Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

Stocks to Watch: 21 अक्टूबर को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, हिंदुस्तान जिंक से IREDA तक शामिल

Stocks to Watch: बुधवार, 21 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के दम पर फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों ने सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, तो कुछ के मुनाफे में गिरावट आई है। वहीं, कुछ कंपनियां अपने कारोबार और मैनेजमेंट से जुड़े बदलावों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इन 10 शेयरों पर रहेगी।

Bajaj Finance

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Bajaj Finance का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ रही। कंपनी की नेट टोटल इनकम 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ पहुंच गई। तिमाही के दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन भी दिए।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की मेटल कंपनी Hindustan Zinc का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 142% उछलकर ₹6,412 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का रेवेन्यू 76.5% बढ़कर रिकॉर्ड ₹15,093 करोड़ हो गया। EBITDA भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹9,248 करोड़ रहा।

IREDA

सरकारी रिन्यूएबल एनर्जी फाइनेंस कंपनी IREDA का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट मामूली 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की ग्रॉस NPA घटकर 3.57% और नेट NPA 1.08% रह गई। इससे पिछले साल के मुकाबले खराब कर्ज के स्तर में सुधार दिखा।

Piramal Finance

पिरामल ग्रुप की फाइनेंस कंपनी Piramal Finance का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 67% बढ़कर ₹545 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 35% बढ़कर ₹1,530 करोड़ पहुंच गई। इसके अलावा, SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा को 19 अक्टूबर 2026 से पांच साल के लिए कंपनी का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।

L&T Technology Services

टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी L&T Technology Services (LTTS) का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 53.7% बढ़कर ₹548.2 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹3,040 करोड़ रहा। यह ₹3,022.5 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

Waaree Renewable Technologies

वारी ग्रुप की सोलर EPC कंपनी Waaree Renewable Technologies का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा, सोलर, बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन प्रोजेक्ट्स में भी बड़े मौके मौजूद हैं।

Just Dial

हाइपरलोकल सर्च प्लेटफॉर्म Just Dial का सितंबर तिमाही में रेवेन्यू सालाना आधार पर 13.2% बढ़कर ₹343 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹303.1 करोड़ था। EBITDA भी 4.5% बढ़कर ₹91 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 26.4% रह गया। एक साल पहले यह 28.7% था।

Nelco

टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज कंपनी Nelco का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 6.79% बढ़कर ₹1.73 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹78.14 करोड़ रहा। EBITDA में 22% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹9.1 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 10% से बढ़कर 11.7% हो गया।

SML Mahindra

कमर्शियल गाड़ियों की कंपनी SML Mahindra का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 42.9% गिरकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹670 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 31% गिरकर ₹29 करोड़ रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 7.6% से घटकर 4.3% रह गया।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent के नॉन-एग्जीक्यूटिव और नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हरीश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है। वह 12 साल से ज्यादा समय से कंपनी के बोर्ड में थे। उन्होंने बढ़ती पेशेवर और निजी जिम्मेदारियों का हवाला दिया। उनका इस्तीफा 17 अक्टूबर से प्रभावी हुआ। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजे 29 अक्टूबर को आने वाले हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

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IREDA Q2 Results: सरकारी कंपनी को ₹552 करोड़ मुनाफा, NPA में सुधार; शेयरों पर रहेगी नजर

IREDA Q2 Results: सरकारी कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग स्थिर रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी बढ़त हुई। वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले खराब कर्ज के आंकड़ों में भी सुधार आया।

सितंबर तिमाही में IREDA का नेट प्रॉफिट 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹549 करोड़ का मुनाफा कमाया था। दूसरी ओर, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹776 करोड़ था।

IREDA के खराब कर्ज में कितनी कमी आई?

