कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

-हरिशंकर मिश्र

Kanwar Yatra social harmony: किसी भी समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता का वातावरण तब स्वतः निर्मित होता है, जब व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर भक्ति का पथ अपनाता है। कांवड़ यात्रा इसी सत्य का सजीव प्रतीक है। मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की यह एक विराट यात्रा है जिसमें जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक भेदभाव गौण हो जाते हैं। कांवड़ यात्रा हमारे लिए यह बड़ी सीख भी है कि सामाजिक समरसता किसी उपदेश से नहीं, बल्कि साझा आस्था, सहभागिता और परस्पर सम्मान से विकसित होती है और इसे वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप में देखा भी जा सकता है जबकि एक साथ हजारों लोग कंधे पर गंगाजल लिए शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

विविधताओं के बीच एकात्मता का यह दृश्य इस सावन में जीवंत हो उठा है। प्रेम, सेवा, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर टिकी हुई यह श्रद्धा यात्रा वह आध्यात्मिक शक्ति है जो लोगों को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ती है। इस सामूहिक अनुशासन के पीछे एक साक्षा पहचान है-भोला। यानि वह संज्ञा जो मनुष्य को शिव से एकाकार करती है।

 

‘भोला’ कोई साधारण संबोधन नहीं है। यह बराबरी का संवाद है। कांवड़ उठाते ही श्रद्धालु का नाम, उसका कुल, उसकी आर्थिक हैसियत गौण हो जाती है। सड़क किनारे सेवा शिविर में एक करोड़पति व्यापारी का बेटा और एक दिहाड़ी मजदूर का बेटा एक ही पंगत में बैठकर बराबरी से भोजन करते हैं। यह सिर्फ भूख मिटाना भर नहीं हैं। यह सदियों पुरानी सामाजिक दूरियों को पाटने का एक मौन प्रयास है और आस्था की स्वाभाविक शक्ति से यह भाव जन्म लेता है।

 

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सामाजिक आयाम को गहराई से समझा है और यही कारण है कि कांवड़ यात्रा को व्यवस्थागत समर्थन लगातार दिया जा रहा है। योगी सरकार की दृष्टि में यह यात्रा ऐसा सामाजिक अवसर है जहां समाज अपने भीतर की खाइयों को स्वयं पाटने का काम करता है। सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था, यह सब एक तरह से सामाजिक समरसता के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास है।

 

इस समरसता का एक और भावनात्मक पक्ष हिंदू-मुस्लिम सहभागिता के रूप में दिखाई देता है। बरेली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली के कई कस्बों में कांवड़ बनाने का काम पीढ़ियों से मुस्लिम कारीगरों के हाथों में रहा है। बांस को मोड़ना, रंगीन कागज और कपड़े से सजावट करना, घंटियां टांकना, यह हुनर उन परिवारों की जीविका का हिस्सा है, जो साल भर सावन का इंतजार करते हैं। उम्मीद के इस भाव के साथ कि सावन आए और उनकी कारीगरी किसी शिवभक्त के कंधे की शोभा बने। यह भारतीय समाज की उस गहरी बुनावट का प्रमाण है, जहां श्रद्धा और आजीविका एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

Kanwar Yatra UP 2026

यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता के अन्य बिंदु भी देखने को मिलते हैं। कई कस्बों में मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर कांवड़ियों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था करते हैं। कुछ जगहों पर मस्जिद परिसर में थके यात्रियों को विश्राम की अनुमति दी जाती है। यात्रा के दौरान उभरने वाली यह सहजता दिखाती है कि आस्था और मानवता, राजनीतिक विमर्श से कहीं गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिर भी कुछ लोग प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह समरसता समाज में स्थायी छाप भी छोड़ जाती है? इसका उत्तर है कि मानव मन स्मृतियों से बनता है और हम अपनी यात्रा के अनुभव कभी नहीं भूलते। यात्रा के अनुभव समाज की सामूहिक चेतना में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। सामाजिक बदलाव ऐसे ही संचित अनुभवों से आता है, थोड़ा धीमे-धीमे, लेकिन निश्चित रूप से।

