क्या बिजली बिल के जरिए बकाया ई-चालान की वसूली होगी? जानिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहम बातें

ई-चालान नहीं भरना अब भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। रैंडम चेकिंग में अगर किसी गाड़ी का चालान बकाया मिला, तो गाड़ी जब्त की जा सकती है।

इसके अलावा गाड़ी से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं भी रोकी जा सकती हैं। इनमें रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना, डुप्लीकेट RC लेना और मालिक का पता बदलना शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर के आदेश में ये निर्देश दिए हैं। यह आदेश 1 अक्टूबर को अपलोड हुआ। मामला S Rajaseekaran v Union of India का है। इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 2012 से कर रहा है।

₹49,194 करोड़ के चालान

कोर्ट के सामने रखे आंकड़ों के मुताबिक, ई-चालान के जरिए करीब ₹49,194.05 करोड़ की रकम वसूलनी थी। इसमें से ₹26,175.05 करोड़ की वसूली हो चुकी है। करीब ₹23,019 करोड़ अभी भी बकाया है। इसी पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर जुर्माना वसूला ही नहीं जा रहा, तो सिर्फ चालान जारी करने का क्या फायदा है।

चार तरह की ऑनलाइन सेवाएं रुक सकती हैं

कोर्ट ने बकाया चालान वाली गाड़ियों की कुछ ऑनलाइन सेवाएं फ्रीज करने को कहा है। चालान नहीं भरने तक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा। डुप्लीकेट RC जारी करने पर भी रोक रहेगी। गाड़ी के मालिक का पता बदलने की रिक्वेस्ट भी नहीं मानी जाएगी। फिटनेस सर्टिफिकेट भी बकाया चालान चुकाने के बाद ही मिलेगा।

गाड़ी ब्लैकलिस्ट होगी

बकाया चालान वाली गाड़ी को Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इससे गाड़ी बेचने में दिक्कत आ सकती है। गाड़ी के मालिकाना हक का ट्रांसफर भी रोका जा सकता है। यानी चालान का असर गाड़ी बेचने या उसका मालिक बदलने तक पहुंच सकता है।

PUC भी नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने PUC यानी Pollution Under Control Certificate को लेकर भी निर्देश दिए हैं। बकाया चालान रहने पर संबंधित गाड़ी का PUC जारी नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि चालान नहीं भरने पर सिर्फ जुर्माना ही बकाया नहीं रहेगा। गाड़ी के कई जरूरी काम भी अटक सकते हैं।

रैंडम चेकिंग में गाड़ी जब्त हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने रैंडम व्हीकल चेकिंग के निर्देश भी दिए हैं। अगर चेकिंग में ऐसी गाड़ी मिलती है जिसका ई-चालान बकाया है, तो उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। यानी पुराना चालान सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं रहेगा। सड़क पर चेकिंग के दौरान भी इसकी वजह से कार्रवाई हो सकती है।

एक साल में 5 उल्लंघन पर भी सख्ती

कोर्ट ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 के Rule 21(25) का भी जिक्र किया है। 1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली एक साल की अवधि में पांच या उससे ज्यादा उल्लंघन होने पर इसे जनता के लिए परेशानी या खतरे वाला आचरण माना जा सकता है।

ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है। लाइसेंस रिन्यू करने पर रोक लग सकती है। पहले से जारी लाइसेंस को सस्पेंड करने के कदम भी उठाए जा सकते हैं।

AI कैमरों से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले पकड़े जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक एनफोर्समेंट मजबूत करने को कहा है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 28 अक्टूबर 2025 के SOP को लागू करना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिस्टम AI से लैस होने चाहिए। ये सिस्टम 12 तरह के ट्रैफिक उल्लंघनों को पकड़ने में सक्षम होने चाहिए। इनमें गलत लेन में गाड़ी चलाना और गलत जगह पर गाड़ी रोकना या पार्क करना जैसे उल्लंघन शामिल हैं।

