भारत में एवरेज क्रेडिट स्कोर क्या है?

भारत में फाइनेंशियल मामलों में क्रेडिट स्कोर का कॉन्सेप्ट तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के बढ़ते यूज के साथ ये स्कोर लोन लेने या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने में बड़ा रोल प्ले करता है. ये 300 से 900 तक का थ्री-डिजिट नंबर है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर आपकी क्रेडिटवर्थीनेस को रिफ्लेक्ट करता है. हायर स्कोर बेहतर क्रेडिट हेल्थ दिखाता है. क्रेडिट स्कोर, जिसे सिबिल स्कोर भी कहते हैं, रिपेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है, क्रेडिट टाइप्स और रीसेंट क्रेडिट इंक्वायरीज जैसे फैक्टर्स से तय होता है.

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर आप स्ट्रॉन्ग क्रेडिट रिपोर्ट बनाए रख सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल प्रॉस्पेक्ट्स को बेहतर कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर रेंजेस

भारत में क्रेडिट स्कोर को कई रेंज में बांटा जाता है, जो क्रेडिटवर्थीनेस के अलग-अलग लेवल्स दिखाती हैं.

750 से 900: ये रेंज एक्सेप्शनल मानी जाती है. इस रेंज वाले कंज्यूमर्स को लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर लोन अप्रूवल चांसेज मिलते हैं.

700 से 749: ये गुड क्रेडिट स्कोर है. ये रिलायबल क्रेडिट हिस्ट्री दिखाता है, लेकिन एक्सीलेंट जितना स्ट्रॉन्ग नहीं.

650 से 699: फेयर रेंज. क्रेडिट ऑफर्स मिल सकते हैं, लेकिन हायर इंटरेस्ट रेट्स के साथ.

600 से 649: पुअर स्कोर. क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है और अगर मिले तो हायर इंटरेस्ट रेट्स.

600 से नीचे: इमीडिएट एक्शन की जरूरत, क्योंकि लेंडर्स इसे रिस्की मानते हैं.

ट्रांसयूनियन सीबिल रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंज्यूमर्स अपनी क्रेडिट को एक्टिवली मॉनिटर करते हैं उनका एवरेज क्रेडिट स्कोर 729 होता है, जबकि जो मॉनिटर नहीं करते उनका 712. साथ ही, सेल्फ-मॉनिटरिंग करने वाले 46% कंज्यूमर्स के स्कोर छह महीने में इम्प्रूव हुए, जबकि नॉन-मॉनिटर्स में 41%.

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भारत की क्रेडिट हेल्थ कैसी है?

नवंबर 2023 में पैसे बाजार क्रेडिट इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कंज्यूमर्स की क्रेडिट हेल्थ में वैरिड ट्रेंड्स दिखते हैं. स्टडी ने 823 सिटीज के 3.7 करोड़ कंज्यूमर्स का डेटा एनालाइज किया, जो सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड के बीच गैप्स और एज ग्रुप्स के अंतर को हाइलाइट करती है.

सैलरीड बनाम सेल्फ-एम्प्लॉयड

-सैलरीड कंज्यूमर्स में 25% से ज्यादा का क्रेडिट स्कोर 770 और ऊपर है.

-सेल्फ-एम्प्लॉयड में सिर्फ 14% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट प्रोफाइल है.

-दोनों सेगमेंट्स में 32% कंज्यूमर्स गुड क्रेडिट स्कोर कैटेगरी में आते हैं.

अर्बन बनाम नॉन-मेट्रो

-मेजर मेट्रो सिटीज में 24% कंज्यूमर्स का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर है.

-नॉन-मेट्रो में 22% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर, जो इन डेमोग्राफिक्स में समान क्रेडिट बिहेवियर दिखाता है.

हेल्दी क्रेडिट स्कोर वाली सिटीज

स्टडी ने क्रेडिट-हेल्दी कंज्यूमर्स के हाइएस्ट रेशियो वाली सिटीज को हाइलाइट किया:

-बेंगलुरु

-अहमदाबाद

-मुंबई

-पुणे

-चेन्नई

-दिल्ली

-हैदराबाद

-सूरत (नॉन-मेट्रो)

-कोयंबटूर (नॉन-मेट्रो)

ये फाइंडिंग्स दिखाती हैं कि मेट्रो और नॉन-मेट्रो दोनों में क्रेडिट हेल्थ नोटेबल है, और कुछ नॉन-मेट्रो सिटीज अच्छा परफॉर्म कर रही हैं.

