अब नहीं मिलेगा LPG गैस सिलेंडर! सरकार का बड़ा आदेश- PNG कनेक्शन लेना जरूरी, वरना कट जाएगा कनेक्शन

LPG Control Order 2026 Rules: भारत सरकार ने देश में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी कर एलपीजी सिलेंडरों की जगह पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा देने को कहा है। इसके पीछे कई वजह आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है।

नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत अब उन इलाकों में जहां पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां एक साथ एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यानी आप अब LPG सिलेंडर नहीं यूज कार पाएंगे।

PNG लेना अनिवार्य, वरना कट जाएगा LPG सिलेंडर कनेक्शन

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, सरकार ने एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होने के नियमों को सख्त कर दिया है। जिन सोसायटियों या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां के उपभोक्ताओं को नोटिस दिया जाएगा। अगर तय नोटिस मिलने के बावजूद कोई उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसका LPG सिलेंडर कनेक्शन अपने आप रद्द कर दिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट संकट और भारत का बड़ा सबक

सरकार द्वारा पीएनजी पर अचानक इतना जोर देने की सबसे बड़ी वजह हालिया पश्चिम एशिया संकट और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में हुआ व्यवधान है। भारत अपनी घरेलू रसोई गैस (LPG) की जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट जंग के कारण एलपीजी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

आयातित एलपीजी की तुलना में घरेलू पीएनजी सप्लाई ज्यादा सुरक्षित और मजबूत साबित हुई क्योंकि इसे घरेलू प्राकृतिक गैस का प्राथमिकता आवंटन मिलता है। पीएनजी से अंतरराष्ट्रीय युद्ध और लॉजिस्टिक्स रुकावटों का असर नहीं पड़ता।

हर जिले में बनेगी ‘PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी’

पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने विशेष प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को हर क्षेत्र में ‘पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी’ (PCC) गठित करने का निर्देश दिया गया है।

राज्यों से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं जो आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटियों से परमिशन और राइट ऑफ वे दिलाने में मदद करेंगे।

पीएनजी अपनाने के 4 बड़े फायदे

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पीएनजी में शिफ्ट होने से आम जनता और देश दोनों को सीधा फायदा होगा:

सस्ता और सुविधाजनक: पीएनजी सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सस्ती, सुरक्षित और बिना रिफिलिंग के 24×7 मिलने वाली रसोई गैस है।

सिलेंडर बुकिंग का झंझट खत्म: उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने या डिलीवरी का इंतजार करने से मुक्ति मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स का बोझ कम: सड़कों पर सिलेंडरों के परिवहन और भारी-भरकम गाड़ियों का बोझ कम होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल: सरकारी और प्राइवेट कंपनियों द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने में किए गए अरबों रुपये के निवेश का सही उपयोग हो सकेगा।

RBI के अनुमान को भी पीछे छोड़ सकती है भारत की GDP ग्रोथ, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिए ये बड़े संकेत

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि मार्च में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की ग्रोथ रेट 7% के करीब रह सकती है,जो सेंट्रल बैंक के 6.7% के अनुमान से बेहतर है। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में आई अखबार के आधार पर ब्लूमबर्ग ने बताया कि चेन्नई में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि उनका यह अनुमान अप्रैल-जून तिमाही के मजबूत रहने की उम्मीदों पर आधारित है। इस अवधि के आधिकारिक आंकड़े इस महीने के आखिर में आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान आम तौर पर 6.9% से 8% के बीच है। इसका मतलब है कि पूरे साल की ग्रोथ रेट काफी ज़्यादा,यानी 7% के करीब रह सकती है।

तमाम चुनौतियों के बावजूद कायम रही रफ्तार

इकोनॉमी की तेज रफ्तार से पता चलता है कि कमजोर मॉनसून और एनर्जी की बढ़ी लागत जैसे झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि गुप्ता का रुख हाल ही में काफी सख्त क्यों हो गया है। इस हफ्ते जारी RBI की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला कि गुप्ता ने इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी।

