Tata Sons News: नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को गैरकानूनी बताया, जानिए आखिर यह पूरा मामला क्या है

Tata Sons News: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को 17 सितंबर को एक्सटेंशन मिल गया। वह 20 फरवरी, 2027 को कार्यकाल खत्म होने के अगले 5 सालों तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को हुआ, जिसमें चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव 4-1 के वोट से पारित हो गया। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

टाटा ने रीअप्वाइंटमेंट पर उठाए सवाल

नोएल टाटा ने अब कहा है कि टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति गैरकानूनी है। उन्होने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बोर्ड के फैसले पर सवाल उठाए हैं। इसका असर देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप की लीडरशिप पर प़ड़ सकता है। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसके चेयरमैन चंद्रशेखरन है, जबकि नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं।

टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ दिया वोट 

टाटा ने कहा, “मैंने चंद्रा की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। कानूनी राय के आधार पर गलत तरीके से मेरे वीटो को खारिज कर दिया। यह फैसला गैरकानूनी है। मैंने अपना विरोध दर्ज कराया।” उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए संक्षिप्त इंटरव्यू में यह बात बताई। टाटा समूह के शेयरों में चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन के बाद तेजी दिखी।

अब एजीएम में चंद्रा को हटाने की कोशिश होगी

इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि अब नोएल टाटा का नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन को टाटा संस से बाहर करने की कोशिश करेगा। एक व्यक्ति ने बताया, “अगर उन्हें एक बार डायरेक्टर पद से हटा दिया जाता है तो वह चेयरमैन के पद पर बने नहीं रह सकते।”

SRTT के मसले के समाधान के बाद होगी एजीएम

व्यक्ति ने कहा, “सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के मसले के समाधान के बाद एजीएम होगी।” इस मामले की जानकारी रखने वाले एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “टाटा के ट्रस्टों में से एक ने पहले ही चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है और उसने तीसरी बार पुनर्नियुक्ति नहीं चाहने के चंद्रशेखर के फैसले को भी स्वीकार कर लिया है।”

टाटा संस आर्टिकल्स एसोसिएशन के एक आर्टिकल से फंसा पेच

इस बारे में जानकारी के लिए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। इस पूरे विवाद की जड़ में टाटा संस आर्टिकल्स एसोसिएशन का एक आर्टिकल है। इसमें यह कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से टाटा संस के बोर्ड में नियुक्त आधे से ज्यादा डायरेक्टर्स की मंजूरी के बाद ही कोई फैसला लागू हो सकता है।

SDTT ने चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है

टाटा संस के बोर्ड में एन चंद्रशेखरन, नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनीता एम जॉर्ज शामिल हैं। टाटा के दो प्रमुख ट्रस्टों में से एक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने 12 अगस्त को चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के ऐलान के बाद कहा था कि वह चंद्रशेखरन के फैसले का सम्मान करता है। एसडीटीटी ने टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश के लिए एक कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

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अब दिसंबर तक होने वाली एजीएम पर टिकी निगाहें 

अब नजरें टाटा संस की एजीएम पर होंगी, जिसे पहले टाला जा चुका है। 31 दिसंबर तक एजीएम जरूरी है। यह एजीएम इसलिए अहम है, क्योंकि रोटेशन के आधार पर चंद्रशेखरन को टाटा संस के डायरेक्टर पद से रिटायर होना है और उनकी पुनर्नियुक्ति के लिए शेयरोल्डर्स का एप्रूवल जरूरी है।

Stocks to Watch: 17 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch: गुरुवार 17 सितंबर को शेयर बाजार में 13 कंपनियों से जुड़े अहम अपडेट देखने को मिल सकते हैं। इनमें टाटा ग्रुप के स्टॉक्स से जुड़ी खबर भी शामिल है। वहीं, कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं। कुछ ने विस्तार और अधिग्रहण की योजनाओं का ऐलान किया है।

Tata Group Stocks

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को मुंबई में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से पद छोड़ने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा जा सकता है। उनकी मौजूदा अवधि फरवरी 2027 में पूरी हो रही है। बैठक में संभावित लिस्टिंग, अगले चेयरमैन और ग्रुप गवर्नेंस पर भी चर्चा हो सकती है।

