Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन नहीं मिल रहा है? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन लेना पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और ऐप कुछ मिनटों में लोन देने का दावा करते हैं। लेकिन हर आवेदन मंजूर नहीं होता। कई बार अच्छी सैलरी होने के बाद भी लोन रिजेक्ट हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर वजहें पहले से पता हों, तो उनसे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं वो 5 कारण, जिनकी वजह से आपका पर्सनल लोन अटक सकता है।

1. क्रेडिट स्कोर खराब होना

यह सबसे बड़ी वजह होती है। बैंक सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि आपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया या नहीं।

अगर स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो मंजूरी मिलने की संभावना बेहतर रहती है। वहीं कम स्कोर होने पर बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं।

2. पहले से बहुत ज्यादा EMI चलना

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते। वे यह भी देखते हैं कि हर महीने आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है।

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी ₹60,000 है। अगर पहले से ₹30,000 EMI कट रही है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि कुल EMI आपकी कमाई का लगभग 40-50% से ज्यादा न हो।

3. नौकरी या आय स्थिर नहीं होना

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है या आपकी आय नियमित नहीं है, तो बैंक सावधानी बरतते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में सिर्फ एक-दो महीने पहले जॉइन किया है, तो बैंक थोड़ा इंतजार करने को कह सकते हैं। वहीं फ्रीलांसर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों से अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं।

4. बार-बार लोन के लिए आवेदन करना

कई लोग एक साथ कई बैंकों में आवेदन कर देते हैं। यह उल्टा नुकसान कर सकता है।

हर आवेदन का रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है। कम समय में बहुत ज्यादा आवेदन देखकर बैंक मान सकते हैं कि आपको पैसों की ज्यादा जरूरत है। इससे मंजूरी की संभावना घट सकती है।

5. दस्तावेजों में गलती

कई बार छोटी सी गलती भी बड़ी परेशानी बन जाती है।

नाम में अंतर, गलत पता, अधूरी बैंक स्टेटमेंट या आय का सही सबूत न देना आवेदन रोक सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज एक बार जरूर जांच लें।

लोन मंजूर होने की संभावना कैसे बढ़ाएं?

अगर आप पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ये बातें मदद कर सकती हैं।

  • क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर रखने की कोशिश करें।
  • पुरानी EMI कम रखें।
  • समय पर बिल और EMI भरें।
  • एक साथ कई जगह आवेदन न करें।
  • सभी दस्तावेज सही और अपडेटेड रखें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Home Loan: सस्ता लोन पड़ न जाए महंगा! होम लोन लेने से पहले इन 6 पॉइंट्स में समझ लें प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस का पूरा गणित

Home Loan Hidden Charges: नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ बैंक की ब्याज दरों की तुलना करते हैं। लेकिन सच यह है कि लोन लेने का कुल खर्च सिर्फ ब्याज तक सीमित नहीं होता।

बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) आपकी लोन एप्लिकेशन की जांच और प्रोसेसिंग के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम ‘प्रोसेसिंग फीस’ और अन्य चार्जेस के रूप में वसूलती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में कोई छिपा हुआ खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े।

1. क्या होती है होम लोन प्रोसेसिंग फीस?

प्रोसेसिंग फीस वह प्रशासनिक शुल्क है, जो बैंक आपके लोन आवेदन की क्रेडिट जांच, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और अन्य कागजी कार्रवाई के लिए लेता है। यह फीस हर बैंक में अलग-अलग होती है। कुछ बैंक एक तय राशि वसूलते हैं, तो कुछ लोन राशि का 0.25% से लेकर 2% तक चार्ज करते हैं। त्योहारों या विशेष स्कीम के दौरान बैंक इस फीस पर पूरी या आंशिक छूट भी देते हैं।

2. लोन रिजेक्ट होने पर क्या प्रोसेसिंग फीस वापस मिलती है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर लोन मंजूर नहीं हुआ, तो बैंक फीस वापस कर देगा लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को आवेदन के समय ही साफ-साफ बताना होगा कि लोन रिजेक्ट या डिसबर्स न होने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस का कितना हिस्सा रिफंडेबल है। एप्लिकेशन फीस देने से पहले बैंक अधिकारी से रिफंड पॉलिसी लिखित में जरूर समझ लें।

3. प्रोसेसिंग फीस के अलावा ये ‘अतिरिक्त खर्च’ भी समझें

केवल प्रोसेसिंग फीस देखकर किसी लोन को सस्ता न समझें। इसके साथ कई अन्य अपफ्रंट खर्च भी जुड़ते हैं:

लीगल और टाइटिल फीस: प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और कानूनी जांच के लिए।

टेक्निकल और वैल्युएशन चार्ज: प्रॉपर्टी की बाजार में सही कीमत और निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए।

डॉक्यूमेंटेशन फीस: एग्रीमेंट और स्टांप ड्यूटी से जुड़े खर्च।

इस बात का ध्यान दें कि जिस बैंक की प्रोसेसिंग फीस कम दिख रही हो, हो सकता है कि उसके लीगल या टेक्निकल चार्जेस दूसरे बैंकों से ज्यादा हों!

4. केवल ब्याज दर नहीं, ‘ऑल-इन कॉस्ट’ की तुलना करें

दो बैंकों के लोन की तुलना करते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दर न देखें।RBI के आदेशानुसार, बैंक को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन की असली कुल लागत यानी Annual Percentage Rate (APR) लिखा होता है। स्मार्ट तरीका ये है कि दो लोन की तुलना करते समय ब्याज दर + प्रोसेसिंग फीस + अन्य सभी चार्ज को जोड़कर ही फैसला लें।

5. क्या प्रोसेसिंग फीस कम या माफ कराई जा सकती है?

जी हां! बैंक अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर फीस में मोलभाव की गुंजाइश रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है और आपकी जॉब प्रोफाइल स्थिर है, तो आप बैंक से फीस माफ करने या घटाने की मांग कर सकते हैं। बैंक प्रतिनिधि या एजेंट द्वारा दी गई किसी भी छूट या छूट के मौखिक वादे पर भरोसा न करें, इसे आधिकारिक ईमेल या लेटर हेड पर लिखित रूप में ही लें।

6. पेमेंट करने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

आवेदन जमा करने से पहले बैंक से फीस की पूरी सूची मांगें। अगर लोन मंजूर होने के बाद कोई ऐसा चार्ज जोड़ा जाता है जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था, तो आप बैंक से जवाब मांग सकते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, बिना पूर्व जानकारी के ग्राहकों पर नए चार्ज थोपना अनुचित व्यापार प्रथा के अंतर्गत आता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।

बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

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व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

800 का क्रेडिट स्कोर कैसे हासिल करें?

