ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल आज सस्ता हुआ या महंगा? चेक करें अपने शहर का ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today:  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाला थोड़ा सा भी बदलाव सीधे आम लोगों के बजट को प्रभावित करता है। तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं। वहीं 8 अक्टूबर, गुरुवार को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आशंका और तेल सप्लाई प्रभावित होने की चिंता के कारण वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं।

ईंधन के दाम बढ़ने या घटने का असर सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों और सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए रोजाना पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जानना लोगों के लिए जरूरी है।

आपके शहर में आज कितनी है पेट्रोल, डीजल की कीमत

शहर                       पेट्रोल (₹/लीटर)            डीजल (₹/लीटर)

नई दिल्ली               102.12                               95.20

मुंबई                       111.21                                97.83

कोलकाता               113.51                                99.82

चेन्नई                       107.77                               99.55

गुड़गांव                  102.97                                95.64

नोएडा                   101.96                                 95.44

बेंगलुरु                  111.68                                  99.56

भुवनेश्वर                108.97                                 100.68

चंडीगढ़                 101.54                                 89.47

हैदराबाद               116.15                                  104.23

जयपुर                  112.66                                 98.25

लखनऊ                101.86                                 95.36

पटना                    113.37                                   99.36

तिरुवनंतपुरम       115.49                                  104.40

इस कंपनी ने बढ़ाए थे दाम

इस बीच, देश की बड़ी निजी ईंधन कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में तेजी का असर ग्राहकों तक पहुंचाने वाली नायरा एनर्जी पहली भारतीय ईंधन खुदरा कंपनी बनी थी।

कार, बाइक चलाने वालों को बड़ा झटका, इस कंपनी ने बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतें

कार और बाइक चलाने वाले लोगों को यह खबर झटका देने वाली है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। यह वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये बढ़ाई है, जबकि डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये बढ़ाई है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताई ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिटेल कीमतों में बढ़ते फर्क को कम करने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है।

ब्रेंट क्रूड फिर से लगातार 100 डॉलर से ऊपर 

बीते कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। इससे पेट्रोल और डीजल अपने पेट्रोल पंप्स से बेचने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। Nayara Energy देश की सबसे प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स है। देशभर में इसके 7,108 पेट्रोल पंप्स हैं। इस वृद्धि के बारे में ईमेल से पूछ गए सवालों के जवाब कंपनी ने नहीं दिए।

इस साल मार्च में नायरा ने सबसे पहले बढ़ाए थे प्राइस

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था। तब सबसे पहले नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये का इजाफा किया था। इससे इसके आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थी।

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी बढ़ाए थे प्राइस

नायरा एनर्जी के पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के बाद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई में बढ़ाना शुरू किया था। मई के आखिर तक पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 7.5 रुपये तक बढ़ गई थी। चौथी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। तब पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 2.61 और डीजल की कीमत प्रति लीटर 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।

नायरा ने जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं

नायरा एनर्जी ने बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटा दी थी। उसने 1 जलाई को पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये घटा दी थी। तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में नरमी आई थी। हालांकि, अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल सेल्स में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दबदबा है। हालांकि, अभी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है।

ऑयल कंपनियों को रोजाना हो रहा बड़ा नुकसान 

पिछले महीने रेटिंग एजेंसी इकरा ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सितंबर में उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का लॉस हो रहा था। इससे सितंबर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर उन्हें रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये का लॉस हो रहा था।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, दावा- 28 आतंकी मारे:तालिबान बोला- एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, हमले का जवाब देंगे

पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि हमले में 28 आतंकी मारे गए। वहीं, तालिबान सरकार ने कहा कि कुनार में 3 नागरिकों की मौत हुई और 4 लोग घायल हुए। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि कुनार में एक घर पर हुए हमले में एक महिला और दो पुरुष मारे गए। पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में भी दो जगहों पर बमबारी हुई। यहां एक घर और दुकान को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के मारे जाने की जानकारी नहीं है। मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान इस हमले का उचित जवाब देगा। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकी उसके खिलाफ हमले कर रहे हैं। तालिबान बोला- पाकिस्तान ने अमेरिकी बम से हमला किया तालिबान सरकार ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक में अमेरिका में बना Mk82 बम इस्तेमाल किया। अफगान सरकार ने बम के गाइडेंस सिस्टम का एक टुकड़ा भी जारी किया है। अफगान सरकार के मुताबिक, यह टुकड़ा Mk82 जनरल-पर्पस बम का है और सोमवार सुबह हुए पाकिस्तानी हमले में इसका इस्तेमाल किया गया था। Mk82 अमेरिका में बना सामान्य इस्तेमाल वाला बम है। पाकिस्तान का आरोप- तालिबान TTP को पनाह दे रहा पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में आतंकी हमले करते हैं। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट में शुक्रवार को पुलिस परिसर के पास एक आत्मघाती हमला हुआ था। इसमें 16 लोगों की मौत हुई थी। इसके अगले दिन हंगू में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में 6 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। पाकिस्तान इन हमलों के लिए अफगानिस्तान में मौजूद TTP और उससे जुड़े समूहों को जिम्मेदार मानता है और उनके ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराता है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। ———————- पाकिस्तान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी मंत्री बोले- पेट्रोल 1000 रुपए तक पहुंच सकता है:अब तक 50% महंगा हुआ, 389 रुपए लीटर कीमत पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 1000 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने रविवार को कहा कि अगर देश में पेट्रोल की कमी हुई तो कीमत और बढ़ सकती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तानी मंत्री बोले- पेट्रोल 1000 रुपए तक पहुंच सकता है:कमी हुई तो कीमतें बढ़ेंगी; अब तक 50% महंगा हुआ, 389 रुपए लीटर कीमत

पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 1000 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने रविवार को कहा कि अगर देश में पेट्रोल की कमी हुई तो कीमत और बढ़ सकती है। मंत्री के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल अब तक करीब 50% महंगा हो चुका है। फिलहाल पेट्रोल 389.14 रुपए प्रति लीटर और डीजल 424.04 रुपए प्रति लीटर है। मिडिल ईस्ट में लड़ाई बढ़ने से दुनिया में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इसका असर पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत पर पड़ रहा है। बाइक और छोटे वाहनों को सब्सिडी दे रही सरकार बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान सरकार ने बाइक, रिक्शा, चिंगची और 800 सीसी तक की कारों के लिए पेट्रोल पर सब्सिडी योजना शुरू की है। इसमें पेट्रोल पर 100 रुपए प्रति लीटर तक की सब्सिडी दी जा रही है। हर पात्र व्यक्ति को महीने में 4 टोकन मिलेंगे। हर टोकन पर 500 रुपए की सब्सिडी मिलेगी। योजना में अब 1 जनवरी 2006 से रजिस्टर्ड मोटरसाइकिलें भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, योजना में 17.5 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। करीब 15 लाख टोकन जारी हो चुके हैं और 6.80 लाख से ज्यादा टोकन इस्तेमाल किए जा चुके हैं। अक्टूबर तक पाकिस्तान में मिल सकता है घरेलू तेल पाकिस्तान सरकार देश में नए तेल भंडार खोजने पर काम कर रही है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के मुताबिक, तेल के कुओं पर काम शुरू हो चुका है और अक्टूबर तक कच्चा तेल मिलने की उम्मीद है। सरकार ने तेल और गैस की खोज के लिए नए ब्लॉक भी कंपनियों को दिए हैं। इसका मकसद देश में घरेलू उत्पादन बढ़ाना और विदेशों से तेल खरीदने पर खर्च कम करना है। अगर नए कुओं से व्यावसायिक स्तर पर तेल निकलता है, तो पाकिस्तान को अपनी जरूरत का कुछ हिस्सा देश में ही मिल सकेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर देश पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। खबर अपडेट हो रही है…

Fuel Prices: तेल की कीमतों में बंपर उछाल! बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल और केरोसिन सब महंगे, सरकार ने इतना बढ़ा दिया दाम

Fuel Prices: बिजली और गैस की किल्लत से पहले से जूझ रहे बांग्लादेश के लोगों और कारोबारियों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। बांग्लादेश सरकार ने तेल की कीमतों में 17.4 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। दुनिया भर में कच्चे तेल के बढ़ते दामों और मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से शिपिंग का खर्च बढ़ने से सरकार को काफी नुकसान हो रहा था। इसी घाटे को कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार से लागू हुई इन नई दरों से बांग्लादेश की आयात पर टिकी अर्थव्यवस्था में सामान की ढुलाई और उत्पादन का खर्च बढ़ जाएगा। इससे देश में महंगाई और बढ़ेगी। यह झटका ऐसे समय में लगा है जब देश के गारमेंट एक्सपोर्ट सेक्टर समेत प्रमुख उद्योग-धंधे पहले से ही बड़ी एनर्जी क्राइसिस का सामना कर रहे हैं।

