Ajit Agarkar: अजीत अगरकर की विदाई तय? जानें क्यों छोड़ रहे चीफ सिलेक्टर का पद

पिछले कुछ समय से अजीत अगरकर के कार्यकाल को लेकर काफी चर्चा हो रही है। अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म होने वाला है। वहीं बीसीसीआई उनका कार्यकाल आगे बढ़ाएगी या नहीं इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। इसी बीच खबर है कि अजीत अगरकर ने बीसीसीआई की सीनियर पुरुष सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है। वहीं अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अजीत अगरकर को 2023 में भारत की सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य चयनकर्ता बनाया गया था। चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े फैसले लिए। अब खबर है कि पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल अगरकर की जगह लेने वाले संभावित नामों में शामिल हैं।

खत्म हो रहा अजीत अगरकर का कार्यकाल

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अगरकर ने बीसीसीआई को बता दिया है कि 4 अक्टूबर को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वह चयनकर्ता के पद पर आगे काम नहीं करना चाहते हैं। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, “अजीत अगरकर ने एजीएम से ठीक पहले बीसीसीआई को आधिकारिक तौर पर बता दिया है कि 4 अक्टूबर को उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद वह सिलेक्टर के तौर पर आगे काम नहीं करना चाहते हैं।”

नए सिलेक्टर की तलाश में बीसीसीआई

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने HT को बताया, अजीत अगरकर से बातचीत के बाद बीसीसीआई अब नए चीफ सिलेक्टर की तलाश कर रहा है। अधिकारी ने बताया, “बातचीत के दौरान अगरकर ने फरवरी में बोर्ड के साथ हुई अपनी पिछली चर्चा का जिक्र किया। उस समय उन्होंने पहली बार बोर्ड के बड़े अधिकारियों से कहा था कि उनके मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद किसी दूसरे विकल्प पर विचार किया जाए।” बीसीसीआई की सदस्य यूनिट्स ने अधिकारियों को अजीत अगरकर के भविष्य पर फैसला लेने की जिम्मेदारी दी है।

बढ़ेगा अगरकर का कार्यकाल

पीटीआई के मुताबिक, बीसीसीआई को तय करना है कि अगरकर का कार्यकाल बढ़ाया जाए या नया चीफ सिलेक्टर चुना जाए। यह खबर अगरकर और बोर्ड अधिकारियों की बातचीत के कुछ घंटे बाद आई। मौजूदा चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म होने वाला है। ऐसे में बीसीसीआई उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने या उनकी जगह नया चीफ सिलेक्टर नियुक्त करने पर विचार कर सकता है। बीसीसीआई सीनियर सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य के साथ-साथ जूनियर सिलेक्शन कमिटी के पांचों पदों को भरने पर भी विचार कर रहा है।

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टाटा समूह में छिड़ा घमासान

मुंबई। देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक टाटा समूह में घमासान छिड़ गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को ऐलान किया कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन पांच साल और पद पर रहेंगे। बोर्ड ने उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया। इसके तुरंत बाद टाटा समूह के प्रमुख नोएल टाटा ने फैसले को गैरकानूनी बताया। असल में टाटा संस लिमिटेड को बोर्ड ने एक वोटिंग के जरिए 4-1 से चंद्रशेखर के पक्ष में फैसला किया और उनको चेयरमैन बनाए रखने की ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि उन्होंने अगस्त में चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।

अब बोर्ड के फैसले को लेकर घमासान छिड़ा है। नोएल टाटा ने उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने को गैरकानूनी करार दिया है। नोएल टाटा ने कहा है कि उन्होंने चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाए रखने के खिलाफ वोट किया था। उनका वोट बोर्ड के अंदर वीटो की हैसियत रखता है। इसका अर्थ है कि बाकी लोग कुछ भी कहें अंतिम फैसला नोएल टाटा माना जाएगा। उनका कहना है कि एक गलत कानूनी राय के आधार पर उनके वीटो को खारिज कर दिया गया।

