NSE IPO: SEBI से ग्रीन सिग्नल, सितंबर में ही लिस्टिंग; अब तक और क्या चला है पता

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना IPO लाने के लिए के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। लेकिन अब रास्ता साफ है। आइए जानते हैं NSE IPO के बारे में अब तक क्या पता चला है…

साइज और नेचर

NSE IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए शेयर बिक्री से मिला पैसा, OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा।

OFS में कौन बेचेगा शेयर

एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर यानि लगभग 6% हिस्से को बिक्री के लिए रखेंगे। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। SBI अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेच सकती है। एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री कर सकती है।

शेयर बेचने वाले अन्य प्रमुख शेयरधारकों में कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इनवेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।

ओपनिंग और लिस्टिंग की संभावित तारीख

इश्यू के 15 सितंबर को खुलने और 24 या 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है। शेयर BSE पर लिस्ट होंगे।

नए सप्ताह में तय हो सकता है प्राइस बैंड

कहा जा रहा है कि NSE अगले सप्ताह IPO के लिए प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य डिटेल्स की घोषणा कर सकता है।

कैसे होगा देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब NSE का 30,000 करोड़ रुपये का IPO आ रहा है। हालांकि, सबसे बड़े IPO के तमगे को लेकर इसकी टक्कर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड से है। जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है। लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है।

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IPO के बाद टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में हो सकती है NSE की एंट्री

यह IPO NSE को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल कर सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IPO से NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर

NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।

IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट

NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE की वित्तीय सेहत

NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank Share Price: MD और CEO पर नए ऐलान से दिखी 3% तक तेजी, अब ब्रोकरेज का क्या है नजरिया

HDFC Bank के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) शशिधर जगदीशन अपना कार्यकाल (टर्म) खत्म होने के बाद फिर से नियुक्ति नहीं चाहते हैं। उनका टर्म 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इस ऐलान के बाद 31 अगस्त को दिन में बैंक के शेयर में करीब 3 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। बीएसई पर शेयर 739.50 रुपये के हाई तक गया। कई ब्रोकरेज फर्मों ने मैनेजमेंट में संभावित बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। लेकिन नए CEO की नियुक्ति को लेकर निकट भविष्य की अनिश्चितता के कारण सावधान भी हैं।

HDFC Bank ने नए MD और CEO की तलाश शुरू कर दी है। कहा है कि उसका बोर्ड उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक को उम्मीद है कि वह जगदीशन के 26 अक्टूबर को रिटायर होने से पहले ही अपने नए CEO की नियुक्ति कर लेगा। HDFC Bank के नए MD और CEO के रोल के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों तरह के कैंडिडेट्स पर विचार किया जा रहा है।

HDFC Bank स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों के रुख की बात करें तो HDFC Bank पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट्स इस डेवलपमेंट को लेकर बंटे हुए हैं। बर्नस्टीन ने बैंक के स्टॉक के लिए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज लीडरशिप में बदलाव को सकारात्मक मानता है। उसका कहना है कि नया CEO बैंक की कहानी को नए सिरे से पेश करने का स्वाभाविक मौका दे सकता है।

जेपी मॉर्गन ने भी स्टॉक पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 990 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निकट भविष्य में स्टॉक पर पड़ सकता है, लेकिन समय पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने से नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए नेट इंटरेस्ट इनकम (शुद्ध ब्याज आय) में बढ़ोतरी का फिर से शुरू होना काफी मायने रखता है है।

एक्सिस कैपिटल ने ‘बाय’ कॉल के साथ 1,030 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि जगदीशन के फैसले से दूसरे कार्यकाल के छोटा होने की आशंका खत्म हो गई है। नए उत्तराधिकारी को पूरे 3 साल का कार्यकाल मिल सकता है।

