FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बीच पैसा कहां लगाएं? समझिए FD और बॉन्ड में कौन है बेहतर

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेशक दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बॉन्ड शामिल हैं। दोनों में पैसा लगाकर रिटर्न कमाया जा सकता है। हालांकि, दोनों के फायदे और जोखिम अलग-अलग हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD और बॉन्ड में से किसी एक को चुनने से पहले अपनी जरूरत समझनी चाहिए। आपको पैसा कब चाहिए, कितना जोखिम उठा सकते हैं और निवेश का लक्ष्य क्या है, इन बातों से फैसला करना आसान होगा।

सितंबर में Nifty 50 में 6.06% की गिरावट रही। दूसरी ओर, बाजार में गिरावट के बीच RBI ने भी रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इसके बाद FD और बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों पर निवेशकों का फोकस और भी ज्यादा बढ़ा है।

FD और बॉन्ड में कहां लगाएं पैसा?

Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन के मुताबिक, FD लंबे समय से निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रही है। इसमें एक तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है। बदले में तय शर्तों के मुताबिक ब्याज मिलता है। दूसरी ओर, बॉन्ड के जरिए निवेशक फिक्स्ड इनकम में निवेश के नए मौके तलाश सकते हैं। इनमें बेहतर रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी समझना जरूरी है।

सौरभ जैन का कहना है कि FD और बॉन्ड एक जैसे नहीं हैं। इनमें से कौन-सा विकल्प बेहतर है, यह निवेशक के लक्ष्य, निवेश की अवधि और पैसे की जरूरत पर निर्भर करता है। फिलहाल, कॉरपोरेट बॉन्ड में जोखिम के आधार पर करीब 11-15% तक रिटर्न मिल रहा है। वहीं, FD पर ब्याज दरें करीब 6-8% के दायरे में हैं।

अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखना है, तो FD काम आ सकती है। इसमें निवेश की अवधि और ब्याज पहले से पता रहता है। वहीं, बॉन्ड उन लोगों के लिए विकल्प हो सकते हैं, जो अपने फिक्स्ड इनकम निवेश में विविधता चाहते हैं।

सरकारी सिक्योरिटीज में क्या देखें?

Jiraaf के को-फाउंडर सौरव घोष का कहना है कि बॉन्ड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि पैसा डूबने या कीमत घटने का कितना जोखिम है। सरकारी सिक्योरिटीज को सरकार की गारंटी मिलती है। इसलिए इनमें क्रेडिट रिस्क कम होता है। दूसरी ओर, कॉरपोरेट बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन इनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ा जोखिम भी रहता है।

सौरव घोष के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज में भी ब्याज दरें बदलने पर कीमत घट-बढ़ सकती है। लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचता है, तो उसे नुकसान भी हो सकता है।

क्या कॉरपोरेट बॉन्ड बेहतर रहेगा?

सौरव घोष के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने से पहले कंपनी की कमाई, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति देखनी चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि कंपनी समय पर ब्याज और मूल रकम चुका पाएगी या नहीं। इसके अलावा, बॉन्ड के बदले मिलने वाली सुरक्षा की जानकारी भी जांचनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग से कंपनी की स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ रेटिंग देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

सौरभ जैन भी निवेशकों को बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट रेटिंग और लिक्विडिटी जांचने की सलाह देते हैं। साथ ही, यह देखना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर बॉन्ड को कितनी आसानी से बेचा जा सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से उसकी कीमत पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना भी जरूरी है।

FD और बॉन्ड में से किसे चुनें?

इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा चाहिए, तो समय से पहले निकासी की सुविधा वाली FD उपयोगी हो सकती है। हालांकि, FD समय से पहले बंद करने पर जुर्माना लग सकता है या ब्याज कम मिल सकता है। इसलिए बैंक की शर्तें पहले पढ़ लें।

सौरव घोष के मुताबिक, जिस पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है, उसे तय अवधि वाले बॉन्ड में लगाया जा सकता है। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज का समय अपने नियमित खर्चों के हिसाब से चुना जा सकता है।

उनका कहना है कि निवेश करने से पहले टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न जरूर देखना चागिए। इसके अलावा, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी, मैच्योरिटी और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा की तुलना करें। सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर फैसला न लेने से परेशानी हो सकती है।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Fixed Deposit: इस एनबीएफसी ने एफडी पर बढ़ाया इंटरेस्ट रेट, जानिए कितना है रिवाइज्ड रेट

फिक्स्ड डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट कमाने का बड़ा मौका है। श्रीराम फाइनेंस ने अलग-अलग पीरियड के एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान किया है। नए रेट्स 11 अक्टूबर यानी रविवार से लागू हो जाएंगे। एनबीएफसी ने शुक्रवार को इस बारे में बताया। इससे पहले 7 अक्टूबर को आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाया था।

