चलती बाइक पर कंधे के ऊपर बैठा युवक, नीचे 3 सवार… कैमरे में कैद हुआ पूरा नजारा

अहमदाबाद की सड़क पर बाइक से खतरनाक स्टंट करने वाले चार युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। वीडियो में चारों युवक एक ही बाइक पर सवार नजर आए थे। इनमें से एक युवक दूसरे के कंधों पर बैठा था, जबकि बाइक को सड़क पर तेजी से इधर-उधर मोड़ा जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद एलिसब्रिज पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और युवकों की पहचान शुरू की। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई में देरी नहीं हुई और 21 सितंबर की सुबह चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार युवकों में घी कांटा इलाके के रहने वाले अशोक ठाकोर, अल्केश कनोजिया और मितेश झाला शामिल हैं। चौथे युवक को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने स्टंट से जुड़े इस मामले में कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एलिसब्रिज इलाके में किया स्टंट

बताया जा रहा है कि यह घटना 20 सितंबर की रात अहमदाबाद के एलिसब्रिज इलाके में हुई। कुछ समय बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा। वीडियो में चारों युवक बेहद कम जगह में बाइक पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। एक युवक दूसरे के कंधे पर बैठा था, जिससे बाइक का संतुलन और ज्यादा बिगड़ता नजर आया। इसके बावजूद बाइक चलाने वाला युवक सड़क पर लगातार आगे बढ़ता रहा और कई बार बाइक को खतरनाक तरीके से मोड़ता दिखाई दिया।

राहगीरों की जान भी पड़ सकती थी खतरे में

चलती सड़क पर इस तरह का स्टंट सिर्फ बाइक सवारों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास मौजूद दूसरे लोगों के लिए भी खतरा बन सकता था। बाइक पर तय संख्या से ज्यादा लोगों के बैठने से वाहन का संतुलन बिगड़ने की आशंका रहती है। अगर अचानक सामने कोई वाहन या राहगीर आ जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

वायरल वीडियो ने पहुंचाया पुलिस तक

एलिसब्रिज पुलिस की नजर जब इस वीडियो पर पड़ी, तो युवकों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने अगले ही दिन 21 सितंबर की सुबह चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए युवकों में घी कांटा इलाके के रहने वाले अशोक ठाकोर, अल्केश कनोजिया और मितेश झाला शामिल हैं। मामले में चौथे युवक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला

एलिसब्रिज पुलिस ने युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125 के साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 177, 184 और 194(c) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाने, दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने जैसे मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर वीडियो, फिर सीधे पुलिस कार्रवाई

इस पूरे मामले में एक बार फिर सामने आया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला वीडियो पुलिस की कार्रवाई का आधार बन सकता है। युवकों का कुछ मिनटों का स्टंट कैमरे में रिकॉर्ड हुआ, सोशल मीडिया पर फैला और इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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अब लापरवाह ड्राइवरों की खैर नहीं, सरकार DL रिन्यूअल से जुड़े नियमों में लाने जा रही ये बदलाव

DL Renewal: केंद्र सरकार उन ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACTs) को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव दिया है कि वे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतरिम मुआवजा दे सकें, ताकि उन्हें अपने क्लेम के अंतिम निपटारे तक इंतजार न करना पड़े।

वहीं, राज्यों और मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल तक चली बातचीत के बाद, मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने रखा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य?

बता दें कि इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना बीमा वाले वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। साथ ही, इनमें बीमा नियामक IRDAI द्वारा वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की भी बात कही गई है। साल 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय के पास था। सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवजे से जुड़े संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी MACT कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकता है। लेकिन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम्स ट्रिब्यूनल “ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे”। यह भी प्रस्ताव है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा। अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) है।

वहीं, मंत्रालय ने हाई कोर्ट में अपील करने की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया है। वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने कहा, “MACT ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम मुआवजा देने की इजाजत देने का कदम स्वागत योग्य है, क्योंकि ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में अक्सर देरी होती है।”

विशेषज्ञों ने उस प्रस्ताव की भी तारीफ की है जिसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले ड्राइवरों के लिए नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी होगा। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर सख्ती करते हुए, मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर किसी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किया जाता है, तो उसे तीन साल तक नया DL जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा, मंत्रालय ने नए DL या लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत वाली उम्र की सीमा को मौजूदा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी दिया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा, “आसानी से जीने और आसानी से बिजनेस करने के नाम पर, हमें सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बुनियादी पैमानों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

जानकारों का यह भी कहना है कि 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ में ले जाते समय ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उनका मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस को मनमानी करने का मौका मिल सकता है।

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