High Return Stock: इस शेयर ने 5 साल में 8 गुना किया पैसा, क्या आप निवेश करना चाहेंगे?

High Return Stock: कोचिन शिपयार्ड (सीएसएल) के शेयरों ने बीते पांच सालों में निवेशकों को मालामाल किया है। यह समुद्री जहाज बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी की ऑर्डरबुक करीब 21,900 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने नेवल और कमर्शियल शिपब्लिडिंग में बड़े मौकों को देखते हुए 6,500 करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर करने का प्लान बनाया है।

Cochin Shipyard की 21,900 करोड़ रुपये की कुल ऑर्डरबुक में 20,700 करोड़ हिस्सेदारी शिपबिल्डिंग की है। बाकी 1,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी शिप रिपेयर की है। यह इस बात का संकेत है कि मीडियम टर्म में कंपनी के रेवेन्यू को लेकर तस्वीर साफ है। कंपनी के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स है, जिनमें ASW Corvettes, Next Generation Missile Vessels, और LNG-powered container vessels शामिल हैं।

सीएसएल भारतीय नौसेना के नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल प्रोग्राम के लिए L1 बिडर बनी है। यह प्रोजेक्ट 5,000 करोड़ रुपये का है। कंपनी लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक प्रोग्राम के लिए भी बड़ी दावेदार है। कमर्शियल सेगमेंट में देखा जाए तो सीएसएल की नजरें मीडियम-रेंज टैंकर्स, प्लेटफॉर्म सप्लाई वेसल और बड़े गैस कैरियर्स पर हैं।

कमर्शियल प्रोजेक्ट्स से कंपनी की ऑर्डरबुक डायवर्सिफाय होगी। साथ ही देश में कर्मशियल शिपबिल्डिंग में बढ़ते मौकों का फायदा उठाने में मदद मिलेगी। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की शिपबिल्डिंग से रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 59 फीसदी बढ़कर 700 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, शिप रिपेयर रेवेन्यू 37 फीसदी घटकर 390 करोड़ रुपये रही। इसकी वजह आईएनएस विक्रमादित्य की रिफिट है, जिससे FY26 की पहली तिमाही में बेस काफी हाई था।

स्ट्रॉन्ग ऑर्डरबुक, बेहतर हो रहे एक्जिक्यूशन और बढ़ती कपैसिटी को देखते हुए मैनेजमेंट को आगे भी ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। कंपनी का टारगेट FY27 में शिपबिल्डिंग में 10-12 फीसदी ग्रोथ, शिप रिपेयर में 15-20 फीसदी ग्रोथ और कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ 12 फीसदी से ज्यादा का है।

सीएसएल के शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के 34 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है। लेकिन, ऑर्डरबुक को देखते हुए यह ज्यादा नहीं लगता है। कंपनी क्षमता बढ़ाने पर 6,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इससे लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर लगती हैं। हालांकि, बीते एक साल में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

BSE मैनेजमेंट के इस बयान से शेयर धड़ाम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

बीएसई के शेयरों में 2 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। दिन के उच्च स्तर से शेयर 4 फीसदी से ज्यादा गिर गए। इसकी वजह बीएसई का एक बयान है। इस बयान के बाद ही शेयर में तेज गिरावट आई। स्टॉक एक्सचेंज ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (कैश) की शुरुआत के बाद वॉल्यूम में गिरावट आई है।

CAS की वजह से घटा है पार्टिसिपेशन 

BSE के मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में कहा, “CAS की वजह से एचएफटी, प्रॉपरायटरी अकाउंट्स, रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन घटा है। सीएएस के बाद पार्टिसिपेशन बढ़ना जरूरी है।” बीएसई का शेयर 2 सितंबर को एक समय 3,252 रुपये के लेवल पर पहुंच गया था। 12 बजे शेयर का प्राइस 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर चल रहा था।

NSE के शेयरों की लिस्टिंग का भी असर

बीएसई मैनेजमेंट के यह बताने का असर भी उसके शेयरों पर पड़ा कि NSE के शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की इजाजत मिल सकती है। खबरों के मुताबिक, BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE के शेयरों में अपने ही एक्सचेंज पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए ट्रेडिंग हो सकती है।

