गुजरात के वडोदरा-रतलाम में बनेगी नई रेलवे लाइन, दिल्ली-मुंबई रूट पर होगा फायदा

गुजरात में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर है। इंडियन रेलवे वडोदरा-रतलाम के व्यस्त रेल रूट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। वेस्टर्न रेलवे वडोदरा और रतलाम के बीच करीब 259 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना बना रहा है। इसी के साथ विश्वामित्री-दभोई सेक्शन को भी डबल करने की तैयारी है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी और यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। वेस्टर्न रेलवे के मुताबिक, नई सुविधाओं से ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और सुचारू होगा। प्रोजेक्ट पूरा होने से गुजरात-मध्य प्रदेश के बीच रेल संपर्क और व्यापार-उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

दो नई रेल लाइनें बनेंगी

वडोदरा-रतलाम रूट गुजरात को मध्य प्रदेश और उत्तरी भारत से जोड़ता है और यहां बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां चलती हैं। नई रेल लाइनों के बनने से इस व्यस्त कॉरिडोर पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होने और क्षमता की कमी दूर होने की उम्मीद है। इससे दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेनों के लिए ज्यादा जगह मिलेगी और यात्री व मालगाड़ियों की आवाजाही बेहतर होगी।

वडोदरा-रतलाम रेल सेक्शन गोल्डन क्वाड्रिलेटरल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इस रूट पर दो नई रेल लाइनें बनने के बाद रेलवे को ज्यादा ट्रेनें चलाने की सुविधा मिलेगी। इससे यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही बेहतर होने, ट्रैक पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन में आसानी होने की उम्मीद है।

विश्वामित्री-दभोई के बीच बिछेगी दूसरी लाइन

वडोदरा क्षेत्र में रेलवे एक और अहम प्रोजेक्ट पर काम करने की तैयारी कर रहा है। रेलवे विश्वामित्री और दभोई के बीच 33 किलोमीटर लंबे रेल रूट पर दूसरी लाइन बिछाने जा रहा है। इस काम पर करीब 394 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अभी इस रूट पर सिर्फ एक लाइन है, जिसकी वजह से ट्रेनों की आवाजाही सीमित रहती है। नई लाइन बनने के बाद इस सेक्शन पर ट्रेन संचालन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। विश्वामित्री-दभोई रेल लाइन के दोहरीकरण के बाद इस रूट पर ज्यादा ट्रेनें चलाना आसान होगा और ट्रेनों की आवाजाही भी बेहतर हो सकेगी।

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रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।