Sugar Prices: त्योहारों से पहले चीनी के दाम में तेज उछाल, गुड़ और मिठाई भी महंगे हुए

Sugar Prices: भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। इसी बीच चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। मनीकंट्रोल के एनालिसिस के मुताबिक जुलाई में चीनी की कीमत मासिक आधार पर 2.7% बढ़ी। यह कुल खुदरा कीमतों में 0.9% की बढ़ोतरी से तीन गुना ज्यादा है।

इसका असर चीनी से जुड़े दूसरे सामान पर भी दिख रहा है। गुड़ और तैयार मिठाइयों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान घर का खाने-पीने का बजट और बढ़ सकता है। खासकर उस समय, जब चीनी और मिठाइयों की मांग आमतौर पर ज्यादा रहती है।

जुलाई में चीनी की महंगाई तेज हुई

जुलाई में चीनी की मासिक आधार पर महंगाई बढ़कर 2.73% हो गई। जून में यह 0.63% थी। मई में 0.44% थी। अप्रैल में चीनी के दाम सिर्फ 0.09% बढ़े थे। सालाना आधार पर भी चीनी की महंगाई तेज हुई है। जुलाई में चीनी पिछले साल के मुकाबले 4.92% महंगी रही। जून में यह बढ़ोतरी 2.17% थी। मई में 1.61% और अप्रैल में 1.45% थी।

जुलाई में चीनी की महंगाई कुल खुदरा महंगाई के 4.44% से भी ऊपर निकल गई। यानी साल के शुरुआती महीनों में जहां चीनी के दाम में बढ़ोतरी काफी सीमित थी, वहीं अब इसमें तेजी साफ दिख रही है।

चीनी 60 रुपये किलो के पार

आने वाले महीनों में चीनी के दाम पर दबाव और बढ़ सकता है। चीनी की कीमत 60 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गई है। जुलाई में यह करीब 48 रुपये किलो थी।

हालांकि, चीनी की फसल की बुवाई में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई है। 31 अगस्त तक बुवाई पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 0.5% कम थी।

गुड़ भी हुआ महंगा

महंगाई सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। गुड़ के दाम भी बढ़ रहे हैं। जुलाई में गुड़ की कीमत मासिक आधार पर 1.76% बढ़ी।

मई और जून में भी गुड़ के दाम करीब 1% बढ़े थे। सालाना आधार पर देखें तो जुलाई में गुड़ की महंगाई बढ़कर 6.28% हो गई। जून में यह 5.31% थी।

मिठाइयों के दाम भी लगातार बढ़े

तैयार गैर-दूध वाली मिठाइयों के दाम में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जुलाई में इनके दाम महीने-दर-महीने 0.63% बढ़े। इससे पहले जून में 0.82% और मई में 0.70% की बढ़ोतरी हुई थी।

इसके चलते जुलाई में तैयार मिठाइयों की सालाना महंगाई बढ़कर 6.08% हो गई। यह पिछले सात महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।

त्योहारों में बढ़ेगी चीनी और मिठाइयों की मांग

भारत अब नवरात्रि और दशहरा से शुरू होने वाले त्योहारों के दौर में पहुंच रहा है। इसके बाद दिवाली तक चीनी और मिठाइयों की मांग बढ़ती है। हालांकि, पिछले आंकड़े बताते हैं कि त्योहारों में मांग बढ़ने का मतलब हमेशा चीनी की महंगाई बढ़ना नहीं होता।

मनीकंट्रोल ने पिछले 10 त्योहारों के सीजन के आंकड़ों का एनालिसिस किया। इसमें सामने आया कि सिर्फ 2016, 2021 और 2022 में त्योहारों के दौरान चीनी की महंगाई पिछले तीन महीनों के मुकाबले बढ़ी थी। बाकी सात साल में त्योहारों के दौरान चीनी की महंगाई कम हुई थी।

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क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? सरकार ने गिनाई 5 वजहें और त्योहारों से पहले लिया यह बड़ा फैसला