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर हासिल करना कोई छोटी बात नहीं है, और ये आपको बॉरोअर्स की टॉप कैटेगरी में ला खड़ा करता है. इतना हाई क्रेडिट स्कोर लेंडर्स को बताता है कि आप बहुत भरोसेमंद बॉरोअर हैं, जिससे न्यू क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स अप्लाई करने पर आपको बेस्ट टर्म्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है. आप सबसे कम इंटरेस्ट रेट्स, प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स और कई तरह के फाइनेंशियल बेनिफिट्स के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं.

अगर आप अपने क्रेडिट स्कोर को इम्प्रूव करना चाहते हैं, तो 800 के इस खास माइलस्टोन तक पहुंचने के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स यहां दिए गए हैं.

लेकिन पहले, आइए जानें कि गुड क्रेडिट स्कोर क्या होता है.

क्रेडिट स्कोर रेंज

ट्रांसयूनियन CIBIL की अगस्त 2024 में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट, ‘एम्पावरिंग फाइनेंशियल फ्रीडम: द राइज ऑफ क्रेडिट सेल्फ-मॉनिटरिंग इन इंडिया’, के मुताबिक भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. इन्हें कई टियर्स में बांटा गया है:

  • सबप्राइम: 300 से 680
  • नियर प्राइम: 681 से 730
  • प्राइम: 731 से 770
  • प्राइम प्लस: 771 से 790
  • सुपर प्राइम: 791 से 900

इस क्लासिफिकेशन के हिसाब से, 800 का स्कोर आपको सुपर प्राइम कैटेगरी में डालता है, जो लेंडर्स के लिए बहुत अट्रैक्टिव होता है.

800 या उससे ज्यादा क्रेडिट स्कोर के फायदे

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स का रास्ता खोलता है:

हायर अप्रूवल रेट्स: हाई क्रेडिट स्कोर से क्रेडिट कार्ड्स या लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है. लेंडर्स आपको लोअर-रिस्क बॉरोअर मानते हैं, जिससे वो आपको क्रेडिट देने के लिए ज्यादा इच्छुक होते हैं.

लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर क्रेडिट लिमिट्स: 800 से ज्यादा स्कोर के साथ आपको मॉरगेज, कार लोन और क्रेडिट कार्ड्स पर बेहतर इंटरेस्ट रेट्स मिल सकते हैं. उदाहरण के लिए, 800 स्कोर वाला बॉरोअर होम लोन पर 8.5% इंटरेस्ट रेट पा सकता है, जबकि कम स्कोर वाले को 8.8% या उससे ज्यादा रेट मिल सकता है, जिससे लोन की पूरी लाइफ में इंटरेस्ट कॉस्ट काफी बढ़ जाता है.

बेहतर लोन टर्म्स: अगर आपका क्रेडिट स्कोर एक्सीलेंट है, तो लेंडर्स आपको कार लोन और मॉरगेज पर बेहतर टर्म्स ऑफर कर सकते हैं, जिससे आपके सपने पूरे करना आसान हो जाता है.

क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर कैसे मॉनिटर करें

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फ्री में क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. इससे आप इंस्टैंटली अपना स्कोर चेक कर सकते हैं और रेगुलरली मॉनिटर कर सकते हैं.

ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 44% लोग जो अपने स्कोर को एक्टिवली चेक करते हैं, उन्होंने साल में कम से कम चार बार स्कोर चेक किया, और 46% ने छह महीने में अपने स्कोर में इम्प्रूवमेंट देखा. इससे पता चलता है कि रेगुलर मॉनिटरिंग आपके क्रेडिट स्कोर और ओवरऑल फाइनेंशियल वेलबीइंग पर बड़ा असर डाल सकती है.

800 क्रेडिट स्कोर हासिल करने के स्टेप्स

800 का क्रेडिट स्कोर हासिल करना मुश्किल लग सकता है, लेकिन लगातार कोशिश से ये पूरी तरह मुमकिन है. ये रहे स्टेप्स:

हर बार टाइम पर बिल्स चुकाएं: पेमेंट हिस्ट्री आपके CIBIL स्कोर का सबसे जरूरी फैक्टर है. टाइम पर बिल्स चुकाने से लेंडर्स को आपकी रिलायबिलिटी दिखती है. मिस्ड पेमेंट्स को ठीक करना और स्कोर को डैमेज से बचाना मुमकिन है, लेकिन बेस्ट स्ट्रैटेजी है कि लेट पेमेंट्स से पूरी तरह बचा जाए. अभी क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (CIs) यानी लेंडर्स को हर महीने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनीज (CICs) को देना होता है. लेकिन 1 जनवरी 2025 से बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस क्रेडिट रिकॉर्ड्स को और बार-बार अपडेट करेंगे. 8 अगस्त को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने सुझाव दिया कि क्रेडिट डेटा हर 15 दिन में, यानी महीने की 15 तारीख और आखिरी दिन, या इससे भी कम समय में अपडेट हो. इसका मतलब है कि टाइमली पेमेंट्स और भी जरूरी हो जाएंगे.

क्रेडिट कार्ड बैलेंस कम रखें: क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो एक बड़ा फैक्टर है, जो आपके क्रेडिट कार्ड बैलेंस को टोटल क्रेडिट लिमिट्स से कम्पेयर करता है. 30% से कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट आइडियल माना जाता है. बैलेंस कम रखना रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है और आपके स्कोर को पॉजिटिवली इम्पैक्ट करता है.

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क्रेडिट हिस्ट्री का ध्यान रखें: क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ भी आपके स्कोर में अहम रोल प्ले करती है. आमतौर पर लंबी क्रेडिट हिस्ट्री से हायर स्कोर मिलता है. क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल्स आपके सबसे पुराने अकाउंट की उम्र, सबसे नए अकाउंट और सभी अकाउंट्स की एवरेज उम्र देखते हैं. अच्छी स्टैंडिंग वाला क्रेडिट अकाउंट क्लोज करने से पहले इसके कॉन्सिक्वेंसेस पर विचार करें. अकाउंट क्लोज करने से क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है और ओवरऑल क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है, जो आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. अकाउंट क्लोज करने की बजाय, अगर आप फीस से बचना चाहते हैं, तो नो एनुअल फी वाले क्रेडिट कार्ड पर स्विच करने पर विचार करें.

