1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold ETF FoF में अब नहीं डाल सकेंगे पैसे! आज से बदल गई ये चीजें

Gold Investment: कुछ म्यूचुअल फंड हाउसेज ने अस्थायी तौर पर गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। यह रोक आज 16 अक्टूबर से ही लागू हो चुकी है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, इनवेस्को इंडिया म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और श्रीराम म्यूचुअल फंड जैसे कई फंड हाउसों ने निवेशकों को नोटिस जारी कर के इसकी जानकारी भेज दी है। इस पाबंदी के बाद अब ये इन म्यूचुअल फंड्स के पास गोल्ड ईटीएफ FoF में नया एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे, नई एसआईपी नहीं शुरू कर सकेंगे और न ही मौजूदा एसआईपी में टॉप अप कर सकेंगे। कुछ में तो स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगाई गई है।

क्या है इन नोटिसों में

श्रीराम म्यूचुअल फंड ने नोटिस में कहा कि यह रोक सेबी के के निर्देशों के तहत लगाई गई हैं, जिसे AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के जरिए सूचित किया गया है। हालांकि कोई वजह नहीं बताई गई है। फंड हाउस का कहना है कि 16 अक्टूबर से नए एकमुश्त निवेश, नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी में निवेश की राशि बढ़ाने यानी स्टेप-अप की मंजूरी नहीं होगी।

डीएसपी म्यूचुअल फंड ने 15 अक्टूबर के अपने नोटिस में कहा है कि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के कट-ऑफ समय के बाद के सभी एप्लीकेशन खारिज हो सकते हैं और पैसा निवेशकों को वापस कर दिया जाएगा।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड समेत कई बड़े भारतीय म्यूचुअल फंडों ने गोल्ड ईडीएफ में बल्क सब्सक्रिप्शन यानी एक साथ भारी निवेश रोकने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

दशहरा-दिवाली से ठीक पहले रोक

गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में निवेश पर रोक दशहरा और दिवाली से ठीक पहले लगाई गई हैं, जब आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। गोल्ड ईटीएफ एफओएफ म्यूचुअल फंड की वह स्कीम है, जिसका पैसा गोल्ड ईटीएफ में लगाया जाता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल त्योहारी सीजन के दौरान गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश बढ़ा था, क्योंकि स्टॉक मार्केट से कमजोर रिटर्न मिलने के कारण सोने-चांदी का क्रेज बढ़ गया। वहीं इस साल मांग थोड़ी सुस्त पड़ी और भारत में सोने का आयात अगस्त के $230 करोड़ से घटकर सितंबर में $180 करोड़ रह गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tiger Attack Video: टाइगर के बाड़े में घुसा व्यक्ति, फिर बाघ ने किया हमला… वीडियो से सामने आया खौफनाक मामला

इंग्लैंड के यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क में एक खौफनाक हादसा सामने आया है, जहां बाघ के बाड़े में घुसे एक शख्स की हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पार्क में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को खाली करा लिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद व्यक्ति की जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और उसके परिवार को सूचना दे दी गई है।

वहीं, घटना के बाद बाघ की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जानवर सुरक्षित है और अपने बाड़े के अंदर ही मौजूद है। फिलहाल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। इस घटना के बाद वाइल्डलाइफ पार्क को रविवार तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।

दोपहर में मिली हमले की सूचना, मौके पर पहुंची पुलिस

साउथ यॉर्कशायर पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 1:35 बजे उन्हें सूचना मिली कि डोनकास्टर के पास स्थित वाइल्डलाइफ पार्क में एक व्यक्ति बाघ के बाड़े के अंदर चला गया है। वहां बाघ ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।

सूचना मिलने के बाद आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर पहुंचीं। मेडिकल टीम ने व्यक्ति को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी और मौके पर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल मृतक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि उसके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और विशेषज्ञ अधिकारी इस मुश्किल समय में परिवार की मदद कर रहे हैं।

बाघ सुरक्षित, लोगों को खतरे की आशंका नहीं

घटना के बाद सोशल मीडिया पर बाघ की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं होने लगीं। इस पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि हमले में बाघ को कोई चोट नहीं आई है। घटना के बाद भी वह अपने बाड़े के अंदर ही रहा।

