FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बीच पैसा कहां लगाएं? समझिए FD और बॉन्ड में कौन है बेहतर

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेशक दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बॉन्ड शामिल हैं। दोनों में पैसा लगाकर रिटर्न कमाया जा सकता है। हालांकि, दोनों के फायदे और जोखिम अलग-अलग हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD और बॉन्ड में से किसी एक को चुनने से पहले अपनी जरूरत समझनी चाहिए। आपको पैसा कब चाहिए, कितना जोखिम उठा सकते हैं और निवेश का लक्ष्य क्या है, इन बातों से फैसला करना आसान होगा।

सितंबर में Nifty 50 में 6.06% की गिरावट रही। दूसरी ओर, बाजार में गिरावट के बीच RBI ने भी रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इसके बाद FD और बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों पर निवेशकों का फोकस और भी ज्यादा बढ़ा है।

FD और बॉन्ड में कहां लगाएं पैसा?

Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन के मुताबिक, FD लंबे समय से निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रही है। इसमें एक तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है। बदले में तय शर्तों के मुताबिक ब्याज मिलता है। दूसरी ओर, बॉन्ड के जरिए निवेशक फिक्स्ड इनकम में निवेश के नए मौके तलाश सकते हैं। इनमें बेहतर रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी समझना जरूरी है।

सौरभ जैन का कहना है कि FD और बॉन्ड एक जैसे नहीं हैं। इनमें से कौन-सा विकल्प बेहतर है, यह निवेशक के लक्ष्य, निवेश की अवधि और पैसे की जरूरत पर निर्भर करता है। फिलहाल, कॉरपोरेट बॉन्ड में जोखिम के आधार पर करीब 11-15% तक रिटर्न मिल रहा है। वहीं, FD पर ब्याज दरें करीब 6-8% के दायरे में हैं।

अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखना है, तो FD काम आ सकती है। इसमें निवेश की अवधि और ब्याज पहले से पता रहता है। वहीं, बॉन्ड उन लोगों के लिए विकल्प हो सकते हैं, जो अपने फिक्स्ड इनकम निवेश में विविधता चाहते हैं।

सरकारी सिक्योरिटीज में क्या देखें?

Jiraaf के को-फाउंडर सौरव घोष का कहना है कि बॉन्ड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि पैसा डूबने या कीमत घटने का कितना जोखिम है। सरकारी सिक्योरिटीज को सरकार की गारंटी मिलती है। इसलिए इनमें क्रेडिट रिस्क कम होता है। दूसरी ओर, कॉरपोरेट बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन इनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ा जोखिम भी रहता है।

सौरव घोष के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज में भी ब्याज दरें बदलने पर कीमत घट-बढ़ सकती है। लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचता है, तो उसे नुकसान भी हो सकता है।

क्या कॉरपोरेट बॉन्ड बेहतर रहेगा?

सौरव घोष के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने से पहले कंपनी की कमाई, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति देखनी चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि कंपनी समय पर ब्याज और मूल रकम चुका पाएगी या नहीं। इसके अलावा, बॉन्ड के बदले मिलने वाली सुरक्षा की जानकारी भी जांचनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग से कंपनी की स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ रेटिंग देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

सौरभ जैन भी निवेशकों को बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट रेटिंग और लिक्विडिटी जांचने की सलाह देते हैं। साथ ही, यह देखना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर बॉन्ड को कितनी आसानी से बेचा जा सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से उसकी कीमत पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना भी जरूरी है।

FD और बॉन्ड में से किसे चुनें?

इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा चाहिए, तो समय से पहले निकासी की सुविधा वाली FD उपयोगी हो सकती है। हालांकि, FD समय से पहले बंद करने पर जुर्माना लग सकता है या ब्याज कम मिल सकता है। इसलिए बैंक की शर्तें पहले पढ़ लें।

सौरव घोष के मुताबिक, जिस पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है, उसे तय अवधि वाले बॉन्ड में लगाया जा सकता है। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज का समय अपने नियमित खर्चों के हिसाब से चुना जा सकता है।

उनका कहना है कि निवेश करने से पहले टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न जरूर देखना चागिए। इसके अलावा, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी, मैच्योरिटी और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा की तुलना करें। सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर फैसला न लेने से परेशानी हो सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SBI Schemes: जीरो रिस्क के साथ FD से बेहतर रिटर्न! गिरते मार्केट के बीच SBI की ये स्कीम्स कराएंगी बढ़िया मुनाफा

SBI Mutual Fund Schemes: शेयर बाजार में जब गिरावट या मंदी का दौर चल रहा होता है, तब नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि ऐसे समय में क्या करें? इस मौके का फायदा उठाकर आने वाले 1 से 2 सालों में अपना पैसा सुरक्षित तरीके से कैसे बढ़ाया जाए। अक्सर निवेशक गिरावट देखकर पैनिक में आ जाते हैं या फिर जल्दबाजी में बड़े रिटर्न के लालच में स्मॉलकैप जैसे जोखिम भरे फंड्स में एकमुश्त पैसा लगा बैठते हैं।

हालांकि, बाजार के दिग्गज और पोर्टफोलियो मैनेजर्स इस रणनीति से सख्त बचने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब मार्केट में करेक्शन चल रहा हो, तो 3 साल से कम (1-2 साल) की कम अवधि के लिए स्मॉलकैप फंड्स में बड़ा दांव लगाना खतरनाक हो सकता है।

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पोर्टफोलियो रणनीतिकार बताते हैं कि, ‘बाजार की अनिश्चितता के दौर में कम अवधि जैसे 1-2 साल के लिए केवल ज्यादा रिटर्न तलाशने से कहीं ज्यादा जरूरी ‘कैपिटल प्रोटेक्शन’ होता है। ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन या हाइब्रिड फंड्स के जरिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ही वेल्थ प्रोटेक्शन और ग्रोथ का सबसे समझदारी भरा फॉर्मूला है।’

1 से 2 साल के नजरिए के लिए SBI Mutual Fund की 3 सबसे मुफीद स्कीम्स

अगर आपका नजरिया केवल अगले 12 से 24 महीनों का है और आप बाजार की रिकवरी का फायदा भी उठाना चाहते हैं, तो SBI की ये स्कीम्स सबसे बढ़िया साबित हो सकती हैं:

1. SBI Multi Asset Allocation Fund (जोखिम: कम से मध्यम)

यह फंड आपकी पूंजी को सिर्फ शेयर बाजार के भरोसे नहीं छोड़ता। यह पैसे को मुख्य रूप से इक्विटी, डेट (बॉन्ड/एफडी) और गोल्ड/सिल्वर में बांटकर निवेश करता है।

1-2 साल के लिए क्यों बेस्ट? इतिहास गवाह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट या सुस्ती होती है, तब सोना और डेट एसेट्स पोर्टफोलियो को मजबूती देते हैं। 1-2 साल की अवधि में यह फंड बाजार की गिरावट के झटकों से पूरी सुरक्षा देते हुए आपको 10% से 12% तक का स्थिर और संतुलित रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

2. SBI Equity Hybrid Fund (जोखिम: मध्यम)

यह एक कंजर्वेटिव हाइब्रिड मॉडल पर काम करता है, जहां कुल फंड का लगभग 65% से 80% हिस्सा इक्विटी में और बाकी 20% से 35% हिस्सा डेट प्रतिभूतियों (G-Secs, बॉन्ड्स) में लगाया जाता है।

बाजार के निचले स्तर पर होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका इक्विटी पोर्शन सस्ते वैल्युएशन पर मजबूत शेयर खरीद लेता है। जब अगले 1-2 साल में मार्केट रिकवर करेगा, तो इक्विटी हिस्सा तेजी से रिटर्न बढ़ाएगा और डेट हिस्सा गिरावट के समय पोर्टफोलियो को संभाल कर रखेगा।

3. SBI Arbitrage Opportunities Fund (जोखिम: बेहद कम / एफडी जैसा सुरक्षित)

यह फंड शेयर बाजार की तेजी या मंदी पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहता। यह कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर जोखिम-रहित रिटर्न निकालता है।