क्रेडिट मिक्स बेहतर करें: अलग-अलग तरह के क्रेडिट अकाउंट्स आपके स्कोर को पॉजिटिवली प्रभावित कर सकते हैं. अगर आपके पास ज्यादातर इंस्टॉलमेंट लोन (जैसे पर्सनल लोन या कार लोन) हैं, तो क्रेडिट कार्ड जोड़ने से क्रेडिट मिक्स बेहतर हो सकता है. डायवर्स क्रेडिट प्रोफाइल ये दिखाता है कि आप अलग-अलग टाइप्स के क्रेडिट को मैनेज कर सकते हैं, जिससे आपका स्कोर इम्प्रूव हो सकता है.

क्रेडिट रिपोर्ट्स रिव्यू करें: कभी-कभी कम क्रेडिट स्कोर आपकी गलती की वजह से नहीं होता. क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. रेगुलरली क्रेडिट रिपोर्ट्स चेक करने से गलत इन्फॉर्मेशन को पकड़ा और डिस्प्यूट किया जा सकता है. अगर आपको कोई गड़बड़ दिखे, तो उस लेंडर से कॉन्टैक्ट करें जिसने इन्फॉर्मेशन दी या क्रेडिट ब्यूरो से गलती ठीक करवाएं.

कुल मिलाकर, गुड क्रेडिट स्कोर हासिल करना या 800 की टियर में पहुंचना समय ले सकता है, लेकिन ये कोशिश वर्थवाइल है. आपका क्रेडिट स्कोर क्रेडिट लेने की आपकी एबिलिटी और लेंडर्स के ऑफर किए टर्म्स, जैसे मॉरगेज पर इंटरेस्ट रेट्स, को प्रभावित करता है.

800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर दिखाता है कि आप एक एक्सीलेंट बॉरोअर हैं. इससे बेहतर लोन टर्म्स और बेस्ट रिवॉर्ड्स व परक्स वाले क्रेडिट कार्ड्स मिल सकते हैं. इस गोल को अचीव करने के लिए याद रखें कि ये एक लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल कमिटमेंट है और इसके लिए सालों तक डिसिप्लिंड मनी मैनेजमेंट की जरूरत होती है. अपने प्रोग्रेस को मॉनिटर करने के लिए, मनीकंट्रोल ऐप पर फ्री में इंस्टैंटली क्रेडिट स्कोर चेक करें, ताकि आप अपनी क्रेडिट हेल्थ को मैनेज करने में प्रोएक्टिव रहें.

RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

RBI loan recovery rules: अगर आपने पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की EMI नहीं चुकाई है, तो भी बैंक आपका मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट लॉक नहीं कर सकेंगे। RBI ने साफ कर दिया है कि ऐसा सिर्फ उसी स्थिति में हो सकता है, जब उसी डिवाइस को खरीदने के लिए बैंक ने लोन दिया हो। इसमें भी कुछ शर्तें रहेंगी।

बैंकों और रिकवरी एजेंटों की सख्त वसूली, उत्पीड़न और ग्राहकों के डेटा के गलत इस्तेमाल की शिकायतों के बाद RBI ने यह फैसला लिया है। RBI ने 6 अगस्त 2026 को नए नियम जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

कब लॉक हो सकता है डिवाइस?

अगर बैंक ने उसी मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की खरीद के लिए लोन दिया है, तभी उस पर पाबंदी लगाई जा सकती है। लेकिन यह भी तुरंत नहीं होगा।

RBI के मुताबिक, पहले बैंक को नोटिस देना होगा। अगर नोटिस के बाद भी 30 दिन तक किस्त नहीं चुकाई जाती, तभी सीमित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। पूरी तरह लॉक करने की कार्रवाई 60 दिन बाद ही हो सकेगी और वह भी तभी, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में हो।

जरूरी सुविधाएं बंद नहीं होंगी

बैंक किसी भी हाल में इनकमिंग कॉल, SMS और इमरजेंसी SOS जैसी जरूरी सुविधाएं बंद नहीं कर सकेंगे। यानी जरूरत पड़ने पर आप इनका इस्तेमाल करते रहेंगे।

रिकवरी एजेंट नहीं कर सकेंगे परेशान

RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। वे गाली-गलौज नहीं कर सकते। धमकी नहीं दे सकते। सोशल मीडिया पर बदनाम नहीं कर सकते। रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों पर दबाव डालने के लिए संपर्क भी नहीं कर सकते।

निजी डेटा भी रहेगा सुरक्षित

बैंक या उनकी थर्ड पार्टी एजेंसियां आपके फोन का निजी डेटा नहीं देख सकेंगी। कॉन्टैक्ट्स, SMS, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी हालत में लोन वसूली के लिए नहीं किया जा सकेगा।

इसका मतलब क्या है?

इन नियमों का मतलब यह नहीं है कि लोन माफ हो गया। EMI नहीं चुकाने पर ब्याज लगेगा, क्रेडिट स्कोर खराब होगा और बैंक कानूनी तरीके से वसूली कर सकेंगे। लेकिन अब वे ग्राहकों को डराने या उनकी निजी डिवाइस और डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

Kisan Credit Card: कैसे बनवाएं किसान क्रेडिट कार्ड? जानें डॉक्यूमेंट और अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

बैंक ने अचानक क्यों रिजेक्ट कर दिया लोन? जानिए राजेश की इस एक भूल ने कैसे बिगाड़ा CIBIL का खेल!

Checking Credit Report Benefits: राजेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और सालों से अपनी हर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का बिल बिल्कुल समय पर भरते आए थे। उन्हें पूरा यकीन था कि उनका क्रेडिट स्कोर शानदार होगा। लेकिन जब वे अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन अप्लाई करने बैंक पहुंचे, तो बैंक अफसर ने उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया।

वजह थी उनकी क्रेडिट रिपोर्ट में एक ऐसा लोन ‘एक्टिव’ दिख रहा था, जिसे वे सालों पहले बंद कर चुके थे। साथ ही, एक ऐसे अनजान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज थी, जिसके लिए उन्होंने कभी अप्लाई ही नहीं किया था।

राजेश की तरह ज्यादातर लोग क्रेडिट रिपोर्ट को तभी याद करते हैं जब उन्हें किसी लोन या नए क्रेडिट कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच न करना आपको भारी मुसीबत और वित्तीय नुकसान में डाल सकता है।

साल में कम से कम एक बार जरूर करें ‘फाइनेंशियल चेकअप’

बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उन्होंने कोई ईएमआई मिस नहीं की है, तो रिपोर्ट देखने की क्या जरूरत? लेकिन जैसे हम अपनी सेहत के लिए रूटीन बॉडी चेकअप कराते हैं, वैसे ही साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना बेहद जरूरी है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी लोन हिस्ट्री और पर्सनल डिटेल्स सही तरीके से दर्ज हो रही हैं।

बड़ा लोन लेने से कुछ महीने पहले रिपोर्ट देखना क्यों है जरूरी?

