TCS Q2 Results Date: टाटा की आईटी कंपनी 8 अक्टूबर जारी करेगी तिमाही नतीजे, डिविडेंड पर भी नजर

TCS Q2 Results Date: टाटा ग्रुप की दिग्गज IT कंपनी TCS इस हफ्ते वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। कंपनी 8 अक्टूबर 2026 को सितंबर तिमाही का रिजल्ट जारी करेगी। इसके साथ ही निवेशकों की नजर अंतरिम डिविडेंड पर भी रहेगी।

TCS ने 22 सितंबर को स्टॉक्स एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया कि बोर्ड मीटिंग 8 अक्टूबर को होगी। इस बैठक में 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के रिजल्ट को मंजूरी दी जाएगी।

TCS का रिजल्ट बताएगा सेक्टर का मूड

TCS के रिजल्ट से पता चलेगा कि सितंबर तिमाही में कंपनी का कारोबार कैसा रहा। खासकर IT सेक्टर में इस समय मांग, खर्च और AI को लेकर काफी चर्चा है। ऐसे में TCS के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

कंपनी TCS Tata Group की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। यह दुनिया की बड़ी IT Services कंपनियों में से एक है। TCS का कारोबार IT सर्विसेज, कंसल्टिंग और बिजनेस सॉल्यूशंस से जुड़ा है।

इंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला

TCS की बोर्ड मीटिंग में इंतरिम डिविडेंड के प्रस्ताव पर भी विचार होगा। यानी कंपनी अपने शेयरधारकों को अंतरिम डिविडेंड देगी या नहीं, इसका फैसला इसी बैठक में हो सकता है।

अगर बोर्ड डिविडेंड को मंजूरी देता है तो इसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा, जिनका नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में होगा। TCS ने रिकॉर्ड 14 अक्टूबर 2026 तय की है।

Q1 में TCS का मुनाफा घटा था

अब सबकी नजर सितंबर तिमाही के नतीजों पर है। इसकी एक वजह जून तिमाही का प्रदर्शन भी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा 13,349 करोड़ रुपये रहा था। यह पिछली तिमाही यानी मार्च 2026 के 13,718 करोड़ रुपये से 2.7% कम था।

कंपनी के मुनाफे पर 668 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च का असर पड़ा था। यह रकम एक कानूनी दावे के सेटलमेंट से जुड़ी थी।

TCS के शेयरों का हाल

TCS का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.23% की बढ़त के साथ 2,075.90 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले 1 साल में स्टॉक 16.09% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने 30.53% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 7.52 लाख करोड़ रुपये है।

Ola Electric Shares: प्रमोटर भाविश अग्रवाल ने 4.32% हिस्सेदारी गिरवी रखी, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Sons ने नोएल टाटा की आपत्ति खारिज की, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को वैध बताया

टाटा ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Tata Sons ने चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की तीसरी बार नियुक्ति का विरोध करने वाले नोएल टाटा की आपत्ति खारिज कर दी है। कंपनी ने कहा है कि 17 सितंबर को बोर्ड ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का जो फैसला लिया था, वह वैध है।

Tata Sons ने इसके लिए दो नई कानूनी राय का हवाला दिया है। ये राय पूर्व चीफ जस्टिस उदय यू ललित और रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज बीएन श्रीकृष्ण ने दी हैं।

24 सितंबर को भेजा जवाब

Tata Sons ने 24 सितंबर को नोएल टाटा और Tata Trusts को जवाब भेजा। यह जवाब 20 सितंबर को भेजी गई उनकी चिट्ठी के बाद आया है। उस चिट्ठी में नोएल टाटा और Tata Trusts ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को कानूनी तौर पर गलत बताया था।

Tata Sons के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय ने यह पत्र जारी किया। इसके साथ दोनों कानूनी राय भी भेजी गईं। इसकी कॉपी Tata Sons के सभी डायरेक्टर्स को भी दी गई।

पूरा विवाद किस बात पर है?

