Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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डिक्सन की डेटा सेंटर और टेलीकॉम कारोबार में एंट्री, ताइवान की कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Dixon Technologies ने ताइवान की कंपनी Gemtek Technology के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां अब भारत में मिलकर ऑप्टिकल ट्रांसीवर और दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट बनाएंगी।

इस काम के लिए Dixon की कंपनी Dixon Electroconnect को जॉइंट वेंचर में बदला जाएगा। इसमें Dixon की हिस्सेदारी 60% होगी। Gemtek के पास बाकी 40% हिस्सेदारी रहेगी।

दोनों कंपनियों ने 7 अक्टूबर को समझौते पर साइन किए हैं। इससे पहले 9 जून को दोनों के बीच एक बाध्यकारी टर्म शीट साइन हुई थी।

क्या बनाएगी नई कंपनी?

जॉइंट वेंचर में Optical Transceiver-SFP और BOSA बनाए जाएंगे। इसके अलावा दोनों कंपनियों की सहमति से दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट भी बनाए जा सकते हैं। Optical Transceiver का इस्तेमाल हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन में होता है। वहीं BOSA भी ऑप्टिकल कम्युनिकेशन से जुड़ा प्रोडक्ट है।

यह सौदा नए इक्विटी शेयर जारी करके पूरा होगा। Dixon और Gemtek दोनों Dixon Electroconnect के नए शेयर खरीदेंगे। कितने शेयर मिलेंगे, यह वैल्यूएशन रिपोर्ट और लागू नियमों के हिसाब से तय होगा।

बोर्ड में Dixon का दबदबा रहेगा

नई कंपनी के बोर्ड में Dixon तीन डायरेक्टर नियुक्त कर सकेगी। Gemtek दो डायरेक्टर नियुक्त करेगी। इसके अलावा जॉइंट वेंचर का चेयरमैन नियुक्त करने का अधिकार भी Dixon के पास रहेगा। यह सौदा जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद 3 फरवरी 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

डेटा सेंटर और AI से बढ़ेगी उम्मीद

Dixon के लिए यह जॉइंट वेंचर काफी अहम है। कंपनी अब डेटा सेंटर, टेलीकॉम और ऑप्टिकल कनेक्टिविटी के कारोबार में उतरना चाहती है। इसके लिए Dixon अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल करेगी। वहीं Gemtek हाई-स्पीड ऑप्टिकल मॉड्यूल और नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी का अनुभव लेकर आएगी।

कंपनी को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और एज कंप्यूटिंग से इस कारोबार में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हाइपरस्केल डेटा सेंटर और हाई-स्पीड नेटवर्किंग भी इसके बड़े बाजार हो सकते हैं।

Dixon को मार्जिन बढ़ने की उम्मीद

Dixon को आने वाले कुछ साल में अपने मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। कंपनी ज्यादा वैल्यू वाले कंपोनेंट बनाने पर जोर दे रही है। इसके अलावा अप्लायंसेज और लाइटिंग कारोबार में भी कंपनी विस्तार कर रही है। इससे कुल मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है।

कंपनी हर साल करीब 800-1,000 करोड़ रुपये का कैपेक्स करने की योजना बना रही है। यह पैसा मोबाइल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा।

डिक्सन के मैनेजमेंट की राय

Dixon के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल लाल ने कहा कि मोबाइल कारोबार में भारतीय EMS इंडस्ट्री का मार्जिन ग्लोबल कंपनियों के मुकाबले करीब समान है।

उनके मुताबिक, कंपोनेंट कारोबार से कंपनी को फायदा होगा। इसके अलावा अप्लायंसेज और लाइटिंग में ज्यादा मार्जिन वाला ODM कारोबार भी कुल मार्जिन सुधार सकता है।

7 अक्टूबर को Dixon Technologies का शेयर 0.54% गिरकर 12,945 रुपये पर बंद हुआ।

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PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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Promoter Selling Stock: 6 महीने में 150% चढ़ा EMS कंपनी का स्टॉक, अब प्रमोटर्स बेच सकते हैं 6% हिस्सेदारी

Promoter Selling Stock: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS कंपनी Avalon Technologies में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। प्रमोटर ग्रुप के Bhaskar Srinivasan, BBS Family Trust और KBS Family Trust कंपनी में 6% तक हिस्सेदारी बेच सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस डील की वैल्यू करीब ₹861.9 करोड़ हो सकती है।

₹2,150 से ₹2,302 हो सकता है भाव

डील के लिए ₹2,150 से ₹2,302 प्रति शेयर का प्राइस बैंड बताया गया है। यह कंपनी के मौजूदा बाजार भाव से अधिकतम करीब 6.6% डिस्काउंट पर हो सकता है। डील में विक्रेताओं के लिए 180 दिन का लॉक-अप पीरियड भी रहेगा। यानी इस दौरान वे आगे शेयर नहीं बेच सकेंगे।