अगर आप आने वाले कुछ महीनों में होम लोन, कार लोन या कोई बड़ा पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से ठीक पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर खंगालें। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी या गलत एंट्री पाई जाती है, तो उसे ठीक कराने में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लगता है। लोन रिजेक्ट होने के बाद दौड़-भाग करने से बेहतर है कि आप पहले ही सतर्क रहें।

क्रेडिट रिपोर्ट में हो सकती हैं मानवीय और तकनीकी गलतियां

क्रेडिट रिपोर्ट पूरी तरह से गलतियों से मुक्त नहीं होती। कई बार बंद किए जा चुके लोन अकाउंट भी सिस्टम में ‘एक्टिव’ दिखाई देते हैं। समय पर चुकाई गई ईएमआई ‘डिलीटेड’ या ‘लेट पेमेंट’ के रूप में दर्ज हो जाती है। नाम या पैन कार्ड की स्पेलिंग मिस्टेक या आइडेंटिफिकेशन एरर की वजह से किसी और का लोन आपके नाम पर लिंक हो जाता है।

अनजान लोन या क्रेडिट कार्ड: कैसे करें फ्रॉड की पहचान

अगर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते समय आपको कोई ऐसा क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट दिखाई दे जिसके लिए आपने कभी अप्लाई ही नहीं किया था, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह आइडेंटिटी थेफ्ट या जालसाजी का संकेत हो सकता है। समय रहते शिकायत करने से आप किसी बड़े फ्रॉड का शिकार होने से बच सकते हैं।

सिर्फ 3 अंकों के क्रेडिट स्कोर पर न अटके रहें

ज्यादातर लोग सिर्फ अपना 3-अंकों का CIBIL/क्रेडिट स्कोर देखकर खुश या दुखी हो जाते हैं। लेकिन बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ स्कोर ही नहीं, बल्कि पूरी रिपोर्ट की बारीकियों को देखते हैं:

  • आपके नाम पर कितने एक्टिव लोन चल रहे हैं?
  • आपने हाल में कितनी बार लोन के लिए इन्क्वायरी की है?
  • आपकी पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री कैसी रही है?

केवल रिपोर्ट देखने से नहीं सुधरेगा स्कोर, करने होंगे ये बदलाव

क्रेडिट रिपोर्ट सिर्फ एक आईना है। सिर्फ रिपोर्ट चेक करने से आपका क्रेडिट स्कोर नहीं बढ़ेगा। स्कोर बढ़ाने और बनाए रखने का असली तरीका आपकी वित्तीय आदतें हैं यानी समय पर ईएमआई भरना, क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल करना और गैर-जरूरी लोन लेने से बचना। नियमित रिपोर्ट चेक करने का काम सिर्फ इतना है कि यह आपकी अच्छी आदतों पर कोई गलत दाग नहीं लगने देती।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या मौजूदा EMIs से आपको पर्सनल लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है?

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी मौजूदा EMIs काफी मायने रखती है, जो आपके फाइनैंशियल प्रोफाइल का सबसे अहम हिस्सा है। इनसे पता चलता है कि आपकी हर महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही लोन चुकाने में जा रहा है, जिससे लोन देने वाले संस्थान यह तय करते हैं कि आप एक नई EMI आसानी से चुका पाएँगे या नहीं। पुरानी EMI का बोझ ज़्यादा होने से आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कम हो सकती है, मिलने वाले लोन की रकम घट सकती है, या लोन चुकाने की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि, पहले से लोन होने का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन मिल ही नहीं सकता। लोन लेने वाले संस्थान फैसला लेने से पहले कई बातों पर गौर करते हैं, जिनमें आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, लोन चुकाने का पिछला रिकॉर्ड और आपकी बाकी की देनदारियां शामिल हैं।

अगर आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि मौजूदा EMI आपकी एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं, जिससे आपको ज़िम्मेदारी से लोन लेने और आपके लिए सही लोन मिलने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मौजूदा EMI आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं?

आपकी हर महीने की EMI से आपकी मौजूदा आर्थिक देनदारियों का पता चलता है। जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो लोन देने वाले संस्थान आपकी इनकम के साथ-साथ इन देनदारियों को भी देखते हैं, उसके आधार पर तय करते हैं कि आप एक और लोन आसानी से चुका पाएंगे या नहीं।

वे आमतौर पर नीचे दी गई बातों पर गौर करते हैं:

  • महीने की इनकम
  • महीने का खर्च
  • शहर
  • जन्म तिथि

अगर आपके महीने की इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा EMI चुकाने में खर्च हो जाता है, तो इसकी वजह से लोन चुकाने की आपकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में, लोन देने वाले संस्थान आपकी फाइनैंशियल प्रोफाइल के आधार पर आपको कम लोन दे सकते हैं या लोन चुकाने की समय-सीमा बदल सकते हैं।

लोन देने वाले संस्थान मौजूदा EMI पर क्यों गौर करते हैं?

लोन देने वाले संस्थान यह पक्का करना चाहते हैं कि ग्राहक किसी आर्थिक दबाव के बिना आसानी से लोन चुका सकें। मौजूदा EMI से उन्हें आपके मौजूदा लोन की जानकारी मिलती है और वे यह तय कर पाते हैं कि आपके लिए एक और लोन लेना सही रहेगा या नहीं।

लोन चुकाने से जुड़ी अपनी देनदारियों पर अच्छी तरह गौर करने से ज़िम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और समय पर भुगतान न हो पाने का जोखिम भी कम होता है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे मदद कर सकता है?

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में दी गई आर्थिक जानकारी के आधार पर आप मिलने वाले लोन की रकम का अंदाजा लगा सकते हैं।

आमतौर पर, इसमें आपको कुछ जानकारी भरनी होती है जैसे कि:

• महीने की इनकम

• मौजूदा EMIs

• रोज़गार का प्रकार

• लोन की पसंदीदा समय-सीमा

यह कैलकुलेटर कुछ ही सेकंड में बता देता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है। हालाँकि यह नतीजा सिर्फ़ एक अंदाज़ा होता है, लेकिन लोन के लिए आवेदन करने से पहले पैसों का हिसाब-किताब लगाने में इससे काफी मदद मिलती है।

कौन-सी बातें आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर डालती हैं?