विवाद Tata Sons के Article 121 को लेकर है। इसमें बोर्ड के फैसले के लिए डायरेक्टर्स के बहुमत की जरूरत बताई गई है। साथ ही Tata Trusts की ओर से नियुक्त डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन भी जरूरी है।

इस आर्टिकल में चेयरमैन को कास्टिंग वोट देने का अधिकार भी है। कास्टिंग वोट का मतलब है… जब किसी फैसले पर वोट बराबर-बराबर बंट जाएं, तब मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे व्यक्ति को एक अतिरिक्त निर्णायक वोट देने का अधिकार।

अब विवाद यह है कि अगर Tata Trusts के दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स के वोट अलग-अलग हो जाएं, तो क्या चेयरमैन कास्टिंग वोट दे सकता है? पूरे बोर्ड के वोट बराबर नहीं होने पर भी इस अधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, यही मुख्य सवाल है।

चंद्रशेखरन ने खुद वोट नहीं दिया

चंद्रशेखरन ने अपनी दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर खुद वोट नहीं किया। कुल पांच डायरेक्टर्स ने वोट किया था। इनमें से चार ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। इनमें Tata Trusts के नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन भी शामिल थे। वहीं, दूसरे Trust नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी ने इसके बाद कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया। यह वोट दोनों Trust नॉमिनी डायरेक्टर्स के बीच 1-1 की स्थिति बनने के बाद दिया गया।

उदय ललित ने क्या कहा?

पूर्व चीफ जस्टिस उदय यू ललित ने Tata Sons के पक्ष में राय दी है। उनका कहना है कि Article 104B के तहत नियुक्त डायरेक्टर्स के बीच वोट बराबर होने पर चेयरमैन कास्टिंग वोट दे सकता था।

उनके मुताबिक, इस स्थिति में चेयरमैन के पास कास्टिंग वोट इस्तेमाल करने का आधार था। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव वैध तरीके से पास हुआ।

बीएन श्रीकृष्ण की राय क्या है?

रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज बीएन श्रीकृष्ण ने भी बैठक में अपनाई गई प्रक्रिया को सही माना। उनका कहना है कि Article 121 को जिस तरह लागू किया गया, वह उसके नियमों और भावना के मुताबिक है।

उन्होंने कहा कि Trust के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बीच मतभेद होने पर बोर्ड का काम रुकना नहीं चाहिए। नियम की ऐसी व्याख्या होनी चाहिए, जिससे बोर्ड अपना काम पूरा कर सके।

वेणु श्रीनिवासन के वोट पर भी सवाल

नोएल टाटा के विरोध के बावजूद वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया। इस पर भी सवाल उठाए गए।

बीएन श्रीकृष्ण ने कहा कि किसी डायरेक्टर की कंपनी के प्रति कानूनी जिम्मेदारी उस संस्था के प्रति जिम्मेदारी से ऊपर होती है, जिसने उसे नॉमिनेट किया है। अगर दोनों के बीच टकराव हो, तो कंपनी के प्रति कानूनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता मिलेगी। उनके मुताबिक, इस मामले में वेणु श्रीनिवासन ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी के तहत सही तरीके से काम किया।

पहले भी आ चुकी है कानूनी राय

Tata Sons के पास वरिष्ठ वकील सुदीप्तो सरकार की कानूनी राय भी पहले से थी। यह राय 17 सितंबर की बोर्ड बैठक वाले दिन ही बोर्ड के साथ साझा की गई थी।

सुदीप्तो सरकार की राय में Article 121 की ऐसी व्याख्या की गई थी, जिसके तहत दो स्थितियों में कास्टिंग इस्तेमाल किया जा सकता है। पहली स्थिति तब, जब Trust के नॉमिनी डायरेक्टर्स के वोट बराबर हो जाएं। दूसरी स्थिति तब, जब पूरे बोर्ड के वोट बराबर हों। उन्होंने Article 118 पर भी राय दी थी। यह प्रावधान नए चेयरमैन के चयन के लिए सेलेक्शन कमेटी की बात करता है।

