एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने इस्तीफा दिया:यूक्रेन को समय पर तोप के गोले नहीं दे पाए; कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनी शामिल, अनुभव नहीं होने का आरोप

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। मार्च 2024 में इसे भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशंस ने खरीदा था। पहला कॉन्ट्रैक्ट अगस्त 2024 में हुआ था। इसके तहत करीब 1.5 करोड़ यूरो एडवांस दिए गए। इसके बाद दूसरे और फिर दो अन्य कॉन्ट्रैक्ट किए गए। चारों सौदों में एडवांस भुगतान करीब 7 करोड़ यूरो तक पहुंच गया। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल बताए गए हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध को लेकर मामला मध्यस्थता तक पहुंच गया है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। मंत्री बोले- हर सौदे की जिम्मेदारी मेरी रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने कहा कि मंत्री खुद हर हथियार खरीद के कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित कॉन्ट्रैक्ट व्यक्तिगत रूप से नहीं पढ़े थे। लेकिन उनके मुताबिक, मंत्रालय के काम की राजनीतिक जिम्मेदारी रक्षा मंत्री की होती है। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ————————- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…

एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने इस्तीफा दिया:यूक्रेन को समय पर तोप के गोले नहीं दे पाए; कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनी शामिल, अनुभव नहीं होने का आरोप

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ————————- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…

Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

Promoter Holding: इन 10 मिडकैप शेयरों में प्रमोटर्स ने हिस्सेदारी घटाई, जानिए 1 महीने में कैसा रहा रिटर्न

स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

पुतिन बोले- रूसी जहाजों को जब्त करना आतंकवाद है:इससे यूक्रेन जंग कभी खत्म नहीं होगी; नॉर्वे के जहाज जब्त करने पर नाराजगी जताई

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच समुद्र में रूसी जहाजों को लेकर तनाव बढ़ गया है। रूस के नागरिक और कारोबारी जहाजों पर हमलों को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है। उन्होंने इसे आतंकवाद करार दिया और कहा कि इससे रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की संभावना और मुश्किल हो रही है। पुतिन ने नॉर्वे की ओर से रूसी रिसर्च जहाज प्रोफेसर मोलचानोव को हिरासत में लिए जाने पर भी नाराजगी जताई। नॉर्वे ने यूक्रेन के कहने पर जहाज जब्त किया नॉर्वे ने यूक्रेन की सरकारी कंपनी नाफ्टोगाज की मांग पर इस जहाज को हिरासत में लिया। उस वक्त ‘प्रोफेसर मोलचानोव’ स्वालबार्ड के बारेंट्सबर्ग इलाके में खड़ा था। यह रूस का सरकारी रिसर्च जहाज है। इस पर वैज्ञानिकों और रिसर्च से जुड़े कर्मचारियों के अलावा उनके परिवार और पर्यटक भी सफर करते हैं। यह स्वालबार्ड की रूसी बस्तियों के लिए जरूरी सामान भी पहुंचाता है। नॉर्वे ने यह जहाज किसी समुद्री प्रतिबंध के उल्लंघन के आरोप में नहीं, बल्कि एक पुराने मुआवजे के मामले में जब्त किया। 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद वहां नाफ्टोगाज की संपत्तियों पर नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद नाफ्टोगाज ने रूस से मुआवजा मांगा। 2023 में हेग की एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रूस को नाफ्टोगाज को करीब 4.22 अरब डॉलर देने का आदेश दिया। रूस ने अब तक यह रकम नहीं दी है। पुतिन बोले- यूक्रेन ने 100 रूसी जहाजों पर हमले किए पुतिन ने कहा कि उनकी नाराजगी सिर्फ नॉर्वे द्वारा जहाज जब्त किए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यूक्रेन अब समुद्र में रूसी नागरिक जहाजों को सीधे निशाना बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 40 दिनों के भीतर लगभग 100 रूसी व्यापारिक जहाजों पर हमले किए गए, जिनमें कई रूसी व विदेशी नाविकों की जान गई है। पुतिन ने चेतावनी दी कि रूस दुनिया के किसी भी कोने में इसका करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका से बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को लेकर भले ही मुश्किलें बढ़ रही हों, लेकिन पुतिन ने अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है और मॉस्को, वॉशिंगटन के साथ रिश्ते फिर सामान्य करना चाहता है। पुतिन ने यह भी साफ किया कि इसके लिए सिर्फ रूस की इच्छा काफी नहीं है। अमेरिका को भी इसके लिए तैयार होना होगा। पुतिन ने ट्रम्प के रुख को लेकर कहा कि उनकी समझ के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति सकारात्मक बातचीत के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क जारी है। ट्रम्प के दूत भी रूस के संपर्क में हैं। इसी बीच पिछले हफ्ते CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूस के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में क्या बात हुई, यह दोनों देशों ने सार्वजनिक नहीं किया है। पुतिन ने नई सैन्य लामबंदी की खबरों को खारिज किया राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस में नई अनिवार्य सैन्य भर्ती या लामबंदी की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस को नए सैनिकों की लामबंदी की जरूरत नहीं है। व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने कहा, “आज ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसके लिए लामबंदी की जरूरत हो।” उन्होंने इन खबरों को दुष्प्रचार अभियान बताया। पुतिन के मुताबिक, इस महीने होने वाले रूस के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव से पहले यह अभियान चलाया जा रहा है, ताकि चुनाव के नतीजों को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोग अपनी इच्छा से सेना में शामिल हो रहे हैं और सैन्य सेवा के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहे हैं। 2022 में 3 लाख लोगों की हुई थी लामबंदी रूस में आखिरी बार सितंबर 2022 में आंशिक लामबंदी हुई थी। क्रेमलिन के मुताबिक, तब करीब 3 लाख रिजर्व सैनिकों को सेना में बुलाया गया था। इस फैसले के बाद रूस में काफी विरोध हुआ था और बड़ी संख्या में सैन्य सेवा की उम्र वाले पुरुष देश छोड़कर चले गए थे। इसके बाद से क्रेमलिन कई बार कह चुका है कि रूस में दोबारा ऐसी लामबंदी की कोई योजना नहीं है।