सितंबर तिमाही में IREDA का ग्रॉस NPA घटकर 3.57% रह गया। जून तिमाही में यह 3.76% था। यानी बैंक और फाइनेंस कंपनियों के लिए परेशानी माने जाने वाले खराब कर्ज के इस आंकड़े में सुधार हुआ।

नेट NPA भी 1.23% से घटकर 1.08% पर आ गया। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी का कर्ज कारोबार बढ़ रहा है। ऐसे में खराब कर्ज पर लगाम लगाए रखना उसके लिए अहम होगा।

FY26 में कंपनी ने बनाया था रिकॉर्ड

IREDA के लिए वित्त वर्ष 2025-26 अच्छा रहा था। कंपनी ने ₹1,873 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। वहीं, कुल ऑपरेटिंग इनकम 23% बढ़कर ₹8,337 करोड़ हो गई थी। इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 33% की बढ़ोतरी हुई थी।

कंपनी का बकाया लोन भी 22% बढ़कर ₹93,000 करोड़ के पार पहुंच गया था। इस दौरान IREDA ने ₹51,883 करोड़ के लोन मंजूर किए और ₹34,946 करोड़ का कर्ज बांटा। कंपनी की नेटवर्थ भी 34% बढ़कर ₹13,781 करोड़ हो गई थी।

पिछले साल बढ़ा था ग्रॉस NPA

मुनाफे और कारोबार में बढ़ोतरी के बावजूद खराब कर्ज कंपनी के लिए चिंता बना हुआ था। मार्च 2026 के अंत में ग्रॉस NPA 3.49% था। एक साल पहले यह 2.45% था। हालांकि, दिसंबर तिमाही के 3.75% के मुकाबले इसमें सुधार हुआ था। वहीं, नेट NPA घटकर 1.29% रह गया था। एक साल पहले यह 1.35% और पिछली तिमाही में 1.68% था।

नतीजों से पहले सोमवार को BSE पर IREDA का शेयर 1.48% गिरकर ₹106.50 पर बंद हुआ था। पिछले 1 साल में स्टॉक 30.48% क्रैश हुआ है।

OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में ला सकती है IPO, ₹6650 करोड़ जुटाने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दिल्ली के एक एक्सिडेंट में पैर गंवाने वाली 26 साल की रीना को मिलेगा 2.55 करोड़ का मुआवजा! ट्रिब्यूनल ने सुनाया गजब का फैसला

दिल्ली में एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2024 में हुई दुर्घटना में पैर गंवाने वाले महिला उद्यमी के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। इस दुर्घटना में 26 साल की एंटरप्रेन्योर रीना के स्कूटर को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद घुटने के नीचे उसका बायां पैर कट गया था। दिल्ली की ट्रिबयूनल ने इस मामले में 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।

पीठासीन अधिकारी गुंजन गुप्ता रीना की दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने ट्रक की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 22 फरवरी, 2025 से 30 दिनों के अंदर 9% सालाना ब्याज के साथ 2.55 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। 15 अक्टूबर के अपने आदेश में, ट्रिब्यूनल ने कहा, “इस फैसले के पहले के हिस्से में याचिकाकर्ता की फंक्शनल डिसेबिलिटी को 100% माना गया है। बताई गई डिसेबिलिटी और उससे होने वाली दिक्कतों के साथ, सुधार की कोई संभावना नहीं होने पर, याचिकाकर्ता वैसी जिंदगी नहीं जी पाएगी जैसी वह एक्सीडेंट से पहले जीती थी।”

यह एक्सीडेंट 5 नवंबर, 2024 को पीरागढ़ी चौक पर हुआ था। रीना अपने दो साल के बेटे के साथ पीछे बैठी थी, तभी ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी। ट्रक का एक पहिया उसके बाएं पैर पर चढ़ गया, जिसे बाद में काटना पड़ा। उसकी तीन सर्जरी हुईं। बीमा कंपनी ने स्कूटर चलाने वाले को दोषी ठहराया और कहा कि महिला ने हेलमेट नहीं पहना था। ट्रिब्यूनल ने इन बातों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रैश ड्राइविंग पर रीना की गवाही का कोई जवाब नहीं था। ट्रक का ड्राइवर-कम-मालिक, महिंदर सिंह, ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ एक उल्टा नतीजा निकाला गया।

ट्रिब्यूनल ने भविष्य में कमाने की क्षमता के नुकसान के लिए याचिकाकर्ता रीना को 1.68 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा अवॉर्ड किया। हालांकि बाएं निचले अंग के लिए विकलांगता 80% सर्टिफाइड थी, ट्रिब्यूनल ने फंक्शनल विकलांगता को 100% माना क्योंकि रीना को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया।

