Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

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स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Pharma Mutual Funds: 1 साल में 30% तक रिटर्न, 10 फंड ने दिया 20% से ज्यादा फायदा; क्या अभी भी है निवेश का मौका?

Pharma Mutual Funds: पिछले एक साल में फार्मा सेक्टर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। Nifty Pharma Index करीब 25% चढ़ा है। वहीं, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स ने 11% से 30% तक रिटर्न दिया है।

Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, 19 एक्टिव फार्मा सेक्टोरल फंड्स में से सिर्फ 10 फंड्स ने एक साल में 20% से ज्यादा रिटर्न दिया। इन फंड्स का औसत रिटर्न 20.7% रहा। BSE Healthcare TRI ने इस दौरान 18.68% रिटर्न दिया।

1 साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फार्मा फंड

फंड1 साल का रिटर्न
Kotak Healthcare Direct29.80%
HDFC Pharma and Healthcare Direct28.85%
PGIM India Healthcare Direct28.04%
Quant Healthcare Direct27.02%
Bajaj Finserv Healthcare Direct26.30%
WhiteOak Capital Pharma and Healthcare Direct

25.87%
ICICI Pru Nifty Pharma Index Direct

23.89%
SBI Healthcare Opportunities Direct23.59%
Mirae Asset Healthcare Direct22.91%
Tata Nifty MidSmall Healthcare Index Direct20.93%

डेटा: Value Research, 28 अगस्त 2026 तक

फार्मा सेक्टर क्यों चढ़ा?

फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी के पीछे कई वजहें रहीं। अमेरिका में भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। कुछ फार्मा इंपोर्ट पर 100% अमेरिकी टैरिफ से जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स को बाहर रखा गया।

घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट FY27 की पहली तिमाही में 6.8% बढ़कर 8.1 अरब डॉलर पहुंच गया। सरकार भी Biopharma SHAKTI जैसी योजनाओं के जरिए सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है।

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आगे निवेश करना सही है?

Anand Rathi Wealth के मुताबिक, फार्मा सेक्टर की वैल्यूएशन हाल की तेजी के बाद बढ़ गई है। फार्मा इंडेक्स करीब 43 गुना P/E पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 37-38 गुना रहा है।

उनका मानना है कि अब आगे की तेजी कमाई की वास्तविक ग्रोथ पर निर्भर करेगी। सेक्टोरल फंड में निवेश से कॉन्सेंट्रेशन रिस्क भी बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ हाल की तेजी देखकर फार्मा फंड में पैसा लगाने से पहले जोखिम और वैल्यूएशन पर जरूर विचार करना चाहिए।

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Share Market Crash: 5 सेकंड में ₹5 लाख करोड़ साफ, Sensex में 800 अंकों की गिरावट, Nifty 23800 के नीचे

Share Market Crash: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध गहराने से घरेलू स्टॉक मार्केट में कोहराम मच गया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी काफी दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप में 1-1% की गिरावट है। निफ्टी के सभी सेक्टर्स के इंडेक्स लाल हैं। ओवरऑल बात करें तो BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹5.60 लाख करोड़ घट गया है यानी निवेशकों की दौलत मार्केट खुलते ही ₹5.60 लाख करोड़ कम हो गई।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:21 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 706.50 प्वाइंट्स यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,237.78 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 235.40 प्वाइंट्स यानी 0.98% की फिसलन के साथ 23,820.40 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

09:21

निवेशकों की दौलत में ₹5.60 लाख करोड़ की गिरावट

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को मार्केट खुलते ही यह ₹4,83,81,902.24 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी ₹5,60,087.4 करोड़ घट गई है।

Sensex का सिर्फ एक शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ एक सन फार्मा ही फिलहाल ग्रीन है लेकिन इसमें भी तेजी मामूली ही है। सबसे अधिक गिरावट फिलहाल इंडिगो, इंफोसिस और एमएंडएम में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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63 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 2836 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 895 शेयर मजबूत दिख रहे हैं तो 1766 में गिरावट का रुझान है और 175 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। इसके अलावा 63 शेयर एक साल के हाई और 65 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 71 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 97 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IT Stocks : आईटी में अब इंडेक्स के बजाय इंडिविजुअल स्टॉक्स पर करें फोकस, एकतरफा तेजी की उम्मीद नहीं