ई-चालान के लिए बनेगा ऑनलाइन डैशबोर्ड

MoRTH को एक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट की जानकारी मिलेगी। इसमें कैमरों और दूसरे उपकरणों की संख्या भी बताई जाएगी। कितने उपकरण काम कर रहे हैं, इसकी जानकारी भी मिलेगी।

कौन से ट्रैफिक उल्लंघन पकड़े जा रहे हैं, यह भी बताया जाएगा। यह जानकारी कम से कम हर महीने अपडेट करनी होगी। सालाना आंकड़े Road Accidents in India रिपोर्ट में भी शामिल किए जा सकते हैं।

बिजली बिल से चालान वसूली?

सुनवाई के दौरान बकाया ई-चालान की रकम बिजली बिल के जरिए वसूलने की बात भी हुई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है।

लिखित आदेश में फिलहाल गाड़ी जब्त करने और ऑनलाइन सेवाएं रोकने जैसी कार्रवाई की बात है। फिटनेस और PUC रोकने के साथ गाड़ी को ब्लैकलिस्ट करने का भी निर्देश है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। अगर ये निर्देश जमीन पर लागू नहीं हुए, तो आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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AI कैमरे ने गिटार को समझ लिया इंसान, बिना हेलमेट के काट दिया ₹500 का चालान!

बेंगलुरु में AI आधारित ट्रैफिक निगरानी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान करने के साथ हंसने पर भी मजबूर कर दिया। एक शख्स अपनी बाइक पर अकेले सफर कर रहा था और उसने हेलमेट भी पहन रखा था। इसके बावजूद उसके घर चालान पहुंच गया। वजह बताई गई कि बाइक पर पीछे बैठी सवारी ने हेलमेट नहीं पहना था। मामला तब दिलचस्प हो गया, जब चालान की तस्वीर सामने आई। तस्वीर में बाइक पर कोई दूसरा व्यक्ति नजर नहीं आ रहा था। दरअसल, शख्स ने अपना गिटार पीठ पर बांध रखा था और AI कैमरे ने उसे ही पिलियन राइडर समझ लिया।

इसके बाद ₹500 का चालान जारी कर दिया गया। शख्स ने सोशल मीडिया पर घटना शेयर करते हुए बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस से चालान रद्द करने की अपील की। मामला वायरल हुआ तो पुलिस ने भी उनसे चालान रिवर्स कराने को कहा।

अकेले निकला था शख्स

Souvik Dutta अपनी पत्नी का दोपहिया वाहन चलाकर जा रहे थे। उन्होंने हेलमेट पहना हुआ था और बाइक पर वह अकेले थे। उनके साथ सिर्फ उनका गिटार था, जिसे उन्होंने पीठ पर सुरक्षित तरीके से बांध रखा था। कुछ समय बाद उनकी पत्नी के नाम ₹500 का ट्रैफिक चालान पहुंचा। उसमें आरोप था कि बाइक पर सवार दूसरी यानी पिलियन राइडर ने हेलमेट नहीं पहना था।

चालान की फोटो ने खोल दी पूरी पोल

Dutta ने जब चालान की तस्वीर देखी तो मामला और भी दिलचस्प हो गया। फोटो में वह खुद हेलमेट पहने नजर आ रहे थे, जबकि उनकी पीठ पर बंधा गिटार कैमरे को शायद दूसरी सवारी जैसा दिखाई दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर चालान की तस्वीर शेयर करते हुए बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस से इसे रद्द करने की अपील की।

AI की नजर में गिटार बन गया इंसान

Dutta ने अपने पोस्ट में AI आधारित ट्रैफिक निगरानी पर सवाल उठाते हुए बताया कि वह बाइक पर अकेले थे। उनके मुताबिक, कैमरे ने गिटार को पिलियन राइडर समझ लिया और हेलमेट न पहनने का चालान जारी कर दिया। चालान 15 सितंबर की कथित घटना के लिए 16 सितंबर को जारी किया गया था। मामला ORR-Hebbal और Tin Factory के बीच का बताया गया।