मौजूदा EMI तो बस मूल्यांकन का एक हिस्सा हैं। लोन देने वाले संस्थान पर्सनल लोन को मंजूरी देने से पहले दूसरी कई बातों पर भी गौर करते हैं।

महीने की इनकम

आम तौर पर, ज़्यादा और स्थिर इनकम से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी भी बढ़ सकती है।

क्रेडिट स्कोर

अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के संबंध में आपके ज़िम्मेदारी भरे रवैये को दिखाता है। अगर आप अपने EMI और बिल का समय पर भुगतान करते हैं तो आपको अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नौकरी में स्थिरता

नौकरीपेशा या अपना रोजगार करने वाले जिन लोगों की इनकम में स्थिरता है और लगातार नौकरी का रिकॉर्ड भी बेहतर है तो ऐसे लोगों को लोन मिलने की संभावना थोड़ी ज्यादा होती है।

लोन की समय-सीमा

लोन चुकाने के लिए लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी महीने की EMI कम हो सकती है, हालाँकि इससे पूरे लोन के दौरान कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

मौजूदा आर्थिक देनदारियाँ

लोन की EMI के अलावा, लोन देने वाले संस्थान आपके लोन चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाते समय आपकी कुल आर्थिक देनदारियों पर भी गौर कर सकते हैं।

क्या आप अपनी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं?

भले ही एलिजिबिलिटी कई बातों पर निर्भर करती है, पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप अपने फाइनैंशियल प्रोफाइल को और बेहतर बना सकते हैं।

आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

•अपने मौजूदा EMIs का समय पर भुगतान करना

• जहां तक हो सके, बकाया लोन कम करना

• थोड़े समय के भीतर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से बचना

• अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना।

• लोन चुकाने के लिए सही समय-सीमा चुनना

• सिर्फ़ उतनी ही रक़म के लिए आवेदन करना जिसकी आपको असल में ज़रूरत हो

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से न सिर्फ़ आपकी एलिजिबिलिटी बेहतर होती है, बल्कि आपको लोन चुकाने में भी आसानी होती है।

पर्सनल लोन फाइनेंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन बेहद सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसके लिए कोलेटरल की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग पहले से तय या अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों के लिए किया जा सकता है।

आप निम्नलिखित कामों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं:

• मेडिकल इमरजेंसी

• आगे की पढ़ाई

• शादी का खर्च

• घर की मरम्मत

• ट्रैवल का खर्च

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसे चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा मिलती है। आपकी एलिजिबिलिटी और क्रेडिट प्रोफ़ाइल के आधार पर ब्याज़ दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच हो सकती हैं। इस लोन के लिए किसी कोलेटरल की जरूरत नहीं पड़ती है, तुरंत मंजूरी मिल जाती है, कागजी कार्रवाई कम होती है और लोन की शर्तों को पूरा करने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर पैसे मिल जाते हैं।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकते हैं?

आपकी एलिजिबिलिटी लोन देने वाले संस्थान के नियमों और आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर, लोगों की एलिजिबिलिटी जांचने के लिए इन बातों को देखा जाता है:

 

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल तक
नौकरीपब्लिक, प्राइवेट या MNC
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार या नौकरीपेशा

लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए

लोन पाने की शर्तें पूरी करने से लोन मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।

आमतौर पर किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए बहुत कम दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। यहाँ उन दस्तावेज़ों की सूची दी गई है जिनकी आवेदन के समय ज़रूरत होती है:

दस्तावेज़ों की श्रेणीमान्य विकल्प
KYC संबंधी दस्तावेज आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र/ NREGA जॉब कार्ड
पहचान संबंधी दस्तावेजPAN कार्ड, वास्तविक समय की तस्वीर/फोटो
रोज़गार संबंधी दस्तावेज कर्मचारी पहचान पत्र, नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
इनकम प्रूफ  पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
अन्य पेंशन ऑर्डर, आवश्यक सेवाओं के बिल, फ़ोन बिल, पाइप्ड गैस बिल, प्रॉपर्टी या नगरपालिका की टैक्स रसीद

लोन चुकाने के विकल्प बेहतर फाइनैंशियल प्लानिंग में कैसे मदद करते हैं?

  • लोन चुकाने की सही समय-सीमा चुनना आपके महीने के बजट को अच्छी तरह संभालने में अहम भूमिका निभाता है।
  • लोन चुकाने की समय सीमा काम हो ने से कुल ब्याज़ तो कम हो सकता है, लेकिन आपकी मासिक EMI बढ़ सकती है। वहीं, लोन चुकाने की लंबी समय-सीमा से आपके महीने की EMI कम हो सकती है, क्योंकि इसमें लोन चुकाने का समय बढ़ जाता है।
  • पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, अपनी महीने की इनकम, मौजूदा EMI और अपने आर्थिक लक्ष्यों पर जरूर गौर करें ताकि आप अपने बजट के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकें।
  • ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • पर्सनल लोन लेने से आपको अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलनी चाहिए, न कि आप पर बेवजह का आर्थिक दबाव पड़ना चाहिए।

लोन लेने से पहले:

• अपनी हर महीने की लोन चुकाने की क्षमता का सही अंदाज़ा लगाएं

• सिर्फ़ उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको ज़रूरत हो

• सभी EMI का भुगतान समय पर करते रहें

• अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिए पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

• ऑफ़र मान लेने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आपको अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ एक अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

मौजूदा EMIs आपके पर्सनल लोन की एलिजिबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये आपकी हर महीने लोन चुकाने की क्षमता पर असर डालती हैं। आपकी इनकम, क्रेडिट प्रोफ़ाइल, नौकरी की स्थिरता और लोन चुकाने के पिछले रिकॉर्ड के साथ-साथ, ये लोन देने वाले संस्थानों को यह समझने में मदद करती हैं कि आप ज़िम्मेदारी से कितना लोन ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से आपको एक अंदाज़ा मिलता है और आप भरोसे के साथ अपने फ़ाइनेंस की योजना बना पाते हैं।

नियम व शर्तें लागू

अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या होता है? जानें इसका मतलब और इसे कैसे बेहतर करें