 

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो भी कांवड़ यात्रा हमें समरसता से ओतप्रोत करती है। शिव स्वयं समरसता के प्रतीक हैं। वह श्मशान में विराजते हैं और कैलाश पर भी, वह भस्म रमाते हैं और चंद्रमा भी धारण करते हैं, उनके गले में सर्प है और जटाओं से गंगा प्रवाहित होती है। शिव को विरोधाभासों का देवता कहा जाता है। वह कल्याण भी करते हैं और विध्वंस भी। कांवड़िया जब अपने कलश में गंगाजल भरता है, तब उसे अहसास होता है कि उसके भीतर की सारी भिन्नताएं उस जल में समाहित हो रही हैं। इसके बाद उसके शरीर के साथ ही उसकी आत्मा भी यात्रा करती है। वह आत्मा जो किसी जाति, किसी वर्ग, किसी संप्रदाय को नहीं जानती।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि शिक्षा, आर्थिक अवसर, न्यायसंगत नीतियां और निरंतर सामाजिक संवाद, यह सब मिलकर परिवर्तन लाते हैं, लेकिन कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन वह भूमि तैयार करते हैं, जिस पर बड़े सामाजिक परिवर्तन के बीज बोए जा सकते हैं। योगी सरकार में इस यात्रा के लिए जो प्रतिबद्धता दिखाई देती है, उसके मूल में यही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके लिए सारी व्यवस्थाएं पूरी कर एक तरह से गहरा सामाजिक निवेश करते हैं, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा। 

 

वस्तुतः समरसता एक ऐसा अनुभव है, जिसे जीना पड़ता है, बांटना पड़ता है, कंधे पर उठाना पड़ता है। यह यात्रा हर वर्ष याद दिलाती है कि विभाजन की रेखाएं मनुष्य की बनाई हुई हैं, जबकि साझी श्रद्धा, साझी प्यास, साझी थकान और साझा विश्राम, यह सब हमारी सामाजिक एकता के प्रमाण हैं। ‘बोल बम’ की गूंज केवल शिव का आह्वान नहीं, बल्कि उस समाज का आह्वान भी है जो अपने भीतर एकत्व, समरसता और आत्मबोध की चाह रखता है।

 

यह उद्घोष हमें स्मरण कराता है कि शिव अंतर्मन में विद्यमान उस चेतना के प्रतीक हैं जो भेदभाव से ऊपर उठकर समता, करुणा और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करती है। अहंकार, स्वार्थ और विकारों का परित्याग करने को प्रेरित करती है। जब मन निर्मल हो, व्यवहार करुणामय हो और जीवन लोककल्याण के संकल्प से जुड़ जाए, तभी शिव की उपासना पूर्ण होती है। यही ‘बोल बम’ का सनातन संदेश है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

 

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रहेंगे ‘नमो भारत’ के ये 17 स्टेशन, इन राज्यों में स्कूल भी बंद, जानिए रूट समेत सभी बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने बताया है कि कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद और मोदीनगर के बीच 17 ‘नमो भारत’ स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट चार से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इन स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी सीमित रहेगी। NCRTC ने बताया कि वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।

निगम के अनुसार, प्रभावित स्टेशनों में मोदीनगर, मेरठ नॉर्थ, एमईएस कॉलोनी, बेगमपुल, भैंसाली, मेरठ सेंट्रल, ब्रह्मपुरी, शताब्दी नगर, रिठानी, परतापुर, मेरठ साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर और गाजियाबाद शामिल हैं। NCRTC ने बताया कि अधिकतर स्टेशनों पर इस अवधि के दौरान गेट संख्या-2 बंद रहेगा। बयान के मुताबिक, बेगमपुल स्टेशन पर गेट संख्या-2 और 3, जबकि दुहाई स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 4 बंद रहेंगे। गाजियाबाद स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 5 बंद रहेंगे।

