7 Financial Rules: अमीर बनने के 7 ‘सीक्रेट’ रूल्स! तेजी से बढ़ेगा आपका बैंक बैलेंस

Personal Finance Tips: क्या आप भी हर महीने अच्छी सैलरी कमाने के बाद भी बैंक बैलेंस खाली होने से परेशान रहते हैं? सच यह है कि वेल्दी बनने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाना काफी नहीं होता, बल्कि कमाए हुए पैसे को सही तरीके से मैनेज, सेव और इन्वेस्ट करना भी उतना ही जरूरी है।

अगर आपकी बचत नहीं हो पा रही है और महीने के अंत में पैसे खत्म हो जाते हैं, तो ये 7 आसान और असरदार फाइनेंशियल हैबिट्स आपके काम आ सकती हैं। इन्हें अपनाकर आप अपनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत कर सकते हैं और लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

1. सबसे पहले बनाएं इमरजेंसी फंड

जिंदगी में नौकरी जाने, अचानक बीमारी या किसी अन्य इमरजेंसी का सामना कभी भी करना पड़ सकता है। ऐसे समय में इमरजेंसी फंड ही आपका सबसे बड़ा सहारा बनता है। कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर राशि इमरजेंसी फंड में रखें।इसे किसी सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके।

2. सैलरी आते ही फॉलो करें ‘Pay Yourself First’ रूल

ज्यादातर लोग महीने भर खर्च करने के बाद बचे हुए पैसे को सेव करने की कोशिश करते हैं और अंत में कुछ नहीं बचता। सैलरी अकाउंट से बचत या म्यूचुअल फंड SIP के लिए ऑटो-ट्रांसफर सेट करें। सैलरी क्रेडिट होते ही तय रकम अपने आप सेव हो जाएगी और आपके पास गैर-जरूरी खर्चों का विकल्प नहीं बचेगा।

3. डेली खर्चों को ट्रैक करना शुरू करें

अक्सर छोटी-छोटी खरीदारी और बेवजह के खर्चे महीने के बजट को बिगाड़ देते हैं।किसी बजटिंग ऐप, एक्सेल शीट या डायरी में रोज के छोटे-बड़े खर्चों को नोट करें।इससे आपको पता चलेगा कि आपका पैसा कहां बेकार जा रहा है, जैसे कि वे ओवर-सब्सक्रिप्शन या बेवजह की ऑनलाइन शॉपिंग जिन्हें बंद किया जा सकता है।

4. क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

क्रेडिट कार्ड एक बेहतरीन टूल है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल आपको कर्ज के जाल में फंसा सकता है। हमेशा ड्यू डेट से पहले पूरे बिल का भुगतान करें। इससे भारी-भरकम ब्याज और पेनल्टी से बचाव होगा और आपका सिबिल स्कोर भी मजबूत रहेगा।

5. कम उम्र में शुरू करें इन्वेस्टमेंट

जितनी जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, कम्पाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। शुरुआत के लिए कम लागत वाले इंडेक्स फंड्स या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स बेहतर विकल्प माने जाते हैं। अपने फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से ही सही विकल्प चुनें।

6. अपनी स्किल्स को अपग्रेड करें

आपकी सबसे बड़ी एसेट आप खुद हैं। प्रोफेशनल स्किल्स में सुधार करने से आपकी अर्निंग पोटेंशियल बढ़ती है। नए सर्टिफिकेशन्स, ट्रेनिंग या वर्कशॉप के जरिए अपनी स्किल बढ़ाएं। अच्छी स्किल्स आपको बेहतर जॉब और ज्यादा सैलरी पाने में मदद करेगी, जिससे निवेश के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।

7. सैलरी नेगोशिएशन में न हिचकिचाएं

आपकी मौजूदा सैलरी ही आपकी भविष्य की बोनस, सेविंग्स और रिटायरमेंट फंड की नींव तय करती है। अपनी जॉब रोल और इंडस्ट्री के हिसाब से मिलने वाले सही पे-स्केल की जानकारी रखें। जॉब ऑफर या अप्रेजल के समय अपने काम और वैल्यू के हिसाब से सही सैलरी मांगने में बिल्कुल संकोच न करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नई कार पर 4 और बाइक पर 6 साल का इंश्योरेंस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के इंश्योरेंस बड़ा फैसला सुनाया है। अब नई प्राइवेट कार खरीदने पर 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा। नई बाइक खरीदने पर 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि एक साल कम थी। कोर्ट ने कहा कि इससे सड़क हादसों के पीड़ितों को जल्दी मुआवजा मिलेगा।