जानिए क्या हैं पेट्रोल, डीजल और केरोसिन के नए दाम

बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक नई दरों के लागू होने के बाद डीजल की कीमत में सबसे ज्यादा 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब डीजल 115 टका प्रति लीटर से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह पेट्रोल की कीमत 140 टका से बढ़कर 160 टका प्रति लीटर पहुंच गई है। ऑक्टेन गैसोलिन के दाम 145 टका से बढ़कर 165 टका प्रति लीटर हो गए हैं, जबकि केरोसिन का दाम 135 टका से बढ़ाकर 155 टका प्रति लीटर कर दिया गया है।

इससे पहले सरकार ने इसी साल अप्रैल और जून के महीनों में भी तेल की दरें बढ़ाई थीं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े दामों की भरपाई की जा सके। बांग्लादेश टका की कीमत का हिसाब लगाने के लिए आप ये भी जान लीजिए कि अभी एक रुपये करीब 1.28 बांग्लादेशी टका के बराबर है।

सरकार ने क्यों बढ़ाए तेल के दाम?

ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि मार्च 2026 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं। इसके अलावा इलाके में चल रही उथल-पुथल की वजह से फ्रेट चार्ज भी काफी बढ़ गया है। मंत्रालय के मुताबिक सरकारी कंपनी बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को मार्च से अगस्त के बीच 228.76 अरब टका (लगभग 1.9 अरब डॉलर) का भारी घाटा हुआ है। सरकार का मानना है कि कीमतों में इस ताजा बढ़ोतरी से सालाना घाटे में करीब 100 अरब टका की कमी आएगी। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और पड़ोसी देशों में तेल की तस्करी पर भी रोक लगेगी, जहां कीमतें बांग्लादेश से ज्यादा हैं।

गैस और बिजली की सप्लाई पर असर

मंत्रालय ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी का भी जिक्र किया। सरकार ने कहा कि क्षेत्र में जारी ऊर्जा संकट और महंगे आयात के बावजूद उसने देश में बिजली और गैस की सप्लाई चालू रखने के लिए लगातार सब्सिडी दी है।

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Petrol Diesel Price Hike: क्या ₹10-₹15 महंगा होगा पेट्रोल? 7 पॉइंट्स में समझिए ट्रंप के नए 100% टैरिफ प्लान का पूरा गणित

US Sanctions India Petrol Price: अमेरिकी संसद ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों वाले बिल को पास कर दिया है। यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। अब सबसे बड़ा सवाल आम आदमी के मन में यह है कि क्या इस फैसले के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे?

अगर भारत रूसी सस्ता क्रूड ऑयल खरीदना बंद करता है या अमेरिका बैन लगाता है, तो पेट्रोल की कीमतें अचानक किसी एक झटके में नहीं बढ़ेंगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत विकल्प के तौर पर कहां से तेल खरीदता है, ग्लोबल क्रूड के दाम क्या रहते हैं और सरकार-तेल कंपनियां टैक्स में कितनी राहत देती हैं। इन 7 पॉइंट्स में समझिए आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा।

1. भारत आखिर कितना रूसी तेल खरीदता है?

साल 2022 के बाद से रूस भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने $40.8 अरब डॉलर का रूसी तेल आयात किया, जो कुल कच्चे तेल आयात का 30.3% था। जुलाई 2026 तक भारत के कुल तेल आयात में अकेले रूस की हिस्सेदारी 51% पहुंच गई थी। भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर रूसी सप्लाई रुकती है, तो भारत को बहुत बड़े पैमाने पर नया सप्लायर ढूंढना होगा।

2. क्या रूसी तेल बंद होते ही तुरंत महंगा हो जाएगा पेट्रोल?