IIFL, जेफरीज, ICICI सिक्योरिटीज की क्या राय

IIFL ने जगदीशन के फैसले को न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव बताया है। तर्क है कि इससे रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर अगला कार्यकाल छोटा होने का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि कैजाद भरूचा एक संभावित इंटरनल कैंडिडेट (अंदरूनी उम्मीदवार) हो सकते हैं, लेकिन IIFL का कहना है कि कार्यकाल की पाबंदियों के कारण उन्हें काम करने के लिए कम समय मिल सकता है। भरूचा का HDFC Bank के बोर्ड में फुल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर 15 साल का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा। इसके चलते उन्हें टॉप पोजिशन पर बहुत कम मौका मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह उनके नाम पर विचार करने में रुकावट बन सकता है। IIFL के मुताबिक, इसके उलट कोई भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार लीडरशिप में एक नई शुरुआत और लंबा कार्यकाल दे सकता है।

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अन्य ब्रोकरेज ने इस बदलाव को लेकर ज्यादा सावधानी भरा रुख अपनाया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग तो बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया है। FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों में भी 3-3 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रोकरेज का मानना है कि नेतृत्व में बदलाव से बैंक के रेवेन्यू की रफ्तार, खासकर डिपॉजिट जुटाने और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ती अनिश्चितता से बैंक की कॉस्ट ऑफ इक्विटी बढ़ सकती है और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।

जेफरीज का कहना है कि इन सबके बावजूद HDFC Bank की वैल्यूएशन इतनी ज्यादा नहीं है कि रेटिंग घटाई जाए। ICICI सिक्योरिटीज ने भी अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,020 रुपये से घटाकर 920 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

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Vedanta Group कंपनियों के शेयरों को लगे पंख, वेदांता ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा 7% उछला

वेदांता ग्रुप की कंपनियों के लिए बुधवार यानी 26 अगस्त का दिन खास रहा। ग्रुप की करीब सभी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद ये शेयर अच्छी तेजी के साथ बंद हुए। इससे एक दिन में समूह की कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 18,120 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

Vedanta Group की प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक दिन में 5.66 फीसदी बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। सबसे ज्यादा 7.27 फीसदी का उछाल वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखा। इससे इसका भाव 41.78 रुपये पर पहुंच गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 20 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की सलाह

Vedanta Aluminium Metal के शेयरों में 3.33 फीसदी की तेजी आई। इससे इसका भाव 462.75 रुपये पर क्लोज हुआ। इस शेयर में तेजी की वजह ब्रोकरेज फर्म मोतोलाल ओसवाल की रिपोर्ट है। उसने शेयर पर ‘बाय’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 540 रुपये का टारेगट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि आगे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने के आसार हैं। यह शेयर बीते एक महीने में करीब 6 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता आयरन के शेयरों में करीब 5 फीसदी उछाल

वेदांता ऑयरन एंड स्टील के शेयर में 4.98 फीसदी उछाल आया। इससे इसका भाव 38.78 रुपये पर क्लोज हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 28 फीसदी उछला है। वेदांता का शेयर 4.36 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर बीते एक महीने में 8.45 फीसदी चढ़ा है। ग्रुप की मार्केट वैल्यू बढ़ाने में सबसे ज्यादा 10,731 करोड़ रुपये का योगदान वेदांता एल्युमीनियम का रहा। वेदांता लिमिटेड का 4,891 करोड़ रुपये का योगदान रहा।

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हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस 750 करोड़ रुपये

हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में भी तेजी दिखी। यह शेयर 6.29 फीसदी चढ़कर 629.85 रुपये पर बंद हुआ। तेजी की वजह सरकार की तरफ से आया एक स्पष्टीकरण है। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल उसका हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचने का प्लान नहीं है। इस, कंपनी में सरकार की 27.92 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता की 60.71 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच, जेफरीज ने हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस बढ़ाया है। उसने टारगेट प्राइस बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया है।

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जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

Cyient Share Price: इन्वेस्टर डे के बाद शेयर 4% उछला, जेपी मॉर्गन ने दिया ₹1,050 का टारगेट

Cyient Share Price: IT सर्विस कंपनी Cyient के शेयरों में 26 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयर में तेजी कंपनी द्वारा’इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के ग्रोथ और मार्जिन से जुड़ी जानकारी और ब्रोकरेज फर्मों ने रिकवरी की रफ्तार को लेकर मिक्स राय के बाद आई है।