Nomura ने बढ़ाया टारगेट

इसी महीने ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Avalon Technologies पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,211.24 से बढ़ाकर ₹2,767.32 कर दिया है।

यह शुक्रवार के ₹2,196.60 के क्लोजिंग भाव से करीब 26% ज्यादा है। ये टारगेट शेयर को कवर करने वाले सभी ब्रोकरेज में सबसे ज्यादा है।

Zollner के साथ जॉइंट वेंचर

Nomura के मुताबिक Avalon का यूरोप की Zollner के साथ प्रस्तावितजॉइंट वेंचर कंपनी के लिए अहम हो सकता है। इससे यूरोप में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज के कारोबार में कंपनी की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही नए ग्लोबल ग्राहक जुड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज के मुताबिक इस साझेदारी से Avalon को यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिलेगा। कंपनी हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज और टेस्ट एंड मेजरमेंट जैसे सेगमेंट में भी प्रवेश कर सकती है।

एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई

Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक Avalon Technologies को कवर करने वाले 19 एनालिस्ट्स में 9 ने Buy रेटिंग दी है। वहीं 4 एनालिस्ट्स ने Hold और 6 ने Sell रेटिंग दी है।

यानी शेयर को लेकर ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। कुछ एनालिस्ट्स कंपनी के विस्तार और जॉइंट वेंचर को लेकर पॉजिटिव हैं, जबकि कुछ शेयर पर अलग नजरिया रखते हैं।

Avalon के शेयरों का हाल

Avalon Technologies का शेयर मंगलवार को BSE पर 1.37% की तेजी के साथ ₹2,340 पर बंद हुआ। पिछले महीने में स्टॉक ने करीब 150% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। वहीं बीते 5 साल में यह 479% बढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 15.66 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर शेयरों में बनेगा पैसा, मार्केट एक्सपर्ट मनीशी रायचौधरी ने बताई वजह

अगर आप शेयरों में निवेश को लेकर किसी तरह की दुविधा में हैं तो आपको एमर कैपिटल पार्टनर्स के सीईओ मनीषी रायचौधरी की बातें ध्यान से सुनने की जरूरत है। सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में उन्होंने शेयर मार्केट के बारे में कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि कंपनियों की अर्निंग्स अब बढ़ रही है। इसका मतलब है कि आगे शेयरों पर इसका असर दिखेगा।

डेढ़ महीने बाद बढ़ा अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान 

राय चौधरी ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहे हैं। लेकिन, अब कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने लगी है। उन्होंने कहा कि 2026 (कैलेंडर ईयर) के लिए अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान अब बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया है। डेढ़ महीने पहले यह 7.8 फीसदी था। संभवत: 5 से 6 सेक्टर्स हैं, जिनकी वजह से यह अनुमान बढ़ा है।

बड़ा निवेश करने से पहले दो बातों का रखें ध्यान

मध्यपूर्व क्राइसिस को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अच्छी खबर के साथ खराब खबर भी आती है। उन्होंने कहा कि अभी खराब खबर का असर ज्यादा दिख रहा है। उन्होंने कहा, “इनवेस्टर्स को बड़ा ऐलोकेशन करने से पहले इनफ्लेशन का दबाव कम होने और मध्यपूर्व क्राइसिस का समाधान निकलने का इंतजार करना चाहिए।”

क्रूड ऑयल में उछाल चिंता का बड़ा कारण

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से शेयर बाजारों में बीते करीब एक महीने से गिरावट है। ज्यादा चिंता क्रूड ऑयल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच जाने का अनुमान जताया गया है। अगर ऐसा होता है तो इसका भारत पर काफी असर पड़ेगा। भारत ऑयल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल इंटरेस्ट रेट को लेकर अनिश्चितता की वजह से बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।

इन सेक्टर्स में दिख रहे निवेश के मौके 

रायचौधरी ने कहा कि शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान बढ़ने से कुछ सेक्टर्स में निवेश के मौके दिख रहे हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, कमर्शियल और डिस्ट्रिब्यूशन सर्विसेज, हॉस्पिटल्स और हेल्थ-टेक प्लेटफॉर्म्स शामिल है। काफी समय तक खराब प्रदर्शन के बाद अब कुछ प्राइवेट बैंकों की अर्निंग्स में भी अपग्रेड दिखा है।

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प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भी निवेश के मौके 

उन्होंने कहा कि प्राइवेट बैंक में इनवेस्टर्स को सिर्फ एक बैंक को नहीं देखना चाहिए, जिसमें लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता है। उन्होने ICICI Bank का उदाहरण देते हुए बताया कि इस बैंक ने बेहतर प्रदर्शन से चौंकाया है। इसका इंटरेस्ट मार्जिन बेहतर है और फीस इनकम भी बढ़ी है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

