ओडिशा के जंगल में मिले 5 विदेशी ओरंगुटान: वन विभाग ने किया रेस्क्यू, आखिर भारत कैसे पहुंचे ये जीव?

ओडिशा के जंगल में मिले 5 विदेशी ओरंगुटान: वन विभाग ने किया रेस्क्यू, आखिर भारत कैसे पहुंचे ये जीव?

Orangutans found in Balasore

ओडिशा के बालासोर के बिचित्रपुर जंगल में 5 ओरंगुटान मिलने से लोगों में हलचल मच गई। इनमें 2 मादा और 3 नर हैं। इन सभी की उम्र एक साल से कम है। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंची और सभी को रेस्क्यू कर लिया। ALSO READ: क्‍यों नहीं हटे उज्‍जैन के खड़े हनुमान, चमत्‍कार या कुछ और, क्‍या है रील्‍स और वीडियो की हकीकत?

 

ये ओरांगउटान भोगराई ब्लॉक के बडापाली गांव के पास मिले थे। वे छोटे थे और ज्यादा हिल-डुल नहीं रहे थे, लेकिन सक्रिय थे। उन्हें खाने के लिए भोजन दिया गया। रेस्क्यू किए गए जानवरों की विस्तृत जांच की जा रही है।

 

अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि ये जानवर कहां से आए और बालासोर कैसे पहुंचे। बताया जा रहा है कि इनका प्राकृतिक निवास उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rainforests) होता है, इसलिए वे खुद चलकर या प्राकृतिक रूप से यहां नहीं आ सकते। ALSO READ: मालदा में गंगा का रौद्र रूप, 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव पानी में डूबे

प्रशासन की लोगों से अपील

इन विदेशी जानवरों को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो रही है। हालांकि प्रशासन ने लोगों से जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।

 

कहां पाए जाते हैं ओरंगटान?

ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया के मूल निवासी 'ग्रेट एप' हैं, जो अपनी बुद्धिमत्ता और लाल-भूरे बालों के लिए जाने जाते हैं। भारत में ओरंगुटान की कोई मूल आबादी नहीं है। ओडिशा के तटीय जंगल में उनका दिखना काफी असामान्य है।

मालदा में गंगा का रौद्र रूप, 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव पानी में डूबे

मालदा में गंगा का रौद्र रूप, 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समाया; 62 गांव पानी में डूबे

shiv mandir malda

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तट कटाव ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। रविवार को रतुआ इलाके में गंगा किनारे स्थित करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया। लगातार हो रहे कटाव के कारण मंदिर पर पहले से ही खतरा मंडरा रहा था, लेकिन इस बार नदी का बहाव इतना तेज रहा कि पूरा मंदिर ढह गया। बाढ़ की वजह से 62 गांव पानी में डूब गए। ALSO READ: बिहार में बाढ़ का भयंकर रूप: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

 

विशेषज्ञों के मुताबिक, बिहार की ओर से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण गंगा का जलस्तर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। अनुमान है कि 9 सितंबर तक जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। इससे मालदा के नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा और बढ़ गया है।

पिछले साल से ही खतरे में था मंदिर

रतुआ के मुनिरामटोला में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर पिछले साल से ही गंगा के कटाव की जद में था। स्थानीय स्तर पर किए गए अस्थायी बचाव कार्यों के कारण मंदिर अब तक टिका हुआ था। हालांकि, नदी का लगातार बदलता रुख और बढ़ता जलस्तर आखिरकार मंदिर पर भारी पड़ गया।

 

स्थानीय शिक्षक आलोक मंडल के मुताबिक, उनके बचपन में गंगा मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर बहती थी। मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के बीच भी काफी लोकप्रिय था। यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार में हजारों लोग पहुंचते थे और बिहार से भी लोग आते थे। शनिवार को नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा कटकर बह गया। इसके बाद रविवार शाम तेज कटाव के चलते गंगा ने पूरे मंदिर को अपने आगोश में ले लिया। ALSO READ: बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

भुटनी द्वीप में हालात बिगड़े

मानिकचक ब्लॉक का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भुटनी द्वीप भीषण बाढ़ की चपेट में है। यहां का एकमात्र स्थानीय अस्पताल पानी भरने के कारण बंद करना पड़ा है। फिलहाल प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था पंचायत कार्यालय से संचालित की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मानिकचक की दो स्कूल इमारतों में स्थानांतरित किया गया है।

 

मानिकचक और रतुआ के अलावा इंग्लिश बाजार क्षेत्र में भी बाढ़ और कटाव का असर दिखाई दे रहा है। खसकोल में नदी के कटाव से जमीन के बड़े हिस्से के साथ आम के कई बागान भी नष्ट हो गए हैं।

 

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार के मंत्री भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीन पंचायतों के कम से कम 62 गांव और एक स्थानीय पुलिस स्टेशन पानी में डूबे हुए हैं।

 

तटबंध टूटने के बाद बढ़ी मुश्किल

भुटनी द्वीप में 2 सितंबर की रात तटबंध टूटने के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। पानी भरने के कारण पूरा द्वीप प्रभावित हो गया और बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2025 में बनाए गए इस तटबंध के टूटने पर स्थानीय विधायक गौर मंडल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने तटबंध के निर्माण की गुणवत्ता पर आरोप लगाते हुए इसकी विफलता के लिए पिछली टीएमसी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

 

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों से पानी निकालने, लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और नदी के बढ़ते कटाव को रोकने की है। आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका

नई दिल्ली के सत्य निकेतन, मोती बाग इलाके में रविवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिव मंदिर के पास एक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विसेज, पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला गया

दिल्ली फायर सर्विसेज के मुख्य अग्निशमन अधिकारी के मुताबिक, हादसे के बाद मलबे में फंसे एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, आशंका है कि कुछ अन्य लोग भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर संभावित लोगों की तलाश कर रहे हैं।

मौके पर पहुंचीं 12 फायर टेंडर

अधिकारियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विसेज की 12 फायर टेंडर मौके पर पहुंचीं। इनके साथ रेस्क्यू टीम और पुलिसकर्मी भी राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। टीमें सावधानी से मलबा हटाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति अंदर तो नहीं फंसा है।

दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, इमारत गिरने की घटना रविवार को करीब 1:30 बजे सामने आई। यह इलाका चानक्यपुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। फिलहाल हादसे में किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

राहत-बचाव अभियान जारी

घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं। मलबे की जांच और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। अधिकारियों की ओर से हादसे के कारणों और संभावित नुकसान को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

आरा में महानंदा एक्सप्रेस के 2 डिब्बे पटरी से उतरे, कम स्पीड के चलते टला बड़ा हादसा

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

kashi vishwanth mandir

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की अपील की। परशुराम द्वारा स्थापित इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास, महत्व और खासियतों के बारे में जानें।

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का पावन एवं प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
 

क्या है मान्यता?

उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। वर्ष 1857 में टिहरी रियासत के राजा सुदर्शन शाह की पत्नी, महारानी खनेती ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

 

उत्तरकाशी को भगवान शिव का कलियुग का दूसरा निवास माना जाता है और इसी कारण यहां भी काशी विश्वनाथ मंदिर मौजूद है। ऐसा कहते हैं कि जब काशी पानी में डूब जाएगी तब भगवान काशी विश्वनाथ को उत्तरकाशी के इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

 

क्या है मंदिर की विशेषता?

गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 56 सेंटीमीटर ऊंचा और स्वयंभू माना जाता है। यह शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर थोड़ा सा झुका हुआ है। मंदिर के सामने शक्ति मंदिर में एक विशाल त्रिशूल है। कहा जाता है कि इसका संबंध पौराणिक काल और देवताओं द्वारा अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से है।

LIVE: सावन सोमवार को मंदिरों में उमड़ी भीड़, 2 बड़े हादसों में 15 की मौत

LIVE: सावन सोमवार को मंदिरों में उमड़ी भीड़, 2 बड़े हादसों में 15 की मौत

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Latest News Today Live Updates in Hindi : सोवन सोमवार और नाग पंचमी पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़। लखीसराय के अशोक धाम और बीरभूम के तारापीठ में हुए 2 दर्दनाक हादसों में 15 लोगों की मौत हो गई। पल पल की जानकारी…

सोवन सोमवार और नाग पंचमी पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए खुला। सालभर में केवल एक दिन, नाग पंचमी पर ही खुलता है यह मंदिर।राहुल गांधी ने UGC-NET की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य परीक्षाएं रद्द किए जाने को लेकर NTA और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सितंबर में दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों के प्रति चिंता जताते हुए NTA नेतृत्व की जवाबदेही की मांग की। ALSO READ: UGC-NET रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- गलती एजेंसी की, सजा छात्रों को क्यों?

बिहार के लखीसराय में स्थित इंद्र दमनेश्वर मंदिर में बिजली का पोल गिरने से करंट फैलने की अफवाह के बाद भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह मंदिर अशोकधाम के नाम से भी प्रसिद्ध है। ALSO READ: सावन सोमवार पर अशोकधाम मंदिर में बड़ा हादसा, करंट की अफवाह से मची भगदड़; 8 श्रद्धालुओं की मौत
 

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में तारापीठ मंदिर के पास बिंदिशिनी होटल में सोमवार सुबह करीब 4 बजे भीषण आग लग गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हैं। एसी में शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह बताया जा रहा है। ALSO READ: तारापीठ मंदिर में दर्शन से पहले दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग से 7 श्रद्धालुओं की मौत

Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

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Top News 17 August : नाग पंचमी और श्रावण के तीसरे सोमवार को मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दिल्ली मार्च के तैयारी में जुटे किसान। NTA ने यूजीसी नेट की रिएक्जाम का कार्यक्रम जारी किया। AI बॉस ने मांगा लेट आने वाले कर्मचारी का इस्तीफा। CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत हो गई। 17 अगस्त की बड़ी खबरें: 

 

नाग पंचमी और श्रावण का तीसरा सोमवार

श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर देश भर के शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं का तांता। नाग पंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खुला। साल भर में केवल एक दिन ही यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ALSO READ: नाग पंचमी पर असली नाग नहीं बल्कि इस तरह नाग बनाकर करते हैं पूजा, जानिए संपूर्ण विधि

 

दिल्ली मार्च की तैयारी में किसान

किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर बिताई रात। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की कि वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने दें।

 

UGC-NET: NTA फिर लेगा 3 विषयों की परीक्षा

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यूजीसी नेट जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर और समाजशास्त्र की 10 सितंबर को होगी। इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की गंभीर खामियां सामने आई थीं। ALSO READ: NTA का बड़ा फैसला, UGC-NET परीक्षा हुई रद्द, इन 3 विषयों की दोबारा होगी Exam, जानिए क्या है कारण?

 

AI बॉस ने मांगा इस्तीफा

सैन फ्रांसिस्को में एआई से चलने वाली प्रयोगात्मक दुकान एंडॉन मार्केट में AI प्रबंधक ‘लूना’ ने एक मानव कर्मचारी को नौकरी से निकालने की सिफारिश की। कर्मचारी 23 शिफ्ट में 17 बार देर से काम पर पहुंचा था। हालांकि अंतिम फैसला AI ने अकेले नहीं लिया।

 

CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान से जुड़े एक कार्यकर्ता के पिता की मौत हो गई। सीजेपी ने स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट का आरोप लगाया है। सीएम शुभेंदु अधिकरी ने कहा है कि तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस दो अन्य की तलाश कर रही है। उन्होंने मामले में पूरा इंसाफ होने का भरोसा भी दिलाया।

क्या राहु-केतु परेशानी पैदा कर रहे हैं? नाग पंचमी पर अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय

हिंदू परंपरा में नाग पंचमी का खास महत्व है। इस दिन भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो राहु और केतु के बुरे प्रभावों को कम करना चाहते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में राहु या केतु की खराब स्थिति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उलझन, अचानक आने वाली रुकावटों, अस्थिरता और परेशानियों का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु का संबंध ‘काल सर्प दोष’ से भी माना जाता है।

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार कुछ खास पूजा-पाठ और उपाय कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि पारंपरिक रूप से हर राशि के लोगों को क्या करना चाहिए।

मेष– मेष राशि के लोग पानी में लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और राहु-केतु के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

वृषभ– वृषभ राशि के लोग भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। वे पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर उससे शिवलिंग का जलाभिषेक भी कर सकते हैं।

मिथुन– मिथुन राशि के लोग भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और फिर भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ा सकते हैं। परंपरा के अनुसार हरे कपड़े, हरे फल या मूंग की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है। भक्त “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

कर्क– कर्क राशि के लोग नाग पंचमी पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं या करवा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, वे पूजा के हिस्से के तौर पर चांदी के सांपों के प्रतीकात्मक जोड़े की पूजा भी कर सकते हैं। बाद में विसर्जन या निपटान के लिए, प्राकृतिक जल स्रोतों में धातु की चीजें डालने के बजाय स्थानीय मंदिर के निर्देशों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का पालन करना बेहतर है।

सिंह– सिंह राशि के लोग भगवान शिव की पूजा करने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। एक और पारंपरिक उपाय है तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर किसी जरूरतमंद को दान करना।

कन्या– कन्या राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे जलाभिषेक करें और जानवरों व पक्षियों की देखभाल करें या उन्हें खाना खिलाएं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में कच्चा कोयला विसर्जित करने की भी सलाह दी जाती है; हालाँकि, नदियों में सामग्री डालने के बजाय, भक्त पर्यावरण के लिए सुरक्षित कोई प्रतीकात्मक विकल्प चुन सकते हैं या किसी स्थानीय पुजारी से सलाह ले सकते हैं।

तुला– तुला राशि वाले नाग पंचमी पर शिव मंदिर जा सकते हैं और महादेव की पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूरतमंदों को अनाज दान करना या भोजन कराना भी इस दिन से जुड़ा एक उपाय है।

वृश्चिक– वृश्चिक राशि वाले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में माना जाता है कि पूजा और पाठ का यह मेल राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

धनु– धनु राशि वाले भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा कर सकते हैं और इस मौके पर पीले कपड़े पहन सकते हैं। पारंपरिक रूप से विष्णु मंदिर में हल्दी और चने की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है।

मकर– मकर राशि वाले नाग पंचमी पर कुत्ते को रोटी और गुड़ खिला सकते हैं। शाम को, वे पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित और अनुमत हो।

कुंभ– कुंभ राशि के लोग ज़रूरतमंदों को कंबल या स्टील के बर्तन जैसी उपयोगी चीज़ें दान कर सकते हैं। भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी इस राशि से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय है।

मीन– मीन राशि के लोग पानी में थोड़ी सी केसर मिलाकर उससे भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने की भी बात कही गई है, लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल चीज़ें चढ़ाना या मंदिर द्वारा स्वीकृत विकल्प चुनना बेहतर है।

उपाय

राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों के अलावा, जो लोग राहु और केतु के बुरे असर का अनुभव कर रहे हैं, वे नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और उन पर जल चढ़ा सकते हैं (जलाभिषेक कर सकते हैं)। कुछ ज्योतिष परंपराओं में राहु काल के दौरान शिव की पूजा करने की खास सलाह दी जाती है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय वैज्ञानिक रूप से साबित तरीकों के बजाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें सेहत, पैसे, रिश्तों या ज़िंदगी की दूसरी समस्याओं के पक्के समाधान के तौर पर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक अभ्यास के तौर पर देखा जाना चाहिए।

Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: आज सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर भद्रा का साया, जानें कब से कब तक रहेगी भद्रा और पूजा कैसे करें

Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ मां पार्वती का आशीष पाने के लिए भी सबसे उत्तम समय माना जाता है। इसमें सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और उपवास किया जाता है। वहीं, इस माह के सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत भी करते हैं। इस साल सावन माह के दूसरे मंगलवार को मंगला गौरी व्रत के साथ बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। सावन का दूसरा मंगला गौर व्रत इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रहा है, जिससे इस दिन सावन शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। मंगला गौरी व्रत के साथ शिवरात्रि का संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। लेकिन चिंता की बात ये है इस दिन भद्रा भी रहेगी। इसलिए आइए जानें, आज भद्रा का क्या समय है और पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा ?

सावन चतुर्दशी तिथि और समय

सावन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को सुबह 4.55 मिनट से लेकर रात में 1.52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा। सावन शिवरात्रि पर इस दिन भद्रा भी लग रही है। सावन शिवरात्रि पर पूजा और व्रत संकल्प करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त होगा, जो सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक रहेगा। इस दिन इसके बाद भद्रा काल शुरू हो जाएगा।

कब से कब तक भद्रा का प्रभाव?

12 अगस्त के दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। भद्रा का पृथ्वी पर निवास चंद्रमा से देखा जाता है। जब भी चंद्र ग्रह कर्क राशि में होते हैं तो पृथ्वी पर भद्रा निवास करती है। इस दिन भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा और यह सुबह 5:48 बजे सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत पर 9 घंटे से भी ज्यादा देर तक भद्रा रहेगी।

सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर शुभ योग

इस दिन शाम 6.51 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। सुबह 10:09 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र रहेगा।

पूजा के उत्तम मुहूर्त

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:04 से 07:26 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:04 से 08:09 बजे तक

निशिता काल : रात 12:05 से 12:48 बजे तक

कैसे करें पूजा?

स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक करें। शिव, गौरी सहित शिव परिवार की विधिवत पूजा करें। अब सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। फिर आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।

आज ये उपाय होंगे शुभ फलदायी

सावन शिवरात्रि पर 11 बेलपत्र पर सफेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखें और अपनी मनोकामना कहें। फिर शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

मंगला गौरी व्रत पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने से लिए शृंगार का सामान चढ़ाएं। शिव और गौरी चालीसा का पाठ करें।

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रहेंगे ‘नमो भारत’ के ये 17 स्टेशन, इन राज्यों में स्कूल भी बंद, जानिए रूट समेत सभी बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने बताया है कि कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद और मोदीनगर के बीच 17 ‘नमो भारत’ स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट चार से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इन स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी सीमित रहेगी। NCRTC ने बताया कि वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।

निगम के अनुसार, प्रभावित स्टेशनों में मोदीनगर, मेरठ नॉर्थ, एमईएस कॉलोनी, बेगमपुल, भैंसाली, मेरठ सेंट्रल, ब्रह्मपुरी, शताब्दी नगर, रिठानी, परतापुर, मेरठ साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर और गाजियाबाद शामिल हैं। NCRTC ने बताया कि अधिकतर स्टेशनों पर इस अवधि के दौरान गेट संख्या-2 बंद रहेगा। बयान के मुताबिक, बेगमपुल स्टेशन पर गेट संख्या-2 और 3, जबकि दुहाई स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 4 बंद रहेंगे। गाजियाबाद स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 5 बंद रहेंगे।

पार्किंग भी बंद

इन स्टेशनों के प्रभावित हिस्से की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। एनसीआरटीसी ने यात्रियों को नमो भारत सेवाओं का उपयोग करने के लिए संबंधित स्टेशनों पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रवेश और निकास द्वारों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। निगम ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया।

निगम ने कहा कि सरायकाले खां-मोदीनगर कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। बयान के मुताबिक, 14 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक ट्रेनें आठ मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इस साल कांवड़ यात्रा पवित्र श्रावण मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त को समाप्त होगी।

स्कूल-कॉलेज 12 अगस्त तक बंद रहेंगे

श्रावण मास की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद जिलों में शिक्षण संस्थान 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। मेरठ में जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह के आदेश के अनुसार यह अवकाश 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके अनुसार सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

प्रशासन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए लिया गया है, क्योंकि श्रावण शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से गुजरते हैं। मेरठ प्रशासन के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षण संस्थान, जिनमें बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से जुड़े संस्थान शामिल हैं, 12 अगस्त तक बंद रहेंगे।

इसके अनुसार सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी इस दौरान क्लास बंद रखने का निर्देश दिया गया है। गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूल के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चार अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया।

इस बीच, बागपत प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए तीन अगस्त से 12 अगस्त तक कक्षा एक से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर जाते हुए बागपत से गुज़र रहे हैं। जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ‘जलाभिषेक’ के लिए जिले के प्रमुख शिवमंदिरों में भी जा रहे हैं, जिससे कांवड़ रूट और आस-पास के इलाकों में भारी ट्रैफिक हो रहा है।

कब शुरू हुई कांवड़ यात्रा?

भगवान शिव के पवित्र माह सावन के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचेगी। इसी दिन श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसी के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

कहां से लाया जाता है गंगाजल?

कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री गंगाजल लेने के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से भोलेनाथ के श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने मंजिल की ओर रवाना होते हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई प्रमुख शिवधामों में भी दर्शन-पूजन करते हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने व्यापक ट्रैफिक में बदलाव किया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर जुलाई के अंतिम सप्ताह से भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रा के चरम दिनों में कई रूट केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। जबकि अन्य वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा रूट को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। हजारों CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष गश्ती दलों की तैनाती की गई है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कांवड़ और डीजे सिस्टम की ऊंचाई को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करने की अपील की है।

12 अगस्त तक नहीं खुलेंगे स्कूल-कॉलेज! कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी के इन जिलों में प्रशासन का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों ने दोनों जिलों के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य इंस्टिट्यूट संस्थान को 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया है। ये फैसला छात्रों की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए लिया गया है। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु कई पवित्र जगहों से गंगाजल लेकर पैदल शिव मंदिरों तक जाते हैं। आइए जानते हैं कहां-कहां पर बंद होगे स्कूल और कॉलेज

12 अगस्त तक बंद होंगे स्कूल-कॉलेज

मेरठ में जिला अधिकारी वी.के. सिंह के निर्देश पर सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद, यूपी बोर्ड, सीबीएसई, सीआईएससीई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्डों से जुड़े स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा सभी सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानों में भी इस अवधि के दौरान नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी।

प्रशासन ने कहा कि, सावन शिवरात्रि के अवसर पर जिले से बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों के गुजरने की संभावना है। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा बनाए रखने और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए ये फैसला लिया गया है।

गाजियाबाद में कब तक बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को 4 अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, ये आदेश बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्डों से जुड़े सभी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिले के विभिन्न मार्गों पर बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो चुकी है। ऐसे में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के निर्देश पर छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

निर्देशों का सख्ती से हो पालन

गाजियाबाद प्रशासन ने बताया कि, पहले से निर्धारित किसी भी पाठ्यक्रम या विषय की परीक्षाएं तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी और उन्हें इस आदेश से बाहर रखा गया है। मेरठ प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिन परीक्षाओं का कार्यक्रम पहले से तय है, वे अपने निर्धारित समय के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी और उन पर स्कूल बंद रहने का आदेश लागू नहीं होगा। वहीं मेरठ और गाजियाबाद दोनों जिलों के अधिकारियों ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और संबंधित विभागों को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है।