पार्किंग भी बंद

इन स्टेशनों के प्रभावित हिस्से की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। एनसीआरटीसी ने यात्रियों को नमो भारत सेवाओं का उपयोग करने के लिए संबंधित स्टेशनों पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रवेश और निकास द्वारों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। निगम ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया।

निगम ने कहा कि सरायकाले खां-मोदीनगर कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। बयान के मुताबिक, 14 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक ट्रेनें आठ मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इस साल कांवड़ यात्रा पवित्र श्रावण मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त को समाप्त होगी।

स्कूल-कॉलेज 12 अगस्त तक बंद रहेंगे

श्रावण मास की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद जिलों में शिक्षण संस्थान 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। मेरठ में जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह के आदेश के अनुसार यह अवकाश 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके अनुसार सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

प्रशासन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए लिया गया है, क्योंकि श्रावण शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से गुजरते हैं। मेरठ प्रशासन के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षण संस्थान, जिनमें बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से जुड़े संस्थान शामिल हैं, 12 अगस्त तक बंद रहेंगे।

इसके अनुसार सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी इस दौरान क्लास बंद रखने का निर्देश दिया गया है। गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूल के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चार अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया।

इस बीच, बागपत प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए तीन अगस्त से 12 अगस्त तक कक्षा एक से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर जाते हुए बागपत से गुज़र रहे हैं। जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ‘जलाभिषेक’ के लिए जिले के प्रमुख शिवमंदिरों में भी जा रहे हैं, जिससे कांवड़ रूट और आस-पास के इलाकों में भारी ट्रैफिक हो रहा है।

कब शुरू हुई कांवड़ यात्रा?

भगवान शिव के पवित्र माह सावन के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचेगी। इसी दिन श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसी के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

कहां से लाया जाता है गंगाजल?

कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री गंगाजल लेने के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से भोलेनाथ के श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने मंजिल की ओर रवाना होते हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई प्रमुख शिवधामों में भी दर्शन-पूजन करते हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने व्यापक ट्रैफिक में बदलाव किया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर जुलाई के अंतिम सप्ताह से भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रा के चरम दिनों में कई रूट केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। जबकि अन्य वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा रूट को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। हजारों CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष गश्ती दलों की तैनाती की गई है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कांवड़ और डीजे सिस्टम की ऊंचाई को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करने की अपील की है।

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश

-प्रोफेसर डॉ. कमलेश 'कौन्तेय' 

Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

 

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

Kanwar Yatra UP 2026

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है। यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

12 अगस्त तक नहीं खुलेंगे स्कूल-कॉलेज! कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी के इन जिलों में प्रशासन का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों ने दोनों जिलों के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य इंस्टिट्यूट संस्थान को 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया है। ये फैसला छात्रों की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए लिया गया है। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु कई पवित्र जगहों से गंगाजल लेकर पैदल शिव मंदिरों तक जाते हैं। आइए जानते हैं कहां-कहां पर बंद होगे स्कूल और कॉलेज

12 अगस्त तक बंद होंगे स्कूल-कॉलेज

मेरठ में जिला अधिकारी वी.के. सिंह के निर्देश पर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद, यूपी बोर्ड, सीबीएसई, सीआईएससीई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्डों से जुड़े स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा सभी सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानों में भी इस अवधि के दौरान नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी।

प्रशासन ने कहा कि, सावन शिवरात्रि के अवसर पर जिले से बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों के गुजरने की संभावना है। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा बनाए रखने और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए ये फैसला लिया गया है।

गाजियाबाद में कब तक बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को 4 अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, ये आदेश बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्डों से जुड़े सभी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिले के विभिन्न मार्गों पर बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो चुकी है। ऐसे में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के निर्देश पर छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