पुलिस के अनुसार, आम लोगों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। हालांकि, व्यक्ति बाघ के बाड़े में किन परिस्थितियों में पहुंचा और उसके बाद वास्तव में क्या हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

Wildlife Park खाली कराया गया, जांच जारी

घटना के बाद यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क को खाली करा लिया गया। पार्क प्रबंधन ने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई थी और संबंधित एजेंसियों को मौके पर बुलाया गया था। अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर यह घटना कैसे हुई।

पार्क प्रबंधन ने कहा कि वहां आने वाले लोगों, कर्मचारियों और जानवरों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। घटना के बाद पार्क को रविवार तक बंद रखने की घोषणा की गई।

फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। व्यक्ति बाड़े में कैसे पहुंचा और घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

20% से ज्यादा ब्याज पर लिए तीन लोन, फिर भी Mutual Funds में कर रहा था निवेश, Barber की कहानी सुन CEO ने दी बड़ी सीख

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आजकल ज्यादा रिटर्न पाने के लिए कई लोग म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। लेकिन कभी-कभी निवेश के चक्कर में वे अपने कर्ज को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला स्टार्टअप CEO आबिद हसन ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। वह अपने नाई के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि वह एक तरफ म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उस पर भारी ब्याज वाले कई लोन भी हैं। इस घटना के बाद हसन ने लोगों को निवेश और कर्ज से जुड़ी एक जरूरी सलाह दी।

बाल कटवाते समय सामने आई हैरान करने वाली बात

आबिद हसन ने X पर बताया कि एक दिन उनके नाई ने उनसे अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में राय मांगी। इसके बाद हसन ने उसकी आर्थिक स्थिति को समझने की कोशिश की। बातचीत में पता चला कि नाई ने तीन लोन ले रखे थे, जिन पर 20 फीसदी से ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा था।

इसके बावजूद वह म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहा था। जब हसन ने उससे इसकी वजह पूछी, तो उसने बताया कि उसे अपने निवेश से 30 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।

20% ब्याज वाले कर्ज के बीच निवेश करना कितना सही?

हसन ने इस सोच पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से हर बार ज्यादा रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। दूसरी तरफ, लोन पर ब्याज चुकाना एक जरूरी जिम्मेदारी है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को अपने कर्ज पर 20 फीसदी ब्याज देना पड़ रहा है, तो उसके लिए निवेश से लगातार इससे ज्यादा रिटर्न कमाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बाजार से मुनाफे की उम्मीद करने के बजाय महंगे कर्ज को कम करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

10% से ज्यादा ब्याज वाला लोन पहले चुकाने की सलाह

आबिद हसन ने सलाह दी कि अगर किसी व्यक्ति पर 10 फीसदी से ज्यादा ब्याज वाला कर्ज है, तो उसे अतिरिक्त निवेश करने से पहले कर्ज चुकाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे ब्याज का बोझ कम हो सकता है और आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोन की किस्त समय पर नहीं चुकाने पर पेनल्टी और अतिरिक्त खर्च बढ़ सकते हैं। नौकरी छूटने जैसी स्थिति में कर्ज चुकाना और भी मुश्किल हो सकता है।

कम आमदनी वाले लोगों के लिए भी जरूरी संदेश

हसन ने लोगों से अपील की कि वे यह सलाह घरेलू कामगारों, ब्लू-कॉलर कर्मचारियों और कम अनुभव वाले नौकरीपेशा लोगों तक भी पहुंचाएं। कई बार लोग लोन की असली लागत और ब्याज दर को ठीक से समझ नहीं पाते।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने क्या कहा?

