Crude Price: कच्चे तेल में उबाल, कीमत 3.7% बढ़कर एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब

कच्चे तेल की कीमत में फिर से तगड़ा उछाल है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति में जल्द राहत मिलने की उम्मीदें कम हो रही हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.94 डॉलर (3.7 प्रतिशत) बढ़कर 109.86 डॉलर पर बंद हुआ, जो 19 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 3.44 डॉलर (3.5 प्रतिशत) बढ़कर 101.41 डॉलर पर बंद हुआ, जो 17 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

इस सप्ताह अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.9 प्रतिशत और WTI की कीमत 10.4 प्रतिशत चढ़ी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब पर लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं। वहीं रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर निशाना बना रहे हैं।

इस साल 70 प्रतिशत चढ़ा कच्चा तेल

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है, क्योंकि मध्य पूर्व और रूस में चल रहे युद्धों के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। फिजिकल बाजारों में भी तंगी के संकेत मिल रहे हैं; डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में और भी तेज उछाल आया है। यूरोप में इस कमोडिटी के लिए फ्यूचर्स की कीमतें इस साल दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं।

Windfall Tax: सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया, डीजल पर ड्यूटी और घटी

रूस से डीजल रिलीज के समझौते पर रोक की कोशिश

शुक्रवार को अमेरिकी सांसदों ने एक बिल पेश किया, जिसका मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के बीच हुए उस समझौते को रोकना है, जिसके तहत रूस से कई सौ मिलियन बैरल डीजल रिलीज किया जाना था। समझौते पर रोक का कदम ऐसे किसी भी उपाय के खिलाफ व्यापक विरोध को दर्शाता है, जिससे रूस को अपने युद्ध कोष (War Chest) को मजबूत करने का मौका मिल सके।

अगर वैश्विक बाजारों से रूसी डीजल बाहर रहता है, तो अन्य जगहों की रिफाइनरियों को मांग पूरी करने के लिए ऑयल प्रोसेसिंग बढ़ानी पड़ेगी। हालांकि, ट्रंप ने फिर दोहराया है कि रूस डीजल जारी करने के समझौते पर अमल करेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैक सी के आसपास लगातार तनाव बना हुआ है। रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हमला हुआ है। इसके कारण वहां कामकाज रोकना पड़ा। इस हमले ने डीजल रिलीज के समझौते के पूरा होने को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है।

पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ा, डीजल पर भारी कटौती!

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया है जबकि डीजल पर शुल्क में 7.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।

इस संबंध में जारी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की अधिसूचना में कहा गया है कि निर्यात वाले पेट्रोल पर आज से 2.50 प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लगेगा जो पूरी तरह विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) के रूप में होगा। पहले यह 50 पैसे प्रति लीटर था। इस प्रकार इसमें दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर किया गया है। यह भी पूरी तरह से एसएईडी के रूप में है। इस प्रकार इसमें 7.50 रुपये की कमी हुई है। वहीं निर्यात वाले विमान ईंधन पर शुल्क 10.50 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखा गया है।

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निर्यात वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को विंडफॉल टैक्स के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में अचानक आई उछाल में मुनाफाखोरी के लोभ में निर्यात में असामान्य वृद्धि को रोकना है, ताकि घरेलू खपत के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आज से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर विंडफॉल टैक्स की समीक्षा हर पखवाड़े की जाएगी। पहले इनकी नियमित समीक्षा हर महीने होती थी।

सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान 27 मार्च 2026 से विंडफॉल टैक्स दोबारा लगाना शुरू किया था जो अबतक जारी है। उससे पहले दो साल से ज्यादा समय तक तीनों जीवाश्म ईंधनों पर कोई विंडफॉल टैक्स नहीं था।

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शेयर बाजारों की गिरावट बढ़ी, सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा टूटा

पश्चिम एशिया संकट सुलझने की संभावना और धूमिल होने के कारण गुरुवार घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई और दोपहर बाद बीएसई का सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा लुढ़क गया।

सेंसेक्स करीब 556 अंक की गिरावट में 74,272 अंक पर खुला। धीरे-धीरे इसकी गिरावट और बढ़ती गई। खबर लिखे जाते समय यह 1,214.82 अंक (1.62 प्रतिशत) लुढ़ककर 73,613.43 अंक पर था।

