Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने 2 ‘वंदे भारत’ ट्रेनों की टाइमिंग बदली, सफर से पहले चेक करें नया शेड्यूल

Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। ‘वाराणसी-रांची’ और ‘वाराणसी-देवघर’ रूट पर चलने वाली दो ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, दोनों ट्रेनों की नई टाइमिंग 2 सितंबर 2026 से लागू होगी।

ऐसे में इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले नया शेड्यूल जरूर देख लेना चाहिए। दोनों वंदे भारत ट्रेनों के वाराणसी से रवाना होने के समय में 10-10 मिनट की कटौती की गई है। इसलिए 2 सितंबर के बाद यात्रा करने वाले यात्रियों को पुराने समय के आधार पर स्टेशन पहुंचने से बचना चाहिए।

‘वाराणसी-रांची वंदे भारत’ की टाइमिंग बदली

ट्रेन नंबर 20888/20887 वाराणसी-रांची-वाराणसी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ का संचालन दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2024 को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। यह देश की 49वीं ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ थी। 18 मार्च 2024 से इसका नियमित परिचालन शुरू हुआ।

यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी सभी दिन चलती है। वाराणसी से रांची के बीच करीब 536 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 7 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। रास्ते में ट्रेन पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम, गया, कोडरमा, हजारीबाग रोड, पारसनाथ, बोकारो स्टील सिटी और मुरी जैसे रेलवे स्टेशनों पर रुकती है।

नई टाइमिंग इस प्रकार है:-

  • फिलहाल ट्रेन नंबर 20888 वाराणसी से शाम 4:05 बजे रवाना होती है। अब 2 सितंबर से यह ट्रेन शाम 3:55 बजे वाराणसी से रवाना होगी। यानी इसके डिपार्चर टाइमिंग में 10 मिनट का बदलाव किया गया है।
  • हालांकि, वाराणसी के आगे ट्रेन के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों के लिए AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा है। वाराणसी से रांची तक एसी चेयर कार का किराया 1,470 रुपये, जबकि एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2,695 रुपये है।

वाराणसी-देवघर वंदे भारत भी 10 मिनट पहले चलेगी

  • रेलवे ने ट्रेन नंबर 22500 वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस के समय में भी बदलाव किया है। इसका नया टाइमटेबल भी 2 सितंबर 2026 से लागू होगा।
  • अभी यह ट्रेन वाराणसी से सुबह 6:20 बजे रवाना होती है। अब यह सुबह 6:10 बजे रवाना होगी। यानी यात्रियों को अब ट्रेन पकड़ने के लिए 10 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना होगा।
  • भारतीय रेलवे के मुताबिक, वाराणसी के बाद दूसरे स्टेशनों पर ट्रेन की टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ये भी पढ़ें- Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की ‘घास ट्रेन’, सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

तीनों ने ओढ़ रखी थी ‘WESTERN RAILWAY’ की चादर, बाजार में दिखे तो VIDEO हुआ वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने रेलवे की संपत्ति को लेकर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में तीन लोग बाजार में सफेद चादर को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि चादर पर साफ-साफ “WESTERN RAILWAY” लिखा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से वीडियो देखते ही लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें आखिर बाजार तक कैसे पहुंचीं। वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये चादरें रेलवे से चोरी की गई थीं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वायरल क्लिप के बाद लोगों ने रेलवे की संपत्ति के इस्तेमाल, यात्रियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे में बेडशीट, कंबल और अन्य लिनेन के गायब होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।

कैमरा घूमते ही दिखी रेलवे की पहचान

वीडियो को X पर @GemsOfRailway नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। फुटेज में तीनों लोग एक दुकान के बाहर नजर आते हैं और उनके शरीर पर सफेद रेलवे लिनेन लिपटा हुआ दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता सुनाई देता है कि इन लोगों ने Western Railway की चादरें चुराई हैं और अब उन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं। हालांकि, वीडियो में सिर्फ चादर पर रेलवे की मार्किंग दिखाई देती है; इन लोगों ने वास्तव में चादर चोरी की थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट से नहीं होती।

‘रेलवे की चादर’ बनी सोशल मीडिया की चर्चा

वीडियो के साथ किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं। इसी दावे के बाद लोगों का ध्यान रेलवे में लिनेन की कथित चोरी की समस्या की ओर भी गया। पोस्ट में RTI के आधार पर जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC कोचों से बेडरोल आइटम गायब होने के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया।

करोड़ों रुपये के लिनेन का नुकसान?