जरूरी नहीं कि तुरंत ऐसा हो, और न ही यह गणित सीधा काम करता है।अगर भारतीय रिफाइनरियां (IOC, BPCL, HPCL) रूस से तेल खरीदना बंद करती हैं, तो वे मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और अमेरिका से क्रूड खरीद सकती हैं। पहले रूस $10 प्रति बैरल से ज्यादा का डिस्काउंट दे रहा था। हालांकि, मिड-2026 में रूस के ‘उराल्स’ क्रूड पर डिस्काउंट घटकर सिर्फ $1 से $2 प्रति बैरल रह गया है। यानी डिस्काउंट पहले से ही काफी कम हो चुका है, इसलिए रूसी तेल बंद होने का झटका उतना भयानक नहीं होगा जितना साल-दो साल पहले होता।

3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें है सबसे बड़ा खतरा

असली चुनौती भारत के रिफाइनरों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगी। अगर अमेरिकी बैन के कारण रूसी क्रूड इंटरनेशनल मार्केट से बाहर हो जाता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत हो जाएगी। मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनावों और सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव $105 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है। जब दुनिया में तेल की सप्लाई घटेगी, तो कच्चे तेल के दाम सभी के लिए बढ़ जाएंगे।

4. भारत दूसरा तेल ढूंढ तो लेगा, लेकिन ‘कीमत’ चुकानी होगी

भारत के पास सऊदी अरब, यूएई, इराक और अफ्रीकी देशों से तेल खरीदने का पुराना अनुभव है। लेकिन सप्लायर बदलना सिर्फ एक नया टैंकर भेजने जितना आसान नहीं होता। हर रिफाइनरी का स्ट्रक्चर खास तरह के कच्चे तेल के लिए डिजाइन होता है।साथ ही अचानक जब भारत और अन्य देश नए विकल्पों की ओर भागेंगे, तो बाजार में प्रीमियम और माल भाड़ा काफी बढ़ जाएगा, जिससे क्रूड एक्विजिशन कॉस्ट महंगी हो जाएगी जिसका सीधा असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

5. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें कई लेयर शामिल होती हैं।

पेट्रोल पंप की अंतिम कीमत = कच्चे तेल की लागत + रिफाइनिंग खर्च + भाड़ा + डीलर कमीशन + केंद्र की एक्साइज ड्यूटी + राज्यों का वैट (VAT)

पेट्रोल-डीजल जीएसटी से बाहर हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेकाबू होता है, केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर और तेल कंपनियां अपने मार्जिन को एडजस्ट करके आम जनता को सीधी महंगाई से बचाती हैं। जैसा मार्च 2026 में क्रूड $122 पहुंचने पर ₹10/लीटर एक्साइज घटाकर किया गया था।

6. तो आखिर कितने रुपये बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम?

इसका कोई एक तय आंकड़ा जैसे ₹10 या ₹20 नहीं दिया जा सकता। यह इन 3 संभावित स्थितियों पर निर्भर करेगा:

सिचुएशन 1 (सामान्य हालात): भारत रूस के बजाय दूसरे देशों से तेल खरीदता है और ग्लोबल सप्लाई सामान्य रहती है। इसका असर ये होगा कि तेल कंपनियों की लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम पर इसका असर ना के बराबर या बहुत मामूली होगा।

सिचुएशन 2 (रूस की सप्लाई पूरी ठप): अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल रुकने से ब्रेंट क्रूड तेजी से महंगा होता है। इससे रिफाइनरियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल ₹2 से ₹5 तक महंगे हो सकते हैं।

सिचुएशन 3 (रूस बैन + मिडिल ईस्ट संकट): अगर रूस के तेल पर रोक के साथ-साथ खाड़ी देशों में युद्ध/तनाव से सप्लाई ठप हो जाए। यह सबसे चिंताजनक स्थिति होगी। सरकार के लिए पुरानी दरों पर पेट्रोल बेचना मुश्किल हो जाएगा और कीमतों में बड़ा इजाफा देखना पड़ सकता है।

7. अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर पेट्रोल पर नहीं, एक्सपोर्ट पर होगा

यह बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को शक्ति देता है, यह अपने आप भारत पर 100% ड्यूटी लागू नहीं करता। वैसे अगर अमेरिका 100% टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत के पेट्रोल पंप पर नहीं, बल्कि अमेरिका जाने वाले भारतीय एक्सपोर्ट्स (कपड़ा, आईटी, जेम्स, दवाइयां) पर पड़ेगा। इससे भारतीय रुपया कमजोर होगा और घूम-फिरकर भारत के आयात बिल पर दबाव बनाएगा।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

भारत के सामने इस समय दो बड़े जोखिम ऑयल शॉक और ट्रेड शॉक खड़े हैं। सस्ता रूसी तेल छोड़ें, महंगा विकल्प चुनें और पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा झेलें। या फिर रूस से तेल खरीदना जारी रखें, अमेरिका के 100% टैरिफ का सामना करें और अपने एक्सपोर्ट सेक्टर को नुकसान पहुंचाएं।

