छोटे भाई का अंतिम संस्कार मेरा इंतजार कर रहा है, ट्रेन लेट मत करना… पैसेंजर ने की भावुक अपील तो रेलवे ने दिया ये जवाब

अपने किसी करीबी को आखिरी विदाई देना जिंदगी के सबसे मुश्किल पलों में से एक होता है। ऐसे समय में अगर ट्रेन लेट हो जाए, तो परिवार तक समय पर पहुंचने की चिंता और बढ़ जाती है। कुछ ऐसी ही परेशानी का सामना एक यात्री को करना पड़ा, जिसने ट्रेन नंबर 15910, अवध असम एक्सप्रेस के लेट होने पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय रेलवे से मदद मांगी। यात्री ने बताया कि उसके छोटे भाई की अंतिम यात्रा उसका इंतजार कर रही है और वह समय पर पहुंचना चाहता है। उसकी इस अपील ने रेलवे की समयबद्ध सेवा और यात्रियों की आपात परिस्थितियों से जुड़े सवाल को सामने ला दिया।

‘कृपया ट्रेन को और लेट न करें‘, यात्री ने लगाई गुहार

9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:20 बजे किए गए पोस्ट में यात्री ने भारतीय रेलवे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए अपनी परेशानी साझा की। उसने अनुरोध किया कि अवध असम एक्सप्रेस को और देर न हो, क्योंकि उसे अपने छोटे भाई की अंतिम यात्रा में शामिल होना है।

यात्री की अपील का भाव साफ था वह किसी सामान्य काम के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई को आखिरी विदाई देने के लिए समय पर पहुंचना चाहता था। ऐसे संवेदनशील मौके पर ट्रेन की देरी उसके लिए बेहद मुश्किल स्थिति पैदा कर रही थी।

रेलवे ने बताई ट्रेन लेट होने की वजह

यात्री की पोस्ट पर मुरादाबाद मंडल के आधिकारिक अकाउंट @drm_mb ने जवाब दिया। रेलवे के मुताबिक, ट्रेन पिछले मंडल से ही देरी से पहुंची थी। इसके बाद संबंधित रेल सेक्शन में भारी भीड़ और ट्रेनों के एक साथ चलने के कारण भी देरी बढ़ गई।

मंडल ने बताया कि यात्री की शिकायत ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों तक पहुंचा दी गई है। कर्मचारियों से ट्रेन की निगरानी करने और संभव होने पर देरी कम करने की कोशिश करने को कहा गया। रेलवे ने यात्री को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का भरोसा भी दिया और हुई असुविधा पर खेद जताया।

RailwaySeva ने भी दिया जवाब, साझा करने को कहा यात्रा का विवरण

इस मामले में रेलवे की आधिकारिक सहायता सेवा RailwaySeva ने भी प्रतिक्रिया दी। उसने यात्री से अनुरोध किया कि वह अपना पीएनआर या यूटीएस नंबर और मोबाइल नंबर निजी संदेश (DM) के जरिए साझा करे, ताकि मामले में तत्काल कार्रवाई की जा सके। रेलवे ने शिकायत दर्ज कराने के लिए RailMadad पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 139 का विकल्प भी बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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बलात्कार का ओरोप लगने के बाद भी अभिषेक पोरेल बंगाल रणजी टीम में शामिल

abhishek porel

बलात्कार के मामले में जमानत पर चल रहे पश्चिम बंगाल के बल्लेबाज और दिल्ली कैपिटल्स के सलामी बल्लेबाज अभिषेक पोरेल को बंगाल की अभिमन्यू ईश्वरन की अगुवाई वाली रणजी टीम में शामिल कर लिया गया है।अभिषेक पोरेल को हुगली पुलिस ने मेडिकल छात्रा को शादी का झांसा देकर  बलात्कार करने का आरोप लगा है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक भारतीय न्याय संहिता के कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें धारा 69 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम  के तहत भी केस दर्ज हुआ है।

गौरतलब है कि एक मेडिकल छात्रा न 23 जून को मोगरा पुलिस स्टेशन में अभिषेक पोरेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि वह 3.5 साल तक संबंध में थे और शादी करने की योजना बना रहे थे लेकिन वह अपनी बात से मुकर गए।