पूनम गुप्ता ने कहा “इन झटकों के बावजूद,आगे के लिए मैं कहूंगी कि 7.5% ग्रोथ तो तय है और हमें इससे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।”

बाहरी खातों को लेकर भी जताया भरोसा 

पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों (external accounts) को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि आगे स्थिति काफी बेहतर होगी। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि पहले घाटे के अनुमान के बावजूद,इस फाइनेंशियल ईयर में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट पॉजिटिव हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह विदेशी मुद्रा में गिरावट को रोकने के उपायों के बाद 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद है। इन उपायों में विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए खास इंसेंटिव भी शामिल हैं।

भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत 

पूनम गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा उम्मीदें जता रहे हैं,क्योंकि ईरान युद्ध के चलते जितने बुरे हालात का डर था,वे सच साबित नहीं हुए। मजबूत ग्रोथ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें कम से कम दो दशकों तक लगातार 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत हो सकती है।

 

 

Monetary Policy : अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर रही तो RBI ब्याज दरों में कर सकता है बढ़ोतरी – MPC मेंबर

FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

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LPG price today: LPG गैस सिलेंडर के दाम में राहत! आज से लागू हुए नए रेट, जानिए दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में आज की कीमतें

LPG price today: देशभर में एलपीजी (LPG) सिलेंडर के नए रेट लागू हो गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अगस्त से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही गैस सिलेंडर मिलेगा। जबकि होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

दिल्ली: ₹942

मुंबई: ₹941

कोलकाता: ₹968.50

चेन्नई: ₹958.50

वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में इस महीने ₹200 से अधिक की कटौती की गई है। इसका लाभ होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगा। सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं।

कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बाजार, आयात लागत और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर किया जाता है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर सस्ता होने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कमर्शियल सिलेंडर 200 रुपये सस्ता

होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाली कमर्शियल एलपीजी की कीमत में शनिवार को बड़ी कटौती की गई। इसके तहत 19 किलोग्राम के एलपीजी के सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की कमी की गयी है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानक दरों के रुख को देखते हुए किया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली सूचना के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2,930 रुपये के बजाय 2,738 रुपये का मिलेगा। वहीं, एटीएफ की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में दो बार कटौती

यह लगातार दूसरा महीना है, जब कमर्शियल एलपीजी की कीमत में कटौती की गई है। इससे पहले एक जुलाई को 183.50 रुपये प्रति सिलेंडर की कमी की गई थी। वहीं, एटीएफ की कीमत में वृद्धि ने एक जुलाई को की गई लगभग समान कटौती का असर खत्म कर दिया।

एक जुलाई और एक अगस्त को कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई कटौती से पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण जून में इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत जून में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई थी।

जबकि फरवरी में यह 1,740.50 रुपये थी। यानी इस दौरान इसमें कुल 1,373 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही बाजार मूल्य वाले पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 808.50 रुपये से घटाकर 762 रुपये कर दी गई है।

कब जारी होता है नया रेट?

हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया जाता है। वैट जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में इनकी कीमतें अलग-अलग होती हैं। फिलहाल आज यानी दो अगस्त को घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।

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घरेलू एलपीजी की कीमत में आखिरी बार सात जून को 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों ईंधनों की कीमतों में आखिरी बार मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

HPCL Stock Outlook: 23% तक उछल सकता है सरकारी कंपनी का शेयर, मोतीलाल ओसवाल ने दी खरीद की सलाह

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के शेयर में आगे 23 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल के टारगेट प्राइस से मिली है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। टारगेट प्राइस 470 रुपये प्रति शेयर रखा है। यह बीएसई पर शेयर के मौजूदा भाव 381.25 रुपये से 23 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद स्टॉक पर ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सरकारी कंपनी HPCL को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 11,526.41 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। एक साल पहले कंपनी को 4,575.87 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेजी ​आई। लेकिन फिर भी HPCL ने पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेचा। इसकी वजह से कंपनी का पिछले वित्त वर्ष का दो-तिहाई से अधिक लाभ खत्म हो गया। कंपनी का मुनाफा पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 17,258.13 करोड़ रुपये रहा था।

