीं हुई और 21 सितंबर की सुबह चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार युवकों में घी कांटा इलाके के रहने वाले अशोक ठाकोर, अल्केश कनोजिया और मितेश झाला शामिल हैं। चौथे युवक को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने स्टंट से जुड़े इस मामले में कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एलिसब्रिज इलाके में किया स्टंट

बताया जा रहा है कि यह घटना 20 सितंबर की रात अहमदाबाद के एलिसब्रिज इलाके में हुई। कुछ समय बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा। वीडियो में चारों युवक बेहद कम जगह में बाइक पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। एक युवक दूसरे के कंधे पर बैठा था, जिससे बाइक का संतुलन और ज्यादा बिगड़ता नजर आया। इसके बावजूद बाइक चलाने वाला युवक सड़क पर लगातार आगे बढ़ता रहा और कई बार बाइक को खतरनाक तरीके से मोड़ता दिखाई दिया।

राहगीरों की जान भी पड़ सकती थी खतरे में

चलती सड़क पर इस तरह का स्टंट सिर्फ बाइक सवारों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास मौजूद दूसरे लोगों के लिए भी खतरा बन सकता था। बाइक पर तय संख्या से ज्यादा लोगों के बैठने से वाहन का संतुलन बिगड़ने की आशंका रहती है। अगर अचानक सामने कोई वाहन या राहगीर आ जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

वायरल वीडियो ने पहुंचाया पुलिस तक

एलिसब्रिज पुलिस की नजर जब इस वीडियो पर पड़ी, तो युवकों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने अगले ही दिन 21 सितंबर की सुबह चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए युवकों में घी कांटा इलाके के रहने वाले अशोक ठाकोर, अल्केश कनोजिया और मितेश झाला शामिल हैं। मामले में चौथे युवक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला

एलिसब्रिज पुलिस ने युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125 के साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 177, 184 और 194(c) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाने, दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने जैसे मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर वीडियो, फिर सीधे पुलिस कार्रवाई

इस पूरे मामले में एक बार फिर सामने आया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला वीडियो पुलिस की कार्रवाई का आधार बन सकता है। युवकों का कुछ मिनटों का स्टंट कैमरे में रिकॉर्ड हुआ, सोशल मीडिया पर फैला और इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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पत्नी से मांगी 50 लाख की फिरौती! शेयर बाजार में नुकसान के बाद शख्स ने रची किडनैपिंग खतरनाक साजिश

गुजरात के सूरत में किडनैपिंग का एक अनोखा मामला सामने आया है। इस मामले की जांच कर रही पुलिस को जब किडनैपिंग की सच्चाई पता चली तो हर कोई हैरान रह गया। गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति पर खुद के किडनैपिंग की झूठी कहानी बनाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, शेयर बाजार में बड़ा आर्थिक नुकसान होने के बाद उसने अपने परिवार से लाखों रुपये हासिल करने के लिए पूरी साजिश रची। शुरुआत में मामला किडनैपिंग का लग रहा था, लेकिन जांच के दौरान ऐसे सुराग मिले जिनसे पता चला कि घटना के पीछे की हकीकत कुछ और ही थी। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान गुजरात के सूरत में मोटा वराछा के रहने वाले जिग्नेश लालजीभाई तलाविया के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक उसने किडनैपिंग की झूठी कहानी बनाई, फिरौती के मैसेज भेजे और गुजरात और इस वजह से गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी जांच एजेंसियों को सक्रिय होना पड़ा।

पुलिस में दर्ज करवाया टिकट

मामले की शुरुआत 12 जून को हुई, जब जिग्नेश की पत्नी ने पुलिस को बताया कि उनका पति एक दिन पहले 11 जून को घर से बिना किसी को बताए गए थे और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है। शिकायत दर्ज होने के कुछ समय बाद परिवार के पास मोबाइल फोन से मैसेज आने लगे, जिनमें दावा किया गया कि जिग्नेश का किडनैपिंग कर लिया गया है। संदेश भेजने वालों ने उसकी रिहाई के बदले 50 लाख रुपये की मांग की और पैसे नहीं मिलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इन संदेशों के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने नंबर को किया ट्रैक

फिरौती वाले मैसेज के बाद परिवार को जिग्नेश के मोबाइल से एक वीडियो भी मिला, जिसमें वह काफी घबराया हुआ नजर आ रहा था। वीडियो में भी पैसों की मांग दोहराई गई, जिससे परिवार और पुलिस की चिंता बढ़ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरत पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई विशेष टीमों को जांच में लगाया। पुलिस ने तकनीकी मदद और निगरानी के जरिए उसकी तलाश शुरू कर दी ताकि जल्द से जल्द उसकी सही लोकेशन का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन ट्रैक की, जिससे पता चला कि फोन मध्य प्रदेश के उज्जैन क्षेत्र में एक्टिव था। जिसके बाद पुलिस टीमों को सर्च जारी रखने के लिए वहां भेजा गया।

लेकिन एनालिसिस के दौरान, अधिकारियों को डिजिटल सबूतों में कमियां और गड़बड़ियां मिलीं। वीडियो और लोकेशन डेटा किडनैपिंग के दावों से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे थे। आगे की जांच से पता चला कि वीडियो शायद गुजरात के गोधरा में रिकॉर्ड किया गया था। इसके आधार पर सर्च एरिया बदल दिया गया।

कब हुआ किडनैपिंग का खुलासा

जांच आगे बढ़ने पर 15 जून को पुलिस ने जिग्नेश को गोधरा के एक होटल से बरामद कर लिया। वह पूरी तरह सुरक्षित था, जिसके बाद किडनैपिंग की आशंका खत्म हो गई। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसके साथ कोई किडनैपिंग नहीं हुआ था और पूरी घटना एक सोची-समझी योजना का हिस्सा थी। पुलिस के अनुसार, वह 11 जून को खुद ही घर से निकला था। उसने अपना स्कूटर सूरत में एक जगह खड़ा किया, फिर सार्वजनिक वाहन से रेलवे स्टेशन पहुंचा और वहां से ट्रेन पकड़कर उज्जैन चला गया था।

क्यों रची ये साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि जिग्नेश ने खुद ही अपने मोबाइल से परिवार को किडनैप होने और पैसे की मांग करने की बात कही गई थी। शक से बचने के लिए वह बीच-बीच में अपना फोन बंद और चालू करता रहा। जांच में ये भी पता चला कि वह दो दिन के लिए उज्जैन में ठहरा था और बाद में गोधरा पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार, आर्थिक परेशानी इस पूरे मामले की मुख्य वजह हो सकती है। जांच के दौरान पता चला कि शेयर बाजार में जोखिम भरे निवेश के कारण उसे भारी नुकसान हुआ था, जिसके चलते उसने यह पूरा नाटक रचा।

50-60 लाख रुपए का हुआ नुकसान

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिग्नेश को पहले हुए आर्थिक नुकसान से उबरने के लिए परिवार की मदद मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने शेयर बाजार में निवेश जारी रखा। बताया जा रहा है कि बाद में उसे फिर से बड़ा नुकसान हुआ, जिसकी रकम करीब 50 से 60 लाख रुपए तक पहुंच गई। मामले की जांच के बाद उतरन पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।