Viral Video: मैक्लॉडगंज में हर तरफ कचरे का ढेर! वायरल वीडियो देख भड़के लोग, टूरिस्ट पर उठे सवाल

हिमाचल प्रदेश के मैक्लॉडगंज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसके वायरल होने के बाद लोगों के सिविक सेंस को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वीडियो में दिख रहा कि लोग कई पर्यटन स्थलों पर लोग घूमने के बाद प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट और दूसरी चीजें वहीं फेंक दिए हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा पड़ा दिखाई दे रहा है। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को याद दिलाया है कि पर्यटन स्थलों को साफ रखना और कचरा सही जगह पर फेंकना सभी की जिम्मेदारी है।

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो में दिख रहे नजारे देखकर लोग नाराजगी जता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार जागरूक करने के बावजूद पर्यटन स्थलों पर लोग जिम्मेदारी से पेश क्यों नहीं आते। इस घटना ने एक बार फिर पर्यटकों के व्यवहार और सार्वजनिक जगहों पर नियमों का पालन करने की जरूरत को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

चारों तरफ फैला है कचरा

सस्टेनिफाई ने हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के पास स्थित मैक्लॉडगंज का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जिसे बाद में X पर भी पोस्ट किया गया। वीडियो में पहाड़ी रास्ते पर जगह-जगह कचरा फैला दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति जैसे-जैसे सड़क पर आगे बढ़ता है, रास्ते के दोनों तरफ फैला कचरा साफ नजर आता है। वहां प्लास्टिक के रैपर, पुराने कपड़े और कागज समेत कई तरह की गंदगी पड़ी हुई थी। पर्यटकों की इस लापरवाही के कारण खूबसूरत पहाड़ी रास्ता कूड़े के ढेर में बदल गया, जिससे इलाके की सुंदरता खराब होती दिखाई दी।

पोस्ट में कही ये बातें

वीडियो शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “मैक्लॉडगंज की हालत देखिए। अगली बार जब कोई इसे स्विट्जरलैंड जैसा बताए, तो उसे यह वीडियो जरूर दिखाएं। हिमाचल को अब कचरा साफ करने वाले पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए, जहां लोग सफाई के लिए स्वयंसेवक बनें और बदले में उन्हें कुछ दिनों तक मुफ्त में रहने और खाने की सुविधा मिले।” वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई और पहाड़ी इलाकों में कचरा फैलाने वाले पर्यटकों की आलोचना की।

यूजर ने किया ये कमेंट

लोगों ने पर्यटकों से अपील की कि वे कचरा पहाड़ों पर फेंकने के बजाय अपने साथ वापस ले जाएं। इस घटना ने हिमाचल में बढ़ते पर्यटन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर फिर चिंता बढ़ा दी है। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा, “यह बेहद शर्मनाक है। हर तरफ प्लास्टिक के कवर और बोतलें दिखाई दे रही हैं। तमिलनाडु के ऊटी और पूरे नीलगिरी जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध है। फिर हिमालयी राज्य भी ऐसा नियम क्यों नहीं लागू कर सकते?”

दूसरे यूजर ने लिखा, “यहां पर्यटकों की संख्या बहुत ज्यादा है और लोगों में नागरिक जिम्मेदारी की कमी है। इसके अलावा, नगर निगम की व्यवस्था भी बेहद कमजोर है। सफाई के लिए स्वयंसेवक मौजूद हैं, लेकिन इस खूबसूरत शहर को बचाने के लिए पर्यटकों पर जुर्माना लगाना और उनकी संख्या सीमित करना जरूरी है।” एक अन्य यूजर ने सहमति जताते हुए कहा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यह सोचकर भी बहुत दुख होता है कि हमारे हिमाचली भाई-बहनों को इन हालात में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।”

एक Delivery Boy ने खड़ी कर दी युवाओं की Team | अपने इलाके की बदल रहे तस्वीर | Madhya Pradesh