अगर आपका मुख्य लक्ष्य जीरो-रिस्क है और आप बैंक एफडी (FD) से बेहतर और टैक्स-इफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, तो यह फंड सबसे सुरक्षित जरिया है। 1 से 2 साल की अवधि में इसमें पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है।

अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो ‘STP’ रूट से बनाएं रणनीति

अगर आप बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर 1-2 साल में आने वाली तेजी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय STP का तरीका अपनाएं। सबसे पहले अपना पूरा पैसा SBI Arbitrage Fund या SBI Liquid Fund में एकमुश्त जमा करें। वहां से हर महीने एक निश्चित राशि (STP के जरिए) SBI Flexicap Fund या SBI Bluechip Fund में ट्रांसफर होने दें। इससे अगले 12 से 18 महीनों में आपको बाजार की हर गिरावट में ‘कॉस्ट एवरेजिंग’ का बड़ा फायदा मिलेगा।

इन स्कीम्स में 1-2 साल के लिए पैसा लगाने से बचें!

SBI Small Cap Fund: स्मॉलकैप कंपनियों में गिरावट के समय बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। इनमें रिकवरी आने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।

SBI Contra Fund & SBI Focused Equity Fund: ये फंड्स खास रणनीतियों पर काम करते हैं और इन्हें अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए कम से कम 5 से 7 साल का लंबा समय चाहिए होता है।

कुल मिलाकर 1 से 2 साल के शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म के लिए SBI Multi Asset Allocation Fund या STP के जरिए SBI Flexicap Fund सबसे स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प साबित होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजार में डूबे सात लाख करोड़ रु

मुंबई। सोमवार को कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में आम निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ। कारोबार बंद होने तक निवेशकों के सात लाख करोड़ रुपए डूब गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 1,124 अंक गिरा। बीएसई में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट हुई है। शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगभग दो साल से चल रहा है। सितंबर 2024 में बीएसई का सूचकांक 85 हजार से ऊपर था, जो अब 72 हजार पर आ गया है। यानी दो साल में 13 हजार अंकों की गिरावट हुई है।

बहरहाल, सोमवार को सूचकांक 1,124 अंक, यानी 1.52 फीसदी गिरावट के साथ 72,772 पर बंद हुआ। निफ्टी में 360 अंक, यानी 1.56 फीसदी की गिरावट रही, ये 22,780 पर बंद हुआ। सोमवार को बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आई। माना जा रहा है कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से जंग रोकने से इनकार के कारण आई। सोमवार की गिरावट से निवेशकों की की संपत्ति सात लाख करोड़ से ज्यादा घट गई। शुक्रवार को बाजार बंद होते समय बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की कुल बाजार पूंजी 482 लाख करोड़ के करीब था, जो सोमवार को घट कर 475 लाख करोड़ रह गई।

जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान में जल्दी समझौता होने के आसार नहीं दिख रहे हैं, इससे तनाव बना हुआ हैं। उधर रूस और यूक्रेन के बीच तनाव भी बढ़ा है। होर्मुज की खाड़ी भी बंद है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर भी बाजार पर दिख रहा है। अगर कच्चे तेल की महंगाई बनी रहती है तो भारत के शेयर बाजार पर भी इसका दबाव दिखाई देगा।

Maruti सहित इन 5 स्टॉक्स की कीमतें 52 हफ्ते के लो पर, क्या यह निवेश का बड़ा मौका है?