जानकार सूत्रों का कहना है कि यह विवाद आगे बढ़ने वाला है। बताया जा रहा  है कि टाटा समूह की आम सभा यानी एजीएम की बैठक में नोएल टाटा चेयरमैन पद से चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि टाटा संस की सालाना बैठक पिछले दिनों टाल दी गई थी। लेकिन 31 दिसंबर से पहले यह बैठक करानी होगी। उसमें चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास हो सकता है।

बहरहाल, इससे पहले बोर्ड ने गुरुवार को चंद्रशेखर के तीसरे कार्यकाल की मंजूरी दी। इसके साथ ही कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ध्यान रहे अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। उससे पहले उन्होंने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। कहा गया था कि नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। अब उनको तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो उसकी मंजूरी एजीएम में लेनी होगी। उसमें टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी 66 फीसदी है। वहां पर नोएल टाटा चंद्रशेखरन की नियुक्ति को रोक सकते हैं।

अगर चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की नियुक्ति मिलती है तो टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की नीति के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल फरवरी 2027 से शुरू होगा और 2032 में खत्म होगा। गौरतलब है कि चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया।

Tata Sons News: नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को गैरकानूनी बताया, जानिए आखिर यह पूरा मामला क्या है

Tata Sons News: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को 17 सितंबर को एक्सटेंशन मिल गया। वह 20 फरवरी, 2027 को कार्यकाल खत्म होने के अगले 5 सालों तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को हुआ, जिसमें चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव 4-1 के वोट से पारित हो गया। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

टाटा ने रीअप्वाइंटमेंट पर उठाए सवाल

नोएल टाटा ने अब कहा है कि टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति गैरकानूनी है। उन्होने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बोर्ड के फैसले पर सवाल उठाए हैं। इसका असर देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप की लीडरशिप पर प़ड़ सकता है। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसके चेयरमैन चंद्रशेखरन है, जबकि नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं।

टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ दिया वोट 

टाटा ने कहा, “मैंने चंद्रा की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। कानूनी राय के आधार पर गलत तरीके से मेरे वीटो को खारिज कर दिया। यह फैसला गैरकानूनी है। मैंने अपना विरोध दर्ज कराया।” उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए संक्षिप्त इंटरव्यू में यह बात बताई। टाटा समूह के शेयरों में चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन के बाद तेजी दिखी।

अब एजीएम में चंद्रा को हटाने की कोशिश होगी

इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि अब नोएल टाटा का नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन को टाटा संस से बाहर करने की कोशिश करेगा। एक व्यक्ति ने बताया, “अगर उन्हें एक बार डायरेक्टर पद से हटा दिया जाता है तो वह चेयरमैन के पद पर बने नहीं रह सकते।”

SRTT के मसले के समाधान के बाद होगी एजीएम

व्यक्ति ने कहा, “सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के मसले के समाधान के बाद एजीएम होगी।” इस मामले की जानकारी रखने वाले एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “टाटा के ट्रस्टों में से एक ने पहले ही चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है और उसने तीसरी बार पुनर्नियुक्ति नहीं चाहने के चंद्रशेखर के फैसले को भी स्वीकार कर लिया है।”

टाटा संस आर्टिकल्स एसोसिएशन के एक आर्टिकल से फंसा पेच

इस बारे में जानकारी के लिए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। इस पूरे विवाद की जड़ में टाटा संस आर्टिकल्स एसोसिएशन का एक आर्टिकल है। इसमें यह कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से टाटा संस के बोर्ड में नियुक्त आधे से ज्यादा डायरेक्टर्स की मंजूरी के बाद ही कोई फैसला लागू हो सकता है।