Cyient ने कहा कि ग्रोथ को फिर से तेज करना उसकी शॉर्ट टर्म की प्राथमिकता है। कंपनी का लक्ष्य FY28-29 तक सालाना आधार पर डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ और तिमाही-दर-तिमाही स्थिर ग्रोथ हासिल करना है।

शॉर्ट टर्म में, कंपनी का लक्ष्य 15% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है, जबकि मध्यम से लंबी अवधि में उसका लक्ष्य इंडस्ट्री में सबसे अच्छी ग्रोथ के साथ-साथ 16% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है।

कंपनी ने कहा कि उसकी ‘गो-टू-मार्केट’ (GTM) टीम अब बड़े सौदे करने और बिजनेस को प्रोजेक्ट-आधारित काम से हटाकर एन्युइटी-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स की ओर ले जाने के लिए तैयार है, जिनसे रेवेन्यू का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। अभी प्रोजेक्ट-आधारित काम कंपनी के कुल बिजनेस का लगभग 40% है।

मैनेजमेंट ने बताया कि Cyient की ‘लार्ज-डील पाइपलाइन’ (बड़े सौदों की संभावित सूची) अभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। इसमें 9 ऐसे सौदे शामिल हैं जिनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू लगभग 300 मिलियन डॉलर है।कंपनी ने FY26 को कई रणनीतिक बदलावों के बाद स्थिरता का साल बताया है और उम्मीद है कि FY27 और FY28 में उसकी नई रणनीति से रिकवरी शुरू होगी।

मार्जिन के मामले में Cyient ने पहले ही प्रगति की है; Q1 FY27 में EBIT मार्जिन बढ़कर 13.2% हो गया, जो पहले लगभग 12.2% था। मैनेजमेंट का लक्ष्य AI-आधारित रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेटिंग कॉस्ट में दक्षता के जरिए मध्यम अवधि में 15% का लक्ष्य हासिल करना है।

JPMorgan के अनुसार, मैनेजमेंट जिन मुख्य पैमानों पर नजर रखेगा, उनमें खास तौर पर बड़े सौदों से ऑर्डर आने में डबल-डिजिट ग्रोथ और मार्जिन का 15% तक बढ़ना शामिल है।

शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय

JPMorgan ने Cyient के लिए ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,050 प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि Cyient की नई रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन स्टॉक की री-रेटिंग के लिए इसे सही ढंग से लागू करना अहम होगा। JPMorgan ने ‘इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के बड़े सौदों पर फोकस, एन्युइटी-आधारित रेवेन्यू की ओर बदलाव और मार्जिन बढ़ाने की योजनाओं को मुख्य सकारात्मक बातें बताया।

इस बीच, मोतीलाल ओसवाल ने Cyient पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग को दोहराया है और इसका प्राइस टारगेट ₹740 रखा है। इसका मतलब है कि मंगलवार की क्लोजिंग कीमत से इसमें लगभग 24% की गिरावट आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वह कंपनी के काम करने के तरीके (एग्जीक्यूशन) के बारे में बेहतर सबूत मिलने का इंतज़ार करेगा, क्योंकि रिकवरी में अभी समय लगेगा और FY27 में ऑर्गेनिक ग्रोथ के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल Cyient के सेमीकंडक्टर से जुड़े मौकों को लेकर पॉजिटिव है, लेकिन उसका कहना है कि इस बिज़नेस को बड़ी वैल्यूएशन देने से पहले वह ‘प्रूफ ऑफ़ कॉन्सेप्ट’ का इंतज़ार करेगा।

इधर Emkay Global ने Cyient पर अपनी ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹900 तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि ऐसा लगता है कि मैनेजमेंट ने कंपनी की ग्रोथ में आने वाली मुख्य रुकावटों को दूर कर लिया है और अब उनके पास सही स्ट्रैटेजी और ज़रूरी साधन मौजूद हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि उसकी राय और रेटिंग में बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपनी योजनाओं को कितनी अच्छी तरह लागू करती है।