अपने क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना खुद की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है. भारत में आपको लोन, क्रेडिट कार्ड्स या दूसरी क्रेडिट फैसिलिटीज आसानी से तभी मिल सकती हैं, जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो. ट्रांसयूनियन CIBIL की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 119 मिलियन भारतीयों ने अपना CIBIL स्कोर चेक किया था. ये पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा है, यानी 43.6 मिलियन ज्यादा लोग अपने क्रेडिट स्टेटस को लेकर एक्टिव हुए हैं. खास बात ये कि Gen Z और मिलेनियल्स 77% हिस्सेदारी के साथ इसमें सबसे आगे हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 46% लोग, जो रेगुलर अपने CIBIL स्कोर और रिपोर्ट चेक करते हैं, 6 महीने में अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर कर लेते हैं. ये उन 41% लोगों से ज्यादा है, जो अपने स्कोर पर ध्यान नहीं देते. यानी क्रेडिट को एक्टिवली मैनेज करने से स्कोर बेहतर होता है, जिससे कम इंटरेस्ट रेट्स, अच्छे ऑफर्स और ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है. आइए, समझते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है.

क्रेडिट स्कोर क्या है?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है, जो आपकी क्रेडिटवर्थिनेस दिखाता है, यानी आप उधार लिया पैसा चुकाने में कितने काबिल हैं. ये आपके क्रेडिट हिस्ट्री पर बेस्ड होता है. भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 तक होता है. 750 से 900 का स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है.

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क्रेडिट स्कोर की रेंज को ऐसे समझें:

  • 750-900: ये शानदार स्कोर है. इस रेंज में आपको क्रेडिट आसानी से मिलेगा और अच्छे टर्म्स पर.
  • 650-749: ये अच्छी रेंज है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ठीक है, लेकिन टॉप स्कोर जितनी मजबूत नहीं.
  • 550-649: ये एवरेज रेंज है. क्रेडिट मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा हो सकते हैं और टर्म्स उतने अच्छे नहीं.
  • 550 से नीचे: ये कमजोर स्कोर है. इस रेंज में क्रेडिट पाना मुश्किल हो सकता है.

भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो हैं, इनमें ट्रांसयूनियन CIBIL, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और CRIF हाई मार्क शामिल हैं. हर ब्यूरो की रेंज और इंटरप्रिटेशन में थोड़ा अंतर हो सकता है.  

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

आपके क्रेडिट स्कोर को ये चीजें प्रभावित करती हैं:

  • पेमेंट हिस्ट्री: लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI टाइम पर चुकाना बहुत जरूरी है. लेट पेमेंट्स या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नीचे ला सकते हैं.
  • क्रेडिट यूसेज: अपनी क्रेडिट लिमिट का ज्यादा यूज करना स्कोर को नुकसान पहुंचाता है. कोशिश करें कि 30% से ज्यादा लिमिट इस्तेमाल न हो.
  • लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके स्कोर को बेहतर करता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट बिहेवियर की ज्यादा जानकारी मिलती है.
  • क्रेडिट टाइप्स: क्रेडिट कार्ड्स और लोन जैसे अलग-अलग क्रेडिट का मिक्स होना अच्छा है, बशर्ते आप इन्हें जिम्मेदारी से मैनेज करें.
  • नए क्रेडिट एप्लिकेशंस: छोटे वक्त में कई क्रेडिट कार्ड्स या लोन के लिए अप्लाई करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. हर एप्लिकेशन से हार्ड इन्क्वायरी होती है, जो स्कोर को थोड़ा कम करती है.

क्रेडिट स्कोर कैसे बेहतर करें?

क्रेडिट स्कोर को बेहतर करना आसान नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से यह संभव है. ये रहे कुछ टिप्स:

  • टाइम पर बिल्स पे करें: क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और लोन EMI हमेशा टाइम पर चुकाएं. ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करें ताकि ड्यू डेट मिस न हो.
  • क्रेडिट कम यूज करें: अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा यूज न करें. इससे लेंडर्स को लगता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट रेगुलर चेक करें और कोई गलती या फ्रॉड दिखे तो ठीक करवाएं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.
  • नए क्रेडिट के लिए ज्यादा जल्दबाज़ी न करें: हर एप्लिकेशन से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है. जरूरत पड़ने पर ही नए क्रेडिट के लिए अप्लाई करें.
  • हेल्दी क्रेडिट मिक्स रखें: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिट का बैलेंस आपके स्कोर को बेहतर कर सकता है.

क्रेडिट स्कोर को कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब आपके पास सही टूल्स हों. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म आपको आपकी क्रेडिट हेल्थ की लेटेस्ट अपडेट देता है. चाहे आप अपना स्कोर जानना चाहें या उसे बेहतर करना चाहें, मनीकंट्रोल के टूल्स और इनसाइट्स आपकी मदद करेंगे.

कुल मिलाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और मौकों को आसान बनाता है. भारत में 750 या उससे ज्यादा का स्कोर शानदार माना जाता है और लेंडर्स के लिए आपका फेवर बढ़ाता है. क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर और उसे मैनेज करने के लिए सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं और अच्छे क्रेडिट टर्म्स पा सकते हैं.

पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

पर्सनल लोन एक फ्लेक्सिबल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जो लोगों को बड़े खर्चों जैसे शिक्षा, शादी, वेकेशन, घर का रेनोवेशन, मेडिकल बिल या गैजेट खरीदने में मदद करता है. यह फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट क्रेडिट कार्ड के मुकाबले एक किफायती विकल्प है और लोन अमाउंट को मासिक किस्तों (EMIs) में चुकाने की सुविधा देता है.

हालांकि, इस लोन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रेडिट स्कोर, इंटरेस्ट रेट और एक्स्ट्रा चार्ज जैसे फैक्टर पर ध्यान देना भी जरूरी है. इससे आप कुछ आम गलतियों से बच सकते हैं, जैसे गलत लेंडर चुन लेना, गलत लोन टेन्योर लेना या जरूरत से ज्यादा लोन लेना.

किसी भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पर्सनल लोन लेने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें:  

1. अलग-अलग मार्केट इंटरेस्ट रेट की तुलना करें

अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट की तुलना करने से आपको सबसे कम रेट वाला लोन मिल सकता है. BankBazaar, Paisabazaar और MyLoanCare जैसे प्लेटफॉर्म इस तुलना को आसान बनाते हैं.

