Home loan EMI : RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, जानें आपके होम लोन पर क्या होगा इसका असर

Home loan EMI: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी की है। जिससे लोन लेना महंगा हो गया है। यह कदम सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत है, क्योंकि सेंट्रल बैंक ग्लोबल और घरेलू जोखिमों के बीच महंगाई के दबाव को कम करना चाहता है।

होम लोन लेने वालों के लिए, रेट में इस बढ़ोतरी का मतलब है कि EMI बढ़ सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जिनका लोन फ्लोटिंग-रेट वाला है और रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है। उम्मीद है कि बैंक रीसेट साइकिल और ट्रांसमिशन टाइमलाइन के आधार पर धीरे-धीरे इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर डालेंगे।

25 bps की बढ़ोतरी का होम लोन EMI पर असर

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टेबल से पता चलता है कि 50 लाख रुपये के होम लोन और 20 साल की अवधि (tenure) के मामले में, ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी से मासिक EMI लगभग 780 रुपये बढ़ सकती है। अगर लोन लेने वाले अवधि को नहीं बदलते हैं, तो लोन की पूरी अवधि के दौरान कुल ब्याज का बोझ लगभग 1.88 लाख रुपये बढ़ जाएगा।

फ्लोटिंग-रेट वाले लोन लेने वालों पर इसका असर तब दिखेगा जब उनके लोन ऊंचे बेंचमार्क पर रीसेट होंगे। कुछ बैंक लोन लेने वालों को EMI के बजाय लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प दे सकते हैं; इससे तुरंत मासिक EMI पर पड़ने वाला असर तो कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ कुल ब्याज का खर्च बढ़ जाता है।

फिक्स्ड-रेट होम लोन वाले ग्राहकों पर कोई तुरंत असर नहीं पड़ेगा, हालांकि इस पॉलिसी के बाद रीफाइनेंसिंग और नए लोन की लागत बढ़ने की संभावना है।

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जानकारों का कहना है कि लोन लेने वालों को इस बात पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए कि बैंक कितनी तेजी से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर डालते हैं। साथ ही, ज़्यादा ब्याज के बोझ को संभालने के लिए उन्हें आंशिक प्री-पेमेंट (समय से पहले कुछ हिस्सा चुकाना), लेंडर बदलना या कम अवधि का लोन लेने जैसे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI आने वाली पॉलिसी समीक्षाओं में और सख्ती का संकेत देता है या ‘ wait-and-watch का रुख अपनाता है।

RBI MPC Meeting Live: 0.25% बढ़ा रेपो रेट, महंगी होगी आपकी EMI! जुलाई के 4.5% से बढ़कर अगस्त में 4.8% पहुंची खुदरा महंगाई

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC Meeting Live: आज होगा रेपो रेट पर बड़ा ऐलान! जानिए होम लोन EMI, FD और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: देश के करोड़ों आम लोगों, होम लोन ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें आज, 7 अक्टूबर सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के ऐलान पर टिकी हुई है। महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच आज केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करने जा रहा है।

वैसे बाजार के अधिकांश विशेषज्ञों और रॉयटर्स के पोल में शामिल 60% से अधिक इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आज रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट वर्तमान 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

होम लोन EMI पर कितना पड़ेगा असर?

अगर आज आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ना तय है:

बढ़ेगी EMI या लोन की अवधि: रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसे बैंक सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आपका ₹50 लाख का होम लोन लंबे समय के लिए चल रहा है, तो 0.25% की बढ़ोतरी से बैंक या तो आपकी मासिक EMI बढ़ा देंगे या लोन की समयावधि को लंबा कर देंगे।

क्या करें उधारकर्ता?:  तुरंत पूरा लोन चुकाने की हड़बड़ी न करें। पहले अपने लोन की मौजूदा ब्याज दर, शेष अवधि, बैंक के स्प्रेड की जांच करें और जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार करें।

पर्सनल और कार लोन भी हो सकते हैं महंगे

होम लोन ही नहीं, बल्कि नए पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट्स की दरें भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। चूंकि पर्सनल लोन की दरें पहले से ही ऊंची होती हैं, इसलिए इस समय नया असुरक्षित कर्ज सोच-समझकर ही लें।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए खुशखबरी

दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा बचत करने वालों को मिलेगा। कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंक नए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए FD पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करेंगे। वैसे आपकी पहले से चल रही फिक्स्ड डिपॉजिट पर पुरानी दर ही लागू रहेगी। फायदा केवल नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू करने पर ही मिलेगा।

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है, क्योंकि ये दरें प्रत्येक बैंक की लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों पर निर्भर करती हैं।

आरबीआई क्यों ले सकता है दरें बढ़ाने का फैसला?