शेयर बाजार में गिरावट की मार कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर पड़ी है। इनमें मारुति सुजुकी जैसी कंपनी शामिल हैं। इन शेयरों की कीमतें 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यह उन निवेशकों के लिए निवेश का बड़ा मौका है, जो लंबे समय से इन दिग्गज शेयरों में निवेश के मौके ढूंढ रहे थे।

मारुति का शेयर इस साल 28% गिरा है

Maruti Suzuki का शेयर 25 सितंबर को 0.68 फीसदी चढ़कर 12,071 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यानी 2026 में यह शेयर करीब 28 फीसदी गिर चुका है। मारुति कार और एसयूवी बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका मार्केट शेयर 50 फीसदी से थोड़ा ही कम है। इस शेयर ने निवेशकों को लंबी अवधि में काफी अच्छा रिटर्न दिया है।

टाटा समूह की कंपनी का शेयर भी फिसला

Tata Consumer Products का शेयर 25 सितंबर को 0.64 फीसदी गिरकर बंद हुआ। यह शेयर इस साल यानी 2026 में अब तक 17 फीसदी क्रैश कर चुका है। इससे इसकी वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है। टाटा समूह की यह कंपनी नमक सहित रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई चीजें बनाती है। इसका ब्रांड भी काफी स्ट्रॉन्ग है।

दिग्गज बिस्कुट कंपनी का शेयर भी टूटा

Britannia Industries का शेयर 25 सितंबर को 0.61 फीसदी चढ़कर बंद हुआ। यह शेयर इस साल यानी 2026 में अब तक 18 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। यह बिस्कुट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। इसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा है। इसका मार्केट शेयर भी जबर्दस्त है। इसका ब्रांड भी काफी मजबूत है।

बेयर क्रॉपसाइंस का शेयर भी 18 फीसदी गिरा

बेयर क्रॉपसाइंस का शेयर 25 सितंबर को 0.70 फीसदी गिरकर 3,710 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल 18 फीसदी से ज्यादा गिरा है। यह कंपनी हर्बिसाइड्स, पेस्टिसाइड्स और फंगिसाइड्स जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है, जिनका इस्तेमाल फसलों को कीट के हमलों को बचाने के लिए होता है। इस अलावा यह हाई क्वालिटी के बीज भी बनाती है।

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यह रेलवे स्टॉक इस साल 33 फीसदी लुढ़का

Jupiter wagons का शेयर 25 सितंबर को 0.69 फीसदी गिरकर 226.50 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर 2026 में अब तक करीब 33 फीसदी गिरा है। पिछले कुछ समय से रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा है। हालांकि, बीते चार साल में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब चार गुना किया है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SIP में नुकसान हो रहा है तो क्या बंद कर दें? म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट ने दी ये खास सलाह

Mutual Fund SIP Investment Rules: शेयर बाजार में गिरावट आते ही म्यूचुअल फंड निवेशक अक्सर घबरा जाते हैं। खासकर जब SIP का रिटर्न 3 से 5 साल तक निगेटिव या बेहद मामूली दिखता है, तो मन में पहला सवाल यही आता है कि, क्या फंड में कोई खराबी आ गई है या यह सिर्फ बाजार की सुस्ती है?

म्यूचुअल फंड में शेयर, सोना और एफडी के जरिए आखिर निवेशक संपत्ति क्यों बनाते हैं और इस सफर में किन गलतियों से बचना चाहिए? Moneycontrol के साथ खास बातचीत में DSP म्यूचुअल फंड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट साहिल कपूर ने एसआईपी, पोर्टफोलियो ओवरलैप, फंड मैनेजर के बदलने और फंड से निकलने के सही समय पर खुलकर बात की है।

3-5 साल तक SIP का रिटर्न खराब रहे, तो क्या फंड बेकार है?

साहिल कपूर के मुताबिक, सिर्फ कुछ सालों का खराब रिटर्न इस बात का सबूत नहीं है कि फंड खराब है। सबसे पहले आपको ‘बाजार की सुस्ती’ और ‘फंड की खराबी’ में फर्क समझना होगा।

DSP के एक ऐतिहासिक अध्ययन में पाया गया कि 10 साल की SIP चलाने वाले 95% निवेशकों को शुरुआती 5 सालों में कभी न कभी बुरे दौर का सामना करना पड़ा। वहीं 81% एसआईपी का रिटर्न किसी न किसी मोड़ पर निगेटिव भी हुआ। लेकिन राहत की बात यह है कि पूरे 10 साल का समय पूरा होने पर 99% एसआईपी ने डेट फंड्स (FDs) को पछाड़कर शानदार रिटर्न दिया।

