Small Savings Scheme: सरकार ने नई तिमाही के लिए इंटरेस्ट रेट का ऐलान किया, जानिए अब कितना मिलेगा ब्याज

Small Savings Scheme: सरकार ने बुधवार को छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों पर बड़ा फैसला किया है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही में इन दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी PPF, NSC, KVP, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटिजन सेविंग्स पर अभी वाली ब्याज दर ही मिलेगी।

निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार कुछ योजनाओं की दरों में बदलाव कर सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जुलाई-सितंबर तिमाही में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। ये छोटी बचत योजनाएं कम जोखिम वाले निवेश के लिए पसंद की जाती हैं। सरकार इनकी ब्याज दर की हर तीन महीने में समीक्षा करती है।

अभी कितना ब्याज मिल रहा है?

PPF पर सालाना 7.1% ब्याज मिल रहा है। SCSS और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% ब्याज है। वहीं, NSC पर 7.7% ब्याज मिल रहा है। पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम पर 7.4% और किसान विकास पत्र पर 7.5% की कमाई होती है।

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट में 1 साल के लिए 6.9% का इंटरेस्ट रेट है। 2 साल के लिए 7% और 3 साल के लिए 7.1% ब्याज मिलता है। 5 साल की जमा पर 7.5% ब्याज है। वहीं, 5 साल के Post Office Recurring Deposit पर 6.7% इंटरेस्ट मिल रहा है।

ब्याज दर कैसे तय होती है?

सरकार हर तिमाही छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर की समीक्षा करती है। इन दरों का आधार Government Securities यानी G-Sec की यील्ड होती है।

अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग स्प्रेड तय होता है। इसलिए G-Sec की यील्ड में बदलाव होने पर छोटी बचत योजनाओं की दरों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार ही लेती है। हर तिमाही सरकार ब्याज दरों को नोटिफाई करती है।

आखिरी बार दर कब बदली थीं?

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बदलाव जनवरी-मार्च 2024 तिमाही के लिए हुआ था। दिसंबर 2023 में सरकार ने कुछ योजनाओं की दरें बढ़ाई थीं।

तब 3 साल की Post Office Time Deposit की ब्याज दर 7% से बढ़ाकर 7.1% की गई थी। Sukanya Samriddhi Yojana की दर भी 8% से बढ़ाकर 8.2% कर दी गई थी।

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SBI Safe Schemes: बिना कोई रिस्क के बैंक FD से ज्यादा रिटर्न! बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 बेस्ट स्कीम्स

SBI Safe Savings Schemes: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), अपने ग्राहकों को एफडी के अलावा ऐसी कई स्मॉल सेविंग्स और सरकारी बचत योजनाएं पेश करता है, जहां आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी सामान्य बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा मिलता है।

अगर आप शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर गारंटीड और टैक्स-फ्री या टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो एसबीआई के जरिए मिलने वाली ये 3 सरकारी योजनाएं बेहतरीन विकल्प हैं। आइए जानते हैं इन 3 सबसे सेफ स्कीम्स की ब्याज दरों, शर्तों और मिलने वाले फायदों के बारे में।

1. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SBI SCSS): वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सहारा

अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे अधिक है, तो साधारण एफडी कराने के बजाय एसबीआई के जरिए सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम(SCSS) में निवेश करना एक बेहतरीन विकल्प है।

एफडी से ज्यादा ब्याज: जहां एसबीआई सामान्य 5-वर्षीय एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को करीब 7.05% ब्याज दर देता है, वहीं SCSS में 8.20% की गारंटीड ब्याज दर मिलती है।

तिमाही आय: इसमें जमा राशि पर हर 3 महीने (अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी) में ब्याज का भुगतान सीधे आपके एसबीआई बचत खाते में कर दिया जाता है।

अधिकतम निवेश: इस योजना में अधिकतम ₹30 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत इसमें किए गए निवेश पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट भी मिलती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना (SBI SSY): बेटियों के भविष्य के लिए 100% टैक्स-फ्री रिटर्न

अगर आपके घर में 10 वर्ष से कम उम्र की बेटी है, तो एसबीआई शाखा या YONO ऐप के जरिए खोला गया सुकन्या समृद्धि अकाउंट बैंक एफडी के मुकाबले कहीं बेहतर रिटर्न देता है।