Sugar Price Rise: देश में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले चीनी की कीमतें रॉकेट हुई जा रही हैं। 20 जुलाई को चीनी का भाव 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम था जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। चीनी की कीमतों को लेकर पैनिक की स्थिति न आए, इसके लिए अब सरकार ने इसे लेकर डिटेल में जानकारी जारी की है। इसमें चीनी की बढ़ती कीमतों की असल वजहें और इसे कंट्रोल करने के उपायों के बारे में बताया गया है। आपको बता दें कि सरकार ने एक दशक के बाद पहली बार चीनी के आयात का भी फैसला लिया है, जिसे इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी रिलीज के मुताबिक सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों को उचिद दर पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या एथेनॉल की वजह से बढ़ीं कीमतें? सरकार ने खारिज किया दावा

सरकार ने उन दावों को पूरी तरह से गलत बताया है जिनमें चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को माना जा रहा था। सरकार का दावा है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गया है। देश में बनाए जा रहे एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाजों, खासकर मक्के से तैयार किया जा रहा है।

फिर चीनी महंगी होने की असली वजह क्या है?

सरकार के मुताबिक चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी किसी एक वजह से नहीं हो रही है। इसके पीछे कई वजहें एक साथ जिम्मेदार हैं। सरकार ने बताया है कि शुरुआती अनुमानों की तुलना में घरेलू उत्पादन कम रहा है। त्योहारों का सीजन नजदीक आने से बाजार में मांग बढ़ी है। इसके अलावा मौसम की मार की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। चौथी वजह इंटरनेशनल बाजार में चीनी सप्लाई में कमी को बताया गया है। पांचवीं वजह में सरकार ने माना है कि कुछ तबकों द्वारा चीनी की जमाखोरी भी की गई है।

शुरुआती अनुमानों से कम रहा चीनी का उत्पादन

चालू पेराई सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा शुरुआत में इसके 343 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया गया था। उत्पादन में इस गिरावट की मुख्य वजह गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों का लगना और भारी बारिश से हुए जलजमाव को बताया जा रहा है। हालांकि उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

दुनिया भर में बढ़ रहे हैं चीनी के दाम

चीनी की किल्लत सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि फिलहाल यह एक वैश्विक समस्या है। वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक चीनी घाटा लगभग 33 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। मौसम की विपरीत परिस्थितियों ने इसे ग्लोबली प्रभावित किया है। इंटरनेशनल बाजार में चीनी की कीमतें 30 जून को $474 प्रति टन थीं, जो 20 अगस्त 2026 तक 16% से अधिक बढ़कर $552 प्रति टन पर पहुंच गईं।

एथेनॉल प्रोग्राम से किसानों और मिलों को हुआ फायदा

भारत में आमतौर पर सालाना 320-340 लाख मीट्रिक टम चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत 280-290 लाख मीट्रिक के आसपास रहती है। सरप्लस उत्पादन वाले वर्षों में अतिरिक्त स्टॉक के कारण चीनी मिलों के फंड फंस जाते थे जिससे किसानों के गन्ने के भुगतान में देरी होती थी। ऐसे में एक्स्ट्रा चीनी को एथेनॉल में बदलने की पॉलिसी फायदा मिला है। इससे मिलों की फाइनेंशियल स्थिति में भी सुधार आया है। 20 अगस्त तक, 2025-26 चीनी सीजन के गन्ने के 97% बकाए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।

इसकी वजह से मिलों की सरकारी मदद पर निर्भरता भी घटी है। 2014 से 2021 के बीच चीनी उद्योग को लगभग ₹14600 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी जबकि 2021-22 के बाद से ऐसी किसी सब्सिडी की घोषणा नहीं की गई है। साथ ही, लंबी अवधि में उपभोक्ताओं के लिए कीमतें स्थिर रही हैं और अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच इनमें सालाना सिर्फ 3% की ही वृद्धि हुई है।

जमाखोरी पर नकेल और त्योहारों से पहले सरकार के 5 बड़े फैसले

बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी पर रोक लगाने तथा आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। देशभर में चीनी व्यापारियों/डीलेरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। 1 सितंबर से बल्क कंज्यूमर्स को अपनी 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। जमाखोरी और आर्टिफिशियल किल्लत को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें मिलों में चीनी के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही हैं। एहतियाती तौर पर घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला लिया है।

इसके अलावा राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इससे त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी।

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