GNFC

सरकारी फर्टिलाइजर और केमिकल कंपनी GNFC ने संजीव कुमार को नया मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। नियुक्ति 9 सितंबर 2026 से प्रभावी है। उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। वह राजकुमार बेनीवाल की जगह लेंगे, जिन्हें गुजरात सरकार ने सूरत का म्युनिसिपल कमिश्नर बनाया है।

Susan Electronics India

इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी Susan Electronics India के बोर्ड ने बागपत में जमीन खरीदने को मंजूरी दी है। कंपनी करीब ₹22 करोड़ में यह जमीन खरीदेगी। इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने के लिए होगा। कंपनी ने जून 2026 में शेयर बाजार में शुरुआत की थी।

LT Foods

फूड सेक्टर की कंपनी LT Foods, Kameda LT Foods India में जापान की Kameda Seika की पूरी 49% हिस्सेदारी खरीदेगी। LT Foods के पास अभी 51% हिस्सेदारी है। डील के बाद हिस्सेदारी 100% हो जाएगी। यह जॉइंट वेंचर भारत में राइस स्नैक्स का कारोबार करता है और ‘Kari Kari’ ब्रांड से जुड़ा है।

Vodafone Idea

टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea पर TRAI ने ₹2 लाख की फाइनेंशियल पेनल्टी लगाई है। कंपनी ने 16 सितंबर को इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी। कार्रवाई नवंबर 2025 में क्वालिटी ऑफ सर्विस के तय मानकों को पूरा नहीं करने से जुड़ी है। कंपनी ने कहा है कि वह TRAI के आदेश की समीक्षा कर रही है।

Krsnaa Diagnostics

डायग्नोस्टिक्स सेक्टर की कंपनी Krsnaa Diagnostics ने पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉरपोरेशन के साथ 15 साल का करार किया है। इसके तहत पंजाब के चार सरकारी अस्पतालों में PET-CT डायग्नोस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कंपनी इन सुविधाओं को चलाने और मेंटेन करने का काम भी करेगी।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders ने NSHIPML के साथ समझौता ज्ञापन यानी MoU साइन किया है। इसके तहत कंपनी Dighi ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर के लिए एंकर शिपयार्ड के तौर पर काम करेगी।

Venus Pipes & Tubes

स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब बनाने वाली कंपनी Venus Pipes & Tubes के बोर्ड ने फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 371.99 करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसके लिए शेयरधारकों और अन्य जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों की जरूरत होगी।

Fortis Healthcare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी Fortis Healthcare ने Seth Sunder Lal Jain Charitable Eye Hospital यानी SLJ Society के साथ अंतिम समझौते किए हैं। इसके तहत कंपनी नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 से ज्यादा बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हेल्थकेयर सेवाएं देगी।

Kalpataru Projects International

इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनी Kalpataru Projects International ने बताया कि उसकी 96.12% फर्स्ट-लेवल स्टेप-डाउन मटेरियल सब्सिडियरी Linjemontage I Grästorp AB को स्वीडिश फाइनेंशियल सुपरवाइजरी अथॉरिटी से मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी प्रस्तावित IPO के प्रॉस्पेक्टस से जुड़ी है।

Infosys

आईटी सेक्टर की कंपनी Infosys ने इंदौर डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार किया है। कंपनी ने सुपर कॉरिडोर स्थित अपने कैंपस में नए Software Development Block यानी SDB-2 का उद्घाटन किया है। इससे इंदौर में कंपनी के डेवलपमेंट सेंटर की क्षमता बढ़ेगी।

Highway Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनी Highway Infrastructure को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से 220.66 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन और टोल प्लाजा के संचालन से जुड़ा है।

Alembic Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी Alembic Pharmaceuticals ने बताया कि अमेरिकी दवा नियामक USFDA ने गुजरात के वडोदरा स्थित उसकी बायोइक्विवेलेंस फैसिलिटी का इंस्पेक्शन पूरा कर लिया है। कंपनी के मुताबिक, USFDA ने इस फैसिलिटी का निरीक्षण बंद कर दिया है।