सरकार के मुताबिक, Article 118 चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर लागू नहीं होगा। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। हालांकि, इससे पहले उन्होंने एक और कार्यकाल लेने की इच्छा नहीं जताई थी।

Tata Trusts की राय अलग

दूसरी तरफ, Tata Trusts इस मामले में अलग राय रखता है। 20 सितंबर को Trusts ने कहा था कि दो Trust नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत तभी माना जाएगा, जब दोनों चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट करें।

Trusts का कहना है कि Article 121 में कास्टिंग वोट का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब पूरे बोर्ड के वोट बराबर हों। नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। इसलिए Trusts के मुताबिक, यह प्रस्ताव शुरुआत से ही अमान्य था।

Tata Trusts ने अपने पक्ष में पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का भी हवाला दिया है। इस तरह चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर Tata Sons और Tata Trusts की कानूनी व्याख्या अलग-अलग है।

Stock in Focus: 1 साल में 568% का मल्टीबैगर रिटर्न, अब डेटा सेंटर के लिए पेश की केबल की नई रेंज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 23 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 7 शेयर, अदाणी और टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch:  बुधवार 23 सितंबर को शेयर बाजार में कई कंपनियां अहम खबरों के चलते फोकस में रह सकती हैं। अदाणी और टाटा ग्रुप की कंपनियों से जुड़े अहम अपडेट आए हैं। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भी कुछ शेयरों पर दिख सकता है। वहीं, हिस्सेदारी बढ़ाने, प्रमोटर सेल और नए स्टोर से जुड़े अपडेट भी हैं।

Adani Group Stocks

अडानी ग्रुप की कंपनियां फोकस में रहेंगी। SEBI ने Adani Enterprises, Adani Total Gas, AWL Agri Business, Adani Green Energy और Adani Energy Solutions से जुड़े मामलों को ₹1.51 करोड़ के सेटलमेंट के साथ निपटाया है। मामला हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए RPT और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवालों से जुड़ा था।

OMCs Stocks

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी OMCs फोकस में रहेंगी। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। Brent क्रूड 98 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों से तेल बाजार पर असर पड़ा है।

Tata Group Stocks

टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों पर भी नजर रहेगी। Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद जारी है। NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने Tata Trusts की भूमिका और ग्रुप की मौजूदा ट्रस्ट-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने की बात कही है।

Persistent Systems

आईटी सेक्टर की कंपनी Persistent Systems ने Nagarro में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। कंपनी ने 61.15% अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल की है। इसके साथ Nagarro में उसकी कुल हिस्सेदारी 83.25% हो गई है। अतिरिक्त शेयरों के लिए स्वीकृति अवधि 23 सितंबर से 6 अक्टूबर तक चलेगी।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक HDFC Bank में नए MD और CEO के फैसले पर नजर रहेगी। बैंक के बोर्ड ने RBI को दो नाम भेजे हैं। दोनों नाम तीन साल के कार्यकाल के लिए मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। बैंक ने अभी आधिकारिक तौर पर नामों का खुलासा नहीं किया है।

Allied Blenders & Distillers

शराब बनाने वाली कंपनी Allied Blenders & Distillers के प्रमोटर बीना किशोर छाबड़िया 55 लाख तक शेयर बेच सकती हैं। यह कंपनी की करीब 1.97% हिस्सेदारी है। बिक्री का मकसद न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की जरूरत पूरी करना है।

Allcargo Terminals

लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी Allcargo Terminals के अगस्त के कुल वॉल्यूम में बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कुल वॉल्यूम 65.6 हजार TEUs रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 6% और जुलाई के मुकाबले 5% ज्यादा है।

360 ONE WAM

वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर की कंपनी 360 ONE WAM ने Aashish Agarwal को CEO नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 15 फरवरी 2027 से प्रभावी होगी। इसी तारीख से MD Karan Bhagat को Vice Chairman की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