धमाकेदार रिटर्न: वर्तमान में इस योजना पर सरकार 8.20% सालाना की दर से चक्रवृद्धि ब्याज दे रही है।

EEE टैक्स स्टेटस: यह योजना Exempt-Exempt-Exempt (EEE) श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि इसमें जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होती है।

निवेश की सीमा: एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम ₹250 से लेकर अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (SBI PPF): बिना किसी रिस्क के लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन

लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स या रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड(PPF) देश की सबसे पसंदीदा और सुरक्षित योजनाओं में से एक है।

सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न: इसमें मिलने वाला 7.10% सालाना ब्याज (जो कि सालाना आधार पर कंपाउंड होता है) सामान्य 5 से 10 साल की बैंक एफडी (6.05% – 6.45%) से काफी बेहतर है।

टैक्स फ्री मैच्योरिटी: सुकन्या योजना की तरह PPF भी पूरी तरह से EEE कैटेगरी में आता है, यानी इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट पूरी तरह से इनकम टैक्स से मुक्त होता है।

फ्लेक्सिबिलिटी: इसे 15 साल की लॉक-इन अवधि के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में जितनी बार चाहें आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें न्यूनतम ₹500 से निवेश शुरू किया जा सकता है।

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एसबीआई में कैसे करें इन स्कीम्स में अप्लाई?

इन तीनों ही योजनाओं में निवेश करना बेहद आसान है:

ऑनलाइन माध्यम: अगर आप SBI के इंटरनेट बैंकिंग या YONO SBI ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो बिना ब्रांच गए ‘E-Services / Govt Schemes’ सेक्शन में जाकर PPF या सुकन्या खाता खोल सकते हैं।

ऑफलाइन माध्यम: आप अपनी नजदीकी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और आवश्यक न्यूनतम राशि के साथ जाकर तुरंत खाता खुलवा सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

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नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPF Investment: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? समझिए पूरा हिसाब

EPF Investment: रिटायरमेंट के समय EPF में 50 लाख रुपये जमा हैं तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां रखा जाए। असली सवाल यह है कि इस रकम से हर महीने खर्च कैसे चले और पैसा जल्दी खत्म भी न हो।

रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है। इसलिए EPF की रकम को अलग-अलग निवेश में बांटकर नियमित इनकम और लंबी अवधि की ग्रोथ का संतुलन बनाया जा सकता है।

50 लाख रुपये को कैसे बांटें?

Master Capital Services की वेल्थ मैनेजमेंट AVP आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में फिक्स्ड इनकम, डेट, इक्विटी और इमरजेंसी फंड का संतुलन रखा जा सकता है।

50 लाख रुपये के कॉर्पस का एक उदाहरण लें तो करीब 45% रकम यानी 22.50 लाख रुपये फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में रखी जा सकती है। 32.5% यानी 16.25 लाख रुपये डेट में और 17.5% यानी 8.75 लाख रुपये इक्विटी में रखे जा सकते हैं। बाकी 2.50 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के तौर पर रखे जा सकते हैं।

निवेशहिस्सारकम
फिक्स्ड इनकम45%₹22.50 लाख
डेट निवेश32.50%₹16.25 लाख
इक्विटी17.50%₹8.75 लाख
इमरजेंसी फंड5%₹2.50 लाख
कुल100%₹50 लाख

यह सिर्फ उदाहरण है। आप अपनी उम्र, मासिक खर्च, पेंशन और जोखिम क्षमता के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं।

फिक्स्ड इनकम से कितनी कमाई?

22.50 लाख रुपये का हिस्सा SCSS, बैंक FD जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों में रखा जा सकता है। अगर इस हिस्से पर करीब 7% सालाना ब्याज मिलता है, तो साल भर में लगभग 1.57 लाख रुपये की ब्याज आय बनती है।

यानी इस हिस्से से करीब 13,000 रुपये महीने की इनकम मिल सकती है।

डेट निवेश क्यों जरूरी है?