बंगाल का सत्र का पहला मुकाबला कोलकाता के प्रतिष्ठित ईडन गार्डन्स से कल्याणी स्थानांतरित कर दिया गया है। ईडन गार्डन्स में 10 अक्टूबर को महालया से शुरू होने वाले दुर्गा पूजा उत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे।

टीम में भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार और वापसी की कोशिश कर रहे आकाश दीप को भी शामिल किया गया है। आकाश दीप न्यूजीलैंड दौरे से पहले अपनी फिटनेस और फॉर्म साबित करने के लिए मैदान पर उतरेंगे।

बंगाल और दिल्ली एलीट ग्रुप सी में गुजरात, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा और सर्विसेज के साथ शामिल हैं।

बंगाल टीम: अभिमन्यु ईश्वरन (कप्तान), सुदीप कुमार घरामी, सुदीप चटर्जी, अभिषेक पोरेल, अंकुर पॉल, सुमंत गुप्ता, अंकित शुक्ला, शुभम चटर्जी, मोहम्मद शमी, आकाश दीप, मुकेश कुमार, सूरज सिंधू जायसवाल, प्रदीप्त प्रमाणिक, आमिर गनी, मोहम्मद कैफ, सौम्यदीप मंडल।

स्टैंडबाय: करण लाल, अखिलेश यादव, गीत पुरी, अभिषेक रमन, शुभम सरकार, सुमित मोहंता, आदित्य पुरोहित।

Project Rhino: प्रोजेक्ट चीता के बाद अब देश में शुरू होगा प्रोजेक्ट राइनो, वर्ल्ड राइनो डे पर पीएम मोदी ने किया ऐलान

Project Rhino: प्रोजेक्ट चीता के चार साल बाद और इसकी सफलता के बाद देश में एक ओर वन्यजीव संरक्षण अभियान शुरू किया जा रहा है। प्रोजेक्ट चीता की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसके बाद अब एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए एक बार फिर पीएम ने प्रोजेक्ट राइनो की घोषणा की है। आज विश्व गैंडा दिवस पर प्रधानमंत्री ने इस प्रोजेक्ट को शुरू करने का ऐलान किया। इस प्रोग्राम का मकसद एक सींग वाले बड़े गैंडों की सुरक्षा, रहने और फलने-फूलने की पर्याप्त व्यवस्था और संरक्षण के लिए रेंज राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देना है।

पीएम मोदी ने एक्स पर की घोषणा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की गैंडों के संरक्षण की पहल की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “देश में प्रजातियों के संरक्षण को आगे बढ़ाते हुए, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रेंज राज्यों को सुरक्षा, हैबिटैट मैनेजमेंट, जेनेटिक सुधार और पॉपुलेशन डायनामिक्स समझने के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद देने के लिए प्रोजेक्ट राइनो शुरू किया गया है।”

प्रधानमंत्री ने गैंडों की लोकप्रिय प्रजाति के लिए खुशी जताई और वन्यजीव सुरक्षा में सबसे आगे रहने वाले वनकर्मियों और कंजर्वेशनिस्ट की लगातार कोशिशों की तारीफ की। PM मोदी ने अपने पोस्ट लिखा, “वर्ल्ड राइनो डे पर, हम शानदार एक सींग वाले बड़े गैंडे का जश्न मनाते हैं और इसकी सुरक्षा में सबसे आगे रहने वाले सभी लोगों की तारीफ करते हैं।” प्रधानमंत्री ने दुनिया भर में गैंडों के संरक्षण में असम की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “असम में अब दुनिया की लगभग 80% गैंडों की आबादी है और गैंडों के शिकार को खत्म करने के लिए काजीरंगा की कोशिशों की बहुत तारीफ हुई है।”

एक्स पर पोस्ट अपने संदेश में पीएम ने ने दूसरे भारतीय राज्यों में गैंडों के संरक्षण और उनकी प्रजाति को लाने में हुई तरक्की पर भी जोर दिया। साथ ही, उन्होंन उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सफल कोशिशों की ओर इशारा किया। उन्होंने आगे कहा, “एक तरफ, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गैंडे या तो वापस आ गए हैं या पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूसरी ओर, दुधवा (उत्तर प्रदेश) में गैंडों को फिर से लाने की सफलता इतिहास बना रही है। यह दिखाता है कि हमारे लोग जानवरों की सुरक्षा और रेंज वाले राज्यों में सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन के लिए कितना प्रतिबद्ध हैं।”