खुद से ये सवाल पूछें कि क्या फंड अपने बेंचमार्क से लगातार पिछड़ रहा है? क्या फंड मैनेजर या निवेश का तरीका बदल गया है? अगर फंड की रणनीति सही है और सुस्ती केवल बाजार के चक्र की वजह से है, तो धैर्य बनाए रखना ही समझदारी है।

पैसों की तंगी हो तो क्या करें? SIP रोकें या पैसा निकालें

अगर अचानक आपकी आमदनी कम हो जाए या पैसों की जरूरत पड़े, तो साहिल कपूर का कहना है कि पहला मकसद वित्तीय रूप से सुरक्षित रहना है, न कि हर हाल में एसआईपी जारी रखना।

पहले से जमा पैसों को निकालने से कंपाउंडिंग का चक्र टूट जाता है। इसलिए पैसा निकालने के बजाय नई एसआईपी को कुछ समय के लिए रोकना ज्यादा बेहतर विकल्प है। अपने लॉन्ग-टर्म इक्विटी पोर्टफोलियो को इमरजेंसी के भरोसे न छोड़ें। हालांकि, अगर सच में पैसों की सख्त जरूरत है, तो पोर्टफोलियो आपके काम आने के लिए ही बना है।

हाल में तगड़ा रिटर्न देने वाले फंड्स में तुरंत पैसा लगाना सही है?

किसी फंड ने पिछले 1-2 सालों में 100% या 200% का रिटर्न दिया है, तो आंख मूंदकर उसमें पैसा न लगाएं। अमेरिका के इस फंड ने 1998 में 196% का रिटर्न दिया, जिसे देखकर 1999 में निवेशकों ने 731 मिलियन डॉलर उसमें झोंक दिए। नतीजा? 1998 से 2003 के बीच फंड ने तो 8.3% सालाना रिटर्न दिया, लेकिन देरी से घुसे आम निवेशकों को औसतन -11.9% का नुकसान उठाना पड़ा।

रिटर्न कहां से आया है कंपनी की कमाई से या सिर्फ बाजार की तेजी से? साथ ही हमेशा वैल्यूएशन देखकर ही एंट्री लें।

फ्लेक्सीकैप फंड के साथ दूसरे फंड लेना कितना सही?

अगर आपके पास पहले से फ्लेक्सीकैप फंड है, तो नया फंड लेने से पहले सावधान रहें। DSP के अध्ययन के अनुसार, एक औसत फ्लेक्सीकैप फंड का पोर्टफोलियो:

  • लार्जकैप फंड से: 63.8% मैच करता है।
  • लार्ज एंड मिडकैप से: 71.5% मैच करता है।
  • बैलेंस्ड एडवांटेज से: 75.3% मैच करता है।

यानी नया फंड खरीदने पर आपको सिर्फ 25 से 36% ही नए शेयर मिलते हैं। अलग नाम के फंड खरीदने के बजाय ऐसा फंड चुनें जो सच में आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाए।

फंड मैनेजर बदल जाए तो किस ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करें?

अध्ययन के मुताबिक, अलग-अलग कैटेगरी में मौजूदा फंड मैनेजर्स का औसत कार्यकाल अभी भी 3 साल से कम है। फंड का 10 साल का इतिहास आपको म्यूचुअल फंड हाउस और उसकी प्रक्रिया के बारे में बताता है, मौजूदा मैनेजर के बारे में नहीं। नए मैनेजर के आने के बाद पोर्टफोलियो में क्या बदलाव हुए और उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है, इस पर नजर रखें।

म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने का सही समय क्या है?