SDTT ने चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है

टाटा संस के बोर्ड में एन चंद्रशेखरन, नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनीता एम जॉर्ज शामिल हैं। टाटा के दो प्रमुख ट्रस्टों में से एक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने 12 अगस्त को चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के ऐलान के बाद कहा था कि वह चंद्रशेखरन के फैसले का सम्मान करता है। एसडीटीटी ने टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश के लिए एक कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

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अब दिसंबर तक होने वाली एजीएम पर टिकी निगाहें 

अब नजरें टाटा संस की एजीएम पर होंगी, जिसे पहले टाला जा चुका है। 31 दिसंबर तक एजीएम जरूरी है। यह एजीएम इसलिए अहम है, क्योंकि रोटेशन के आधार पर चंद्रशेखरन को टाटा संस के डायरेक्टर पद से रिटायर होना है और उनकी पुनर्नियुक्ति के लिए शेयरोल्डर्स का एप्रूवल जरूरी है।

नोमुरा ने दी इस दिग्गज ऑटो कंपनी के शेयर खरीदने की सलाह, एक साल में 29% चढ़ा स्टॉक

इस शेयर ने बीते एक साल में निवेशकों का करीब 29 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव रहा है। हम बात कर रहे हैं दोपहिया बनाने वाली दिग्गज कंपनी टीवीएस मोटर की। यह कंपनी स्कूटी, मोटरसाइकिल और थ्री-व्हीलर्स बनाती है। यह इलेक्ट्रिक दो-पहिया और थ्री-व्हीलर्स भी बनाती है।

विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने TVS Motor के शेयरों को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। उसने पेमन कारगर की डायरेक्टर एवं सीईओ पद पर नियुक्ति के बाद शेयर पर अपनी बाय रेटिंग बनाए रखी है। कारगर की नियुक्ति 27 जनवरी, 2027 से प्रभावी होगी। वह केएन राधाकृष्णन की जगह लेंगे, जो जनवरी के आखिर तक अपने पद पर बने रहेंगे। उसके बाद वह जुलाई 2027 में कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) तक कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रहेंगे।

केएन राधाकृष्णन ने 2004 में टीवीएस मोटर में नौकरी शुरू की थी। वह 2008 में कंपनी के प्रेसिडेंट बन गए। वह 2018 में डायरेक्टर और सीईओ बने। उनके कार्यकाल में टीवीएस मोटर का रेवेन्यू सीएजीआर 16 फीसदी और टैक्स बाद प्रॉफिट का सीएजीआर 30 फीसदी रहा। FY08 में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.3 अरब रुपये था। यह 28 अगस्त को बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपये हो गया।

कारगर ने टीवीएस मोटर में बतौर प्रेसिडेंट (इंटरनेशनल बिजनेस) अप्रैल 2025 में नौकरी शुरू की थी। उन्हें दुनिया के कई देशों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। इनमें यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट शामिल हैं। टीवीएस मोटर में आने से पहले वह Infiniti के ग्लोबल चेयरमैन एवं प्रेसिडेंट थे। यह निसान का लग्जरी ब्रांड है।

ब्रोकरेज फर्म ने बताया है कि नॉर्टन की जल्द लॉन्चिंग से प्रीमियम सेगमेंट में एग्जिक्यूशन पर नजरें होंगी। उसने कहा है कि नए सीईओ के तहत कंपनी के प्रीमियम और ग्लोबल सेगमेंट पर ज्यादा फोकस होगा। इसकी वजह यह हहै कि कारगर को लग्जरी और ग्लोबल ब्रांड्स का व्यापक अनुभव है।

TVS Motor का शेयर 31 अगस्त को 0.41 फीसदी चढ़कर 4,322 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.39 फीसदी यानी 95 अंक गिरकर 24,080 पर रहा। सेंसेक्स 0.40 फीसदी यानी 307 अंक गिरकर 76,957 पर क्लोज हुआ। हांलांकि, बैंक निफ्टी हरे निशान में बंद हुआ।

टाटा संस की 17 सितंबर को बड़ी बैठक, एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे और नए बॉस पर आएगा बड़ा अपडेट!