यह आदेश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने कहा कि देश में अब भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं। इसे रोकना जरूरी है।

2018 के बाद भी नहीं बदले हालात

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में नई कार के लिए 3 साल और नई बाइक के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था। लेकिन इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। कोर्ट ने कहा कि अब अवधि एक साल और बढ़ाई जा रही है।

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लेकिन कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को ज्यादा अहम माना।

हर दूसरी गाड़ी के पास इंश्योरेंस नहीं

कोर्ट ने कहा कि देश में करीब 56% गाड़ियां बिना वैध इंश्योरेंस के चल रही हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 16.54 करोड़ के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं है। इसका मकसद पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है।

बिना इंश्योरेंस गाड़ी पर ई-चालान

कोर्ट ने कहा कि ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau से जोड़ा जाए। इससे बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों की पहचान हो सकेगी। फिर उन्हें अपने आप ई-चालान जारी होगा।

राज्य पुलिस को भी ऐसे मोबाइल ऐप और डिवाइस दिए जाएंगे। इससे मौके पर ही इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।

बिना इंश्योरेंस पेट्रोल भी नहीं

कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। इसके तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने की योजना बनाई जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकें। इसके लिए भी व्यवस्था बनाई जाए।

इंश्योरेंस खरीदने से पहले पूरी जानकारी

कोर्ट ने IRDAI को चार-स्तरीय इंश्योरेंस व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, पिलियन या यात्रियों का कवर और ओन डैमेज कवर का विकल्प भी होगा। हर ग्राहक को बीमा खरीदने से पहले आसान भाषा में पूरी जानकारी भी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

CIBIL Score: पुराना बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड बंद कर रहे? जानिए सिबिल स्कोर पर क्या असर पड़ेगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत में एवरेज क्रेडिट स्कोर क्या है?

भारत में फाइनेंशियल मामलों में क्रेडिट स्कोर का कॉन्सेप्ट तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के बढ़ते यूज के साथ ये स्कोर लोन लेने या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने में बड़ा रोल प्ले करता है. ये 300 से 900 तक का थ्री-डिजिट नंबर है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर आपकी क्रेडिटवर्थीनेस को रिफ्लेक्ट करता है. हायर स्कोर बेहतर क्रेडिट हेल्थ दिखाता है. क्रेडिट स्कोर, जिसे सिबिल स्कोर भी कहते हैं, रिपेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है, क्रेडिट टाइप्स और रीसेंट क्रेडिट इंक्वायरीज जैसे फैक्टर्स से तय होता है.

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर आप स्ट्रॉन्ग क्रेडिट रिपोर्ट बनाए रख सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल प्रॉस्पेक्ट्स को बेहतर कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर रेंजेस

भारत में क्रेडिट स्कोर को कई रेंज में बांटा जाता है, जो क्रेडिटवर्थीनेस के अलग-अलग लेवल्स दिखाती हैं.

750 से 900: ये रेंज एक्सेप्शनल मानी जाती है. इस रेंज वाले कंज्यूमर्स को लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर लोन अप्रूवल चांसेज मिलते हैं.

700 से 749: ये गुड क्रेडिट स्कोर है. ये रिलायबल क्रेडिट हिस्ट्री दिखाता है, लेकिन एक्सीलेंट जितना स्ट्रॉन्ग नहीं.

650 से 699: फेयर रेंज. क्रेडिट ऑफर्स मिल सकते हैं, लेकिन हायर इंटरेस्ट रेट्स के साथ.

600 से 649: पुअर स्कोर. क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है और अगर मिले तो हायर इंटरेस्ट रेट्स.

600 से नीचे: इमीडिएट एक्शन की जरूरत, क्योंकि लेंडर्स इसे रिस्की मानते हैं.