Juniper Hotels

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनी Juniper Hotels ने Novotel Imagicaa होटल को खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी इस होटल को महाराष्ट्र के खोपोली में Imagicaaworld Entertainment से 248 करोड़ रुपये में खरीदेगी। Juniper Hotels भारत में Hyatt से जुड़े होटलों की सबसे बड़ी मालिक कंपनी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 15 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 10 शेयर, टाटा ग्रुप और आईटी स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 15 सितंबर को कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। HDFC Bank में MD और CEO की नियुक्ति को लेकर हलचल है। वहीं Tata Group, IT, फार्मा और ब्रोकिंग स्टॉक्स से जुड़े अहम अपडेट भी हैं। इन खबरों का असर मंगलवार को शेयरों की चाल पर दिख सकता है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC Bank ने अगले MD और CEO की नियुक्ति को लेकर दो नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं। इनमें एक इंटरनल और एक एक्सटर्नल उम्मीदवार है। बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर Kaizad M Bharucha इंटरनल उम्मीदवारों में शामिल हैं, जबकि दूसरा नाम एक अन्य प्राइवेट बैंक के टॉप एग्जीक्यूटिव का है। HDFC Bank का ADR शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट पर 6.5% चढ़ा।

Info Edge

इंटरनेट सर्विसेज कंपनी Info Edge ने लीडरशिप में बदलाव किया है। Adobe Systems India के पूर्व MD नरेश चंद गुप्ता को स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है। हिमांशु अग्रवाल नए CFO होंगे। गुप्ता 1 अक्टूबर से पांच साल के लिए बोर्ड में शामिल होंगे, जिसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी है।

Aurobindo Pharma

फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि आंध्र प्रदेश स्थित उसके API मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का US FDA इंस्पेक्शन पूरा हो गया है। इसमें कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला। यह इंस्पेक्शन 7 से 11 सितंबर 2026 के बीच हुआ था।

Indiabulls

एनबीएफसी कंपनी Indiabulls ने Fintech Cloud Private Limited में 70% हिस्सेदारी खरीदने के लिए ₹1,050 करोड़ की डील की है। इस सौदे से कंपनी फिनटेक टेक्नोलॉजी स्पेस में एंट्री करेगी।

Raymond

टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग कंपनी Raymond ने बताया कि उसकी एयरोस्पेस सब्सिडियरी को एक डिफेंस कंपनी से नया कारोबार मिला है। इसकी सालाना संभावित वैल्यू करीब ₹33 करोड़ है। ऑर्डर में 300 से ज्यादा पार्ट नंबर और हर साल 37,000 से ज्यादा कंपोनेंट शामिल हैं।

HDFC Life Insurance

बीमा कंपनी HDFC Life Insurance पर जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए ₹942.18 करोड़ का GST डिमांड कन्फर्म हुआ है। इसके अलावा ₹2,422.97 करोड़ की पेनल्टी भी लगाई गई है। इस पर लागू ब्याज भी देना होगा।

Granules India

फार्मा कंपनी Granules India के प्रमोटर डॉ. कृष्ण प्रसाद चिगुरुपति ने 11 सितंबर को 1.72 करोड़ शेयर बेचे। यह बिक्री ब्लॉक और ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए हुई। इससे मिले फंड का इस्तेमाल प्रेफरेंशियल इश्यू की दूसरी किस्त और ग्रोथ प्लान के लिए किया जाएगा।

Jubilant Pharmova

फार्मा कंपनी Jubilant Pharmova ने बताया कि US FDA ने वॉशिंगटन के Spokane स्थित उसके CMO फैसिलिटी को “Voluntary Action Indicated” यानी VAI कैटेगरी में रखा है। यह फैसला 8 से 17 जून 2026 के बीच हुए इंस्पेक्शन के बाद आया है।

Sun Pharma

फार्मा कंपनी Sun Pharma ने बताया कि उसकी सब्सिडियरीज ने अमेरिका में जेनेरिक दवा कीमतों से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में वादी के साथ समझौता किया है। इसमें Sun Pharmaceutical Industries Inc., Taro Pharmaceutical Industries और Taro Pharmaceuticals USA शामिल हैं। समझौते की रकम सार्वजनिक नहीं की गई है।

Coforge

आईटी सर्विसेज कंपनी Coforge में बोर्ड स्तर पर बदलाव हुआ है। डीके सिंह ने तत्काल प्रभाव से इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और Nomination and Remuneration Committee के चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दिया है। Beth Boucher को NRC का नया चेयरपर्सन बनाया गया है।