फिलहाल, ग्राहकों को तुरंत पैनिक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार और तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वैश्विक उथल-पुथल के बीच कीमतों को स्थिर रखने का पूरा प्रयास करेंगी।

Petrol Diesel Price Today: क्रूड ऑयल 108 डॉलर पार, पेट्रोल-डीजल खरीदने से पहले चेक करें आज के नए भाव, अपने शहर की पूरी प्राइज लिस्ट देखें

Petrol Diesel Price Today: 11 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. मिडिल ईस्ट के प्रमुख के ट्रेड रूट्स खासकर समंदर से होने वाले कारोबार पर बढ़ते हमलों और सप्लाई में संभावित रुकावट की वजह से ग्लोबल बाजार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक करीब चार महीनों में पहली बार दोनों प्रमुख ग्लोबल बेंचमार्क हफ्ते का अंत 100 डॉलर से ऊपर रहकर करने की ओर बढ़ रहे हैं.

वैसे राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं.

पहले जानिए क्रूड ऑयल में तेजी क्यों?

रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.05 या 1 फीसदी चढ़कर $108.68 प्रति बैरल पर पहुंच गया है. वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 95 सेंट यानी 1 फीसदी बढ़कर $103.45 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. साप्ताहिक आधार पर दोनों बेंचमार्क में लगभग 13 फीसदी की जोरदार बढ़त दर्ज की गई है। ये 17 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से लाल सागर के रास्तों पर खतरा बढ़ गया है. यमन के मोचा बंदरगाह पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण होने और स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले तेज होने से रीजनल ऑयल सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है. यमन से सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम चढ़ रहे हैं.

दिल्ली, नोएडा, मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज के पेट्रोल-डीजल के भाव

देश के अलग अलग शहरों में वैट और स्थानीय टैक्स की अलग-अलग दरों के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग अलग होती हैं. 11 सितंबर को प्रमुख शहरों में ताजा दरें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: दिल्ली में आज 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.12और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं, प्रीमियम XP95 ₹109.24 और हाई-ऑक्टेन XP100 ₹167.35 प्रति लीटर पर उपलब्ध है.

नोएडा: नोएडा में पेट्रोल ₹101.77  प्रति लीटर और डीजल ₹95.26 प्रति लीटर है.

गुरुग्राम: गुरुग्राम में पेट्रोल ₹102.97और डीजल ₹95.64 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद में आज पेट्रोल ₹103.28 और डीजल ₹95.94 प्रति लीटर दर्ज किया गया है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल ₹101.89 और डीजल ₹95.36 प्रति लीटर बिक रहा है.

पटना: बिहार के पटना में पेट्रोल ₹113.37 प्रति लीटर और डीजल ₹99.36 प्रति लीटर के स्तर पर है.

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में पेट्रोल ₹105.26 और डीजल ₹100.49 प्रति लीटर है.

भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल में पेट्रोल ₹114.57, डीजल ₹99.64, XP95 ₹123.88 और XG ₹104.90 प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है.

जयपुर: राजस्थान के जयपुर में 1 लीटर पेट्रोल ₹112.69 और डीजल ₹97.78 में मिल रहा है.

देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून में पेट्रोल ₹100.55 प्रति लीटर और डीजल ₹95.93 प्रति लीटर है.

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पेट्रोल ₹103.25, डीजल ₹95.21 और प्रीमियम XP95 ₹111.90 प्रति लीटर बिक रहा है.

भारत में कौन से फैक्टर तैय करते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल वैल्यू को कई चीजें प्रभावित करती हैं. पहला है कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत. पेट्रोल और डीजल का उत्पादन कच्चे तेल से होता है. जब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो तेल रिफाइनरियों की लागत बढ़ जाती है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया की स्थिति का भी असर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो क्रूड आयात करना महंगा हो जाता है.

पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट (VAT) शामिल होता है, जिसके कारण हर राज्य में दरें अलग होती हैं. क्रूड ऑयल को पेट्रोल और डीजल में बदलने की रिफाइनिंग लागत और उसे देशभर के पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का मालभाड़ा भी अंतिम कीमत में जोड़ा जाता है. बाजार में ईंधन की खपत और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है. त्योहारों या मौसम के बदलाव के समय मांग बढ़ने पर भी इसका असर पड़ता है.