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सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां अभी गिरावट में हैं। बजाज फाइनेंस का शेयर छह प्रतिशत से ज्यादा टूट गया है।

ईरान ने “शर्तें पूरी होने तक” अमेरिका से बातचीत न करने की बात कही है। इससे बाजार में निवेश धारणा को धक्का पहुंचा है। साथ ही, कच्चे तेल में तेजी और रुपये में गिरावट के कारण भी शेयर बाजारों में बिकवाली देखी गई।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 225 अंक नीचे 23,222 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 380.05 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की गिरावट में 23,066.75 अंक पर रहा।

वृहत बाजार के और सेक्टर आधारित सभी सूचकांक लाल निशान में हैं।

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BRICS Summit 2026: दिल्ली में मौजूद रहेंगे दुनिया के ये ताकतवर नेता, ब्रिक्स सम्मेलन के लिए कौन-कौन आ रहा, ये रही पूरी लिस्ट

BRICS Summit 2026: दुनिया भर में बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, भारत शनिवार से शुरू हो रहे दो दिन के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल इस समूह को आर्थिक विकास के एक सहयोगी इंजन के तौर पर पेश करने के लिए कर रहा है। साथ ही, भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की विकास से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं—खासकर खाद्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन की सुरक्षा—की वकालत भी कर रहा है।

बता दें कि नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो रही हैं, और चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इसमें शामिल होने की पुष्टि भी कर दी है। करीब सात साल बाद यह उनकी भारत यात्रा होगी।

इस अहम बैठक में शामिल होने वाले अन्य शीर्ष नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं।

भारत के शीर्ष अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की मुख्य विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स (BRICS) समूह को एक अहम और पूरक मंच के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक बदलावों से पैदा हो रही आर्थिक चुनौतियों के बीच, हम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और मजबूत सप्लाई चेन से जुड़ी अहम कमजोरियों को दूर करने पर ध्यान दे रहे हैं।

BRICS Summit के बीच ग्लोबल इकोनॉमी के सामने बड़ी चुनौतियां

बता दें कि नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार व टैरिफ नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है।

समिट शुरू होने में बस दो दिन बचे हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि ग्रुप के सदस्य देश किसी साझा बयान पर सहमत हो पाए हैं या नहीं, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद बने हुए हैं। यह ग्रुप आम सहमति के आधार पर काम करता है।

BRICS में शुरू में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका शामिल थे। 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल होगा।

पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कज़ाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम BRICS के पार्टनर देश बने।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS का बढ़ता दबदबा

ध्यान दे कि BRICS एक प्रभावशाली ग्रुप के तौर पर उभरा है, क्योंकि यह दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है। ये देश दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत GDP और लगभग 26 प्रतिशत व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की BRICS की अध्यक्षता चार मुख्य स्तंभों— मजबूती (resilience), इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है।

अधिकारियों ने बताया कि मजबूती वाले हिस्से के तहत, भारत स्वास्थ्य, कृषि, भोजन, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी समिट के एजेंडे में अहम होगा।

भारत की BRICS अध्यक्षता का थीम क्या है?

भारत की BRICS अध्यक्षता का थीम है: ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’। यह थीम लोगों पर केंद्रित उस नजरिए को दिखाता है जो “मानवता सबसे पहले” की भावना पर आधारित है।

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन मुद्दों के अलावा BRICS देशों के नेता आपसी प्राथमिकताओं पर सहयोग मजबूत करने को लेकर भी चर्चा करेंगे। साथ ही, वे दुनिया और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐसे मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे, जो सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इस साल भारत की अध्यक्षता में BRICS को मजबूत करने के लिए देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और बड़े स्तर की चर्चाएं आयोजित की गई हैं। इनका मकसद BRICS की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यह साझेदारी तीन मुख्य क्षेत्रों पर आधारित है—राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क।

भारत चौथी बार संभाल रहा BRICS की कमान

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 1 जनवरी 2026 को भारत ने चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है।

बंद कमरे की बैठक से लेकर फैमिली फोटो तक, ऐसा रहेगा पहला दिन

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, शिखर सम्मेलन की शुरुआत शनिवार को दोपहर 2:35 बजे BRICS सदस्य देशों के लिए ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ (Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism) विषय पर एक बंद कमरे में होने वाले सत्र (closed-door session) के साथ होगी।