Tata Group Stocks

केमिकल कंपनी Tata Chemicals समेत अन्य Tata Group Stocks पर फोकस रहेगा। सूत्रों के मुताबिक RBI ने Tata Sons की एप्लीकेशन खारिज कर दी है। इसका मतलब है कि Tata Sons को RBI के नियमों के मुताबिक लिस्टिंग करनी होगी।

IT Stocks

आईटी सेक्टर की कंपनियां मंगलवार को फोकस में रहेंगी। OpenAI, Anthropic और चीन के सिक्योरिटी चीफ ने AI डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी करने की बात कही है। इस घटनाक्रम के बाद ग्लोबल मार्केट में ज्यादातर AI से जुड़े शेयरों में कमजोरी देखी गई।

Broking Stocks

स्टॉक एक्सचेंज BSE और ब्रोकिंग कंपनियां Angel One समेत अन्य ब्रोकिंग स्टॉक्स मंगलवार को फोकस में रह सकते हैं। SEBI के CAS से जुड़े कंसल्टेशन पेपर में पांच सुझाव दिए गए हैं। इनमें VWAP सिस्टम, CAS स्टॉक्स की नॉर्मल कैश ट्रेडिंग, लाइव इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू पर रोक और स्पूफिंग पर सख्ती जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। Jefferies के मुताबिक इन प्रस्तावों से अनिश्चितता कम होगी और ब्रोकर्स व एक्सचेंजों के लिए यह सकारात्मक है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI ने एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज किया, जानिए क्या है इसका मतलब

आरबीआई ने टाटा संस की एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का अप्लिकेशन खारिज कर दिया है। टाटा संस ने स्वैच्छिक रूप से बतौर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) अपना सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अप्लेकिशन दिया था। सूत्रों ने सीएनबीसी-टीवी18 को यह जानकारी दी।

टाटा संस को अब खुद को लिस्ट कराना होगा

RBI के टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज कर देने का मतलब है कि टाटा संस को अब अपर-लेयर एनबीएफसी के लिए तय केंद्रीय बैंक के नियमों का पालन करना होगा। उसे खुद को स्टॉक एक्सचेंजों में भी लिस्ट कराना होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।

रेगुलेटरी दर्ज को लेकर खत्म हुई अनिश्चितता

इस डेवलपमेंट से टाटा संस के रेगुलेटरी दर्जे को लेकर कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है। Tata Sons ने मार्च 2024 में कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के अपने रजिस्ट्रेशन को सररेंडर करने के लिए अप्लिकेशन दिया था। इससे पहले उसने 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज तय समय से पहले चुका दिया था। इससे FY24 में टाटा समूह की यह होल्डिंग कंपनी कैश पॉजिटिव हो गई थी।

अपर-लेयर एनबीएफसी लिस्ट में टाटा संस भी

RBI ने टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी फ्रेमवर्क में बनाए रखा है। केंद्रीय बैंक ने इस साल अगस्त में अपर लेयर वाली 17 एनबीएफसी की लिस्ट में टाटा संस को बनाए रखा। उसने कहा था कि लिस्ट में शामिल होने और लाइसेंस सरेंडर करने के टाटा संस के अप्लिकेशन के बीच कोई संबंध नहीं है। उसने कहा था टाटा संस के अप्लिकेशन पर विचार चल रहा है।

पहली बार सितंबर 2022 में लिस्ट में हुई शामिल

RBI ने टाटा संस को पहली बार सितंबर 2022 में अपर-लेयर एनबीएफसी की लिस्ट में शामिल किया था। पहले के नियम के मुताबिक, अपर-लेयर एनबीएफसी को खुद को तीन साल के अंदर लिस्ट कराना जरूरी था। इस हिसाब से टाटा संस को खुद को सितंबर 2025 तक स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराना जरूरी था। लेकिन, डीरजिस्ट्रेशन का अप्लिकेशन लंबित होने के चलते कंपनी ने खुद को लिस्ट नहीं कराया।

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केंद्रीय बैंक ने अपर-लेयर एनबीएफसी नियम में किया बदलाव

RBI ने बाद में अपर-लेयर एनबीएफसी के नियमों में बदलाव किया। इसके मुताबिक, एक लाख करोड़ या इससे ज्यादा एसेट्स वाली एनबीएफसी को अपर-लेयर की कैटेगरी में रखा गया है। टाटा संस का एसेट इस लिमिट से ज्यादा है। इसका मतलब है कि नियमों में बदलाव के बावजूद टाटा संस अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में है और उसे खुद को शेयर बाजारों पर लिस्ट कराना होगा।