ट्रांसयूनियन सीबिल रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंज्यूमर्स अपनी क्रेडिट को एक्टिवली मॉनिटर करते हैं उनका एवरेज क्रेडिट स्कोर 729 होता है, जबकि जो मॉनिटर नहीं करते उनका 712. साथ ही, सेल्फ-मॉनिटरिंग करने वाले 46% कंज्यूमर्स के स्कोर छह महीने में इम्प्रूव हुए, जबकि नॉन-मॉनिटर्स में 41%.

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं

भारत की क्रेडिट हेल्थ कैसी है?

नवंबर 2023 में पैसे बाजार क्रेडिट इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कंज्यूमर्स की क्रेडिट हेल्थ में वैरिड ट्रेंड्स दिखते हैं. स्टडी ने 823 सिटीज के 3.7 करोड़ कंज्यूमर्स का डेटा एनालाइज किया, जो सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड के बीच गैप्स और एज ग्रुप्स के अंतर को हाइलाइट करती है.

सैलरीड बनाम सेल्फ-एम्प्लॉयड

-सैलरीड कंज्यूमर्स में 25% से ज्यादा का क्रेडिट स्कोर 770 और ऊपर है.

-सेल्फ-एम्प्लॉयड में सिर्फ 14% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट प्रोफाइल है.

-दोनों सेगमेंट्स में 32% कंज्यूमर्स गुड क्रेडिट स्कोर कैटेगरी में आते हैं.

अर्बन बनाम नॉन-मेट्रो

-मेजर मेट्रो सिटीज में 24% कंज्यूमर्स का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर है.

-नॉन-मेट्रो में 22% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर, जो इन डेमोग्राफिक्स में समान क्रेडिट बिहेवियर दिखाता है.

हेल्दी क्रेडिट स्कोर वाली सिटीज

स्टडी ने क्रेडिट-हेल्दी कंज्यूमर्स के हाइएस्ट रेशियो वाली सिटीज को हाइलाइट किया:

-बेंगलुरु

-अहमदाबाद

-मुंबई

-पुणे

-चेन्नई

-दिल्ली

-हैदराबाद

-सूरत (नॉन-मेट्रो)

-कोयंबटूर (नॉन-मेट्रो)

ये फाइंडिंग्स दिखाती हैं कि मेट्रो और नॉन-मेट्रो दोनों में क्रेडिट हेल्थ नोटेबल है, और कुछ नॉन-मेट्रो सिटीज अच्छा परफॉर्म कर रही हैं.

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स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर का इम्पैक्ट

स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स अनलॉक करता है, जो लोन और क्रेडिट कार्ड्स को आसान और फेवरेबल टर्म्स पर लेने में मदद करता है.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर लोन और क्रेडिट कार्ड्स सिक्योर करने के चांसेज बढ़ाता है, क्योंकि ये रिस्पॉन्सिबल फाइनेंशियल बिहेवियर दिखाता है और लेंडर्स के लिए डिफॉल्ट रिस्क कम करता है.

-हाई क्रेडिट स्कोर वाले कंज्यूमर्स को लोन पर लोअर इंटरेस्ट रेट्स मिलते हैं, जो मंथली रिपेमेंट्स को अफोर्डेबल और मैनेजेबल बनाते हैं.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर प्री-अप्रूव्ड लोन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स के लिए क्वालिफाई करता है, जो जरूरत पड़ने पर फंड्स को फास्ट एक्सेस देता है.

-लेंडर्स हाई क्रेडिट स्कोर वालों को प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं, जिनमें एन्हांस्ड रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स होते हैं, जो परचेजिंग पावर बढ़ाते हैं.

-गुड क्रेडिट स्कोर हायर लोन अमाउंट्स और क्रेडिट लिमिट्स एक्सेस करने में मदद करता है, जो वैरियस नीड्स के लिए ग्रेटर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देता है.

गुड क्रेडिट स्कोर कैसे बनाएं

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए इम्पैक्टिंग फैक्टर्स पर केयरफुल अटेंशन और नॉलेज की जरूरत है. ये कुछ तरीके हैं अपनी क्रेडिटवर्थीनेस को बेहतर करने के:

-क्रेडिट कार्ड बिल्स और लोन ईएमआई का टाइमली रेपेमेंट सुनिश्चित करें, क्योंकि लेट या मिस्ड पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकते हैं.