IT Stocks : बाजार में एक ऐसा भी समय था जब आईटी सेक्टर से हर कोई दूर रहना चाहता था। एआई की सुनामी की वजह से सब डरे हुए थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से या फिर कुछ हफ्ते से आईटी सेक्टर में एक ठहराव सा दिखा है या यह भी कह सकते हैं कि इसमें मजबूती दिख रही है। ऐसे में अब सेक्टर पर क्या रणनीति होनी चाहिए इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आईटी पर हम तब बुलिश हुए थे जब इंडेक्स 27,000 पर था। वहां से 31,000 तक का मूव आ चुका है। अब आईटी व्यू बहुत क्लियर है। अब आप आईटी में एकतरफा तेजी नहीं देख सकते, जैसा कि पहले हमने 27,000 के स्तर से देखा था।

निफ्टी आईटी अभी भी 200 डे मूविंग एवरेज क्रॉस नहीं कर पाया है। ऐसे में अभी भी यह कहना बहुत मुश्किल है कि ये एक बेयर मार्केट रैली है या एक नई रैली की शुरुआत है। लेकिन एक बड़ा मूव प्ले हो चुका है। ऐसे में अब आईटी में स्पेसिफिक स्टॉक्स पर फोकस करने की जरूरत है। किसी एकतरफा तेजी की उम्मीद न करें। इस समय आईटी के तीन-चार स्टॉक्स, जैसे कि कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और ओएफएसएस के शेयर अच्छे लग रहे है। टाटा टेक भी अच्छा लग रहा है।

आईटी में अब इंडेक्स पर फोकस करने के बजाय इंडिविजुअल स्टॉक्स पर फोकस करें,क्योंकि आईटी में जो बड़ी ट्रेड थी वो प्ले आउट हो चुकी है। हालांकि, अगर आईटी इंडेक्स 32500 को क्रॉस करेगे तो शायद आपको आईटी इंडेक्स में बड़ी ट्रेड प्ले आउट होगी।

AnandRathi Wealth के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज ने कहा कि उन्होंने जून महीने में कहा था कि आईटी अपने सबसे बुरे दौर से बाहर आ चुका है। हम अक्सर यही देखते हैं कि निफ्टी को सालाना आधार पर कौन 3-4 फीसदी से आउटपरफार्म कर सकता है। हम शॉर्ट टर्म रैली नहीं देखते है। हमें पहले निफ्टी की तुलना में निफ्टी आईटी में 3-4 फीसदी के आउटपरफार्मेंस का अंदाजा लगाया है। पिछले 1-1.5 महीनों में हमें ऐसा ही देखने को मिला है। अब यहां से हमें निफ्टी आईटी से इतनी ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। फिर भी हमें इसमें 2-3 फीसदी का एक्सेस रिटर्न देखने को मिल सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्दोपाध्याय का कहना है कि आईटी तो एक वैल्यू ट्रैप है। एआई रिलेटेड डिसरप्शन रियल है। इस डिसरप्शन से बाहर कौन आएगा वो तो समय बताएगा। लेकिन इस समय फंडामेंटली मीडियम टर्म के नजरिए से आईटी से दूर रहने की सलाह होगी। लार्ज कैप्स से तो बिल्कुल ही दूर रहने की जरूरत है। हालांकि, एआई पर फोकस करने वाली मिड कैप आईटी की चुनिंदा कंपनियों पर नजर रहनी चाहिए।

SW Capital के डायरेक्टर पंकज जैन ने कहा कि अभी आईटी से रिस्क रिवॉर्ड लार्जकैप आईटी के पक्ष में अच्छे होते दिख रहे हैं। आईटी शेयरों के पिछले 4-5 हफ्तों के मूव से कुछ अच्छे सिगनल मिले हैं। इनके नतीजे भी उम्मीद से अच्छे रहे हैं। साथ ही इनकी मैनेजमेंट कमेंट्री भी अच्छी रही है। लार्जकैप आईटी को लेकर उम्मीदें दिख रही है। लेकिन इस सेक्टर में बहुत स्टॉक स्पेसिफिक रहने की जरूरत है।

 

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Stock Market Rally: IT Stocks के दम पर Sensex में 585 अंकों का उछाल, 4 वजहों से 7 दिनों की गिरावट से उबरा Nifty