Tata Sons Board Meeting: टाटा ग्रुप के मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस की बोर्ड मीटिंग 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भले ही चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से पीछे हटने का मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन इस बैठक में इस पर गर्मा-गर्मी से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने तीसरा कार्यकाल न लेने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही टाटा ग्रुप के पावर कॉरिडोर में हलचल तेज है। आइए समझते हैं कि 17 सितंबर की इस बैठक में क्या-क्या खास हो सकता है और बोर्ड के भीतर समीकरण कैसे बने हुए हैं।

17 सितंबर की बैठक में क्या होगा खास?

यह बैठक टाटा संस की नियमित तिमाही बोर्ड बैठक है, लेकिन 18 अगस्त को कोरम की कमी के चलते टली टाटा संस की AGM की नई तारीख पर भी इसमें चर्चा होगी।अभी यह साफ नहीं है कि कोई डायरेक्टर औपचारिक रूप से चंद्रशेखरन से अपना फैसला बदलने का अनुरोध करेगा या नहीं। अगर चंद्रशेखरन के फैसले पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव आता है, तो यह बोर्ड के प्रमुख हितधारकों के प्रभाव की असली परीक्षा होगी।

टाटा बोर्ड में दो फाड़: नोएल टाटा बनाम वेणु श्रीनिवासन

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा संस के बोर्ड में दो बड़े दिग्गजों के रुख बिल्कुल अलग रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने ग्रुप की कुछ कंपनियों में नुकसान और कैपिटल एलोकेशन को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने चंद्रशेखरन से टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) को लेकर भी स्थिति साफ करने को कहा था।

दूसरी तरफ, टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन, चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने के पक्ष में रहे हैं।

टाटा संस के नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति या री-अपॉइंटमेंट के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा मनोनीत कुल डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन होना अनिवार्य है।

बोर्ड के बाकी डायरेक्टर्स का क्या है रुख?

टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के अलावा तीन और सदस्य हैं सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनिता जॉर्ज।

सौरभ अग्रवाल: एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और चंद्रशेखरन की कोर टीम का अहम हिस्सा माने जाते हैं।

हरीश मनवानी व अनिता जॉर्ज: ये दोनों इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स हैं। मनवानी टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) के चेयरमैन भी हैं।

उत्तराधिकारी की तलाश और ट्रस्ट्स का कानूनी पेच

चंद्रशेखरन के बाद नया चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। 13 अगस्त को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने नया चेयरमैन चुनने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की बैठकों पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की कार्यवाही के कारण फिलहाल रोक लगी हुई है। चूंकि दोनों मुख्य ट्रस्ट्स को मिलकर कमेटी के सदस्य तय करने होते हैं, इसलिए इस कानूनी पेंच के कारण एजीएम और उत्तराधिकार की प्रक्रिया में मुश्किलें आ रही हैं।

17 सितंबर की बोर्ड बैठक टाटा ग्रुप के आने वाले भविष्य के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। अगर बोर्ड के सदस्य चंद्रशेखरन को अपना फैसला बदलने के लिए मना लेते हैं तो कहानी बदल सकती है, वरना नए चेयरमैन की तलाश वाली सिलेक्शन कमेटी की राह और तेज हो जाएगी।

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां देने जा रही हैं बोनस शेयर, डिविडेंड देने का भी प्लान

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां बोनस शेयर और डिविडेंड देने जा रही हैं। इनमें मोल्ड-टेक पैकेजिंग और मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। दोनों कंपनियों ने 21 अगस्त को इसका ऐलान किया। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। मोल्ड-टेक के शेयर कारोबार के अंत में शेयर 3.60 फीसदी चढ़कर बंद हुए। मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज के शेयर 1.21 फीसदी चढ़कर 191.35 रुपये पर बंद हुए।