महंगाई: अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है।

कच्चा तेल और रुपया: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।

मजबूत GDP ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और आरबीआई को महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है।

RBI की नई पॉलिसी के पल पल के अपडेट के लिए जुगए रहें मनीकंट्रोल के आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के नए ऐलानों के लिए बने इस स्पेशल लाइव ब्लॉग से।

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI कितनी बढ़ जाएगी? समझिए होम और पर्सनल लोन का पूरा कैलकुलेशन

RBI Repo Rate Hike: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके होम लोन की EMI पर भी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा हो।

मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। अब ब्याज दर 0.50% बढ़कर 9% हो जाती है। ऐसे में आपकी EMI कितनी बढ़ेगी? 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के लोन पर इसका सीधा हिसाब समझिए।

10 लाख रुपये के लोन पर असर

10 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि में EMI करीब ₹8,678 बैठती है। ब्याज दर 9% होने पर यही EMI करीब ₹8,997 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹319 ज्यादा देने होंगे। रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक यही बढ़ी हुई EMI चलती है तो कुल भुगतान पर इसका असर बढ़ जाता है।

20 लाख रुपये का लोन

20 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹17,356 है। ब्याज दर 9% होने पर यह बढ़कर करीब ₹17,995 हो जाएगी। मतलब हर महीने करीब ₹638 का अतिरिक्त बोझ। अगर घर का बजट पहले से EMI के हिसाब से सेट है, तो इतनी बढ़ोतरी भी महीने के खर्च में महसूस होती है।

30 लाख रुपये का लोन

30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹26,035 बनती है। ब्याज दर बढ़कर 9% होने पर EMI करीब ₹26,992 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹957 ज्यादा। बड़े लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी EMI में साफ दिखाई देने लगता है।

40 लाख रुपये के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

40 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹34,713 है। 9% ब्याज होने पर यह करीब ₹35,989 हो जाएगी। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1,276 अतिरिक्त देने होंगे। साल भर में देखें तो EMI का यह अंतर करीब ₹15,300 बैठता है।

50 लाख रुपये के लोन पर असर सबसे ज्यादा

50 लाख रुपये के लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹43,391 है। अगर ब्याज दर 9% हो जाती है तो EMI करीब ₹44,986 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹1,595 ज्यादा। साल भर में यह अतिरिक्त बोझ करीब ₹19,100 हो जाता है।

होम लोन: 8.5% से 9% होने पर EMI का असर

लोन की रकम8.5% पर EMI9% पर EMIहर महीने बढ़ोतरी
सालाना अतिरिक्त बोझ

₹10 लाख₹8,678₹8,997₹319₹3,828
₹20 लाख₹17,356₹17,995₹638₹7,656
₹30 लाख₹26,035₹26,992₹957₹11,484
₹40 लाख₹34,713₹35,989₹1,276₹15,312
₹50 लाख₹43,391₹44,986₹1,595₹19,140

यह कैलकुलेशन 20 साल की लोन अवधि में 8.5% से 9% ब्याज दर होने पर किया गया है। वास्तविक EMI आपके बैंक, लोन की बाकी अवधि और ब्याज रीसेट के नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है।

5 लाख रुपये के पर्सनल लोन पर भी असर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती है। मान लीजिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12% ब्याज पर लिया गया है। इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी।

लेकिन, अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन महंगा होता और ब्याज दर बढ़कर 12.5% हो जाती है तो नए लोन की EMI करीब ₹11,249 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹127 ज्यादा देने होंगे।

रेपो रेट बढ़ने पर EMI ही बढ़ेगी?

होम लोन में यह जरूरी नहीं। ब्याज दर बढ़ने के बाद बैंक और ग्राहकों के पास EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने जैसे विकल्प होते हैं। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

अगर बैंक EMI को ज्यादा नहीं बढ़ाता है, तो लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है। दूसरी तरफ EMI बढ़ाने पर हर महीने जेब से ज्यादा पैसा जाएगा, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

रेपो रेट का असर आपकी जेब पर कैसे ?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब इसमें बदलाव होता है तो बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, रेपो रेट में 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक आपकी ब्याज दर भी बिल्कुल उतनी ही बढ़ा देगा। आपके लोन का बेंचमार्क, बैंक का स्प्रेड और रीसेट नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अगर आपका फ्लोटिंग रेट वाला बड़ा होम लोन चल रहा है, तो RBI की हर रेपो रेट बैठक आपके लिए मायने रखती है। ब्याज दर में छोटा बदलाव भी 15 से 20 साल के लोन में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी

UPI MDR Fees: 15 सितंबर को UPI Steering Committee की बैठक हुई। इसमें ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 40 बेसिस पॉइंट (bps) MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 होगी। यह ₹75000 से ऊपर के हर पेमेंट पर लागू होगी। मतलब कि ₹75000 से अधिक के हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 का MDR फिक्स रहेगा।

ये MDR चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो कमीशन है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट बैंक को देता है।

40 bps MDR का मतलब क्या है?