इस सत्र के बाद, नेता ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ (Bharat Innovates Exhibition) का दौरा करेंगे, जिसका उद्घाटन शाम 4:25 बजे होना है। शाम 5:05 बजे, नेता ‘भारत मंडपम’ – जो शिखर सम्मेलन का स्थल है – के लॉन में एक ‘फैमिली फोटो’ (सामूहिक तस्वीर) के लिए इकट्ठा होंगे, जिसके बाद संयुक्त रूप से वृक्षारोपण समारोह होगा। पहले दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शाम 7:30 बजे आयोजित एक भव्य रात्रिभोज (gala dinner) के साथ होगा।

रविवार को BRICS के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आमंत्रित देशों के नेता सुबह 9:55 बजे से भारत मंडपम पहुंचना शुरू करेंगे। इसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक ग्रुप फोटो ली जाएगी।

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ’ (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना) विषय पर उद्घाटन सत्र सुबह 10:50 बजे शुरू होगा।

यह शिखर सम्मेलन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) जारी होने के साथ संपन्न होगा।

दक्षिण अफ्रीका की एंट्री से BRIC बना BRICS

2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से गठित BRIC ने अपना पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया था।

2010 में UNGA के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने पर सहमति बनने के बाद यह समूह BRICS बन गया, और दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में सान्या में हुए अपने पहले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।

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ईंधन की बढ़ती कीमतों की मार! हिंडन से उड़ानों पर IndiGo की कैंची, कोलकाता-नवी मुंबई और वाराणसी की फ्लाइटें घटीं

IndiGo cuts flights: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने तीन प्रमुख घरेलू रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम कर दी है। विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5.5% बढ़ोतरी को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है। सितंबर में ATF की कीमत बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई है। इस वजह से इंडिगो अब हिंडन से सिर्फ 5 रूट्स वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई पर संचालन कर रही है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) और ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण एयरलाइंस अपनी कैपेसिटी घटाने पर मजबूर हैं।

एयरलाइन अधिकारियों के मुताबिक, ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत के दबाव में क्षमता को कम किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एयरलाइन की परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40-60% तक हो सकती है। हिंडन एयरपोर्ट पर कमर्शियल उड़ानों के संचालन की शुरुआत जून में हुई थी। जुलाई 2025 में इंडिगो ने यहां से नई उड़ानें शुरू की थीं। हालांकि, एयरपोर्ट पर सुबह से शाम तक संचालन की पाबंदियां और सीमित पार्किंग जैसी दिक्कतें भी एयरलाइनों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

इंडिगो फ्लाइट की संख्या में प्रमुख बदलाव

  • कोलकाता: रोजाना चलने वाली उड़ान अब सप्ताह में केवल 2 दिन (सोमवार और रविवार या बुधवार/रविवार) संचालित होगी।
  • नवी मुंबई: दैनिक (Daily) सेवाओं को घटाकर अब सप्ताह में 4 दिन कर दिया गया है।
  • वाराणसी: सप्ताह में 6 दिन चलने वाली सेवा को घटाकर अब 5 दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार) कर दिया गया है।

हिंडन से अब केवल 5 रूटों पर संचालन

इंडिगो वर्तमान में हिंडन से केवल 5 रूटों पर ही परिचालन कर रही है। इनमें वाराणसी, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और नवी मुंबई शामिल है। इसमें बेंगलुरु के लिए रोजाना उड़ानें जारी हैं। जबकि चेन्नई के लिए सप्ताह में 4 दिन (सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार) उड़ानें चल रही हैं।

ऑपरेशनल चुनौतियां और हिंडन की घटती कनेक्टिविटी

हिंडन टर्मिनल से संबंधित समस्याएं जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के जून में हुए कमर्शियल लॉन्च से भी पुरानी हैं। इंडिगो ने जुलाई 2025 में हिंडन से 8 नए रूट शुरू किए थे। लेकिन अहमदाबाद, इंदौर और पटना जैसे रूट कुछ ही महीनों में बंद कर दिए गए। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी इस टर्मिनल से पूरी तरह हट चुकी है।