गडकरी पूरे देश में चाहते हैं बाइक टैक्सी पर राज्यों के हाथ में चाबी! ऐसा हुआ तो 8 करोड़ लोगों को होने लगेगी टू-व्हीलर से कमाई

Bike Taxi Update: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्राइवेट टू-व्हीलर का इस्तेमाल सवारी ढोने यानी बाइक टैक्सी के रूप में करने की वकालत की है। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दें। गडकरी का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ तो ग्रामीण इलाकों में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं। वैसे आपको बता दें कि केंद्र सरकार भले ऐसा चाह ले लेकिन इसक बावजूद यह पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर करता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बाइक टैक्सी चलाने की इजाजत देते हैं या नहीं।

राज्यों के पास क्यों है अंतिम फैसला?

महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘हमने इसकी अनुमति दे दी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट स्टेट सब्जेक्ट है। मैं उनसे ऐसा करने का आग्रह करूंगा क्योंकि इससे कई लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा।’ Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 एक ऐसा फ्रेमवर्क देती है जिससे एग्रीगेटरों को पैसेंजर जर्नी के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।

क्या आपकी अपनी बाइक बन सकती है टैक्सी?

हर जगह खुद ब खुद किसी प्राइवेट बाइक का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग रूल हैं। इसे कर्नाटक और महाराष्ट्र के हिसाब से समझा जा सकता है। इस साल जनवरी में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के रूप में किया जा सकता है और अधिकारियों को पीले रंग की प्लेट रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर्स कैरियर्स के रूप में काम करने के लिए परमिट मांगने वाले मालिकों के आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सेफ्टी और बाइक टैक्सियों के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

दूसरी ओर महाराष्ट्र ने 2025 में अपने बाइक-टैक्सी नियमों को नोटिफाइड कर दिया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेटिंग कंडिशन को कवर करने वाले प्रावधान शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क में ई-बाइक और स्कूटर भी शामिल हैं।

ट्रैफिक नियमों के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ और ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम

बाइक टैक्सी पर बात करने के साथ ही गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा नियमों में एक और प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी है। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए एक नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के नेगेटिव पॉइंट जमा होंगे और दोबारा उल्लंघन करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देना है।

आपको बता दें कि सुरक्षा नाम के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्गों और खनन कार्यों में शामिल ड्राइवरों और श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जांच, परामर्श देना है। यह पायलट प्रोजेक्ट एनएच 44 पर नागपुर से काम्टी तक 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें शुरुआती चरण में 10000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

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Silver Rate Today 2 September: चांदी के दाम में फिर गिरावट, दिल्ली से चेन्नई तक जानें आज की कीमत

Silver Rate Today 2 September: चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से मिला-जुला संकेत सामने आया है। पिछले कुछ समय से कीमती धातु की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और इसका असर आज के रेट पर भी दिखाई दिया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी की कीमत ₹2,40,500 प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले ₹5,000 कम है। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी कमजोर नजर आई। MCX पर सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 0.24 फीसदी गिरकर ₹2,28,993 प्रति किलो पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी हलचल का असर भी कीमती धातु पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने, गहने बनवाने या निवेश के लिए भाव पर नजर रख रहे हैं, तो आज के रेट आपके लिए जानना जरूरी है। आगे जानिए देश के प्रमुख शहरों में चांदी कितने रुपये किलो बिक रही है।

MCX पर भी चांदी हुई कमजोर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली। आज सुबह तक चांदी का भाव 0.24 फीसदी यानी ₹556 की गिरावट के साथ ₹2,28,993 प्रति किलो रह गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में MCX पर चांदी ₹2,29,549 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

दिल्ली समेत शहरों में चांदी कितने की मिल रही है?