निर्देशों का सख्ती से हो पालन

गाजियाबाद प्रशासन ने बताया कि, पहले से निर्धारित किसी भी पाठ्यक्रम या विषय की परीक्षाएं तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी और उन्हें इस आदेश से बाहर रखा गया है। मेरठ प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिन परीक्षाओं का कार्यक्रम पहले से तय है, वे अपने निर्धारित समय के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी और उन पर स्कूल बंद रहने का आदेश लागू नहीं होगा। वहीं मेरठ और गाजियाबाद दोनों जिलों के अधिकारियों ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और संबंधित विभागों को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है।

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Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

Kanwar Yatra UP 2026

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

 

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है।

यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

 

 

Traffic Diversion: सावन का पहला सोमवार कल, कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली समेत यूपी में ट्रैफिक डायवर्जन, CCTV-ड्रोन से होगी निगरानी

हिंदू धर्म के पवित्र त्योहार सावन के महीने की शुरुआत हो गई है। सावन के महीने में सोमवार को भगवान शिव की पूजा होती है। वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। सावन के पहले सोमवार और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई जगह ट्रैफिक ट्रैफिक डायवर्जन किए गए हैं। वहीं लोगों की सुविधा के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि कांवड़ियों और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

सावन के पहले सोमवार पर शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद रहती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ कम होने के समय मंदिर आने और पुलिस व सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इन जगहों पर किया गया डायवर्जन

कांवड़ यात्रा और सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कई राज्यों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में कुछ रास्तों पर वाहनों का रूट बदला गया है, जबकि कांवड़ियों के लिए कई मार्ग रिजर्व किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है। वहीं, मेरठ सहित कई जिलों में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला भी लिया गया है।

सीसीटीवी से की जाएगी निगरानी

सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। बड़े शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और विशेष सुरक्षा टीमों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। हाल ही में मिली सुरक्षा संबंधी सूचनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रशासन और पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हर-हर महादेव का उद्घोष, कंधों पर आस्था लिए बढ़ चले शिवभक्त

Kanwar Yatra UP 2026

Kanwar Yatra UP 2026: सावन का पहला दिन, न कोई थकान, न कोई चिंता, बस एक ही धुन, एक ही गूंज ‘बम-बम भोले!’। कंधे पर कांवड़, होठों पर जयकारा और मन में एक अटूट विश्वास कि शिव कल्याण करेंगे। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवालयों में घंटियों की गूंज शुरू हो गई और भक्तों की कतारें मंदिरों के बाहर लंबी होती चली गईं।

उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग श्रद्धा-आस्था से प्रकाशमान हो चले हैं। उत्तराखंड की ओर से आनेवाले कांवड़िये यूपी सीमा पर अपने सत्कार से अभिभूत हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज में भी शिवभक्त लंबी यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। सबका भरोसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर है जो हर साल ही उनके लिए हर इंतजाम करती आई है। सरकार ने इस बार भी सेवा और सुरक्षा दोनों के इंतजाम कर रखे हैं। 

कंधे का बोझ नहीं, आस्था का प्रसाद है कांवड़

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, यह त्याग, संयम और समर्पण की एक जीती-जागती मिसाल है। यह तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। रास्ते भर लगे सेवा शिविरों में जैसे ही उनका डेरा पहुंचता है, अनजान हाथ उन्हें पानी का गिलास थमाते हैं। जाति, धर्म और भेद की कोई दीवार नहीं, बस एक ही भाव शेष है, सेवा का भाव। हरिद्वार से 131 लीटर गंगाजल लेकर बागपत की ओर बढ़ रहे कांवड़िया अभिषेक त्यागी की आंखों में गजब की चमक थी। उन्होंने कहा, ‘योगी सरकार ने इस बार कांवड़ यात्रा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा और सेवा शिविरों की उत्कृष्ट व्यवस्था है। पुलिस की मुस्तैदी से श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर रहे हैं। इससे हमारी आस्था की यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बनी है।‘