कंपनी को तिमाही के दौरान पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस LPG की बिक्री पर भारी नुकसान हुआ। इससे रिकॉर्ड रिफाइनिंग मार्जिन खत्म हो गया। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1.44 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 तिमाही में 1.19 लाख करोड़ रुपये था।

HPCL पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि HPCL ने मार्केटिंग मार्जिन उम्मीद से कम रहने के कारण ₹161.3 अरब का ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया। अनुमान ₹161.3 अरब के ऑपरेटिंग लॉस का था। ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (इन्वेंट्री सहित) नेगेटिव ₹14.9/लीटर रहा, जबकि अनुमान नेगेटिव ₹9.4/लीटर का था। LPG अंडर-रिकवरी ₹56 अरब रही। ब्रोकरेज को अनुमान है कि HPCL वित्त वर्ष 2028 में इक्विटी पर 17.3 प्रतिशत का रिटर्न दर्ज करेगी।

HPCL का मार्केट कैप 81100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर साल 2026 में अब तक 23 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक सरकार के पास 54.90 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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जेफरीज और नोमुरा का रुख

HPCL के शेयर पर जेफरीज ने “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस ₹325 प्रति शेयर रखा है। जून तिमाही में कंपनी का नुकसान ब्रोकरेज के अनुमान से कम था। ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि HPCL पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए घाटा दर्ज कर सकती है। इसकी वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद स्पॉट मार्केटिंग मार्जिन फिर से घाटे में चले गए हैं।

नोमुरा ने HPCL के लिए “न्यूट्रल” रेटिंग और ₹440 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। HPCL पर नजर रखने वाले 33 एनालिस्ट्स में से 15 ने “बाय” रेटिंग दी है। 7 ने “होल्ड” रेटिंग और 11 ने “सेल” रेटिंग दी है।

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Stocks to Watch : 23 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 13 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 23 जुलाई को कई बड़े स्टॉक्स फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कुछ के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। इसके अलावा एक कंपनी ने बड़ा जॉइंट वेंचर भी किया है। ऐसे में इन 13 शेयरों में गुरुवार को अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है।

IndusInd Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक IndusInd Bank का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 46.5% बढ़कर ₹1,002 करोड़ रहा। यह CNBC-TV18 के ₹725 करोड़ के अनुमान से बेहतर है। बैंक की NII 1% बढ़कर ₹4,685 करोड़ रही। एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 3.25% और नेट NPA 0.95% पर आ गया, जबकि प्रोविजन घटकर ₹1,340 करोड़ रह गया।

Dr Reddy’s

दवा बनाने वाली कंपनी Dr Reddy’s का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 69% घटकर ₹443.5 करोड़ रह गया। कंपनी की आय 6% घटकर ₹8,070.5 करोड़ रही। EBITDA 55% गिरकर ₹1,009 करोड़ पर आ गया और EBITDA मार्जिन 26.7% से घटकर 12.5% रह गया। कंपनी के नतीजे बाजार के अनुमान से भी कमजोर रहे।

United Spirits

शराब बनाने वाली कंपनी United Spirits का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 51.6% बढ़कर ₹391 करोड़ रहा। यह CNBC-TV18 के ₹316 करोड़ के अनुमान से बेहतर है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹2,703 करोड़ रहा, जो अनुमान से भी ज्यादा है।

HPCL

सरकारी तेल कंपनी HPCL को जून तिमाही में ₹11,526.4 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने ₹4,901.5 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी का EBITDA ₹16,141 करोड़ के घाटे में पहुंच गया। हालांकि, रेवेन्यू 22.3% बढ़कर ₹1.41 लाख करोड़ रहा। कंपनी ने घाटे के लिए कमजोर मार्केटिंग मार्जिन और पश्चिम एशिया संकट को जिम्मेदार बताया।