अर्निंग्स में 1-2 फीसदी कमी आ सकती है

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई के इस कदम से FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है। यह अनुमान एक एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें यह माना गया है कि कैश मार्केट की हिस्सेदारी और नहीं बढ़ेगी।

दो ब्रोकरेज फर्मों ने आउटलुक घटाया

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों नुवामा और जेफरीज ने बीएसई के शेयरों पर अपने आउटलुक को घटाया है। PL Capital ने बीसई के शेयरों के लिए 12 महीने के टारगेट प्राइस को 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, इस शेयर पर उसने ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है।

3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। यह कारोबार के आखिर में होने वाला एक संक्षिप्त ऑक्शन है, जिसमें शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए बाय (Buy) और सेल (Sell) ऑर्डर्स को मैच कराया जाता है। शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए दूसरे एशियाई बाजारों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं।

CAS का मतलब क्या है

CAS की व्यवस्था शुरू होने से पहले शेयर के क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अंतिम 30 मिनट में लगातार होने वाली ट्रेडिंग में ट्रेड्स के औसत प्राइस के आधार पर होता था। रेगुलेटर्स का कहना है कि दुनिया के कई बाजारों में लागू सिस्टम को ध्यान में रख CAS को लागू किया। कैस लागू होने के बाद बाजार और प्रमुख सूचकांकों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

यह भी पढ़ें: बाजार में तेजी चाहते हैं तो एक महीने के लिए IPO, QIP में नहीं करें निवेश, दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने बताई वजह

CAS से पहले क्या था सिस्टम

करीब 20 मिनट के ऑक्शन प्रोसेस में लिक्विडिटी काफी कम रही है और इसमें ज्यादातर संस्थानों की हिस्सेदारी रही है। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है। कम पार्टिसिपेशन का मतलब अपेक्षाकृत छोटे बाय और सेल ऑर्डर्स से है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर क्या आप भी कनफ्यूज्ड हैं? यहां आसान शब्दों में समझें इसका पूरा मतलब

किसी कंपनी का शेयर बाज़ार बंद होने के समय किस भाव पर था, इससे आमतौर पर लोगों का ज़्यादा सरोकार नहीं होता। आम लोग तो अपने शेयर को खरीदने और बेचने के भाव पर ध्यान देते हैं। मगर बाज़ार बंद होने के समय का भाव (क्लोज़िंग प्राइस) कुछ तबकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जैसे म्यूचुअल फ़ंड, बड़े संस्थागत निवेशक और वायदा एवं विकल्प बाज़ार के प्रतिभागी।

कैस से पहले कैसे निर्धारित होती थी क्लोज़िंग प्राइस?

3 अगस्त 2026 से पहले क्लोज़िंग प्राइस एक फ़ॉर्मूले के तहत निर्धारित होती थी। इस फ़ॉर्मूले का सिद्धांत यह है कि अगर 10 लोगों ने किसी कंपनी का एक शेयर 100 रुपये में खरीदा और 1,000 लोगों ने उसी कंपनी का एक शेयर 110 रुपये में खरीदा, तो साधारण औसत भाव 105 रुपये होगा। मगर 105 रुपये का साधारण औसत बाज़ार का सही चित्रण नहीं करता, क्योंकि अधिकांश लोगों ने 110 रुपये का भाव चुकाया।

इस फ़ॉर्मूले, जिसका नाम है वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (जिसे लोग बोलचाल में विवैप कहते हैं), के तहत साधारण औसत निकालने के बजाय, बाज़ार बंद होने से पहले के अंतिम 30 मिनट में किसी कंपनी के कितने शेयर किस भाव पर बिके, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक भारित औसत निकाला जाता है। उपरोक्त उदाहरण में विवैप लगभग 110 रुपये होगा।

विवैप का उद्देश्य अधिक यथार्थवादी क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करना है, फिर भी ज़ाहिर है, यदि इन 30 मिनटों के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में प्रचलित बाज़ार भाव से अलग भाव पर शेयर ख़रीदे और बेचे जाएँ, तो क्लोज़िंग प्राइस प्रभावित हो सकती है। सेबी ने हाल ही में एक विदेशी ट्रेडिग समूह पर जो आरोप लगाए थे, उनमें क्लोज़िंग प्राइस को प्रभावित करने से जुड़े आरोप भी थे। हालाँकि, संबंधित समूह सेबी के आरोपों और चित्रण से सहमत नहीं है और इस मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

कैस से क्या बदला है?

