Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

देशभक्ति सिर्फ तिरंगा लहराने या नारे लगाने तक सीमित नहीं है।
देश के लिए सही काम करना भी देशभक्ति है। जो सड़क पर कचरा नहीं फैलाता, जो पानी बचाता है, पेड़ लगाता है, जो Traffic Rules और Public Rules का पालन करता है—
वही है असली Civic Sense Hero!
इसी सोच को एक movement बनाने के लिए The Better India ला रहा है #CivicSenseHero Campaign, 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक।
अपने आसपास के उस Hero को पहचानिए, जो India को हर दिन थोड़ा और Better बना रहा है।
उसे Nominate कीजिए, उसकी कहानी दुनिया तक पहुँचाइए और Civic Sense को नया TREND बनाइए!
Nomination के लिए ये फॉर्म भरें-
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScoBw41mDqbS63Bv7hr7XubQwdz6LA2fS0lcqffx3xqF5bXJQ/viewform

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London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता

London Trip

London Traffic Rules: बात चुभने वाली है, लेकिन है सोलह आने सच। हमने पाश्चात्य तौर-तरीके (खान-पान, कपड़े, फैशन, भाषा) तो बखूबी अपना लिए, लेकिन वहां के नियम-कायदे, शिष्टाचार को छू भी नहीं पाए। हम अब बात करते हैं परिवहन मसले की। आप हैरत करेंगे कि वहां आधी रात को भी कोई ट्रेफिक सिग्नल का उल्लंघन नहीं करता, जबकि हम तो दिन में चौराहे पर जवान के तैनात रहते फर्राटे से गाड़ी भगा लेते हैं।

 

मेरा यह मानना है कि हम कभी भी लंदन जैसे शहर या यूरोप, अमेरिका, चीन या किसी भी विकसित देश के जैसे यातायात नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे। ये आता है संस्कार, शिक्षा, मौलिक स्वभाव और कानून के डर से। जिस देश में मंत्री-नेता अपने पट्‌ठों को छुड़ाने के लिए मामूली जवान को धमका देते हैं, जहां अधिकारी अपने ओहदे का गाड़ी पर उल्लेख कर बिना रोक-टोक निकल जाता है, जहां आम जनता भी मौका मिलते ही चाहे जहां से आड़े-तिरछे तरीके से अपने वाहन निकाल लेते हैं, वहां अभी दो पीढ़ियों तक किसी चमत्कार की आशा करना बेमानी है। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

आइए देखते हैं कि वहां यातायात की कैसी व्यवस्था है। वहां बीच शहर और मोटर-वे, हाई-वे को छोड़कर कहीं पर रोड डिवाइडर नहीं हैं। सड़कें उतनी चौड़ी नहीं हैं, जितनी हमारे यहां इंदौर जैसे शहर में भी रहती हैं। बीआरटीएस व एमजी रोड, सपना संगीता रोड जितनी चौड़ी सड़कें कम ही है। वहां बीच शहर में भी दो-तीन लेन सड़क ज्यादा हैं। इसी में सिटी बस, आरटीओ पंजीकृत काली टैक्सी कारें, निजी कारें, निजी टैक्सी कारें व बाइक व साइकिल चलती हैं। इसके बावजूद कभी जाम नहीं लगता, क्योंकि वहां प्रत्येक वाहन एक के पीछे एक चलता है। कोई अपनी लेन को नहीं छोड़ता। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

यह तब होता है, जब आम तौर पर चौराहे पर यातायात जवान हमारे यहां जैसे नहीं होते हैं। वे इक्का-दुक्का कहीं नजर आ जाएंगे अलबत्ता, तकनीक के सहारे वे चालान जरूर बना देते हैं। लेन या सिग्नल से निकल जाने पर 100 से 160 पाउंड तक का जुर्माना है। इसे वहां के 100 से 160 रुपए मत समझिएगा। ये वहां के आय अनुपात के हिसाब से बेहद बड़ी रकम है। वहां रोजाना की औसत आय अधिकतम 200 पाउंड होती है। ऐसे में यदि आपको किसी दिन 100 से 160 पाउंड के बीच जुर्माना देना पड़ जाए तो सोचिए क्या हाल होंगे? ALSO READ: London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

 

वहां दरअसल फुटपाथ सड़क से दोगुने चौड़े होते हैं। यदि सड़क 30-40 फीट चौड़ी है तो मानकर चलिए कि दोनों तरफ मिलाकर फुटपाथ 50 से 60 फीट चौड़े होंगे। उसकी वजह यह है कि लोक परिवहन के कारण लोगों को पैदल काफी चलना होता है। वहां सड़क पर वाहनों से अधिक भीड़ फुटपाथ पर दिखती है। पैदल चलने वालों का काफी सम्मान किया जाता है और पैदल का सिग्नल न होने पर भी कोई निकल रहा है तो बस, कार सब रुक जाएंगी। इसी तरह सिग्नल पर साइकिल वालों के स्टॉप पर यदि कोई दूसरा वाहन खड़ा हो गया तो उसका जुर्माना भी 100 पाउंड होता है। अब आप ही बताइए, हम ऐसा कुछ कर सकते हैं? 