एक बेसिस पॉइंट यानी 1 प्रतिशत का सौवां हिस्सा। इसलिए 40 bps का मतलब 0.40% है। इसे सीधे उदाहरण से समझिए। ₹100 के पेमेंट पर MDR 40 पैसे होगा। वहीं ₹10,000 के UPI पेमेंट पर यह रकम ₹40 होगी।

हालांकि, यह चार्ज ग्राहक को नहीं देना होगा। MDR का भुगतान मर्चेंट की तरफ से किया जाता है।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं

सरकार की अधिसूचना में साफ किया गया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक कोई चार्ज नहीं लगा सकते।

RuPay से डेबिट कार्ड पेमेंट पर भी कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता। NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया UPI के साथ-साथ घरेलू कार्ड नेटवर्क RuPay को भी चलाता है।

UPI से सालाना ₹16,000 करोड़ तक रेवेन्यू

करीब 40 bps MDR लागू होने पर UPI इकोसिस्टम में सालाना ₹16,000 करोड़ तक का रेवेन्यू पैदा होने का अनुमान है।

UPI पेमेंट में कई पार्टनर शामिल होते हैं। इसलिए MDR से मिलने वाली रकम भी अलग-अलग हिस्सेदारों में बांटी जाएगी। इसमें ग्राहक का बैंक, पैसा पाने वाला बैंक, PSP बैंक और मर्चेंट का पेमेंट एग्रीगेटर शामिल हैं। NPCI को भी हर ट्रांजैक्शन पर स्विचिंग फीस मिलती है।

PhonePe और Google Pay को कैसे फायदा होगा?

PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे UPI ऐप सीधे UPI नेटवर्क से अकेले नहीं जुड़ते। ये बैंकों के साथ पार्टनरशिप करते हैं।

इन पार्टनर बैंकों को PSP बैंक कहा जाता है। UPI नेटवर्क को चलाने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए कार्ड पेमेंट इकोसिस्टम के मुकाबले PSP बैंकों को MDR में ज्यादा हिस्सा मिलने की संभावना है।

कौन से बैंक बड़े PSP हैं?

UPI इकोसिस्टम में कई बैंक PSP के तौर पर काम करते हैं। इनमें Yes Bank, Axis Bank, ICICI Bank, HDFC Bank और SBI बड़े PSP बैंकों में शामिल हैं।

नए MDR सिस्टम से UPI से जुड़े बैंकों और दूसरे इकोसिस्टम पार्टनर्स के लिए कमाई का एक नया जरिया बनेगा। वहीं ग्राहकों के लिए ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं होगा।

RBI Repo Rate Hike: आपकी लोन EMI बढ़ सकती है, इकोनॉमिस्ट बोले- अब ब्याज दर बढ़ाएगा RBI

RBI Repo Rate Hike: आपकी लोन EMI बढ़ सकती है, इकोनॉमिस्ट बोले- अब ब्याज दर बढ़ाएगा RBI

RBI Repo Rate Hike: पिछले कुछ हफ्तों से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में लोन लेना महंगा हो सकता है और पुराने लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है।

RBI कब बढ़ा सकता है ब्याज दर?

Moneycontrol ने 9 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच रायशुमारी कराई। ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान जताया है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अक्टूबर की पॉलिसी समीक्षा में ही पहली 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद फरवरी 2027 में 25 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो जाएगा।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘अगर अगली MPC बैठक तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही हो सकता है।’

महंगा हो सकता है आपका लोन

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि फ्लोटिंग रेट पर चल रहे होम लोन जैसे कर्ज की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

नए होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आप आने वाले महीनों में घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, EMI में कितना बदलाव होगा, यह बैंक की ब्याज दर, आपके बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

महंगाई ने बढ़ाई चिंता

महंगाई भी RBI के लिए चिंता का विषय बन रही है। अगस्त में CPI महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई रही।

अभी महंगाई RBI की 2 से 6 प्रतिशत की तय सीमा में है। लेकिन चिंता यह है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसका असर बाकी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