16.25 लाख रुपये डेट निवेश में रखने का मकसद पोर्टफोलियो को स्थिर रखना और जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना है। डेट म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

अगर इस हिस्से से लंबे समय में करीब 6.5% सालाना रिटर्न मिलता है, तो सालाना लगभग 1.06 लाख रुपये की ग्रोथ बन सकती है।

इक्विटी में भी रखें कुछ पैसा

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा सुरक्षित निवेश में रखने से महंगाई का असर बढ़ सकता है। इसलिए 50 लाख रुपये के इस उदाहरण में 8.75 लाख रुपये इक्विटी के लिए रखे गए हैं।

इस रकम को लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है। यहां मकसद हर साल ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं है। मकसद यह है कि लंबे समय में कॉर्पस पर महंगाई का असर कम हो। मान लीजिए इस हिस्से से लंबे समय में औसतन 10% रिटर्न मिलता है। तब साल भर में करीब 87,500 रुपये की ग्रोथ हो सकती है।

हर महीने कितनी रकम निकाल सकते हैं?

रिटायरमेंट में एक अहम सवाल यह है कि 50 लाख रुपये में से हर साल कितनी रकम निकाली जाए। स्वाति जैन के मुताबिक, 4 से 5% सालाना निकासी की रणनीति अपनाई जा सकती है।

50 लाख रुपये पर 4% की दर से सालाना करीब 2 लाख रुपये निकाले जा सकते हैं। यानी हर महीने लगभग 16,700 रुपये। अगर निकासी की दर 5% रखी जाए तो सालाना करीब 2.50 लाख रुपये निकलेंगे। इस हिसाब से मासिक रकम लगभग 20,800 रुपये होगी। इस तरह 50 लाख रुपये के कॉर्पस से करीब 16,700 से 20,800 रुपये महीने का शुरुआती कैश फ्लो बनाया जा सकता है।

1-2 साल का खर्च अलग रखें

रिटायरमेंट के बाद बाजार गिरने पर इक्विटी बेचकर खर्च निकालना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बचने के लिए कुछ रकम अलग रखना जरूरी है। मान लीजिए आपका मासिक खर्च 20,000 रुपये है। ऐसे में एक साल का खर्च 2.40 लाख रुपये होगा। दो साल के खर्च के लिए करीब 4.80 लाख रुपये अलग रखे जा सकते हैं।

इस रकम को ऐसे विकल्प में रखा जा सकता है जहां पैसा आसानी से उपलब्ध हो। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर रोजमर्रा के खर्च के लिए इक्विटी बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

EPF पर ही निर्भर क्यों न रहें?

EPF रिटायरमेंट के लिए बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद करता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जरूरत बदल जाती है। हर महीने सैलरी की जगह अब निवेश से कैश फ्लो चाहिए।

Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा के मुताबिक, 58 साल की उम्र के बाद EPF में नया योगदान बंद हो जाता है और बैलेंस पर ब्याज मिलने की भी तय सीमा है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद सिर्फ EPF पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग निवेशों से इनकम का इंतजाम करना जरूरी है।

Post Office FD: पोस्ट ऑफिस इस स्कीम में दे रहा 7.1% ब्याज! जानिए ₹3 लाख पर कमाई का गणित

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Price Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: सोमवार 21 सितंबर से शुरू हो रहे नए हफ्ते सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, इसके एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में हलचल पर बाजार की नजर रहेगी। इसके अलावा पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा भी सोने को प्रभावित करेगी।

मौद्रिक नीति और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम से भरे पिछले हफ्ते के बाद अब निवेशकों की नजर नए आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI के आंकड़े जारी होंगे।

हफ्ते के आखिर में अमेरिका के हाउसिंग डेटा, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े भी आएंगे। इनसे मौद्रिक नीति और सोने की मांग को लेकर बाजार को संकेत मिल सकते हैं।

MCX पर सोने-चांदी में तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले हफ्ते ₹1,597 यानी 1.04 फीसदी बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का भाव ₹6,629 यानी करीब 3 फीसदी बढ़कर ₹2.41 लाख प्रति किलो हो गया।

LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि MCX पर सोने की शुरुआत पिछले हफ्ते करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कमजोर रही। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से कीमतों में मजबूत रिकवरी हुई और सोना ₹1.54 लाख तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि बाजार में बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर काफी उतार-चढ़ाव रहा। अब कई अहम घटनाक्रम पीछे छूट चुके हैं। ऐसे में बाजार की नजर मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के अगले दौर पर रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला कॉमेक्स गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,424.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी करीब 3 फीसदी बढ़कर 67.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा कि सोने की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते सीमित दायरे में कारोबार हुआ। हालांकि, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में गिरावट के दौरान निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली। इससे सोना हफ्ते के अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ।