घटना के समय याचिकाकर्ता परिवार की महीने की इनकम 58,915 रुपये थी, जिसमें एक होममेकर के तौर पर उसके योगदान के 6,000 रुपये शामिल थे। उसके दो से चार साल के तीन बच्चे हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिल न होने की वजह से मेडिकल खर्च से मना नहीं किया जा सकता और गलत काम करने वाले को पीड़ित की मेडिक्लेम पॉलिसी का फायदा नहीं मिल सकता। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को अलग-अलग मदों में कुल 2.55 करोड़ रुपये दिए।

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, 21 या 22 अक्टूबर कब है अश्विन एकादशी व्रत

DDA Awas Nivesh scheme: डीडीए के 2516 फ्लैटों पर 25% का बंपर डिस्काउंट, 20 अक्टूबर से बुकिंग शुरू, जानें कीमत और बाकी डिटेल्स

DDA Awas Nivesh scheme: अगर आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दशहरे के मौके पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आवास निवेश योजना 2026 की शुरुआत की है। इस योजना के तहत नरेला में लो इनकम ग्रुप (LIG) लोगों के लिए 2,516 फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन फ्लैटों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। इन फ्लैट की शुरुआती कीमत 14.95 लाख रुपये रखी गई है। इस योजना का मकसद लोगों को कम कीमत पर दिल्ली में अपना घर खरीदने का मौका देना है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में इस योजना को शुरू किया गया है। इस योजना का मकसद लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना है। आइए जानते है इस योजना के बारे में सबकुछ

कब से शुरू होगी ऑनलाइन बुकिंग

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट खरीदने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इस योजना की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 को हुई थी और इसके लिए रजिस्ट्रेशन 14 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। फ्लैटों की बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के दिन दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। DDA की इस योजना के तहत फ्लैटों की बुकिंग ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोग 31 जनवरी 2027 तक आवेदन और बुकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

नरेला में कहां मिलेंगे फ्लैट

DDA की इस योजना में सभी फ्लैट दिल्ली के नरेला इलाके के सेक्टर G2 से G6 के बीच पॉकेट 3 और पॉकेट 6 में स्थित हैं। कुल 2,516 फ्लैटों में से 1,020 पॉकेट 3 में और 1,496 पॉकेट 6 में उपलब्ध हैं। प्रत्येक फ्लैट का प्लिंथ एरिया करीब 49.90 वर्ग मीटर है, जिसमें साझा इस्तेमाल वाले हिस्से भी शामिल हैं। 25 फीसदी छूट के बाद पॉकेट 3 के फ्लैट की अनुमानित कीमत 15.01 लाख रुपये और पॉकेट 6 के फ्लैट की कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है।

कितना लगेगा रजिस्ट्रेशन फीस

DDA आवास निवेश योजना 2026 के लिए इच्छुक लोग डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट https://eservices.dda.org.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फ्लैट बुक कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है, ताकि आवेदकों को आसानी हो और काम में पारदर्शिता बनी रहे। योजना के तहत एक फ्लैट बुक करने के लिए 1 लाख रुपये जमा करने होंगे। वहीं, पोर्टल पर पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले आवेदकों को 2,500 रुपये की फीस देनी होगी, जो वापस नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने पहले ही DDA के आवास पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें दोबारा पंजीकरण करने की जरूरत नहीं है।

DDA आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट बुक करने से पहले आवेदक DDA की वेबसाइट पर उपलब्ध ब्रोशर में जरूरी नियम और शर्तें पढ़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 110 332 पर संपर्क किया जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना और नरेला के विकास को बढ़ावा देना है।

Bajaj Finance Q2 Results: बजाज की कंपनी को ₹6367 करोड़ का मुनाफा, NII में 23% का उछाल

Bajaj Finance Q2 Results: दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने 19 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कमाई और लोन के कारोबार में बढ़ोतरी से नतीजों को मजबूती मिली।

ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी

बजाज फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) दूसरी तिमाही में 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹10,785 करोड़ थी। वहीं, कंपनी की कुल नेट इनकम भी 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ हो गई।

AUM बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हुआ

30 सितंबर 2026 तक कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 26% बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हो गया। AUM का मतलब है कि कंपनी ने कुल कितने पैसे का लोन दे रखा है या मैनेज कर रही है। सितंबर तिमाही में इसमें ₹37,680 करोड़ जुड़े।

इस दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन बांटे। यह एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा है। तिमाही में 44.2 लाख नए ग्राहक भी जुड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12.885 करोड़ हो गई। इसमें सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई।

लोन की वसूली कैसी रही?