UCO Bank

सरकारी बैंक UCO Bank का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 8% बढ़कर ₹656.3 करोड़ हो गया। बैंक की NII 17% बढ़कर ₹2,808 करोड़ रही। एसेट क्वालिटी में सुधार के साथ ग्रॉस NPA 2.08% और नेट NPA 0.25% पर आ गया। वहीं, प्रावधान घटकर ₹234.6 करोड़ रह गए।

Shoppers Stop

रिटेल कंपनी Shoppers Stop की जून तिमाही में आय 11.2% बढ़कर ₹1,291.4 करोड़ रही। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹14.3 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹15.7 करोड़ था। EBITDA 9.2% बढ़कर ₹187.4 करोड़ हुआ। EBITDA मार्जिन मामूली घटकर 14.5% रह गया।

Nippon Life AMC

एसेट मैनेजमेंट कंपनी Nippon Life AMC का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 27.2% बढ़कर ₹504 करोड़ रहा। कंपनी की आय 26.4% बढ़कर ₹767 करोड़ हो गई। बेहतर एसेट मैनेजमेंट कारोबार की बदौलत कंपनी ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया।

Sona BLW

ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनी Sona BLW ने DENSO के साथ भारत में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड पावरट्रेन सिस्टम के लिए दो जॉइंट वेंचर बनाने का ऐलान किया है। चार पहिया वाहन JV में DENSO की 51% हिस्सेदारी होगी। दो और तीन पहिया EV JV में Sona BLW की 51% हिस्सेदारी रहेगी। DENSO इसके लिए ₹1,750 करोड़ का निवेश करेगी।

HEG

ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाने वाली कंपनी HEG का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 16.7% बढ़कर ₹122.3 करोड़ रहा। कंपनी की आय 11.1% बढ़कर ₹680.8 करोड़ और EBITDA 42.5% बढ़कर ₹150.6 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 17.3% से बढ़कर 22.1% पर पहुंच गया।

Schaeffler India

ऑटो कंपोनेंट्स कंपनी Schaeffler India का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 13.4% बढ़कर ₹325.7 करोड़ रहा। कंपनी की आय 17.3% बढ़कर ₹2,761 करोड़ हो गई। EBITDA 16% बढ़कर ₹499 करोड़ रहा, हालांकि EBITDA मार्जिन 18.1% पर मामूली नरम पड़ा।

Gandhar Oil

स्पेशलिटी ऑयल बनाने वाली कंपनी Gandhar Oil का जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन रहा। कंपनी का मुनाफा ₹44.13 करोड़ से बढ़कर ₹179 करोड़ पहुंच गया। आय 71.2%, EBITDA ₹249.2 करोड़ और मार्जिन 15.7% पर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है।

IIFL Finance

एनबीएफसी कंपनी IIFL Finance का जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा 189.3% बढ़कर ₹675.1 करोड़ रहा। कंपनी की NII 54.8% बढ़कर ₹2,003.9 करोड़ हो गई। वहीं, प्रावधान ₹512 करोड़ से घटकर ₹294.2 करोड़ रह गए, जिससे कंपनी के नतीजों में मजबूत सुधार देखने को मिला।

NACL Industries

एग्रोकेमिकल कंपनी NACL Industries का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 59.8% बढ़कर ₹20.84 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹13.04 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी ने बेहतर परिचालन के दम पर मजबूत नतीजे पेश किए। यह कंपनी हाल ही में मुरुगप्पा ग्रुप का हिस्सा बनी है।

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

जून तिमाही के नतीजों का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहेगा। 3i Infotech, Banaras Beads, Capital Small Finance Bank, Chennai Petroleum Corporation (CPCL), Cipla, Coromandel International, Indiabulls और Indian Energy Exchange (IEX) अपने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगे। निवेशकों की नजर इन शेयरों पर रहेगी।