SBI के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि CPI महंगाई 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में इसके 6 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें निकट भविष्य में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF Withdrawal: इन 5 वजहों के लिए कभी भी निकाल सकते हैं PF से पैसा! जानिए किस काम के लिए कितनी है लिमिट

EPF Partial Withdrawal Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों मेंबर्स को आपात स्थिति या जीवन के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पीएफ खाते से एडवांस पैसे निकालने की सुविधा देता है। मेडिकल इमरजेंसी हो, बच्चों की पढ़ाई, शादी या फिर सपनों का घर खरीदना EPFO ने अब इन सभी जरूरतों के लिए नियम बेहद साफ और पारदर्शी बना दिए हैं।

अगर आप भी अपने पीएफ खाते से पैसे निकालने का प्लान बना रहे हैं, तो जानिए वे कौन सी 5 खास वजहें हैं जिनके लिए आप एडवांस ले सकते हैं, और किस काम के लिए आपको कितनी बार पैसे निकालने की इजाजत मिलती है।

PF Withdrawal इन 5 वजहों से पीएफ से निकाल सकते हैं एडवांस

EPFO की आधिकारिक गाइडलाइंस के मुताबिक, आप इन 5 कारणों के लिए अपने पीएफ खाते से आंशिक निकासी कर सकते हैं:

PF Withdrawal इन 5 वजहों से पीएफ से निकाल सकते हैं एडवांस

किस जरूरत के लिए क्या हैं नियम? समझिए विस्तार से

1. बीमारी के इलाज के लिए: खुद के या परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए पीएफ से पैसा निकालने पर कोई सीमा नहीं तय की गई है। गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी में सदस्य जब चाहे, नियमों के तहत पीएफ एडवांस का दावा कर सकता है।

2. पढ़ाई के खर्च के लिए: खुद की या बच्चों/परिवार के सदस्यों की उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए पीएफ सदस्य अपनी पूरी सर्विस अवधि के दौरान 10 बार तक एडवांस क्लेम कर सकते हैं।

3. शादी के खर्च के लिए: अपनी शादी या बच्चों और भाई-बहन की शादी के खर्चों के लिए पीएफ खाते से पैसा निकाला जा सकता है। यह सुविधा पूरी मेंबरशिप के दौरान अधिकतम 5 बार उपलब्ध है।

4. मकान और प्रॉपर्टी से जुड़ी जरूरतें: घर से जुड़े लगभग सभी कामों को अब एक ही वर्ग में रखा गया है। इसके तहत:

  • नया फ्लैट, बना-बनाया मकान या प्लॉट खरीदना
  • खुद का घर बनवाना
  • होम लोन की बची हुई किश्तें या लोन चुकाना
  • पुराने मकान की मरम्मत या रिनोवेशन कराना

सदस्य अपनी पूरी नौकरी के दौरान घर से जुड़े इन कामों के लिए कुल 5 बार एडवांस ले सकते हैं।

5. विशेष परिस्थितियां: EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) द्वारा अधिसूचित किसी विशेष संकट या आपात स्थिति में सदस्य एक फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) में 2 बार तक पीएफ एडवांस निकाल सकते हैं।

कितने प्रतिशत फंड निकाल सकते हैं?

EPFO की ताजा गाइडलाइंस के मुताबिक, पीएफ खाते से एडवांस निकालने के लिए कर्मचारी का कम से कम 1 साल तक EPFO का सदस्य होना अनिवार्य है। पात्रता शर्तें पूरी होने पर सदस्य अपने पीएफ खाते में जमा कुल बैलेंस (कर्मचारी का हिस्सा + एम्प्लॉयर का हिस्सा + ब्याज) का 75% तक एडवांस निकाल सकते हैं।

Home Loan: ₹1 लाख महीना कमाते हैं? जानिए आपके लिए कितनी होम लोन EMI रहेगी सेफ

इस बात का ध्यान रखें कि पीएफ से लिया गया यह एडवांस आपके रिटायरमेंट फंड का हिस्सा होता है। इसलिए बहुत ज्यादा जरूरत होने पर ही इसका इस्तेमाल करें ताकि आपके बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित न हो।

Home Loan: ₹1 लाख महीना कमाते हैं? जानिए आपके लिए कितनी होम लोन EMI रहेगी सेफ

Home Loan Affordability Rules: अगर आपकी टेक-होम सैलरी ₹1 लाख प्रति माह है, तो अपना सपनों का घर खरीदना काफी हद तक मुमकिन नजर आता है। लेकिन केवल बड़ी सैलरी होना ही इस बात की गारंटी नहीं है कि आप आसानी से होम लोन का बोझ उठा सकते हैं।

अक्सर बैंक आपकी योग्यता देखकर सैलरी के 50% से 55% तक की EMI अप्रूव कर देते हैं, लेकिन क्या उतनी EMI चुकाना आपकी जेब के लिए सुरक्षित है? जवाब है बिल्कुल नहीं!

