Tata Sons AGM: टाटा संस में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की असली लड़ाई अभी बाकी, शेयरहोल्डर्स के वोट पर टिकी नजर

Tata Sons AGM: एन चंद्रशेखरन ने 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्डरूम में वोट जीत लिया था। लेकिन उनका बतौर CEO तीसरा कार्यकाल अभी पक्का नहीं है। अब असली फैसला टाटा संस की सालाना आम बैठक यानी AGM में होगा। यहां शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।

बोर्ड के वोट और शेयरहोल्डर्स के वोट में बड़ा फर्क है। बोर्डरूम में चंद्रशेखरन के पक्ष में फैसला हो चुका है। लेकिन AGM का वोट अभी खुला है। अगले कुछ हफ्ते इस पूरे मामले में काफी अहम रहने वाले हैं।

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर भी टाटा ट्रस्ट्स के विवाद पर कोई फैसला या रुख अपना सकता है। कुछ ट्रस्टियों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। वहीं टाटा संस में करीब 13% हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ग्रुप की कंपनियों को भी अपना वोट तय करना होगा।

टाटा ट्रस्ट्स के वोट सबसे अहम

इस पूरी लड़ाई के बीच टाटा ट्रस्ट्स सबसे बड़ा खिलाड़ी है। उसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह हिस्सेदारी सात अलग-अलग ट्रस्ट्स में बंटी है। इसलिए यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि सभी ट्रस्ट एक साथ एक ही तरफ वोट करेंगे।

SDTT और SRTT सबसे अहम ट्रस्ट हैं। दोनों के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है। ऐसे में इन दोनों ट्रस्ट्स के भीतर चल रहा विवाद सीधे AGM की वोटिंग को प्रभावित कर सकता है।

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9 नवंबर को बदल सकता है पहला समीकरण

9 नवंबर एक अहम तारीख है। इसी दिन वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा का सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में तीन साल का कार्यकाल खत्म होगा। SDTT के पास टाटा संस की 27.98% हिस्सेदारी है।

SDTT में छह ट्रस्टी हैं। इनमें नोएल टाटा, दारियस खंबाटा, भास्कर भट्ट, नेविल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह शामिल हैं। ट्रस्ट के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ चुके हैं।

खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा मौजूदा विवाद में मोटे तौर पर नोएल टाटा के साथ हैं। 5 अक्टूबर को इन चारों ने श्रीनिवासन और विजय सिंह के रुख का विरोध किया था। मामला टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन और ट्रस्ट्स के अधिकारों से जुड़ा है।

खंबाटा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। खबर से जुड़े लोगों के मुताबिक, वह शायद दूसरा कार्यकाल न मांगें। अगर वह दोबारा ट्रस्टी बनना चाहते हैं तो सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी होगी।

SRTT में दिसंबर में बड़ा बदलाव संभव

सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के पास टाटा संस की 23.56% हिस्सेदारी है। यहां किसी नए ट्रस्टी को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है। इसलिए यहां साधारण बहुमत से काम नहीं चलता।

यह नियम पहले भी परेशानी पैदा कर चुका है। नेविल टाटा को SRTT में शामिल करने की कोशिश हुई थी। लेकिन 2024 के आखिर में प्रस्तावित बैठक टाल दी गई थी। श्रीनिवासन ने इस पर आपत्ति जताई थी।

अब श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। अगर उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता है तो ट्रस्ट के भीतर समीकरण बदल सकते हैं। इससे SRTT का रुख नोएल टाटा के करीब जा सकता है।

हालांकि, इसके लिए ट्रस्ट को अपना कामकाज ठीक से चलाने और AGM में वोट करने की स्थिति में होना जरूरी होगा। SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां भी लागू हैं।

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SRTT की वजह से टाटा संस की AGM टली थी

SRTT की स्थिति का असर पहले ही टाटा संस की AGM पर पड़ चुका है। 18 अगस्त की AGM टालनी पड़ी थी। वजह यह थी कि SRTT SDTT के साथ मिलकर AGM के लिए प्रतिनिधि नामित करने की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका था।

इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को AGM कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया। अब AGM की तारीख खुद इस पूरे विवाद में काफी अहम हो गई है।

वहीं श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने SDTT के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने टाटा संस के मामलों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर चिंता जताई है।

नोएल टाटा गुट का क्या कहना है?

नोएल टाटा, खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा ने इस रुख का विरोध किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट्स टाटा संस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लेने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, ट्रस्ट्स सिर्फ उन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उन्हें टाटा संस के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर होने के नाते मिले हैं। इस विवाद पर चैरिटी कमिश्नर ने SDTT से जवाब भी मांगा है।

66% हिस्सेदारी दिखती एकजुट, लेकिन है नहीं

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह सात अलग-अलग चैरिटेबल ट्रस्ट्स में बंटी हुई है। हर ट्रस्ट में ट्रस्टियों की संरचना भी अलग है।

नोएल टाटा और उनके तीन बच्चे नेविल, लिया और माया इन सात ट्रस्ट्स में कुल 36 में से 17 ट्रस्टी पदों पर हैं। लेकिन इस ताकत का बड़ा हिस्सा छोटे ट्रस्ट्स में है। असली वजन SDTT और SRTT के पास है।

इसलिए AGM में सभी ट्रस्ट्स का एक ही लाइन पर आना जरूरी नहीं है। हर ट्रस्ट को अपनी बैठक करके अपने वोट पर फैसला करना पड़ सकता है।