सस्ते इंटरेस्ट रेट और सही इंटरेस्ट टाईप (जैसे फिक्स्ड या फ्लोटिंग) चुनने से लोन रीपेमेंट आसान हो जाता है.

मनीकंट्रोल (Moneycontrol) ऐप और वेबसाइट पर आप 10+ लेंडर के पर्सनल लोन ऑफर की तुलना कर सकते हैं. यहां इंटरेस्ट रेट सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होते हैं, और आप 50 लाख रुपए तक का लोन पूरी तरह डिजिटल प्रोसेस के जरिए ले सकते हैं.

2. लोन अमाउंट, टेन्योर और रीपेमेंट

लोन अमाउंट, टेन्योर और पेमेंट सीधे तौर पर EMI को प्रभावित करते हैं. सही अमाउंट, फ्लेक्सिबल टेन्योर और मैनेज करने योग्य EMI चुनने से आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही लोन चुन सकते हैं.

3. हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखें

आपकी क्रेडिटवर्थिनेस आपकी क्रेडिट हिस्ट्री से तय होती है, जिसे CIBIL स्कोर कहा जाता है. आपका स्कोर कम-से-कम 700 या इससे ज्यादा होना चाहिए.

कोई भी बकाया समय पर चुकाने से क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहता है. अगर आपका स्कोर कम है तो लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है या आपको ऊंचे इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है.

4. लोन से जुड़े हर खर्च का आकलन करें

लोन लेने से पहले उससे जुड़े सभी खर्च जैसे प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनल्टी पर गौर करें. इससे आपको कुल खर्च का सही आकलन मिलेगा और आप बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर पाएंगे.

5. सही लोन अमाउंट चुनें

लोन अमाउंट अपनी जरूरत और खर्चों के हिसाब से तय करें. अगर आपकी जरूरतें और खर्च अनिश्चित हैं, तो फ्लेक्सी पर्सनल लोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

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6. रीपेमेंट की क्षमता जांचें

लोन अप्लाई करने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी इनकम लोन को समय पर चुकाने के लिए काफी है या नहीं. पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर जैसे टूल का इस्तेमाल करके आप मासिक किस्तों का अंदाजा लगा सकते हैं. ऐसा करने से, बाकी फाइनेंशियल लायबिलिटी से समझौता किए बिना EMI प्लान करना आसान हो जाता है.

7. धोखाधड़ी वाले ऑफर और सर्विस से बचें

ऐसे ऑफर जो बहुत ज्यादा किफायती या आकर्षक लग रहे हैं, उनसे सावधान रहें. ऑफर का फाइन प्रिंट जरूर पढ़ें ताकि हिडन चार्ज या अचानक आने वाले खर्चों से बचा जा सके. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि लोन की शर्तें साफ और समझने योग्य हैं.

कुछ लेंडर सस्ते इंटरेस्ट रेट का दावा करते हैं लेकिन बाद में एक्स्ट्रा फीस जोड़ देते हैं. इसलिए हमेशा ऐसे लेंडर को चुनें जो पारदर्शी और ईमानदार हो.

8. लेंडर की रेप्यूटेशन और कस्टमर सर्विस चेक करें

लोन लेने से पहले लेंडर की मार्केट रेप्यूटेशन और उनकी कस्टमर सर्विस की क्वालिटी पर रिसर्च करें. इसके लिए आप RBI की वेबसाइट, Trustpilot या Google Reviews पर कस्टमर रिव्यू और रेटिंग देख सकते हैं.

एक भरोसेमंद लेंडर का चुनाव आपके लोन एक्सपीरियंस को आसान और सुरक्षित बनाता है.

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन लेते समय इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, रीपेमेंट क्षमता, हिडन फीस और लेंडर की रेप्यूटेशन जैसे फैक्टर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. अलग-अलग ऑफर की तुलना कर, अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखकर और लोन की शर्तें समझकर आप अपनी फाइनेंशियल जरूरत के लिए सबसे बेहतर फैसला ले सकते हैं.

मनीकंट्रोल के ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर आप 10+ लेंडर से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन ले सकते हैं. इन पर इंटरेस्ट रेट सिर्फ 9.99% सालाना से शुरू होते हैं. यह प्रोसेस 100% पेपरलेस है.

क्रेडिट पेमेंट हिस्ट्री को बेहतर कैसे करें?

क्रेडिट स्कोर को ज्यादा बनाए रखने के लिए अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री होना बहुत जरूरी है. पेमेंट हिस्ट्री को अच्छे से मैनेज करके आप अपने क्रेडिट स्कोर को सुधार सकते हैं. आपकी पेमेंट हिस्ट्री आपके फ्यूचर क्रेडिट और लोन की संभावनाओं को प्रभावित करती है. हायर क्रेडिट स्कोर से आप नए क्रेडिट कार्ड से लेकर बेस्ट हाउसिंग लोन तक कई फाइनेंशियल सर्विसेज ले सकते हैं. हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री के साथ आप कई क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स और सर्विसेज को कम इंटरेस्ट रेट्स पर हासिल कर सकते हैं.

यहां हम बता रहे हैं  कि आप अपनी क्रेडिट हिस्ट्री को कैसे बेहतर कर सकते हैं, जो आपके क्रेडिट स्कोर को बढ़ाने में मदद करेगा.

हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री कैसे बनाएं

समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें

क्रेडिट पेमेंट हिस्ट्री को बेहतर करने का पहला स्टेप है अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को समझना. इसमें आपके सारे क्रेडिट एक्टिविटीज की डिटेल्स होती हैं, जैसे कि आपने अपने बिल्स कितने टाइम पर चुकाए हैं.

रेगुलर इंटरवल्स पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें ताकि हिस्ट्री में कोई गलती हो तो उसे ठीक किया जा सके. आप मनीकंट्रोल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फ्री में क्रेडिट रिपोर्ट देख सकते हैं. ये सर्विस सीआरआईएफ हाईमार्क के साथ पार्टनरशिप में दी जाती है, जो आपकी क्रेडिट स्टेटस का डिटेल्ड ओवरव्यू देती है. अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में किसी भी गलती या गड़बड़ी को चेक करें. अगर कोई गलती मिले, तो संबंधित अथॉरिटीज से कांटेक्ट करके उसे ठीक करवाएं, क्योंकि गलतियां आपके क्रेडिट स्कोर हिस्ट्री को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकती हैं.

समय पर बिल्स चुकाएं

कंसिस्टेंट और टाइमली बिल पेमेंट्स आपकी क्रेडिट पेमेंट हिस्ट्री को बेहतर करने में मदद करते हैं. ये आपकी भरोसे का प्रूफ है और क्रेडिट स्कोर पर पॉजिटिव असर डालता है. 