इन्हीं चिंताओं के बीच सेबी ने क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने के लिए एक नया तरीका लागू किया है, जिसका नाम है कैस, यानी क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन। कैस एक नया विचार नहीं है और सेबी 2024 से कैस के बारे में विचार कर रहा था। कैस के अंतर्गत आने वाले शेयरों में नियमित ट्रेडिंग अब 3:15 बजे बंद हो जाती है। पहले इन शेयरों में नियमित ट्रेडिंग 3:30 बजे तक होती थी। जो शेयर फिलहाल कैस के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनकी ट्रेडिंग अभी भी 3:30 बजे तक चलती है और उनकी क्लोज़िंग प्राइस का निर्धारण विवैप के द्वारा होता है।

कैस के तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद के 20 मिनट में चार चरणों में प्रक्रिया चलती है। इन चार चरणों को समझने का आसान तरीका यह है कि भाव निकालने के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत है। एक शुरुआती भाव और दूसरा यह कि इस शुरुआती भाव से लोग कितने ऊपर या नीचे बोली लगाएंगे।

• शुरुआती भाव, जिसे रेफ़रेंस प्राइस कहते हैं, 3:00 और 3:15 बजे के बीच के विवैप से निर्धारित होता है। अगर इस दौरान कोई शेयर नहीं बिका, तो पूरे दिन में जो भी उस शेयर की अंतिम खरीद का भाव होगा, उसी को शुरुआती भाव मान लिया जाता है। अगर पूरे दिन कोई शेयर नहीं बिका, तो यह पिछले दिन का क्लोज़िंग प्राइस होता है।

• एक बार रेफ़रेंस प्राइस तय हो जाने के बाद, लोग खरीदने और बेचने के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं। कैस में रेफ़रेंस प्राइस के 3 प्रतिशत ऊपर-नीचे का दायरा लागू होता है।

• चरणबद्ध तरीके से स्टॉक एक्सचेंज खरीदने और बेचने के ऑर्डर एकत्रित करता है। इसके बाद इन ऑर्डरों का विश्लेषण करके यह निर्धारित किया जाता है कि किस भाव पर सबसे अधिक शेयरों का लेन-देन संभव है। अंतिम चरण में ऑर्डरों का मिलान किया जाता है। यही भाव क्लोज़िंग प्राइस कहलाता है।

• उदाहरणतः अगर किसी शेयर के लिए लोगों ने निम्नलिखित ऑर्डर डाले हैं: (1) ख़रीदने के ऑर्डर: 103 रुपये के 15 शेयर; 102 रुपये के 25 शेयर; 100 रुपये के 40 शेयर और 98 रुपये के 30 शेयर; और (2) बेचने के ऑर्डर: 97 रुपये के 10 शेयर; 100 रुपये के 50 शेयर; 101 रुपये के 30 शेयर और 104 रुपये के 20 शेयर, तो आमतौर पर कैस के अनुसार 100 रुपये के भाव पर सबसे ज़्यादा शेयरों का लेन-देन संभव है। 100 रुपये क्लोज़िंग प्राइस होगा।

सेबी का विचार ऐसा प्रतीत होता है कि विवैप के विपरीत, कैस में क्लोज़िंग प्राइस से छेड़छाड़ करने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कैस के पहले भी वीवैप से क्लोज़िंग प्राइस तो निकलता था, लेकिन वीवैप एक औसत भाव होने की वजह से साधारणतः उस भाव पर कोई सौदा नहीं होता था। मतलब, क्लोज़िंग प्राइस एक कागज़ी संख्या थी। कैस में जो भाव निकलता है, सौदा उसी भाव पर होता है। इसलिए कैस का भाव कागज़ी भाव नहीं है, बल्कि सही मायने में उस समय का क्लोज़िंग प्राइस है। इसके काफ़ी फायदे हैं, जैसे कि, अमुमन एक पैसिव इंडेक्स फण्ड के लिए वीवैप वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग से कैस वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग ज़्यादा सटीक होगी।