IRB Infrastructure Developers

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनी IRB Infrastructure Developers के बोर्ड ने कुछ संपत्तियों को बेचकर रकम जुटाने की मंजूरी दी है। बोर्ड ने इस प्रक्रिया के लिए कंपनी को अधिकृत भी किया है। अब कंपनी इन एसेट्स के मॉनेटाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

Shoppers Stop

रिटेल सेक्टर की कंपनी Shoppers Stop ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। कंपनी ने अहमदाबाद के Sindhu Bhavan और जबलपुर के Mall 11 में नए स्टोर खोले हैं। इसके साथ 31 अगस्त 2026 तक कंपनी के डिपार्टमेंट स्टोर्स की कुल संख्या 117 हो गई है।

अदाणी और GMR के लिए खुल सकता है एयरलाइन कारोबार का रास्ता, सरकार नियम बदलने पर कर रही विचार

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अदाणी और GMR के लिए खुल सकता है एयरलाइन कारोबार का रास्ता, सरकार नियम बदलने पर कर रही विचार

भारत सरकार दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटरों के लिए एयरलाइन कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ये ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार इस पाबंदी को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है।

इस कदम का मकसद देश के एविएशन मार्केट में IndiGo और Air India के दबदबे को कम करना है। दोनों एयरलाइंस मिलकर देश के करीब 90% घरेलू यात्रियों को संभालती हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है।

दिल्ली और मुंबई में अलग है नियम

बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट के लिए अपनी एयरलाइन शुरू करने पर ऐसी रोक नहीं है। लेकिन दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेशन और मैनेजमेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त है, जो इनके ऑपरेटरों को किसी एयरलाइन पर नियंत्रण रखने से रोकती है।

नायडू ने कहा कि इस नियम में बदलाव पर विचार चल रहा है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। Bloomberg News ने सबसे पहले जुलाई में इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी।

Adani और GMR के लिए खुल सकता है रास्ता

अगर यह पाबंदी हटती है तो Adani Group और GMR Airports के लिए एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता खुल सकता है। Adani Group मुंबई समेत आठ एयरपोर्ट ऑपरेट करता है। वहीं, GMR Airports दिल्ली समेत पांच एयरपोर्ट का संचालन करता है।

यानी नियम बदलने के बाद ये कंपनियां किसी एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती हैं या एयरलाइन कारोबार में उतरने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

सरकार चाहती है कम से कम पांच बड़ी एयरलाइंस

एविएशन मिनिस्टर ने कहा कि भारत को कम से कम पांच एयरलाइंस की जरूरत है। इनमें से हर एयरलाइन के पास कम से कम 100 विमान होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार नई एयरलाइन शुरू करने के लिए आवेदन करने वाले किसी भी खिलाड़ी के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है।

कैसे बढ़ा IndiGo और Air India का दबदबा?

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एविएशन मार्केट में कई बड़े बदलाव हुए हैं। Jet Airways और Go Airlines बंद हो गईं। दूसरी तरफ Vistara और AirAsia India का Tata Group की एयरलाइंस में विलय हो गया।

इसके बाद बाजार में IndiGo और Air India की पकड़ काफी मजबूत हो गई। Akasa Air अभी नई एयरलाइन है। SpiceJet भी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके अलावा कुछ छोटी क्षेत्रीय एयरलाइंस हैं, लेकिन उनकी बाजार हिस्सेदारी काफी कम है।

ऐसे में सरकार ज्यादा बड़ी एयरलाइंस खड़ी करना चाहती है। अगर दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से जुड़ा नियम बदलता है तो Adani Group और GMR जैसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर भी इस बाजार में बड़े खिलाड़ी के तौर पर उतर सकते हैं।

SEBI ने अदाणी ग्रुप की पांच कंपनियों का केस ₹1.51 करोड़ में निपटाया, हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़ा था मामला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Top Stock Picks : बाजार में क्रूड को देख कर ही करें ट्रेड, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