अपने मोबाइल पर SMS से ऐसे चेक करें अपने शहर के ताजा रेट

अगर आप अपने शहर में पेट्रोल और डीजल की नई दरें एसएमएस के जरिए जानना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बेहद आसान है-

Indian Oil (IOCL) ग्राहक: अपने मोबाइल से RSP <शहर का कोड> टाइप करें और इसे 9224992249 पर भेज दें.

Bharat Petroleum (BPCL) ग्राहक: मैसेज बॉक्स में RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें.

Hindustan Petroleum (HPCL) ग्राहक: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें.

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट्स पर प्रति लीटर 1.5 रुपये विंडफॉल टैक्स लगाया, क्या इसका असर पेट्रोल की कीमतों पर पड़ेगा?

सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट्स पर प्रति लीटर 1.5 रुपये का विंडफॉल टैक्स लगाया है। यह 1 सितंबर से लागू हो गया है। सरकार ने डीजल एक्सपोर्ट्स पर लेवी बढ़ाया है, जबकि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर ड्यूटी में कमी की है।

डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी बढ़ाकर प्रति लीटर 25 रुपये किया गया

डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी प्रति लीटर 24 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गई है। एटीएफ एक्सपोर्ट्स पर ड्यूटी 19.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपये कर दी गई है। पेट्रोल एक्सपोर्ट्स पर प्रति लीटर 1.5 रुपये की लेवी पूरी तरह से स्पेशन एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के रूप में चार्ज की जाएगी।

डीजल पर लेवी में से एक रुपया रोड एंड इंफ्रा सेस होगा

डीजल पर प्रति लीटर 24 रुपये की SAED लगेगी। बाकी 1 रुपये रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के रूप में लिया जाएगा। एटीएफ एक्सपोर्ट्स पर प्रति लीटर 19 रुपये की लेवी पूरी तरह से SAED के रूप में वसूली जाएगी।

सरकार हर पखवाड़ें एक्सपोर्ट लेवीज में रिवीजन करती है

ऐसा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट लेवीज में हर पखवाड़े होने वाले रिवीजन के तहत किया गया है। इसकी शुरुआत 27 मार्च, 2026 को हुई थी। इसका मकसद मध्यपूर्व में जारी संकट के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अंतिम बार 15 अगस्त को लेवीज में रिवीजन हुआ था।

15 अगस्त के रिवीजन में पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी निल की गई थी

15 अगस्त के रिवीजन में सरकार ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घाटकर निल कर दिया था। डीजल पर प्रति लीटर 24 रुपये का लेवी लगाया था। एटीएफ पर प्रति लीटर 19.5 लीटर की लेवी तय किया था। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रू़ड ऑयल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर रेट्स में रिवीजन करती है।

एटीएफ की एक्सपोर्ट लेवी में प्रति लीटर 50 पैसे की राहत

नए रिवीजन में पेट्रोल एक्सपोर्ट्स को पिछले रिवीजन में दी गई राहत को रिवर्स कर दिया गया है। डीजल एक्सपोर्ट्स पर लेवी प्रति लीटर 1 रुपये बढ़ा दिया गया है। एटीएफ एक्सपोर्ट्स पर लेवी में प्रति लीटर 50 पैसे की राहत दी गई है। सरकार ने कहा है कि घरेलू इस्तेमाल वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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घरेलू बाजार में नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल और डीजल की कीमतें

सरकार ने रेट्स में जो बदलाव किए हैं, वह सिर्फ एक्सपोर्ट्स पर लागू होगा। इसका घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल के सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।

पेट्रोल डीजल के दामों में लगी आग तो सड़कों पर उतर गए पाकिस्तानी और IMF को लगे कोसने

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ईंधन के महंगे होने, नई पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के विरोध में माल ढोने वाले ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। शनिवार से शुरू हुई इस हड़ताल का असर देश में सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के साथ बातचीत में अपनी मांगें पूरी नहीं होने के बाद ट्रक चालक, ट्रेलर ऑपरेटर और तेल टैंकर कंपनियां भी हड़ताल में शामिल हो गई हैं।

ट्रांसपोर्टरों के इस कदम से बाजारों तक सामान पहुंचाने में परेशानी बढ़ सकती है। इसका असर जरूरी सामान की सप्लाई पर भी पड़ने की आशंका है। यह हड़ताल ऐसे समय में शुरू हुई है, जब जमात-ए-इस्लामी ने पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद अब ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों और कारोबार पर पड़ने को लेकर पाकिस्तान सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

ट्रांसपोर्टरों ने क्यों शुरू की हड़ताल?

