₹50 हजार की स्कूटी पर 10 लाख रुपये का चालान! गुरुग्राम में पुलिस ने रोका तो सामने आया 96 बार नियम तोड़ने का हैरान करने वाला रिकॉर्ड

गुरुग्राम में ट्रैफिक नियमों को लेकर पुलिस की सख्ती के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। राजीव चौक पर नियमित जांच के दौरान पुलिस ने एक स्कूटी सवार को रोका, लेकिन दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ते ही मामला काफी अलग निकला। वाहन के रिकॉर्ड में कुछ ऐसा सामने आया, जिसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यह मामला सिर्फ एक चालान या नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का खुलासा कर रहा था।

ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और अन्य वाहन चालकों को भी नियमों का पालन करने की सलाह दी है। आखिर स्कूटी के रिकॉर्ड में ऐसा क्या मिला, जिसने इसे चर्चा का विषय बना दिया? आगे जानिए पूरी कहानी।

96 बार तोड़े ट्रैफिक नियम, 10 लाख रुपये का जुर्माना लंबित

जांच में पता चला कि इस स्कूटी के खिलाफ कुल 96 चालान दर्ज थे, जिनकी जुर्माना राशि करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच चुकी थी। ये सभी चालान लंबे समय से लंबित थे। पुलिस के अनुसार, वाहन पर कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया गया था, लेकिन चालान का भुगतान नहीं किया गया।

गलत दिशा में चला रहा था स्कूटर, हेलमेट भी नहीं था

पुलिस ने बताया कि जब युवक को रोका गया, उस समय भी वह नियमों की अनदेखी कर रहा था। वह गलत दिशा में स्कूटी चला रहा था और उसने हेलमेट भी नहीं पहना था। पूछताछ के दौरान जब उससे वाहन के दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई कागज पेश नहीं कर सका।

कैमरों और ई-चालान से पकड़ी गईं गलतियां

ट्रैफिक अधिकारियों के मुताबिक, स्कूटी पर दर्ज चालानों में कुछ ई-चालान मशीन के जरिए जारी किए गए थे, जबकि ज्यादातर चालान कैमरा आधारित निगरानी प्रणाली से बनाए गए थे। ये चालान मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अलग-अलग नियमों के उल्लंघन से जुड़े थे।

2017 मॉडल की स्कूटी बहन के नाम पर थी

पूछताछ में युवक की पहचान निशांत के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक, वह मेदांता अस्पताल के पास एक मेडिकल स्टोर पर काम करता है। यह 2017 मॉडल की स्कूटी उसकी बहन दीपिका के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

पुलिस ने वाहन मालिकों को दी चेतावनी

गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्कूटी को जब्त कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि लंबित चालान वाले वाहन मालिकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और लोगों से अपील की गई है कि वे समय पर अपने चालानों का भुगतान करें, ताकि भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचा जा सके।

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अब लापरवाह ड्राइवरों की खैर नहीं, सरकार DL रिन्यूअल से जुड़े नियमों में लाने जा रही ये बदलाव

DL Renewal: केंद्र सरकार उन ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACTs) को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव दिया है कि वे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतरिम मुआवजा दे सकें, ताकि उन्हें अपने क्लेम के अंतिम निपटारे तक इंतजार न करना पड़े।

वहीं, राज्यों और मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल तक चली बातचीत के बाद, मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने रखा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य?

बता दें कि इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना बीमा वाले वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। साथ ही, इनमें बीमा नियामक IRDAI द्वारा वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की भी बात कही गई है। साल 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय के पास था। सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवजे से जुड़े संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी MACT कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकता है। लेकिन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम्स ट्रिब्यूनल “ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे”। यह भी प्रस्ताव है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा। अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) है।

वहीं, मंत्रालय ने हाई कोर्ट में अपील करने की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया है। वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने कहा, “MACT ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम मुआवजा देने की इजाजत देने का कदम स्वागत योग्य है, क्योंकि ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में अक्सर देरी होती है।”

विशेषज्ञों ने उस प्रस्ताव की भी तारीफ की है जिसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले ड्राइवरों के लिए नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी होगा। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर सख्ती करते हुए, मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर किसी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किया जाता है, तो उसे तीन साल तक नया DL जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा, मंत्रालय ने नए DL या लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत वाली उम्र की सीमा को मौजूदा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी दिया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा, “आसानी से जीने और आसानी से बिजनेस करने के नाम पर, हमें सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बुनियादी पैमानों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

जानकारों का यह भी कहना है कि 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ में ले जाते समय ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उनका मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस को मनमानी करने का मौका मिल सकता है।

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