हसन की पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने कहा कि कई लोग म्यूचुअल फंड को बचत का जरिया मानते हैं और कर्ज को अलग जिम्मेदारी समझते हैं। एक यूजर ने बताया कि उसके दोस्त ने लोन लिया था, जिसकी प्रभावी सालाना ब्याज दर 24 फीसदी से ज्यादा निकली।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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तेजी से बदल रही है इनवेस्टमेंट की दुनिया, 2034 तक 436 अरब डॉलर का होगा वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट

इंडिया का वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 2034 तक बढ़कर दोगुना तक हो जाने की उम्मीद है। 2025 में यह मार्केट करीब 171 अरब डॉलर का था। इसका मतलब कि इसका आकार 2034 तक 436 अरब डॉलर तक का हो जाएगा। इसकी वजह लोगों की बढ़ती इनकम, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में सेविंग्स का शिफ्ट होना और कैपिटल मार्केट में बढ़ता पार्टिसिपेशन है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।

वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 10% सीएजीआर से बढ़ेगा

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट की ग्रोथ अगले 8 साल में 10.6 फीसदी सीएजीआर रहेगी। इस दौरान इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इंडिविजुअल इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स से हटकर एसेट ऐलोकेशन, डायवर्सिफिकेशन, टैक्सेशन और सक्सेशन प्लानिंग में बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश में परिवारों की दिलचस्पी बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का एयूएम 80 लाख करोड़ पहुंचा

कैपिटल मार्केट्स में लोगों का निवेश बढ़ने में SIP जैसे प्रोडक्ट्स का भी बड़ा हाथ है। बाजार में उपलब्ध कुल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में म्यूचुअल फंड्स की ज्यादा हिस्सेदारी है। एमके वेल्थ के मुताबिक, FY26 में म्यूचुअल फंड्स का तिमाही एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 77.98 लाख करोड़ रुपये रहा। वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के अलावा अब दूसरे लोग भी निवेश कर रहे हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 63 फीसदी

एक अनुमान के मुताबिक, अभी वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी है। एमके वेल्थ का कहना है कि अब अमीर लोगों, फैमिली ऑफिस और इंस्टीट्यूशनल से भी डिमांड आ रही है। इनवेस्टर बेस बढ़ने से बाजार में ज्यादा कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के आने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स पीएमएस, AIF सहित कई प्रोडक्ट्स पर विचार कर रहे हैं। वे डायवर्सिफिकेशन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं लोग

एमके वेल्थ को उम्मीद है कि इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड बढ़ेगा और वेल्थ मैनेजमेंट का जरूरी हिस्सा बन जाएगा। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट्स तक इंडियन इनवेस्टर्स की पहुंच बढ़ रही है। खासकर एचएनआई और फैमिली ऑफिसेज विदेश में निवेश के मौके तलाश रहे हैं। गिफ्ट आईएफएससी विदेश में निवेश के बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है।

15 साल की सिंचना के पास 13.9 लाख रुपये का पोर्टफोलियो, जानें गुल्लक के 10 हजार से कैसे शुरू हुआ निवेश का सफर?

आमतौर पर 15 साल की उम्र में बच्चे स्कूल, दोस्तों और अपनी पसंदीदा चीजों को करने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बेंगलुरु की सिंचना संतोष ने इसी उम्र में एक ऐसी राह चुनी, जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सिंचना की दिलचस्पी बचपन से ही पैसों की बचत और उसके सही इस्तेमाल को समझने में रही है। एक छोटी-सी गुल्लक से शुरू हुई उनकी बचत की आदत धीरे-धीरे वित्तीय समझ और निवेश की जिज्ञासा में बदल गई। आज वो करीब 13.9 लाख रुपये के निवेश पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं।

खास बात ये है कि उनके लिए पैसा सिर्फ बचाने या बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने का माध्यम है। पढ़ाई के साथ वित्तीय दुनिया को समझने और नई चीजें सीखने का उनका यह सफर दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और जिज्ञासा के साथ छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय किए जा सकते हैं।

गुल्लक में जमा किए 10 हजार रुपये

RR नगर स्थित स्वर्गरानी स्कूल की छात्रा सिंचना को बचपन से ही पैसे बचाने की आदत थी। 12 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी गुल्लक में करीब 10,000 रुपये जमा कर लिए थे। लगातार बढ़ती रकम को देखकर उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी बन सकती है। यही अनुभव उनके लिए वित्तीय समझ की पहली सीढ़ी बना।