HPCL Q1 Results: सरकारी तेल कंपनी को ₹11526 करोड़ का घाटा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत-अमेरिका डील से बढ़ सकती है देश की इकोनॉमी की ग्रोथ: सुरजीत भल्ला

दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारत ने पश्चिम एशिया संकट का सामना किया है। अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ की रफ्तार बढ़ा सकता है। मशहूर अर्थशास्त्री और आईएमएफ के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुरजीत भल्ला ने यह अनुमान जताया है। मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका से ट्रेड डील के फायदों के साथ ही इंडियन इकोनॉमी के बारे में कई अहम बातें बताईं।

पश्चिम एशिया क्राइसिस का भारत की ग्रोथ पर ज्यादा असर नहीं

पश्चिम एशिया में जारी टेंशन के बारे में उन्होंने कहा कि मैंने कई बार कहा है कि दुनिया बदल चुकी है। अमेरिका की ग्रोथ बहुत अच्छी है। उसने सबको हैरान किया है। फिर लड़ाई शुरू हो गई। यहां तक कि यूरोप की भी ग्रोथ अपनी रफ्तार से चल रही है। अब सवाल है कि दुनिया में किस देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है? हमें इस बारे में सोचना होगा। अगर उन्हें (अमेरिका-यूरोप) नुकसान उठाना पड़ा है और हमें नुकसान नहीं हुआ है तो इसका मतलब यह है कि इस लड़ाई का हमारे ग्रोथ रेट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

भारत में इकोनॉमी की ग्रोथ में घरेलू कंजम्प्शन की बड़ी हिस्सेदारी

भल्ला ने कहा कि इसकी वजह यह है कि हमारी ग्रोथ में ज्यादा योगदान घरेलू कंजम्प्शन का है, जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। विकासशील देशों में निवेश ज्यादा देखने को मिलता है। लेकिन, मेरा मानना है कि हर व्यक्ति इस बात से हैरान है कि पश्चमि एशिया संकट का ग्रोथ और इनफ्लेशन पर असल में असर नहीं पड़ा है। पहले ऑयल की कीमतों में उछाल का इनफ्लेशन पर ज्यादा असर पड़ा था। यही बात ग्रोथ के मामले में भी लागू होती है। सरकारें ऑयल की सप्लाई का रास्ता निकाल रही हैं।

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अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से बढ़ेगी ग्रोथ 

अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम से ट्रेड डील के बारे में उन्होंने कहा अमेरिका से व्यापार समझौते के कई फायदे हैं। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है। यह व्यापार और निवेश का समझौता है। हालांकि, हमने ईयू और यूके के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनमें निवेश का कोई प्रावधान नहीं है। ईयू दुनिया के सबसे ज्यादा रेगुलेटेड इकोनॉमीज में से एक है। यूके छोटा है। उसके बाद हमने न्यूजीलैंड से डील की। लेकिन, मेरा मानना है कि अमेरिका के साथ हमारा व्यापार और निवेश का समझौता सबसे अहम है। यह इंडियन इकोनॉमी की की कई समस्याएं दूर करेगा।

Nuvoco Vistas share Price :  Q1 नतीजों के बाद आई तेजी में 8 महीने के हाई पर पहुंचा शेयर, जानिए ब्रोकरेज ने क्या कहा

Nuvoco Vistas Share Price : बुधवार को नुवोको विस्टास (Nuvoco Vistas Corp) के शेयरों में 17% तक की बढ़त देखने को मिली है। NSE पर आज यह शेयर 398 रुपये प्रति शेयर के आठ महीने से ज्यादा के हाई लेवल पर जाता दिखा है। कंपनी ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके बाद र ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की कमाई का अनुमान बढ़ा दिया है।

जून तिमाही के नतीजे घोषित होने के बाद,पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में इस स्टॉक में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़त हुई है। नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म इस स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हो गए हैं। कंपनी के मैनेजमेंट ने नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में एनालिस्ट्स को बताया कि वित्त वर्ष 2027 की बाकी अवधि में सीमेंट की बिक्री में 7-8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