Cyient पारंपरिक इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) सर्विसेज़ से हटकर ज़्यादा बड़े ‘लाइफसाइकिल इंजीनियरिंग सर्विसेज़’ मॉडल की ओर बढ़ रही है। कंपनी का अनुमान है कि उसका एड्रेसेबल मार्केट पारंपरिक ER&D के लगभग $80-100 बिलियन के मौके से बढ़कर $2.4-3.2 ट्रिलियन के पूरे इंजीनियरिंग लाइफसाइकिल मौके तक फैल सकता है।

मंगलवार को Cyient के शेयर 4.54% बढ़कर ₹1022.15 पर बंद हुए और पिछले एक महीने में इस स्टॉक में 18% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स के लिए विज्ञापनों से जुड़े नियमों पर सख्ती का प्रस्ताव पेश किया है। सेबी का लक्ष्य ये है कि ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगे जो निवेशकों को बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। सेबी ने इससे जुड़ा कंसल्टेशन पेपर शुक्रवार को जारी किया। इसमें डिजिटल विज्ञापन, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के जरिए होने वाले प्रचार को ध्यान में रखते हुए नए ऐड कोड का प्रस्ताव दिया गया है। इन प्रस्ताव पर सेबी ने 11 सितंबर तक सभी स्टेकहोल्डर्स से कमेंट्स मंगाए हैं।

किस तरह के विज्ञापनों पर रोक लग सकती है?

सेबी ऐसे विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव कर रहा है जिनसे निवेशकों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बन रहा हो। ऐसे ऐड पर रोक लग सकती है, जिसमें अर्जेंसी, बिहैवियरियल प्रॉम्प्ट्स या FOMO (Fear of Missing Out) यानी छूट जाने का डर जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जाए। सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मैसेजेज पर रोक लगाई जाएगी जिसमें उत्साहित होकर निवेशक बॉन्ड के रिस्क की पर्याप्त जांच किए बिना निवेश कर दें। सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक हाई यील्ड, हाई रेटेड या हाई रिटर्न्स जैसे दावों पर बिना पर्याप्त जानकारी के रोक लगेगी

क्या देनी होगी जानकारी?

सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी विज्ञापन में किसी खास बॉन्ड या सिक्योरिटी का प्रचार किया जा रहा है, तो प्लेटफॉर्म को कुछ खास जानकारी देनी होगी, जैसे कि इसे जारी कौन कर रहा (Issuer), इसकी अवधि कितनी है (Tenor), इसकी क्रेडिट रेटिंग, सिक्योरिटी का प्रकार, क्लीन प्राइस और डर्टी प्राइस, यील्ड टू मेच्योरिटी (YTM), क्रेडिट रिस्स-ओ-मीटर। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशक निवेश करने से पहले बॉन्ड से जुड़ी अहम जानकारी और रिस्क को समझ सकें।

फिक्स्ड रिटर्न को लेकर क्या है प्रस्ताव?

सेबी ने फिक्स्ड रिटर्न्स, प्रेडिक्टेबिल रिटर्न्स और पैसिव इनकम जैसे शब्दों के इस्तेमाल के लिए भी खास निर्देश दिए हैं ताकि ऐसा ना लगे कि निवेश पर खास रिटर्न की गारंटी है। अगर किसी विज्ञापन में ‘फिक्स्ड रिटर्न’ लिखा जा रहा है, तो उसमें प्रमुखता से यह डिस्क्लेमर देना होगा कि फिक्स्ड रिटर्न्स की गारंटी नहीं होती और डेट सिक्योरिटीज में मार्केट रिस्क, क्रेडिट रिस्क और डिफॉल्ट का रिस्क होता है यानी कि बॉन्ड्स से रिटर्न पूरी तरह सुरक्षित या गारंटीड है, ऐसा विज्ञापन के जरिए नहीं बताया जा सकेगा।

CAS में गड़बड़ी पर SEBI का तगड़ा एक्शन, जेपी मॉर्गन की इकाई मानसी शेयर पर लगी रोक, जानिए कैसे हुआ ये पूरा खेल

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क्या शेयर बाजार में तूफानी तेजी आने वाली है? JPMorgan ने दिया Nifty को 27000 का टारगेट, बुल केस और बीयर केस में ये है अनुमान