हिंडन मूल रूप से भारतीय वायु सेना (IAF) का केंद्र है, जहां सुबह से शाम (dawn-to-dusk) तक ही उड़ान संचालन की अनुमति है। साथ ही यहां कमर्शियल विमानों के लिए सीमित पार्किंग जगह उपलब्ध है। वर्तमान में यहां केवल दो एयरलाइंस इंडिगो और स्टार एयर (नांदेड़ एवं आदमपुर के लिए) ऑपरेट कर रही हैं।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें

  • सितंबर में 5.5% की बढ़ोतरी: सितंबर से ATF की कीमतें 5.5% बढ़कर ₹121.3 प्रति लीटर हो गई हैं।
  • पिछले महीनों का हाल: जुलाई में कीमतें ₹110 प्रति लीटर और अगस्त में ₹115 प्रति लीटर थीं।
  • लागत पर असर: अधिकारियों के अनुसार, एयरलाइन की कुल परिचालन लागत (operating cost) में ईंधन का हिस्सा 40% से 60% तक होता है। घाटे से निपटने के लिए इंडिगो ने अपनी घरेलू क्षमता में 5% से 7% तक की कटौती की है। जबकि एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में 22% तक की कमी की है।

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अब नहीं मिलेगा LPG गैस सिलेंडर! सरकार का बड़ा आदेश- PNG कनेक्शन लेना जरूरी, वरना कट जाएगा कनेक्शन

LPG Control Order 2026 Rules: भारत सरकार ने देश में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी कर एलपीजी सिलेंडरों की जगह पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा देने को कहा है। इसके पीछे कई वजह आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है।

नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत अब उन इलाकों में जहां पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां एक साथ एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यानी आप अब LPG सिलेंडर नहीं यूज कार पाएंगे।

PNG लेना अनिवार्य, वरना कट जाएगा LPG सिलेंडर कनेक्शन

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, सरकार ने एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होने के नियमों को सख्त कर दिया है। जिन सोसायटियों या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां के उपभोक्ताओं को नोटिस दिया जाएगा। अगर तय नोटिस मिलने के बावजूद कोई उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसका LPG सिलेंडर कनेक्शन अपने आप रद्द कर दिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट संकट और भारत का बड़ा सबक

सरकार द्वारा पीएनजी पर अचानक इतना जोर देने की सबसे बड़ी वजह हालिया पश्चिम एशिया संकट और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में हुआ व्यवधान है। भारत अपनी घरेलू रसोई गैस (LPG) की जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट जंग के कारण एलपीजी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

आयातित एलपीजी की तुलना में घरेलू पीएनजी सप्लाई ज्यादा सुरक्षित और मजबूत साबित हुई क्योंकि इसे घरेलू प्राकृतिक गैस का प्राथमिकता आवंटन मिलता है। पीएनजी से अंतरराष्ट्रीय युद्ध और लॉजिस्टिक्स रुकावटों का असर नहीं पड़ता।

हर जिले में बनेगी ‘PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी’

पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने विशेष प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को हर क्षेत्र में ‘पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी’ (PCC) गठित करने का निर्देश दिया गया है।

राज्यों से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं जो आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटियों से परमिशन और राइट ऑफ वे दिलाने में मदद करेंगे।

पीएनजी अपनाने के 4 बड़े फायदे

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पीएनजी में शिफ्ट होने से आम जनता और देश दोनों को सीधा फायदा होगा:

सस्ता और सुविधाजनक: पीएनजी सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सस्ती, सुरक्षित और बिना रिफिलिंग के 24×7 मिलने वाली रसोई गैस है।

सिलेंडर बुकिंग का झंझट खत्म: उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने या डिलीवरी का इंतजार करने से मुक्ति मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स का बोझ कम: सड़कों पर सिलेंडरों के परिवहन और भारी-भरकम गाड़ियों का बोझ कम होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल: सरकारी और प्राइवेट कंपनियों द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने में किए गए अरबों रुपये के निवेश का सही उपयोग हो सकेगा।

RBI के अनुमान को भी पीछे छोड़ सकती है भारत की GDP ग्रोथ, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिए ये बड़े संकेत