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स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर का इम्पैक्ट

स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स अनलॉक करता है, जो लोन और क्रेडिट कार्ड्स को आसान और फेवरेबल टर्म्स पर लेने में मदद करता है.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर लोन और क्रेडिट कार्ड्स सिक्योर करने के चांसेज बढ़ाता है, क्योंकि ये रिस्पॉन्सिबल फाइनेंशियल बिहेवियर दिखाता है और लेंडर्स के लिए डिफॉल्ट रिस्क कम करता है.

-हाई क्रेडिट स्कोर वाले कंज्यूमर्स को लोन पर लोअर इंटरेस्ट रेट्स मिलते हैं, जो मंथली रिपेमेंट्स को अफोर्डेबल और मैनेजेबल बनाते हैं.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर प्री-अप्रूव्ड लोन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स के लिए क्वालिफाई करता है, जो जरूरत पड़ने पर फंड्स को फास्ट एक्सेस देता है.

-लेंडर्स हाई क्रेडिट स्कोर वालों को प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं, जिनमें एन्हांस्ड रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स होते हैं, जो परचेजिंग पावर बढ़ाते हैं.

-गुड क्रेडिट स्कोर हायर लोन अमाउंट्स और क्रेडिट लिमिट्स एक्सेस करने में मदद करता है, जो वैरियस नीड्स के लिए ग्रेटर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देता है.

गुड क्रेडिट स्कोर कैसे बनाएं

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए इम्पैक्टिंग फैक्टर्स पर केयरफुल अटेंशन और नॉलेज की जरूरत है. ये कुछ तरीके हैं अपनी क्रेडिटवर्थीनेस को बेहतर करने के:

-क्रेडिट कार्ड बिल्स और लोन ईएमआई का टाइमली रेपेमेंट सुनिश्चित करें, क्योंकि लेट या मिस्ड पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकते हैं.

-एक साथ मल्टिपल लोन एप्लिकेशंस सबमिट करने से बचें, क्योंकि ये लेंडर्स को क्रेडिट के लिए ओवरली इगर लग सकता है.

-क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलरली रिव्यू करें और किसी भी इनएक्युरेसी को तुरंत एड्रेस करें.

-अपनी टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से नीचे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो रखने की कोशिश करें, जो रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है.

निचोड़ ये है कि स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर बेहतर फाइनेंशियल ऑपर्च्युनिटीज के दरवाजे खोल सकता है. इसलिए अपनी क्रेडिट हेल्थ को ट्रैक करना बहुत जरूरी है. आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को मॉनिटर करने के लिए डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट को आसानी से ट्रैक करें. मनीकंट्रोल क्रेडिट डैशबोर्ड एक्सप्लोर करें ताकि फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट एक्सेस कर सकें.

लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके क्रेडिट स्कोर को कैसे प्रभावित करती है?

आपका क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड बहुत बड़ा रोल निभाता है. ऐसे में ये समझना कि लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके स्कोर पर कैसे असर डालती है, आपके पैसे से जुड़े फैसलों को बेहतर करने और अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने में मदद कर सकता है.  

क्रेडिट हिस्ट्री में आपके अब तक लिए गए सभी लोन शामिल होते हैं. आपका सबसे पुराना क्रेडिट अकाउंट कितना पुराना है, ये इसमें बड़ा फैक्टर है और आपके स्कोर को प्रभावित करता है. लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री यानी आपके अलग-अलग क्रेडिट अकाउंट्स का एवरेज पीरियड, जो उनके शुरू होने की डेट से कैलकुलेट किया जाता है.

क्रेडिट हिस्ट्री क्या होती है?

क्रेडिट हिस्ट्री आपके सारे लोन या क्रेडिट का रिकॉर्ड है. इसमें आपके क्रेडिट कार्ड्स, लोन और बाकी डेट की जानकारी होती है. ये रिकॉर्ड दिखाता है कि आप क्रेडिट को कितनी जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं, जैसे कि आपका कर्ज कितना है और आप पेमेंट्स कितनी जल्दी करते हैं. आपका क्रेडिट स्कोर, जो ये बताता है कि आप क्रेडिट के लिए कितने भरोसेमंद हैं, इसी हिस्ट्री से बनता है.

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क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड: क्यों है ये जरूरी?