यह प्रोजेक्ट भारत के वन्यजीव प्रबंधन ढांचे को मजबूत बनाता है और उसे विस्तार देता है। यह असम पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के दुधवा में सफल एक सींग वाले गैंडों के पुन: दाखिल होने के प्रोग्राम सहित रेंज राज्यों में सफल संरक्षण पहलों पर आगे बढ़ता है।

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असम की बाढ़ से बचाई 6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga

असम की बाढ़ से बचाई  6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga

महीने की कमाई भले ही सिर्फ़ ₹1500 थी, लेकिन उनका दिल हर दिन बेजुबानों के लिए धड़कता था। Tip में मिले थोड़े-से पैसों से भी वो इन बेजुबानों का ख्याल रखते थे— क्योंकि उनके लिए हर जान अनमोल थी।
आज वही जुनून 6000+ जानें बचा चुका है। शायद इसी को कहते हैं—कम साधनों में भी बड़ा दिल रखना।
बेजुबानों के इस फ़रिश्ते की कहानी ज़रूर देखें और शेयर करें, ताकि इनकी इंसानियत की मिसाल और लोगों तक पहुँच सके।
@manojgogoiwildlife

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असम की बाढ़ से बचाई 6000+ बेजुबानों की जान | Manoj Gogoi | 6000+ Animals Rescued | Assam Kaziranga | Assam Flood

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हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते… हर्ष गोयनका की पोस्ट ने छेड़ी बहस, क्यों चर्चा में है ये मशहूर नेशनल पार्क, क्या करने जा रही सरकार?

Kaziranga National Park: असम सरकार अगले दो महीनों में केंद्र सरकार से काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की मौजूदा 10 किलोमीटर की डिफॉल्ट सीमा को घटाकर 1 किलोमीटर करने की मांग करने की योजना बना रही है। ‘असम ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि इस कदम का मकसद नेशनल पार्क के पास, जिसमें बोकाखाट भी शामिल है, विकास परियोजनाओं पर लगी उन पाबंदियों को हटाना है जिन्हें राज्य सरकार अनावश्यक मानती है।

शर्मा ने कहा, “बोकाखाट में विकास से जुड़ी कई चुनौतियां हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं, जिनमें स्टेडियम का निर्माण, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार और अन्य अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर शुरुआती बातचीत पहले ही हो चुकी है। काजीरंगा को अंतिम ESZ नोटिफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार केंद्र के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी।

उन्होंने आगे कहा, “चूंकि काजीरंगा के लिए अभी तक अंतिम नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए डिफॉल्ट रूप से इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का है। नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम वैज्ञानिक रूप से तय 1 किलोमीटर के इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव रखेंगे।”

शर्मा ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव से बोकाखाट में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही काजीरंगा के वन्यजीवों और पर्यावरण का संरक्षण भी जारी रहेगा।

पर्यावरणविदों ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया?

वहीं, पर्यावरणविदों ने असम सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट, काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को कम करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सुरक्षित बफर जोन को कम करने से पार्क पर दबाव बढ़ सकता है और वहां के वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पार्क और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर विकास की अनुमति दी जानी चाहिए।

गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने The Federal को बताया कि ESZ (इको-सेंसिटिव जोन) को कम करने से काजीरंगा में वन्यजीवों, खासकर एक सींग वाले गैंडे के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जिसे असम का प्रतीक माना जाता है।

धेकियाजुली के एक और पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने कहा कि प्रस्तावित कटौती इको-सेंसिटिव जोन पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के खिलाफ भी हो सकती है। नाथ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो अहम बातों पर आधारित था – जानवरों को प्रजनन के लिए पर्याप्त जगह देना और उन घास के मैदानों की रक्षा करना जो उनके लिए भोजन का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार ESZ का दायरा कम करती है, तो घास के मैदान कम हो जाएंगे और जानवरों की संख्या भी घट जाएगी। अगर वे इस कदम को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।”

‘दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते…’

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, “असम एक स्टेडियम और दूसरे विकास कार्यों के लिए काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करना चाहता है। लेकिन हर मॉनसून में बाढ़ के कारण हाथी और गैंडे इन्हीं रास्तों से ऊंचे इलाकों की ओर जाने को मजबूर होते हैं।”