पुलिस ने भी माना कि मामला देखना होगा

सोशल मीडिया पर पोस्ट सामने आने के बाद बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने Dutta के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी और उन्हें चालान रिवर्स कराने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा। इससे Dutta की परेशानी तो कम हुई, लेकिन AI की तस्वीर पहचानने की क्षमता को लेकर लोगों के बीच चर्चा जरूर शुरू हो गई।

इंटरनेट ने उड़ाया मजाक

मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा तो लोगों ने इसे गंभीर बहस के साथ-साथ मजाक का विषय भी बना दिया। किसी ने AI को “आर्टिफिशियल स्टुपिडिटी” कहकर चुटकी ली तो किसी ने मजाक में कहा कि गिटार का भी “बॉडी” और “नेक” होता है, इसलिए शायद AI ने उसका “हेड” भी मान लिया होगा। कुछ यूजर्स ने हालांकि गंभीर सवाल भी उठाया कि ट्रैफिक चालान पूरी तरह AI के भरोसे नहीं होने चाहिए और ऐसे मामलों में इंसानी जांच की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए।

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‘अमीर दिखना पड़ता है महंगा’, बेंगलुरु के प्रोफेशनल ने बताया पैसे बचाने का अनोखा तरीका, वायरल हुआ पोस्ट

बेंगलुरु के एक प्रोफेशनल का सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है। पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि, साधारण लाइफस्टाइल अपनाकर और महंगे गैजेट्स व लग्जरी चीजों से दूरी बनाकर वह कई जगहों पर पैसे बचा लेते हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से उन्होंने iPhone और MacBook का इस्तेमाल छोड़ दिया और आज भी 10 साल पुरानी हैचबैक कार चलाते हैं। उनका मानना है कि अमीर दिखने की कोशिश कई बार लोगों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डाल देती है। उनकी ये सोच सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

अपनी लिंक्डइन पोस्ट में मीनांक मिन्नू ने बताया कि, वह जानबूझकर सादगी भरी लाइफस्टाइल अपनाते हैं। उनका कहना कि, ऐसा करने से उन्हें खरीदारी के दौरान बेहतर दाम पर सामान मिल जाता है। उन्होंने लिखा, “मैं हमेशा गरीब दिखने की कोशिश करता हूं। इससे मुझे मोलभाव करने में ज्यादा मुश्किल होती है।” मिन्नू ने बताया कि उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में भी इसी सोच के मुताबिक बदलाव किए। उन्होंने कहा, “मैंने अपना iPhone बेच दिया और उसकी जगह Vivo फोन खरीद लिया। MacBook भी बेच दिया और ASUS का लैपटॉप ले लिया। आज भी मैं 10 साल पुरानी हैचबैक कार चलाता हूं, जो मुश्किल से E20 फ्यूल पर चलती है।”

ऐसा करना कोई मजबूरी नहीं

उन्होंने ये भी साफ किया कि ऐसा करना उनकी मजबूरी नहीं थी। उनके मुताबिक, “क्या मैं नई कार खरीद सकता हूं? बिल्कुल खरीद सकता हूं। लेकिन मेरी सोच ये है कि जैसे ही लोग आपको अमीर समझने लगते हैं, कई चीजें अपने आप महंगी हो जाती हैं।” मीनांक मिन्नू के मुताबिक, भारत में किसी व्यक्ति की बाहरी छवि कई बार उसके साथ होने वाले व्यवहार को प्रभावित करती है। उन्होंने अपनी बात समझाते हुए लिखा, “20 रुपये किलो मिलने वाले आलू 28 रुपये किलो हो जाते हैं। 500 रुपये का ट्रैफिक चालान किसी तरह 1,500 रुपये तक पहुंच जाता है। iPhone होने की वजह से 200 रुपये का मोबाइल कवर 700 रुपये में मिलता है। लोग आपसे उधार मांगने से भी बचते हैं, जिसे शायद कभी लौटाना ही न हो।”