क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके क्रेडिट स्कोर को तय करने में एक अहम हिस्सा है. ये आपके क्रेडिट अकाउंट्स के टोटल पीरियड को दिखाता है. आमतौर पर, पुराना क्रेडिट रिकॉर्ड आपके स्कोर के लिए अच्छा होता है. आइए समझते हैं क्यों:

  • क्रेडिट मैनेज करने की स्किल दिखाता है: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड लेंडर्स को बताता है कि आप क्रेडिट को कितनी अच्छी तरह मैनेज करते हैं. ये आपके लंबे वक्त की फाइनेंशियल हैबिट्स की पूरी तस्वीर देता है. अगर आपने लंबे समय तक क्रेडिट को अच्छे से हैंडल किया है, तो नए लेंडर्स के लिए ये अच्छा सिग्नल है.
  • हाई क्रेडिट स्कोर बनाने में मदद: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड ज्यादा डेटा देता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाता है. क्रेडिट स्कोर मॉडल्स इस पुराने डेटा की मदद से आपकी क्रेडि वर्थिनेस को और सही तरीके से जज करते हैं.

शॉर्ट क्रेडिट हिस्ट्री के नुकसान

  • कम जानकारी: अगर आपका क्रेडिट रिकॉर्ड पुराना नहीं है, तो स्कोरिंग मॉडल्स के पास जज करने के लिए कम डेटा होता है. इससे आपका क्रेडिट स्कोर नीचे जा सकता है, क्योंकि मॉडल्स को आपकी क्रेडिटवर्थिनेस समझने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती.
  • ज्यादा रिस्क: क्रेडिट हिस्ट्री आपकी फाइनेंशियल आदतों को दिखाती है. कम पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों को लेंडर्स ज्यादा रिस्की मान सकते हैं. इससे क्रेडिट या अच्छे इंटरेस्ट रेट्स पाना मुश्किल हो सकता है.
  • ज्यादा इंटरेस्ट रेट: अगर आपका क्रेडिट रिकॉर्ड ज्यादा पुराना नहीं है, तो लेंडर्स आपको हाई रिस्क बॉरोअर मान सकते हैं. इससे आपको ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स, कम क्रेडिट लिमिट या कम अच्छे टर्म्स वाले क्रेडिट प्रोडक्ट्स मिल सकते हैं.

मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री: कैसे बनाएं रखें?

  • जल्दी शुरू करें: क्रेडिट हिस्ट्री बनाने की शुरुआत जल्द से जल्द करें. छोटा सा क्रेडिट कार्ड या आसान लोन लेकर भी आप क्रेडिट रिकॉर्ड बिल्ड करना शुरू कर सकते हैं.
  • बिल्स में देरी न करें: अपने बिल्स हमेशा टाइम पर पे करें. लेट पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
  • पुराने अकाउंट्स चालू रखें: अगर आपके पास पुराने क्रेडिट कार्ड्स हैं, तो उन्हें एक्टिव रखना अच्छा है. पुराने अकाउंट्स बंद करने से आपकी लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री कम हो सकती है और स्कोर पर असर पड़ सकता है. लेकिन, इनके मेंटेनेंस कॉस्ट को चेक करें. जैसे, अगर आपके पास लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है, तो इसे चालू रखने में कोई हर्ज नहीं.
  • क्रेडिट का समझदारी से यूज करें: क्रेडिट का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचें. सारे क्रेडिट कार्ड्स को एक साथ यूज करने से बचें, क्योंकि इससे आपका क्रेडिट यूसेज परसेंटेज कम हो सकता है. अपनी क्रेडिट लिमिट का थोड़ा सा हिस्सा ही यूज करें.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलर चेक करें और उसमें कोई गलती न हो, ये इंश्योर करें. फ्रॉड या गलत जानकारी आपके क्रेडिट स्कोर और रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा सकती है. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.

पुराना और डिटेल्ड क्रेडिट रिकॉर्ड क्यों जरूरी?

पुराना और डिटेल्ड क्रेडिट रिकॉर्ड आपकी फाइनेंशियल रिलायबिलिटी की सही तस्वीर दिखाता है. ये सिर्फ पुराना रिकॉर्ड रखने की बात नहीं, बल्कि इसका संबंध लगातार और जिम्मेदारी से क्रेडिट यूज करने से है. लेंडर्स को ऐसा रिकॉर्ड पसंद आता है, जो दिखाए कि आप लंबे वक्त तक क्रेडिट को अच्छे से मैनेज कर सकते हैं.

लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री आपके क्रेडिट स्कोर को तय करने में अहम रोल निभाती है. क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड और जिम्मेदारी से क्रेडिट मैनेज करने का ट्रैक आपके स्कोर को बेहतर करता है, जबकि कम पुराना रिकॉर्ड स्कोर को नीचे ला सकता है.  क्रेडिट रिकॉर्ड के महत्व को समझकर और इसे बिल्ड व मेंटेन करने के तरीके अपनाकर आप अपनी क्रेडिटवर्थिनेस को बढ़ा सकते हैं और बेहतर फाइनेंशियल रिजल्ट्स पा सकते हैं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकते हैं, तो अपने क्रेडिट प्रोफाइल पर नजर रखना न भूलें.