उन्होंने कहा, आइए स्टेडियम कहीं और बनाएं, क्योंकि हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर लंबे समय से अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी कहा था कि असम सरकार की ओर से केंद्र को न तो ESZ की अंतिम अधिसूचना भेजी गई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा गया है। नतीजतन, 10 किलोमीटर के दायरे वाला नियम अभी भी लागू है।

वहीं, असम सरकार का कहना है कि मौजूदा 10 किलोमीटर के जोन की वजह से बोकाखाट में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास रुका हुआ है। इन पाबंदियों के कारण कई प्रोजेक्ट्स, जिनमें एक आधुनिक स्टेडियम और दूसरे नागरिक विकास के काम शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

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Cabinet Decisions: गुवाहाटी से तेजपुर के बीच बनेगा शानदार 4-लेन हाईवे, कैबिनेट ने दी 8970 करोड़ रुपये की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने गुरुवार को असम में NH-15 के 135.871 किलोमीटर लंबे, 4-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट NH(O) के तहत कुल 8970.20 करोड़ रुपये की लागत से ‘बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (BOT) टोल मोड पर विकसित किया जाएगा।

CCEA के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में तेजपुर बाईपास पर एक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) (4.9 किमी) का निर्माण शामिल है। इसे भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया गया है। इस कॉरिडोर के बनने से ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले मौजूदा NH-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

बनाए जाएंगे 5 बड़े बाईपास

इस प्रोजेक्ट के तहत 58.7 किलोमीटर लंबे 5 बड़े बाईपास भी बनाए जाएंगे। इससे घनी आबादी वाले इलाकों जैसे बाईहाटा चारियाली, सिपाझार, खरुपेटिया, डेकीयाजुली और तेजपुर में जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और 1 हाथी अंडरपास (तेजपुर बाईपास पर) बनाने का प्रावधान है। ट्रैफिक की आवाजाही बनाए रखने के लिए प्रोजेक्ट के तहत 46 अंडरपास, 19 फ्लाईओवर और 210 किलोमीटर सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, क्योंकि इस प्रोजेक्ट को एक्सेस-कंट्रोल्ड (सीमित प्रवेश-निकास वाली सड़क) के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव है।

सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन की होगी बचत

CCEA ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाहनों की औसत रफ्तार करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, ईंधन की बचत होगी और वाहनों के संचालन पर आने वाला खर्च भी कम होगा। इससे क्षेत्र में आवाजाही आसान होगी और आर्थिक व सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

औद्योगिक पार्क, पर्यटन स्थल और लॉजिस्टिक हब से जुड़ेगा कॉरिडोर

इसके अलावा, अपग्रेड किए जाने वाले इस कॉरिडोर से PM गति शक्ति योजना के तहत चिन्हित 8 आर्थिक केंद्रों (8 इंडस्ट्रियल पार्कों), 2 सामाजिक केंद्रों (असम के आकांक्षी जिले दरांग और उदलगुड़ी), 3 पर्यटन स्थलों (मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा नेशनल पार्क और ओरांग नेशनल पार्क) और 7 लॉजिस्टिक केंद्रों (3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 एयरपोर्ट और 2 जलमार्ग टर्मिनल) तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

इससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज और आसान होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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Renault Kiger discounts go up to Rs 68,000 in August 2026

2026 Renault Kwid showroom shot

Renault has announced various discount schemes for customers in August 2026, including cash offers, exchange or scrappage incentives, and corporate benefits. All Renault models (except the Duster) are available this month with a discount. The benefits mentioned here are applicable for bookings made between August 1 and August 31, 2026.

  • Kiger gets highest discounts; Kwid gets the lowest
  • Kiger and Triber offered with loyalty and corporate benefits

Disclaimer: Offers/benefits may vary by city and are subject to stock availability. Buyers are advised to check with their local dealer for exact figures.

Renault Kiger offers in August 2026

Benefits up to Rs 68,000

Renault Kiger front quarter

Depending on the trim level, the 2026 Renault Kiger is being offered with benefits of up to Rs 68,000 across India (except Kerala and Gujarat). This includes a cash discount of Rs 20,000, exchange or scrappage benefits of up to Rs 25,000 and loyalty incentives worth up to Rs 18,000. There’s also a corporate discount of Rs 5,000.

For those residing in Kerala and Gujarat, the loyalty benefit and corporate discount remain the same but cash offers and exchange incentives can now be up to Rs 50,000 each. The price of the Renault Kiger is between Rs 5.81 lakh and Rs 10.40 lakh.