टेलीस्कोप खरीदने के लिए खुद जुटाए पैसे

सिंचना की ‘मनी जर्नी’ को एक और अहम मोड़ तब मिला, जब उन्हें बचपन में टेलीस्कोप खरीदना था। उनके पिता संतोष कुमार ने उनसे इसकी कीमत का कुछ हिस्सा खुद जुटाने को कहा। सिंचना ने रिश्तेदारों से बात कर 10,000 रुपये जुटाए, जबकि बाकी 2,000 रुपये माता-पिता ने दिए। इस अनुभव से उन्हें पैसे की कीमत और लक्ष्य के लिए बचत करने की अहमियत समझ आई।

YouTube से सीखी निवेश की बारीकियां

निवेश शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को समझने की सलाह दी। इसके बाद सिंचना ने खुद सीखना शुरू किया। उन्होंने YouTube पर पर्सनल फाइनेंस और निवेश से जुड़े वीडियो देखे और Ankur Warikoo, Dave Ramsey, Power of Money, Mint Wealth और Sonia Shenoy जैसे क्रिएटर्स से सीखने की बात कही है। वह छुट्टियों और वीकेंड में इसके लिए समय निकालती थीं।

NISM और SEBI सर्टिफिकेशन भी किए

Moneycontrol से बात करते हुए  सिंचना ने बताया कि उन्होंने आपनी वित्तीय शिक्षा को ऑनलाइन वीडियो तक सीमित नहीं रखा। उनके पास दो NISM और एक SEBI सर्टिफिकेशन हैं। एक NISM परीक्षा में वह पहली कोशिश में सिर्फ एक अंक से चूक गई थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने उसे पास किया।

13.9 लाख का पोर्टफोलियो, माता-पिता की निगरानी

इस साल सिंचना ने निवेश को ज्यादा गंभीरता से शुरू किया। परिवार के अनुसार, कुछ ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों से पैसा निकाला गया, जिनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल रहा था। अब उनका निवेश इक्विटी और म्यूचुअल फंड में है और यह भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ है। करीब सात साल की निवेश अवधि के साथ उनका लक्ष्य भविष्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई का खर्च जुटाना है। निवेश में माता-पिता की निगरानी भी रहती है।

‘GDP’ है सिंचना का निवेश मंत्र

म्यूचुअल फंड को समझने के लिए सिंचना ने ‘GDP’ नाम का अपना फ्रेमवर्क बनाया है Growth, Direct और Passive। वह ग्रोथ पर केंद्रित फंड, कम लागत वाले डायरेक्ट प्लान और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड को अपने निवेश नजरिए का हिस्सा मानती हैं।

अब बच्चों को सिखाएंगी Financial Literacy

सिंचना की रुचि केवल निवेश तक सीमित नहीं है। 14 साल की उम्र में उन्होंने NCERT के सिलेबस पर आधारित ‘ITIHASA – The Royal Game’ नाम का इतिहास कार्ड गेम बनाया और बेंगलुरु के 36 सरकारी हाई स्कूलों में 170 गेम सेट दान किए।

अब वह बच्चों के लिए एक रणनीति-आधारित वित्तीय कार्ड गेम तैयार कर रही हैं। इसमें बजटिंग, बैंकिंग, ब्याज, महंगाई, जोखिम, बीमा, क्रेडिट, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसी बातें खेल के जरिए सिखाई जाएंगी। उनका लक्ष्य भारत के 10 लाख छात्रों तक वित्तीय साक्षरता को अनुभव आधारित तरीके से पहुंचाना है। गुल्लक में जमा 10 हजार रुपये से शुरू हुआ सिंचना का सफर आज निवेश से आगे बढ़कर दूसरों को पैसों की समझ देने की दिशा में पहुंच चुका है।

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SIP में डेली भी कर सकते हैं इनवेस्ट, मंथली सिप और डेली सिप में से किसमें निवेश करने पर होगी ज्यादा कमाई?