आइए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स से आसान भाषा में समझते हैं कि ₹1 लाख की सैलरी पर आपको हर महीने कितनी EMI देनी चाहिए, और लोन लेने से पहले आपके पास डाउन पेमेंट व इमरजेंसी फंड के रूप में कितना कैश तैयार होना चाहिए।

1 लाख की सैलरी पर कितनी EMI है सुरक्षित?

बैंकिंग और रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स की मानें तो बैंक भले ही आपको ज्यादा लोन दे दें, लेकिन आपको अपनी मंथली इनकम का 25% से 35% ही EMI में देना चाहिए।फोर्टेशिया रियल्टी के बिजनेस डेवलपमेंट जीएम केशव मंगला के अनुसार, सबसे सही फैसला यह होगा कि आपकी EMI ₹25,000 से ₹30,000 के बीच हो। इससे आपके पास घरेलू खर्च, बचत और इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसा बचेगा। नाइ्वो मनी के फाउंडर हर्ष सोनी के मुताबिक, EMI को अधिकतम ₹35,000 प्रति माह तक रखा जा सकता है।

सैलरी के बंटवारे का सही फॉर्मूला (₹35,000 EMI के आधार पर):

₹35,000: होम लोन EMI

₹43,000: घर के जरूरी और रोजाना के खर्च

₹22,000: एसआईपी (SIP), बचत और इमरजेंसी फंड

लोन लेने से पहले जेब में होना चाहिए इतना ‘अपफ्रंट कैश’

होम लोन लेते समय केवल EMI की किश्त देखना काफी नहीं है। मकान की चाबी हाथ में आने से पहले आपको अपने पास से भारी रकम खर्च करनी पड़ती है:

डाउन पेमेंट: ₹30 लाख तक की प्रॉपर्टी पर लगभग 10% और ₹75 लाख तक की प्रॉपर्टी पर 20% रकम अपनी जेब से डाउन पेमेंट के रूप में देनी होती है।

रजिस्ट्री व स्टाम्प ड्यूटी: प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू का 5% से 8% अलग से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में जाता है, जिसे बैंक लोन में कवर नहीं करते।

इंटीरियर और मेंटेनेंस: नया मकान लेने के बाद इंटीरियर कार्य, मेंटेनेंस और सोसाइटी चार्जेस के खर्च भी अलग से तैयार रखने होते हैं।

इमरजेंसी फंड भूलकर भी न करें नजरअंदाज

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लोन का आवेदन करने से पहले आपके पास कम से कम 6 से 12 महीने के जरूरी खर्च और EMI के बराबर इमरजेंसी फंड होना ही चाहिए। अगर आपकी EMI और महीने का घर खर्च मिलाकर ₹60,000 से ₹70,000 है, तो आपके बैंक खाते में कम से कम ₹3.6 लाख से ₹8.4 लाख का इमरजेंसी फंड अलग से सुरक्षित जमा होना चाहिए।

₹50 लाख के घर के लिए पहले से कितने पैसों की होगी जरूरत?

अगर आप ₹50 लाख का घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको लोन पास होने से पहले करीब ₹16 लाख से ₹18 लाख की नगद रकम तैयार रखनी होगी:

डाउन पेमेंट (20%): ₹10 लाख

रजिस्ट्री/अन्य खर्च (5-8%): ₹2.5 – ₹4 लाख

इमरजेंसी फंड: ₹3.6 – ₹4.2 लाख

कुल अपफ्रंट कैश रिक्वायरमेंट = ₹16 लाख से ₹18 लाख

घर खरीदने के चक्कर में न रोकें दूसरे लक्ष्य

नया घर खरीदना एक बड़ा सपना है, लेकिन इसके चक्कर में अपने बच्चे की पढ़ाई का फंड, खुद के रिटायरमेंट की SIP या इमरजेंसी सेविंग्स को पूरी तरह बंद कर देना भारी भूल साबित हो सकता है। वित्तीय योजना ऐसी बनाएं कि हर महीने आपकी EMI आराम से कटे और आपकी बाकी लाइफस्टाइल व निवेश बिना किसी तनाव के चलता रहे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या होता है? जानें इसका मतलब और इसे कैसे बेहतर करें