FY26 के लिए होगा डिविडेंड का ऐलान 

Mold-Tek Packaging और Mold-Tech Technologies के बोर्ड की बैठक 26 अगस्त यानी बुधवार को होगी। इस मीटिंग में फाइनल डिविडेंड देने के बारे में भी फैसला होगा। यह डिविडेंड 31 मार्च, 2026 को खत्म फाइनेंशियल ईयर के लिए होगा। दोनों कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंजों को इस बारे में 21 अगस्त को बता दिया।

बोर्ड की बैठक में एजीएम की तारीख का फैसला

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का बोर्ड अगर बोनस इश्यू के प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग के बाद यह पहला बोनस इश्यू होगा। इससे पहले कंपनी ने फरवरी 2016 में अपने शेयरों को स्प्लिट किया था। दोनों कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों को अलग जानकारी में यह भी बताया है कि उनके बोर्ड की बैठक में एनुअल जनरल मीटिंग की तारीख और समय के बारे में भी फैसला होगा। इसके अलाव रिकॉर्ड डेट पर भी विचार होगा।

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का जून तिमाही में अच्छा प्रदर्शन

मोल्ड-टेक पैकेजिंग का प्रदर्शन जून तिमाही में अच्छा रहा। ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 24.9 फीसदी बढ़कर 300.45 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 19.1 फीसदी बढ़कर 56.43 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का टैक्स से पहले प्रॉफिट 13.9 फीसदी बढ़कर 34.17 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 30.01 करोड़ रुपये था।

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का प्रॉफिट बढ़कर 10 करोड़ हुआ

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का प्रदर्शन भी जून तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान कंपनी की नेट सेल्स 45.52 फीसदी बढ़ी। नेट प्रॉफिट बढ़कर 10.03 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 0.59 करोड़ रुपये था। EBITDA 14.92 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2.34 करोड़ रुपये था।

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बीते छह महीने में दोनों शेयरों में अच्छी तेजी 

मोल्ड-टेक टेक्नोलॉजीज का शेयर बीते 6 महीनों में 44 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान मोल्ड-टेक पैकेजिंग का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। 21 अगस्त को इन दोनों कंपनियों के शेयरों में तब अच्छी तेजी आई, जब शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।

FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

Tata Sons AGM: टाटा संस की एजीएम टली, टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

Tata Sons AGM: टाटा संस की एजीएम टली, टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

Tata Sons AGM: टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) टल गई है। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होने वाली थी। लेकिन, कोरम पूरा नहीं होने से बैठक टालनी पड़ी। टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। हालांकि, एजीएम टलने का अनुमान पहले से था। टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है।

Tata Sons के एक सूत्र ने बताया कि बोर्ड की बैठक बाद में होने की उम्मीद है। इस बैठक में एजीएम की अगली तारीख के बारे में फैसला होगा। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के मीटिंग बुलाने पर रोक लगाई हुई है। इस वजह से सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट टाटा संस में एक ज्वाइंट प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर पा रहे हैं।

टाटा संस के एजीएम के लिए कोरम तभी पूरा होगा जब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट का ज्वाइंट प्रतिनिधि मौजूद होगा। 18 अगस्त को दोनों ट्रस्ट के ज्वाइंट प्रतिनिधि के नहीं होने की वजह से टाटा संस की एजीएम टल गई। टाटा संस में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की करीब 51.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

इस मामले से जुड़े लोगो ने बताया कि एजीएम के लिए दोपहर बाद 2:30 बजे का समय तय था। तय समय के मुताबिक, एजीएम शुरू हुई। लेकिन, 3 बजे इसे टालने का फैसला लिया गया। टाटा संस के निवर्तमान चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन बॉम्बे हाउस में मौजूद थे। उनके साथ बोर्ड के सदस्य सौरव अग्रवाल और अनीता मरानगोली जॉर्ज भी मौजूद थी। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, हरीश मानवानी और वेणु श्रीनिवासन ने मीटिंग में वर्चुअसल रूप से हिस्सा लिया।

