Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, राजेश एक्सपोर्ट्स से टाटा टेक्नोलॉजीज तक शामिल

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते निवेशकों की नजर कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर रहेगी। कहीं तिमाही नतीजों में मुनाफे की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो कहीं कमाई पर दबाव दिखा है। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, जबकि कुछ में बड़े कारोबारी फैसले हुए हैं। इन खबरों का असर गुरुवार को शेयरों की चाल पर पड़ सकता है।

HDB Financial Services

NBFC कंपनी HDB Financial Services का मुनाफा वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 34% बढ़कर 780 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 581 करोड़ रुपये था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15.5% बढ़कर 2,534 करोड़ रुपये पहुंच गई। कंपनी के बोर्ड ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 2 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है।

CEAT

टायर कंपनी CEAT का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में 39.8% घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 26.2% बढ़कर 4,762 करोड़ रुपये पहुंच गया। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मुनाफे पर दबाव पड़ा। EBITDA 9.1% गिरकर 457 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन 13.3% से घटकर 9.6% पर आ गया।

IDBI Bank

सरकारी बैंक IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने मंजूरी दे दी है। बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए Fairfax Financials को सफल बोलीदाता चुना गया है। पुनर्गठन के बाद सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी 34% रहेगी। शेयर के लिए 75.99 रुपये का बेंचमार्क प्राइस तय किया गया था, जबकि 81 रुपये की सबसे ऊंची बोली स्वीकार की गई।

CSB Bank

निजी क्षेत्र के CSB Bank के सामने अब मर्जर या हिस्सेदारी बेचने का विकल्प हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, कोई प्रमोटर एक से ज्यादा बैंकों में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी नहीं रख सकता। IDBI Bank के पुनर्गठन की मंजूरी के बाद Fairfax को CSB Bank का मर्जर IDBI Bank में करना पड़ सकता है या अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है। प्रस्तावित ढांचे में दो साल के भीतर मर्जर का रास्ता शामिल है।

Rajesh Exports

SEBI ने Rajesh Exports और इसके चेयरमैन राजेश मेहता पर लगी अंतरिम पाबंदियां जारी रखने का फैसला किया है। कंपनी के वित्तीय खुलासों में गड़बड़ियों को लेकर रेगुलेटर की चिंताएं दूर नहीं हुई हैं। राजेश मेहता अगले आदेश तक कंपनी के शेयर खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का कारोबार करने से प्रतिबंधित रहेंगे।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी Jio Platforms के IPO के लिए अहम दस्तावेज यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जमा कर दिया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगेगी। IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित होंगे।

Tata Technologies

टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग कंपनी Tata Technologies का मुनाफा सालाना आधार पर 5% घटकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 181 करोड़ रुपये था। हालांकि, डॉलर में रेवेन्यू कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर 22% बढ़ा। सर्विसेज सेगमेंट का रेवेन्यू भी 26% बढ़ा। कंपनी को पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

MRPL

ONGC की सब्सिडियरी तेल कंपनी MRPL का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट करीब 195% बढ़कर 1,881 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 639 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू 37.1% बढ़कर 35,590 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,210 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स 2,519 करोड़ रुपये रहा।

Enviro Infra

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Enviro Infra को Arie Energy से महाराष्ट्र में 100 मेगावाट के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए 228 करोड़ रुपये का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है। यह ऑर्डर कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार को बढ़ाने से जुड़ा है।

Aeroflex Industries

औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी Aeroflex Industries मार्च 2028 तक 202 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस रकम से स्टेनलेस स्टील होज, होज असेंबली और लिक्विड कूलिंग सिस्टम बनाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। कंपनी को डेटा सेंटर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग का फायदा मिलने की उम्मीद है।

Bajaj Consumer Care

FMCG कंपनी Bajaj Consumer Care का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 67.1% बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 42 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू 25.7% बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गया।

Cemindia Projects

अदाणी ग्रुप की कंपनी Cemindia Projects ने संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए QIP लॉन्च किया है। कंपनी 90.3 लाख तक शेयर जारी करेगी। इश्यू का फ्लोर प्राइस 1,158.58 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। संकेतात्मक इश्यू प्राइस 1,108 रुपये है, जो बुधवार के 1,153.50 रुपये के बंद भाव से करीब 4% डिस्काउंट पर है।

Jio Platforms IPO: जियो आईपीओ का प्राइस बैंड तय, 21 अक्टूबर से लगा सकेंगे पैसा; जानिए 8 बड़ी बातें