अगर आप अपने शहर में चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो नीचे प्रमुख शहरों के ताजा भाव देख सकते हैं। ज्यादातर शहरों में चांदी की कीमत ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास है।

शहर 1 किलो चांदी का भाव

दिल्ली ₹2,55,000

मुंबई  ₹2,55,000

कोलकाता     ₹2,55,000

चेन्नई ₹2,60,000

पटना  ₹2,55,000

लखनऊ      ₹2,55,000

मेरठ  ₹2,55,000

अयोध्या      ₹2,55,000

कानपुर ₹2,55,000

गाजियाबाद   ₹2,55,000

नोएडा ₹2,55,000

गुरुग्राम      ₹2,55,000

चंडीगढ़ ₹2,55,000

जयपुर ₹2,55,000

अहमदाबाद   ₹2,55,000

पुणे   ₹2,55,000

लुधियाना     ₹2,55,000

गुवाहाटी      ₹2,55,000

इंदौर  ₹2,55,000

सूरत  ₹2,55,000

नागपुर ₹2,55,000

नासिक ₹2,55,000

बैंगलोर ₹2,55,000

वडोदरा ₹2,55,000

भुवनेश्वर     ₹2,60,000

रायपुर ₹2,55,000

हैदराबाद      ₹2,60,000

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत कमजोर हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चांदी करीब $64.74 प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

एक दिन पहले कितनी थी चांदी?

पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी ₹2,45,500 प्रति किलो पर स्थिर थी। इसके बाद इसमें ₹5,000 की गिरावट आई और कीमत घटकर ₹2,40,500 प्रति किलो रह गई। विदेशी बाजारों में भी चांदी पर दबाव रहा। हाजिर चांदी की कीमत करीब 3 फीसदी गिरकर $64.68 प्रति औंस रह गई थी।

मंगलवार को वायदा बाजार में क्या हुआ था?

इससे ठीक एक दिन पहले घरेलू वायदा बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग थी। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की ताजा खरीदारी के चलते चांदी वायदा 0.19 फीसदी बढ़कर ₹2,40,577 प्रति किलो पहुंच गया था। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट में ₹27 की तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में चांदी 0.17 फीसदी गिरकर $66.46 प्रति औंस पर आ गई थी।

खरीदारी करने वालों के लिए क्या समझना जरूरी है?

चांदी के भाव में इस समय तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। घरेलू बाजार, MCX और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अलग-अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर आप चांदी के गहने, सिक्के या निवेश के लिए सिल्वर खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर जांच लें। साथ ही, चांदी की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

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ये खाना है या चूहे की दावत? सूरत रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल का VIDEO देख भड़के लोग

सूरत रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने यात्रियों का ध्यान खींच लिया है। इसमें एक चूहा कांच के फूड काउंटर के अंदर रखा आलू पेटिज खाते हुए दिखाई दे रहा है। एक यात्री ने इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत संबंधित स्टॉल पर कार्रवाई की। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यात्रियों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि खाने के सामान को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है और फूड स्टॉल्स की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। घटना के बाद रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

सुबह-सुबह यात्री ने देखा पूरा मंजर

यह घटना 29 अगस्त की सुबह के शुरुआती घंटों की बताई जा रही है। एक यात्री ने देखा कि चूहा कांच के डिस्प्ले काउंटर के अंदर आराम से घूम रहा था और वहां रखे खाने में से पफ कुतर रहा था। काउंटर में यात्रियों के लिए दूसरे खाद्य पदार्थ भी रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया रेलवे

वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों तक मामला पहुंचा। इसके बाद संबंधित स्टॉल को तुरंत बंद करा दिया गया। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, रेलवे को घटना की जानकारी मिलते ही स्टॉल पर कार्रवाई की गई। बंद किए गए काउंटर की सफाई भी कराई गई।

स्टॉल संचालक पर भी शुरू हुई कार्रवाई

मामले को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा गया है। रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे की ओर से आगे ऐसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संबंधित स्टॉल का कॉन्ट्रैक्ट स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

खास सफाई अभियान के बीच सामने आया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह घटना रेलवे के एक विशेष सफाई अभियान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई। वेस्टर्न रेलवे ने सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल्स में डीप क्लीनिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे के खानपान केंद्रों में साफ-सफाई और हाइजीन के स्तर को बेहतर बनाना था।

16 अगस्त को भी हुआ था पेस्ट कंट्रोल

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 16 अगस्त को स्टेशन पर पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल भी कराया गया था। इसके बावजूद फूड काउंटर के अंदर चूहे के पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

रेलवे स्टेशन पर लोग सफर के दौरान अक्सर फूड स्टॉल से खाना और नाश्ता खरीदते हैं। ऐसे में खाने के सामान के बीच चूहे का पहुंचना यात्रियों के लिए चिंता की बात है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का सवाल यही है कि अगर कांच के बंद काउंटर के अंदर चूहा पहुंच सकता है, तो वहां रखे खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई कितनी भरोसेमंद है? फिलहाल रेलवे ने स्टॉल बंद कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना स्टेशन के फूड आउटलेट्स में नियमित सफाई और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

26 तारीख का अनसुलझा खौफ! सुनामी, भुज भूकंप से लेकर नेपाल में तबाही तक… आखिर क्यों बार-बार दोहराया जाता है यह मंजर?