Renault Triber offers in August 2026

Benefits up to Rs 60,000

Apart from Kerala and Gujarat, the 2026 Renault Triber MPV is available with benefits amounting to Rs 60,000. Buyers will be offered a cash discount of Rs 15,000, scrappage incentives worth up to Rs 25,000 or an exchange offer of Rs 15,000, and a corporate discount of Rs 5,000.

Renault Triber front quarter

While the scrappage and corporate offers are unchanged, residents of Kerala and Gujarat get cash discounts of up to Rs 30,000 and exchange benefits worth up to Rs 30,000. The 2026 Renault Triber is priced from Rs 5.81 lakh to Rs 8.53 lakh.

Renault Kwid offers in August 2026

Benefits up to Rs 40,000

Renault Kwid rear quarter

The 2026 Renault Kwid is being offered with a cash discount of up to Rs 15,000 and a scrappage incentive worth up to Rs 25,000 in most states in India. However, this offer is not applicable for buyers in Kerala, Assam, Karnataka, Odisha, Uttarakhand, Telangana, Chhattisgarh, Arunachal Pradesh and Andhra Pradesh. Buyers here can get the Kwid with cash discounts amounting to up to Rs 30,000, while the scrappage benefit remains unchanged. The 2026 Renault Kwid is priced between Rs 4.53 lakh and Rs 5.61 lakh.

All prices are ex-showroom, India.

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Viral Video: पेट दर्द की वजह से सोया था वेंडर, किसी ने चुरा ली पूरी कमाई और आइसक्रीम, फिर अजनबी ने बना दिया उसका दिन

सोशल मीडिया पर आए दिन कोई ना कोई वीडियो वायरल होते रहता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। असम में एक आइसक्रीम बेचने वाले के पेट में तेज दर्द होने की वजह से वह अपनी रेहड़ी के पास कुछ देर आराम करने के लिए लेट गया। जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि उसकी रेहड़ी से पूरी आइसक्रीम का सामान और उसके पास रखी नकदी चोरी हो चुकी थी। इस घटना के बाद वह व्यक्ति काफी इमोशनल हो गया था। वहीं विक्रेता की कहानी सुनकर एक युवक ने न सिर्फ उसकी आर्थिक मदद की, बल्कि उसके परिवार के लिए जरूरी राशन भी खरीदकर दिया। सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहा वीडियो

इस घटना का वीडियो पंकज गोगोई ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वह सड़क किनारे अपनी आइसक्रीम की रेहड़ी के पास बैठे एक परेशान दुकानदार से बात करते नजर आते हैं। बातचीत के दौरान दुकानदार ने बताया कि, उसके पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हो गया था। इसी वजह से वह कुछ देर आराम करने के लिए अपनी रेहड़ी के पास ही लेट गया था। जब दुकानदार की आंख खुली तो उसने देखा कि उसकी रेहड़ी से आइसक्रीम का सामान और करीब 500 रुपये नकद गायब थे। चोरी की बात बताते हुए वह इमोशनल हो गया। व्यक्ति को इस बात की चिंता थी कि अब वह अपने परिवार और बच्चों के लिए खाने का इंतजाम कैसे करेगा।

आइसक्रीम बेचने वाले की मदद की

दुकानदार की परेशानी देखकर पंकज गोगोई ने तुरंत उसकी मदद करने का फैसला किया। सबसे पहले उन्होंने उसके लिए खाना खरीदा, ताकि उसे तुरंत राहत मिल सके। इसके बाद वह उसे पास की किराने की दुकान पर ले गए और चावल, दूध, बिस्कुट समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदकर दिया। उनके इस मददगार कदम की सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है। वीडियो के आखिर में पंकज गोगोई ने इस चोरी की घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मेहनत और ईमानदारी से कमाने वाले व्यक्ति को निशाना बनाना बेहद गलत है। ऐसे लोगों के साथ इंसानियत का व्यवहार होना चाहिए।

 