Promoter Holding: इन 10 मिडकैप शेयरों में प्रमोटर्स ने हिस्सेदारी घटाई, जानिए 1 महीने में कैसा रहा रिटर्न

स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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Electronics Manufacturing: सरकार ने ₹7877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, Wipro समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में

Electronics Manufacturing: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से ₹82,243 करोड़ का प्रोडक्शन होने की उम्मीद है। इस मंजूरी के बाद Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं।

निवेश लक्ष्य से आगे निकली योजना

नए प्रोजेक्ट्स के बाद ECMS के तहत मंजूर कुल निवेश ₹69,548 करोड़ पहुंच गया है। यह स्कीम के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से ज्यादा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 38 प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं, 16 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण का काम चल रहा है।

इन कंपनियों को मिली मंजूरी

कंपनीमंजूर निवेश
Wipro Global Engineering₹1,401 करोड़
Micromax Precision Moulding₹565 करोड़
PCBL Chemical₹329 करोड़
Minda Instrument₹270 करोड़
Centum Electronics (दो प्रोजेक्ट)₹106 करोड़
VVDN Technologies₹100 करोड़
Mitsubishi Electric₹99 करोड़
Syrma SGS₹60 करोड़

10 राज्यों में लगेंगे नए प्रोजेक्ट

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि ये प्रोजेक्ट 10 राज्यों में लगाए जाएंगे। इनमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट शामिल हैं।

कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल को भी मंजूरी मिली है। कैपिटल गुड्स और एनोड मटेरियल भी इसमें शामिल हैं। कनेक्टर्स, स्पीकर्स और माइक्रोफोन को भी मंजूरी दी गई है। एंटेना, कैपेसिटर, फिल्टर और रेयर अर्थ मैग्नेट भी इस सूची का हिस्सा हैं। कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसे प्रोडक्ट्स को भी मंजूरी मिली है।

हर हफ्ते हो रही हैं मंजूरियां

एस. कृष्णन ने कहा कि उद्योग से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी वजह से सरकार अब लगभग हर हफ्ते या 10 दिन में मंजूरी बैठकें कर रही है। जिन कैटेगरी में आवेदन खुले हैं, उनमें जुलाई 2027 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

कई प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू

कई मंजूर प्रोजेक्ट्स में काम शुरू हो चुका है। कुछ जल्द कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंच सकते हैं।

इनमें Tata Electronics का होसुर प्लांट शामिल है। Dixon Technologies का नोएडा प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। Kaynes का चेन्नई के पास PCB प्लांट तैयार हो रहा है। Motherson का कांचीपुरम प्लांट और Wipro का लैमिनेट प्लांट भी प्रगति पर हैं।

सरकार ने क्या कहा?

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि निवेश का लक्ष्य पार हो गया है। लेकिन घरेलू डिजाइन क्षमता और स्वदेशी सप्लाई चेन पर अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में Six Sigma जैसे उच्च गुणवत्ता मानक अपनाना भी जरूरी है। Six Sigma एक मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल का तरीका है। इसका मकसद प्रोडक्शन में गलती को लगभग शून्य तक लाना होता है।

केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ECMS का आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया था। इस स्कीम को मार्च 2025 में मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत में 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन हासिल करना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Amber Enterprises: ओप्पो, वनप्लस और रियलमी के फोन बनाएगी कंपनी, अगले साल से प्रोडक्शन शुरू होगा

Amber Enterprises: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Amber Enterprises India अगले साल से चीन की स्मार्टफोन कंपनियों Oppo, OnePlus और Realme के लिए भारत में फोन बनाना शुरू करेगी। कंपनी ने कहा है कि ट्रायल प्रोडक्शन वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में शुरू होगा। वहीं, कमर्शियल प्रोडक्शन FY28 की पहली तिमाही यानी मार्च 2027 के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

पहले साल 80 लाख का टारगेट

एंबर एंटरप्राइजेज के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और CEO जसबीर सिंह ने बताया कि पहले साल करीब 80 लाख स्मार्टफोन बनाने का लक्ष्य है। दूसरे साल इसे बढ़ाकर 1.5 से 1.6 करोड़ यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। कंपनी ने अपने मोबाइल कारोबार के लिए नया COO भी नियुक्त किया है।

कंपनी ने Oppo Mobiles India के साथ मैन्युफैक्चरिंग सहयोग समझौता किया है। इसके तहत कंपनी Oppo, OnePlus और Realme तीनों ब्रांड के स्मार्टफोन बनाएगी।