15 महीने के एफडी पर अब 7.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट 

10 करोड़ रुपये तक का एफडी 12 महीने के लिए करने पर अब सालाना 7 फीसदी इंटरेस्ट रेट मिलेगा। पहले इंटरेस्ट रेट 6.85 फीसदी था। 15 महीने के एफडी पर इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया गया है। हालांकि, यह सिर्फ डिजिटल चैनल से एफडी करने पर मिलेगा।

36 से 60 महीने के एफडी पर 7.85 इंटरेस्ट रेट 

एनबीएफसी ने 18-23 महीने के एफडी का इंटरेस्ट रेट 7.05 फीसदी से बढ़ाकर 7.25 फीसदी कर दिया है। 24-35 महीने के एफडी पर अब 7.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट मिलेगा। पहले इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी था। 36 से 60 महीने के एफडी पर इंटरेस्ट रेट 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 7.85 फीसदी कर दिया गया है।

सीनियर सिटीजंस और महिलाओं को ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी ने कहा है कि सीनियर सिटीजंस को एफडी पर सालाना 0.50 फीसदी का अतिरिक्त इंटरेस्ट रेट मिलेगा। सीनियर सिटीजंस का मतलब 60 साल और इससे ज्यादा उम्र के व्यक्ति से है। इसके अलावा महिला डिपॉजिटर्स को भी अतिरिक्त 0.05 फीसदी का इंटरेस्ट मिलेगा। अपने एफडी को रिन्यू कराने वाले इनवेस्टर्स को अतिरिक्त 0.15 फीसदी इंटरेस्ट मिलेगा।

फिक्स्ड डिपॉजिट को स्टेबल आउटलुक के साथ AAA रेटिंग्स 

श्रीराम फाइनेंस देश की सबसे बड़ी एनबीएफसी में से एक है। इसके फिक्स्ड डिपॉजिट को स्टेबल आउटलुक के साथ AAA रेटिंग्स हासिल है। यह रेटिंग क्रिसिल रेटिंग्स ने दी है। इस रेटिंग को सबसे सुरक्षित माना जाता है। इकरा इंडिया रेटिंग्स और केयर रेटिंग्स ने भी इसके एफडी को सबसे ज्यादा रेटिंग्स दी है।

यह भी पढ़ें: Sukanya Samriddhi Yojana Calculator: मंथली सिर्फ ₹12550 का निवेश 15 साल तक, तैयार हो जाएगा 72 लाख रुपये का फंड

RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद एनबीएफसी बढ़ा रही इंटरेस्ट रेट्स

आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद बैंकों के भी अपने डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद है। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया था। इससे होम लोन और कार लोन महंगे हो जाएंगे। लेकिन, फिक्स्ड डिपिॉजिट पर पहले के मुकाबले ज्यादा इंटरेस्ट मिलेगा।

शेयर बाजारों में बीते 25 सालों की सबसे लंबी गिरावट, लगातार 8वें हफ्ते गिरे बाजार

शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक 1 अक्तूबर को भी गिरकर बंद हुए। विदेशी फंडों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से तेजी का असर भी बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। लगातार 8वां हफ्ता है, जब सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई है। बीते 25 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है। 1 अक्तूबर इस हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन है। 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर बाजार बंद हैं।

ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी फिसला 

Sensex 0.8 फीसदी यानी 570 अंक गिरकर 71,909 पर बंद हुआ। Nifty 0.9 फीसदी यानी 198 अंक गिरकर 22,421 पर क्लोज हुआ। आईटी छोड़कर निफ्टी के सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी गिरा। इसमें बजाज ऑटो में 6 फीसदी गिरावट का बड़ा हाथ रहा। M&M का शेयर भी 2.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

सिर्फ आईटी इंडेक्स में तेजी 

IT Index में 0.9 फीसदी तेजी आई। इसकी वजह अगस्त में अमेरिका में उम्मीद से कम इनफ्लेशन का डेटा है। इससे इस महीने के आखिर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद घटी है। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 3 फीसदी चढ़ा। इसकी वजह यह है कि बैंक ने अनूप कुमार साहा को नया सीईओ नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 3 साल के लिए होगा।

FIIs की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

बाजार में गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का बड़ा हाथ है। 30 सितंबर को लगातार पांचवें सत्र एफआईआई ने बिकवाली की। जियोजित इनवेस्टमार्ट्स के वीके विजय कुमार ने कहा कि बीते दो दिनों में एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इस दौरान उन्होंने कुल 20,128 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। हालांकि, प्राइमरी मार्केट में वे निवेश कर रहे हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़कर 2002 के बाद के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे न सिर्फ अमेरिका में बल्कि दुनियाभर में लोन लेना महंगा होगा। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड्स की यील्ड बढ़कर 5.33 फीसदी पहुंच गई। यह 2007 के बाद के सबसे हाई लेवल पर है। 30 साल की बॉन्ड यील्ड भी 2002 के बाद सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है।