सितंबर के अंत में बजाज फाइनेंस का ग्रॉस NPA 1.06% रहा। जून तिमाही में यह 0.96% था। वहीं, नेट NPA 0.39% से बढ़कर 0.42% हो गया। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले खराब लोन का अनुपात थोड़ा बढ़ा। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। तब ग्रॉस NPA 1.24% और नेट NPA 0.60% था।

लोन के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ₹2,166 करोड़ का प्रोविजन किया। यह पिछले साल से 4% ज्यादा है। इसमें आर्थिक जोखिमों को देखते हुए ₹337 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल है। इसे हटा दें तो लोन लॉस और प्रोविजन 12% घटकर ₹1,829 करोड़ रह जाते हैं।

आगे कंपनी की क्या योजना है?

Bajaj Finance को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वह 6 करोड़ से 6.2 करोड़ नए लोन बांटेगी। कंपनी 1.8 करोड़ से 2 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष के दौरान 150 से 175 नई लोकेशन खोलने का लक्ष्य है।

दूसरी तिमाही में कंपनी के लिए फंड जुटाना भी सस्ता हुआ। फंड की लागत 9 बेसिस पॉइंट घटकर 7.31% रह गई। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के दौरान कुल नेट इनकम के मुकाबले ऑपरेटिंग खर्च का अनुपात 25 से 40 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है।

नतीजों से पहले शेयर गिरा

सोमवार को नतीजे आने से पहले Bajaj Finance का शेयर 2.5% गिरकर ₹957.35 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 1.6% नीचे है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें 11% से ज्यादा की गिरावट आई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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SBI Life Smart Platina Plus: एसबीआई लाइफ का ‘स्मार्ट प्लैटिनम प्लस’ एक नॉन-लिंक्ड सेविंग्स प्लान है, जो बिना किसी मार्केट रिस्क के गारंटीड रिटर्न और लाइफ कवर देता है। सुरक्षित और तयशुदा इनकम के जरिए अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

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SBI Life स्मार्ट प्लैटिनम प्लस की मुख्य विशेषताएं

इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रिटर्न पूरी तरह फिक्स और कॉन्ट्रैक्टुअल होते हैं, यानी शेयर बाजार की चाल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और फीचर्स:

प्लान टाइप: यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार लाइफ इंश्योरेंस सेविंग्स प्लान है।

इनकम विकल्प: इसमें दो मुख्य विकल्प मिलते हैं- पहला ‘गारंटीड इनकम ऑप्शन’ (रेगुलर फिक्स इनकम के लिए) और दूसरा ‘लाइफ इनकम ऑप्शन’ (पेआउट पीरियड के दौरान रेगुलर गारंटीड इनकम)।

प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT): पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के अनुसार 6, 7, 8 या 10 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान चुन सकते हैं।

न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम सालाना प्रीमियम ₹50,000 तय किया गया है।

न्यूनतम सम एश्योर्ड: प्लान के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹5,50,000 है।

पेआउट फ्रीक्वेंसी: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इनकम का भुगतान सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर ले सकते हैं।

मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स

मैच्योरिटी बेनिफिट: पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर, निवेशक को कुल चुकाए गए प्रीमियम का 110% हिस्सा रिफंड कर दिया जाता है।

डेथ बेनिफिट: पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर नॉमिनी को एकमुश्त डेथ बेनिफिट मिलता है। इसके अलावा, गारंटीड इनकम विकल्प के तहत कमेंसमेंट के बाद भी पेआउट मिलने का प्रावधान जारी रह सकता है।

पॉलिसी लोन सुविधा: वित्तीय आपातकाल के समय पॉलिसीधारक सरेंडर वैल्यू जो कम से कम 2 साल के पूरे प्रीमियम भुगतान के बाद मिलती है उसके 50% तक का लोन ले सकते हैं।