किसी फंड में 1 साल का खराब प्रदर्शन उसे बेचने की वजह नहीं होना चाहिए। आपको फंड से तब बाहर निकलना चाहिए जब:

  • फंड का मूल मकसद या निवेश का तरीका बदल जाए।
  • कोई प्रमुख फंड मैनेजर चला जाए जिस पर पूरी रणनीति टिकी थी।
  • फंड लगातार खराब फैसलों की वजह से पिछड़ रहा हो, न कि बाजार के चक्र की वजह से।
  • आपके पोर्टफोलियो में एक ही तरह के शेयरों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Fall: सेंसेक्स 121 अंक गिरकर बंद, निफ्टी 23400 के नीचे; निवेशकों ने गंवाए ₹3.5 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजारों में 11 सितंबर को गिरावट रही। कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 120.83 अंक लुढ़ककर 74,781.76 पर और निफ्टी 79.70 अंक टूटकर 23,398.10 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। दिन में सेंसेक्स पिछले बंद भाव से 742.43 अंक तक लुढ़ककर 74,160.16 के लो तक गया। निफ्टी पिछली क्लोजिंग से 246.4 अंकों की गिरावट के साथ 23,231.40 के लो तक गया। लेकिन फिर बाजार में हल्की रिकवरी हुई।

बीच में सेंसेक्स हरे निशान में भी आया था। सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 757 अंक तक उछलकर 74,917.15 के हाई तक गया था। इसी तरह निफ्टी दिन के लो से 216.7 अंक तक चढ़कर 23,448.10 के हाई तक गया था।

गुरुवार, 10 सितंबर को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,85,06,903.699 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,81,55,869.62 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 3,51,034.079 करोड़ रुपये की कमी।

एक दिन पहले कैसा रहा था बाजार

गुरुवार को 3 दिन बाद शेयर बाजार में तेजी लौटी थी। सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान इसने 74,910.96 का हाई और 74,598.47 का लो देखा। इसी तरह निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर बंद हुआ था।

रुपया 5 पैसे टूटा

शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 5 पैसे कमजोर होकर 95.57 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा। रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार, भारतीय रिजर्व बैंक का सक्रिय हस्तक्षेप और मजबूत घरेलू वृद्धि देश की करेंसी को सहारा दे रहे हैं। लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा कच्चा तेल देश की आयात लागत पर भारी दबाव डाल रहे हैं। रुपया गुरुवार को 44 पैसे टूटकर 95.52 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

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वैश्विक बाजारों की चाल

गुरुवार को अमेरिकी शेयरों में लगातार चौथे सेशन में गिरावट रही थी। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 316.56 अंक या 0.6% गिरकर 52,064.10 पर बंद हुआ। बेंचमार्क S&P 500 में 44.66 अंक या 0.58% की गिरावट आई और यह 7,591.70 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट इंडेक्स 171.62 अंक या 0.65% गिरकर 26,081.73 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण अमेरिकी बाजारों में गिरावट रही थी। शुक्रवार को निक्केई 225, कॉस्पी, जकार्ता कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट समेत सभी एशियाई बाजारों में गिरावट है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: एक दिन की तेजी के बाद बाजार फिर लाल, सेंसेक्स 742 अंक तक फिसला; निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ साफ

शेयर बाजार में शुक्रवार, 11 सितंबर को सुबह के कारोबार में तेज गिरावट है। सेंसेक्स खुलने के कुछ ही पलों के अंदर 742 अंक तक लुढ़का। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। सेंसेक्स लाल निशान में खुलने के बाद पिछले बंद भाव से 742.43 अंक तक टूटकर 74,160.16 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट में खुला और फिर पिछली क्लोजिंग से 246.4 अंक तक फिसलकर 23,231.40 के लो तक गया।

10 सितंबर को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,85,06,903.699 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ पलों के अंदर यह 4,78,01,631.98 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 7,05,271.719 करोड़ रुपये की कमी।

एक दिन पहले कैसा रहा था बाजार

गुरुवार को 3 दिन बाद शेयर बाजार में तेजी लौटी थी। सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान इसने 74,910.96 का हाई और 74,598.47 का लो देखा। इसी तरह निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर बंद हुआ था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Rise: 4 दिन बाद बाजार ग्रीन, जन्माष्टमी पर सेंसेक्स 362 अंक चढ़ा; फिर भी निवेशकों के ₹40894 करोड़ साफ

शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी पर टूट गया। 4 दिन गिरावट में बंद होने के बाद 4 सितंबर को बाजार ने हरे निशान में क्लोजिंग की। सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ। लेकिन इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 40894 करोड़ रुपये घट गया।

3 सितंबर को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,88,71,693.344 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,88,30,799.53 करोड़ रुपये रह गया। यानि कि 40,893.814 करोड़ रुपये की कमी। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 730 अंक तक चढ़कर 76,883.14 के हाई तक गया। निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 132 अंकों की बढ़त के साथ 24,005.75 के हाई तक गया।

मार्केट बंद होने पर NSE पर SBI लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, टाटा स्टील, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ट्रेंट टॉप गेनर रहे। वहीं HCL टेक्नोलॉजीज, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट टॉप लूजर रहे।

रुपया और मजबूत

4 सितंबर को अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया 2 पैसे बढ़कर 94.49 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे की मजबूती के साथ 94.51 पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा जमा में उम्मीद से काफी अधिक राशि जुटने से देश के भुगतान संतुलन की स्थिति में सुधार होने से रुपये को सपोर्ट मिला। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि 31 अगस्त तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) या FCNR(B) जमा के तौर पर देश में 127.226 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आया।

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एक दिन पहले कैसा रहा था बाजार

3 सितंबर को शेयर बाजार में पहले तेजी और बाद में गिरावट दिखी थी। बाजार लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद हुआ था। सेंसेक्स 417.49 अंक टूटकर 76,152.86 पर और निफ्टी 41 अंक फिसलकर 23,873.45 पर बंद हुआ। इससे पहले दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 354.13 अंक तक उछलकर 76,924.48 के हाई तक गया था। निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से करीब 111 अंकों की बढ़त के साथ 24,025.40 के हाई तक गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

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Vedanta Group कंपनियों के शेयरों को लगे पंख, वेदांता ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा 7% उछला

वेदांता ग्रुप की कंपनियों के लिए बुधवार यानी 26 अगस्त का दिन खास रहा। ग्रुप की करीब सभी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद ये शेयर अच्छी तेजी के साथ बंद हुए। इससे एक दिन में समूह की कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 18,120 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

Vedanta Group की प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक दिन में 5.66 फीसदी बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। सबसे ज्यादा 7.27 फीसदी का उछाल वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखा। इससे इसका भाव 41.78 रुपये पर पहुंच गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 20 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की सलाह

Vedanta Aluminium Metal के शेयरों में 3.33 फीसदी की तेजी आई। इससे इसका भाव 462.75 रुपये पर क्लोज हुआ। इस शेयर में तेजी की वजह ब्रोकरेज फर्म मोतोलाल ओसवाल की रिपोर्ट है। उसने शेयर पर ‘बाय’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 540 रुपये का टारेगट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि आगे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने के आसार हैं। यह शेयर बीते एक महीने में करीब 6 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता आयरन के शेयरों में करीब 5 फीसदी उछाल

वेदांता ऑयरन एंड स्टील के शेयर में 4.98 फीसदी उछाल आया। इससे इसका भाव 38.78 रुपये पर क्लोज हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 28 फीसदी उछला है। वेदांता का शेयर 4.36 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर बीते एक महीने में 8.45 फीसदी चढ़ा है। ग्रुप की मार्केट वैल्यू बढ़ाने में सबसे ज्यादा 10,731 करोड़ रुपये का योगदान वेदांता एल्युमीनियम का रहा। वेदांता लिमिटेड का 4,891 करोड़ रुपये का योगदान रहा।

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हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस 750 करोड़ रुपये

हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में भी तेजी दिखी। यह शेयर 6.29 फीसदी चढ़कर 629.85 रुपये पर बंद हुआ। तेजी की वजह सरकार की तरफ से आया एक स्पष्टीकरण है। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल उसका हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचने का प्लान नहीं है। इस, कंपनी में सरकार की 27.92 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता की 60.71 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच, जेफरीज ने हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस बढ़ाया है। उसने टारगेट प्राइस बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया है।

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