IMD Heavy Rain Alert: उत्तर से दक्षिण तक मानसून का कहर! दिल्ली समेत इन राज्यों में 7 अगस्त तक भारी बारिश और तेज़ हवाओं का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, 2 से 7 अगस्त के बीच उत्तर, मध्य, पूर्व, पश्चिम, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

IMD ने 2 अगस्त से 7 अगस्त तक देश भर के मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान और अलर्ट जारी किया है। अगले कुछ दिनों तक उत्तर, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

उत्तर भारत में बारिश का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अगले कई दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की आशंका है। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।

मध्य और पूर्वी भारत पर भी मेहरबान रहेगा मानसून

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी व्यापक बारिश होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा बिहार, ओडिशा, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

इन राज्यों में तेज बारिश की आशंका

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी लगातार बारिश का दौर बना रहेगा। वहीं केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और लक्षद्वीप में भी कई स्थानों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। कुछ इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

पहाड़ी राज्य: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर (लद्दाख, गिलगित-बालटिस्तान और मुज़फ़्फ़राबाद) में 2 से 7 अगस्त के दौरान व्यापक स्तर पर भारी बारिश और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।

मैदानी क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 3 से 4 अगस्त के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 3 से 7 अगस्त और पूर्वी यूपी में 2 से 6 अगस्त के बीच भारी बारिश होने की आशंका है।

राजस्थान: पूर्व और पश्चिम राजस्थान में 2 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ 30-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।

कोंकण, गोवा और गुजरात: कोंकण और गोवा में 2 से 7 अगस्त तक लगातार भारी बारिश होगी। गुजरात क्षेत्र और सौराष्ट्र-कच्छ में 2 से 3 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, केरल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 2 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। 2 अगस्त को उत्तरी एवं दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं (Thundersquall) चल सकती हैं।

तापमान और बारिश की स्थिति

हालिया बारिश: पिछले 24 घंटों में केरल के कन्नानूर (11 सेमी) और त्रिशूर (10 सेमी) में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जबकि गुजरात के राजकोट में 7 सेमी बारिश हुई।

तापमान: मध्य प्रदेश के खरगोन में देश का सबसे कम न्यूनतम तापमान (18.2°C) और तमिलनाडु के तोंडी में सबसे अधिक अधिकतम तापमान (40.5°C) दर्ज किया गया।

मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र उग्र रहने की आशंका जताई है। गुजरात, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप और श्रीलंका से लगे समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।

अरब सागर: मौसम विभाग के मुताबिक, 6 अगस्त तक सोमालिया, ओमान तटों, गुजरात, कर्नाटक, केरल तटों और लक्षद्वीप के आसपास समुद्र में भीषण हलचल रहेगी।

बंगाल की खाड़ी: 6 अगस्त तक श्रीलंका तट और अंडमान सागर से सटे इलाकों में तेज हवाओं के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

बीते 24 घंटे में इन राज्यों में हुई अच्छी बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान असम-मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी राजस्थान, पश्चिम उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, कोंकण-गोवा, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों में व्यापक बारिश दर्ज की गई। केरल और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

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LPG price today: LPG गैस सिलेंडर के दाम में राहत! आज से लागू हुए नए रेट, जानिए दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में आज की कीमतें

LPG price today: देशभर में एलपीजी (LPG) सिलेंडर के नए रेट लागू हो गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अगस्त से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही गैस सिलेंडर मिलेगा। जबकि होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

दिल्ली: ₹942

मुंबई: ₹941

कोलकाता: ₹968.50

चेन्नई: ₹958.50

वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में इस महीने ₹200 से अधिक की कटौती की गई है। इसका लाभ होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगा। सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं।

कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बाजार, आयात लागत और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर किया जाता है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर सस्ता होने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कमर्शियल सिलेंडर 200 रुपये सस्ता

होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाली कमर्शियल एलपीजी की कीमत में शनिवार को बड़ी कटौती की गई। इसके तहत 19 किलोग्राम के एलपीजी के सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की कमी की गयी है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानक दरों के रुख को देखते हुए किया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली सूचना के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2,930 रुपये के बजाय 2,738 रुपये का मिलेगा। वहीं, एटीएफ की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में दो बार कटौती

यह लगातार दूसरा महीना है, जब कमर्शियल एलपीजी की कीमत में कटौती की गई है। इससे पहले एक जुलाई को 183.50 रुपये प्रति सिलेंडर की कमी की गई थी। वहीं, एटीएफ की कीमत में वृद्धि ने एक जुलाई को की गई लगभग समान कटौती का असर खत्म कर दिया।

एक जुलाई और एक अगस्त को कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई कटौती से पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण जून में इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत जून में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई थी।

जबकि फरवरी में यह 1,740.50 रुपये थी। यानी इस दौरान इसमें कुल 1,373 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही बाजार मूल्य वाले पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 808.50 रुपये से घटाकर 762 रुपये कर दी गई है।

कब जारी होता है नया रेट?

हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया जाता है। वैट जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में इनकी कीमतें अलग-अलग होती हैं। फिलहाल आज यानी दो अगस्त को घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।

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घरेलू एलपीजी की कीमत में आखिरी बार सात जून को 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों ईंधनों की कीमतों में आखिरी बार मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

Ethanol Petrol Row: ‘…तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर होती’; एथेनॉल विवाद पर सरकार का बड़ा दावा

Ethanol Blending E20 Petrol Row: पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम का बचाव करते हुए दावा किया है जब ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $135 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने फ्यूल में एथेनॉल नहीं मिलाया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर होती। मंत्रालय ने कहा कि लेकिन इसके बजाय ग्राहकों को ₹94.77 प्रति लीटर चुकाना पड़ा। दरअसल एथेनॉल पहले से तय कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदा गया था। इसने क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के असर से रिटेल कीमतों को बचाए रखने में मदद की, जिससे संकट के चरम पर लगभग ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई।

सरकार ने 28 फरवरी को वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद लगभग 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। फिर मई में उन्हें 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया। दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत अब ₹102.12 प्रति लीटर है। जबकि 100-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत ₹169 है। मंत्रालय ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि गरीबों के लिए अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा था, या इस प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए सब्सिडी वाले FCI चावल का इस्तेमाल किया जा रहा था।

एफिशिएंसी में 2-6% की कमी!

फ्यूल एफिशिएंसी के सवाल पर सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में ARAI, SIAM और IOC की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि E10 फ्यूल के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पर चलने पर वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर एफिशिएंसी में 2-6% की कमी आ सकती है। मंत्रालय ने पहले 20 जुलाई को राज्यसभा को बताया था कि ऐसे वाहनों में यह कमी लगभग 3-5% तक सीमित है।

दोनों मंत्रालयों ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया के माध्यम से शुरू किया गया था, जिसमें प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के साथ-साथ ब्लेंडिंग का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि E20 पर स्विच करने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, गाड़ी चलाने में आसानी, मटीरियल की अनुकूलता और उत्सर्जन पर असर की जांच-परख के बाद लिया गया।

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इस प्रक्रिया में वाहन बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और चीनी एवं अनाज उद्योगों से भी सलाह-मशविरा किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि लैब स्टडीज और असल दुनिया के डेटा से पता चला है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। साथ ही, 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ब्लेंड्स पर चल चुकी हैं। इनमें एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है।

E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।