क्रूड ऑयल में तेजी से महंगाई बढ़ने का डर 

क्रूड ऑयल की कीमतों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाने का काम किया है। 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में आग लगी हुई है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का डर बढ़ा है। महंगाई को काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इससे लोन लेना महंगा हो जाएगा।

RBI Repo Rate Hike: आपकी लोन EMI बढ़ सकती है, इकोनॉमिस्ट बोले- अब ब्याज दर बढ़ाएगा RBI

RBI Repo Rate Hike: पिछले कुछ हफ्तों से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में लोन लेना महंगा हो सकता है और पुराने लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है।

RBI कब बढ़ा सकता है ब्याज दर?

Moneycontrol ने 9 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच रायशुमारी कराई। ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान जताया है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अक्टूबर की पॉलिसी समीक्षा में ही पहली 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद फरवरी 2027 में 25 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो जाएगा।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘अगर अगली MPC बैठक तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही हो सकता है।’

महंगा हो सकता है आपका लोन

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि फ्लोटिंग रेट पर चल रहे होम लोन जैसे कर्ज की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

नए होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आप आने वाले महीनों में घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, EMI में कितना बदलाव होगा, यह बैंक की ब्याज दर, आपके बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

महंगाई ने बढ़ाई चिंता

महंगाई भी RBI के लिए चिंता का विषय बन रही है। अगस्त में CPI महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई रही।

अभी महंगाई RBI की 2 से 6 प्रतिशत की तय सीमा में है। लेकिन चिंता यह है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसका असर बाकी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

SBI के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि CPI महंगाई 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में इसके 6 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें निकट भविष्य में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं।

SIP Calculator: ₹3000 की SIP से कितने समय में ₹10 लाख का फंड बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices: ₹10500 सस्ती हुई चांदी, सोना ₹3000 टूटा; जानिए क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

Gold Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। विदेशी बाजारों में डॉलर मजबूत होने के कारण दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया। राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना ₹3,000 टूटकर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी ₹10,500 लुढ़ककर ₹2.35 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना 2% गिरकर ₹1,49,300 प्रति 10 ग्राम रह गया। इससे पहले सोना 27 मार्च को करीब इसी स्तर पर ₹1,47,800 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

चांदी में और बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 4.3% यानी ₹10,500 घटकर ₹2,35,000 प्रति किलो रह गई। यह दो महीने से ज्यादा समय का निचला स्तर है। इससे पहले 3 अप्रैल को चांदी ₹2,37,000 प्रति किलो पर थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

विदेशी बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 2% यानी 70.33 डॉलर टूटकर 4,121.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी 4% से ज्यादा गिरकर 62.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी।

सोना-चांदी क्यों टूट रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका की वजह से सोने-चांदी पर दबाव बना हुआ है। एनालिस्टों का कहना है कि फिलहाल डॉलर की मजबूती बुलियन बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च प्रमुख कायनात चैनवाला के अनुसार, सोमवार को अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की खबरों से सोने को थोड़ी राहत मिली थी। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने फिर से बाजार पर दबाव बना दिया।

फेडरल रिजर्व की चिंता बढ़ा रही दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी निवेशकों को परेशान कर रही है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.15 पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

ट्रेडर्स अब एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे हैं। यही वजह है कि निवेशक सोने और चांदी से दूरी बना रहे हैं।

आगे क्या रह सकता है रुख?

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी का कहना है कि डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर बने रहने से सोने पर दबाव जारी है। साथ ही अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

अब निवेशकों की नजर अगले हफ्ते आने वाले अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल (NFP) और बेरोजगारी के आंकड़ों पर रहेगी। ये आंकड़े डॉलर और सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अब किस ओर जाएंगे दाम

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, निकट भविष्य में सोना ₹1,44,500 से ₹1,48,500 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

वहीं Augmont Bullion की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल चुका है। अब इसका अगला अहम सपोर्ट 4,050-4,100 डॉलर के बीच माना जा रहा है, जो घरेलू बाजार में करीब ₹1.43 लाख से ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के बराबर है।

चांदी भी 65 डॉलर का अहम स्तर तोड़ चुकी है। अब इसका अगला सपोर्ट 60-61 डॉलर प्रति औंस के बीच माना जा रहा है। भारतीय बाजार में यह स्तर करीब ₹2.15 लाख से ₹2.20 लाख प्रति किलो के बराबर बैठता है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।