एक Delivery Boy ने खड़ी कर दी युवाओं की Team | अपने इलाके की बदल रहे तस्वीर | Madhya Pradesh

एक Delivery Boy से शुरू हुई एक ऐसी पहल, जिसमें आज 50+ युवा अपने इलाके की छोटी-बड़ी समस्याओं को अपना समझकर उनका समाधान करते हैं। स्कूल में साफ पानी से लेकर सड़क के गड्ढों और दुर्घटना रोकने वाले Reflectors तक।
इन युवाओं का एक ही नियम है-
अपना शहर, अपनी जिम्मेदारी।
क्या आपके शहर में भी है एक ऐसा हीरो तो जुड़िए हमारे अभियान #CivicSenseRevolution से और टैग करिए उस #CivicSenseHero को!

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19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense

19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense

Bittu Tabahi की तरह 19 साल के Kartik Sahani ने भी बदलाव के लिए खुद कदम उठाया।
UP के Mau की Tamsa नदी कचरे से पट चुकी थी। इसी नदी पर कार्तिक के परिवार के खेत निर्भर हैं।
इसलिए उन्होंने फैसला किया-
नदी को तो साफ कर के रहेगे।
हर दिन 3-4 घंटे नदी में उतरकर सफाई की और सिर्फ 22 दिनों में 10 क्विंटल से ज्यादा कचरा निकाल दिया।
अब नदी के बाद उनका अगला लक्ष्य है, अपने इलाके का एक तालाब।
क्योंकि बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम नहीं चाहिए, कभी-कभी एक इंसान का पहला कदम ही काफी होता है।
क्या आपके शहर में भी कोई ऐसी जगह है, जिसे साफ करने की जरूरत है?
@kartiksahaniii

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19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense Hero | Uttar Pradesh
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विसर्जन के बाद कचरे में नहीं, बच्चों की पढ़ाई में काम आया POP |Ganesh Chaturthi | Recycling Ganesha

विसर्जन के बाद कचरे में नहीं, बच्चों की पढ़ाई में काम आया POP |Ganesh Chaturthi |  Recycling Ganesha

गणपति विसर्जन के बाद कचरे में जाने वाली POP की मूर्तियों को रीसायकल कर Malhar और Binish अब उनसे स्टडी टेबल्स और बेंच समेत 12+ तरह के प्रोडक्ट्स बना रहे हैं। अब तक 3,000+ किलो POP से 760 स्टडी टेबल्स बनाई जा चुकी हैं, जिनसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई में मदद मिल रही है। जानिए कैसे एक पर्यावरणीय समस्या को बच्चों की पढ़ाई के लिए एक उपयोगी पहल में बदला जा रहा है।
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Viral Video: विदेशियों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर बनाई रील…किसी को नहीं हुई परेशानी, भारतीय करते तो क्यों मचता है बवाल?

Video Viral: दिल्ली एयरपोर्ट पर कुछ विदेशी लोगों के रील बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल काफी हो रहा है। उदयपुर जाने के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे एक शख्स ने इसका वीडियो बनाकर शेयर किया। वीडियो शेयर करने के साथ युवक ने लोगों से सवाल किया कि अगर भारतीय विदेश के किसी एयरपोर्ट पर इसी तरह डांस और रील बनाते, तो क्या लोगों का ऐसा ही रिएक्शन होता? वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने पब्लिक प्लेस पर लोगों के व्यवहार और सिविक सेंस को लेकर चर्चा शुरू कर दी।