ऑप्शनल राइडर्स: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें एसबीआई लाइफ एक्सीडेंटल बेनिफिट राइडर (एक्सीडेंटल डेथ / आंशिक विकलांगता) और एसबीआई लाइफ वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PNB Bank Share Price: मुनाफे में जबरदस्त उछाल से 7 महीने के हाई पर पहुंचा शेयर, अब खरीदें, बेचें या रहे बने

PNB Bank Share Price: पीएसयू बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर आज 8% उछलकर 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। स्टॉक में यह तेजी कंपनी के तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई। हालांकि स्टॉक में अच्छी तेजी देखी जा रही है, लेकिन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों CLSA और Citi की इस पर अलग-अलग राय है। CLSA इसे लेकर बुलिश है, जबकि Citi ने इस स्टॉक पर Sell की रेटिंग दी है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

PNB ने सितंबर 2024 को समाप्त तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में 145% की बढ़ोतरी की जानकारी दी। सितंबर 2023 की तिमाही में 1756 करोड़ रुपये के मुकाबले, Q2 में नेट प्रॉफिट बढ़कर 4303.5 करोड़ रुपये हो गया। Q2 में ग्रॉस NPA, जून 2024 की तिमाही के 4.98% से घटकर 4.48% रह गए। नेट NPA भी जून 2024 की तिमाही के 0.60% से घटकर 0.46% पर आ गए।

जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 5.99% बढ़कर 10,517 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 9923 करोड़ रुपये थी। प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) का एक अहम पैमाना, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछली तिमाही में 2.92% रहा।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

CLSA

CLSA ने PNB को “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹140 प्रति शेयर तय किया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 20.4% की बढ़त की संभावना दिखाता है। फर्म के अनुसार, बैंक का दूसरी तिमाही का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) अनुमानों से 20% अधिक रहा। इसकी मुख्य वजह नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) का बेहतर प्रदर्शन और कुछ विशेष रिकवरी रही, हालांकि अन्य आय (other income) में कमी ने इस बढ़त को कुछ हद तक कम कर दिया।

CLSA ने बताया कि बैंक की लोन ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 16% हो गई है, जबकि कुछ तिमाहियों पहले यह दहाई के निचले स्तर (low double-digits) पर थी। वहीं, डिपॉजिट ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले 10% पर स्थिर बनी हुई है।

पंजाब नेशनल बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में 8 बेसिस पॉइंट्स का सुधार हुआ है, जो मुख्य रूप से लोन यील्ड (loan yields) और डिपॉजिट कॉस्ट (deposit cost) में बदलाव के कारण हुआ है।

बैंक प्रबंधन ने संकेत दिया है कि NIM में आगे और सुधार हो सकता है। CLSA के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी स्थिर रही है और ग्रॉस स्लिपेज रेशियो 0.8% है।

Citi

Citi ने पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों पर “Sell” की सलाह दी है। Citi का कहना है कि FCNR इनफ्लो के जरिए होलसेल डिपॉजिट कम होने से डिपॉजिट पर कैश 5 बेसिस पॉइंट्स घट गया। वहीं, रिटेल IBPC और कम रिटर्न देने वाले कॉर्पोरेट एक्सपोजर को कम करने से यील्ड (yields) में 8 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा हुआ। सिटी (Citi) के अनुसार, स्टैंडर्ड एसेट प्रोविज़निंग से मिली राशि ने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) और फ्लोटिंग प्रोविज़न बफ़र्स की भरपाई कर दी, जिससे बैंक की क्रेडिट कॉस्ट लगभग शून्य हो गई।

PNB का ‘रिटर्न ऑन एसेट्स’ 1% से ऊपर स्थिर रहा। बैंक के ग्लोबल एडवांसेज (कर्ज) में पिछले साल के मुकाबले 14.7% और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.3% की बढ़ोतरी हुई। यह FY27 के लिए तय 12% – 13% के लक्ष्य से भी अधिक है। इसमें FCNR-फंडेड ओवरसीज एक्सपोजर का भी योगदान रहा, जो बैंक की कुल बुक का 1.5% है।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर पर नजर रखने वाले 23 एनालिस्ट्स में से 14 ने इसे buy , 3 ने hold करने और 6 ने sell की रेटिंग दी है।