पोस्ट में साझा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में अलग-अलग रेलवे डिवीजनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी होने की बात कही गई है। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। दावे के मुताबिक, इन सामानों की कुल कीमत ₹104.51 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े पोस्ट में RTI डेटा के हवाले से दिए गए हैं।

लोगों ने कहा- ‘रेलवे को फैशन ब्रांड बना दिया’

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अंदाज में प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति के प्रति लापरवाही बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चादर को ऐसे पहना गया है जैसे वह किसी फैशन ब्रांड का हिस्सा हो। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि लोग “WESTERN RAILWAY” को ऐसे पहन रहे हैं जैसे कोई फैशन लेबल हो। वहीं कई अन्य लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान का मुद्दा उठाया।

असली सवाल सिर्फ चादर का नहीं

इस वायरल वीडियो ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है अगर सार्वजनिक संपत्ति लोगों के निजी इस्तेमाल में पहुंच रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और दूसरे लिनेन सार्वजनिक सुविधा का हिस्सा हैं। इनके गायब होने से सीधे तौर पर रेलवे के खर्च और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों और चादरों को लेकर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को दावे और आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न हो।

20 साल में एग्जिक्यूटिव ट्रेनी से DGM तक का सफर! गेल की तरक्की ने कैसे लंबे समय तक टिके एंप्लॉयी की जिंदगी बदली और मिला अवॉर्ड

रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

वंदे भारत ट्रेनों के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाएगी ₹1350 करोड़ का IPO

वंदे भारत के लिए पार्ट्स बनाने वाली निफा 1,350 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने का प्लान बना रही है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। निफा कोलकाता की कंपनी है। इसने इश्यू के प्रबंधन के लिए नोमुरा और एक्सिस कैपिटल को एडवाइजर नियुक्त किया है। शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है। इससे आईपीओ बाजार में हलचल बढ़ी है।

आईपीओ के पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए

Nipha के आईपीओ में नए शेयर इश्यू करने की संभावना है। कंपनी इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कर्ज चुकाने और बिजनेस से जुड़ी दूसरी जरूरतों के लिए करेगी। अभी इश्यू के बारे में बातचीत जारी है। इससे बाद में इश्यू के साइज और दूसरी चीजों में बदलाव हो सकता है।

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस से होगा फायदा 

आईपीओ के प्लान की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, “इनवेस्टर्स के बीच मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की अच्छी डिमांड है। रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ा है। इसका फायदा निफा जैसी कंपनियों को मध्यम से लंबी अवधि में मिलेगा।”

कंपनी की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं

निफा की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं। इनमें से 9 पश्चिम बंगाल में है और एक हरियाणा में है। कंपनी रेलवे के अलावा एग्रीकल्चर, इलेक्ट्रिकल-स्विच गियर और इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज को प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। आईपीओ के प्लान के बारे में जानने के लिए कंपनी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

कंपनी के रेलवे पोर्टफोलियो में कई प्रोडक्ट्स शामिल

कंपनी वंदे भारत के लिए कंपोनेंट्स की सप्लाई के साथ ही रेलवे को LHB कोच और EMU सप्लाई करती है। इसके रेलवे पोर्टफोलियो में लोकोमोटिव कास्टिंग्स, ट्रैक और पर्मानेंट-वे कंपोनेंट्स, ट्रेन कपलिंग और ड्राफ्ट सिस्टम्स, फ्रेट रेल प्रोडक्ट्स और रेल-व्हील सेट्स शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: Ardee IPO Listing: 138 गुना भरा था आईपीओ, अब 39% का लिस्टिंग गेन, ₹53 के शेयरों की मार्केट में धांसू एंट्री 

2030 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 800 करने का प्लान

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस का फायदा निफा को मिलेगा। सरकार वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाना चाहती है। दिसंबर 2025 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 164 थी। सरकार का प्लान 2030 तक इसे बढ़ाकर 800 और 20247 तक 4,500 करने का प्लान है। FY26 में निफा का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 634 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 475 करोड़ रुपये था। इसका ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 19 फीसदी था।