Top Stock Picks : शुक्रवार दोपहर के कारोबारी सेशन में भारतीय शेयर बाज़ार में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है।। दोपहर करीब 1 बजे सेंसेक्स 192 अंक यानी 0.26% बढ़कर 74,507 पर और निफ्टी 56 अंक यानी 0.24% बढ़कर 23,327 पर दिख रहा था। सेक्टर के हिसाब से देखें तो सर्विसेज़,कैपिटल गुड्स और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज़्यादा तेज़ी नजर आ रही है। जिनमें से हर एक में 1.4% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। वहीं ऑयल एंड गैस सेक्टर में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई है। IT सेक्टर दबाव में है। इसमें 1.39% की गिरावट आई है। स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया और इनमें 1.11% की बढ़त दिख रही है। मिडकैप शेयरों में 0.54% की तेज़ी आई है। इंडिया VIX में 5% से ज़्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है।

मार्केट टेक्निकल्स

मार्केट टेक्निकल्स पर चर्चा करते हुए जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज (JM Financial Services) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च राहुल शर्मा ने कहा कि अब ट्रेंड साफ तौर पर निफ्टी बनाम क्रूड ऑयल का हो गया है। क्रूड ऑयल में थोड़ी नरमी जरूर देखने को मिली है। अगर क्रूड 100 $ के नीचे आ जाता है तो अभी 23100 के लेवल के आसपास सपोर्ट ले रहे निफ्टी में दो दिन से दिख रहा बाउंस बैक 23,800 तक जा सकता है। इसका मतलब यह है कि निफ्टी में यहां से तकरीबन 500 पॉइंट तक का बाउंस बैक देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर कहें तो हमें क्रूड ऑयल को देखकर ही ट्रेड करना चाहिए। अगर ग्लोबल सेटअप की बात करें तो अगर यूएस के 10 ईयर बॉन्ड ईल्ड्स में नरमी आती है तो इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट पॉजिटिव होता हुआ दिखाई देगा। ओवरऑल अभी भी मार्केट रेंज बाउंड है।

डिफेंसिव प्ले के तौर पर फार्मा में अच्छा ट्रैक्शन

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए राहुल शर्मा ने कहा कि बाजार में स्टॉक स्पेसिफिक एक्टिविटी जारी है। ऐसे जब तक क्रूड ऑयल में नरमी नहीं आती है तब तक फार्मा पर फोकस करें। एक डिफेंसिव प्ले के तौर पर फार्मा में हमें अच्छा ट्रैक्शन देखने को मिल सकता है। इस सेक्टर में लॉरेस लैब्स का शेयर काफी अच्छा लग रहा है। राहुल शर्मा ने डिस्क्लेमर के तौर पर बताया कि उन्होंने अपने क्लाइंट्स को भी यह शेयर रेकमेंड किया है। उनके मुताबिक लॉरेस लैब्स में बहुत ही अच्छा हायर हाई हायर लो सेटअप है। गिरते बाजार में भी फार्मा सेक्टर काफी अच्छे से डटा हुआ है। अगर मार्केट थोड़े और समय ऐसा ही रहता है तो फार्मा में मोमेंटम कंटिन्यू रहेगा। लॉरेस लैब्स में तकरीबन 2050-2080 रुपए तक के टारगेट आते हुए दिख सकते हैं। इसमें इन लेवल्स पर खरीदारी की जा सकती है। 1920 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा।

बैंक और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे पहले आएगा मोमेंटम

राहुल शर्मा ने आगे कहा कि अगर क्रूड ऑयल में नरमी आती है तो बैंक और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे पहले मोमेंटम देखने को मिलेगा। इसमें पीएसयू बैंक से PNB बैंक सबसे बेहतर पिक है। यह शेयर अपने 20 दिन के मूविंग एवरेज के आसपास लगातार कंसोलीडेट हो रहा है। गिरते बाजार में भी इसमें कमजोरी नहीं आई है। क्रूड ऑयल में नरमी आते ही इस शेयर में ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है। शॉर्ट टर्म में इस शेयर में 130 रुपए तक के लेवल देखने को मिल सकते हैं। इसमें 112 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी करें