मेर के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कुछ बढ़त कम हुई। इसी दौरान हफ्ते के बीच तेल की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 कारोबारी हफ्तों से निवेशकों की सोने में दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है। दुनियाभर के गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ETF में लगातार निवेश इसका संकेत है।

चीन के फैसले पर भी नजर

चांदी की कीमतों ने भी इंडस्ट्रियल मेटल्स की चाल को फॉलो किया। शुरुआती गिरावट के बाद चांदी में रिकवरी हुई और हफ्ते का अंत मजबूत बढ़त के साथ हुआ।

मेर ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की अहम बैठकें अब खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में बाजार की नजर चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना पर रहेगी। बैंक सोमवार को अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान कर सकता है। बाजार को फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

FD vs SCSS: ₹10 लाख लगाने पर सालाना कितनी कमाई होगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

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FD vs SCSS: ₹10 लाख लगाने पर सालाना कितनी कमाई होगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

FD vs SCSS: रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सबसे बड़ी जरूरत होती है। सीनियर सिटिजन के लिए FD और SCSS दो मशहूर विकल्प हैं। दोनों में पैसा सुरक्षित रखने के साथ ब्याज से कमाई होती है। हालांकि, ब्याज दर और भुगतान के तरीके में अंतर है।

फिलहाल SCSS पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। वहीं, SBI की 5 साल तक की FD पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.05% ब्याज मिल रहा है। ये बैंक के हिसाब से अलग-अलग भी हो सकता है। ऐसे में ₹10 लाख के निवेश पर दोनों विकल्पों की कमाई में अंतर साफ नजर आता है।

SCSS में ₹10 लाख पर कितनी कमाई?

SCSS में ₹10 लाख लगाने पर 8.2% की दर से सालाना ₹82,000 ब्याज बनेगा। इसका भुगतान हर तिमाही किया जाता है। यानी हर तीन महीने में करीब ₹20,500 मिलेंगे।

इस तरह सालभर में कुल ब्याज ₹82,000 होगा। मूल निवेश ₹10 लाख बना रहेगा। SCSS की अवधि 5 साल है। इसे नियमों के तहत आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

FD में ₹10 लाख पर कितना ब्याज?

SBI की 5 साल तक की FD पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.05% ब्याज मिल रहा है। ₹10 लाख पर इस दर से सालाना ब्याज करीब ₹70,500 होगा।

यानी समान ₹10 लाख के निवेश पर SCSS की तुलना में FD से करीब ₹11,500 कम सालाना ब्याज मिलेगा। हालांकि, FD की दर बैंक और अवधि के हिसाब से अलग हो सकती है।

निवेशब्याज दर₹10 लाख पर सालाना ब्याजभुगतान
SCSS8.20%₹82,000तिमाही
SBI Senior Citizen FD7.05%₹70,500
बैंक के विकल्प के अनुसार

अंतर1.15%₹11,500SCSS में ज्यादा

टैक्स का भी रखें ध्यान

₹10 लाख के निवेश पर SCSS से सालाना ₹82,000 और SBI सीनियर सिटिजन FD से ₹70,500 ब्याज मिलेगा। अगर निवेशक 20% टैक्स स्लैब में है, तो 4% सेस सहित SCSS पर करीब ₹17,056 कटेगा। वहीं और FD पर करीब ₹14,664 टैक्स जाएगा। यानी टैक्स के बाद ब्याज SCSS में करीब ₹64,944 और FD में ₹55,836 रहेगा।

SCSS की ब्याज दर सरकार हर तिमाही तय करती है। इसलिए मौजूदा 8.2% की दर भविष्य में बदल सकती है। दूसरी ओर, FD की ब्याज दर भी बैंक और निवेश की अवधि के अनुसार बदलती रहती है।

₹10 लाख के निवेश में कौन कितना देगा?

मौजूदा दरों के आधार पर ₹10 लाख पर SCSS से सालाना ₹82,000 और SBI सीनियर सिटिजन FD से करीब ₹70,500 ब्याज बनता है। यानी अंतर ₹11,500 सालाना है।

हालांकि, सिर्फ ब्याज दर के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेश की अवधि, नियमित आय की जरूरत, लिक्विडिटी और टैक्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