नुवोको विस्टास के मैनेजिंग डायरेक्टर जयकुमार कृष्णस्वामी ने कहा कि कंपनी ने साल की मजबूत शुरुआत की है। जियोपॉलिटिकल तनाव जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने बेहतर कारोबारी प्रदर्शन किया है। कंपनी ने EBITDA और PAT दोनों में सालाना आधार पर मजबूत ग्रोथ हासिल की है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए कृष्णस्वामी ने कहा कि कंपनी समझदारी से खरीद करने,लागत कम करने और सप्लाई चेन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर फोकस करना जारी रखेगी,साथ ही बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी नजर रखेगी।

नोमुरा की राय

नोमुरा का कहना है कि कंपनी के कॉस्ट मैनेजमेंट में और सुधार होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने FY27 के लिए कंपनी का EBITDA अनुमान 5 प्रतिशत बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया है। हालांकि,ब्रोकरेज का अनुमान है कि बिजली की लागत बढ़ने के कारण सितंबर तिमाही में EBITDA घटकर 890 रुपये प्रति टन रह सकता है। उसे उम्मीद है कि इस तिमाही में सीमेंट की बिक्री सालाना आधार पर लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 4.5 मिलियन टन हो जाएगी,जबकि कीमतों में पिछली तिमाही के मुकाबले 3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। नोमुरा ने स्टॉक पर अपनी’बाय’रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस भी 400 रुपये पर ही बरकरार रखा है।

HSBC की राय

HSBC ने भी नुवोको विस्टास पर अपनी’Buy’रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹475 कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे हासिल किए, जिसकी वजह ज्यादा रियलाइज़ेशन रहा। ब्रोकरेज का कहना है कि सितंबर तिमाही में मौसमी तौर पर कम मांग के बावजूद, FY27 की दूसरी छमाही में मांग,कीमत और लागत की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। उसने FY27-FY29 के लिए EPS अनुमान को भी 6-11 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।

जेफरीज की राय

जेफरीज ने भी 430 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर अपनी’बाय’रेटिंग बनाए रखी है। इसके पीछे बेहतर प्राइसिंग और पेटकोक का कम इस्तेमाल व बेहतर खरीद के ज़रिए लागत को असरदार ढंग से मैनेज करने जैसे कारण बताए गए हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि मुश्किल ऑपरेटिंग माहौल के बावजूद कंपनी का कामकाज मज़बूत रहा है,हालांकि सितंबर तिमाही में कुछ मौसमी सुस्ती और ज्यादा लागत का असर देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज ने कहा कि खरीदी गई वदराज एसेट की शुरुआत और उसके कामकाज को बढ़ाना एक अहम बात होगी जिस पर नजर रखनी होगी।

कंपनी को प्रदर्शन पर एक नजर

निरमा ग्रुप की बिल्डिंग मटीरियल बनाने वाली कंपनी,नुवोको विस्टास कॉर्प ने सोमवार को जून तिमाही के नतीजे पेश किए थे। इस अवधि में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 19.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 159.63 करोड़ रुपये पर रहा। कंपनी ने पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में 133.16 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।

जून तिमाही में कंपनी की कामकाजी आय 8.9 प्रतिशत बढ़कर 3,128.71 करोड़ रुपये पर रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2,872.70 करोड़ रुपये रही थी। इस तिमाही के दौरान सीमेंट की कुल बिक्री सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 53 लाख टन हो गई।

 

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Investment Mantra: जानिए 25% टूटने के बाद क्या अब है सोने में खरीदारी का मौका,अच्छे रिटर्न के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कितनी है जरूरी