नया नहीं है कैस

कैस जैसी व्यवस्था विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में काफ़ी प्रचलित है। इसके लागू होने पर कुछ लोगों ने कहा कि भारत भी अब विदेशी एक्सचेंजों की प्रणाली अपना रहा है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। भारत वर्षों से कैस जैसी प्रणाली का उपयोग बाज़ार खुलने के समय का भाव (ओपनिंग प्राइस) निर्धारित करने के लिए करता आया है। वैसे भी भारतीय बाज़ार नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है।

सेबी ने फिलहाल कैस को उन शेयरों पर लागू किया है, जिन पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। आगे चलकर इसे अन्य शेयरों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

कैसा रहा कैस का क्रियान्वयन?

शुरुआती दिनों में कैस का क्रियान्वयन पूरी तरह निर्बाध नहीं रहा। उदाहरणतः, निफ़्टी इंडेक्स के साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट साधारणतः मंगलवार को एक्सपायर होते हैं। अगर मंगलवार को निफ़्टी में शामिल शेयरों में 3:15 तक के बाज़ार भाव और कैस के दौरान बनने वाले क्लोज़िंग प्राइस में महत्वपूर्ण अंतर हो, तो निफ़्टी के क्लोज़िंग स्तर में तेज़ बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स के भावों में अस्थायी असंगति पैदा होने पर आर्बिट्रेज की गुंजाइश भी बन सकती है।

सेबी बाज़ार पर कड़ी नज़र रखती है और सेबी ने 19 अगस्त को एक ऑर्डर निकाला है, जिसमें दो संस्थाओं के ऊपर सेबी ने यह आरोप लगाया है कि उन्होंने कैस के भाव को प्रभावित किया है। यह एक अंतरिम आदेश है, जो इन संस्थाओं का पक्ष सुने बिना जारी किया गया है; इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। लेकिन इससे दो निष्कर्ष निकलते हैं: एक, कि कैस में लिक्विडिटी बहुत महत्वपूर्ण है; और दूसरा, कि कैस पर सेबी की पैनी नज़र है।

इन ऑर्डरों में आरोप यह है कि कैस में बड़े खरीद और बिक्री के ऑर्डर ऑर्डर रेफ़रेंस प्राइस से लगभग 3% ऊपर और नीचे डाले गए, जो कि बाज़ार के रुख़ के विपरीत था, और बाद में ये ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। सेबी का आरोप है कि इससे इंडेक्स प्रभावित हुआ और संबंधित संस्थाओं को वायदा एवं विकल्प बाज़ार में फायदा हुआ।

किसी भी नई व्यवस्था से परिचित होने और उसमें पारंगत होने में समय लगता है। आशा है कि आने वाले दिनों में कैस में अधिक से अधिक ऑर्डर्स डाले जाएँगे और खरीदने-बेचने वालों की संख्या बढ़ेगी, जिससे खरीदने और बेचने के लिए पर्याप्त ऑर्डर उपलब्ध होंगे और क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने की प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से चल सकेगी। क्या इससे क्लोज़िंग प्राइस वास्तव में अधिक यथार्थवादी होगी और उसे प्रभावित करने की संभावना कम होगी, यह तो समय ही बताएगा।

(यह लेख अम्बरीष ने लिखा है, जो शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में पार्टनर हैं)

डिसक्लेमर-यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं। इसे इस पब्लिकेशन का विचार नहीं माना जाना चाहिए।

Dividend Stocks: बंपर डिविडेंड कमाने का आज आखिरी मौका, कल से इन शेयरों में निवेश पर नहीं मिलेगा डिविडेंड

Dividend Stocks: कई इनवेस्टर्स कमाई के लिए उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड अच्छा है। इससे उन्हें दो तरह से कमाई होती है। शेयरों की कीमतों में इजाफा होने पर उनके निवेश की वैल्यू बढ़ती है। साथ ही जब तक शेयर उनके पोर्टफोलियो में रहता है, उन्हें डिविडेंड मिलता रहता है। अगर आप भी डिविडेंड के लिए निवेश करना चाहते हैं तो आज बड़ा मौका है। करीब तीन दर्जन कंपनियों ने डिविडेंड के लिए 21 अगस्त को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