 

लंदन, समूचे ब्रिटेन व यूरोप में सड़क पर दो पहिया वाहन तो न्यूनतम ही दिखते हैं। ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, नगर सेवा जैसे कोई वाहन वहां नहीं होते। निश्चित ही इसलिए वहां न तो यातायात जाम होता है, न सिग्नल उल्लंघन के मामले होते हैं। बेशक, नियम-कायदों के पालन के संस्कार व अनुशासन जीवन का अनिवार्य तत्व होना बडा कारण तो है ही।

 

सड़कों की एक खासियत यह है कि सड़क के हर क्रॉसिंग पर फुटपाथ जहां खत्म होता है, वहां हल्की-सी ढलान देकर उस पर जो पैवर्स लगाए जाते हैं, उनमें गोल-गोल घेरे उठे हुए होते हैं, जिन पर नेत्रहीन व्यक्ति अपनी छड़ी रखने से समझ जाता है कि यहां सड़क पार की जा सकती है। फिर भले ही सिग्नल न हुआ हो, वह निकल सकता है और पूरा ट्रैफिक रुका रहेगा। हम तो एंबुलेंस के दूर से सायरन देते हुए आने के बाद भी उसके आगे से कट मारकर निकलने ही जुगत करते हैं।

 

सिटी बस में सफर करने के लिए नकदी नहीं चलती, न कंडक्टर होता है। ड्राइवर कैबिन के पास पीले रंग का कार्ड रीडर लगा होता है। उससे डेबिट, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल पैमेंट डिवाइस या आयस्टर कार्ड (एक तरह का क्रेडिट कार्ड) से भुगतान कर ही बस में बैठ सकते हैं। वहां सड़कों पर स्पीड ब्रेकर भी नहीं होते। फिर भी वाहन निर्धारित सीमित गति से चलाए जाते हैं और एक-दूसरे वाहन के बीच 5 से 10 फीट तक की दूरी बनाकर रखते हैं। गली-मोहल्ले से निकलने वाला वाहन पहले मुख्य मार्ग के वाहन को जाने देगा। इतना ही नहीं तो बस में पंक्ति बनाकर ही चढ़ते हैं व मेट्रो में भी ज्यादा भीड़ है तो जो यात्री आगे की पंक्ति में पहले से खड़े हैं, उनके बैठ जाने पर ही पीछे वाले अंदर जाएंगे। ऑटोमैटिक दरवाजे बिप-बिप की आवाज के साथ बंद होने लगते हैं तो कोई भागकर चढ़ने की कोशिश नहीं करता।

 

इतने अनुशासन के साथ पेश आने की स्थिति भारत में साठ से नब्बे के दशक तक पैदा हुई पीढ़ी तो नहीं देख पाएगी। एक और बात, सिटी बस व कार टैक्सी बड़ी तादाद में महिलाएं भी चलाते हुए दिख जाएंगी,आधी रात में भी। दूसरा, हर टैक्सी ट्राइवर चालक हो जरूरी नहीं। वहां अतिरिक्त आय के लिए नौकरीपेशा महिला-पुरुष बड़े शौक से टैक्सी कार चलाते हैं, जो उनकी खुद की रहती है। इनमें 50 वर्ष तक की महिलाएं भी मिल जाएंगी। (क्रमश:)

अब लापरवाह ड्राइवरों की खैर नहीं, सरकार DL रिन्यूअल से जुड़े नियमों में लाने जा रही ये बदलाव

DL Renewal: केंद्र सरकार उन ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACTs) को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव दिया है कि वे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को अंतरिम मुआवजा दे सकें, ताकि उन्हें अपने क्लेम के अंतिम निपटारे तक इंतजार न करना पड़े।

वहीं, राज्यों और मंत्रालयों के साथ लगभग दो साल तक चली बातचीत के बाद, मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (iGoM) के सामने रखा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य?

बता दें कि इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना बीमा वाले वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। साथ ही, इनमें बीमा नियामक IRDAI द्वारा वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करने की पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की भी बात कही गई है। साल 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय के पास था। सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवजे से जुड़े संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी MACT कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकता है। लेकिन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम्स ट्रिब्यूनल “ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे”। यह भी प्रस्ताव है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा। अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवजे का 50% (जो भी कम हो) है।

वहीं, मंत्रालय ने हाई कोर्ट में अपील करने की सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया है। वकील और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अमरजीत सिंह ने कहा, “MACT ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम मुआवजा देने की इजाजत देने का कदम स्वागत योग्य है, क्योंकि ऐसे मामलों के अंतिम निपटारे में अक्सर देरी होती है।”

विशेषज्ञों ने उस प्रस्ताव की भी तारीफ की है जिसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले ड्राइवरों के लिए नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना जरूरी होगा। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों पर सख्ती करते हुए, मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर किसी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रद्द किया जाता है, तो उसे तीन साल तक नया DL जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा, मंत्रालय ने नए DL या लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत वाली उम्र की सीमा को मौजूदा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का प्रस्ताव भी दिया है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा, “आसानी से जीने और आसानी से बिजनेस करने के नाम पर, हमें सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी बुनियादी पैमानों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

जानकारों का यह भी कहना है कि 6 साल से कम उम्र के बच्चे को साथ में ले जाते समय ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर दोगुना जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उनका मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस को मनमानी करने का मौका मिल सकता है।

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