कई लोग अपना खर्च रोजाना की इनकम से चलाते हैं। छोटे दुकानदार और स्व-रोजगार करने वाले लोग इस कैटेगरी में आते हैं। ऐसे लोगों के लिए सेविंग्स और इनवेस्टमेंट एक बड़ा चैलेंज होता है, क्योंकि उनके बैंक अकाउंट में हर महीने के अंत में सैलरी नहीं आती है। ऐसे लोगों के लिए डेली सिप इनवेस्टमेंट का एक आसान जरिया है।

कुछ खास इनवेस्टर्स के लिए शुरू हुआ डेली सिप

पैसाबाजार ने अपने प्लेटफॉर्म पर Daily SIP का ऑप्शन शुरू किया है। इसमें इनवेस्टर हर महीने की एक निश्चित तारीख को एक निश्चित अमाउंट इनवेस्टर करने की जगह रोजाना इनवेस्ट कर सकता है। छोटे दुकानदार, गिग वर्कर्स और सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों को ध्यान में रख इसे शुरू किया गया है। चूंकि ऐसे लोगों को हर महीने सैलरी नहीं मिलती है, जिससे उनके लिए मंथली सिप में निवेश करने में दिक्कत आती है।

रिटर्न के मामले में मंथली सिप और डेली सिप में फर्क नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर महीने की जगह रोजाना सिप में निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि इनवेस्टर का रिटर्न बढ़ जाएगा। रिटर्न निवेश किए गए अमाउंट, म्यूचुअल फंड की स्कीम, निवेश की अवधि और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे इनवेस्टर्स जिनके बैंक अकाउंट में हर महीने निश्चित तारीख को सैलरी आती है, उनके लिए मंथली सिप निवेश का आसान जरिया है।

एकमुश्त मंथली निवेश की जगह रोजाना थोड़ा-थोड़ा निवेश

डेली सिप यानी रोजाना के सिप में फर्क यह है कि पैसा महीने में एक बार सिप में डालने की जगह उस पैसे को थोड़ा-थोड़ा कर हर दिन आप सिप में डालते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आप सिप में मंथली 3000 रुपये निवेश करते हैं। अगर आप इस पैसे को महीने में एकमुश्त निवेश नहीं कर सकते हैं तो आप थोड़ा-थोड़ा कर रोज इनवेस्ट कर सकते हैं।

सिप निवेश का सिर्फ एक अनुशासित तरीका है, जिससे बड़ा फंड तैयार होता है

सिप की खास बात यह है कि यह निवेश का एक अनुशासित तरीका है। अगर आप मंथली सिप करते हैं तो इसका मतलब है कि आप हर महीने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा ऐसी स्कीम में डालते हैं तो जो लंबी अवधि में आपके पैसे को कई गुना बना सकती है। इसी तरह डेली सिप से भी आपका पैसा उस स्कीम में जाता है, जिसे आप सेलेक्ट करते हैं। लंबी अवधि में इस पैसे पर आपाक रिटर्न स्कीम के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। सिप लोगों में सिर्फ इनवेस्टमेंट की हैबिट बनाते में मदद करता है।

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म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि तक निवेश करने पर अच्छा रिटर्न 

यह देखा गया है कि शेयर बाजार में निवेश करने पर लंबी अवधि यानी 8-10 साल में अच्छा रिटर्न मिलता है। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है कि आप डेली सिप से निवेश करते हैं या मंथली सिप से। फर्क इस बात से पड़ता है कि आपको लंबी समय तक लगातार यानी अनुशासित तरीके से निवेश करना होगा। तभी 10-15 सालों में आपके लिए बड़ा फंड तैयार होगा।

Stock in Focus: सरकारी कंपनी को ₹3244 करोड़ का प्रोजेक्ट, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd ने राजस्थान के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से बिजली निकालने के लिए बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। कंपनी को राजस्थान के बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से 6 GW सोलर पावर ट्रांसमिशन के लिए सफल बोलीदाता चुना गया है।

यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत मिला है। कंपनी ने इसके लिए ₹3,244.33 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन चार्ज की बोली लगाई है। POWERGRID को 2 सितंबर 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट of Intent मिला है।