चीन की कंपनियां अपना मॉडल बदल रहीं

ये कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन की स्मार्टफोन कंपनियां भारत में खुद फैक्ट्री चलाने की बजाय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाने लगी हैं। अभी Oppo के कुछ फोन Vivo की नोएडा फैक्ट्री में भी बनते हैं। वहीं, Vivo अपनी फैक्ट्री को Dixon Technologies के साथ जॉइंट वेंचर में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में है।

भारतीय बाजार में मजबूत पकड़

Counterpoint Research के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में Vivo की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 17.8% हिस्सेदारी रही। Samsung 17.6% के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जबकि Oppo की हिस्सेदारी 13.6% रही। अगर Vivo, iQOO, Oppo, Realme और OnePlus को मिलाकर देखें, तो इन ब्रांड्स की संयुक्त हिस्सेदारी 45.6% रही।

PCB कारोबार में दबाव

एंबर एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसके PCB कारोबार में फिलहाल मार्जिन पर दबाव है। इसकी वजह Copper-Clad Laminate (CCL) की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि, कंपनी धीरे-धीरे इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचा रही है।

Amber Enterprises की योजना 2029-30 तक अपना CCL प्लांट लगाने की भी है। इससे भविष्य में कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

एंबर एंटरप्राइजेज के शेयरों का हाल

एंबर एंटरप्राइजेज का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 0.68% बढ़कर 7,224 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 9.89% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 2.88% टूटा है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 158% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 24.48 हजार करोड़ रुपये है।

Share Market New Rule: सिर्फ 3 दिनों के लिए शेयर दें किराए पर, बिना बेचे कमाई, खास स्टॉक्स के लिए आए रहा नया सिस्टम

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PM Modi Achievements: ‘डिफेंस प्रोडक्शन 4 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 7 गुना…’, PM मोदी ने 12 साल की यात्रा का किया जिक्र

PM Modi Achievements: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से अपनी सरकार के पिछले 12 साल के कामकाज और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प और सामर्थ्य से संभव हुई है।

इस दौरान पीएम मोदी ने पिछले 12 साल में अलग-अलग क्षेत्रों में हुई प्रगति के आंकड़े भी बताए। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन 5 गुना बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ी है। मोबाइल फोन का उत्पादन 33 फीसदी बढ़ा है और डिजिटल ट्रांजैक्शन में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा: “कोई देश तब महान बनता है और अपने लक्ष्य हासिल करता है जब वह अपने सपनों, अपने संकल्प और अपनी अंदरूनी ताकत के दम पर आगे बढ़ता है। अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। हमें बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को बड़ा करते हैं और हमारे नजरिए का दायरा बढ़ाते हैं। हमारा संकल्प अडिग होना चाहिए। जब हमारा संकल्प पक्का होता है, तो मुश्किलों और आपदाओं के बीच भी आगे बढ़ने का रास्ता बनाने की क्षमता अपने आप पैदा हो जाती है…”

प्रधानमंत्री ने भारत की तेजी से हो रही तरक्की के बारे में बताते हुए कहा: “2014 से पहले, यानी 12 साल पहले, हमारे देश में सिर्फ 70 शहरों में ही पाइप से गैस पहुंचाने की सुविधा थी। इन 12 सालों में हमने इस संख्या को 70 शहरों से बढ़ाकर 700 शहर कर दिया है। इसी को तेज़ी और विस्तार कहते हैं। 2014 से पहले, पाइप वाली गैस मुश्किल से 20-22 लाख घरों तक पहुंचती थी। आज, लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पाइप वाली गैस पहुंचाने का काम चल रहा है। बारह साल पहले, देश की सोलर एनर्जी क्षमता सिर्फ 2 GW थी। सिर्फ 2 GW। आज यह 160 GW है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे समुद्री क्षेत्र के 99 फीसदी हिस्से को नो-गो एरिया घोषित कर दिया गया था। इस सोच की वजह से हमने खुद ही समुद्र में खोज और संसाधनों की तलाश का काम रोक रखा था। यह हमारी सोच की कमी थी। हमने तय किया कि ऐसा अब नहीं चल सकता। इसलिए जिस 99 फीसदी हिस्से को पहले नो-गो एरिया कहा गया था, उसे अब खोज और काम के लिए खोल दिया गया है।”

पीएम मोदी ने अंत कहा, “हमने PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की। और यह खुशी की बात है कि इतने कम समय में 50 लाख परिवार अब सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे रेलवे सिस्टम का इलेक्ट्रिफिकेशन 1925 में शुरू हुआ था। लेकिन 1925 से 2014 तक, यानी 90 सालों में, रेलवे नेटवर्क का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा ही इलेक्ट्रिफाई हो पाया था। यानी 90 सालों में सिर्फ 30 प्रतिशत। हमारी रफ्तार देखिए। अपने लक्ष्यों को पाने का हमारा संकल्प देखिए। हमने पिछले एक दशक में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा कर लिया है।”

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