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टाटा ग्रुप की कंपनियों के वोट भी अहम

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा टाटा ग्रुप की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83% हिस्सेदारी है। इनमें सात लिस्टेड कंपनियां हैं। इन सात की कुल हिस्सेदारी 11.92% है। टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के पास 3.06-3.06% हिस्सेदारी है। टाटा केमिकल्स के पास 2.53% और टाटा पावर के पास 1.65% हिस्सेदारी है।

इंडियन होटल्स के पास 1.11%, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के पास 0.43% और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास 0.08% हिस्सेदारी है। इन कंपनियों के वोट को अभी किसी एक पक्ष के साथ जोड़ना मुश्किल है। हर कंपनी का अपना बोर्ड है। उसे अपनी हिस्सेदारी को लेकर अलग फैसला करना होगा।

चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों का असर

चंद्रशेखरन कई ऐसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं, जिनके पास टाटा संस में हिस्सेदारी है। इनमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं नोएल टाटा टाटा स्टील के वाइस चेयरमैन हैं। वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल के चेयरमैन भी हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां किसी एक व्यक्ति के पक्ष में वोट करेंगी। इन कंपनियों के बोर्ड को अपनी-अपनी हिस्सेदारी को लेकर फैसला करना होगा।

शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी बड़ा शेयरहोल्डर

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास भी टाटा संस की 18% से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए AGM में उसके वोट भी काफी अहम हो सकते हैं।

खासकर तब, जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर किसी एक रुख पर सहमति नहीं बनती है। ऐसी स्थिति में दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स की भूमिका बढ़ सकती है।

अब AGM की तारीख सबसे अहम

जब AGM होगी, तब तक टाटा ट्रस्ट्स की स्थिति कुछ बदल सकती है। खंबाटा का SDTT में कार्यकाल खत्म हो चुका होगा। वहीं दिसंबर में श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल भी खत्म होना है।

चैरिटी कमिश्नर की कार्रवाई भी दोनों बड़े ट्रस्ट्स की स्थिति पर असर डाल सकती है। दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड को अपनी हिस्सेदारी के वोट पर फैसला करना होगा।

इसलिए मामला अब सिर्फ चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का नहीं है। असली सवाल यह है कि AGM से पहले टाटा संस के शेयरहोल्डर्स के बीच ताकत का संतुलन किस तरफ जाता है।

यही वजह है कि AGM की तारीख बेहद अहम होगी। उस समय तक ट्रस्ट्स की संरचना, नियामकीय स्थिति और टाटा ग्रुप की कंपनियों के रुख में बदलाव इस वोट को पूरी तरह बदल सकता है।

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FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

Tata Sons AGM: टाटा संस की एजीएम टली, टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

Tata Sons AGM: टाटा संस की एजीएम टली, टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

Tata Sons AGM: टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) टल गई है। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होने वाली थी। लेकिन, कोरम पूरा नहीं होने से बैठक टालनी पड़ी। टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। हालांकि, एजीएम टलने का अनुमान पहले से था। टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है।

Tata Sons के एक सूत्र ने बताया कि बोर्ड की बैठक बाद में होने की उम्मीद है। इस बैठक में एजीएम की अगली तारीख के बारे में फैसला होगा। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के मीटिंग बुलाने पर रोक लगाई हुई है। इस वजह से सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट टाटा संस में एक ज्वाइंट प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर पा रहे हैं।

टाटा संस के एजीएम के लिए कोरम तभी पूरा होगा जब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट का ज्वाइंट प्रतिनिधि मौजूद होगा। 18 अगस्त को दोनों ट्रस्ट के ज्वाइंट प्रतिनिधि के नहीं होने की वजह से टाटा संस की एजीएम टल गई। टाटा संस में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की करीब 51.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

इस मामले से जुड़े लोगो ने बताया कि एजीएम के लिए दोपहर बाद 2:30 बजे का समय तय था। तय समय के मुताबिक, एजीएम शुरू हुई। लेकिन, 3 बजे इसे टालने का फैसला लिया गया। टाटा संस के निवर्तमान चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन बॉम्बे हाउस में मौजूद थे। उनके साथ बोर्ड के सदस्य सौरव अग्रवाल और अनीता मरानगोली जॉर्ज भी मौजूद थी। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, हरीश मानवानी और वेणु श्रीनिवासन ने मीटिंग में वर्चुअसल रूप से हिस्सा लिया।

लंबे समय तक टाटा ग्रुप का हिस्सा रहे मेहिल मिस्त्री रतन टाटा की वसीयत के एग्जिक्यूटर के रूप में मीटिंग में वर्चुअल रूप से शामिल हुए। टाटा समूह के ट्रस्ट्स में मिस्त्री की नियुक्ति को जरूरी समर्थन नहीं मिला था, जिससे वह ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सके थे। रतन टाटा टाटा संस के पूर्व चेयरमैन थे।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के 12 अगस्त को इस्तीफे का ऐलान करने के बाद 18 अगस्त को होने वाली एजीएम पर नजरें टिकी थी। हालांकि, यह माना जा रहा था कि कोरम पूरा नहीं होने की वजह से एजीएम टल जाएगी। 18 अगस्त को टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। उधर, 13 अगस्त को टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस में चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए कमेटी के गठन का प्रस्ताव पारित कर दिया था।