1,000 किमी लंबी HVDC लाइन बनेगी

प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के बाड़मेर-II में 6,000 MW की HVDC टर्मिनल स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र के साउथ कलांब में भी टर्मिनल बनेगी। दोनों जगहों पर ±800 kV HVDC सिस्टम लगाया जाएगा।

बाड़मेर-II से साउथ कलांब के बीच करीब 1,000 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी।

इसके अलावा राजस्थान में 400 kV की ट्रांसमिशन लाइन, जरूरी बे और दूसरे उपकरण भी लगाए जाएंगे। बाड़मेर-II पावर स्टेशन पर दो SynCon यूनिट भी स्थापित की जाएंगी।

BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Build, Own, Operate and Transfer यानी BOOT मॉडल पर विकसित होगा। इसके तहत कंपनी प्रोजेक्ट बनाएगी, चलाएगी और तय अवधि के बाद इसे ट्रांसफर किया जाएगा।

हाल में गुजरात का भी प्रोजेक्ट मिला

पिछले महीने भी POWERGRID को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन का बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने ₹822.91 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन टैरिफ की बोली लगाई थी।

बुधवार को Power Grid Corporation का शेयर NSE पर 1.23% की तेजी के साथ ₹267.80 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GDP Growth: सरकार ने 2.6% GDP ग्रोथ के दावे को खारिज किया, 7.8% को सटीक बताया

GDP Growth: सरकार ने पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 2.6% रहने के दावे को खारिज कर दिया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि 7.8% की GDP ग्रोथ का आंकड़ा मजबूत प्रोडक्शन डेटा पर आधारित है। उन्होंने पुराने और नए GDP डेटा की तुलना को ‘सेब और संतरे की तुलना’ जैसा बताया। PTI के मुताबिक, सरकार ने कहा कि दोनों आंकड़े अलग-अलग डेटा सीरीज के हैं और उनकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

यह विवाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान के बाद शुरू हुआ था। उनका कहना था कि अगर पिछले साल की पहली तिमाही की GDP को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ नहीं किया जाता, तो मौजूदा ग्रोथ करीब 2.6% होती।

सरकार ने 2.6% के दावे को क्यों बताया गलत?

सौरभ गर्ग के मुताबिक, आलोचक FY26 की पहली तिमाही के पुराने ₹86.05 लाख करोड़ के GDP आंकड़े की तुलना नए ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से कर रहे हैं। यह ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा पुराने 2011-12 बेस ईयर वाली GDP सीरीज का था।

फरवरी 2026 में सरकार ने 2022-23 को बेस ईयर मानकर नई GDP सीरीज जारी की। इसके बाद पुरानी सीरीज की जगह नई सीरीज लागू हो गई। नई सीरीज में Q1 FY26 का GDP पहले ₹80.32 लाख करोड़ आंका गया। बाद में यह ₹80.44 लाख करोड़ हुआ और फिर नए IIP और PPI डेटा के आधार पर इसे ₹80 लाख करोड़ किया गया।

PTI के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा कि यह सामान्य डेटा रिवीजन की प्रक्रिया है। इसका मकसद पिछले साल का GDP घटाकर मौजूदा ग्रोथ रेट को बढ़ाना नहीं था।

असली तुलना किससे होनी चाहिए?

सरकार का कहना है कि GDP ग्रोथ की तुलना एक ही डेटा सीरीज और स्थिर कीमतों पर की जानी चाहिए। नई 2022-23 बेस ईयर सीरीज के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही।

मंत्रालय ने स्टील, सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का भी हवाला दिया। PTI के मुताबिक, सरकार का तर्क है कि वास्तविक उत्पादन में बढ़ोतरी के आंकड़े भी मजबूत आर्थिक गतिविधि दिखाते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग में रियल ग्रोथ ज्यादा कैसे?

मैन्युफैक्चरिंग की रियल GVA ग्रोथ 9.2% रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही। इसके चलते इंप्लिसिट GVA डिफ्लेटर माइनस 1.5% रहा।

मंत्रालय ने कहा कि इसका मतलब फैक्ट्री गेट कीमतें घटीं, यह जरूरी नहीं है। नई पद्धति में आउटपुट और इनपुट को अलग-अलग डिफ्लेट किया जाता है। अगर कच्चे माल और दूसरे इनपुट की कीमतें आउटपुट कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो ऐसा अंतर आ सकता है।

माइनिंग में रियल ग्रोथ घटी, नॉमिनल क्यों बढ़ी?