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन की हालिया इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में निफ्टी के लिए 27,000 का बेस-केस टारगेट बरकरार रखा गया है। ब्रोकरेज का कहना है के बेहतर होते अर्निंग आउटलुक और घरेलू मांग में मजबूती को वजह से निफ्टी को सपोर्ट मिलेगा। जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि साल 2026 में MSCI इंडिया की अर्निंग्स 11 फीसदी और साल 2027 में 13 फीसदी बढ़त देखने को मिल सकती है। इसका निफ्टी के लिए’बुल-केस’टारगेट 30,000 के लेवल का है। जबकि ‘बेयर-केस’टारगेट 20,500 के लेवल का है।

ANI के मुताबिक जेपी मॉर्गन ने कहा है कि उसका झुकाव मुख्य रूप से तेज ग्रोथ वाले घरेलू साइक्लिकल शेयरों की ओर है। निफ्टी-50 के लिए जेपी मॉर्गन के बेस/बुल/बेयर केस टारगेट 27,000/30,000/20,500 के हैं।

इस ब्रोकरेज फर्म का कहना है वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही का अर्निंग्स सीजन उम्मीद से बेहतर रहा। पहली तिमाही में MSCI इंडिया कंपनियों का रेवेन्यू सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा,जबकि टैक्स के बाद मुनाफा 16 फीसदी बढ़ा। अर्निंग्स भी उम्मीद से बेहतर रही। लगभग 58 प्रतिशत MSCI इंडिया कंपनियों की अर्निंग्स उम्मीद से बेहतर रहीं,जबकि 24 प्रतिशत कंपनियां अनुमानों पर खरी नहीं उतर पाईं।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के मुनाफे में मजबूत बढ़त

मार्केट-कैप के हिसाब से छोटी कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा। जेपी मॉर्गन के अनुसार एनर्जी सेक्टर को छोड़कर देखें तो मिडकैप 100 कंपनियों का टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) सालाना आधार पर 42 फीसदी बढ़ा है। जबकि, निफ्टी स्मॉलकैप 100 कंपनियों का PAT 39 फीसदी बढ़ा है। इस तिमाही में मटीरियल्स,यूटिलिटीज,इंडस्ट्रियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ देखने को मिली। ग्लोबल परेशानियों के बावजूद,मजबूत घरेलू मांग के चलते भारतीय कंपनियों को सहारा मिला।

पावर,ऑटो और डिफेंस सेक्टर में दिख रहा दम

जेपी मॉर्गन की राय है कि आगे बिजली की मांग,कैपिटल एक्सपेंडिचर और ग्रिड साइकल से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा डिफेंस, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर स्टेपल्स जैसे सेक्टरों में तेजी आ सकती है।

पहली तिमाही में भारत में बिजली की पीक डिमांड लगभग 271 GW तक पहुंच गई। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कंपनियों को वॉल्यूम में बढ़त और एक्सपोर्ट से फायदा हुआ जबकि कंज्यूमर स्टेपल्स में वॉल्यूम-आधारित रिकवरी के संकेत दिखे। आगे भी इनमें मजबूती काय रह सकती है।

ANI के मुताबिक जेपी मॉर्गन का भारत के इक्विटी को लेकर नजरिया मजबूत अर्निंग और घरेलू मांग की उम्मीदों पर टिका हुआ है। वहीं, जियोपॉलिटिकल घटनाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं जोखिम पैदा कर सकती हैं।

 

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Gold Loan कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी, आपको आगे भी मालामाल कर सकते हैं ये शेयर

गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों में 21 अगस्त को तूफानी तेजी दिखी। इसकी वजह यह है कि विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस और मण्णपुरम फाइनेंस के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने इन शेयरों को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है।

IIFL Finance के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस

IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance के शेयरों में 2 से 8 फीसदी की तेजी दिखी। सबसे ज्यादा 7.26 फीसदी की तेजी IIFL Finance के शेयर में दिखी। इससे शेयर का भाव 682.90 रुपये पर पहुंच गया। जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ सकता है।