क्रेडिट स्कोर बेहतर करने के लिए पहले कौन से लोन चुकाएं?

लोन मैनेज करना और क्रेडिट स्कोर बेहतर करना एक बैलेंसिंग एक्ट की तरह लग सकता है, लेकिन ये जानना कि पहले कौन से लोन चुकाने चाहिए, आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को इम्प्रूव कर सकता है. स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर लोन, क्रेडिट कार्ड्स और दूसरे क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स लेने के लिए बहुत जरूरी है. स्मार्ट लोन मैनेजमेंट ही क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने का मूल मंत्र है. 

लेकिन, शुरुआत कहां से करें? आइए, लोन चुकाने का सबसे इफेक्टिव तरीका देखें ताकि आपका क्रेडिट स्कोर बढ़े.

क्रेडिट स्कोर को समझें?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है जो आपकी क्रेडिटवर्थीनेस को दिखाता है, जो आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है. अगर आपका क्रेडिट स्कोर हायर साइड पर है, तो लेंडर्स आपको भरोसेमंद बॉरोअर मानते हैं. 750 से ऊपर का क्रेडिट स्कोर एक्सीलेंट माना जाता है, और 600 से 750 के बीच का स्कोर गुड होता है. लेकिन अगर आपका स्कोर 600 से नीचे चला जाता है, तो न्यू लोन या क्रेडिट कार्ड्स लेने में दिक्कत हो सकती है.

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

पेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ, आपके पास मौजूद क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के टाइप्स और हाल की क्रेडिट इंक्वायरीज जैसे कई जरूरी फैक्टर्स आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करते हैं.

अगर आप सोच रहे हैं कि स्कोर कैसे बढ़ाएं, तो पहले सही लोन चुकाने पर फोकस करना जरूरी है. आप मनीकंट्रोल ऐप पर फ्री में इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए पहले कौन से लोन चुकाएं?

कौन से लोन पहले चुकाने हैं, ये तय करने में कई फैक्टर्स मायने रखते हैं, जैसे ओवरड्यू पेमेंट्स, इंटरेस्ट रेट्स और लोन का टाइप.

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए लोन पेमेंट्स को प्रायोरिटाइज करने के कुछ आसान टिप्स:

ओवरड्यू लोन से शुरू करें:

अगर आपके कोई अकाउंट्स डेलिंक्वेंट हैं या कलेक्शंस में चले गए हैं, तो इन्हें सबसे पहले चुकाएं. डेलिंक्वेंट लोन आपके क्रेडिट स्कोर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं और लीगल एक्शन या एसेट्स की सीजिंग तक ले जा सकते हैं. इन अकाउंट्स को पहले क्लियर करने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को और डैमेज होने से बचाया जा सकता है. ये आपके स्कोर को तुरंत रिस्टोर नहीं करेगा, लेकिन ओवरड्यू अकाउंट्स कम करने से धीरे-धीरे आपकी क्रेडिटवर्थीनेस बेहतर होगी.

क्रेडिट कार्ड लोन चुकाएं:

क्रेडिट कार्ड्स पर बाकी लोन की तुलना में हायर इंटरेस्ट रेट्स होते हैं, और ये रिवॉल्विंग लोन की कैटेगरी में आते हैं, यानी इनका कोई फिक्स्ड पेमेंट टर्म नहीं होता. हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन, यानी अपने अवेलेबल क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा यूज करना, आपके क्रेडिट स्कोर को नेगेटिवली इम्पैक्ट करता है. अगर आपका क्रेडिट कार्ड लोन लिमिट के करीब है, तो इसे टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से नीचे लाने की कोशिश करें.

हाई इंटरेस्ट रेट्स वाले लोन चुकाएं:

क्रेडिट कार्ड्स के अलावा, आपके पास पर्सनल लोन जैसे हाई-इंटरेस्ट लोन हो सकते हैं. ये लोन टाइम के साथ इंटरेस्ट की वजह से कॉस्टली हो जाते हैं. इन्हें पहले चुकाने से लॉन्ग टर्म में आपके पैसे बचेंगे. अपने सभी लोन और उनके इंटरेस्ट रेट्स की लिस्ट बनाएं और सबसे हाई इंटरेस्ट रेट्स वाले लोन को पहले टारगेट करें. ये तरीका आपका ओवरऑल लोन बर्डन कम करने के साथ-साथ क्रेडिट स्कोर भी इम्प्रूव करता है.