पाकिस्तान के ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि गाड़ियों को चलाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माल ढोने वाली गाड़ियां चलाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। ट्रांसपोर्टर सरकार से डीजल की कीमत कम करने, मोटरवे टोल घटाने और विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टर चाहते हैं कि पूरे पाकिस्तान में एक्सल-लोड के नियम एक जैसे लागू किए जाएं। उनकी मांग है कि 10 पहियों वाले ट्रकों को 35 टन तक सामान ले जाने की अनुमति दी जाए।

ट्रांसपोर्टरों की दूसरी मांगों में कस्टम के नियमों में बदलाव और हाईवे पर जुर्माना कम करना शामिल है। वे यह भी चाहते हैं कि पंजाब हाईवे पेट्रोल से कमर्शियल गाड़ियों के चालान काटने का अधिकार वापस लिया जाए। इसके अलावा, भारी माल ढोने वाली गाड़ियों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से जारी करने की भी मांग की गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इन समस्याओं का समाधान नहीं होने तक कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच बातचीत बेनतीजा

शुक्रवार को ट्रांसपोर्टरों के प्रतिनिधियों और पाकिस्तान के संचार मंत्री अलीम खान के बीच बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट इत्तेहाद के प्रवक्ता मोहम्मद ओवैस चौधरी ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों ने सरकार के सामने अपनी सभी समस्याएं और मांगें रख दी हैं। सरकार ने बातचीत के लिए सोमवार को एक और बैठक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। इस हड़ताल से पाकिस्तान में माल की आवाजाही और सामान की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।

पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें इतनी ज्यादा क्यों हैं?

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की लागत में बढ़ोतरी बताई जा रही है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। मार्च से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर पाकिस्तान में भी पड़ा है और सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बार-बार बदलाव करना पड़ा है। अप्रैल में पेट्रोल की कीमत बढ़कर रिकॉर्ड 459 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। वहीं, डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी।

पाकिस्तान के लिए डीजल बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में सड़क के जरिए होने वाले माल परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल से चलता है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ट्रकों और दूसरी कमर्शियल गाड़ियों के संचालन खर्च पर पड़ता है। इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, सरकार ने पेट्रोलियम लेवी भी लागू की है। यह लेवी ईंधन की अंतिम कीमत में जुड़ती है और इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर पड़ता है। यही वजह है कि पाकिस्तान में बढ़ती ईंधन कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सामान की कीमतों और आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।

पेट्रोलियम लेवी क्या है?

पेट्रोलियम लेवी ईंधन पर सरकार की ओर से लगाया जाने वाला एक शुल्क है। इसे पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों पर वसूला जाता है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है। पाकिस्तान में यह लेवी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है, क्योंकि इसे पहले से महंगे ईंधन के ऊपर लगाया गया है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सरकार से पेट्रोलियम लेवी हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार की आर्थिक और वित्तीय नीतियों का बोझ सीधे आम लोगों पर डाला जा रहा है।

शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हाफिज नईम-उर-रहमान ने कहा कि यह लेवी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी सरकार से इसे खत्म करने की अपील की। उन्होंने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोलियम लेवी कम करने से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं पर असर पड़ सकता है।

सड़कों पर उतरे आम पाकिस्तानी

ट्रांसपोर्टरों की लंबी हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। अगर हड़ताल ज्यादा दिनों तक जारी रहती है, तो देशभर में सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है। ट्रक और ट्रेलर शहरों के बीच खाने-पीने की चीजें, रोजमर्रा का सामान, कारखानों के लिए कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाते हैं। वहीं, तेल टैंकर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई का काम करते हैं।

अगर ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक बंद रहता है, तो कंपनियों को सामान पहुंचाने में देरी हो सकती है। साथ ही, उन्हें ढुलाई और सामान पहुंचाने पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर सामान की कीमतों पर पड़ सकता है और कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाली हड़ताल पाकिस्तान में महंगाई का दबाव और बढ़ा सकती है। यही महंगाई पहले से लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है और इसी के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

तेल टैंकर ऑपरेटरों के हड़ताल में शामिल होने से चिंता और बढ़ गई है। अगर ईंधन की ढुलाई प्रभावित होती है, तो पेट्रोल पंपों और दूसरे ईंधन वितरण केंद्रों तक पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में ईंधन की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी खड़ी हो सकती है।