डिविडेंड के लिए 21 अगस्त तक डीमैट अकाउंट में होने चाहिए शेयर

ये कंपनियां उन शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देंगी, जिनके डीमैट अकाउंट में 21 अगस्त को शेयर होंगे। इसका मतलब है कि अगर आप इन कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं तो कल यानी 21 अगस्त (शुक्रवार) को आपके डीमैट अकाउंट में शेयर आ जाएंगे। इसका मतलब है कि डिविडेंड इनकम के लिए जा इन शेयरों को खरीदने का अंतिम मौका है। अगर कोई इनवेस्टर 21 अगस्त को इन शेयरों को खरीदता है तो वह डिविडेंड का हकदार नहीं होगा।

सबसे ज्यादा 22 रुपये का डिविडेंड एके कैपिटल दे रही है

AK Capital Services सबसे ज्यादा 22 रुपये का डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब है कि 21 अगस्त को जिन इनवेस्टर्स के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें प्रति शेयर 22 रुपये का डिविडेंड मिलेगा। अगर आपके पास एके कैपिटल सर्विसेज के 10 शेयर हैं तो आपको कंपनी की तरफ से कुल 220 रुपये का डिविडेंड मिलेगा। AK Capital Services का शेयर 20 अगस्त को 1:20 बजे 1.36 फीसदी चढ़कर 1,778 रुपये पर चल रहा था।

वाडीलाल इंडस्ट्रीज प्रति शेयर 17 रुपये का डिविडेंड देगी

Vadilal Industries ने भी बंपर डिविडेंड का ऐलान किया है। कंपनी हर एक शेयर पर 17 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देगी। वाडीलाल इंडस्ट्रीज का शेयर 20 अगस्त को 0.66 फीसदी चढ़कर 7,450 रुपये पर चल रहा था। इस साल इस शेयर में जबर्दस्त तेजी आई है। यह 2026 में 51 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इस कंपनी के शेयर पर डिविडेंड कमाने के लिए आपको आज ही इसके शेयर में निवेश करना होगा।

LICHF के शेयरों से भी डिविडेंड कमाने का यह बड़ा मौका

LIC Housing Finance (LICHF) ने भी प्रति शेयर 10 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। इसकी रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त है। इसका मतलब है कि प्रति शेयर 10 रुपये डिवलिडेंड कमाने के लिए आपको इस शेयर में आज ही निवेश करना होगा। यह देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी LIC की हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है। यह घर खरीदने के लिए लोन देती है। LICHF का शेयर 20 अगस्त को 2.09 फीसदी चढ़कर 508 रुपये पर चल रहा था। बीते एक साल में यह शेयर 12 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

हिताची एनर्जी प्रत्येक शेयर पर 8 रुपये का डिविडेंड देगी

Hitachi Energy ने प्रति शेयर 8 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। अगर आप इस डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं तो आज ही आपको इस शेयर में निवेश करना होगा। हिताची एनर्जी का शेयर 20 अगस्त को 0.67 फीसदी गिरकर 33,575 रुपये पर चल रहा था। हालांकि, बीते एक साल में इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस दौरान यह शेयर करीब 68 फीसदी उछला है।

यह भी पढ़ें: दिग्गज इनवेस्टर विजय केडिया के 20 लाख शेयर खरीदते ही रॉकेट बने इस कंपनी के स्टॉक

ये कंपनियां भी दे रही हैं शेयरों पर अट्रैक्टिव डिविडेंड 

पतंजिल फूड्स, जिंदल स्टेनलेस, जिंदल स्टील, GE Vernova T&D India, Veljan Denison, KSE, Mayur Uniquoters, Savita Oil Technologies, Patels Airtemp, Deep Industries के शेयरों पर भी डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त है। इसका मतलब है कि इन शेयरों से डिविडेंड इनकम के लिए आज ही इनमें निवेश करना पड़ेगा।

Behari Lal Engineering Share: कुछ ही घंटों में निवेशकों का पैसा करीब दोगुना, क्या आप निवेश का मौका चूक गए?