-एक साथ मल्टिपल लोन एप्लिकेशंस सबमिट करने से बचें, क्योंकि ये लेंडर्स को क्रेडिट के लिए ओवरली इगर लग सकता है.

-क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलरली रिव्यू करें और किसी भी इनएक्युरेसी को तुरंत एड्रेस करें.

-अपनी टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से नीचे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो रखने की कोशिश करें, जो रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है.

निचोड़ ये है कि स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर बेहतर फाइनेंशियल ऑपर्च्युनिटीज के दरवाजे खोल सकता है. इसलिए अपनी क्रेडिट हेल्थ को ट्रैक करना बहुत जरूरी है. आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को मॉनिटर करने के लिए डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट को आसानी से ट्रैक करें. मनीकंट्रोल क्रेडिट डैशबोर्ड एक्सप्लोर करें ताकि फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट एक्सेस कर सकें.

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सस्ते ब्याज पर चाहिए? अप्लाई करने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना आज पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और NBFC कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर करने का दावा करते हैं। लेकिन जल्दी में लिया गया पर्सनल लोन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

पर्सनल लोन पर ब्याज दरें होम लोन या कार लोन से ज्यादा होती हैं। ऐसे में अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए, तो हजारों रुपये बचाए जा सकते हैं। आइए जानते हैं पर्सनल लोन लेने से पहले किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. सबसे पहले अपना CIBIL स्कोर सुधारें

अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो बैंक आपको कम ब्याज पर लोन देने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, कम स्कोर होने पर ब्याज दर बढ़ सकती है या लोन भी रिजेक्ट हो सकता है।

मान लीजिए दो लोगों ने 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया। एक को 11% और दूसरे को 15% ब्याज मिला। यानी सिर्फ 4% ज्यादा ब्याज की वजह से आपको करीब ₹62,000 अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

ब्याज दरअनुमानित EMIकुल ब्याज
11%करीब ₹10,870करीब ₹1.52 लाख
15%करीब ₹11,895करीब ₹2.14 लाख

2. पहले कई बैंकों का ऑफर तुलना करें

जिस बैंक का पहला ऑफर मिले, उसी पर हामी मत भरिए। कम से कम 3-4 बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और बाकी शर्तों की तुलना करें।

कई बार आपका सैलरी बैंक भी सबसे सस्ता लोन नहीं देता। ऑनलाइन तुलना करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इससे अच्छी बचत हो सकती है।

3. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

बैंक अगर ₹10 लाख का लोन देने को तैयार है, तो जरूरी नहीं कि आप पूरा पैसा लें।

अगर आपकी जरूरत ₹6 लाख की है, तो उतना ही लोन लें। ज्यादा रकम का मतलब ज्यादा EMI और ज्यादा ब्याज। इससे आप पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है।

4. सिर्फ ब्याज नहीं, बाकी चार्ज भी देखें

कई लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला कर लेते हैं। लेकिन प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरी फीस भी आपकी जेब पर असर डालती हैं।

लोन लेने से पहले पूछ लें कि कुल कितना खर्च आएगा। तभी आपको लोन की असली कीमत पता चलेगी।

5. EMI अपनी कमाई के हिसाब से रखें

ऐसी EMI चुनें जिसे आप हर महीने आराम से भर सकें। कोशिश करें कि सभी EMI मिलाकर आपकी मंथली इनकम के 35% से 40% से ज्यादा न हों।

अगर EMI बहुत ज्यादा होगी, तो भविष्य में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है। इससे आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है।

पर्सनल लोन के लिए सबसे जरूरी बात

पर्सनल लोन बिना गारंटी मिलता है। इसलिए इसकी ब्याज दर भी ज्यादा होती है। अगर आप अच्छा CIBIL स्कोर बनाए रखें, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें और जरूरत के हिसाब से ही लोन लें, तो कम ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लोन लेने में जल्दबाजी नहीं, सही तुलना करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।