Stock Market Rally: अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में नरमी, एशियाई बाजारों में रौनक और निचले स्तर पर खरीदारी के चलते घरेलू स्टॉक मार्केट में भी आज काफी चहल-पहल दिख रही हैं। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 585 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी अच्छी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 554.30 प्वाइंट्स यानी 0.72% की बढ़त के साथ 77,463.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 127.30 प्वाइंट्स यानी 0.53% के उछाल के साथ 24,205.60 पर है। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 585.11 प्वाइंट्स चढ़कर 77,494.79 और निफ्टी 147.15 प्वाइंट्स बढ़ककर 24,225.45 तक पहुंच गया था।

Stock Market Rally: ये है वजह

अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में नरमी

अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स का बायबैक बढ़ाने का चौंकाने वाला फैसला किया तो लॉन्ग टर्म वाली ट्रेजरी बॉन्ड्स की यील्ड्स अचानक नीचे आ गई। इससे स्टॉक मार्केट में बहार छा गई। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने सरकारी डेट बायबैक को कम से कम दोगुना करने का ऐलान किया है। इस ऐलान से 30-साल का ट्रेजरी बॉन्ड की फटाक से गिरकर 5.26% से 5.18% और 10-साल का ट्रेजरी यील्ड 4.68% से 4.63% पर आ गया। इसके नीचे आने से भारत जैसे एमर्जिंग मार्केट में निवेश और आकर्षक हो गया।

आईटी सेक्टर का मजबूत सपोर्ट

सेक्टरवाइज मार्केट को सभी सेक्टर का मजबूत सपोर्ट मिल रहा है और सबसे अधिक आईटी सेक्टर का। सिर्फ निफ्टी आईटी में ही फिलहाल 1% से अधिक बढ़त है मेटल, फार्मा, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक के निफ्टी इंडेक्सेज में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है।

एशियाई बाजारों में रौनक

भारतीय स्टॉक मार्केट को अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक से सपोर्ट मिला है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% से अधिक, इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट, जापान का निक्केई 225 और हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सैंग 1% से अधिक उछल पड़ा। थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे फीसदी की बढ़त है। हालांकि सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स और ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब आधे-आधे फीसदी की गिरावट है।

निचले स्तर पर खरीदारी

एक कारोबारी दिन पहले स्टॉक मार्केट की भयंकर मारकाट में आईटीसी, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, डाबर इंडिया, आईआरएफसी, यूपीएल, आईआरबी इंफ्रा, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट जैसे दिग्गजों समेत 100 से अधिक स्टॉक्स एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए थे। इसका फायदा निवेशकों ने उठाया जिससे भाव मजबूत हुए।

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EPF Retirement Investment: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? एक्सपर्ट्स से जानिए

EPF Retirement Investment: कई सैलरीड कर्मचारी रिटायरमेंट के समय Employees’ Provident Fund (EPF) में काफी अच्छा खासा पासा जमा कर लेते हैं। लेकिन जैसे ही सैलरी बंद होती है, असली चुनौती शुरू होती है। सवाल यह होता है कि इस पैसे को लंबे समय तक कैसे चलाया जाए। क्या पूरा पैसा EPF में ही रखा जाए या महंगाई से बचने के लिए कुछ हिस्सा बाजार से जुड़े निवेश में लगाया जाए? कितना जोखिम लेना सही होगा? और एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाई जाए?

अगर आपके पास EPF में बड़ा कॉर्पस है, तो रिटायरमेंट के बाद लक्ष्य सिर्फ पैसे को सुरक्षित रखना नहीं होता। जरूरी यह भी है कि यह पैसा आने वाले वर्षों में आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काम करता रहे।

रिटायरमेंट के बाद EPF पर ब्याज कैसे मिलता है

रिटायरमेंट के बाद EPF पर मिलने वाले ब्याज को लेकर अक्सर उलझन रहती है। Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा बताते हैं कि EPF नियमों के मुताबिक- 58 साल को आधिकारिक रिटायरमेंट उम्र माना जाता है। रिटायरमेंट के बाद EPF में योगदान बंद हो जाता है, लेकिन बैलेंस पर कुछ समय तक ब्याज मिलता रहता है।

नियम दो तरह से लागू होते हैं। अगर कोई व्यक्ति 58 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF बैलेंस पर तीन साल तक यानी 61 साल की उम्र तक ब्याज मिलता है। लेकिन अगर कोई 58 साल से पहले रिटायर होता है, तो उसे ब्याज सिर्फ 58 साल की उम्र तक ही मिलेगा। इसका मतलब है कि 58 साल एक तरह से कट-ऑफ उम्र है। तीन साल तक ब्याज मिलने का फायदा तभी मिलता है, जब रिटायरमेंट आधिकारिक उम्र यानी 58 साल पर हो।