IIFL Finance का शेयर बीते एक साल में 48 फीसदी चढ़ा है

सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, जेपी मॉर्गन का मानना है कि आईआईएफएल फाइनेंस टर्नअराउंड की शुरुआती अवस्था में है। प्रॉफिट बनाने की बढ़ती क्षमता को देखते हुए इसके शेयरों की रिरेटिंग हो सकती है। बीते एक साल में आईआईएफएल फाइनेंस का शेयर 48 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

मुथूट फाइनेंस के शेयरों में भा सकती है तेजी

मुथूट फाइनेंस के शेयरों के बारे में भी जेपी मॉर्गन की राय पॉजिटिव है। उसने इस शेयर के लिए 3,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 14 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इस शेयर का प्रदर्शन इस साल दूसरी गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों से कमजोर रहा है। ऐसे में अभी निवेश करने से आगे अच्छी कमाई हो सकती है। Muthoot Finance का शेयर 21 अगस्त को 2.29 फीसदी चढ़कर 3,038 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह 13.54 फीसदी चढ़ा है।

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश से भी होगी कमाई

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश करने पर अच्छी कमाई हो सकती है। जेपी मॉर्गन ने इस शेयर के लिए 395 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 13 फीसदी तेजी आ सकती है। उसने कहा है कि कंपनी के जून तिमाही के नतीजों से इसके टर्नअराउंड के संकेत मिले हैं। मण्णपुरम फाइनेंस का शेयर 21 अगस्त को 2.35 फीसदी चढ़कर 357.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 35 फीसदी उछला है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में नाममात्र की तेजी 

गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में बने रहे। 21 अगस्त को निफ्टी 0.08 फीसदी यानी 20 अंक चढ़कर 24,252 पर बंद हुआ। सेंसेक्स सिर्फ 3 अंक चढ़कर 77,540 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.46 फीसदी की मजबूती दिखी।

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CAS में गड़बड़ी पर SEBI का तगड़ा एक्शन, जेपी मॉर्गन की इकाई मानसी शेयर पर लगी रोक, जानिए कैसे हुआ ये पूरा खेल

मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने दो एंटिटीज़ को सिक्योरिटीज़ मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही इनके द्वारा गलत तरीके से कमाए गए 3.68 करोड़ रुपये जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई एक अंतरिम जांच के बाद की गई है जिसमें 13 अगस्त, 2026 को इंडेक्स की एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान सेंसेक्स में हेरफेर के शुरुआती सबूत मिले थे।

सेबी ने 19 अगस्त को JP मॉर्गन की कंपनी कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (Copthall Mauritius Investment Limited) से 2.96 करोड़ रुपये और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड (Mansi Share and Stock Broking Private Limited) से 71.65 लाख रुपये ज़ब्त करने का आदेश दिया है।

SEBI के सर्विलांस सिस्टम ने 13 अगस्त को दोपहर 3:20 से 3:30 बजे के बीच CAS विंडो में सेंसेक्स की इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) में तीन बड़े उतार-चढ़ाव देखे। इनमें 362.02 प्वाइंट, 132.67 प्वाइंट और 405.08 प्वाइंट के उतार-चढ़ाव शामिल थे,जो 2 सेकंड से लेकर 28 सेकंड के अंदर हुए थे। इस दिन आखिर में सेंसेक्स 78,080 पर बंद हुआ,जो निफ्टी में हुई वैसी ही हलचल के आधार पर SEBI के हिसाब से तय लेवल से लगभग 240 प्वाइंट ज़्यादा था। इससे सेबी को गड़बड़ी की आशंका हुई।

कॉप्थॉल ने कैसे किया खेल?