अपने क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना खुद की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है. भारत में आपको लोन, क्रेडिट कार्ड्स या दूसरी क्रेडिट फैसिलिटीज आसानी से तभी मिल सकती हैं, जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो. ट्रांसयूनियन CIBIL की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 119 मिलियन भारतीयों ने अपना CIBIL स्कोर चेक किया था. ये पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा है, यानी 43.6 मिलियन ज्यादा लोग अपने क्रेडिट स्टेटस को लेकर एक्टिव हुए हैं. खास बात ये कि Gen Z और मिलेनियल्स 77% हिस्सेदारी के साथ इसमें सबसे आगे हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 46% लोग, जो रेगुलर अपने CIBIL स्कोर और रिपोर्ट चेक करते हैं, 6 महीने में अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर कर लेते हैं. ये उन 41% लोगों से ज्यादा है, जो अपने स्कोर पर ध्यान नहीं देते. यानी क्रेडिट को एक्टिवली मैनेज करने से स्कोर बेहतर होता है, जिससे कम इंटरेस्ट रेट्स, अच्छे ऑफर्स और ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है. आइए, समझते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है.

क्रेडिट स्कोर क्या है?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है, जो आपकी क्रेडिटवर्थिनेस दिखाता है, यानी आप उधार लिया पैसा चुकाने में कितने काबिल हैं. ये आपके क्रेडिट हिस्ट्री पर बेस्ड होता है. भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 तक होता है. 750 से 900 का स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है.

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क्रेडिट स्कोर की रेंज को ऐसे समझें:

  • 750-900: ये शानदार स्कोर है. इस रेंज में आपको क्रेडिट आसानी से मिलेगा और अच्छे टर्म्स पर.
  • 650-749: ये अच्छी रेंज है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ठीक है, लेकिन टॉप स्कोर जितनी मजबूत नहीं.
  • 550-649: ये एवरेज रेंज है. क्रेडिट मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा हो सकते हैं और टर्म्स उतने अच्छे नहीं.
  • 550 से नीचे: ये कमजोर स्कोर है. इस रेंज में क्रेडिट पाना मुश्किल हो सकता है.

भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो हैं, इनमें ट्रांसयूनियन CIBIL, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और CRIF हाई मार्क शामिल हैं. हर ब्यूरो की रेंज और इंटरप्रिटेशन में थोड़ा अंतर हो सकता है.  

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

आपके क्रेडिट स्कोर को ये चीजें प्रभावित करती हैं:

  • पेमेंट हिस्ट्री: लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI टाइम पर चुकाना बहुत जरूरी है. लेट पेमेंट्स या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नीचे ला सकते हैं.
  • क्रेडिट यूसेज: अपनी क्रेडिट लिमिट का ज्यादा यूज करना स्कोर को नुकसान पहुंचाता है. कोशिश करें कि 30% से ज्यादा लिमिट इस्तेमाल न हो.
  • लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके स्कोर को बेहतर करता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट बिहेवियर की ज्यादा जानकारी मिलती है.
  • क्रेडिट टाइप्स: क्रेडिट कार्ड्स और लोन जैसे अलग-अलग क्रेडिट का मिक्स होना अच्छा है, बशर्ते आप इन्हें जिम्मेदारी से मैनेज करें.
  • नए क्रेडिट एप्लिकेशंस: छोटे वक्त में कई क्रेडिट कार्ड्स या लोन के लिए अप्लाई करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. हर एप्लिकेशन से हार्ड इन्क्वायरी होती है, जो स्कोर को थोड़ा कम करती है.

क्रेडिट स्कोर कैसे बेहतर करें?

क्रेडिट स्कोर को बेहतर करना आसान नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से यह संभव है. ये रहे कुछ टिप्स:

  • टाइम पर बिल्स पे करें: क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और लोन EMI हमेशा टाइम पर चुकाएं. ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करें ताकि ड्यू डेट मिस न हो.
  • क्रेडिट कम यूज करें: अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा यूज न करें. इससे लेंडर्स को लगता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट रेगुलर चेक करें और कोई गलती या फ्रॉड दिखे तो ठीक करवाएं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.
  • नए क्रेडिट के लिए ज्यादा जल्दबाज़ी न करें: हर एप्लिकेशन से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है. जरूरत पड़ने पर ही नए क्रेडिट के लिए अप्लाई करें.
  • हेल्दी क्रेडिट मिक्स रखें: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिट का बैलेंस आपके स्कोर को बेहतर कर सकता है.