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारतीय रेलवे का मेगा प्लान आया सामने, इन 5 राज्यों में बिछेगी 656 किमी नई पटरी, 10783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाएं मंजूर

Indian Railways Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के विस्तार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने देश के 5 राज्यों में कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रेनों की भीड़कम करने के लिए ₹10,783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मंजूर की गई इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा मिलेगा। इसके तहत कुल 656 किलोमीटर लंबी नई रेल पटरियां बिछाई जाएंगी, जिन्हें साल 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानिए इस मेगा प्लान की 5 सबसे बड़ी बातें।

किन 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने जिन तीन रेल लाइनों के विस्तार को मंजूरी दी है, वे निम्नलिखित हैं:

  • खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडीही): चौथी नई रेल लाइन।
  • कटनी से पेंड्रा रोड: चौथी नई रेल लाइन।
  • बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड: तीसरी नई रेल लाइन।

2. 14 जिलों के 4,790 गांवों को सीधा फायदा

यह रेल विस्तार 5 राज्यों के 14 जिलों में फैले लगभग 4,790 गांवों को भारतीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। इससे क्षेत्र की लगभग 56 लाख आबादी को आवागमन में सीधी राहत मिलेगी और यात्रा का समय घटेगा।

3. धार्मिक और पर्यटन स्थलों का सफर होगा आसान

इन नई रेल पटरियों के बिछने से कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना काफी सुगम हो जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश)
  • अमरकंटक मंदिर (मध्य प्रदेश)
  • अचानकमार टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़)
  • भगवान जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा)
  • रतनपुर महामाया मंदिर (छत्तीसगढ़)

4. माल ढुलाई में तेजी और कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत

यह पूरा रूट औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसी भारी औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति होती है। इन नई लाइनों के शुरू होने से रेलवे सालाना 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगी। पटरियों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे ट्रकों पर निर्भरता घटेगी और रसद/लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी।

5. पर्यावरण को बंपर फायदा: 12 करोड़ लीटर तेल की बचत

सरकार के अनुमान के मुताबिक, सड़कों के बजाय रेलवे से माल ढुलाई बढ़ने से पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होगा। हर साल लगभग 12 करोड़ लीटर तेल की खपत कम होगी। पर्यावरण में 62 करोड़ किलोग्राम (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा। यह लाभ लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।

 

नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

Cabinet Decisions: गुवाहाटी से तेजपुर के बीच बनेगा शानदार 4-लेन हाईवे, कैबिनेट ने दी 8970 करोड़ रुपये की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने गुरुवार को असम में NH-15 के 135.871 किलोमीटर लंबे, 4-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट NH(O) के तहत कुल 8970.20 करोड़ रुपये की लागत से ‘बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (BOT) टोल मोड पर विकसित किया जाएगा।

CCEA के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में तेजपुर बाईपास पर एक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) (4.9 किमी) का निर्माण शामिल है। इसे भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया गया है। इस कॉरिडोर के बनने से ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले मौजूदा NH-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

बनाए जाएंगे 5 बड़े बाईपास

इस प्रोजेक्ट के तहत 58.7 किलोमीटर लंबे 5 बड़े बाईपास भी बनाए जाएंगे। इससे घनी आबादी वाले इलाकों जैसे बाईहाटा चारियाली, सिपाझार, खरुपेटिया, डेकीयाजुली और तेजपुर में जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और 1 हाथी अंडरपास (तेजपुर बाईपास पर) बनाने का प्रावधान है। ट्रैफिक की आवाजाही बनाए रखने के लिए प्रोजेक्ट के तहत 46 अंडरपास, 19 फ्लाईओवर और 210 किलोमीटर सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, क्योंकि इस प्रोजेक्ट को एक्सेस-कंट्रोल्ड (सीमित प्रवेश-निकास वाली सड़क) के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव है।

सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन की होगी बचत

CCEA ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाहनों की औसत रफ्तार करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, ईंधन की बचत होगी और वाहनों के संचालन पर आने वाला खर्च भी कम होगा। इससे क्षेत्र में आवाजाही आसान होगी और आर्थिक व सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

औद्योगिक पार्क, पर्यटन स्थल और लॉजिस्टिक हब से जुड़ेगा कॉरिडोर

इसके अलावा, अपग्रेड किए जाने वाले इस कॉरिडोर से PM गति शक्ति योजना के तहत चिन्हित 8 आर्थिक केंद्रों (8 इंडस्ट्रियल पार्कों), 2 सामाजिक केंद्रों (असम के आकांक्षी जिले दरांग और उदलगुड़ी), 3 पर्यटन स्थलों (मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा नेशनल पार्क और ओरांग नेशनल पार्क) और 7 लॉजिस्टिक केंद्रों (3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 एयरपोर्ट और 2 जलमार्ग टर्मिनल) तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

इससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज और आसान होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन सिर्फ 20 मिनट में! वरुणा के किनारे अप्रूव्ड हुए 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का मैप और फुल डिटेल

Varanasi Elevated Corridor: वाराणसी (काशी) को ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या से परमानेंट मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुधवार को वरुणा नदी के किनारे एक शानदार 6/4 लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। पीआईबी की रिलीज के मुताबिक 10998.32 करोड़ रुपये की कुल पूंजीगत लागत वाले इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत बनाएगी। यह प्रोजेक्ट वाराणसी डीकन्जेशन प्लान का एक सबसे अहम हिस्सा है।

आइए जानते हैं इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरे रूट, लागत, मैप स्पेसिफिकेशन्स और इससे काशी की तस्वीर कैसे बदलेगी इसकी पूरी डिटेल।

प्रोजेक्ट का पूरा मैप और रूट स्पेसिफिकेशन्स

यह नया कनेक्टर कॉरिडोर सीधे तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में कनेक्ट करेगा। इस लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर की कुल लंबाई 43.218 किलोमीटर होगी। यह मुख्य रूप से एक 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। इसमें मुख्य कैरिजवे के साथ-साथ कई जगह फ्लाईओवर्स, लूप्स, रैंप्स और सर्विस रोड्स का एक आधुनिक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेटिंग स्पीड के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसपर गाड़ियां बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ सकेंगी।

यहां नीचे देखिए प्रोजेक्ट का पूरा रूट मैप

कंस्ट्रक्शन से लेकर जमीन अधिग्रहण तक का खर्च

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ₹10998.32 करोड़ के इस कुल बजट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। सिविल कंस्ट्रक्शन कॉस्ट के लिए 4565.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण पर 934.91 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा बाकी की राशि प्रोजेक्ट के अन्य तकनीकी और एसोसिएटेड खर्चों में इस्तेमाल होगी।

यात्रा समय में 50% की कटौती: 40 मिनट का सफर अब सिर्फ 20 मिनट में

इस कॉरिडोर के बन जाने के बाद वाराणसी आने-जाने वाले यात्रियों के समय में भारी बचत होगी। अभी NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में शहर के भारी जाम से जूझना पड़ता है। इसमें करीब 40 मिनट का समय लगता है। इस एक्सेस-कंट्रोल एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यह यात्रा समय घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा। यानी यात्रा के समय में सीधे 50 प्रतिशत की कमी आएगी। इससे शहर का आंतरिक रोड नेटवर्क पूरी तरह जाम मुक्त होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और गाड़ियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट में भी कमी आएगी।

काशी के इन प्रमुख रेलवे स्टेशनों, घाटों और एयरपोर्ट को मिलेगी डायरेक्ट कनेक्टिविटी

वरुणा नदी के किनारे बनने वाला यह एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी शहर के भीतर और उसके आस-पास के सभी प्रमुख केंद्रों को आपस में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे कई जगहों पर पहुंचना आसान हो जाएगा-

  • काशी रेलवे स्टेशन
  • वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन
  • वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन)
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU)
  • वाराणसी एयरपोर्ट (लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बाबतपुर)
  • रामनगर पोर्ट (Ramnagar Port)
  • वाराणसी के सभी प्रमुख घाट
  • सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय
  • समीपवर्ती चंदौली क्षेत्र

पीएम गति शक्ति और आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

यह प्रोजेक्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापार, कृषि और लॉजिस्टिक्स के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप यह प्रोजेक्ट मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगा। यह कॉरिडोर सीधे तौर पर 1 इकोनॉमिक नोड (चंदौली सोशल इकोनॉमिक जोन), 1 सोशल नोड (चंदौली) और 6 बड़े लॉजिस्टिक्स नोड्स तक पहुंच को आसान और मजबूत बनाएगा। इस रास्ते कृषि उपज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खनिजों की तेज और बिना किसी दिक्कत के हो पाएगी। इससे पूरे पूर्वी यूपी की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ेगी।

कुल मिलाकर वरुणा नदी के किनारे बनने वाला यह आधुनिक, एक्सेस-कंट्रोल अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर न सिर्फ वाराणसी के निवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों/तीर्थयात्रियों के जीवन को सुगम बनाएगा बल्कि काशी में पर्यटन और सतत आर्थिक विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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