SIP: मंथली सिप और डेली सिप में से किसमें निवेश करने पर होगी ज्यादा कमाई?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SIP Calculator: ₹3000 की मंथली SIP से कितना पैसा बनेगा? समझिए 10, 15 और 20 साल का पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर महीने ₹3,000 निवेश करना बहुत बड़ी रकम नहीं है। लेकिन लंबी अवधि में यही छोटी रकम बड़ा फंड बना सकती है। इसकी वजह कंपाउंडिंग है। समय जितना ज्यादा होगा, रिटर्न पर मिलने वाला रिटर्न भी उतना ही बढ़ता जाएगा।

मान लीजिए आप हर महीने ₹3,000 की SIP शुरू करते हैं। हम यहां दो अलग-अलग रिटर्न मानकर हिसाब समझ रहे हैं। पहला 12% सालाना। यह लंबी अवधि में बेंचमार्क माना जाता है। और दूसरा 15% सालाना, जो अगर फंड ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया, तो मिल सकता है। हालांकि, SIP का पैसा बाजार में लगता है, तो असल रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

एक नजर में SIP का पूरा हिसाब

अवधिकुल निवेश12% पर फंड15% पर फंड
10 साल₹3.60 लाख₹6.97 लाख₹8.36 लाख
15 साल₹5.40 लाख₹15.14 लाख₹20.31 लाख
20 साल₹7.20 लाख₹29.97 लाख₹45.48 लाख

10 साल में ₹8 लाख तक का फंड

अगर आप 10 साल तक हर महीने ₹3,000 निवेश करते हैं, तो आपकी कुल जेब से ₹3.60 लाख जाएंगे। 10 साल में कुल 120 किस्तें होंगी।

अगर औसत सालाना रिटर्न 12% रहा, तो आपका फंड करीब ₹6.97 लाख हो सकता है। यानी ₹3.60 लाख के निवेश पर करीब ₹3.37 लाख का रिटर्न मिलेगा।

वहीं, 15% सालाना रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹8.36 लाख तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में करीब ₹4.76 लाख रिटर्न से आएंगे।

15 साल में ₹20 लाख के करीब

अब यही SIP 15 साल तक जारी रखें। इस दौरान आप कुल ₹5.40 लाख निवेश करेंगे। यानी 180 महीनों तक ₹3,000 की किस्त जाएगी।

12% सालाना रिटर्न के हिसाब से आपका फंड करीब ₹15.14 लाख हो सकता है। इसमें आपका निवेश ₹5.40 लाख होगा। बाकी करीब ₹9.74 लाख कंपाउंडिंग से मिलने वाला रिटर्न होगा।

अगर रिटर्न 15% सालाना रहा, तो फंड करीब ₹20.31 लाख हो सकता है। यानी ₹5.40 लाख के निवेश पर करीब ₹14.91 लाख का रिटर्न बन सकता है।

20 साल में ₹45 लाख से ज्यादा

सबसे बड़ा फर्क 20 साल की अवधि में दिखाई देता है। 20 साल तक हर महीने ₹3,000 लगाने पर आपका कुल निवेश ₹7.20 लाख होगा। इस दौरान आप 240 SIP किस्तें जमा करेंगे।

12% सालाना रिटर्न के हिसाब से यह रकम बढ़कर करीब ₹29.97 लाख हो सकती है। यानी आपके ₹7.20 लाख के निवेश पर करीब ₹22.77 लाख का रिटर्न मिल सकता है।

वहीं, 15% सालाना रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.48 लाख तक पहुंच सकता है। इसमें करीब ₹38.28 लाख रिटर्न होगा।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजंस के लिए FD बेहतर या SCSS? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Price Today: त्योहारी सीजन से पहले सोना ₹650 सस्ता हुआ, चांदी सपाट रही

Gold Price Today: नए हफ्ते के पहले दिन सोने की कीमतों में गिरावट रही। दिल्ली में सोमवार को सोना 650 रुपये सस्ता हो गया। इसकी कीमत 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। कमजोर वैश्विक रुख का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना शुक्रवार को 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे सत्र में 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से सोने पर दबाव

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि सोने पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका के रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इससे सितंबर में Federal Reserve की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है।

अब बाजार की नजर इस हफ्ते आने वाले Producer Price Index यानी PPI और Consumer Price Index यानी CPI के आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।

महंगाई के आंकड़ों पर टिकी नजर

इस हफ्ते अमेरिका के महंगाई से जुड़े अहम आंकड़े आने हैं। इन पर बाजार की नजर रहेगी। इनसे Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर आगे का रुख साफ हो सकता है।

इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव से बुलियन बाजार का रुख बदल सकता है।