क्रेडिट स्कोर को कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब आपके पास सही टूल्स हों. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म आपको आपकी क्रेडिट हेल्थ की लेटेस्ट अपडेट देता है. चाहे आप अपना स्कोर जानना चाहें या उसे बेहतर करना चाहें, मनीकंट्रोल के टूल्स और इनसाइट्स आपकी मदद करेंगे.

कुल मिलाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और मौकों को आसान बनाता है. भारत में 750 या उससे ज्यादा का स्कोर शानदार माना जाता है और लेंडर्स के लिए आपका फेवर बढ़ाता है. क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर और उसे मैनेज करने के लिए सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं और अच्छे क्रेडिट टर्म्स पा सकते हैं.

पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

पर्सनल लोन एक फ्लेक्सिबल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जो लोगों को बड़े खर्चों जैसे शिक्षा, शादी, वेकेशन, घर का रेनोवेशन, मेडिकल बिल या गैजेट खरीदने में मदद करता है. यह फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट क्रेडिट कार्ड के मुकाबले एक किफायती विकल्प है और लोन अमाउंट को मासिक किस्तों (EMIs) में चुकाने की सुविधा देता है.

हालांकि, इस लोन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रेडिट स्कोर, इंटरेस्ट रेट और एक्स्ट्रा चार्ज जैसे फैक्टर पर ध्यान देना भी जरूरी है. इससे आप कुछ आम गलतियों से बच सकते हैं, जैसे गलत लेंडर चुन लेना, गलत लोन टेन्योर लेना या जरूरत से ज्यादा लोन लेना.

किसी भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें:  

1. अलग-अलग मार्केट इंटरेस्ट रेट की तुलना करें

अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट की तुलना करने से आपको सबसे कम रेट वाला लोन मिल सकता है. BankBazaar, Paisabazaar और MyLoanCare जैसे प्लेटफॉर्म इस तुलना को आसान बनाते हैं.

सस्ते इंटरेस्ट रेट और सही इंटरेस्ट टाईप (जैसे फिक्स्ड या फ्लोटिंग) चुनने से लोन रीपेमेंट आसान हो जाता है.

मनीकंट्रोल (Moneycontrol) ऐप और वेबसाइट पर आप 10+ लेंडर के पर्सनल लोन ऑफर की तुलना कर सकते हैं. यहां इंटरेस्ट रेट सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होते हैं, और आप 50 लाख रुपए तक का लोन पूरी तरह डिजिटल प्रोसेस के जरिए ले सकते हैं.

2. लोन अमाउंट, टेन्योर और रीपेमेंट

लोन अमाउंट, टेन्योर और पेमेंट सीधे तौर पर EMI को प्रभावित करते हैं. सही अमाउंट, फ्लेक्सिबल टेन्योर और मैनेज करने योग्य EMI चुनने से आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही लोन चुन सकते हैं.

3. हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखें

आपकी क्रेडिटवर्थिनेस आपकी क्रेडिट हिस्ट्री से तय होती है, जिसे CIBIL स्कोर कहा जाता है. आपका स्कोर कम-से-कम 700 या इससे ज्यादा होना चाहिए.

कोई भी बकाया समय पर चुकाने से क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहता है. अगर आपका स्कोर कम है तो लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है या आपको ऊंचे इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है.

4. लोन से जुड़े हर खर्च का आकलन करें

लोन लेने से पहले उससे जुड़े सभी खर्च जैसे प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनल्टी पर गौर करें. इससे आपको कुल खर्च का सही आकलन मिलेगा और आप बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर पाएंगे.

5. सही लोन अमाउंट चुनें

लोन अमाउंट अपनी जरूरत और खर्चों के हिसाब से तय करें. अगर आपकी जरूरतें और खर्च अनिश्चित हैं, तो फ्लेक्सी पर्सनल लोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

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6. रीपेमेंट की क्षमता जांचें

लोन अप्लाई करने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी इनकम लोन को समय पर चुकाने के लिए काफी है या नहीं. पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर जैसे टूल का इस्तेमाल करके आप मासिक किस्तों का अंदाजा लगा सकते हैं. ऐसा करने से, बाकी फाइनेंशियल लायबिलिटी से समझौता किए बिना EMI प्लान करना आसान हो जाता है.

7. धोखाधड़ी वाले ऑफर और सर्विस से बचें

ऐसे ऑफर जो बहुत ज्यादा किफायती या आकर्षक लग रहे हैं, उनसे सावधान रहें. ऑफर का फाइन प्रिंट जरूर पढ़ें ताकि हिडन चार्ज या अचानक आने वाले खर्चों से बचा जा सके. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि लोन की शर्तें साफ और समझने योग्य हैं.