नन्हे कदमों में अटूट श्रद्धा

इस यात्रा की सबसे मार्मिक तस्वीरें तब सामने आती हैं जब उम्र की सीमाएं भी आस्था के आगे बौनी पड़ जाती हैं। हरियाणा के कैथल निवासी महज 11 वर्ष के एक बालक ने हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल उठाया और अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में जब यह नन्हा शिवभक्त पहुंचा, तो उसका उत्साह देखकर स्थानीय थाना प्रभारी और पुलिसकर्मी स्वयं भी उसके साथ काफी दूरी तक चलते हुए उसका हौसला बढ़ाते नजर आए। यह दृश्य ऐसा लगता है जैसे योगी सरकार इस बालक का नमन कर रही हो। कांवड़ यात्रा पूरे समाज का साझा आस्था का उत्सव बन चुकी है, जिसमें प्रशासन भी भक्ति के रंग में रंग गया है।

सेवा शिविरों में बहती स्नेह की धारा

मार्ग में जगह-जगह लगे सेवा शिविर इस यात्रा की आत्मा हैं। मेरठ के पूठखास गांव में शुरू हुए एक ऐसे ही शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया, जहां कांवड़ियों के लिए भोजन, जल और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे सैकड़ों शिविर पूरे मार्ग पर सजे हैं, जहां स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात सेवा में जुटे हैं। यही निःस्वार्थ सेवा भाव इस यात्रा को केवल एक धार्मिक परंपरा से आगे बढ़ाकर मानवता के एक महान उत्सव में बदला है।

सीमा द्वारों से गुजरते ही होती है अलौकिक अनुभूति

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बने भव्य सीमा द्वार, जिन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। यहां मुख्यमंत्री य़ोगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कांवड़ियों का सत्कार हो रहा है। जैसे ही शिवभक्त इन द्वारों से गुजरते हैं, उनके मन में एक अलौकिक अनुभूति जागृत होती है, मानो पूरा उत्तर प्रदेश ही उनकी अगवानी कर रहा हो। यह क्षण हर कांवड़िए के लिए यात्रा की थकान को भुला देने वाला होता है, जहां आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है।

हर कदम में गूंजता एक ही भाव ‘शिवोहम्’

पंचक काल के चलते भले ही अभी कांवड़ियों की संख्या सीमित हो, लेकिन जो भी भक्त निकल पड़े हैं, उनके कदमों में कोई शिथिलता नहीं। वे जानते हैं कि उनकी यह यात्रा केवल गंगाजल ढोने की नहीं, बल्कि स्वयं को शिव तत्व से जोड़ने की है। हर हर महादेव के जयघोष के बीच, धूल भरे रास्तों पर नंगे पांव चलते ये शिवभक्त असल में यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति में न मौसम की परवाह होती है, न राह की कठिनाई की, बस मन में एक ही भाव होता है, समर्पण का, ‘शिवोहम्’ का। उन्हें किसी बात की चिंता नहीं। जानते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी सुरक्षा सेवा के हर इंतजाम कर रखे हैं।

चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

pracheen-shiv-mandir-baijnath-kangra-himachal-pradesh-1 – Kids Portal For Parents

सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।

Kanwar Yatra : आस्था का सैलाब! ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा यूपी, शिवभक्तों के लिए सेवा-सुरक्षा के खास इंतजाम

सावन का पहला दिन, न कोई थकान, न कोई चिंता, बस एक ही धुन, एक ही गूंज ‘बम-बम भोले!’। कंधे पर कांवड़, होठों पर जयकारा और मन में एक अटूट विश्वास कि शिव कल्याण करेंगे। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवालयों में घंटियों की गूंज शुरू हो गई और भक्तों की कतारें मंदिरों के बाहर लंबी होती चली गईं। उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग श्रद्धा-आस्था से प्रकाशमान हो चले हैं।