इसे उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए कि अगर कोई 57 साल में रिटायर होता है, तो उसे ब्याज 60 साल तक मिलेगा। अगर कोई 55 साल में रिटायर होता है, तो ब्याज 58 साल तक मिलेगा। यहां तक कि अगर कोई 45 साल में रिटायर होता है, तब भी ब्याज केवल 58 साल तक ही मिलेगा।

आमतौर पर EPF पर मिलने वाली ब्याज दर करीब 8 प्रतिशत के आसपास रहती है, लेकिन यह ब्याज इन्हीं तय सीमाओं के भीतर मिलता है। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति 58 के बाद भी काम करता रहे, तब भी नए EPF योगदान आम तौर पर बंद हो जाते हैं। ब्याज 61 साल की उम्र तक ही सीमित रहता है। इसी वजह से एक्सपर्ट मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद केवल EPF पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।

फिक्स्ड इनकम का इंतजाम जरूरी

रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश वाले हिस्से में भी केवल एक साधन पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। Master Capital Services में वेल्थ मैनेजमेंट की AVP आकांक्षा शुक्ला कहती हैं कि EPF मुख्य रूप से बचत जमा करने का साधन है, न कि रिटायरमेंट में नियमित आय देने वाला साधन।

इसलिए रिटायरमेंट के बाद बचत को इस तरह व्यवस्थित करना जरूरी होता है कि उससे नियमित आय मिलती रहे। उदाहरण के तौर पर Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) अपेक्षाकृत ज्यादा और स्थिर आय दे सकती है। वहीं बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट भी अपनी सादगी और तय रिटर्न की वजह से कई लोगों की पसंद बने रहते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो मासिक आय चाहते हैं।

इसके अलावा डेट म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में लचीलापन और लिक्विडिटी जोड़ सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनके जरिए जरूरत के मुताबिक समय-समय पर पैसे निकालना आसान हो सकता है।

रिटायरमेंट में भी इक्विटी की भूमिका

कई रिटायर्ड लोगों को लगता है कि इक्विटी से पूरी तरह दूर रहना सुरक्षित रहेगा। लेकिन ऐसा करने से एक और जोखिम पैदा हो सकता है। समय के साथ महंगाई आपकी खरीद क्षमता को कम कर सकती है।

आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, बढ़ती औसत उम्र और महंगाई को देखते हुए रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी की भूमिका अब धीरे धीरे जरूरी होती जा रही है।

आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत तक इक्विटी निवेश, खासकर लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड के जरिए, पोर्टफोलियो को लंबे समय में बढ़ने में मदद कर सकता है। यहां मकसद बहुत ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आपका कॉर्पस समय के साथ खत्म न हो।

सही एसेट एलोकेशन क्यों जरूरी है

रिटायरमेंट के बाद पोर्टफोलियो का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे एक तरफ नियमित आय मिलती रहती है और दूसरी तरफ महंगाई से भी बचाव होता है।

आकांक्षा शुक्ला के अनुसार अगर किसी के पास करीब 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो निवेश को चार हिस्सों में बांटना एक सामान्य रणनीति हो सकती है। इसमें EPF और अन्य फिक्स्ड इनकम साधन, डेट निवेश, इक्विटी और एक छोटा इमरजेंसी फंड शामिल हो सकता है। असल में यह डिस्ट्रीब्यूशन कुछ इस तरह हो सकता है:

  • 40 से 50 प्रतिशत फिक्स्ड इनकम
  • 30 से 35 प्रतिशत डेट निवेश
  • 15 से 20 प्रतिशत इक्विटी
  • और एक छोटा इमरजेंसी फंड

एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाएं

रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बड़ी रकम को सही तरीके से निवेश करना जरूरी होता है। Arihant Capital Markets की CEO Wealth स्वाति जैन के अनुसार, पूरी रकम एक साथ निवेश करने की बजाय Systematic Transfer Plan (STP) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसमें पैसा पहले कम जोखिम वाले डेट या लिक्विड फंड में रखा जाता है और फिर 6 से 12 महीनों के दौरान धीरे धीरे इक्विटी या हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इससे बाजार के उतार चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।