विदेशी बाजार में भी सोना गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में गिरावट रही। स्पॉट गोल्ड 35.03 डॉलर यानी करीब 1 फीसदी गिरकर 4,395.30 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी की कीमत भी 1 फीसदी गिरकर 65.64 डॉलर प्रति औंस रह गई।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट-कमोडिटीज सौमिल गांधी ने कहा कि सोमवार को कमजोर विदेशी संकेतों के चलते सोने की कीमत में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजंस के लिए FD बेहतर या SCSS? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Sugar Prices: त्योहारों से पहले चीनी के दाम में तेज उछाल, गुड़ और मिठाई भी महंगे हुए

Sugar Prices: भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। इसी बीच चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। मनीकंट्रोल के एनालिसिस के मुताबिक जुलाई में चीनी की कीमत मासिक आधार पर 2.7% बढ़ी। यह कुल खुदरा कीमतों में 0.9% की बढ़ोतरी से तीन गुना ज्यादा है।

इसका असर चीनी से जुड़े दूसरे सामान पर भी दिख रहा है। गुड़ और तैयार मिठाइयों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान घर का खाने-पीने का बजट और बढ़ सकता है। खासकर उस समय, जब चीनी और मिठाइयों की मांग आमतौर पर ज्यादा रहती है।

जुलाई में चीनी की महंगाई तेज हुई

जुलाई में चीनी की मासिक आधार पर महंगाई बढ़कर 2.73% हो गई। जून में यह 0.63% थी। मई में 0.44% थी। अप्रैल में चीनी के दाम सिर्फ 0.09% बढ़े थे। सालाना आधार पर भी चीनी की महंगाई तेज हुई है। जुलाई में चीनी पिछले साल के मुकाबले 4.92% महंगी रही। जून में यह बढ़ोतरी 2.17% थी। मई में 1.61% और अप्रैल में 1.45% थी।

जुलाई में चीनी की महंगाई कुल खुदरा महंगाई के 4.44% से भी ऊपर निकल गई। यानी साल के शुरुआती महीनों में जहां चीनी के दाम में बढ़ोतरी काफी सीमित थी, वहीं अब इसमें तेजी साफ दिख रही है।

चीनी 60 रुपये किलो के पार

आने वाले महीनों में चीनी के दाम पर दबाव और बढ़ सकता है। चीनी की कीमत 60 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गई है। जुलाई में यह करीब 48 रुपये किलो थी।

हालांकि, चीनी की फसल की बुवाई में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई है। 31 अगस्त तक बुवाई पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 0.5% कम थी।

गुड़ भी हुआ महंगा

महंगाई सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। गुड़ के दाम भी बढ़ रहे हैं। जुलाई में गुड़ की कीमत मासिक आधार पर 1.76% बढ़ी।

मई और जून में भी गुड़ के दाम करीब 1% बढ़े थे। सालाना आधार पर देखें तो जुलाई में गुड़ की महंगाई बढ़कर 6.28% हो गई। जून में यह 5.31% थी।

मिठाइयों के दाम भी लगातार बढ़े

तैयार गैर-दूध वाली मिठाइयों के दाम में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जुलाई में इनके दाम महीने-दर-महीने 0.63% बढ़े। इससे पहले जून में 0.82% और मई में 0.70% की बढ़ोतरी हुई थी।

इसके चलते जुलाई में तैयार मिठाइयों की सालाना महंगाई बढ़कर 6.08% हो गई। यह पिछले सात महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।

त्योहारों में बढ़ेगी चीनी और मिठाइयों की मांग

भारत अब नवरात्रि और दशहरा से शुरू होने वाले त्योहारों के दौर में पहुंच रहा है। इसके बाद दिवाली तक चीनी और मिठाइयों की मांग बढ़ती है। हालांकि, पिछले आंकड़े बताते हैं कि त्योहारों में मांग बढ़ने का मतलब हमेशा चीनी की महंगाई बढ़ना नहीं होता।

मनीकंट्रोल ने पिछले 10 त्योहारों के सीजन के आंकड़ों का एनालिसिस किया। इसमें सामने आया कि सिर्फ 2016, 2021 और 2022 में त्योहारों के दौरान चीनी की महंगाई पिछले तीन महीनों के मुकाबले बढ़ी थी। बाकी सात साल में त्योहारों के दौरान चीनी की महंगाई कम हुई थी।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजंस के लिए FD बेहतर या SCSS? समझिए पूरा कैलकुलेशन