उत्तराखंड की ओर से आनेवाले कांवड़िये यूपी सीमा पर अपने सत्कार से अभिभूत हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज में भी शिवभक्त लंबी यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। सबका भरोसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर है जो हर साल ही उनके लिए हर इंतजाम करती आई है। सरकार ने इस बार भी सेवा और सुरक्षा दोनों के इंतजाम कर रखे हैं। 

 

कंधे का बोझ नहीं, आस्था का प्रसाद है कांवड़

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, यह त्याग, संयम और समर्पण की एक जीती-जागती मिसाल है। यह तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। रास्ते भर लगे सेवा शिविरों में जैसे ही उनका डेरा पहुंचता है, अनजान हाथ उन्हें पानी का गिलास थमाते हैं। जाति, धर्म और भेद की कोई दीवार नहीं, बस एक ही भाव शेष है, सेवा का भाव। हरिद्वार से 131 लीटर गंगाजल लेकर बागपत की ओर बढ़ रहे कांवड़िया अभिषेक त्यागी की आंखों में गजब की चमक थी। उन्होंने कहा, ‘योगी सरकार ने इस बार कांवड़ यात्रा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा और सेवा शिविरों की उत्कृष्ट व्यवस्था है। पुलिस की मुस्तैदी से श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर रहे हैं। इससे हमारी आस्था की यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बनी है।‘

 

नन्हे कदमों में अटूट श्रद्धा

इस यात्रा की सबसे मार्मिक तस्वीरें तब सामने आती हैं जब उम्र की सीमाएं भी आस्था के आगे बौनी पड़ जाती हैं। हरियाणा के कैथल निवासी महज 11 वर्ष के एक बालक ने हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल उठाया और अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में जब यह नन्हा शिवभक्त पहुंचा, तो उसका उत्साह देखकर स्थानीय थाना प्रभारी और पुलिसकर्मी स्वयं भी उसके साथ काफी दूरी तक चलते हुए उसका हौसला बढ़ाते नजर आए। यह दृश्य ऐसा लगता है जैसे योगी सरकार इस बालक का नमन कर रही हो। कांवड़ यात्रा पूरे समाज का साझा आस्था का उत्सव बन चुकी है, जिसमें प्रशासन भी भक्ति के रंग में रंग गया है।

 

सेवा शिविरों में बहती स्नेह की धारा

मार्ग में जगह-जगह लगे सेवा शिविर इस यात्रा की आत्मा हैं। मेरठ के पूठखास गांव में शुरू हुए एक ऐसे ही शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया, जहां कांवड़ियों के लिए भोजन, जल और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे सैकड़ों शिविर पूरे मार्ग पर सजे हैं, जहां स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात सेवा में जुटे हैं। यही निःस्वार्थ सेवा भाव इस यात्रा को केवल एक धार्मिक परंपरा से आगे बढ़ाकर मानवता के एक महान उत्सव में बदला है।

 

सीमा द्वारों से गुजरते ही होती है अलौकिक अनुभूति

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बने भव्य सीमा द्वार, जिन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। यहां मुख्यमंत्री य़ोगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कांवड़ियों का सत्कार हो रहा है। जैसे ही शिवभक्त इन द्वारों से गुजरते हैं, उनके मन में एक अलौकिक अनुभूति जागृत होती है, मानो पूरा उत्तर प्रदेश ही उनकी अगवानी कर रहा हो। यह क्षण हर कांवड़िए के लिए यात्रा की थकान को भुला देने वाला होता है, जहां आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है।

 

हर कदम में गूंजता एक ही भाव ‘शिवोहम्’