लंबे समय तक टाटा ग्रुप का हिस्सा रहे मेहिल मिस्त्री रतन टाटा की वसीयत के एग्जिक्यूटर के रूप में मीटिंग में वर्चुअल रूप से शामिल हुए। टाटा समूह के ट्रस्ट्स में मिस्त्री की नियुक्ति को जरूरी समर्थन नहीं मिला था, जिससे वह ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सके थे। रतन टाटा टाटा संस के पूर्व चेयरमैन थे।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के 12 अगस्त को इस्तीफे का ऐलान करने के बाद 18 अगस्त को होने वाली एजीएम पर नजरें टिकी थी। हालांकि, यह माना जा रहा था कि कोरम पूरा नहीं होने की वजह से एजीएम टल जाएगी। 18 अगस्त को टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। उधर, 13 अगस्त को टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस में चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए कमेटी के गठन का प्रस्ताव पारित कर दिया था।

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: आखिर कार्यकाल खत्म होने के 6 महीने पहले एन चंद्रशेखरन ने क्यों दे दिया इस्तीफा?

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे ने चौंका दिया। 12 अगस्त की सुबह उन्होंने अपने इ्स्तीफे का ऐलान किया। इसका असर टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। टाटा समूह देश का सबसे बड़ा कारोबारी समूह है। इसकी तीन दर्जन से ज्यादा कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इनमें टीसीएस, टाइटन, टाटा कंज्यूमर, टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां हैं, जिनकी पहचान देश के घर-घर में है। चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। सवाल है कि चंद्रशेखरन ने अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया?

टाटा समूह से 40 साल पुराना रिश्ता खत्म हो जाएगा

पहले एन चंद्रशेखरन के बारे में थोड़ा जान लेना जरूरी है। वह 1987 में टाटा समूह का हिस्सा बने थे। 2009 में उन्हें टाटा समूह की सबसे बड़ी कंपनी TCS का सीईओ नियुक्त किया गया। यह देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी है। फिर, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस का चेयरमैन एक तरह से पूरे ग्रुप का बॉस होता है। इसलिए टाटा संस के चेयरमैन के पद को समूह में सबसे अहम माना जाता है।

फरवरी में तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर टल गया था फैसला

इस साल फरवरी में चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर फैसला होना था। लेकिन, इस फैसले को तब टाल दिया गया। इसकी वजह नोएल टाटा का विरोध था। वह इस प्रस्ताव के खिलाफ थे। नोएल टाटा समूह की चैरिटी का काम देखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। नोएल रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। रतन टाटा के निधन के बाद वह टाटा समूह में सबसे पावरफुल हैं। रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में नियंत्रण योग्य यानी आधा से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन को सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है।

टाटा समूह की नई लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता थी

तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला टलने के छह महीने बाद भी यह मसला लंबित था। इसका मतलब है कि टाटा संस के नए लीडर को लेकर अनिश्चितता की स्थिति थी। चंद्रशेखरन का मानना है कि टाटा ग्रुप के भविष्य के लिए ऐसी अनिश्चितता ठीक नहीं है। इस समूह में करीब तीन दर्जन ऐसी कंपनियां हैं, जो शेयर बाजार में लिस्टेड है। इन कंपनियों के शेयरों में लाखों निवेशकों का पैसा लगा है। टाटा का ब्रांड न सिर्फ भारत में बल्कि विदेश में भी काफी प्रतिष्ठित है। देश के करोड़ों लोग इस ब्रांड पर भरोसा करते हैं।

18 अगस्त को होने वाली है टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग

चंद्रशेखरन ने काफी विचार करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। इकोनॉमिक टाइम्स की 12 अगस्त की एक खबर में बताया गया कि चंद्रशेखरन 18 अगस्त से पहले इस्तीफा देना चाहते थे। इस बारे में उन्होंने अपने करीब लोगों से चर्चा की थी। दरअसल, 18 अगस्त को टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होनी है। इस मीटिंग में शेयरहोल्डर को चंद्रशेखरन की तीसरी बार चेयरमैन पद पर नियुक्ति के प्रस्ताव पर वोटिंग करनी थी।