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि मार्च में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की ग्रोथ रेट 7% के करीब रह सकती है,जो सेंट्रल बैंक के 6.7% के अनुमान से बेहतर है। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में आई अखबार के आधार पर ब्लूमबर्ग ने बताया कि चेन्नई में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि उनका यह अनुमान अप्रैल-जून तिमाही के मजबूत रहने की उम्मीदों पर आधारित है। इस अवधि के आधिकारिक आंकड़े इस महीने के आखिर में आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान आम तौर पर 6.9% से 8% के बीच है। इसका मतलब है कि पूरे साल की ग्रोथ रेट काफी ज़्यादा,यानी 7% के करीब रह सकती है।

तमाम चुनौतियों के बावजूद कायम रही रफ्तार

इकोनॉमी की तेज रफ्तार से पता चलता है कि कमजोर मॉनसून और एनर्जी की बढ़ी लागत जैसे झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि गुप्ता का रुख हाल ही में काफी सख्त क्यों हो गया है। इस हफ्ते जारी RBI की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला कि गुप्ता ने इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी।

पूनम गुप्ता ने कहा “इन झटकों के बावजूद,आगे के लिए मैं कहूंगी कि 7.5% ग्रोथ तो तय है और हमें इससे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।”

बाहरी खातों को लेकर भी जताया भरोसा 

पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों (external accounts) को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि आगे स्थिति काफी बेहतर होगी। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि पहले घाटे के अनुमान के बावजूद,इस फाइनेंशियल ईयर में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट पॉजिटिव हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह विदेशी मुद्रा में गिरावट को रोकने के उपायों के बाद 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद है। इन उपायों में विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए खास इंसेंटिव भी शामिल हैं।

भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत 

पूनम गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा उम्मीदें जता रहे हैं,क्योंकि ईरान युद्ध के चलते जितने बुरे हालात का डर था,वे सच साबित नहीं हुए। मजबूत ग्रोथ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें कम से कम दो दशकों तक लगातार 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत हो सकती है।

 

 

Monetary Policy : अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर रही तो RBI ब्याज दरों में कर सकता है बढ़ोतरी – MPC मेंबर

FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

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LPG price today: LPG गैस सिलेंडर के दाम में राहत! आज से लागू हुए नए रेट, जानिए दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में आज की कीमतें

LPG price today: देशभर में एलपीजी (LPG) सिलेंडर के नए रेट लागू हो गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अगस्त से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही गैस सिलेंडर मिलेगा। जबकि होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

दिल्ली: ₹942

मुंबई: ₹941

कोलकाता: ₹968.50

चेन्नई: ₹958.50

वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में इस महीने ₹200 से अधिक की कटौती की गई है। इसका लाभ होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगा। सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं।

कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बाजार, आयात लागत और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर किया जाता है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर सस्ता होने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कमर्शियल सिलेंडर 200 रुपये सस्ता

होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाली कमर्शियल एलपीजी की कीमत में शनिवार को बड़ी कटौती की गई। इसके तहत 19 किलोग्राम के एलपीजी के सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की कमी की गयी है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानक दरों के रुख को देखते हुए किया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली सूचना के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2,930 रुपये के बजाय 2,738 रुपये का मिलेगा। वहीं, एटीएफ की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में दो बार कटौती

यह लगातार दूसरा महीना है, जब कमर्शियल एलपीजी की कीमत में कटौती की गई है। इससे पहले एक जुलाई को 183.50 रुपये प्रति सिलेंडर की कमी की गई थी। वहीं, एटीएफ की कीमत में वृद्धि ने एक जुलाई को की गई लगभग समान कटौती का असर खत्म कर दिया।

एक जुलाई और एक अगस्त को कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई कटौती से पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण जून में इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत जून में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई थी।

जबकि फरवरी में यह 1,740.50 रुपये थी। यानी इस दौरान इसमें कुल 1,373 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही बाजार मूल्य वाले पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 808.50 रुपये से घटाकर 762 रुपये कर दी गई है।

कब जारी होता है नया रेट?

हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया जाता है। वैट जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में इनकी कीमतें अलग-अलग होती हैं। फिलहाल आज यानी दो अगस्त को घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।

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घरेलू एलपीजी की कीमत में आखिरी बार सात जून को 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों ईंधनों की कीमतों में आखिरी बार मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।