आशीषकुमार चौहान टाटा संस का चेयरमैन बनने की रेस में नहीं, NSE ने रिपोर्ट्स को खारिज किया

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 6 सितंबर को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि NSE के MD और CEO आशीषकुमार चौहान Tata Sons के चेयरमैन बन सकते हैं।

NSE ने साफ कहा कि ये खबरें एक्सचेंज के पास मौजूद किसी जानकारी पर आधारित नहीं हैं। चौहान ने भी इन खबरों को गलत बताया है। ये सारी बातें ऐसे समय में हो रही हैं, जब NSE आईपीओ लाकर शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा हैष

PTI की रिपोर्ट के बाद सफाई

यह सफाई 5 सितंबर की PTI रिपोर्ट के बाद आई। रिपोर्ट में Tata Sons के अगले चेयरमैन की दौड़ में Tata Steel के CEO टीवी नरेंद्रन और Tata Sons के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल नरेंद्रन और अग्रवाल के साथ चौहान का नाम भी शामिल किया गया था।

NSE के मुताबिक, चौहान ने ऐसी खबरों रो साफ तौर पर खारिज किया है। उन्होंने इन्हें अटकलों पर आधारित और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।

चौहान ने भी किया इनकार

चौहान ने NSE को भेजे ईमेल में कहा कि Tata Sons के चेयरमैन पद से उनका नाम जोड़ने वाली खबरें पूरी तरह निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान अभी NSE की जिम्मेदारियों पर है। खासतौर पर एक्सचेंज के प्रस्तावित IPO पर उनका फोकस है।

NSE IPO पर ध्यान

चौहान ने कहा कि वह बोर्ड और शेयरधारकों के साथ मिलकर NSE की सफल लिस्टिंग के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह लगे हुए हैं।

NSE लंबे समय से अपने IPO की तैयारी कर रहा है। ऐसे में कंपनी के नेतृत्व की भूमिका अहम है। चौहान ने साफ किया है कि फिलहाल उनका ध्यान NSE की लिस्टिंग और उससे जुड़े काम पर है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने बदली पहचान, अब Tata.Cars नाम से दिखेगी कंपनी

टाटा ग्रुप की पैसेंजर गाड़ी बनाने वाली कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles (TMPV) अब ग्राहकों के सामने Tata.Cars नाम से नजर आएगी। कंपनी के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने यह जानकारी दी। अब डीलरशिप, शोरूम और मार्केटिंग में Tata.Cars नाम ज्यादा दिखेगा।

हालांकि, कंपनी का कानूनी नाम नहीं बदला है। Tata Motors Passenger Vehicles ही कंपनी की रजिस्टर्ड कॉरपोरेट एंटिटी रहेगी। यह बदलाव सिर्फ ग्राहकों के सामने कंपनी की पहचान को लेकर है।

Tata.Cars नाम क्यों अपनाया?

पैसेंजर गाड़ी कंपनी Tata Motors अपने इस कारोबार की अलग पहचान मजबूत करना चाहती है। कंपनी पेट्रोल और डीजल के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बेचती है। ऐसे में Tata.Cars नाम के जरिए पैसेंजर गाड़ी कारोबार को एक साफ ब्रांड पहचान देने की कोशिश है।

EV पर Tata ने कब लगाया था दांव?

Tata Motors Passenger Vehicles ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर उस समय दांव लगाया था, जब भारत में EV का बाजार काफी शुरुआती दौर में था। उस समय लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर ज्यादा भरोसा नहीं था। चार्जिंग स्टेशन भी बहुत कम थे।

यानी समस्या दोनों तरफ थी। ग्राहक चार्जिंग की कमी के कारण EV नहीं खरीद रहे थे। कंपनियां कम EV होने की वजह से चार्जिंग नेटवर्क पर बड़ा निवेश नहीं कर रही थीं। Tata Motors ने इस चक्र को तोड़ने की कोशिश की।

Tata Group की कंपनियों ने दिया साथ

EV का पूरा इकोसिस्टम बनाने में Tata Group की कई कंपनियों ने मदद की। Tata Power ने चार्जिंग नेटवर्क में सहयोग किया। Tata AutoComp ने कंपोनेंट्स में मदद की। Tata Technologies, Tata Elxsi और TCS ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़ा सपोर्ट दिया।