बोर्ड का एक सदस्य तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ

चंद्रशेखरन ने इस्तीफे के बाद जो बयान दिया है, उससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का भरोसा नहीं था। उन्होंने बयान में कहा है, “तीसरी बार मेरी नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो सका, क्योंकि बोर्ड का एक सदस्य का समर्थन प्रस्ताव को हासिल नहीं था।”

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टाटा समूह के हित में पद से इस्तीफा देने का लिया फैसला

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पर फैसला टलने के 6 महीने बाद भी इस मसले का समाधान नहीं हो सका है। उन्हें टाटा समूह जैसे कारोबारी समूह की लीडरशिप को लेकर ऐसी अनिश्चितता पसंद नहीं थी। उनका मानना था कि यह टाटा समूह के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसलिए उन्होंने एजीएम से पहले इस्तीफा देने का फैसला किया।

HDFC Bank AGM: नए चेयरमैन, डिविडेंड से लेकर फंड जुटाने तक, 5 अगस्त की AGM में कई बड़े फैसले होंगे

HDFC Bank AGM: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank की 32वीं सालाना आम बैठक (AGM) बुधवार,5 अगस्त को होगी। इस बार की AGM कई वजहों से खास मानी जा रही है। हाल ही में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया था। वहीं, बैंक को जल्द नया CEO भी चुनना है।

मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल तीन महीने से भी कम बचा है। RBI के नियम कहते हैं कि नए CEO के नाम की सिफारिश छह महीने पहले भेजनी चाहिए। लेकिन बैंक ने अभी तक इस प्रक्रिया की शुरुआत नहीं की है।

डिविडेंड, फंड जुटाने का प्लान

AGM में सबसे पहले वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों और डिविडेंड पर मंजूरी ली जाएगी।

इसके अलावा बैंक फंड जुटाने की भी तैयारी में है। इसके लिए वह AT-1 बॉन्ड, Tier-II बॉन्ड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए लॉन्ग-टर्म बॉन्ड जारी करने की मंजूरी मांगेगा। ये सभी बॉन्ड प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किए जाएंगे।

नए चेयरमैन पर भी लगेगी मुहर

बैंक ने राजीव कुमार को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव रखा है। AGM में शेयरधारक इस पर वोट करेंगे।

अगर मंजूरी मिलती है, तो उन्हें RBI की अनुमति के अनुसार ₹50 लाख सालाना तय पारिश्रमिक मिलेगा। इसके अलावा बोर्ड और कमेटी की बैठकों में शामिल होने पर सिटिंग फीस भी मिलेगी। बैंक की कार का इस्तेमाल भी आधिकारिक और निजी दोनों कामों के लिए कर सकेंगे।

पहले चेयरमैन को कितना मिला था?

राजीव कुमार से पहले अतनु चक्रवर्ती इस पद पर थे। वित्त वर्ष 2025-26 में उन्हें ₹59 लाख सिटिंग फीस और ₹48.25 लाख तय पारिश्रमिक मिला था। यानी कुल मिलाकर उन्हें ₹1.07 करोड़ का भुगतान हुआ।

उन्होंने 18 मार्च 2026 को इस्तीफा दिया था। इसलिए उन्हें पूरे साल की बजाय जितने समय तक पद पर रहे, उसी हिसाब से भुगतान किया गया।

एक और प्रस्ताव भी आएगा

AGM में वी. श्रीनिवास रंगन को फिर से निदेशक बनाने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। वह रोटेशन के तहत रिटायर हो रहे हैं और बैंक उन्हें दोबारा बोर्ड में शामिल करना चाहता है।

HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को 1.86% की गिरावट के साथ 739 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 साल में स्टॉक 25.80% टूट चुका है।

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