-रिमाइंडर्स सेट करें: अपने फोन या कैलेंडर पर रिमाइंडर्स लगाएं ताकि पेमेंट ड्यू डेट्स याद रहें.

-पेमेंट्स ऑटोमेट करें: ऑटोमेटेड पेमेंट्स सेट करें ताकि हर महीने बिल्स टाइम पर चुक जाएं और मिस होने का रिस्क कम हो.

-पेमेंट्स को प्रायोरिटाइज करें: उन बिल्स को पहले चुकाएं, जो आपके क्रेडिट स्कोर पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं, जैसे क्रेडिट कार्ड बिल्स और लोन रिपेमेंट्स.

आउटस्टैंडिंग डेट कम करें

बहुत ज्यादा डेट आपके क्रेडिट स्कोर हिस्ट्री को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकता है और अच्छी पेमेंट हिस्ट्री बनाए रखना मुश्किल कर सकता है. डेट को चुकाकर और कम करके आप बेहतर क्रेडिट और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पा सकते हैं.

-बजट बनाएं: अपने खर्चों पर नजर रखने और डेट चुकाने के लिए एक्स्ट्रा पैसे सेट करने के लिए बजट बनाएं.

-हाई-इंटरेस्ट डेट पहले चुकाएं: हाई-इंटरेस्ट बिल्स को पहले चुकाने पर फोकस करें ताकि पैसे बचें और टोटल डेट कम हो.

-क्रेडिटर्स से बात करें: अपने क्रेडिटर्स से बात करें और कम इंटरेस्ट रेट्स या बेहतर पेमेंट टर्म्स के ऑप्शन्स डिस्कस करें.

लेट पेमेंट्स से बचें

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लेट पेमेंट्स आपके अच्छे क्रेडिट स्कोर को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए पॉजिटिव क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने के लिए कोई भी पेमेंट मिस न करें.

-समय-समय पर स्टेटमेंट्स चेक करें: अपने क्रेडिट अकाउंट ऐप्स या स्टेटमेंट्स को समय-समय पर चेक करें ताकि सारी ड्यू डेट्स पता रहें.

-पेमेंट टूल्स यूज करें: ऑटो-पे या थर्ड-पार्टी ऐप्स जैसे टूल्स इस्तेमाल करें, जो टाइमली पेमेंट रिमाइंडर्स भेजते हैं.

-क्रेडिटर्स से कांटेक्ट करें: अगर आपको फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स का अंदाजा है, तो क्रेडिटर्स से बात करें और रिलीफ ऑप्शन्स डिस्कस करें.

क्रेडिट यूज पर नजर रखें

आपका क्रेडिट स्कोर क्रेडिट यूटिलाइजेशन से प्रभावित होता है, यानी आपके इस्तेमाल किए गए क्रेडिट और अप्रूव्ड लिमिट का रेशियो. ऑप्टिमल क्रेडिट यूसेज से आपकी क्रेडिट पेमेंट हिस्ट्री बेहतर हो सकती है.

-यूटिलाइजेशन कम रखें: अच्छे क्रेडिट स्कोर के लिए क्रेडिट यूटिलाइजेशन को कम रखें. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अप्रूव्ड क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा इस्तेमाल न करें.

-क्रेडिट लिमिट बढ़ाएं: अगर पॉसिबल हो, तो क्रेडिट लिमिट बढ़ाने की कोशिश करें ताकि यूटिलाइजेशन रेशियो बेहतर हो.

-बैलेंस जल्दी चुकाएं: स्टेटमेंट डेट से पहले बैलेंस चुकाने की कोशिश करें ताकि रिपोर्ट होने वाला अमाउंट कम हो.

क्रेडिट रिपोर्ट में नेगेटिव मार्क्स को ठीक करें

अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में नेगेटिव मार्क्स हैं, जैसे मिस्ड पेमेंट्स या डिफॉल्ट्स, तो उन्हें जल्दी से जल्दी ठीक करना जरूरी है.

-क्रेडिट धीरे-धीरे रिबिल्ड करें: अच्छे क्रेडिट बिहेवियर्स पर फोकस करके नेगेटिव मार्क्स को धीरे-धीरे कम करें.

-गुडविल एडजस्टमेंट रिक्वेस्ट करें: अगर एक बार की वजह से पेमेंट मिस हुआ, तो क्रेडिटर से गुडविल एडजस्टमेंट के लिए रिक्वेस्ट करें.

-अकाउंट्स सेटल करें: डिफॉल्ट वाले अकाउंट्स के लिए सेटलमेंट की बात करें ताकि उन्हें ‘सेटल्ड’ या ‘पेड’ मार्क किया जाए. लेकिन ये सॉल्यूशन्स पूरी तरह लेंडर्स पर निर्भर करते हैं. .

क्रेडिट को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें

अच्छी क्रेडिट स्कोर हिस्ट्री को बेहतर करने और बनाए रखने के लिए पुरानी गलतियों को ठीक करने के साथ-साथ जिम्मेदार क्रेडिट आदतें अपनाना जरूरी है.

-क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स समझदारी से अप्लाई करें: बार-बार न्यू क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए अप्लाई करने से बचें, क्योंकि कई एप्लिकेशंस आपकी क्रेडिट स्कोर हिस्ट्री को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकती हैं.

-क्रेडिट मॉनिटर करें: अपनी क्रेडिट हेल्थ पर नजर रखने और प्रॉब्लम्स को जल्दी पकड़ने के लिए समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर चेक करें.

-खुद को एजुकेट करें: क्रेडिट मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज के बारे में जानकारी रखें ताकि स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर हिस्ट्री बनाए रख सकें.

पेमेंट हिस्ट्री को बेहतर करने के लिए डेडिकेशन और स्ट्रैटेजिक प्लानिंग चाहिए, लेकिन ये अच्छा क्रेडिट स्कोर पाने और बनाए रखने के लिए भी जरूरी है. अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को समझकर, समय पर बिल्स चुकाकर, डेट कम करके और क्रेडिट यूटिलाइजेशन को मैनेज करके आप अपनी क्रेडिट पेमेंट हिस्ट्री को सुधार सकते हैं. मनीकंट्रोल का फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट इस प्रोसेस में हेल्पफुल टूल्स हैं, जो आपको सही डिसीजन्स लेने और अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करने में मदद करते हैं.