कंपनी का मानना था कि EV से प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। इससे इंपोर्टेड फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता भी घट सकती है। बाद में Tata Motors भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ी बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल हो गई।

Tata Motors Passenger Vehicles शेयर

Tata Motors Passenger Vehicles का शेयर गुरुवार, 27 अगस्त को 0.86% बढ़कर ₹315.80 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 17.47% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 22.77% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.15 लाख करोड़ रुपये है।

Stock in Focus: सरकार कंपनी को ₹134 करोड़ के 5 ऑर्डर मिले, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hindustan Copper OFS: सरकार 6% तक हिस्सेदारी बेचेगी, ₹514 का फ्लोर प्राइस तय; 1 साल 140% चढ़ा स्टॉक

Hindustan Copper OFS: सरकारी कंपनी Hindustan Copper में भारत सरकार ऑफर ऑफर सेल (OFS) के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर तय किया गया है।

DIPAM के सचिव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। सरकार पहले कंपनी की 3% हिस्सेदारी बेचेगी। अगर इश्यू को ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलता है, तो अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेची जा सकती है।

सरकार जुटा सकती है ₹3,000 करोड़

अगर ग्रीन-शू ऑप्शन समेत पूरी 6% हिस्सेदारी बिक जाती है, तो ₹514 के फ्लोर प्राइस पर सरकार को करीब ₹3,000 करोड़ मिल सकते हैं। फिलहाल Hindustan Copper में सरकार की हिस्सेदारी करीब 66% है। पूरी 6% हिस्सेदारी बेचने के बाद यह घटकर करीब 60% रह जाएगी।

OFS में 10% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व होगा। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर अलग रखे गए हैं।

मजबूत नतीजों के बाद हिस्सेदारी बिक्री

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जून तिमाही में Hindustan Copper का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹353 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹134 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 81.4% बढ़कर ₹936.5 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹516.4 करोड़ था।

कॉपर की कीमतों में तेजी का फायदा

ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमत पिछले हफ्ते 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के अंत के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था।

कॉपर की कीमतों में लगातार छह हफ्तों तक तेजी रही। सप्लाई की कमी और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की चिंता कम होने से कॉपर को सहारा मिला।

शेयर भाव से कितना नीचे है फ्लोर प्राइस?

Hindustan Copper के शेयर सोमवार को 0.25% की बढ़त के साथ ₹574.15 पर बंद हुए। इस हिसाब से OFS का ₹514 का फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से करीब 10.5% नीचे है।

पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.54% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 140% का रिटर्न दिया है।

Tata Group Stock: टाटा ग्रुप के स्टॉक में 42% कमाई का मौका! मोतीलाल ओसवाल ने ₹1500 का टारगेट दिया

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Group Stock: टाटा ग्रुप के स्टॉक में 42% कमाई का मौका! मोतीलाल ओसवाल ने ₹1500 का टारगेट दिया

Tata Group Stock: टाटा ग्रुप की FMCG कंपनी Tata Consumer Products के शेयर को लेकर ब्रोकरेज हाउस Motilal Oswal काफी पॉजिटिव है। ब्रोकरेज ने शेयर पर Buy रेटिंग दी है। साथ ही इसका टारगेट प्राइस ₹1,500 रखा है। अभी शेयर करीब ₹1,057.90 पर है। यानी मौजूदा भाव से शेयर में करीब 42% की तेजी की गुंजाइश है।

₹1,500 तक क्यों जा सकता है शेयर?

टाटा कंज्यूमर अब सिर्फ चाय और नमक की कंपनी नहीं रही। कंपनी लगातार नए कारोबार में उतर रही है। Tata Sampann, Tata Soulfull, Organic India और Capital Foods जैसे ब्रांड तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कंपनी का ग्रोथ पोर्टफोलियो मजबूत हो रहा है।

कंपनी नए प्रोडक्ट भी तेजी से लॉन्च कर रही है। FY25 में 41 नए प्रोडक्ट आए थे। FY26 में यह संख्या बढ़कर 80 हो गई। इनमें 55% प्रोडक्ट हेल्थ और वेलनेस से जुड़े थे। यानी कंपनी अब इस सेगमेंट पर खास जोर दे रही है।