कुछ लेंडर सस्ते इंटरेस्ट रेट का दावा करते हैं लेकिन बाद में एक्स्ट्रा फीस जोड़ देते हैं. इसलिए हमेशा ऐसे लेंडर को चुनें जो पारदर्शी और ईमानदार हो.

8. लेंडर की रेप्यूटेशन और कस्टमर सर्विस चेक करें

लोन लेने से पहले लेंडर की मार्केट रेप्यूटेशन और उनकी कस्टमर सर्विस की क्वालिटी पर रिसर्च करें. इसके लिए आप RBI की वेबसाइट, Trustpilot या Google Reviews पर कस्टमर रिव्यू और रेटिंग देख सकते हैं.

एक भरोसेमंद लेंडर का चुनाव आपके लोन एक्सपीरियंस को आसान और सुरक्षित बनाता है.

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन लेते समय इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, रीपेमेंट क्षमता, हिडन फीस और लेंडर की रेप्यूटेशन जैसे फैक्टर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. अलग-अलग ऑफर की तुलना कर, अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखकर और लोन की शर्तें समझकर आप अपनी फाइनेंशियल जरूरत के लिए सबसे बेहतर फैसला ले सकते हैं.

मनीकंट्रोल के ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर आप 10+ लेंडर से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन ले सकते हैं. इन पर इंटरेस्ट रेट सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होते हैं. यह प्रोसेस 100% पेपरलेस है.

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सस्ते ब्याज पर चाहिए? अप्लाई करने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना आज पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और NBFC कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर करने का दावा करते हैं। लेकिन जल्दी में लिया गया पर्सनल लोन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

पर्सनल लोन पर ब्याज दरें होम लोन या कार लोन से ज्यादा होती हैं। ऐसे में अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए, तो हजारों रुपये बचाए जा सकते हैं। आइए जानते हैं पर्सनल लोन लेने से पहले किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. सबसे पहले अपना CIBIL स्कोर सुधारें

अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो बैंक आपको कम ब्याज पर लोन देने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, कम स्कोर होने पर ब्याज दर बढ़ सकती है या लोन भी रिजेक्ट हो सकता है।

मान लीजिए दो लोगों ने 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया। एक को 11% और दूसरे को 15% ब्याज मिला। यानी सिर्फ 4% ज्यादा ब्याज की वजह से आपको करीब ₹62,000 अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

ब्याज दरअनुमानित EMIकुल ब्याज
11%करीब ₹10,870करीब ₹1.52 लाख
15%करीब ₹11,895करीब ₹2.14 लाख

2. पहले कई बैंकों का ऑफर तुलना करें

जिस बैंक का पहला ऑफर मिले, उसी पर हामी मत भरिए। कम से कम 3-4 बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और बाकी शर्तों की तुलना करें।

कई बार आपका सैलरी बैंक भी सबसे सस्ता लोन नहीं देता। ऑनलाइन तुलना करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इससे अच्छी बचत हो सकती है।

3. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

बैंक अगर ₹10 लाख का लोन देने को तैयार है, तो जरूरी नहीं कि आप पूरा पैसा लें।

अगर आपकी जरूरत ₹6 लाख की है, तो उतना ही लोन लें। ज्यादा रकम का मतलब ज्यादा EMI और ज्यादा ब्याज। इससे आप पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है।

4. सिर्फ ब्याज नहीं, बाकी चार्ज भी देखें

कई लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला कर लेते हैं। लेकिन प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरी फीस भी आपकी जेब पर असर डालती हैं।

लोन लेने से पहले पूछ लें कि कुल कितना खर्च आएगा। तभी आपको लोन की असली कीमत पता चलेगी।

5. EMI अपनी कमाई के हिसाब से रखें

ऐसी EMI चुनें जिसे आप हर महीने आराम से भर सकें। कोशिश करें कि सभी EMI मिलाकर आपकी मंथली इनकम के 35% से 40% से ज्यादा न हों।

अगर EMI बहुत ज्यादा होगी, तो भविष्य में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है। इससे आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है।

पर्सनल लोन के लिए सबसे जरूरी बात

पर्सनल लोन बिना गारंटी मिलता है। इसलिए इसकी ब्याज दर भी ज्यादा होती है। अगर आप अच्छा CIBIL स्कोर बनाए रखें, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें और जरूरत के हिसाब से ही लोन लें, तो कम ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लोन लेने में जल्दबाजी नहीं, सही तुलना करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।