Behari Lal Engineering Share: बिहारी लाल इंजीनियरिंग के शेयरों ने 19 अगस्त को कमाल कर दिया। कुछ ही घंटों में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब दोगुना कर दिया। एनएसई पर कंपनी का शेयर 1:20 बजे 84 फीसदी से ज्यादा उछाल के साथ 526 रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शेयर 19 अगस्त को शेयर बाजारों में लिस्ट हुआ। कंपनी ने निवेशकों को प्रति शेयर 285 रुपये के भाव पर शेयर इश्यू किए थे।

कंपनी ने 285 रुपये पर इश्यू किए थे शेयर

19 अगस्त की सुबह Behari Lal Engineering के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 63 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। कंपनी ने इश्यू में शेयर का प्राइस बैंड 271-285 रुपये तय किया था। इस इश्यू को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 108 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था।

ग्रे मार्केट प्रीमियम से ज्यादा पर शेयरों की लिस्टिंग

बिहारी लाल इंजीनियरिंग एक इंटिग्रेटेड आयरन और स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 2,193.81 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का आईपीओ 302 करोड़ रुपये का था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग अनऑफिशियल मार्केट में शेयर पर चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के मुकाबले काफी ज्यादा प्राइस पर हुआ।

एनएसई और बीएसई दोनों में लिस्ट हुए शेयर 

यह आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। इस इश्यू में कंपनी ने निवेशकों को नए शेयर इश्यू किए थे। ऑफर फॉर सेल के जरिए भी शेयरों की बिक्री हुई थी। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुए। इस कंपनी की शुरुआत 1995 में हुई थी।

निवेशक कुछ मुनाफावसली कर सकते हैं

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में वेल्थ की हेड शिवानी नयाती ने कहा कि जिन निवेशकों को बिहारी लाल इंजीनियरिंग के आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं। ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि के लिए शेयर होल्ड करना चाहते हैं वे 380 रुपये का स्टॉपलॉस लगाकर ऐसा कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Shiprocket Share Price: शेयर ने कुछ ही घंटों में निवेशकों का पैसा डेढ़ गुना किया, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद रॉकेट बने शेयर 

बिहारी लाल इंजीनियरिंग का शेयर लिंस्टिंग के बाद तब रॉकेट बन गया, जब बाजार पर दबाव था। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार छठे दिन गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 0.48 फीसदी यानी 114 अंक गिरकर 24,040 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.50 फीसदी यानी 382 अंक की गिरावट के साथ 76,852 पर चल रहा था।

Anupam Rasayan Q1 Results: अनुपम रसायन का प्रॉफिट 14 फीसदी बढ़कर 39 करोड़, रेवेन्यू 35% बढ़ा

Anupam Rasayan Q1 Results: अनुपम रसायन ने 14 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान रेवेन्यू और प्रॉफिट में साल दर साल आधार पर अच्छी ग्रोथ दिखी। नेट प्रॉफिट 14 फीसदी बढ़कर 38.6 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 34 करोड़ रुपये था। कंपनी के शेयर पर नतीजों का पॉजिटिव असर दिखा।

रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़कर 655 करोड़ रुपये रहा

जून तिमाही में Anupam Rasayan का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 35 फीसदी बढ़कर 655 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की जून तिमाही में यह 585.8 करोड़ रुपये था। EBITDA 31 फीसदी बढ़कर 162.4 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 124.3 करोड़ रुपये था।

कंपनी के एबिड्टा मार्जिन में हल्की गिरावट 

अनुपम रसायन का EBITDA मार्जिन जून तिमाही में 24.8 फीसदी रहा। यह एक साल पहले की समान अवधि में 25.6 फीसदी के एबिड्टा मार्जिन से कम है। कंपनी ने रवि देसाई को चीफ ऑपरेटिंग अफसर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उनका कार्यकाल 14 अगस्त, 2026 से लागू हो गया है।