अतिरिक्त खर्च से बचना है

मिन्नू ने आगे कहा, “लोग सिर्फ आपको देखकर राय नहीं बनाते, बल्कि उसी हिसाब से आपकी कीमत भी तय कर देते हैं।” उन्होंने ये भी बताया कि इसका मतलब सस्ते प्रोडक्ट खरीदना नहीं था। उन्होंने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि मेरा Vivo फोन iPhone से भी महंगा है और मेरा ASUS लैपटॉप MacBook से ज्यादा कीमत का है। मेरा मकसद पैसे बचाने के लिए सस्ती चीजें खरीदना नहीं था, बल्कि ‘अमीर दिखने’ की वजह से लगने वाले अतिरिक्त खर्च से बचना था।”

उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में भारत में कारोबार करने के तरीके पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, “भारत में बिजनेस कुछ इसी तरह चलता है।” आगे उन्होंने कहा, “भारत के कई बड़े और अमीर लोग स्टारबक्स जैसी जगहों पर नहीं, बल्कि पुराने कैफे में बैठकर करोड़ों की डील करते हैं। गुमनाम रहना भी एक बड़ी ताकत है। अपने काम से काम रखो, कम दिखावा करो, शांति से जियो और ‘ध्यान आकर्षित करने’ की कीमत किसी और को चुकाने दो।”

लोगों ने दिए रिएक्शन

सोशल मीडिया पर लिंक्डइन पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने पोस्ट की तारीफ करते हुए लिखा, “पोस्ट का आखिरी हिस्सा मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया। कई बार जितना कम हम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं, उतने ही सच्चे अनुभव मिलते हैं। बहुत अच्छी सीख।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “मैं अमीर दिखने से ज्यादा अमीर बनना पसंद करूंगा। सादगी ही सबसे बड़ी खूबसूरती है।”

वहीं एक यूजर ने लिखा, “MacBook ज्यादातर मामलों में Asus से बेहतर है। मैं अपनी जरूरत और काम के हिसाब से प्रोडक्ट खरीदता हूं। लोग मुझे अमीर समझें या गरीब, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” एक अन्य यूजर ने अपनी उलझन जाहिर करते हुए लिखा, “मुझे यह बात समझ नहीं आई, माफ कीजिए।”

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अब लापरवाह ड्राइवरों की खैर नहीं, सरकार DL रिन्यूअल से जुड़े नियमों में लाने जा रही ये बदलाव

DL Renewal: केंद्र सरकार उन ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACTs) को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव दिया है कि वे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतरिम मुआवजा दे सकें, ताकि उन्हें अपने क्लेम के अंतिम निपटारे तक इंतजार न करना पड़े।

वहीं, राज्यों और मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल तक चली बातचीत के बाद, मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने रखा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य?

बता दें कि इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना बीमा वाले वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। साथ ही, इनमें बीमा नियामक IRDAI द्वारा वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की भी बात कही गई है। साल 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय के पास था। सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवजे से जुड़े संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी MACT कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकता है। लेकिन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम्स ट्रिब्यूनल “ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे”। यह भी प्रस्ताव है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा। अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) है।

वहीं, मंत्रालय ने हाई कोर्ट में अपील करने की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया है। वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने कहा, “MACT ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम मुआवजा देने की इजाजत देने का कदम स्वागत योग्य है, क्योंकि ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में अक्सर देरी होती है।”

विशेषज्ञों ने उस प्रस्ताव की भी तारीफ की है जिसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले ड्राइवरों के लिए नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी होगा। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर सख्ती करते हुए, मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर किसी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किया जाता है, तो उसे तीन साल तक नया DL जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा, मंत्रालय ने नए DL या लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत वाली उम्र की सीमा को मौजूदा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी दिया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा, “आसानी से जीने और आसानी से बिजनेस करने के नाम पर, हमें सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बुनियादी पैमानों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

जानकारों का यह भी कहना है कि 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ में ले जाते समय ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उनका मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस को मनमानी करने का मौका मिल सकता है।

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