यूजर ने किया कमेंट

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोगों का कहना है कि मुश्किल समय में की गई छोटी-सी मदद भी किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है। एक यूजर ने लिखा,”आइसक्रीम बेचकर 500 रुपये कमाना आसान नहीं है। शायद यह उसकी पूरे दिन की कमाई रही होगी। उसकी मदद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।” एक और यूजर ने कमेंट किया, “भाई, तुम्हारे इस काम के लिए दिल से सम्मान। आइए, हम सब एक-दूसरे के प्रति दयालु रहें और ऐसे अच्छे काम करते रहें।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “कुछ लोगों को यह समझ नहीं आता कि उनके किए गए काम से किसी दूसरे की ज़िंदगी पर कितना बुरा असर पड़ सकता है। ये लोग पूरे दिन कड़ी धूप में मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। कृपया उनकी मेहनत पर पानी मत फेरिए और इंसानियत दिखाइए।”

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले सख्ती, DJ, हथियार और नॉन-वेज पर रोक, जानें नए नियम और ट्रैफिक एडवाइजरी

Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के बॉर्डर वाले जिलों की पुलिस ने तीर्थ मार्गों पर बहुत बड़े DJ सेटअप, हथियारों और मांसाहारी दुकानों पर रोक लगा दी है। इसी बीच, मेरठ के NH-58 पर नए डायवर्जन के कारण संकरे हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबे जाम की स्थिति बन गई है।

बता दें कि यह धार्मिक यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि तक चलती है। इसमें लाखों कांवड़िये पैदल या गाड़ियों से हरिद्वार और गंगोत्री जैसी जगहों पर गंगाजल लेने जाते हैं और फिर वापस आकर उसे स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं।

वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बागपत, आगरा और दिल्ली से सटे जिलों की पुलिस ने कई इंतजाम किए हैं। इनमें रूट डायवर्जन, अलग पार्किंग जोन और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक शामिल है। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा मार्गों पर मौजूद खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा जांच भी की जा रही है।

इस साल क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
यात्रा के दौरान हमेशा अपना पहचान पत्र (ID Proof) साथ रखें।हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडा, तलवार या किसी भी तरह का हथियार साथ न रखें।
केवल प्रशासन द्वारा तय कांवड़ मार्ग का ही इस्तेमाल करें।दोपहिया वाहन पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल न करें।
बागपत: कांवड़/DJ की ऊंचाई 10 फीट, चौड़ाई 12 फीट से कम रखें और आवाज 75 डेसिबल से ज्यादा न हो।कांवड़ मार्ग के भोजनालयों में नॉन-वेज, प्याज और लहसुन का सेवन या परोसना प्रतिबंधित है।
आगरा: कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से कम रखें और DJ तय मानकों के अनुसार ही बजाएं।कांवड़ मार्ग और मंदिरों के आसपास मांस की दुकानें बंद रहेंगी।
शिविर (कैंप) आयोजक CCTV, अग्नि सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें।ढाबों और होटल में खाना या पानी खरीदने से पहले रेट लिस्ट जरूर देखें, तय कीमत से ज्यादा भुगतान न करें।

अलग-अलग शहरों में DJ और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर क्या नियम हैं?

बागपत पुलिस ने कांवड़ और DJ सेटअप की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तक सीमित कर दी है, साथ ही DJ और दूसरे सिस्टम के लिए आवाज का लेवल 75 डेसिबल तक ही रखने का नियम बनाया है। हथियार – जैसे हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडे या तलवार लेकर कांवड़ ले जाने की इजाजत नहीं होगी, और दो-पहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

आगरा में, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अलग कोऑर्डिनेशन मीटिंग में कांवड़ की ऊंचाई की सीमा 12 फीट तय की गई और DJ की आवाज तय नियमों के दायरे में रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में कांवड़ रूट और मंदिरों के आस-पास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, खाद्य विभाग की टीमें ढाबों और होटलों की जांच करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वहां रेट लिस्ट लगी हो।

कहां लग रहा है सबसे ज्यादा जाम?

फिलहाल, सबसे ज्यादा बुरा हाल मेरठ के पास हस्तिनापुर-चांदपुर रास्ते का है। 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच NH-58 पर भारी गाड़ियों के चलने पर रोक होने के कारण, ट्रकों को हस्तिनापुर के खादर (नदी के किनारे वाले इलाके) से होकर इस संकरी सड़क पर भेजा जा रहा है। इससे गाड़ियों की लंबी लाइनें लग रही हैं और दिन भर लगभग लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता पहले से ही खराब हालत में था। अब कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़े ट्रैफिक ने परेशानी और बढ़ा दी है।

लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है, क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान और व्यापारी घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं।

किन शहरों में लागू किए गए हैं रूट डायवर्जन?

