सोना खरीदने वालों के लिए राहत! अब कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी? जानिए 5 बड़े कारण

Gold Price Outlook: सोने में हालिया गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी जरूर आई है। लेकिन 2026 में जनवरी जैसा रिकॉर्ड हाई दोबारा देखने को मिले, इसकी संभावना फिलहाल कम दिख रही है। Fitch Solutions की रिसर्च यूनिट BMI ने 2026 के लिए सोने के औसत भाव का अनुमान 4,600 डॉलर से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 4026 डॉलर के आसपास है। इस हिसाब से गोल्ड में करीब ज्यादा से ज्यादा 9% उछाल का अनुमान है। रिपोर्ट का कहना है कि मजबूत डॉलर, कम होते वैश्विक तनाव और बेहतर होती अर्थव्यवस्था की वजह से सोने पर दबाव बना रह सकता है।

मजबूत डॉलर से सोना महंगा पड़ता है

जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग पर असर पड़ता है।

BMI का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स 98 से 102 के बीच रह सकता है। अगर यह बढ़कर 105 से 110 तक पहुंचा, तो सोने की तेजी पर ब्रेक लग सकता है।

ब्याज दरें घटने की उम्मीद कम

सोना ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर ज्यादा जाते हैं।

BMI का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve 2026 के बाकी समय में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। दरें 3.75% पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में सोने की मांग पर दबाव रह सकता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था संभल रही है

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक कारोबार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।

जब अर्थव्यवस्था बेहतर होती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश छोड़कर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ बढ़ते हैं। BMI ने 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2.4% रहने का अनुमान लगाया है।

कम होते वैश्विक तनाव का भी असर

पिछले एक साल में सोने की तेजी की बड़ी वजह वैश्विक तनाव रहे थे। लेकिन अब हालात पहले से कुछ शांत दिख रहे हैं।

BMI का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से सोने को मिलने वाला ‘सेफ हेवन’ सपोर्ट भी कमजोर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है, तो सोने की मांग और घट सकती है।

महंगाई कम रही, तो मांग भी घट सकती है

महंगाई बढ़ने पर लोग अक्सर सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन अगर महंगाई काबू में रहती है, तो सोने की मांग भी कम हो सकती है।

BMI का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव घट रहा है। अगर आगे भी यही स्थिति रही, तो सोने को मिलने वाला एक और बड़ा सहारा कमजोर पड़ सकता है।

क्या फिर भी सोना टूट जाएगा?

BMI ऐसा नहीं मानता। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। इससे कीमतों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

हालांकि, अगर भविष्य में Federal Reserve ब्याज दरें घटाता है या डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोना फिर 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर जा सकता है। वहीं, अगर डॉलर और मजबूत हुआ या बॉन्ड यील्ड बढ़ी, तो कीमतें 3,500 डॉलर प्रति औंस तक भी आ सकती हैं।

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Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में घटेंगे या बढ़ेंगे सोने के दाम? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने बताए बड़े ट्रिगर

Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में सोने की चाल कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे अहम हैं भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरें और निवेशकों का रुख। यह बात वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट में कही है।

इस साल की पहली छमाही सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाली रही। जनवरी के आखिर में सोना 5,405 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद जून में कीमत गिरकर 4,002 डॉलर प्रति औंस तक आ गई। यानी रिकॉर्ड हाई से 26% की गिरावट। इसके बावजूद पिछले एक साल में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स में शामिल है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बढ़ा है और वोलैटिलिटी 30% तक पहुंच गई है।

सबसे बड़ा असर किसका रहा?

WGC का कहना है कि पहली छमाही में अमेरिका-ईरान तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने सोने को सबसे ज्यादा सपोर्ट दिया। इसके अलावा निवेशकों की खरीद-बिक्री और मुनाफावसूली का भी असर दिखा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में सबसे ज्यादा हलचल एशिया और अमेरिका के ट्रेडिंग घंटों के दौरान हुई। इससे साफ है कि अब एशियाई निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

WGC का मानना है कि मौजूदा कीमतें इस उम्मीद को दिखाती हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल अक्टूबर तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है। इसके अलावा Bank of England, Bank of Japan और European Central Bank भी सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो साल के आखिर तक सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है। इसमें करीब 5% ऊपर या नीचे का उतार-चढ़ाव संभव है।

किन वजहों से बढ़ सकती हैं कीमतें?

अगर दुनिया में तनाव बढ़ता है, अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या ब्याज दरों को लेकर बाजार की सोच बदलती है, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है। हालांकि 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ी सुस्ती जैसी स्थिति बननी होगी।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा बढ़ती हैं और निवेशक शेयर जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ लौटते हैं, तो सोने पर दबाव बन सकता है।

WGC का कहना है कि अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। लेकिन इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद केंद्रीय बैंक, बड़े निवेशक और आम खरीदार फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं। इससे कीमतों को सहारा मिल सकता है।

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Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।