नतीजों के बाद शेयरों में दिखी तेजी 

14 अगस्त को अनुपम रसायन के शेयरों में तेजी दिखी। 1:15 बजे यह 0.46 फीसदी के उछाल के साथ 1,213.30 रुपये पर चल रहा था। बीते छह महीने में यह शेयर 8 फीसदी से ज्यादा गिरा है। 14 अगस्त को शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.21 फीसदी नीचे चल रहा था, जबकि सेंसेक्स में 0.30 फीसदी कमजोरी थी।

यह भी पढ़ें: Tata Group News: टाटा ग्रुप को दिसंबर अंत तक मिल सकता है एन चंद्रशेखरन का उत्तराधिकारी, समूह के अंदर के एग्जिक्यूटिव पर होगा जोर

बीते एक साल में 4.85 फीसदी चढ़ा शेयर 

Anupam Rasayan लाइफ साइंसेज और दूसरी इंडस्ट्रीज के लिए स्पेशियलिटी केमिकल्स बनाती है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 13,737 करोड़ रुपये है। कंपनी ने 2021 में आईपीओ पेश किया था। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्टेड हैं। बीते एक साल में शेयर 4.85 फीसदी चढ़ा है।

Gland Pharma के शेयर बन सकते हैं रॉकेट, नोमुरा ने दिया ₹3330 का टारगेट प्राइस

ग्लैंड फार्मा का शेयर 12 अगस्त को 1.69 फीसदी गिरकर 2,875 रुपये पर बंद हुआ। लेकिन, यह शेयर एक हफ्ते में करीब 11 फीसदी चढ़ा है। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने इस शेयर को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। इसकी वजह इसके जून तिमाही के अच्छे नतीजे हैं।

इस साल 68 फीसदी चढ़ा शेयर 

Gland Pharma का शेयर इस साल करीब 68 फीसदी चढ़ा है। कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में अच्छा रहा। इसका रेवेन्यू साल दर साल आधार पर इस दौरान 19.6 फीसदी बढ़ा। EBITDA साल दर साल आधार पर 33.1 फीसदी बढ़ा। टैक्स बाद प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 47.1 फीसदी बढ़ा।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

कंपनी के जून तिमाही के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में CDMO सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी रही। Cenexi को छोड़ दिया जाए तो रेवेन्यू में सीडीएमओ की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी रही। साल दर साल आधार पर इसकी ग्रोथ करीब 37 फीसदी रही। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन साल दर साल आधार पर फ्लैट रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन 276 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा।

टेक-ट्रांसफर/सीडीएमओ पार्टनरशिप पर फोकस

नोमुरा ने कहा है कि ग्लैंड फार्मा ने आईपी-आधारित प्रोग्राम की जगह टेक-ट्रांसफर/सीडीएमओ पार्टनरशिप पर फोकस बढ़ाया है। इस मॉडल को कंपनी के इंजेक्टेबल मैन्युफैक्चरिंग कपैबिलिटी, यूरोप में सेनेक्सी की मौजूदगी और कंपनी के स्ट्रॉन्ग रेगुलेटरी और क्वालिटी ट्रैक रिकॉर्ड का सपोर्ट मिलेगा।

मोतीलाल ओसवाल ने भी दी खरीदने की सलाह

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने ग्लैंड फार्मा के शेयर के लिए 3,080 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहा। इसमें अमेरिकी और यूरोपीय यूनियन मार्केट्स में कंपनी की अच्छी सेल्स ग्रोथ का हाथ रहा। हालांकि, दूसरे बाजारों में प्रदर्शन कमजोर रहा। अमेरिकी और यूरोपीय यूनियन मार्केट्स में अच्छे प्रदर्शन में नए प्रोडक्ट लॉन्चेज के साथ ही मौजूदा प्रोडक्ट्स की अच्छी सेल्स ग्रोथ का हाथ है।

यह भी पढ़ें: वंदे भारत ट्रेनों के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाएगी ₹1350 करोड़ का IPO

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव

12 अगस्त को शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.15 फीसदी यानी 35 अंक गिरकर 24,435 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.24 फीसदी यानी 187 अंक गिरकर 77,966 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.77 फीसदी की तेजी दिखी। निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी हरे निशान में बंद हुआ।