शहर/मार्गक्या बदलाव किए गए हैं?
मेरठ (NH-58)28 जुलाई से 10 अगस्त तक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ट्रकों को हस्तिनापुर खादर-चांदपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जिससे इस रूट पर जाम की स्थिति बन सकती है।
मुजफ्फरनगर (NH-58)29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि उसके बाद दोनों लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।
हरिद्वारसहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून-ऋषिकेश मार्गवाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू और लालजीवाला पार्किंग भेजा जाएगा। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
दिल्ली से सटे जिलेमेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस के साथ संयुक्त समन्वय किया गया है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।

रास्ते में खाने-पीने की जगहों के लिए क्या नियम हैं?

अधिकारियों के मुताबिक, फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने यात्रा के रास्तों पर पड़ने वाले होटलों और ढाबों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अकेले हापुड़ में ही ऐसे लगभग 130 होटल और ढाबे हैं।

मुजफ्फरनगर में, असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) अर्चना धीरन ने PTI को बताया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम हर साल लागू किया जाता है और छह टीमें बासी खाने की जांच करती हैं।

इसके अलावा, यात्रियों से अधिक कीमत न वसूला जाए इसके लिए 21 जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम भी तय कर दिए हैं। साथ ही, खाने-पीने की जगहों पर मालिक की जानकारी, लाइसेंस और फूड-सेफ्टी QR कोड दिखाना जरूरी होगा। वहीं, खाना बनाने वाले कर्मचारियों के लिए दस्ताने (ग्लव्स) पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

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NEET Protest: सरकार से बातचीत के बाद CJP का बयान- ‘किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा’

NEET Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा है कि उसे सरकार के प्रतिनिधियों से नया आश्वासन मिला है। इसके अनुसार, आने वाले समय में बीजेपी/NDA शासित कुछ और राज्य NEET-UG प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं। यह जानकारी उस समय सामने आई, जब इससे कुछ घंटे पहले CJP ने कहा था कि वह प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर हुए “समझौते के उल्लंघन” के विरोध में दोबारा सड़कों पर उतर सकता है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रात करीब 1 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक करीब तीन घंटे तक चली।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने बिहार और असम सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन की कॉपी दिखाई, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने केंद्र और बीजेपी/NDA शासित दूसरे राज्यों से भी ऐसे ही नोटिफिकेशन जारी करने के अपने वादे को दोहराया है।

सौरभ दास ने कहा, “उम्मीद है कि जो भाषा और शर्तें तय हुई हैं, उन्हें ही इस्तेमाल किया जाएगा। कोई भी प्रदर्शनकारी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। हम सभी एक साथ हैं।”

सोमवार को CJP ने दी थी सख्त चेतावनी

यह देर रात किया गया पोस्ट CJP की ओर से सोमवार को दी गई सख्त चेतावनी के बाद आया। उस समय CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले प्रदर्शन के खत्म होने के बाद सरकार के साथ हुए समझौते के बावजूद कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को अभी भी गिरफ्तारी, निगरानी और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

आशुतोष रांका ने कहा, “हम देख रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली में वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा है या परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने सभी FIR तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और इस बात की गारंटी देने की मांग की कि कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर आंदोलन फिर से अपना विरोध शुरू कर देगा।

जल्द जारी होंगे अन्य राज्यों में नोटिफिकेशन

वहीं, सौरव दास ने कहा कि CJP के लोगों ने चिंता जताई थी कि बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों को शायद जमीनी स्तर पर लागू न किया जाए। उन्होंने बताया कि सरकारी प्रतिनिधियों ने बिहार के गृह विभाग का नोटिफिकेशन दिखाकर जवाब दिया और भरोसा दिलाया कि जल्द ही दूसरी जगहों पर भी ऐसी ही गारंटी जारी की जाएगी।

सौरव दास ने कहा, “सरकार ने गारंटी दी है कि अलग-अलग राज्यों में हमारी चिंताओं को दूर करने वाले नोटिफिकेशन कल तक जारी कर दिए जाएंगे और प्रदर्शनकारी सुरक्षित रहेंगे। भविष्य में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन को एक अलग आश्वासन मिला है कि राजस्थान में अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।

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