कुछ यूजर्स ने कहा कि विदेश में अगर भारतीय इसी तरह रील बनाएं या डांस करें, तो उनकी काफी आलोचना होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भारत में विदेशी ऐसा करें तो लोगों की सोच क्यों बदल जाती है।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में क्रिएटर मोहित सिंह ने एयरपोर्ट के अंदर कुछ लोगों को डांस करते और वीडियो बनाते हुए दिखाया। आसपास दूसरे यात्री अपने काम में व्यस्त नजर आए। मोहित ने सवाल उठाया कि अगर यही काम भारतीय करें, तो लोगों की प्रतिक्रिया अलग क्यों होती है। उन्होंने कहा, “वहां एक ग्रुप है, शायद वे भी उदयपुर जा रहे हैं। सभी लोग रील बना रहे हैं, डांस कर रहे हैं और मस्ती कर रहे हैं, लेकिन किसी को इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन अगर कोई भारतीय विदेश के किसी एयरपोर्ट पर इसी तरह का व्यवहार कर रहा होता और मैं उसका वीडियो बनाकर दिखाता कि ‘देखो भाई, भारतीय विदेश के एयरपोर्ट पर ऐसा कर रहे हैं’, तो कमेंट सेक्शन में लोग सिविक सेंस को लेकर तरह-तरह की बातें करने लगते।”

 

भारतीय की क्यों करते है आलोचना

सिंह ने कहा कि, एक ही तरह के व्यवहार को लोग अलग-अलग तरीके से देखते हैं और ये इस बात पर निर्भर करता है कि ऐसा कौन कर रहा है या घटना कहां हुई है। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनके हिसाब से रील बनाना या सार्वजनिक जगह पर डांस करना अपने आप में गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “बिना किसी वजह के किसी से नफरत करना सही नहीं है।”

उनके मुताबिक, अगर किसी के ऐसे व्यवहार से दूसरे लोगों को परेशानी होने लगे, तभी यह एक समस्या बनता है। वीडियो शेयर करते हुए सिंह ने कैप्शन में लिखा, “अगर यही काम भारतीय कर रहे होते, तो शायद लोगों का रिएक्शन काफी अलग होता। इसमें किसी से नफरत की बात नहीं है, यह सिर्फ एक नजरिया है।”

यूजर्स ने किया रिएक्शन

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने उनकी बात का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि सिविक सेंस को किसी की राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं, बल्कि उसके व्यवहार के आधार पर देखा जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि कई बार भारतीय ही भारतीयों के प्रति ज्यादा आलोचनात्मक नजर आते हैं और विदेशों में लोग अपने देश की अच्छी चीजों को ज्यादा बढ़ावा देते हैं।

वहीं, कुछ यूजर्स ने एयरपोर्ट पर इस तरह डांस और रील बनाने को गलत बताया। एक यूजर ने कहा कि पब्लिक प्लेस सभी के लिए होते हैं, इसलिए वहां लोगों को दूसरों का ध्यान रखते हुए व्यवहार करना चाहिए।

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई  | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

दूषित नदियों, रास्तों और पहाड़ों की शिकायत करने वाले लोग तो आपको जरूर कहीं न कहीं मिल जाएंगे। लेकिन बिना किसी शिकायत के अपने शहर और देश की गलियों को अपना घर समझकर सफाई करने वाले लोग आपको कहाँ मिलेंगे?
एक इंसान की जिंदगी के 70 साल दूसरों के चलने का रास्ता साफ करते हुए गुजर गए।
क्या हम उनके जीवन के इस आखिरी पड़ाव में उनके साथ थोड़ा खड़े नहीं हो सकते?
आप चाहें तो इस बुजुर्ग दंपति की मदद कर सकते हैं—
M- 7908720522
UCO Bank
Jaba Pal
A/C – 22220110049228
IFSC – UCBA0002222

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपने समुदाय को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है?

उसे #CivicSenseHero के लिए Nominate करें।
Google Form- docs.google.com/forms/…/viewform

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21 साल के बिट्टू तबाही की CM मोहन यादव से मुलाकात पर मचा बवाल! ध्रुव राठी ने कही ये बात

मध्य प्रदेश के 21 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने अपने दम पर प्रदूषित अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। उनके इसी काम की वजह से वह न सिर्फ लोगों की नजरों में आए, बल्कि अब उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी हुई।

इसी मुलाकात को लेकर यूट्यूबर ध्रुव राठी ने सवाल उठाया, जिसके बाद बिट्टू तबाही ने सीधे उन्हें जवाब दिया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई मुलाकात