Investment Mantra: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों के बीच लड़ाई जैसे ही बढ़ती है सोने की कीमतों में तेज गिरावट आती है। ऐसे में सोना रिकॉर्ड हाई से करीब 25% टूट चुका है। ऐसे में इतनी भारी गिरावट के बाद क्या सोने में निवेश का सही समय आ गया है? क्या आगे गोल्ड में फिर चमक लौटेगी? सिर्फ इतना ही नहीं पोर्टफोलियो की चमक बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग एक बड़ी थीम बनकर उभरी है। 2 साल की लगातार रैली के बाद क्या अब भी एक आम निवेशक ग्लोबल इन्वेस्टिंग की तरफ फोकस कर सकता है? इस सब सवालों के जबाव देनें के लिए हमारे साथ हैं ट्रुवांटा वेल्थ (Truvanta Wealth) के फाउंडर और CEO कीर्तन शाह

सोने में गिरावट के कारण

मार्च में कई सेंट्रल बैंकों ने करीब $30 bn का सोना बेचा है। तुर्की और रूस ने आगे बढ़कर सोना बेचा है। तुर्की ने अपनी गिरती करेंसी लीरा को संभालने के लिए सोना बेचा है। रूस ने यूक्रेन युद्ध खर्चों को पूरा करने के लिए सोना बेचा है। मार्च में कच्चा तेल महंगा होने से बॉन्ड यील्ड बढ़ीं हैं। यील्ड बढ़ने से फिक्स्ड इनकम निवेश की तरफ रुझान बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने भी दबाव बनाया है। सोने की कीमत डॉलर में तय होती है,मजबूत डॉलर से इसकी मांग घटती है।

अब सोने पर नजरिया?

कीर्तन शाह ने कहा कि अब धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने का समय है। ग्लोबल स्तर पर युद्धों में कमी आई है। करेंसी मैनेजमेंट और फंडिंग की जरूरतें घटेंगी। सेंट्रल बैंक फिर से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान देंगे। डी-डॉलराइजेशन का ट्रेंड भी सोने के पक्ष में है। सेंट्रल बैंकों की बैलेंस शीट में सोने की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 27% हो गई है। डॉलर रिजर्व की हिस्सेदारी 25% से घटकर 23% हो गई है। अप्रैल से सेंट्रल बैंकों ने फिर से सोने की खरीद शुरू की है। चीन ने पिछले महीने 19 महीनों में सबसे ज्यादा सोना खरीदा है। वह लगातार 19 महीनों से सोने की खरीद कर रहा है। US में दरें उतनी नहीं बढ़ेंगी,जितनी बाजार को आशंका थी। जिन कारणों से सोना गिरा था वही अब आगे सोने की कीमतों को सहारा देंगे।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी है, क्या पोर्टफोलियो में हिस्सा होना चाहिए?

इस पर बात करते हुए कीर्तन शाह ने कहा कि पिछले दो सालों ने साफ किया है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग बहुत जरूरी है। कई ऐसे निवेश थीम और अवसर हैं जो भारत में मौजूद नहीं हैं। इसलिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी हो जाती है। रुपये की सालाना लगभग 4% गिरावट भी इसका एक बड़ा कारण है।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी, क्या इस समय करें निवेश?

कीर्तन शाह ने कहा कि फिलहाल अभी हम ऐसा नहीं करेंगे। ग्लोबल बाजारों में पहले ही अच्छी तेजी आ चुकी है,सब भाव में है। ग्लोबल स्तर पर AI थीम की तेजी अब चुनिंदा शेयरों में ही है। अगर LLMs ( Large Language Models) शेयर देखें तो उनके सामने अब प्राइसिंग का दबाव है। टोकन प्राइस इंडेक्स 2.5 डॉलर प्रति मिलियम टोकन से घटकर 1.8 डॉलर पर आ गया है। चीन के ओपन-सोर्स मॉडल US कंपनियों पर भी दबाव बना रहे हैं।

तो अभी कहां करें निवेश?

कीर्तन शाह की राय है कि AI थीम में करेक्शन आया तो निवेशकों का रुख फिर से भारत की ओर होगा। भारतीय बाजारों में 2 साल से टाइम और वैल्यूएशन करेक्शन देखने को मिल रहा है। कई सेक्टर अब आकर्षक वैल्यूएशन पर दिखाई दे रहे हैं।

 

 

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