नियमित आय के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) भी बेहतर तरीका हो सकता है। इसमें निवेश से तय अंतराल पर एक निश्चित रकम निकाली जाती है, जिससे नियमित कैश फ्लो बना रहता है।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एक से दो साल के खर्च के बराबर रकम सुरक्षित निवेश में रखी जाए, ताकि बाजार गिरने के समय मजबूरी में पैसे निकालने की जरूरत न पड़े। इसके बाद SWP के जरिए नियमित आय बनाई जा सकती है।

रिटायरमेंट में सुरक्षित निकासी कितनी हो

स्वाति जैन के मुताबिक, इसके लिए बकेट रणनीति अपनाना इस्तेमाल हो सकता है। इसमें छोटे समय की जरूरतों के लिए डेट निवेश से SWP किया जाता है और लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए इक्विटी में निवेश रखा जाता है।

एक्सपर्ट्स आम तौर पर 4 से 5 प्रतिशत सालाना निकासी को सुरक्षित मानते हैं। यानी अगर किसी के पास 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो वह सालाना लगभग 12 से 15 लाख रुपये निकाल सकता है। यह दर आम तौर पर 20 से 25 साल तक टिकाऊ मानी जाती है, बशर्ते पोर्टफोलियो संतुलित बना रहे। अगर शुरुआती वर्षों में इससे ज्यादा पैसा निकाला जाए, तो भविष्य में कॉर्पस जल्दी खत्म होने का खतरा बढ़ सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कमाई अच्छी फिर भी सेविंग नहीं! इन मूलांक वालों की ये आदत पड़ती है भारी

पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसे संभालकर रखना भी है। कई बार अच्छी कमाई होने के बावजूद महीने के आखिर में सेविंग नहीं हो पाती और पता ही नहीं चलता कि पैसा कहां खर्च हो गया। अंक ज्योतिष के अनुसार, जन्म तारीख से निकलने वाला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव और पैसों से जुड़ी आदतों के बारे में भी कुछ संकेत दे सकता है। कुछ मूलांक वाले लोग कमाई अच्छी होने के बाद भी ज्यादा खर्च करने, शौक पूरे करने या बिना सोचे पैसे लगाने की वजह से आर्थिक परेशानी में पड़ सकते हैं।

 

मूलांक 3

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 3, 12 या 21 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इसके स्वामी ग्रह गुरु माने जाते हैं।

ये लोग लोग आमतौर पर आगे बढ़ने और पैसा कमाने की सोच रखते हैं। इन्हें नई चीजें सीखना और खुद को बेहतर बनाना पसंद होता है। इसी वजह से कई बार ये अपनी पढ़ाई, ग्रूमिंग, शौक और पसंद की चीजों पर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं। कभी-कभी भावनाओं में आकर भी पैसा खर्च करने की आदत बन सकती है, जिससे अच्छी कमाई के बावजूद बचत कम रह जाती है।

 

मूलांक 5

5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 5 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी बुध ग्रह माना जाता है।

ये लोग लोग तेज दिमाग और नई चीजें आजमाने वाले माने जाते हैं। इन्हें एक ही तरह की जिंदगी या काम ज्यादा समय तक पसंद नहीं आता। इसी वजह से ये कई बार नौकरी, काम या अपनी पसंद की चीजें जल्दी-जल्दी बदल लेते हैं। नई चीजों और अनुभवों पर खर्च करने की आदत भी इनके लिए परेशानी बन सकती है। कमाई अच्छी होने के बावजूद अगर खर्च पर ध्यान न दिया जाए, तो भविष्य के लिए पैसा बचाना मुश्किल हो सकता है।

मूलांक 6

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है।

इन लोगों को आराम, खूबसूरत चीजें और अच्छी लाइफस्टाइल पसंद मानी जाती है। ये अपने कपड़े, लुक, ग्रूमिंग और घर की सजावट पर दिल खोलकर खर्च कर सकते हैं। कई बार दूसरों को प्रभावित करने के लिए भी ज्यादा खर्च हो जाता है। यही आदत अगर कंट्रोल में न रहे, तो अच्छी आमदनी के बाद भी सेविंग कम हो सकती है और आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।

 

बचत जरूरी

इन मूलांकों से जुड़ी बातें अंक ज्योतिष की मान्यताओं पर आधारित हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि इन तारीखों को जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को आर्थिक परेशानी हो। असल जिंदगी में पैसे की स्थिति कमाई, खर्च करने की आदत, बचत और सही वित्तीय योजना पर भी निर्भर करती है। इसलिए कमाई अच्छी हो तो खर्च के साथ भविष्य के लिए बचत पर भी ध्यान देना जरूरी है।