सुरेंद्र सिंह चौधरी हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नदी की सफाई के लिए उनके प्रयासों की सराहना की और उनके जज्बे की तारीफ की। मुलाकात का वीडियो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

ध्रुव राठी ने सरकार पर साधा निशाना

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ध्रुव राठी ने सरकार पर बिट्टू तबाही के काम का श्रेय लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि एक युवक ने अकेले नदी की सफाई के लिए मेहनत की और जब उसका काम वायरल हुआ, तब उसे बुलाकर फोटोशूट किया गया। राठी ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार वास्तव में क्या कर रही है और केवल PR करने से क्या हासिल होगा। उनकी इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर चर्चा को और तेज कर दिया।

बिट्टू तबाही ने क्या दिया जवाब?

ध्रुव राठी की टिप्पणी पर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने खुद जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह किसी को श्रेय देने या लेने की बात नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार पहले भी उनके काम की सराहना कर चुकी है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा सिविक सेंस यानी नागरिक जिम्मेदारी का है। उनका मकसद सिर्फ इतना है कि लोग सफाई और पर्यावरण को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझें और आगे आकर काम करें। बिट्टू के इस जवाब से साफ हुआ कि वह अपनी मुहिम को राजनीतिक बहस से ज्यादा लोगों की भागीदारी और जागरूकता से जोड़कर देखते हैं।

मोहन यादव ने भी की तारीफ

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सुरेंद्र के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत नहीं होती। कई बार एक व्यक्ति की ईमानदार पहल भी बदलाव की शुरुआत कर सकती है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान से भी जोड़ा। यह अभियान जल स्रोतों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवन के लिए जनभागीदारी पर जोर देता है।

नदी की सफाई ने विदेश तक पहुंचाई पहचान

अजनार नदी की सफाई को लेकर बिट्टू तबाही की मेहनत की चर्चा भारत से बाहर भी पहुंची। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नीदरलैंड स्थित गैर-लाभकारी संस्था The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO बॉयन स्लैट ने उन्हें नौकरी का ऑफर दिया।

एक X यूजर ने बिट्टू के काम की पहले और बाद की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि 21 वर्षीय सुरेंद्र कई महीनों से अकेले प्रदूषित अजनार नदी की सफाई में जुटे हुए हैं।

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तीनों ने ओढ़ रखी थी ‘WESTERN RAILWAY’ की चादर, बाजार में दिखे तो VIDEO हुआ वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने रेलवे की संपत्ति को लेकर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में तीन लोग बाजार में सफेद चादर को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि चादर पर साफ-साफ “WESTERN RAILWAY” लिखा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से वीडियो देखते ही लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें आखिर बाजार तक कैसे पहुंचीं। वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये चादरें रेलवे से चोरी की गई थीं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वायरल क्लिप के बाद लोगों ने रेलवे की संपत्ति के इस्तेमाल, यात्रियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे में बेडशीट, कंबल और अन्य लिनेन के गायब होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।

कैमरा घूमते ही दिखी रेलवे की पहचान

वीडियो को X पर @GemsOfRailway नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। फुटेज में तीनों लोग एक दुकान के बाहर नजर आते हैं और उनके शरीर पर सफेद रेलवे लिनेन लिपटा हुआ दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता सुनाई देता है कि इन लोगों ने Western Railway की चादरें चुराई हैं और अब उन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं। हालांकि, वीडियो में सिर्फ चादर पर रेलवे की मार्किंग दिखाई देती है; इन लोगों ने वास्तव में चादर चोरी की थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट से नहीं होती।

‘रेलवे की चादर’ बनी सोशल मीडिया की चर्चा

वीडियो के साथ किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं। इसी दावे के बाद लोगों का ध्यान रेलवे में लिनेन की कथित चोरी की समस्या की ओर भी गया। पोस्ट में RTI के आधार पर जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC कोचों से बेडरोल आइटम गायब होने के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया।

करोड़ों रुपये के लिनेन का नुकसान?