Q1 FY27 में माइनिंग की रियल GVA 2.4% घटी। लेकिन नॉमिनल GVA 22.3% बढ़ी। PTI के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह मिनरल्स की कीमतों में तेज उछाल रही।

माइनिंग और क्वॉरिंग की PPI महंगाई अप्रैल में 22% और मई में 21.2% रही। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।

GDP डिफ्लेटर और CPI-WPI में अंतर क्यों?

सरकार ने कहा कि GDP डिफ्लेटर को CPI और WPI से सीधे नहीं मिलाया जा सकता। CPI घरों के खर्च की तय बास्केट को मापता है। WPI मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों को ट्रैक करता है। वहीं, GDP डिफ्लेटर निवेश, सरकारी खर्च, एक्सपोर्ट और सर्विसेज समेत पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है।

मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन और खर्च के आधार पर निकाले गए GDP आंकड़ों के बीच सांख्यिकीय अंतर भी सामान्य है। जैसे-जैसे ज्यादा डेटा आता है, इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा अंतर को GDP में किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

Pharma Mutual Funds: 1 साल में 30% तक रिटर्न, 10 फंड ने दिया 20% से ज्यादा फायदा; क्या अभी भी है निवेश का मौका?

Pharma Mutual Funds: 1 साल में 30% तक रिटर्न, 10 फंड ने दिया 20% से ज्यादा फायदा; क्या अभी भी है निवेश का मौका?

Pharma Mutual Funds: पिछले एक साल में फार्मा सेक्टर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। Nifty Pharma Index करीब 25% चढ़ा है। वहीं, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स ने 11% से 30% तक रिटर्न दिया है।

Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, 19 एक्टिव फार्मा सेक्टोरल फंड्स में से सिर्फ 10 फंड्स ने एक साल में 20% से ज्यादा रिटर्न दिया। इन फंड्स का औसत रिटर्न 20.7% रहा। BSE Healthcare TRI ने इस दौरान 18.68% रिटर्न दिया।

1 साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फार्मा फंड

फंड1 साल का रिटर्न
Kotak Healthcare Direct29.80%
HDFC Pharma and Healthcare Direct28.85%
PGIM India Healthcare Direct28.04%
Quant Healthcare Direct27.02%
Bajaj Finserv Healthcare Direct26.30%
WhiteOak Capital Pharma and Healthcare Direct

25.87%
ICICI Pru Nifty Pharma Index Direct

23.89%
SBI Healthcare Opportunities Direct23.59%
Mirae Asset Healthcare Direct22.91%
Tata Nifty MidSmall Healthcare Index Direct20.93%

डेटा: Value Research, 28 अगस्त 2026 तक

फार्मा सेक्टर क्यों चढ़ा?

फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी के पीछे कई वजहें रहीं। अमेरिका में भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। कुछ फार्मा इंपोर्ट पर 100% अमेरिकी टैरिफ से जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स को बाहर रखा गया।

घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट FY27 की पहली तिमाही में 6.8% बढ़कर 8.1 अरब डॉलर पहुंच गया। सरकार भी Biopharma SHAKTI जैसी योजनाओं के जरिए सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है।

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आगे निवेश करना सही है?

Anand Rathi Wealth के मुताबिक, फार्मा सेक्टर की वैल्यूएशन हाल की तेजी के बाद बढ़ गई है। फार्मा इंडेक्स करीब 43 गुना P/E पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 37-38 गुना रहा है।

उनका मानना है कि अब आगे की तेजी कमाई की वास्तविक ग्रोथ पर निर्भर करेगी। सेक्टोरल फंड में निवेश से कॉन्सेंट्रेशन रिस्क भी बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ हाल की तेजी देखकर फार्मा फंड में पैसा लगाने से पहले जोखिम और वैल्यूएशन पर जरूर विचार करना चाहिए।

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