सेबी की जांच से पता चला कि कॉप्थॉल ने आक्रामक खरीदारी से सेंसेक्स को ऊपर चढ़ाया। सेंसेक्स के सभी शेयरों में एग्रेसिव तरीके से 126 करोड़ रुपए के BUY ऑर्डर लगाए। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से करीब 3% ऊपर लगाए गए थे। CAS के दौरान कुल Buy ऑर्डर वैल्यू में इनकी 99.91% हिस्सेदारी थी। बाद में खरीदारी के सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। इस तरह कॉप्थॉल ने ऑप्शंस के जरिये की 2.96 करोड़ रुपए कमाए।

कॉप्थॉल की ऑप्शंस पोजिशन

कॉप्थॉल की ऑप्शंस पोजिशन पर नजर डाले तो इसने जांच वाले दिन के 1 दिन पहले 26560 सेंसेक्स 77500 के कॉल खरीदे और 26560 सेंसेक्स 77500 पुट बेचे। वहीं, उसी दिन इंट्राडे में इसने 84200 सेंसेक्स 78000 के कॉल खरीदे और 84200 सेंसेक्स 78000 पुट बेचे। इसी तरह इसने इसने जांच वाले दिन के 1 दिन पहले 12640 सेंसेक्स 78500 के कॉल खरीदे और 12640 सेंसेक्स 78500 के पुट बेचे।

SEBI ने कहा कि कीमत में बदलाव होने के बाद कॉप्थॉल ने इन ऑर्डर्स का एक बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया। उनकी डेरिवेटिव्स पोजीशन में सेंसेक्स ऑप्शंस में लॉन्ग कॉल और शॉर्ट पुट पोजीशन शामिल थीं,जिन्हें इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर बंद होने से फायदा होता।

मानसी शेयर ने कैसे किया खेल?

इसने सेंसेक्स के 8 शेयरों में ऑर्डर लगाए। कुल 12.65 लाख शेयरों के Sell ऑर्डर लगाए गए। 7.05 लाख शेयर 2.5% नीचे के भाव पर लगाए गए। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से 2.5% नीचे थे। इसके बाद मानसी ने पूरे Sell ऑर्डर कैंसिल कर दिए। इस तरह मानसी ने पुट ऑप्शंस खरीदकर 71.64 लाख रुपए कमाए।

मानसी शेयर की ऑप्शंस पोजिशन

मानसी ने इंट्राडे में 5000 सेंसेक्स 77800 के कॉल खरीदे। इसके साथ ही इसने इंट्राडे में ही 42020 सेंसेक्स 77800 के पुट खरीदे। दूसरी किस्त में इसने इंट्राडे में 83320 सेंसेक्स 77900 पुट खरीदे। फिर इसने तीसरी किस्त में इंट्राडे में ही 44000 सेंसेक्स 78000 पुट खरीदे।

सेबी ने अपनी जांच में पाया कि मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने रेफरेंस प्राइस से काफी कम कीमत पर बड़े सेल ऑर्डर दिए थे। SEBI के अनुसार,इन ऑर्डरों ने लगभग पांच मिनट तक इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा और फिर लगभग सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। मानसी की डेरिवेटिव्स पोजीशन में पुट ऑप्शन शामिल थे,जिनसे सेंसेक्स के निचले स्तर पर बंद होने से फायदा होता।

SEBI ने कहा है कि Copthall ने इस गलत तरीके से ₹2.96 करोड़ और Mansi ने ₹71.64 लाख की कमाई की। हालांकि,आदेश में यह नहीं कहा गया है कि इन दोनों एंटिटीज ने मिलीभगत के साथ काम किया। SEBI का शुरुआती आकलन यह है कि इन एंटिटीज ने स्वतंत्र रूप से इंडेक्स को अपनी-अपनी डेरिवेटिव्स पोजीशन का फ़ायदा उठाने के लिए प्रभावित किया।

SEBI ने आगे की जांच होने तक दोनों संस्थाओं को सिक्योरिटीज़ मार्केट में ट्रेड करने और CAS में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेने से रोक दिया है। मानसी के मामले में ये पाबंदियां उसके प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग अकाउंट पर लागू होंगी।

सेबी ने इनके बैंक और डीमैट अकाउंट से पैसे निकालने पर भी रोक लगा दी है,SEBI की मंज़ूरी के बिना एसेट्स को बेचने या ट्रांसफर करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है और उन्हें 15 दिनों के अंदर अपने एसेट्स,बैंक अकाउंट,डीमैट अकाउंट,सिक्योरिटीज़ और इन्वेस्टमेंट की पूरी लिस्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। SEBI ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच जारी रहेगी।

 

 

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