पंचक काल के चलते भले ही अभी कांवड़ियों की संख्या सीमित हो, लेकिन जो भी भक्त निकल पड़े हैं, उनके कदमों में कोई शिथिलता नहीं। वे जानते हैं कि उनकी यह यात्रा केवल गंगाजल ढोने की नहीं, बल्कि स्वयं को शिव तत्व से जोड़ने की है। हर हर महादेव के जयघोष के बीच, धूल भरे रास्तों पर नंगे पांव चलते ये शिवभक्त असल में यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति में न मौसम की परवाह होती है, न राह की कठिनाई की, बस मन में एक ही भाव होता है, समर्पण का, ‘शिवोहम्’ का। उन्हें किसी बात की चिंता नहीं। जानते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी सुरक्षा सेवा के हर इंतजाम कर रखे हैं।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले दिल्ली में सख्ती! इन रूट पर मीट की दुकानों को बंद करने के आदेश, MCD ने सभी 12 जोन को दिए निर्देश

Kanwar Yatra 2026: श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज यानी गुरुवार (30 जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है। इस दौरान विभिन्न राज्यों से करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचेंगे। इस बीच, कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी 12 जोनों को कांवड़ यात्रा रूट्स और कांवड़ शिविरों के आसपास संचालित अवैध मीट की दुकानों को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही लाइसेंस वाले मीट की दुकानों की भी जांच की जाएगी। लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 30 जुलाई से 11 अगस्त तक 308 कांवड़ शिविर लगाए जाएंगे। इसे देखते हुए एमसीडी ने सभी नागरिक सुविधाओं की तैयारियां यात्रा शुरू होने से पहले पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि MCD ने अधिकारियों से यात्रा से पहले सभी सिविक इंतजाम पूरे करने को भी कहा है, जिसके दौरान 30 जुलाई से 11 अगस्त तक पूरे देश में 308 कांवड़ कैंप चलने वाले हैं।

कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने के आदेश

एक ऑफिस मेमोरेंडम में सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को यह पक्का करने का आदेश दिया गया है कि तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले पहचाने गए कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटा दिया जाए। मेमोरेंडम में कहा गया है कि MCD को यात्रा से काफी पहले कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जोनल अधिकारियों को पहले ही पहचानी गई जगहों की जानकारी दे दी गई है। जबकि जरूरत पड़ने पर और कैंप लगाने की भी इजाजत दी जा सकती है।

सिविक बॉडी ने अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया है कि यात्रा के रास्तों पर या कांवड़ कैंप के आस-पास कोई भी बिना इजाजत या बिना लाइसेंस वाली मीट की दुकान न चले। यह भी कहा गया है कि अगर लाइसेंस वाली मीट की दुकानें अपने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करती पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

साफ-सफाई के आदेश

सख्ती बरतने के अलावा, MCD ने सभी जोन से कैंप साइट और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने को कहा है। इनमें गहरी सफाई, उगी हुई घास-फूस को हटाना और रेगुलर कचरा इकट्ठा करना शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि यात्रा के दौरान चौबीसों घंटे सफाई बनाए रखने के लिए सफाई कर्मचारी और मशीनरी तीन शिफ्ट में तैनात रहेंगी। हर साल आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा में शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर हरिद्वार पहुंचते हैं। यहां से गंगाजल लेकर अपने गांव या शहर के शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद

अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने बताया कि भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय है। इसी कारण शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल ले जाकर अपने-अपने शिवालयों में उनका जलाभिषेक करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगभग पखवाड़े भर चलने वाली इस यात्रा के दौरान चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वरिष्ठ अधिकारी कई बैठकें कर चुके हैं। यात्रा के शांतिपूर्ण और सुचारु संचालन के लिए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह ने बताया कि कांवड़ मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

एसएसपी ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान पहली बार सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए साइबर कमांडो तैनात किए जाएंगे। ये भ्रामक, फर्जी और AI से तैयार किए गए वीडियो पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सामान्य भ्रामक वीडियो को 36 घंटे के भीतर, जबकि एआई से तैयार फर्जी वीडियो को लगभग तीन घंटे के भीतर हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया मंचों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। एसएसपी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ यात्रा के ट्रैफिक से अलग रखा जाएगा।

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हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेला शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेले को लेकर सभी विभागों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से 11 अगस्त तक स्कूलों में अवकाश रहेगा। इस दौरान स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं।