मौत का मलबा! दिल्ली में सीमापुरी में बिल्डिंग गिरने से गर्भवती महिला समेत 3 की मौत

बुधवार को दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद राहत और बचाव टीमों ने मलबे से अब तक 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। मलबे से बचाए गए 11 लोगों में से आठ लोग घायल हैं, जिन्हें इलाज के लिए ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं अभी कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। ये इमारत सीमापुरी इलाके में ईदगाह मस्जिद के पास स्थित थी।

घायलों की पहचान मोमिन मिर्जा (56), अबदान (3), अब्दुल रहमान (28), देवरुद्दीन (28), सलमा (50), छोटे (34), सकीना (35) और समद (30) के रूप में हुई है। अस्पताल में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। ये घटना सत्य निकेतन में इमारत गिरने की के करीब एक महीने बाद हुई।

तीन लोगों की हुई मौत

न्यू सीमापुरी में इमारत गिरने के हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में 12 साल की एक बच्ची, 21 वर्षीय गुलाफ्सा और एक अन्य बच्चा शामिल है। गुलाफ्सा करीब चार महीने की गर्भवती थी। 12 साल की बच्ची और दूसरे बच्चे की पहचान अभी नहीं हो पाई है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और अधिकारियों की ओर से घटना से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में इमारत गिरने के बाद आसपास के दो से तीन मकानों के कुछ हिस्से भी मलबे में दब गए।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

दिल्ली पुलिस ने कहा, “दिल्ली के न्यू सीमापुरी के E-ब्लॉक में E-401 नंबर की चार मंजिला इमारत गिरने की सूचना मिली है। यह इमारत करीब 25 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। इमारत गिरने से आसपास की दो अन्य इमारतों को भी मामूली नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाके से करीब 3 साल के बच्चे समेत 7 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।” दिल्ली फायर सर्विस को बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर भेजी गईं। एक अधिकारी ने बताया कि मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल राहत और बचाव दल मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश में जुटा है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

सत्य निकेतन हादसा: सिर्फ 10 मिनट में पहुंची Ambulance | Satya Niketan PG Collapse | Blinkit

सत्य निकेतन हादसा: सिर्फ 10 मिनट में पहुंची Ambulance | Satya Niketan PG Collapse |  Blinkit

सत्य निकेतन में हुए हादसे के बीच जब कई छात्र मलबे में फंसे थे, तब मदद का हर मिनट मायने रखता था। ऐसे वक्त में Blinkit की Ambulance सिर्फ 10 मिनट में मौके पर पहुंची और Rescue Team के साथ राहत के काम में जुट गई। जनवरी 2025 में Service शुरू होने के बाद से Blinkit Ambulances ने 4,200+ Emergency Cases में मदद की है। फिलहाल ऐसी सुविधा Gurugram और Delhi-NCR के कुछ हिस्सों में Free उपलब्ध है। क्या आपको लगता है ऐसी Emergency Services को देश के और हिस्सों तक पहुंचना चाहिए?
Comment में अपनी राय बताएं।

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सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

Satya Niketan PG, Delhi हादसे में मध्य प्रदेश के 18 वर्षीय अर्पित की जान चली गई! किसी भी माता-पिता के लिए अपने जवान बेटे को खो देने से शायद कोई दुख नहीं होता!
पर इस असहनीय पीड़ा के बीच भी, इस परिवार ने जो किया वह अतुलनीय है!

(18 Year Old Arpit Who Lost His Life In Delhi Satya Niketan PG Building Collapse Donates His Eyes)

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ईंधन की बढ़ती कीमतों की मार! हिंडन से उड़ानों पर IndiGo की कैंची, कोलकाता-नवी मुंबई और वाराणसी की फ्लाइटें घटीं

IndiGo cuts flights: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने तीन प्रमुख घरेलू रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम कर दी है। विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5.5% बढ़ोतरी को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है। सितंबर में ATF की कीमत बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई है। इस वजह से इंडिगो अब हिंडन से सिर्फ 5 रूट्स वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई पर संचालन कर रही है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) और ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण एयरलाइंस अपनी कैपेसिटी घटाने पर मजबूर हैं।

एयरलाइन अधिकारियों के मुताबिक, ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत के दबाव में क्षमता को कम किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एयरलाइन की परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40-60% तक हो सकती है। हिंडन एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानों के संचालन की शुरुआत जून में हुई थी। जुलाई 2025 में इंडिगो ने यहां से नई उड़ानें शुरू की थीं। हालांकि, एयरपोर्ट पर सुबह से शाम तक संचालन की पाबंदियां और सीमित पार्किंग जैसी दिक्कतें भी एयरलाइनों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

इंडिगो फ्लाइट की संख्या में प्रमुख बदलाव

  • कोलकाता: रोजाना चलने वाली उड़ान अब सप्ताह में केवल 2 दिन (सोमवार और रविवार या बुधवार/रविवार) संचालित होगी।
  • नवी मुंबई: दैनिक (Daily) सेवाओं को घटाकर अब सप्ताह में 4 दिन कर दिया गया है।
  • वाराणसी: सप्ताह में 6 दिन चलने वाली सेवा को घटाकर अब 5 दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार) कर दिया गया है।

हिंडन से अब केवल 5 रूटों पर संचालन

इंडिगो वर्तमान में हिंडन से केवल 5 रूटों पर ही परिचालन कर रही है। इनमें वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई शामिल है। इसमें बेंगलुरु के लिए रोजाना उड़ानें जारी हैं। जबकि चेन्नई के लिए सप्ताह में 4 दिन (सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार) उड़ानें चल रही हैं।

ऑपरेशनल चुनौतियां और हिंडन की घटती कनेक्टिविटी

हिंडन टर्मिनल से संबंधित समस्याएं जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के जून में हुए कमर्शियल लॉन्च से भी पुरानी हैं। इंडिगो ने जुलाई 2025 में हिंडन से 8 नए रूट शुरू किए थे। लेकिन अहमदाबाद, इंदौर और पटना जैसे रूट कुछ ही महीनों में बंद कर दिए गए। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी इस टर्मिनल से पूरी तरह हट चुकी है।

हिंडन मूल रूप से भारतीय वायु सेना (IAF) का केंद्र है, जहां सुबह से शाम (dawn-to-dusk) तक ही उड़ान संचालन की अनुमति है। साथ ही यहां कमर्शियल विमानों के लिए सीमित पार्किंग जगह उपलब्ध है। वर्तमान में यहां केवल दो एयरलाइंस इंडिगो और स्टार एयर (नांदेड़ एवं आदमपुर के लिए) ऑपरेट कर रही हैं।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें

  • सितंबर में 5.5% की बढ़ोतरी: सितंबर से ATF की कीमतें 5.5% बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई हैं।
  • पिछले महीनों का हाल: जुलाई में कीमतें ₹110 प्रति लीटर और अगस्त में ₹115 प्रति लीटर थीं।
  • लागत पर असर: अधिकारियों के अनुसार, एयरलाइन की कुल परिचालन लागत (operating cost) में ईंधन का हिस्सा 40% से 60% तक होता है। घाटे से निपटने के लिए इंडिगो ने अपनी घरेलू क्षमता में 5% से 7% तक की कटौती की है। जबकि एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में 22% तक की कमी की है।

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El Nino effect: अल नीनो का कहर! जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में लाखों लोगों के सामने इसने कैसे खड़ा कर दिया जल संकट

El Nino effect: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलावों के बीच पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूत होते अल नीनो, रिकॉर्ड हाई टेंप्रेचर और बारिश की भारी कमी की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सूखा और ड्राई मौसम बेहद भीषण रूप ले चुका है। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस मौसमी आपदा की वजह से देश भर में 1 लाख 15 से अधिक लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

अल नीनो का श्रीलंका पर असर

श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में अल नीनो का असर रंग दिखा रहा है। ये गर्म मौसम के पैटर्न के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आपको बता दें कि अल नीनो एक ऐसी मौसमी गतिविधि है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी का के गर्म होने से पैदा होती है। ये पूरे क्षेत्र के तापमान पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चारों तरफ से हिंद महासागर से घिरा होने की वजह से श्रीलंका पर इस अल नीनो का असर अधिक तेज देखने को मिल सकता है। लगातार जारी सूखे के बीच अधिकारी इसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

7 जिलों के 115000 से अधिक लोग प्रभावित, जलाशय सूखे

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अल नीनो मौसम पैटर्न की वजह से श्रीलंका के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में 115586 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। भीषण गर्मी और बारिश न होने से कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं। डीएमसी अधिकारी प्रगीत दनांसुरिया के मुताबिक मौजूदा समय में देश के 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि लगभग 3500 एकड़-फिट की क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर घटकर अब मात्र 1000 एकड़-फिट रह गया है। मध्य क्षेत्र के माटले और उत्तर-पूर्व के नंदीकडाल सहित कई क्षेत्रों में वॉटर बॉडी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वन्यजीवों, समुद्री जीवन और खेती पर पड़ा बुरा असर

इस लंबे शुष्क मौसम और जल संकट ने श्रीलंका के पारितंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर-पूर्व के मुल्लैथिवु लैगून में हजारों की संख्या में छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इन मौतों का कारण समुद्री पानी और मीठे पानी के आपस में मिलने को बताया है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख रहे हैं। इसकी वजह से जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भटकने के लिए मजबूर हो गए हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलें पानी न मिलने से नष्ट होने के कगार पर हैं।

सितंबर के अंत से राहत की उम्मीद

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने उम्मीद जताई है कि सितंबर के अंत से देश में कुछ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में अगर बारिश होती ह तो श्रीलंका को इस भीषण गर्म मौसम, जल संकट और अल नीनो के प्रभाव से राहत मिल सकती है।

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5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

Building collapse deaths in India

Building collapse deaths in India: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को हुई दर्दनाक दुर्घटना में पांच मंज़िला इमारत ढहने से सोमवार सुबह तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जाती है।

सत्य निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान इसलिए खींचती हैं क्योंकि ये छात्रों और युवाओं के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़ी होती हैं। लेकिन इसके इतर दर्जनों ऐसी छिटपुट घटनाएं हैं जो मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दर्जनों और देश भर में सैकड़ों बेकसूरों की जान ले लेती हैं और सुर्खियों से गायब रह जाती हैं।

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दिल्ली : आबादी के अनुपात में मौतों की गंभीर स्थिति

2024 में मौतों की कुल संख्या (42) के आधार पर दिल्ली देश में 12वें स्थान पर थी, लेकिन जब इन मौतों का विश्लेषण प्रति दस लाख (Per Million) आबादी के अनुपात में किया जाता है, तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है:

  • 2022, 2023 और 2024 तीनों वर्षों में प्रति 10 लाख आबादी पर इमारतें ढहने से हुई मौतों के मामले में दिल्ली देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बनी रही।
  • 2025-2026 की स्थिति : यद्यपि 2025 की आधिकारिक ADSI रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के संकलन के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक 20 से अधिक घटनाओं में कम से कम 70 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया : तात्कालिक हड़बड़ी बनाम ढांचागत सुधार

सत्य निकेतन की घटना के बाद हमेशा की तरह जन-आक्रोश भड़कने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि वह 5-मंज़िला या उससे ऊपर की सभी अवैध इमारतों को “तत्काल सील” करेगा।

क्यों विफल होता है सिस्ट्म?

  1. रिएक्टिव बनाम प्रोएक्टिव : नगर निकाय हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। नियमित ऑडिट और भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी का अभाव रहता है।
  2. सस्ते आवास की भारी मांग : दिल्ली जैसे बड़े शहरों में छात्रों और प्रवासियों की आमद लगातार बढ़ रही है। सस्ते आवास (Affordable Housing) की मांग के चलते अवैध और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
  3. सिर्फ सीलिंग समाधान नहीं : अचानक इमारतों को सील करने से किराएदार बेघर हो जाते हैं, लेकिन निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर-प्रशासनिक साठगांठ पर स्थायी लगाम नहीं लग पाती।
  4. स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और निगरानी का अभाव: स्थानीय जूनियर इंजीनियरों (JE) और पुलिस की मिलीभगत से अवैध निर्माण बिना रुकावट जारी रहता है। हादसे के बाद सीलिंग ड्राइव (Sealing Drive) चलाई जाती है, जो कि केवल एक रिएक्टिव (प्रतिक्रियात्मक) कदम है, प्रोएक्टिव नहीं।
  5. अपीलीय प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें : निगम द्वारा धारा 343/344 के तहत नोटिस जारी करने के बाद, मामला Appellate Tribunal for MCD (ATMCD) या अदालतों में चला जाता है, जहाँ स्टे (Stay Order) मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही वर्षों तक लटकी रहती है।

ऐसे हादसों को कैसे रोकें : सुधार हेतु आवश्यक कदम (Way Forward)

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण : 15 वर्ष से पुरानी या 3 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों के लिए हर 5 साल में थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) अनिवार्य किया जाए और उसका डेटा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability) : यदि किसी इलाके में अवैध निर्माण के दौरान हादसा होता है, तो केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संबंधित नगर निगम इंजीनियर और बीट कांस्टेबल को भी कानूनी रूप से सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
  • सस्ते और सुरक्षित छात्र आवास का नियमन : सरकार को निजी PG और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक पारदर्शी और सख्त नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सस्ते आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

हाल ही में हुआ सत्य निकेतन हादसा और देश भर में 5 वर्षों में हुई लगभग 8,000 मौतें यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि भारत में शहरी विकास का ढाँचा और भवन सुरक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है।

भारत में शहरी आवास सुरक्षा नियम, दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज (Unified Building Bye-Laws) और अवैध निर्माण पर लागू वैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण:

 

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MCD के मुख्य बिल्डिंग बाय-लॉज और सुरक्षा मानक

MCD के नियमों के अनुसार किसी भी इमारत के निर्माण से लेकर उसके उपयोग तक निम्नलिखित कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है:

(A) फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई की सीमा

  • भूखंड (Plot Size) के आकार के आधार पर यह तय होता है कि उस पर कितना निर्माण हो सकता है।
  • रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें (जैसे 3 मंजिल के ऊपर 4था या 5वां फ्लोर बनाना) बिना FAR और स्ट्रक्चरल परमिशन के पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं।

(B) स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट (Structural Safety Certificate)

  • किसी भी इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Structural Engineer) से यह प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है कि इमारत भूकंप, हवा के दबाव और वजन को सहने में सक्षम है।
  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) / कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) : निर्माण पूरा होने के बाद MCD इंस्पेक्टर और इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं। इसके बिना इमारत में किसी को रहने या किराए (PG) पर देने की अनुमति नहीं होती।

(C) यूसेज परिवर्तन (Commercial vs Residential)

  • आवासीय परिसरों (Residential Plots) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे बिना अनुमति के पेइंग गेस्ट (PG), व्यावसायिक हॉस्टल या कोचिंग सेंटर चलाने के लिए करना बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।

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  • धारा 343 (DMC Act, 1957) – ध्वस्तीकरण का आदेश (Order of Demolition) : यदि कोई निर्माण बिना पास नक्शे के या पास नक्शे का उल्लंघन करके किया गया है, तो निगम नोटिस जारी कर निर्माण को गिराने (Demolish) का आदेश दे सकता है।
  • धारा 344 – काम रोकने और सील करने की शक्ति (Stop Work / Sealing Notice) : निगम अधिकारियों को अधिकार है कि वे निर्माणाधीन अवैध इमारत पर 'स्टॉप वर्क' का नोटिस दें या पुलिस बल की मदद से साइट को तुरंत सील कर दें।
  • धारा 348 – खतरनाक इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण (Unsafe Buildings): यदि कोई पुरानी इमारत जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) स्थिति में है और गिरने के कगार पर है, तो निगम मकान मालिक को नोटिस जारी कर उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला : हादसे की स्थिति में मकान मालिक, बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर BNS धारा 106 (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से हुई मौत – पूर्व में IPC धारा 304A) और धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है।

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरिराम का बेटा पुलिस कस्टडी में, अन्य को न्यायिक हिरासत

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दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले अदालत ने आरोपी हरिराम बंसल के बेटे को पुलिस कस्टडी में भेजा। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

 

सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोग मारे गए जबकि 12 लोगों का रेसक्यू किया गया था। हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में हरिराम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। बिल्डिंग उर्मिला की थी, उसका बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था और उसका मैनेजमेंट बेटा संभालता था।

 

दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामल में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। ALSO READ: Satya Niketan building collapse : दिल्ली में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, 7 मौतें, हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी थी जिम्मेदारी?

 

क्या है CJP की मांग?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। ALSO READ: सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

LAC पर भारत-चीन की सेनाओं की बड़ी बैठक, अरुणाचल सेक्टर को लेकर हुई बड़ी चर्चा

LAC पर भारत-चीन की सेनाओं की बड़ी बैठक, अरुणाचल सेक्टर को लेकर हुई बड़ी चर्चा

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भारत और चीन की सेनाओं ने अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही सीमा विवाद को लेकर बीजिंग में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) के बीच वार्ता हुई थी। रविवार को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू क्षेत्र में स्थित वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। 

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मामले से परिचित लोगों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना तथा किसी भी तरह के तनाव को रोकना था।  भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया। वह दीमापुर स्थित भारतीय सेना की 3 कोर के कमांडर हैं।

 

बैठक में LAC से जुड़े मौजूदा हालात और सीमा पर शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई। यह वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी सैन्य और कूटनीतिक संवाद का हिस्सा है।

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गलवान झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच बढ़ा था तनाव

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ताएं मुख्य रूप से लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर होती रही हैं। यहां वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे। गलवान घटना के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की।

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साथ ही पर्वतीय युद्ध के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया। भारत ने चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया था। वहीं अब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने और शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।

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iQOO Z11x 5G : 7200mAh Battery वाला धांसू 5G फोन लॉन्च, 50MP कैमरा और 120Hz डिस्प्ले, कीमत जानकार हो जाएंगे हैरान

iQOO Z11x 5G

iQOO ने भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन iQOO Z11x 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को खास तौर पर लंबी बैटरी लाइफ, दमदार परफॉर्मेंस, गेमिंग, मजबूत बिल्ड और AI फीचर्स को ध्यान में रखकर पेश किया है। फोन की शुरुआती कीमत ₹28,999 है, जबकि लॉन्च ऑफर के तहत इसे प्रभावी तौर पर ₹27,499 में खरीदा जा सकता है।

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फोन में 7200mAh की बड़ी बैटरी, MediaTek Dimensity 7400-Turbo प्रोसेसर, 8GB RAM, 120Hz FHD+ डिस्प्ले और 50MP Sony का मुख्य कैमरा दिया गया है। इसके अलावा फोन Android 16 आधारित OriginOS 6 पर चलता है और इसे IP68/IP69 रेटिंग मिली है।

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iQOO Z11x 5G की कीमत और ऑफर

iQOO Z11x 5G का 8GB RAM + 128GB स्टोरेज मॉडल ₹28,999 में लॉन्च किया गया है। चुनिंदा लॉन्च ऑफर्स के तहत ग्राहक इसे ₹27,499 की प्रभावी कीमत पर खरीद सकते हैं। ICICI Bank और HDFC Bank के चुनिंदा क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर ₹1,500 तक का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। इसके साथ ही 6 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी दिया जा रहा है। फोन की बिक्री 14 सितंबर दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इसे Amazon India, iQOO के ऑनलाइन स्टोर, चुनिंदा Vivo एक्सक्लूसिव स्टोर्स और अन्य रिटेल आउटलेट्स से खरीदा जा सकेगा। फोन को Titan Black और Prismatic Green कलर में पेश किया गया है।

इन स्मार्टफोन्स से होगी टक्कर

 

भारत के ₹25,000 से ₹30,000 वाले सेगमेंट में iQOO Z11x 5G को कई मजबूत विकल्पों से मुकाबला करना होगा। इनमें Motorola Edge 70 Fusion, vivo V60e, OnePlus Nord CE 6 Lite 5G, Tecno Pova Curve 2 और Redmi Note 17 5G जैसे मॉडल शामिल हैं। कुछ प्रतिद्वंद्वी फोन में AMOLED डिस्प्ले, ज्यादा तेज चार्जिंग या बड़ी बैटरी मिलती है। वहीं iQOO Z11x का फोकस परफॉर्मेंस, बैटरी, गेमिंग, ड्यूरेबिलिटी और AI फीचर्स के संतुलन पर है।

Dimensity 7400-Turbo प्रोसेसर और 8GB RAM

 

iQOO Z11x 5G में MediaTek Dimensity 7400-Turbo प्रोसेसर दिया गया है, जिसे 4nm प्रोसेस पर तैयार किया गया है। इसमें चार Cortex-A78 परफॉर्मेंस कोर और चार Cortex-A55 एफिशिएंसी कोर हैं। कंपनी के मुताबिक, फोन ने AnTuTu बेंचमार्क पर 8.90 लाख से ज्यादा स्कोर हासिल किया है। ऐसे में रोजमर्रा के भारी काम, मल्टीटास्किंग और मोबाइल गेमिंग के लिए फोन को दमदार विकल्प माना जा सकता है। फोन में 8GB LPDDR4X RAM और 128GB UFS 2.2 स्टोरेज है। Extended RAM फीचर के जरिए अतिरिक्त 8GB तक वर्चुअल RAM का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

गेमिंग के लिए खास फीचर्स

 

गेमिंग के दौरान बेहतर अनुभव के लिए फोन में Dual 10x Super Touch Control, Monster Mode, Gaming HyperSense Audio, Game Timer, गेम वाइब्रेशन, इन-गेम नोटिफिकेशन ओवरले और Game Voice Changer जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा AI SuperLink बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए काम करता है। फोन में Bluetooth 5.4 और डुअल स्टीरियो स्पीकर भी हैं, जो कंपनी के मुताबिक 400 प्रतिशत तक वॉल्यूम सपोर्ट करते हैं।

 

7200mAh बैटरी बनी सबसे बड़ी खासियत

 

iQOO Z11x 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7200mAh बैटरी है। कंपनी का दावा है कि निर्धारित टेस्टिंग परिस्थितियों में यह बैटरी:

 

  • 40 घंटे तक वीडियो प्लेबैक
  • 15.4 घंटे तक गेमिंग
  • 10.7 घंटे तक लगातार लाइव स्ट्रीमिंग
  • 51 घंटे तक 4G वॉयस कॉल
  • 13.9 दिन तक स्टैंडबाय

 

का बैकअप दे सकती है।

 

फोन में 44W FlashCharge सपोर्ट दिया गया है। कंपनी के अनुसार सिर्फ 10 मिनट चार्ज करने पर करीब 6 घंटे तक का टॉकटाइम मिल सकता है। बैटरी को 1 से 50 प्रतिशत तक चार्ज होने में करीब 43 मिनट और 1 से 100 प्रतिशत तक चार्ज होने में लगभग 91 मिनट लगते हैं।

 

Bypass Charging से गेमिंग के दौरान गर्मी कम करने की कोशिश

 

फोन में Bypass Charging फीचर भी है। भारी इस्तेमाल के दौरान यह बैटरी को लगातार चार्ज करने के बजाय सीधे फोन को पावर देने में मदद करता है, जिससे गेमिंग जैसे कामों के दौरान गर्मी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। Overnight Charging Protection फीचर रात में चार्जिंग को 80 प्रतिशत पर रोक सकता है और यूजर के जागने के समय के अनुसार दोबारा चार्जिंग शुरू कर सकता है।

 

6.76 इंच का 120Hz डिस्प्ले

 

iQOO Z11x 5G में 6.76 इंच का FHD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है। इसका रेजोल्यूशन 2344×1080 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 120Hz तक है। 120Hz रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग, एनिमेशन, सोशल मीडिया और गेमिंग का अनुभव ज्यादा स्मूद रहने की उम्मीद है। आउटडोर विजिबिलिटी के लिए इसमें 1200 निट्स तक High Brightness Mode दिया गया है।

लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए TÜV Rheinland Low Blue Light सर्टिफिकेशन और Eye Comfort सिस्टम भी दिया गया है। Sleep Comfort Mode सोने से पहले स्क्रीन के कलर टेम्परेचर को धीरे-धीरे बदलता है। वहीं Anti-Motion Sickness Mode यात्रा के दौरान फोन देखने से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए विजुअल संकेतों का इस्तेमाल करता है।

 

50MP Sony कैमरा और 32MP सेल्फी कैमरा

 

फोटोग्राफी के लिए फोन में 50MP Sony IMX852 AI मेन कैमरा दिया गया है। इसके साथ 2MP बोकेह सेंसर मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 32MP फ्रंट कैमरा है। फोन की खास बात यह है कि फ्रंट और रियर दोनों कैमरों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग 30fps पर की जा सकती है। Video Electronic Image Stabilisation वीडियो को ज्यादा स्थिर बनाने में मदद करता है।

 

कैमरा सॉफ्टवेयर में Dual-View Video, रिकॉर्डिंग के दौरान फ्रंट और रियर कैमरा स्विच करने की सुविधा, 4K वीडियो को Live Photo में बदलने और वीडियो फ्रेम क्रॉप करने जैसे विकल्प हैं। AI फीचर्स में AI Erase, AI UHD, Ultra HD Document और Smart Editing शामिल हैं। फोन Live Photo और Underwater Photography को भी सपोर्ट करता है।

 

IP68 और IP69 रेटिंग से मजबूत हुई सुरक्षा

 

iQOO Z11x 5G में IP68 और IP69 डस्ट वॉटर रेजिस्टेंस दिया गया है। कंपनी के मुताबिक फोन को मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी भी दी गई है। फोन गीले और तैलीय हाथों से टच इनपुट को भी सपोर्ट करता है। पानी और धूल के संपर्क में आने के बाद One-Tap Water and Dust Ejection फीचर अतिरिक्त सुरक्षा में मदद करता है।

 

Android 16 और AI फीचर्स

 

iQOO Z11x 5G Android 16 आधारित OriginOS 6 पर चलता है। कंपनी फोन के लिए 2 साल तक ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड और 4 साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है। फोन में कई AI आधारित फीचर्स दिए गए हैं। Circle to Search की मदद से स्क्रीन पर किसी वस्तु या टेक्स्ट को सर्कल करके उसके बारे में जानकारी खोजी जा सकती है। AI Captions रियल टाइम ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन में मदद करता है। AI Creation टेक्स्ट को बेहतर बनाने, जानकारी का सारांश तैयार करने, अनुवाद और आइडिया ब्रेनस्टॉर्मिंग में मदद करता है।

 

छात्रों के लिए खास AI फीचर

 

स्टूडेंट्स के लिए AI Transcript Assist उपयोगी हो सकता है। यह रिकॉर्ड किए गए ऑडियो को टेक्स्ट में बदल सकता है और लंबे ट्रांसक्रिप्ट को छोटे नोट्स में बदलने में मदद करता है। इसके अलावा Screen Translation, Free Transfer, Private Space, Origin Island, Drag & Go और Copy & Go जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

 

₹30,000 से कम कीमत में कितना मजबूत है iQOO Z11x 5G?

 

₹28,999 की कीमत पर iQOO ने सिर्फ एक फीचर के बजाय कई खूबियों का कॉम्बिनेशन देने की कोशिश की है। इसमें 7200mAh बैटरी, Dimensity 7400-Turbo, 120Hz डिस्प्ले, 50MP Sony कैमरा, 32MP सेल्फी कैमरा, 4K वीडियो रिकॉर्डिंग और IP68/IP69 रेटिंग मिलती है।

हालांकि, इसकी 44W चार्जिंग स्पीड कुछ प्रतिस्पर्धी फोन से कम है। इतनी बड़ी बैटरी को फुल चार्ज होने में कंपनी के अनुसार करीब 91 मिनट लगते हैं। इसके अलावा फोन में LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज का इस्तेमाल किया गया है। एक और कमी यह है कि इस कीमत के आसपास कुछ प्रतिस्पर्धी स्मार्टफोन AMOLED डिस्प्ले देते हैं, जबकि iQOO Z11x में LCD पैनल है।

 

भारत में बनेगा iQOO Z11x 5G

iQOO Z11x 5G का निर्माण भारत में vivo की ग्रेटर नोएडा फैसिलिटी में किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक iQOO ग्राहकों को देशभर में 700 से ज्यादा कंपनी-ओन्ड सर्विस सेंटर की सुविधा भी मिलेगी।

 

किसके लिए बेहतर विकल्प?

अगर आपकी प्राथमिकता लंबी बैटरी लाइफ, गेमिंग, दमदार प्रोसेसर, मजबूत बॉडी और AI फीचर्स हैं, तो iQOO Z11x 5G ₹30,000 से कम कीमत वाले सेगमेंट में एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आपकी पहली प्राथमिकता AMOLED डिस्प्ले या बेहद तेज चार्जिंग है, तो खरीदने से पहले दूसरे विकल्पों की तुलना करना बेहतर रहेगा।

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दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। कोर्ट ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी केवल इमारत मालिकों तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।

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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, अवैध या असुरक्षित निर्माण और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि मलबे में अभी भी कोई व्यक्ति फंसा हो सकता है, इसलिए संभावित लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ उस इमारत के मालिकों की नहीं है जो ढह गई। अदालत ने MCD और DU की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया।  कोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दूसरे शहरों से आने वाले कई छात्र निजी पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं।

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अदालत ने कहा कि ऐसे छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध कराने में व्यवस्था की ओर से कमी रही है।

 दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बचाव अभियान में तेजी लाई जाए और मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए पूरी गंभीरता से अभियान चलाया जाए। अदालत की टिप्पणी के बाद अब मामले में सिर्फ बिल्डिंग मालिकों की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि MCD की निगरानी व्यवस्था और DU की छात्र आवास व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है।

 

 

एनडीआरएफ ने कहा- बचाव अभियान अभी भी जारी 

एनडीआरएफ  ने सोमवार को बताया कि दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक दिन पहले इमारत ढहने की घटना के बाद बचाव एजेंसियों ने अब तक मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला है, जबकि मलबे के नीचे फंसे लोगों की सटीक संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। यह बचाव अभियान सोमवार को भी दिनभर जारी रहने की उम्मीद है।

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एनडीआरएफ के महानिरीक्षक (आईजी) नरेंद्र बुंदेला ने कहा कि केंद्रीय आपदा मोचन बल के पास मलबे के नीचे फंसे लोगों की संख्या को लेकर 'कोई निश्चित आंकड़ा' नहीं है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ घटनास्थल पर लोगों के जिंदा होने के संकेतों की तलाश के लिए कटर, हाइड्रोलिक जैक और प्रशिक्षित श्वान दलों का इस्तेमाल कर रहा है। रविवार से ही एनडीआरएफ की दो तकनीकी टीम घटनास्थल पर तैनात हैं।