 

Tata Group Stocks : टाटा संस के चेयरमैन के नियुक्ति पर मचे घमासान से बाजार नाखुश, टाटा ग्रुप के शेयरों में तेज गिरावट

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

टाटा ट्रस्ट ने Tata Sons के लिस्ट होने की बात खारिज की, नोएल टाटा ने भी अनलिस्टेड रखने का रुख दोहराया

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) को शेयर बाजार में लिस्ट कराने को लेकर Tata Trusts ने अपना रुख साफ किया है। Trusts ने कहा कि उसने कंपनी को पब्लिक करने पर सहमति नहीं दी है। चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने भी यही बात दोहराई है। उनका कहना है कि 100 साल से ज्यादा पुराने टाटा ग्रुप की मौजूदा संरचना को बचाए रखना जरूरी है।

Tata Sons बोर्ड ने क्या कहा?

Tata Trusts के मुताबिक, 17 सितंबर की बैठक में Tata Sons के बोर्ड ने RBI के कम्युनिकेशन पर चर्चा की। बोर्ड ने कहा कि सिर्फ लिस्टिंग पर ही फैसला नहीं होना चाहिए। सभी उपलब्ध विकल्पों को देखा और समझा जाना चाहिए।

बोर्ड ने कहा कि इन सभी विकल्पों का तुरंत आकलन किया जाएगा। इसके बाद उनकी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड के सामने रखी जाएंगी।

Noel Tata ने लिस्टिंग पर क्या कहा?

नोएल टाटा ने कहा कि लिस्टिंग के मुद्दे पर बोर्ड पहले ही फैसला ले चुका है। हालांकि, ऐसे मामले में जल्दबाजी ठीक नहीं है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज, जानकारी और कानूनी सलाह जुटानी होगी। इसके बाद बोर्ड को पूरी जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि RBI के आदेश में लिस्टिंग की बात नहीं कही गई है। आदेश में कोई खास कदम उठाने को भी नहीं कहा गया है। साथ ही, RBI ने यह नहीं कहा कि Tata Sons ने कोई नियम तोड़ा है।

नोएल टाटा के मुताबिक, RBI के आदेश का कानूनी असर क्या है और कंपनी को कब तक क्या करना है, इस पर बोर्ड ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

लिस्टिंग क्यों नहीं चाहते Noel Tata

नोएल टाटा ने लिस्टिंग को लेकर अपनी चिंता भी बताई। उनका कहना है कि कंपनी के लिस्ट होने के बाद Tata Sons को संस्थागत और विदेशी शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।

इन निवेशकों का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रिटर्न होता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वे किसी मुश्किल में फंसी Tata Group की कंपनी को बचाने के लिए पैसा लगाने को तैयार होंगे।

इसी तरह, अगर कोई नया प्रोजेक्ट शुरू किया जाता है और उसका रिटर्न 15 साल बाद मिलने की उम्मीद है, तो क्या शेयरधारक उसमें पैसा लगाने की मंजूरी देंगे? नोएल टाटा के मुताबिक, यही बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि यह शेयरधारकों की आलोचना नहीं है। उनकी जिम्मेदारी ही फाइनेंशियल रिटर्न देखना है। लेकिन Tata Group के मामले में बात इससे आगे की है। यहां ग्रुप की पहचान और उसकी मौजूदा संरचना भी जुड़ी है।

Tata Sons पर RBI के नियम लागू होंगे

यह मामला RBI के फैसले के बाद और अहम हो गया है। RBI ने कुछ दिन पहले Tata Sons की Core Investment Company (CIC) के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके बाद 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में Tata Sons ने RBI के लागू नियमों का पालन करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि वह RBI, Tata Trusts और दूसरे हितधारकों से भी जरूरी अनुपालन को लेकर सलाह लेगी।

Tata Sons पिछले दो साल से ज्यादा समय से RBI के इस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। अब बोर्ड के ताजा फैसले से कंपनी के रुख में बदलाव दिख रहा है।