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लो लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड्स पर फोकस करें:

अगर आपके पास कई क्रेडिट कार्ड्स हैं, तो लो लिमिट वाले कार्ड्स को पहले चुकाएं. इन कार्ड्स पर आउटस्टैंडिंग ड्यूज चुकाने से आपका ओवरऑल क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम होगा, जो क्रेडिट स्कोर इम्प्रूवमेंट का एक बड़ा फैक्टर है. अगर आप इन कार्ड्स को चुकाने के बाद क्लोज करना चाहें, तो आपका टोटल लोन आउटस्टैंडिंग कम हो जाएगा, जो आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को मदद करता है.

स्टूडेंट लोन चुकाएं, अगर हैं:

स्टूडेंट लोन आमतौर पर इंस्टॉलमेंट लोन की कैटेगरी में आते हैं, यानी इनके फिक्स्ड मंथली पेमेंट्स और सेट पीरियड होते हैं. स्टूडेंट लोन चुकाने से आपका डेट-टू-इनकम रेशियो बेहतर हो सकता है, लेकिन ये आपके क्रेडिट स्कोर पर बहुत ड्रामैटिक इम्पैक्ट नहीं डालता.

कई क्रेडिट कार्ड्स पर छोटे बैलेंस:

कई क्रेडिट कार्ड्स पर छोटे-छोटे ड्यूज भी आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. क्रेडिट स्कोरिंग एजेंसीज अक्सर देखती हैं कि कितने कार्ड्स पर बैलेंस है. इन छोटे बैलेंस को चुकाने से आपका स्कोर थोड़ा, लेकिन यूजफुल बूस्ट मिल सकता है. इन छोटे बैलेंस को क्लियर करके अपनी फाइनेंशियल मैनेजमेंट को आसान करें और मल्टिपल अकाउंट्स मैनेज करने का बोझ हटाएं.

लंबे समय से ओवरड्यू बिल्स चुकाएं:

अगर आपके पास लंबे समय से ओवरड्यू बिल्स हैं, तो इन्हें चुकाने में देर नहीं करें. सबसे हाल के पास्ट-ड्यू बिल्स को पहले प्रायोरिटाइज करें, क्योंकि इनका आपके क्रेडिट स्कोर पर सबसे ज्यादा इम्पैक्ट हो सकता है. ओवरड्यू बिल्स चुकाने से क्रेडिट रिपोर्ट से रिकॉर्ड तुरंत नहीं हटेगा, लेकिन लॉन्ग टर्म में आपकी क्रेडिटवर्थीनेस बेहतर होगी.

क्रेडिट स्कोर मॉनिटर और इम्प्रूव करने के स्टेप्स

एक बार जब आपके पास लोन रेपेमेंट की स्ट्रैटेजी तैयार हो, तो अपने प्रोग्रेस को ट्रैक करना जरूरी है. क्रेडिट स्कोर को लगातार मॉनिटर करने से आपको पता चलेगा कि आपके लोन पेमेंट्स स्कोर को कैसे प्रभावित कर रहे हैं.

क्रेडिट स्कोर रेगुलरली चेक करें: क्रेडिट स्कोर ट्रैक करना इसे इम्प्रूव करने का पहला स्टेप है. मनीकंट्रोल ऐप पर आप फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.

क्रेडिट यूटिलाइजेशन ट्रैक करें: अपने क्रेडिट कार्ड बैलेंस पर नजर रखें और सुनिश्चित करें कि ये आपके टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से ज्यादा न हों.

न्यू लोन से बचें: न्यू क्रेडिट या लोन के लिए अप्लाई करने से क्रेडिट रिपोर्ट पर हार्ड इंक्वायरीज की वजह से स्कोर कम हो सकता है. पहले मौजूदा लोन चुकाने पर फोकस करें.

पेमेंट रिमाइंडर्स सेट करें: पेमेंट्स मिस करने से क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव असर पड़ता है. रिमाइंडर्स या ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करके ड्यू डेट्स मिस होने से बचें.

कुल मिलाकर, क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करना एक साथ सभी लोन चुकाने के बारे में नहीं है, बल्कि सही लोन को स्मार्टली चुकाने के बारे में है. ऊपर बताए गए फैक्टर्स पर फोकस करके आप धीरे-धीरे अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं.

याद रखें, आप मनीकंट्रोल ऐप पर फ्री में रेगुलरली अपना क्रेडिट स्कोर चेक करके अपने प्रोग्रेस को ट्रैक कर सकते हैं. चाहे आप क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करना चाहते हों या अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर नजर रखना चाहते हों, मनीकंट्रोल आपको जरूरी टूल्स और इनसाइट्स देता है.