ऑनलाइन बिक्री बनी बड़ा सहारा

Tata Consumer के लिए ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। FY22 में भारत के कारोबार में इन चैनलों की हिस्सेदारी 19% थी। FY26 में यह बढ़कर 41% हो गई। ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स से मिलकर कंपनी को 19% रेवेन्यू मिल रहा है।

कंपनी की पहुंच भी बढ़ी है। FY26 में कंपनी 45 लाख आउटलेट तक पहुंच चुकी थी। इसका फायदा नए प्रोडक्ट को तेजी से बाजार में उतारने में मिल सकता है।

कमाई बढ़ने का अनुमान

Motilal Oswal को उम्मीद है कि FY26 से FY28 के बीच कंपनी का रेवेन्यू करीब 10% CAGR से बढ़ेगा। EBITDA में 16% और मुनाफे में 21% CAGR का अनुमान है। इसी उम्मीद के आधार पर ब्रोकरेज ने ₹1,500 का टारगेट दिया है।

टाटा कंज्यूमर के इंटरनेशनल कारोबार पर कॉफी की महंगी कीमतों का असर पड़ा था। अब इसमें राहत मिल रही है। FY27 की पहली तिमाही में Arabica की कीमत 6% और Robusta की कीमत 9% तिमाही आधार पर घटी। इससे खासकर अमेरिकी कारोबार के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।

टाटा कंज्यूमर के शेयर

टाटा कंज्यूमर का शेयर सोमवार को 0.85% की बढ़त के साथ 1,057.90 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में यह 10.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में 2.19% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.05 लाख करोड़ रुपये है।

Power Stocks: ये 7 पावर स्टॉक्स दे सकते हैं 43% तक रिटर्न, जेफरीज ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Tata Sons AGM: टाटा संस की एजीएम टली, टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

Tata Sons AGM: टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) टल गई है। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होने वाली थी। लेकिन, कोरम पूरा नहीं होने से बैठक टालनी पड़ी। टाटा समूह के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। हालांकि, एजीएम टलने का अनुमान पहले से था। टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है।

Tata Sons के एक सूत्र ने बताया कि बोर्ड की बैठक बाद में होने की उम्मीद है। इस बैठक में एजीएम की अगली तारीख के बारे में फैसला होगा। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के मीटिंग बुलाने पर रोक लगाई हुई है। इस वजह से सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट टाटा संस में एक ज्वाइंट प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर पा रहे हैं।

टाटा संस के एजीएम के लिए कोरम तभी पूरा होगा जब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट का ज्वाइंट प्रतिनिधि मौजूद होगा। 18 अगस्त को दोनों ट्रस्ट के ज्वाइंट प्रतिनिधि के नहीं होने की वजह से टाटा संस की एजीएम टल गई। टाटा संस में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की करीब 51.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

इस मामले से जुड़े लोगो ने बताया कि एजीएम के लिए दोपहर बाद 2:30 बजे का समय तय था। तय समय के मुताबिक, एजीएम शुरू हुई। लेकिन, 3 बजे इसे टालने का फैसला लिया गया। टाटा संस के निवर्तमान चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन बॉम्बे हाउस में मौजूद थे। उनके साथ बोर्ड के सदस्य सौरव अग्रवाल और अनीता मरानगोली जॉर्ज भी मौजूद थी। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, हरीश मानवानी और वेणु श्रीनिवासन ने मीटिंग में वर्चुअसल रूप से हिस्सा लिया।

लंबे समय तक टाटा ग्रुप का हिस्सा रहे मेहिल मिस्त्री रतन टाटा की वसीयत के एग्जिक्यूटर के रूप में मीटिंग में वर्चुअल रूप से शामिल हुए। टाटा समूह के ट्रस्ट्स में मिस्त्री की नियुक्ति को जरूरी समर्थन नहीं मिला था, जिससे वह ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सके थे। रतन टाटा टाटा संस के पूर्व चेयरमैन थे।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के 12 अगस्त को इस्तीफे का ऐलान करने के बाद 18 अगस्त को होने वाली एजीएम पर नजरें टिकी थी। हालांकि, यह माना जा रहा था कि कोरम पूरा नहीं होने की वजह से एजीएम टल जाएगी। 18 अगस्त को टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। उधर, 13 अगस्त को टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस में चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए कमेटी के गठन का प्रस्ताव पारित कर दिया था।