Tata Trusts का पुराना फैसला भी कायम

Tata Trusts ने अपने पुराने फैसले का भी जिक्र किया। Trusts के मुताबिक, रतन टाटा के समय Tata Sons को अनलिस्टेड रखने पर सर्वसम्मति से फैसला हुआ था।

इसके बाद जुलाई 2025 में Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने भी Tata Sons को अनलिस्टेड रखने के पक्ष में प्रस्ताव पास किए थे। इन फैसलों की जानकारी Tata Sons को भी दी गई थी। Tata Trusts ने कहा कि तब से उसका रुख वही है।

इससे पहले Moneycontrol ने रिपोर्ट किया था कि Tata Sons के बोर्ड ने 17 सितंबर की बैठक में एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाने का फैसला किया है। हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, $102 के नीचे आया; सऊदी अरब की पाइपलाइन से मिली राहत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FII Selling: FII की बिकवाली नहीं रुक रही! बाजार चढ़ा, फिर भी ₹3209 करोड़ के शेयर बेचे

FII Selling: विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में ₹3,208.76 करोड़ की नेट बिकवाली की। खास बात यह है कि बिकवाली तब बढ़ी, जब निफ्टी लगातार दूसरे दिन बढ़त में बंद हुआ।

एक्सचेंज के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने ₹8,761.71 करोड़ के शेयर खरीदे। वहीं, ₹11,970.47 करोड़ के शेयर बेचे। बुधवार को FIIs की नेट बिकवाली ₹2,032.61 करोड़ थी। यानी एक दिन में बिकवाली काफी बढ़ गई।

इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs नेट खरीदार रहे। उन्होंने ₹14,105.01 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹10,487.26 करोड़ के शेयर बेचे। इस तरह उनकी नेट खरीदारी ₹3,617.75 करोड़ रही। हालांकि, यह बुधवार के ₹3,908.23 करोड़ से कम है।

निफ्टी चढ़ा, सेंसेक्स गिरा

गुरुवार को शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार रहा। Nifty 53 अंक बढ़कर 23,271 पर बंद हुआ। यह निफ्टी की लगातार दूसरी बढ़त है। वहीं, Sensex 22 अंक गिरकर 74,315 पर बंद हुआ।

Nifty Bank में कमजोरी रही। इंडेक्स 237 अंक गिरकर 56,056 पर आ गया। दूसरी ओर, Nifty Midcap में अच्छी तेजी रही। यह 558 अंक बढ़कर 61,432 पर बंद हुआ।

Tata Group के शेयर चढ़े

Nifty के 35 शेयर बढ़त में बंद हुए। इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में खास तौर पर खरीदारी दिखी। Tata Group के शेयर भी चढ़े। N Chandrasekaran के Tata Sons के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्त होने की खबर से इन शेयरों में तेजी आई। Tata Motors Passenger Vehicles भी टॉप गेनर्स में रहा।

त्योहारी सीजन से पहले ऑटो शेयरों में भी खरीदारी रही। Maruti Suzuki और TVS Motor करीब 2% चढ़े।

ONGC समेत इन शेयरों में गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी का असर ऑयल कंपनियों पर दिखा। ONGC करीब 2% गिरा और Nifty का सबसे बड़ा लूजर रहा।

PB Fintech में 4% की गिरावट आई। इससे बुधवार की तेजी का करीब आधा हिस्सा वापस चला गया। Federal Bank भी 2% गिरा। वहीं, कॉरपोरेट अनाउंसमेंट की उम्मीद में Jana Small Finance Bank 2% चढ़ा।

सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी

सेमीकंडक्टर से जुड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी दिखी। Kaynes Technology, Hitachi Energy India और CG Power में 3% से ज्यादा की तेजी रही।

रुपया थोड़ा मजबूत हुआ

भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। यह ₹95.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया ₹95.96 प्रति डॉलर पर था।

NSE और हीरो मोटर्स IPO के GMP में बड़ी गिरावट, निवेशकों को किस बात का है डर?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।