ICICI Bank Share Price:Q2 नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म बुलिश, बढ़ाया टारगेट, मिल सकता है 45% का रिटर्न

 

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

HDFC Bank Share price : Q2 नतीजों के बाद निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए ब्रोकरेज की राय

HDFC Bank share price : सोमवार को HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई है। यह शेयर आज इंट्राडे में 2 प्रतिशत गिरकर 714 रुपये पर आ गया। Q2 नतीजों के बाद यह शेयर निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल हो गया है। मार्जिन के दबाव और कमाई में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद, ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर अपनी ‘बुलिश’ रेटिंग बरकरार रखी है।

सोमवार, 19 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक के शेयरों में 2 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंक द्वारा वीकेंड में वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए जाने के बाद, यह आज निफ्टी के सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल हो गया है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव और अर्निंग में बढ़त को लेकर बनी चिंताओं का असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज फर्मों ने अभी भी इस शेयर पर बुलिश रुख बनाए रखा है।

आज शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक का शेयर गिरकर 714 रुपये पर आ गया। इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें 27.9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। इसी दौरान निफ्टी में 11.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 11.02 लाख करोड़ रुपये है।

यह गिरावट बैंकिंग शेयरों में आई बड़ी कमजोरी के बीच हुई। इस गिरावट में बैंक निफ्टी 0.5 प्रतिशत फिसल गया है। सुबह के सेशन मेंसेंसेक्स 100.65 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 74,628.62 पर आ गया, जबकि निफ्टी 26.70 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,119.45 पर पहुंच गया।

अनुमान के मुताबिक रहे HDFC बैंक के Q2 नतीजे

HDFC बैंक ने बताया है कि सितंबर तिमाही में उसके स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत की बढ़त हुई है और यह 19,510 करोड़ रुपये पर रही है। यह आंकड़ा काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9.7 प्रतिशत बढ़कर 34,619 करोड़ रुपये पर रही है।

बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात पिछली तिमाही के 1.17 प्रतिशत से सुधरकर 1.11 प्रतिशत हो गया, जबकि ग्रॉस एडवांसेज में सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हालांकि, प्रोविजन्स पिछली तिमाही के मुकाबले 18.7 प्रतिशत बढ़कर 3,574 करोड़ रुपये पर आ गए।

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चिंताओं के बावजूद ब्रोकरेज फर्मों का रुख पॉजिटिव

बैंक के नतीजे आने के बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर अपनी बुलिश राय बरकरार रखी है, हालांकि जेपी मॉर्गन और सिटी ने अपने टारगेट प्राइस घटा दिए हैं। जेपी मॉर्गन ने अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग तो बनाए रखी, लेकिन मार्जिन पर दबाव और बैलेंस शीट का लचीलापन कम होने का हवाला देते हुए अपना टारगेट प्राइस 990 रुपये से घटाकर 970 रुपये कर दिया है। वहीं, सिटी ने अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन मार्जिन में कमी और ग्रोथ की दिक्कतों को देखते हुए अपना टारगेट प्राइस 970 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया।

बर्नस्टीन ने 1,150 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। इसका मतलब है कि शुक्रवार के 728.85 रुपये के क्लोजिंग भाव से इसमें लगभग 58 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि अर्निंग में सुस्त ग्रोथ का सिलसिला जारी है और एसेट्स पर रिटर्न (ROA) घटकर 1.8 प्रतिशत रह गया है।

जेफ़रीज़, नोमुरा और गोल्डमैन सैक्स ने भी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है, और स्टॉक के लिए 880 रुपये, 940 रुपये और 861 रुपये के टारगेट प्राइस तय किए हैं। ब्रोकरेज ने अपने विश्लेषण में एसेट क्वालिटी के मजबूत बने रहने और ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में सुधार को हाइलाइट किया गया है, साथ ही उसने निकट अवधि में बैंक के मार्जिन और लिक्विडिटी पर दबाव की बात भी स्वीकार की है।

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