पोस्ट में साझा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में अलग-अलग रेलवे डिवीजनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी होने की बात कही गई है। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। दावे के मुताबिक, इन सामानों की कुल कीमत ₹104.51 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े पोस्ट में RTI डेटा के हवाले से दिए गए हैं।

लोगों ने कहा- ‘रेलवे को फैशन ब्रांड बना दिया’

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अंदाज में प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति के प्रति लापरवाही बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चादर को ऐसे पहना गया है जैसे वह किसी फैशन ब्रांड का हिस्सा हो। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि लोग “WESTERN RAILWAY” को ऐसे पहन रहे हैं जैसे कोई फैशन लेबल हो। वहीं कई अन्य लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान का मुद्दा उठाया।

असली सवाल सिर्फ चादर का नहीं

इस वायरल वीडियो ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है अगर सार्वजनिक संपत्ति लोगों के निजी इस्तेमाल में पहुंच रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और दूसरे लिनेन सार्वजनिक सुविधा का हिस्सा हैं। इनके गायब होने से सीधे तौर पर रेलवे के खर्च और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों और चादरों को लेकर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को दावे और आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न हो।

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बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna

विदेश से कुछ समय रहकर या घूमकर आने के बाद, हममें से ज्यादातर लोग अपने देश में साफ-सफाई की शिकायत जरूर करते हैं। लेकिन देखिए, बिहार के शुभम कुमार क्या कर रहे हैं?
वे सफाई का जिम्मा खुद उठा रहे हैं।
बिहार के शुभम हर रविवार घाट की सफाई करते है।
एक रविवार से शुरू हुई उनकी ये सफाई मुहिम, आज 1,100+ वॉलंटियर्स तक पहुँच चुकी है।
1.4 लाख किलो से ज्यादा प्लास्टिक हटाई गई।
2 लाख से ज्यादा बोतलें रीसायकल हुईं।
और 16,000+ लोगों की रोजी-रोटी इन सुधरे हुए इलाकों से जुड़ गई।
इस Independence Day, आइए देशभक्ति का एक अलग रूप celebrate करें।
द बेटर इंडिया लेकर आया है #CivicSenseHero—एक ऐसी पहल, जिसके जरिए हम उन आम भारतीयों को सम्मान देंगे, जो सिर्फ़ अपने देश से प्यार नहीं करते, बल्कि अपने कामों से उसकी बेहतर तस्वीर बनाते हैं।

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी Community के लिए कुछ अच्छा कर रहा है और बदलाव ला रहा है?

तो अपने #CivicSenseHero को Nominate करें और उनकी कहानी हम तक पहुंचाएं।

@beinghelperfoundation

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बिहार के इस इंजीनियर ने बदल दी गंगा घाट की तस्वीर | Subham Kumar | Ganga Cleaning Initiative Patna | Civic Sense Hero

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Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

Civic Sense Hero: देशभक्ति का नया TREND | The Better India Hindi

देशभक्ति सिर्फ तिरंगा लहराने या नारे लगाने तक सीमित नहीं है।
देश के लिए सही काम करना भी देशभक्ति है। जो सड़क पर कचरा नहीं फैलाता, जो पानी बचाता है, पेड़ लगाता है, जो Traffic Rules और Public Rules का पालन करता है—
वही है असली Civic Sense Hero!
इसी सोच को एक movement बनाने के लिए The Better India ला रहा है #CivicSenseHero Campaign, 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक।
अपने आसपास के उस Hero को पहचानिए, जो India को हर दिन थोड़ा और Better बना रहा है।
उसे Nominate कीजिए, उसकी कहानी दुनिया तक पहुँचाइए और Civic Sense को नया TREND बनाइए!
Nomination के लिए ये फॉर्म भरें-
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScoBw41mDqbS63Bv7hr7XubQwdz6LA2fS0lcqffx3xqF5bXJQ/viewform

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